‘वंदे मातरम’ पर घमासान:पार्षद ने वंदे मातरम गाने से किया इंकार; आपत्ति ली तो बोलीं-एक्ट दिखाओ

नगर निगम के बजट सत्र में बुधवार को ‘वंदे मातरम’ पर घमासान हुआ। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम के वंदे मातरम गाने से साफ इनकार करने पर सदन ‘गद्दार’ और ‘गुंडागर्दी’ के नारों से गूंज उठा। इसी बवाल के बीच 8,455 करोड़ का बजट बिना किसी सार्थक चर्चा के पास हो गया और बैठक तय समय से ढाई घंटे पहले ही खत्म कर दी गई। भाजपा पार्षद सुरेश कुरवाड़े ने फौजिया पर वंदे मातरम से बचने के लिए देर से आने का तंज कसा। इस पर फौजिया ने दो-टूक कहा, मैं नहीं गाऊंगी, वो एक्ट दिखाओ जिसमें यह अनिवार्य है। भाजपा पार्षद महेश बसवाल, मनोज मिश्रा, योगेश गेंदर व रूपा पांडे ने इसे राष्ट्रगीत का अपमान बताते हुए कार्रवाई की मांग की। सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया को सदन से बाहर कर दिया। विवाद बढ़ाते हुए कांग्रेसी पार्षद रुबीना खान ने कहा, कुरान इसकी इजाजत नहीं देता। अमेरिका ने ईरान के खामेनेई को शहीद किया, तो वहां से तेल क्यों ले रहे हैं? सिर्फ मुस्लिमों को टारगेट किया जा रहा है। संविधान में धर्म पालन की छूट है। इस्लाम में वंदे मातरम नहीं बोल सकते। – फौजिया शेख, कांग्रेसी पार्षद जिस देश का अन्न-जल लेते हैं, उसका सम्मान न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। ईरान के नेता को श्रद्धांजलि देते हैं, लेकिन भारत माता की जय बोलने में पेट दर्द होता है। – पुष्यमित्र भार्गव, महापौर वंदे मातरम नहीं गाना है, वहां तक भी ठीक है, लेकिन ऐसे सदन में सार्वजनिक रूप से राष्ट्रगीत का अपमान कैसे कर सकते हैं कि नहीं गाऊंगी। – राजेन्द्र राठौर, एमआईसी सदस्य कांग्रेस की रग-रग में वंदे मातरम है। फौजिया के बयान से पार्टी का सरोकार नहीं। – चिंटू चौकसे, नेता प्रतिपक्ष
धुरंधर मूवी वाले SP असलम की पत्नी डायरेक्टर से नाराज:कहा– न बलूचों से दुश्मनी थी, न रहमान डकैत से डरे; आदित्य धर पर केस करेंगी

पाकिस्तान के ल्यारी पर बनी बॉलीवुड फिल्म धुरंधर में संजय दत्त ने पाकिस्तान के एक पुलिस ऑफिसर का रोल किया है। इस ऑफिसर का नाम चौधरी असलम है, जिन्हें पाकिस्तान का सुपरकॉप भी कहा जाता है। चौधरी असलम पाकिस्तान पुलिस में एसपी के पद पर तैनात थे। सिंध पुलिस में काम करते हुए उन्होंने 2009 में ल्यारी के सबसे खूंखार रहमान डकैत का भी एनकाउंटर किया था। करीब चार साल बाद कराची में विस्फोटकों से भरी एक कार उनके काफिले से टकरा गई थी। इसमें असलम के साथ दो अन्य पुलिस अधिकारियों, बॉडीगार्ड और ड्राइवर की मौत हो गई थी। उनके परिवार को आज भी धमकियां मिलती हैं। दैनिक भास्कर ने असलम चौधरी की पत्नी नौरीन चौधरी से फोन पर बातचीत की। नौरीन ने कहा- फिल्म डायरेक्टर आदित्य धर ने उनके पति के किरदार को फिल्माने से पहले उनकी परमिशन नहीं ली। मेरे पति न तो कभी रहमान डकैत से डरे, न ही बलूच विरोधी थे। उनके किरदार को गलत दिखाया गया है। इसके चलते उनके खिलाफ लीगल एक्शन लूंगी। आगे पढ़िए, नौरीन से हुई बातचीत के मुख्य अंश… फिल्म में पति का किरदार देखकर कैसा लगा? किरदार बहुत अच्छा है। संजय दत्त पर यह काफी फिट बैठता है। उन्होंने मेरे पति असलम चौधरी का किरदार बहुत अच्छी तरह निभाया है, लेकिन कहानी में कुछ बातें सही नहीं दिखाई गई हैं। किन चीजों को अलग तरीके से दिखाया गया है? असलम चौधरी का किरदार बहुत बड़ा है, लेकिन उसे उतना नहीं दिखाया गया है। उनका काम सिर्फ ल्यारी तक सीमित नहीं था। उन्होंने कराची में कई ऑपरेशन किए थे। जिन सभी मामलों में उन्हें गिरफ्तार किया गया, उन्होंने कभी भी अपनी फील्ड नहीं छोड़ी। ल्यारी असल में वैसा नहीं है, जैसा दिखाया गया है। ल्यारी कराची का एक छोटा सा इलाका है। फिल्म का कौन सा सीन असलम चौधरी की याद दिलाता है? तीन-चार सीन ऐसे थे, जब मुझे लगा कि असलम मेरे सामने हैं। लेकिन फिल्म के एक शॉट में जब बम धमाका हुआ, तो मैं आगे नहीं देख सकी। फिल्म में एक सीन गलत है, जिसमें वह बलूच बच्चों को पीटते हैं। फिल्म में दिखाया गया है कि असलम बलूचों के दुश्मन हैं, लेकिन असलियत में ऐसा नहीं था। वह सिर्फ अपराधियों के खिलाफ थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी बच्चों के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया। उनकी मौत किसी राजनीतिक साजिश का नतीजा थी? नहीं। वे कहते थे कि मैं गोली से नहीं, बम ब्लास्ट से मरूंगा—और वही हुआ। उन्होंने तालिबान के खिलाफ कई ऑपरेशन किए