Saturday, 01 Aug 2026 | 01:39 PM

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जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

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X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव   Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

क्रिकेट खेलते-खेलते 3 दोस्तों ने साफ कर दी नदी:पॉकेट मनी से ग्लव्स-जूते खरीदे, लोग मजाक उड़ाते तो भी जुटे रहते, अब देश–दुनिया में चर्चा

भोपाल से 119 किलोमीटर दूर ब्यावरा के 3 दोस्तों की इन दिनों देश-दुनिया में चर्चा है। 20 और 18-18 साल के तीनों दोस्त एक ही मोहल्ले में रहते हैं। 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर, जब लोग ध्वजारोहण के बाद राष्ट्रगान कर रहे थे, तब इन्होंने अजनार नदी की सफाई का संकल्प लिया। तीनों को तैरना नहीं आता, फिर भी नदी में उतर गए। रोजमर्रा के काम की रील बनाकर अपलोड करने लगे। लोग ट्रोल करते और मजाक बनाते रहे, लेकिन ये हर दिन क्रिकेट खेलने का कहकर निकलते और नदी से गंदगी निकालते रहे। फरवरी-मार्च में परीक्षा के दौरान भी ये रोज सफाई करते रहे। नदी के एक घाट पर, जहां पहले कचरे का पहाड़ था, वहां अब इन्होंने पुताई कर दी है। वहां लोग घूमने आने लगे हैं। बीते दिनों मशहूर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने इनके काम को सराहा, तो देश-दुनिया की नजर इन पर पड़ी। कुछ लोगों ने कहा कि ये सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए ऐसा कर रहे हैं। दैनिक भास्कर ब्यावरा पहुंचा और असली तस्वीर समझी। बिट्टू ने दिया नदी सफाई का आइडिया भास्कर की टीम जब ब्यावरा पहुंची तो तीनों दोस्त एक स्कूटी पर सवार होकर नदी के घाट जाने की तैयारी कर रहे थे। अब ये शहर में फेमस चेहरे हो गए हैं। सबसे मुख्य किरदार है बिट्‌टू तबाही उर्फ सुरेंद्र चौधरी। दो अन्य किरदार हैं कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल। बातचीत की शुरूआत करते हुए कृष्णा ने बताया कि ये आयडिया बिट्‌टू का था। 26 जनवरी को बिट्‌टू ने कहा कि क्यों न हम कुछ ऐसा करें कि लोगों को लगे कि हमने कुछ बदलाव लाया है। हम यहां क्रिकेट खेलने आते थे। कई बार घाट पर बैठने का मन करता था लेकिन इतनी गंदगी होती थी कि बैठ नहीं पाते थे। उसके बाद से हम लोग अबतक 3 घाटों की सफाई कर चुके हैं। लोग मजाक उड़ाते थे लेकिन हम जुटे रहे कृष्णा की बात को आगे बढ़ाते हुए बिट्टू ने कहा कि हमने नदी सफाई की बात सोच तो ली, लेकिन दिक्कत ये थी हम तीनों को तैरना नहीं आता था। फिर भी हम पीछे नहीं हटे। हमने ग्लव्स, जूते और एक जाल का इंतजाम किया। फिर कचरा खींचने के लिए एक टूल बनवाया। 