थे। तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान ने फोन करके कहा था कि चौधरी असलम हमारे रास्ते से हट जाओ। तालिबानियों को कराची में चौधरी से ही खतरा था। लेकिन मेरे पति ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने फोन पर उन लोगों को 20 मिनट तक खरी-खोटी सुनाई थी। चौधरी असलम अपनी पूरी जिंदगी रहमान डकैत से नहीं डरे। अगर वे डरते तो मैं आज अमेरिका या इंग्लैंड में रह रही होती। मैं फिलहाल पाकिस्तानी में ही रह रही हूं। रहमान डकैत के एनकाउंटर के बाद असलम ने घर आकर क्या कहा? एनकाउंटर से पहले उन्होंने कुछ लोगों का पता लगाया था। अपने प्लान को अंजाम देने वे चार-पांच दिन पहले घर से निकले थे। रहमान ईरान से आ रहा था। असलम ने उसे जंगल में 7 पुलिसकर्मियों के साथ घेर लिया था और उसका एनकाउंटर कर दिया। असलम 6 दिन बाद घर लौटे। वे बहुत खुश थे और मेरे पास आकर बोले- अल्लाह ने मेरी इज्जत बचा ली। चौधरी ने अपना काम पूरा कर लिया है। क्या आपको लगता है कि उनकी दाउद से भी बातचीत हुई थी? मैंने अपने जीवन में चौधरी असलम से दाउद का नाम कभी नहीं सुना। मुझसे पहले भी ऐसे सवाल पूछे गए हैं। उन्होंने मेरे सामने सिर्फ शोएब खान का नाम लिया था। वह कराची का डॉन था। लाहौर जाकर उसे असलम चौधरी ने ही पकड़ा था। वह जेल गया और हार्ट अटैक से उसकी मौत हो गई थी। मेरे पति ने कभी पैसे के लालच में किसी के सामने सिर नहीं झुकाया। नवाज शरीफ और परवेज मुशर्रफ भी उनके काम को जानते थे। उन्होंने सिंध के 300 गरीब परिवारों के घरों में कभी राशन की कमी नहीं होने दी। बलूचों के बारे में बोले एक डायलॉग से विवाद खड़ा हो गया था। सच्चाई क्या है? मेरे पति बलूच विरोधी नहीं थे। आज भी ल्यारी में कई लोग उनका सम्मान करते हैं। 200 बलूच महिलाएं उनकी पुण्यतिथि पर हमारे घरआई थीं। वे केवल अपराधियों के खिलाफ थे, उन्होंने कभी आम लोगों को परेशान नहीं किया। भले ही वे बलूच हों या नहीं। असलम चौधरी की मौत के समय का घटनाक्रम? मुझे मेरे चाचा के बेटे का फोन आया था। उसने कहा कि टीवी चालू कीजिए, बड़ी खबर आ रही है। जब मैंने टीवी पर देखा तो पता चला कि असलम को अस्पताल ले जाया गया है। इसलिए मैं तुरंत वहां पहुंची। उस दिन कराची में लगभग बंद जैसी स्थिति थी। पूरे शहर में अफरा-तफरी मची हुई थी। असलम का इंतकाल हो चुका था। एक बार सुबह करीब सात बजे मेरे घर पर भी 350 किलो विस्फोटक से ब्लास्ट किया गया था। उस समय मैं घर पर अकेली थी। मैंने पिछली रात करीब दो बजे चौधरी असलम को फोन किया था और कहा था कि आप समय पर घर आ जाइए। तब उन्होंने बताया था कि उन्हें सूचना मिली है कि अमेरिका या सऊदी की एम्बेसी पर बम ब्लास्ट हो सकता है, इसलिए वे पेट्रोलिंग पर हैं। लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि असल में बम तो हमारे ही घर पर फटने वाला है। सुबह 7 बजकर 28 मिनट पर मैं बच्चों के लिए नाश्ता बना रही थी। तभी हमारे घर के पास जोरदार धमाका हुआ था। जमीन में 30 फीट गहरा गड्ढा बन गया और नीचे से पानी का फव्वारा निकलने लगा था। इस धमाके में हमारे 3-4 गनमैन, एक पड़ोसी और एक टीचर की मौत हो गई थी। हमारे घर के आसपास हमेशा गाड़ियां खड़ी रहती थीं। धमाके के बाद गाड़ियां फिल्मी सीन की तरह हवा में उड़कर गिर गई थीं। यह ब्लास्ट किसने करवाया था? तहरीक-ए-तालिबान ने इस धमाके की जिम्मेदारी ली थी। क्या आदित्य
Lok Sabha Seats to 816, 273 Reserved for Women

Hindi News National Women Reservation Bill Passed: Lok Sabha Seats To 816, 273 Reserved For Women नई दिल्ली58 मिनट पहले कॉपी लिंक 20 सितंबर 2023: लोकसभा में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ पास होने पर PM मोदी ने महिला सांसदों के साथ फोटो खिंचवाई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी गई। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सरकार ने बजट सत्र को बढ़ाते हुए 16 से 18 अप्रैल तक संसद का विशेष सत्र बुलाया है, जिसमें इस संशोधन बिल को पारित किए जाने की संभावना है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से लागू होगा। उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों में पहली बार प्रभावी होगा। प्रस्ताव के मुताबिक आरक्षण ‘वर्टिकल’ आधार पर लागू होगा, यानी अनुसूचित जाति और जनजाति की आरक्षित सीटों में भी महिलाओं के लिए हिस्सा तय किया जाएगा। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। 1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिला आरक्षण पर पहली बार चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव अंततः खारिज कर दिया गया। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया। इसके कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की सिफारिश की 1988: राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। ————————– यह खबर भी पढ़ें… मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने का प्रस्ताव खारिज:लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष लेकर आया था महाभियोग प्रस्ताव, 193 सांसदों ने साइन किए थे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्णन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का महाभियोग प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस प्रस्ताव पर 12 मार्च को 193 विपक्षी सांसदों (लोकसभा के 130 और राज्यसभा के 63) ने साइन किए थे। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
सिर्फ सीटों से कहीं अधिक: बड़े दांव वाले आमना-सामना जो असम की राजनीतिक आत्मा को परिभाषित करेंगे | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:09 अप्रैल, 2026, 05:43 IST आज असम का नक्शा कई ‘प्रतिष्ठा की लड़ाइयों’ से भरा पड़ा है, जहां मार्जिन बेहद कम होने की उम्मीद है असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा (बाएं) और कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई। (फ़ाइल छवि: पीटीआई) जैसे ही असम में गुरुवार को मतदान होने जा रहा है, राजनीतिक माहौल ऐतिहासिक परिणाम की भावना से भर गया है। 25 मिलियन से अधिक मतदाता एक एकल, उच्च जोखिम वाले चरण में 126 निर्वाचन क्षेत्रों में अपने मत डालने के पात्र हैं। जहां सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का लक्ष्य मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में अपने एक दशक पुराने प्रभुत्व को मजबूत करना है, वहीं नव सक्रिय विपक्ष, कांग्रेस पार्टी के गौरव गोगोई के नेतृत्व वाला असम सोनमिलिटो मोर्चा अपने पारंपरिक गढ़ को फिर से हासिल करने के लिए लड़ रहा है। आज असम का नक्शा कई “प्रतिष्ठा की लड़ाइयों” से भरा पड़ा है, जहां मार्जिन बेहद कम होने की उम्मीद है। क्या जोरहाट की लड़ाई सबसे महत्वपूर्ण लड़ाई है? दिन की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली प्रतियोगिता निस्संदेह ऊपरी असम के जोरहाट में है। यह सीट बीजेपी के दिग्गज नेता हितेंद्र नाथ गोस्वामी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई के बीच बेहद प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है. गोगोई के लिए, यह चुनाव एक तरह से घर वापसी है और उस क्षेत्र में उनके परिवार की विरासत की परीक्षा है, जिस पर कभी उनके पिता, दिवंगत तरुण गोगोई का प्रभुत्व था। हालाँकि, भाजपा ने जोरहाट को बरकरार रखने के लिए अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत लगा दी है, और प्रतियोगिता को अपने “डबल-इंजन” विकास मॉडल और जिसे वे “वंशवादी राजनीति” कहते हैं, के बीच एक विकल्प के रूप में तैयार किया है। दोनों पक्ष जोरहाट को ऊपरी असम के चाय-बेल्ट में मूड के लिए बैरोमीटर के रूप में मान रहे हैं, यहां का परिणाम संभवतः संकेत देगा कि पूरे राज्य के लिए हवा किस तरफ बह रही है। क्या मुख्यमंत्री जालुकबारी में अपना किला बरकरार रख सकते हैं? निचले असम में, सभी की निगाहें जलुकबरी पर हैं, जो निर्वाचन क्षेत्र मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा का पर्याय बन गया है। 2001 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे सरमा का मुकाबला कांग्रेस की प्रतिद्वंद्वी बिदिशा निओग से है। जबकि सरमा एक ऐसे नेता के विश्वास के साथ मैदान में उतरे हैं, जिन्होंने असमिया राजनीति को मौलिक रूप से नया आकार दिया है, विपक्ष ने अपने अभियान को प्रशासनिक पारदर्शिता और समान नागरिक संहिता (यूसीसी) कथा के “अधूरे वादों” के मुद्दों पर केंद्रित किया है। प्रतियोगिता को “असम की आत्मा” की लड़ाई के रूप में चित्रित करने के विपक्ष के प्रयासों के बावजूद, जालुकबारी भाजपा के लिए एक दुर्जेय किला बना हुआ है। यहां सरमा का प्रदर्शन सिर्फ एक सीट के बारे में नहीं है; यह पूरे पूर्वोत्तर में एनडीए के विस्तार के प्राथमिक वास्तुकार के रूप में उनके अधिकार के बारे में है। नाज़िरा और शिवसागर में मुकाबला इतना महत्वपूर्ण क्यों है? राज्य के ऐतिहासिक हृदय की ओर बढ़ते हुए, नाज़िरा और शिवसागर में झड़पें हो रही हैं जो क्षेत्रीय राजनीतिक परिदृश्य को फिर से परिभाषित