26 जनवरी के बाद एक दिन ऐसा नहीं गुजरा कि हम घाट पर न आएं हों। एक बार नदी में काम करते हुए मेरे पैरों पर सांप आ गया था। मेरे दोस्त कृष्णा ने मुझे बताया। वो तो अच्छा हुआ कि मैं बड़े जूते पहना हुआ था। पैसों का इंतजाम कैसे करते हो? इस सवाल पर बिट्टू ने कहा कि पॉकेट मनी को बचाकर अपने लिए हाथ में पहनने वाले दस्ताने, जूते और जाल खरीदते हैं। कई बार सोशल मीडिया पर भी हमें थोड़ी मदद मिली है। अब तक हम सफाई में अपने करीब 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। हमें जब कोई काम करना है तो हम 15 दिन से उसके लिए पैसे जोड़ते हैं। ड्रम, पेंट और बाकी टूल पर अब तक 30 हजार रुपए खर्च कर चुके हैं। स्किन इंफेक्शन हुआ, कई बार बुखार भी आया गंदगी के कारण तीनों लड़कों को हाथ-पैरों में स्किन इंफेक्शन भी हो गया है। वे कहते हैं कि कई बार बुखार भी आ जाता है। हमें भी पता है कि ये सब गंदे पानी में ज्यादा समय तक रहने के कारण ही हो रहा है। लेकिन एक बार यदि हम इसे साफ करने में आगे बढ़ गए तो शहर के लिए ये बहुत बड़ा काम हो जाएगा। बिट्टू कहता है नदी से जो कचरा निकला है, वो हमने फेंका नहीं है। घाट के पास ही इसे दबाकर रखा है। हम चाहते हैं कि इस कचरे को रीसाइकिल करके कहीं इस्तेमाल किया जा सके। आजकल तो सड़क बनाने में भी प्लास्टिक कचरे का इस्तेमाल हो रहा है। परीक्षाओं के दौरान भी काम करते रहे बिट्‌टू के दूसरे साथी कृष्णा वर्मा और कृष्णा अग्रवाल दोनों बारहवीं क्लास में पढ़ रहे थे। फरवरी-मार्च में उनकी परीक्षाएं भी थीं। हमने पूछा परीक्षाओं के दौरान कैसे काम किया? तो जवाब मिला कि इस दौरान भी रोजाना शाम को घाट पर आते थे। एक भी दिन हम इस काम से गैरहाजिर नहीं रहे। घर वालों को भी कभी नहीं बताया। घर वाले जब भी पूछते तो यही कहते कि थोड़ा रिलेक्स होने के लिए खेलने जा रहे हैं। मां-पिता से कहकर निकलते-क्रिकेट खेलने जा रहे हैं बिट्‌टू और कृष्णा कहते हैं कि वो बीते दो ढाई महीने से नदी की सफाई के रील सोशल मीडिया अकाउंट्स पर अपलोड कर रहे हैं। लेकिन उनके माता–पिता सोशल मीडिया का उपयोग नहीं करते। उन्हें कभी ये पता नहीं लगा कि वे क्या करते हैं? हम तो घर से यही कहकर निकलते हैं कि हम क्रिकेट खेलने जा रहे हैं। हां, बीते कुछ दिनों से जब से महिंद्रा जी ने हमारे काम की सोशल मीडिया पर तारीफ की है, तब से कई लोग हमसे अच्छे से बात करते हैं। कलेक्टर ने भी हमें बुलाकर सम्मान किया। स्थानीय विधायक ने भी हमें बुलाया है। प्रशासन भी अब इन घाटों पर जेसीबी से कचरा हटवाने में जुट गया है। 15 नाले, पूरे शहर का सीवरेज और कचरा भी इसी नदी में ब्यावरा शहर के बीचों बीच से बहने वाली ये नदी प्लास्टिक कचरे से अटी पड़ी है। जहां नजर डालो वहीं से सीवरेज मिलता दिख रहा है। इन लड़कों ने बीते दो महीने में नदी के 3 घाटों पर तस्वीर बदलने की कोशिश की है। इन्होंने घाट की सीढ़ियों की सफाई करके यहां पुताई की। घाटों पर कचरा न फेंके के पोस्टर लगाए वहीं घाट पर कचरा फेंकने के लिए दो ड्रम रखे। तीनों दोस्त रोज ड्रम का कचरा खाली करते हैं, लोगों से कहते हैं कचरा बाहर न फेंके। इनकी कोशिश के बाद अब सरकारी अमला भी एक्टिव होता दिख रहा है। नगर पालिका ब्यावरा के सीएमओ इकरार अहमद अपनी टीम के साथ ऐसे ही एक घाट पर पहुंचे थे। अहमद कहते हैं कि अजनार नदी का उद्गम स्थल यहां से 15 किलोमीटर दूर है। पूरे शहर का सीवरेज और छोटे-बड़े नालों की गंदगी नदी में मिलती है। सीवरेज को इसमें मिलने से रोकने