कर सकती हैं। नाज़िरा में, विपक्ष के नेता, देबब्रत सैकिया, भाजपा के मयूर बोरगोहेन के खिलाफ फिर से कड़ी चुनावी लड़ाई लड़ रहे हैं। यह सीट दशकों से कांग्रेस का गढ़ रही है और यहां हार पार्टी के मनोबल के लिए एक विनाशकारी झटका होगी। इस बीच, शिवसागर में, रायजोर दल के फायरब्रांड नेता, अखिल गोगोई, असम गण परिषद (एजीपी) और भाजपा गठबंधन के ठोस दबाव के खिलाफ अपनी सीट का बचाव कर रहे हैं। ये निर्वाचन क्षेत्र स्वदेशी राजनीति के केंद्र हैं, जहां भूमि अधिकारों और पहचान पर बहस अक्सर राष्ट्रीय आख्यानों पर भारी पड़ती है। जैसे-जैसे दिन चढ़ेगा, इन प्रमुख क्षेत्रों में मतदान यह निर्धारित करेगा कि क्या विपक्ष का “संयुक्त मोर्चा” वास्तव में भाजपा की मजबूत चुनावी मशीनरी को नुकसान पहुंचा सकता है। पहले प्रकाशित: 09 अप्रैल, 2026, 05:43 IST समाचार चुनाव केवल सीटों से कहीं अधिक: बड़े दांवों का आमना-सामना जो असम की राजनीतिक आत्मा को परिभाषित करेगा अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)असम चुनाव(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)असम चुनाव(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)विधानसभा चुनाव
UP-Rajasthan Rain Hail | 15 States Storm Alert; Uttarakhand, Himachal, J&K Snowfall

Hindi News National UP Rajasthan Rain Hail | 15 States Storm Alert; Uttarakhand, Himachal, J&K Snowfall भोपाल/लखनऊ/शिमला/देहरादून8 मिनट पहले कॉपी लिंक IMD ने आज छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 15 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड के चारों धाम यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बुधवार को बर्फबारी हुई। वहीं, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में भी बर्फ गिरी, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश हुई। हिमाचल का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 11°C नीचे चला गया। जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग समेत ऊंचाई वाले इलाकों में भी ताजा बर्फबारी हुई। इधर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत 25 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। प्रयागराज के मेजा में गंगा फेरी घाट पर बना पांटून पुल तेज बहाव में बह गया। मध्य प्रदेश में 3 साइक्लोनिक एक्टिविटी हैं। राजस्थान में पिछले दो दिनों में कई जिलों में एक इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, 9 अप्रैल से एक हफ्ते तक मौसम साफ रहने की संभावना है। दिल्ली में बुधवार को 11 साल में अप्रैल का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड किया गया। मौसम की चार तस्वीरें… हिमाचल प्रदेश के शिमला के बाघी में सेब के बगीचे में बुधवार को ताजा बर्फबारी। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में लगातार हो रही भारी बर्फबारी से पूरा क्षेत्र बर्फ की मोटी परत से ढक गया है। उत्तराखंड के उत्तराखंड के यमुनोत्री में बुधवार को जमकर बर्फबारी हुई। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में चलती रोडवेज बस पर पेड़ की डाल टूटकर गिर गई। अगले दो दिन मौसम का हाल 9 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। जबकि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। असम और मेघालय में तेज बारिश का अलर्ट है। 10 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
UP-Rajasthan Rain Hail | 15 States Storm Alert; Uttarakhand, Himachal, J&K Snowfall

Hindi News National UP Rajasthan Rain Hail | 15 States Storm Alert; Uttarakhand, Himachal, J&K Snowfall भोपाल/लखनऊ/शिमला/देहरादून2 घंटे पहले कॉपी लिंक IMD ने आज छत्तीसगढ़ और बिहार समेत 15 राज्यों में आंधी-तूफान का अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड के चारों धाम यानी केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री में बुधवार को बर्फबारी हुई। वहीं, हिमाचल प्रदेश के पहाड़ों में भी बर्फ गिरी, जबकि मैदानी इलाकों में बारिश हुई। हिमाचल का औसत अधिकतम तापमान सामान्य से 11°C नीचे चला गया। जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग समेत ऊंचाई वाले इलाकों में भी ताजा बर्फबारी हुई। इधर, उत्तर प्रदेश के लखनऊ समेत 25 जिलों में तेज हवाओं के साथ बारिश हुई। प्रयागराज के मेजा में गंगा फेरी घाट पर बना पांटून पुल तेज बहाव में बह गया। मध्य प्रदेश में 3 साइक्लोनिक एक्टिविटी हैं। राजस्थान में पिछले दो दिनों में कई जिलों में एक इंच से ज्यादा बारिश दर्ज की गई। मौसम विभाग के मुताबिक, 9 अप्रैल से एक हफ्ते तक मौसम साफ रहने की संभावना है। दिल्ली में बुधवार को 11 साल में अप्रैल का सबसे ठंडा दिन रिकॉर्ड किया गया। मौसम की चार तस्वीरें… हिमाचल प्रदेश के शिमला के बाघी में सेब के बगीचे में बुधवार को ताजा बर्फबारी। उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में लगातार हो रही भारी बर्फबारी से पूरा क्षेत्र बर्फ की मोटी परत से ढक गया है। उत्तराखंड के उत्तराखंड के यमुनोत्री में बुधवार को जमकर बर्फबारी हुई। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में चलती रोडवेज बस पर पेड़ की डाल टूटकर गिर गई। अगले दो दिन मौसम का हाल 9 अप्रैल- जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बर्फबारी की संभावना है। वहीं, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की बारिश हो सकती है। जबकि बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। असम और मेघालय में तेज बारिश का अलर्ट है। 10 अप्रैल: जम्मू-कश्मीर में हल्की से मध्यम बारिश और बर्फबारी जारी रह सकती है। हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी कहीं-कहीं हल्की बारिश की संभावना है। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड और ओडिशा में गरज-चमक के साथ 30 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तेज हवा चल सकती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
धुरंधर-2 से वायरल जैस्मिन सबसे महंगी पंजाबी फीमेल सिंगर:एक सॉन्ग की फीस ₹35 लाख; जालंधर में पैदा हुईं, कभी ₹20 में CD बेचती थीं

धुरंधर-2 फिल्म के गीत जाइए सजना से सुर्खियों में आईं जैस्मिन सैंडलस पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री की सबसे हाईली पेड महिला सिंगर बन गई हैं। जैस्मिन ने गीत के लिए ली जाने वाली फीस का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया। लेकिन म्यूजिक इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक वे एक गीत के लिए 30 से 35 लाख रुपए लेती हैं। जालंधर में जन्मी जैस्मिन का सफर भी संघर्ष भरा रहा है। वह कभी कैलिफोर्निया में 20-20 रुपए में अपने गीतों की सीडी बेचती थीं। आज उनकी नेटवर्थ करीब 60 करोड़ रुपए बताई जा रही है। सैन फ्रांसिस्को में उनका करीब 20 करोड़ का लग्जरी घर भी है। फीस के मामले में जैस्मिन के बाद नेहा कक्कड़, निमरत खैहरा और सुनंदा शर्मा का नाम शामिल है। अब पढ़िए जैस्मिन का सिंगर बनने का पूरा सफर… गुलाबी एल्बम से मिली पहचान, बॉलीवुड तक पहुंचीं जैस्मिन का 2008 में पहला गाना मुस्कान हिट हुआ। लेकिन असली पहचान उन्हें 2012 में एल्बम गुलाबी से मिली, जिसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया। 2014 में बॉलीवुड ने उनकी आवाज को पहचाना। सलमान खान की फिल्म किक के लिए यो यो हनी सिंह के साथ गाए गाने यार ना मिले को लोगों ने खूब पसंद किया। इस एक गाने ने जैस्मिन को रातों-रात स्टार बना दिया। इसके बाद गैरी संधू के साथ इलीगल वेपन जैसे गानों ने उन्हें घर-घर में फेमस कर दिया। सबसे मोटी फीस और करोड़ों की नेटवर्थ संघर्ष के दिनों से लेकर आज तक जैस्मिन की फीस में जमीन-आसमान का अंतर आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार अब जैस्मिन बॉलीवुड या फिल्म के गानों के लिए 30 लाख से 35 लाख प्रति गाना चार्ज करती हैं। उनके एक लाइव कॉन्सर्ट की फीस भी लगभग 10 लाख से 25 लाख के बीच बताई जाती है। उनकी अनुमानित नेटबर्थ लगभग 60 करोड़ रुपए है।
सरकार बोली- जनहित याचिका का कॉन्सेप्ट खत्म करना चाहिए:पुराना दौर गया, अब कोर्ट तक पहुंच आसान; SC बोला- हम PIL मामलों पर खुद सतर्क

केरल के सबरीमाला मामले पर सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने जनहित याचिकाओं (PIL) की उपयोगिता पर सवाल उठाया। कोर्ट में दायर लिखित दलीलों में सरकार ने कहा- जनहित याचिका को न सिर्फ परिभाषित, बल्कि पूरी तरह से खत्म करने का समय आ गया है। सरकार ने कहा- PIL कॉन्सेप्ट एक ऐसे दौर में बना था, जिसमें एक बड़ी आबादी गरीबी, निरक्षरता, कानूनी मदद जैसे अन्य अभाव में अदालतों तक नहीं पहुंच पाते थे। आज के दौर में टेक्नोलॉजी और ई-फाइलिंग जैसी सुविधाएं हैं जिससे कोर्ट तक पहुंच आसान हुई है। अब तो एक लेटर भी कोर्ट तक सीधे पहुंच जाता है। इस पर भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा- अदालतें खुद PIL पर सुनवाई करने में सतर्क रहती हैं। 