गर्मी में गर्भवती महिलाएं इन बातों का रखें खास ख्याल! डाइटिशियन से जानें, क्या खाएं, क्या बचें और कैसे रहें स्वस्थ

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जमशेदपुर: गर्मी का मौसम शुरू होते ही आम लोगों के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं को अपने स्वास्थ्य का खास ख्याल रखने की जरूरत ज्यादा हो जाती है. इस दौरान शरीर में कई तरह के बदलाव होते हैं, जिससे डिहाइड्रेशन, कमजोरी और थकान जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. ऐसे में सही खान-पान और दिनचर्या बेहद जरूरी हो जाती है. आइये जानते हैं गर्भवती महिलाएं ऐसे में क्या करें. जमशेदपुर की डाइटिशियन बीवा रंजन ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान गर्मी में एक बार में ज्यादा खाना खाने के बजाय थोड़े-थोड़े अंतराल पर भोजन करना ज्यादा फायदेमंद होता है. हर 2 से 3 घंटे में हल्का भोजन लेने से पेट पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ता और शरीर को लगातार ऊर्जा मिलती रहती है. हाइड्रेशन का रखें खास ध्यान गर्मी में सबसे बड़ी समस्या पानी की कमी होती है. इसलिए दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है. इसके अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ताजे फलों का जूस जैसे तरबूज का जूस शरीर को ठंडा और हाइड्रेटेड रखने में मदद करता है. सुबह का नाश्ता हो हल्का और पौष्टिक सुबह के समय फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है. तरबूज, खरबूजा, सेब, केला जैसे फल शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स देते हैं. साथ ही आप हल्का दलिया, ओट्स या दूध भी ले सकती हैं. दोपहर का भोजन संतुलित रखें दोपहर में रोटी, चावल और दाल का संतुलित सेवन करें. इसके साथ हरी सब्जियां और सलाद जरूर शामिल करें. सलाद में खीरा, टमाटर, गाजर जैसी चीजें शरीर को ठंडक देती हैं और पाचन को बेहतर बनाती हैं. शाम के समय हेल्दी स्नैक्स लें शाम को भारी तली-भुनी चीजों से बचें. इसके बजाय सॉटेड पनीर, चना (चिकपी) सलाद या स्प्राउट्स खा सकती हैं. ये प्रोटीन से भरपूर होते हैं और मां व बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हैं. रात का खाना हल्का रखें रात में हल्का भोजन जैसे खिचड़ी, दाल-चावल या हल्की सब्जी के साथ रोटी लेना बेहतर होता है. ज्यादा भारी खाना पचने में दिक्कत दे सकता है और नींद भी खराब कर सकता है. लाइफस्टाइल का भी रखें ध्यान गर्मी में ज्यादा मेहनत या हार्ड वर्क से बचना चाहिए. हल्की-फुल्की वॉक करना शरीर के लिए अच्छा रहता है. ढीले और आरामदायक कपड़े पहनें और तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. जानें क्या न करें बहुत ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और बाहर का खाना अवॉयड करें. कैफीन और ज्यादा मीठे पेय पदार्थ भी कम लें. अंत में गर्मी के मौसम में प्रेग्नेंट महिलाओं को संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और आरामदायक दिनचर्या अपनाकर खुद को स्वस्थ रखना चाहिए. इससे मां और बच्चे दोनों का स्वास्थ्य बेहतर बना रहता है.

Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai

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Hindi News National Breaking News LIVE Updates: Rajasthan, Delhi, MP, UP, Maharashtra, Mumbai 5 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु के कुन्नूर में एक मिनीबस 100 फीट गहरी खाई में गिर गई, जिससे 12 से ज्यादा लोग घायल हो गए। बताया जा रहा है कि बस नामक्कल से आ रही थी। इसमें सवार सभी लोग पर्यटक थे। आज की अन्य बड़ी खबरें… दिल्ली के एक फ्लैट में दो भाइयों के शव मिले, शरीर पर चोट या गला घोंटने के कोई निशान नहीं दिल्ली के द्वारका इलाके में शनिवार देर रात एक बिल्डिंग के अंदर दो लोगों के शव मिले। मरने वालों की पहचान देवेंद्र कुमार और अमित के रुप में की गई है। वे दोनों भाई हैं। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, दोनों की उम्र 40-45 साल के बीच है। शुरुआती जांच में शवों पर चोट या गला घोंटने के कोई निशान नहीं मिले। मामले की जांच की जा रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड में तेज दर्द होना भी बांझपन का संकेत:25% महिलाओं में इन्फर्टिलिटी के पीछे एंडोमेट्रियोसिस; हर 10 में से एक महिला पीड़ित, लेकिन है अनजान

पीरियड के दौरान दर्द को अक्सर सामान्य मान लिया जाता है, लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि हर दर्द सामान्य नहीं होता। एंडोमेट्रियोसिस नाम की गंभीर बीमारी हर 10 में से एक किशोरी और महिला को प्रभावित कर रही है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं इससे अनजान हैं। यही वजह है कि इसकी पहचान 4 से 11 साल की देरी से होती है। चिंता की बात यह है कि आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में बांझपन का कारण यही बीमारी बन रही है। समय रहते पहचान न होने पर यह किडनी, आंत और प्रजनन क्षमता तक को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। प्रजनन एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रिया भावे चित्तावर के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस में गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। पीरियड के दौरान यह टिशु भी सक्रिय होता है, जिससे शरीर में सूजन, दर्द, चॉकलेट सिस्ट और एडहीजन बनने लगते हैं। धीरे-धीरे यह बीमारी गंभीर रूप लेकर अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकती है। राजधानी भोपाल से लेकर मध्यप्रदेश हो या देश से लेकर दुनिया हो, कहीं भी महिला इससे सुरक्षित नहीं हैं। केस स्टडी 1- दर्द से किडनी फेलियर तक 33 वर्षीय युवती को कई सालों से पीरियड के दौरान तेज दर्द होता था। वह इसे सामान्य समझकर दर्दनाशक दवाएं लेती रही और कभी जांच नहीं कराई। धीरे-धीरे दर्द बढ़ता गया, लेकिन उसने इसे नजरअंदाज किया। कुछ समय बाद पेट में सूजन और पेशाब में समस्या शुरू हुई। जांच में पता चला कि एंडोमेट्रियोसिस टिशु ट्यूमर जैसा बनकर यूटेरस ट्यूब पर दबाव डाल रहा है, जिससे किडनी पर असर पड़ा। हालत बिगड़ने पर दोनों किडनी फेल होने लगीं। डॉक्टरों ने बताया कि अगर समय पर जांच हो जाती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। केस स्टडी 2- आंतों तक पहुंचा रोग 39 वर्षीय महिला में एंडोमेट्रियोसिस लंबे समय तक अनदेखा रहा। बाद में यह टिशु आंतों तक फैल गया और गंभीर संक्रमण हो गया। डॉक्टरों को पहले आंत का प्रभावित हिस्सा हटाना पड़ा, फिर सर्जरी कर टिशु निकाला गया। यह केस दिखाता है कि बीमारी कितनी खतरनाक हो सकती है। केस स्टडी 3: बांझपन की वजह बना रोग एक 32 वर्षीय महिला कई सालों से गर्भधारण नहीं कर पा रही थी। जांच के दौरान एंडोमेट्रियोसिस सामने आया। डॉक्टरों के अनुसार, यही बीमारी उसकी इंफर्टिलिटी का कारण बनी थी। इस टिशु के कारण बॉडी का हार्मोनल बैलेंस बुरी तरह से प्रभावित होता है। जिससे बॉडी में एस्ट्रोजेन का लेवल कम हो जाता है। जो प्रेगनेंसी में समस्या पैदा करता है। 4 से 11 साल देरी से होती है पहचान यह बीमारी 4 से 11 साल की देरी से पकड़ में आती है, क्योंकि महिलाएं इसे सामान्य पीरियड दर्द समझ लेती हैं। डॉ. चित्तावर कहती हैं कि अगर दर्द इतना हो कि महिला रोजमर्रा के काम नहीं कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आईवीएफ के लिए आने वाली करीब 25 प्रतिशत महिलाओं में एंडोमेट्रियोसिस ही बांझपन का कारण बन रहा है। यह टिशु प्रजनन अंगों को प्रभावित कर गर्भधारण की क्षमता को धीरे-धीरे कम करता है। रोग का दो ही स्थितियों में पता चलता है- पीरियड के दर्द को ना समझें सामान्य एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण अक्सर सामान्य पीरियड दर्द से मिलते-जुलते होते हैं, यही कारण है कि महिलाएं इसे नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कुछ संकेत ऐसे हैं, जिन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है। सबसे प्रमुख लक्षण है पीरियड के दौरान असहनीय दर्द, जो दवा लेने के बाद ही कम हो। कई महिलाओं को पीरियड के पहले और बाद में भी लगातार दर्द बना रहता है। इसके अलावा दर्द के कारण दैनिक कार्य न कर पाना, भारी ब्लीडिंग, पेट में सूजन, उल्टी या मतली, लंबे समय तक पेल्विक दर्द और थकान भी इसके संकेत हो सकते हैं। इसलिए यह रोग खतरनाक एक्सपर्ट के अनुसार, सबसे गंभीर असर प्रजनन क्षमता पर पड़ता है। कई मामलों में यह बीमारी गर्भधारण को मुश्किल बना देती है। यदि समय रहते इलाज न किया जाए, तो यह किडनी, आंत और अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। WHO ने इस क्रॉनिक बीमारी की कैटेगरी में रखा विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस एक कॉमन लेकिन कम पहचानी जाने वाली बीमारी है। यह एक क्रॉनिक (दीर्घकालिक) कैटेगरी वाला रोग है, जिसमें गर्भाशय की लाइनिंग जैसा टिशु शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इस बीमारी का असर सिर्फ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई, नौकरी और रिश्तों पर भी पड़ता है। इसके बावजूद जागरूकता की कमी के कारण महिलाएं लंबे समय तक सही इलाज से वंचित रह जाती हैं। देर से पहचान सबसे बड़ा खतरा WHO का कहना है कि एंडोमेट्रियोसिस की पहचान में औसतन 4 से 12 साल की देरी होती है। इसकी मुख्य वजह यह है कि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। इसका स्थायी इलाज अभी उपलब्ध नहीं है, लेकिन दर्द निवारक दवाएं, हार्मोनल थेरेपी और जरूरत पड़ने पर सर्जरी से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। WHO सलाह देता है कि यदि दर्द दैनिक जीवन को प्रभावित कर रहा हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