2006 से लेकर 2026 तक, दो दशकों में स्थिति बदल गई है। नोटिस तभी जारी किए जाते हैं जब उनमें कोई ठोस आधार हो। कोर्ट ने कहा- हमारे पास अंधविश्वास तय करने का अधिकार सबरीमाला सहित अन्य धार्मिक स्थलों में महिलाओं के साथ भेदभाद मामले में आज लगातार तीसरे दिन सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की बेंच सुनवाई करेगी। बुधवार को करीब 5 घंटे चली सुनवाई में कोर्ट ने कहा कि किसी धर्म में कौन सी प्रथा अंधविश्वास है, यह तय करने का अधिकार उसके पास है। दरअसल, केंद्र ने दलील दी थी कि धर्मनिरपेक्ष अदालत इस मुद्दे का फैसला नहीं कर सकती, क्योंकि जज कानून के विशेषज्ञ होते हैं, धर्म के नहीं। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, यह काम विधायिका का है कि वह कानून बनाए। काला जादू और ऐसी प्रथाओं को रोकने के लिए कानून ऐसे ही बनाए गए हैं।’ जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने पूछा, कोई प्रथा जादू टोना से जुड़ी हो, तो क्या उसे अंधविश्वास नहीं माना जाएगा? विधायिका चुप है तो क्या अदालत सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए रोक के निर्देश नहीं दे सकती? केंद्र बोला- व्यभिचार-समलैंगिक संबंधों पर SC के फैसले ठीक नहीं सुनवाई के दौरान मेहता ने कहा है कि व्यभिचार और सहमति से बने समलैंगिक संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करने वाले फैसले सही कानून नहीं हैं। ये फैसले ‘संवैधानिक नैतिकता’ की व्यक्तिगत व्याख्या पर आधारित थे, इसलिए इन्हें अच्छा कानून नहीं माना जाना चाहिए। मेहता ने कहा- लोकतांत्रिक सिद्धांतों पर चलने वाले देश में बहुसंख्यक वर्ग का दृष्टिकोण ही प्रभावी होता है। मेहता ने हार्वर्ड लॉ रिव्यू में छपे कैथरीन टी. बार्टलेट के लेख ‘सम फेमिनिस्ट लीगल मेथड्स’ का जिक्र कर कहा, अनुच्छेद 141 के तहत यह एक कानून बन जाता है, जो 140 करोड़ भारतीयों पर लागू होता है।’ कोर्ट ने पूछा- याचिका किसकी, कोई भक्त इसे चुनौती नहीं दे सकता? दिनभर सुनवाई के बाद बेंच उठने वाली थी तो जस्टिस नागरत्ना ने मेहता से जानना चाहा कि सबरीमाला मामले में याचिकाकर्ता कौन हैं। दलीलों से लगता है कि मूल याचिकाकर्ता भक्त नहीं हैं। मेहता ने कहा कि वकीलों के संगठन ‘इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन’ की याचिका है। इस पर जस्टिस नागरत्ना ने कहा, ‘वे भक्त नहीं हैं। जो भक्त नहीं है और जिसका उस मंदिर से कोई लेना-देना नहीं है, इसे चुनौती देता है, तो क्या अदालत ऐसी रिट याचिका पर सुनवाई कर सकती है?’ सुप्रीम कोर्ट में 50 से ज्यादा रिव्यू पिटीशन धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के साथ भेदभाव का मामला बीते 26 सालों से देश की अदालतों में हैं। 2018 में, 5 जजों की बेंच ने 4:1 के बहुमत से मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक हटा दी थी। इसके बाद कई पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गईं। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संविधान बेंच 7 अप्रैल से 22 अप्रैल तक 50 से ज्यादा याचिकाओं पर सुनवाई करेगी। कोर्ट में रिव्यू पिटीशनरों और उन्हें सपोर्ट करने वाले 7 अप्रैल से 9 अप्रैल तक, जबकि विरोध करने वाले 14 अप्रैल से 16 अप्रैल तक दलीलें दे सकेंगे। सबरीमाला सहित 5 मामले, जिनपर SC फैसला करेगा सबरीमाला मंदिर में महिलाओं का प्रवेश: सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में जाने का अधिकार दिया था। अब बड़ी पीठ तय करेगी कि यह फैसला सही था या नहीं। दाऊदी बोहरा समुदाय में महिलाओं का खतना: एडवोकेट सुनीता तिवारी ने 2017 में इसके खिलाफ याचिका दायर की और कहा कि यह प्रथा महिलाओं के साथ भेदभाव करती है और यह नाबालिग बच्चियों के अधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कोर्ट यह तय करेगा कि क्या यह प्रथा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है? मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश: यास्मीन जुबैर अहमद पीरजादा नाम की महिला ने 2016 में मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद में प्रवेश के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट तय करेगा कि क्या मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में नमाज पढ़ने से रोका जा सकता है। पारसी महिलाओं का अग्निमंदिर में प्रवेश: 2012 में पारसी महिला गुलरुख एम गुप्ता ने हिंदू व्यक्ति से शादी के बाद अग्नि मंदिर में प्रवेश से रोके जाने