MP Governor Stops Garland Fiasco; BJP MLAs Seated Outside baat khari hai

MP Governor Stops Garland Fiasco; BJP MLAs Seated Outside baat khari hai

मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। . नेता जी का गजब का ‘माला’ मैनेजमेंट आपने एक तीर से दो निशाने वाली कहावत सुनी होगी, लेकिन मंदसौर में एक नेता जी इससे एक कदम आगे निकल गए। उन्होंने एक माला से तीन स्वागत करने का कमाल कर दिया। हालांकि, इस दौरान राज्यपाल ने टोक दिया, जिससे उनकी फजीहत भी हो गई। हुआ यूं कि कर्नाटक के राज्यपाल थावरचंद गहलोत मंदसौर के पिपलिया मंडी पहुंचे थे, जहां एक नेता जी ने एक बहुत ही खूबसूरत और आकर्षक माला से उनका स्वागत किया। यह माला खास तौर पर इंदौर से मंगवाई गई थी। यहां तक तो सब ठीक था। राज्यपाल के एक दूसरे कार्यक्रम में भी उनका इसी माला से स्वागत किया गया। इस दौरान राज्यपाल ने माला को पहचान लिया। इस पर उन्होंने मंच पर टोकते हुए कहा – ये वही माला ले आए। ये इंदौर से आई हुई माला है। ये बहुत हरकत करते हो। इतना सब कुछ होने पर भी नेता जी नहीं रुके। उन्होंने इसी माला से एक अन्य कार्यक्रम में भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश कोषाध्यक्ष धीरज पाटीदार का भी स्वागत कर दिया। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अब नेता जी के माला मैनेजमेंट की जमकर चर्चा हो रही है। मंदसौर में एक नेता ने एक ही माला से कर्नाटक के राज्यपाल का दो बार स्वागत किया। कलेक्टर ने विधायक को कराया इंतजार कहने को तो मध्य प्रदेश में भाजपा की डबल इंजन की सरकार है, लेकिन हालत ये है कि भाजपा के जनप्रतिनिधियों को ही अधिकारी इंतजार करा रहे हैं। रतलाम में कुछ ऐसा ही नजारा दिखा, जहां आलोट से भाजपा विधायक चिंतामणि मालवीय किसानों की समस्याओं को लेकर कलेक्टर से मिलने आए थे, लेकिन कलेक्टर अपने केबिन में बैठी रहीं और विधायक बाहर सीढ़ियों पर बैठकर उनकी राह तकते रहे। इस दौरान विधायक यह कहते रहे कि अभी तो हम जिंदाबाद के नारे लगा रहे हैं। मुर्दाबाद के नारे भी लगा सकते हैं। इंतजार की हद होने पर उन्होंने यह भी कहा कि पांच मिनट में अधिकारी आ जाते हैं तो ठीक, नहीं तो इस आंदोलन को दूसरा स्वरूप देंगे। हालांकि, इस दौरान दूसरे अधिकारियों ने विधायक को अंदर बुलाया, लेकिन विधायक भी अड़ गए कि कलेक्टर को जनता के बीच आकर ही बात करना होगी। फिर काफी देर इंतजार कराने के बाद कलेक्टर हाथ जोड़कर बाहर आईं और विधायक से मिलीं। इसके बाद विधायक ने सबके सामने अपने विधानसभा क्षेत्र के किसानों की बात कलेक्टर के सामने रखी, जिस पर कलेक्टर ने समाधान का भरोसा दिया। अंततः कलेक्टर विधायक से मिलीं, लेकिन विधायक को उनका यह एटीट्यूड पसंद नहीं आया। खरी बात यह है कि यह पहला मौका नहीं है। अभी हाल ही में कलेक्टर के इसी तरह के रवैये से नाराज होकर जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपने पति के साथ मिलकर कलेक्टर के खिलाफ कलेक्ट्रेट में ही धरना दिया था। रतलाम में कलेक्टर से मिलने आए भाजपा विधायक बाहर सीढ़ियों पर ही बैठ गए। ड्यूटी के साथ मंच पर बैठकर डांस देखा मुरैना में पुलिसकर्मी मंच पर बैठकर डांस प्रोग्राम का आनंद लेते नजर आए। मामला जिले के सबलगढ़ की रामपुर कलां पंचायत का है, जहां कंस वध मेले का आयोजन किया गया था। इस प्रोग्राम में महिला डांसर्स ने फिल्मी गानों पर डांस किया। इस कार्यक्रम का जो वीडियो सामने आया है, उसमें रामपुर थाना प्रभारी एएसआई रामकुमार वर्मा और दीवान संतोष बाथम मंच पर बैठे नजर आ रहे हैं। इस दौरान गांव का सरपंच पुलिसकर्मियों पर रुपए घुमाकर डांसर को देता नजर आ रहा है। अब लोग इसे पुलिस सेवा आचरण के खिलाफ मान रहे हैं। लोगों का कहना है कि यह पुलिस की छवि धूमिल करने वाला कृत्य है। लोगों ने मंच पर मौजूद पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, इस मामले में एएसआई रामकुमार वर्मा ने कहा कि वे तो व्यवस्था बनाए रखने के लिए मंच पर चढ़े थे। उन्होंने कहा कि प्राचीन परंपरा के अनुसार कंस वध मेले में देर रात नौटंकी का आयोजन होता है, जिसे देखने सैकड़ों लोग आते हैं। ऐसे में मनचले युवकों को मंच पर चढ़ने से रोकने और डांसर के साथ किसी भी तरह का गलत व्यवहार न हो, इसी उद्देश्य से वे मंच पर चढ़े थे। मुरैना में सरपंच ने पुलिसकर्मी पर नोट घुमाकर मंच पर डांस कर रही डांसर को दे दिए। वाराणसी में सीएम का अलग अंदाज दिखा यूपी के वाराणसी में सीएम डॉ. मोहन यादव का अलग ही अंदाज देखने को मिला। वे पत्नी सीमा यादव के साथ यहां की फेमस राम भंडार की दुकान पर पहुंचे। उन्होंने दुकानदार से पूछा – क्या खिलाओगे? इस पर दुकानदार भी मुस्कुराने लगा। फिर सीएम ने कचौरी, जलेबी और लस्सी का ऑर्डर दिया। इसके बाद आम लोगों के साथ वहीं बैठकर नाश्ता किया। नाश्ता करने के बाद सीएम ने पर्स निकाला और खुद दुकानदार के पास जाकर उसका बिल भी चुकाया। सीएम मोहन यादव ने पत्नी सीमा यादव के साथ वाराणसी में एक दुकान पर नाश्ता किया। इनपुट सहयोग – शादाब चौधरी (मंदसौर), केके शर्मा (रतलाम), दुष्यंत सिकरवार (मुरैना) ये भी पढ़ें – सिंधिया ने सूंघाए गुलाब, फिर विधायक ने पैर छूकर लिया आशीर्वाद: काम के बदले केंद्रीय मंत्री ने रखी शर्त अशोक नगर में केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने चंदेरी से भाजपा विधायक जगन्नाथ सिंह रघुवंशी को गुलाब के फूल सूंघने को कहा। सिंधिया के कहने पर उन्होंने फूलों की खुशबू ली। फिर सिंधिया ने वही माला विधायक को पहना दी। इस सम्मान के बाद 78 साल के जगन्नाथ सिंह रघुवंशी ने 55 वर्षीय ज्योतिरादित्य सिंधिया के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। पूरी खबर पढ़ें

एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

एमपी में विधायकों को सजा के 5 चर्चित मामले:सिर्फ एक महिला विधायक की सदस्यता हुई थी समाप्त, दतिया MLA का केस भी कोर्ट पर निर्भर

दतिया सीट से कांग्रेस विधायक राजेन्द्र भारती को फर्जीवाडे़ के मामले में दिल्ली की राउज अवेन्यू कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया सीट रिक्त घोषित करने की सूचना चुनाव आयोग को भेजते हुए गजट नोटिफिकेशन भी कर दिया। अब राजेन्द्र भारती इस सजा और सदस्यता खत्म करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की तैयारी में हैं। सोमवार को उनकी याचिका सुप्रीम कोर्ट में दाखिल हो सकती है। मध्य प्रदेश में विधायकों को आपराधिक मामलों में सजा के ऐसे पांच प्रमुख मामले हैं जिनमें न्यायालय से विधायकों को सजा हुई, विधानसभा सचिवालय ने सीट रिक्त घोषित की लेकिन, उच्च अदालतों से कुछ विधायकों को राहत मिल गई तो उनकी विधायकी बच गई। लेकिन, एक विधायक की सदस्यता चली गई थी। 1. आशा रानी सिंह (विधायक,बिजावर) छतरपुर जिले के बिजावर सीट से भाजपा विधायक आशा रानी सिंह को 2011 में एक नौकरानी को आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में 10 साल की सजा सुनाई गई थी। उनके पति पर नौकरानी उनकी सजा के बाद विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता समाप्त की और सीट रिक्त घोषित की थी। भाजपा की पूर्व विधायक आशारानी सिंह को उनकी घरेलू सहायिका (तिजिया बाई) को प्रताड़ित करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया गया था। 10 साल की सजा के बाद गई थी विधायकी 31 जनवरी 2011 को छतरपुर की एक अदालत ने उन्हें आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। सजा के तुरंत बाद उनकी सदस्यता खतरे में आ गई थी, लेकिन उस समय ‘लिली थॉमस’ फैसला लागू नहीं था। हालांकि, जेल जाने के कारण और सजा की अवधि लंबी होने के कारण 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। आशारानी सिंह ने हाई कोर्ट में अपील की थी, लेकिन उन्हें सजा पर स्टे नहीं मिला, जिसके कारण उनकी सदस्यता नहीं बच सकी और 31 अक्टूबर 2013 को उनकी सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया था। 2. प्रहलाद लोधी (विधायक, पवई) भाजपा विधायक प्रहलाद लोधी का मामला मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय और न्यायपालिका के बीच खींचतान का एक बड़ा उदाहरण बना। 31 अक्टूबर 2019 को भोपाल की विशेष अदालत (एमपी-एमएलए कोर्ट) ने लोधी को साल 2014 के एक मामले में 2 साल की जेल और सजा सुनाई थी। उन पर आरोप था कि उन्होंने अवैध रेत उत्खनन पर कार्रवाई करने गए पवई के तत्कालीन तहसीलदार के साथ मारपीट की थी। कोर्ट से मिला स्टे तो बच गई सदस्यता विधानसभा सचिवालय ने इस सजा के आधार पर 2 नवंबर 2019 को उनकी सदस्यता रद्द करने की अधिसूचना जारी कर दी थी। इसके बाद प्रहलाद लोधी हाई कोर्ट पहुंचे और 7 नवंबर 2019 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने उनकी सजा पर स्टे दे दिया। इस स्टे के आधार पर काफी कानूनी विवाद हुआ, लेकिन अंततः सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप और हाई कोर्ट के आदेश के बाद उनकी सदस्यता बहाल हुई और वे विधायक बने रहे। कोर्ट से राहत मिलने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने तत्कालीन स्पीकर के फैसले पर सवाल उठाए थे सत्यमेव जयते! साथी विधायक प्रहलाद लोधी को सुप्रीम कोर्ट से भी राहत मिली है। स्पीकर ने विधायक को असंवैधानिक तरीके से