के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में याचिका दायर की। सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या गैर-पारसी से शादी करने पर पारसी महिला को मंदिर में प्रवेश से रोका जा सकता है। मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े लैंगिक भेदभाव के प्रश्न: सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि क्या धार्मिक गतिविधियों में जेंडर के आधार पर भेदभाव को क्या मौलिक अधिकार का हनन माना जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने 7 संवैधानिक सवाल तय किए, जिन पर बहस होगी- सबरीमाला में 10 से 50 साल की महिलाओं को एंट्री नहीं, पूरा मामला 5 पॉइंट्स में सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पहले बैन थी। वजह पीरियड्स और भगवान अयप्पा के ब्रह्मचर्य व्रत को माना गया। इसी नियम को लेकर विवाद शुरू हुआ। 1990 में मामला उठा, बाद में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। 2006 में कोर्ट ने नोटिस जारी किया। 2008 में केस 3 जजों की बेंच को गया। 2016 में सुनवाई शुरू हुई। 2017 में मामला 5 जजों की संविधान पीठ को भेजा गया। 2018 में 4-1 बहुमत से सभी उम्र की महिलाओं को एंट्री की अनुमति मिली। कोर्ट ने प्रतिबंध को असंवैधानिक बताया। विरोध के बीच बिंदु कनकदुर्गा और बिंदु अम्मिनी ने मंदिर में प्रवेश किया। 2019 में मामला 9 जजों की बड़ी बेंच को
3 राज्यों की 296 सीटों पर वोटिंग:असम, केरलम, पुडुचेरी में सिंगल फेज में मतदान; केरलम CM पिनाराई, एक्टर मोहनलाल ने वोट डाला

देश के तीन राज्यों असम, केरलम और पुडुचेरी की 296 सीटों पर सुबह 7 बजे से वोटिंग शुरू हो चुकी है, जो शाम 5 बजे तक चलेगी। आज सुबह 6 बजे से 7 बजे के बीच सभी पोलिंग स्टेशन पर अधिकारियों ने मॉक पोलिंग की, जिससे पता चल सके कि ईवीएम में कोई खराबी तो नहीं है। केरलम में 70 साल में पहली बार कोई सीएम हैट्रिक के लिए चुनाव लड़ रहा है। असम में बीजेपी हिमंता बिस्व सरमा के सहारे लगातार तीसरी बार सरकार बनाने का दांव खेल रही है। जबकि पुडुचेरी में कांग्रेस से निकले एन. रंगासामी पांचवी बार सत्ता में काबिज होने की कोशिश कर रहे हैं। असम में 126 सीट पर 41 पार्टियों के 722 उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं केरलम में 2.71 करोड़ वोटर 890 उम्मीदवारों में से अपना नेता चुनेंगे। पुडुचेरी में 20 पार्टियां के 294 कैंडिडेट अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तीनों राज्यों में करीब 10 लाख से ज्यादा वोटर्स पहली बार मतदान करेंगे। असम, केरलम, पुडुचेरी चुनाव से जुड़े अपडेट्स तीनों राज्यों में जारी वोटिंग की जानकारी के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं…
Kidney Gang UP | Kanpur Hospitals Dr. Rohit Dr. Ahuja CCTV

कानपुर में 50 लोगों की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। आहूजा हॉस्पिटल से शुरू हुआ किडनी ट्रांसप्लांट का खेल यूपी के 4 शहरों के 9 हॉस्पिटल तक पहुंच गया। किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाला 50 लाख से 2.5 करोड़ रुपए तक पेमेंट कर रहा था। . 8वीं पास एजेंट शिवम अग्रवाल और ओटी टेक्नीशियन किडनी ट्रांसप्लांट जैसे मुश्किल ऑपरेशन कर रहे थे। पहली बार ये मामला उस वक्त खुला, जब बिहार के आयुष को गेम एप से फंसाया गया। उसकी किडनी डोनेट कराने के बाद तय रकम से 50 हजार रुपए कम दिए गए। इस पर आयुष ने शिकायत कर दी और पूरा मामला खुल गया। कानपुर के CMO हरिदत्त नेमी ने आहूजा हॉस्पिटल सील कर दिया। हॉस्पिटल के मालिक पति-पत्नी समेत 9 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। 6 आरोपी अभी फरार हैं। जिन्हें अरेस्ट किया गया, वो क्या काम करते थे? किडनी डोनर को कैसे फंसाते थे? किडनी जिस पेशेंट को लगनी होती, उसको हॉस्पिटल तक कैसे लाया जाता था? डॉक्टर कौन-कौन थे? इस खेल को अंजाम देने में किसकी क्या भूमिका थी? इस रिपोर्ट में पढ़िए… किडनी ट्रांसप्लांट केस के मुख्य आरोपियों में डॉ. प्रीति आहूजा है। जिस आहूजा हॉस्पिटल में किडनी ट्रांसप्लांट होता था, डॉ. प्रीति उसकी मालकिन है। प्रीति MBBS, MD (मेडिसिन) है। वह हार्ट पेशेंट्स देखती थी। 5 मंजिला इस हॉस्पिटल में 35 बेड हैं। अमूमन वो अपने हॉस्पिटल में कम बैठती थी। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की कानपुर यूनिट में उपाध्यक्ष है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) में मेडिकल ऑफिसर है। मतलब, मेडिकल के आधार पर छुट्टी वगैरह वही बनाती थी। कानपुर की डायबिटीज एसोसिएशन की सचिव है। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों के लिए बने फिजिशियन फोरम की सदस्य है। इतने संगठनों से जुड़े होने के चलते लोकल मेडिकल अफसर डॉ. प्रीति के खिलाफ जांच करने की हिम्मत ही नहीं कर पाए। दरअसल, आहूजा हॉस्पिटल 2 साल पहले बना था। जांच के मुताबिक 1 साल से इसमें किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चल रहा था। किडनी निकालने और उसे ट्रांसप्लांट करने के लिए सुबह 3 से 4 बजे के बीच का समय फिक्स रखा जाता था। इस दौरान ज्यादातर कर्मचारियों को छुट्टी पर रखा जाता था। मरीज भी कम भर्ती किए जाते थे। डॉ. सुरजीत सिंह आहूजा, डॉ. प्रीति का पति है। 54 साल का सुरजीत MBBS, DARS, MD (पैथोलॉजी) है। यानी लैब टेस्ट, ब्लड, यूरिन, बायोप्सी का एक्सपर्ट। पहले कानपुर के अलग-अलग हॉस्पिटल में बैठता था। फिर आहूजा हॉस्पिटल बना लिया। सुरजीत हॉस्पिटल का पूरा मैनेजमेंट देखता था। कानपुर और दूसरे शहरों के कुल 27 डॉक्टरों को अपने हॉस्पिटल के पैनल में रखा था। वह देखता था कि किडनी के हर केस में कितने में लेन-देन हो रहा है? डॉक्टर को कितना देना होगा? मरीज को किस हॉस्पिटल में भर्ती करना है? ऑपरेशन कब करना है? उस दौरान हॉस्पिटल के CCTV बंद करवाकर स्टाफ को हॉस्पिटल से बाहर भेज देता था। जालौन का शिवम अग्रवाल कानपुर में शिवम काड़ा के नाम से जाना जाता था। 15 साल की उम्र में कानपुर भाग आया था। 8वीं के बाद स्कूल नहीं गया। कानपुर में एंबुलेंस चलाने लगा। उसका संपर्क प्रीति और सुरजीत से हुआ। किडनी के नेक्सेस को समझा। इसके बाद आहूजा हॉस्पिटल से जुड़ गया और वहीं एंबुलेंस चलाने लगा। शिवम इस मामले में सबसे अहम है, क्योंकि वह क्लाइंट खोजता था। इसके लिए सोशल मीडिया पर एक्टिव रहता, लोगों से बात करता था। उनकी जरूरत को समझता था। फिर जब मौका बनते देखता तो टेलीग्राम से चैटिंग करते हुए उनके सामने किडनी बेचने का ऑप्शन रख देता था। इसके बदले में उन्हें 5 से 10 लाख रुपए तक देने का वादा करता था। कहता था कि एक किडनी से भी जिंदगी चल जाती है। फिर जब डील हो जाती तो आहूजा हॉस्पिटल में पूरी व्यवस्था बनवाता था। शिवम काड़ा डायलिसिस के मरीजों को भी खोजता था। उसका अलग-अलग हॉस्पिटल में संपर्क था। वहां से उसे किडनी के मरीजों का डेटा मिल जाता था। शिवम उनसे संपर्क करता और किडनी ट्रांसप्लांट का सौदा करता था। एक रिकॉर्डिंग में 50 किडनी ट्रांसप्लांट की बात सामने आई है। MBA स्टूडेंट आयुष से शिवम ने ही संपर्क किया था। पैसे की डील के बाद उसका डॉ. अफजल से संपर्क करवाया था। शिवम इस नेक्सेस में इतना आगे बढ़ चुका था कि वह ICU में आला (स्टेथोस्कोप) लगाकर किडनी ट्रांसप्लांट वाले मरीजों की जांच करता था। साउथ अफ्रीका की लड़की अरेबिका के साथ उसका एक वीडियो भी सामने आया था। किडनी केस में जांच के दौरान कई बार नोएडा के डॉ. रोहित का नाम आया। दलाल शुभम ने मोबाइल पर बात करते हुए उसका नाम लिया, जिसकी ऑडियो पुलिस को मिली। फिर जब गाजियाबाद से ओटी टेक्नीशियन राजेश और कुलदीप गिरफ्तार हुए, तब भी उसका नाम सामने आया। पुलिस की टीमें छापामारी कर रही हैं, लेकिन अब तक रोहित को पकड़ नहीं पाई हैं। कानपुर में जब किडनी ट्रांसप्लांट करनी होती थी, तब डॉ. रोहित को बुलाया जाता था। रोहित अक्सर दिल्ली के डॉ. अली के साथ आता था। गाजियाबाद से गिरफ्तार किए गए ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और कुलदीप सिंह भी साथ रहते थे। राजेश ने पूछताछ में बताया था कि ऑपरेशन थिएटर में मेरे हाथ ठीक चलते थे। इससे प्रभावित होकर रोहित ने मुझे अपने साथ जोड़ लिया। रोहित, राजेश, कुलदीप और अली, ये चार एक साथ फ्लाइट से आते और ऑपरेशन करने के बाद वहां से निकल जाते। वो एनेस्थेसियोलॉजिस्ट है। मरीज को कितनी एनेस्थिसिया देनी है, यह रोहित ही तय करता था। वो एक किडनी ट्रांसप्लांट के लिए 2 से 3 लाख रुपए लेता था। डॉ. मुदस्सिर अली को ये लोग डॉ. अली कहते थे। वो दिल्ली के द्वारिका का रहने वाला है। ऑपरेशन थिएटर के अंदर डॉ. अली मुख्य भूमिका में रहता था। वो पेट में सर्जिकल कट लगाता था। किडनी को पेट के अंदर से निकालकर दूसरे मरीज (रिसीवर) के पेट में शिफ्ट करता था। डॉ. अली कभी अकेले कानपुर नहीं आता था। उसके साथ एक डॉक्टर और दो सहायक होते थे। जब ऑपरेशन हो जाता, तब दो लोग लखनऊ और दो गाजियाबाद की तरफ चले जाते थे। गाजियाबाद के राजेश कुमार का कहना है कि जनवरी से अब तक 5 किडनी ट्रांसप्लांट हुए हैं।