अयोग्य घोषित किया था। प्रदेश सरकार ने घटिया हरकत की और एक महीने तक क्षेत्र की जनता को अपने जनप्रतिनिधि से वंचित रखने का महापाप किया। #MP_मांगे_जवाब— Shivraj Singh Chouhan (@ChouhanShivraj) December 6, 2019 3. खरगापुर विधायक का निर्वाचन हो गया था शून्य टीकमगढ़ जिले की खरगापुर विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक राहुल सिंह लोधी ने 2018 के विधानसभा चुनाव में जीत हासिल की थी। उनके खिलाफ कांग्रेस प्रत्याशी चंदा सिंह गौर ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चुनाव याचिका दायर की थी। याचिका में दो मुख्य आरोप लगाए गए थे। जिनमें, राहुल सिंह लोधी ने अपने नामांकन पत्र (एफिडेविट) में यह जानकारी छिपाई थी कि उनकी फर्म ‘आरआर कंस्ट्रक्शन’ का सरकार के साथ अनुबंध था, जो कि लाभ के पद के अंतर्गत आता है। उन्होनें चुनाव प्रचार के दौरान निर्धारित सीमाओं और नियमों का उल्लंघन किया गया था। हाई कोर्ट का फैसला और तारीख मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच के जस्टिस नमिन्द्रा सिंह ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए राहुल सिंह लोधी के 2018 के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। कोर्ट ने माना कि नामांकन पत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना ‘जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951’ की धारा 100 के तहत चुनाव रद्द करने का ठोस आधार है। विधानसभा सचिवालय की कार्रवाई हाई कोर्ट के आदेश की प्रति मिलने के बाद, नवंबर 2022 में मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने अधिसूचना जारी की। इसके तहत राहुल सिंह लोधी की सदस्यता समाप्त कर दी गई और खरगापुर विधानसभा सीट को रिक्त घोषित कर दिया गया। इसकी सूचना तत्काल चुनाव आयोग को भेजी गई थी। सुप्रीम कोर्ट से ‘स्टे’ और सदस्यता की बहाली विधानसभा से सदस्यता रद्द होने के तुरंत बाद राहुल सिंह लोधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। दिसंबर 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। सुप्रीम कोर्ट के स्टे के बाद उनकी सदस्यता बहाल तो हो गई, लेकिन कोर्ट ने उन पर कुछ शर्तें लगाई थीं। वे सदन की कार्यवाही में हिस्सा ले सकते थे, लेकिन अंतिम फैसला आने तक उन्हें वोट देने का अधिकार नहीं था और वे विधायक के रूप में मिलने वाले कुछ भत्तों के लिए भी पात्र नहीं थे। 4. मुकेश मल्होत्रा (विधायक, विजयपुर) विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा को मार्च 2026 में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर बेंच ने एक मामले में दोषी मानते हुए चुनाव को शून्य घोषित कर दिया था। उन पर आरोप था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र में अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाई थी। कोर्ट ने माना कि मतदाता को उम्मीदवार के आपराधिक इतिहास को जानने का अधिकार है और इसे छिपाना ‘भ्रष्ट आचरण’ की श्रेणी में आता है। राज्यसभा चुनाव में नहीं दे पाएंगे वोट, विधायकी बची रहेगी मुकेश मल्होत्रा ने एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर बैंच के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। जिसपर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राहत देते हुए उन्हें विधायक

Gujarat Primary Teacher Jobs & Punjab Sindh Bank Vacancies: 14,585 Hired This Week

Gujarat Primary Teacher Jobs & Punjab Sindh Bank Vacancies: 14,585 Hired This Week

Hindi News Career Gujarat Primary Teacher Jobs & Punjab Sindh Bank Vacancies: 14,585 Hired This Week 5 मिनट पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते देशभर के अलग-अलग विभागों में 14,585 पदों पर भर्तियां निकली हैं। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 5 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 5 ग्राफिक्स के जरिए जानिए: पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… आज की सरकारी नौकरी: गुजरात में 11,000 पदों का नोटिफिकेशन जारी, जामनगर डीसीसी बैंक में 104 वैकेंसी, बिहार में 173 भर्ती की लास्ट डेट एक्सटेंड जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: अग्निवीर MR म्यूजिशियन का नोटिफिकेशन जारी; ICAI ने 108 पदों पर निकाली भर्ती, GSSSB में स्टाफ नर्स की 90 वैकेंसी जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: UPSSSC लोअर PCS का नोटिफिकेशन जारी; पंजाब एंड सिंध बैंक में 1000 वैकेंसी, पटना हाईकोर्ट में 53 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर

बड़ा गणपति फ्लायओवर:वर्कऑर्डर के बाद भी यूटिलिटी लाइनें हटाने का काम अब तक शुरू नहीं, एक साल इसी में लग जाएगा

बड़ा गणपति फ्लायओवर:वर्कऑर्डर के बाद भी यूटिलिटी लाइनें हटाने का काम अब तक शुरू नहीं, एक साल इसी में लग जाएगा

बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लायओवर बनाने का मामला दो साल से चल रहा है। वर्कऑर्डर के बाद भी अब तक यूटिलिटी लाइनों की शिफ्टिंग का काम ही शुरू नहीं हुआ है। लाइनों की शिफ्टिंग में ही एक साल लग जाएगा। उसके बाद कहीं फ्लायओवर निर्माण शुरू हो सकेगा। बड़ा गणपति के साथ ही चंदन नगर ब्रिज की समीक्षा के लिए शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अफसरों की बैठक ली। मंत्री ने साफ कहा कि काम समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए, क्योंकि पुल को सिंहस्थ से पहले तैयार करना है। बड़ा गणपति फ्लायओवर को लेकर अफसरों ने कहा, ड्रेनेज और पानी की यूटिलिटी लाइनें चौराहे से गुजर रही हैं। इनमें एक लाइन अंतिम चौराहे की ओर से आ रही है। इन लाइनों को हटाकर नई लाइनें डालनी होंगी। 8 से 10 दिन में काम शुरू कर देंगे। पूरा काम अंडरग्राउंड तरीके से किया जाएगा। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अफसर मौजूद रहे। काम के दौरान ट्रैफिक की दिक्कत, वैकल्पिक मार्ग तैयार होंगे अफसरों ने बताया कि बड़ा गणपति चौराहे पर मेट्रो स्टेशन भी प्रस्तावित है। ऐसे में जब यहां ब्रिज और मेट्रो दोनों का काम चलेगा तो यातायात का दबाव काफी बढ़ेगा। इस पर पुलिस विभाग से वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि कहां से ज्यादा ट्रैफिक इस रास्ते पर आता है तो बताया गया कि रामबाग और किला मैदान की तरफ से आने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। इसके लिए जिंसी और कंडीलपुरा को वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा गया, लेकिन दोनों ही सड़कें अभी संकरी हैं। इस पर विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि पहले इन मार्गों को दुरुस्त किया जाए, ताकि निर्माण के दौरान शहर को ट्रैफिक परेशानी न झेलनी पड़े। सुस्त एजेंसियों पर सख्ती काम में देरी करने वाली निर्माण एजेंसियों का मुद्दा भी उठा। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने कहा सड़कें बनाने वाली एजेंसियां समय पर काम नहीं कर रही हैं। कई बार जवाब मिलता है कि लेबर नहीं मिल रही। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी माना कि कई बार निर्देश देने के बावजूद एजेंसियां समय सीमा में काम नहीं कर रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि सोमवार को सभी एजेंसियों को बुलाकर स्पष्ट बात करें और जवाबदेही तय करें। 1 एजेंसी के पास कई काम बैठक में बड़ा गणपति पर यूटिलिटी लाइन शिफ्टिंग का काम लेने वाली एजेंसी पर भी सवाल उठे। बैठक में कहा गया कि वरुण जैन की कंपनी ने इस काम के साथ कई अन्य प्रोजेक्ट भी ले रखे हैं, ऐसे में एक ही एजेंसी इतने काम समय पर पूरे नहीं कर पाएगी। एजेंसी की ओर से बैठक में मौजूद प्रतिनिधि ने दावा किया कि सभी काम तय समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। चंदन नगर फ्लायओवर : 8 दिन में जारी होगा टेंडर चंदन नगर फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। आईडीए की ओर से बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के टेंडर 8 दिन में जारी कर दिए जाएंगे। आईडीए सीईओ ने कहा कि अगले डेढ़ महीने में वर्क ऑर्डर और एक साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि यहां भी निगम की ड्रेनेज और पानी की लाइनें निर्माण में बाधा बन रही हैं। बैठक में चंदन नगर से नगीन नगर तक जाने वाली सड़क पर भी चर्चा हुई।