केंद्र सरकार के महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष ने बुधवार को मीटिंग की। यह मीटिंग दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के घर पर आयोजित की गई। जिसमें राहुल गांधी भी शामिल हुए। मीटिंग में शिवसेना (यूबीटी), एनसीपी (शरद गुट) और AAP नेता भी शामिल हुए। सरकार ने 2029 के लोकसभा चुनावों से महिला आरक्षण अधिनियम लागू करने के लिए लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा है। 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। वर्तमान में लोकसभा में 543 सीटें हैं। सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल को संसद के विशेष सत्र में 2029 से लोकसभा में 33% महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन विधेयक लाने की योजना बना रही है। पीएम मोदी 17 अप्रैल को बहस का जवाब दे सकते हैं। इन बदलावों को 2029 के आम चुनाव से लागू करने की योजना है। हालांकि इस पर विरोध भी शुरू हो गया है। तेलंगाना के सीएम रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखकर कहा कि दक्षिणी राज्यों को सीटें बढ़ाना मंजूर नहीं। बिल पर विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रियाएं परिसीमन प्रक्रिया पर BRS पार्टी का रुख एकदम साफ और मजबूत है। हमारे कार्यकारी अध्यक्ष, KTR, 2022 से लगातार यह कहते आ रहे हैं कि इस पूरी प्रक्रिया में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए। फिलहाल, संसद में दक्षिण भारतीय राज्यों का प्रतिनिधित्व 24% है। TVK अध्यक्ष विजय ने कहा, “परिसीमन केंद्र सरकार की तरफ से उठाया गया एक पक्षपातपूर्ण कदम है। हमारी पार्टी विधेयक का स्वागत करती है जो महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान करता है। इसके अलावा ‘संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित हो जाता है तो दक्षिणी और उत्तरी राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व में आनुपातिक अंतर काफी बढ़ जाएगा। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल- सरकार यह सब 2029 के लोकसभा चुनाव में राजनीतिक फायदा लेने के उद्देश्य से कर रही है। अगर सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देना चाहती है, तो मौजूदा 543 सीटों में ही यह लागू किया जा सकता है। सीटों के पुनर्वितरण से उत्तर भारत को ज्यादा फायदा होगा। तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने पीएम मोदी को चिट्ठी लिखी- संसद में जो 3 बिल लाए जाने हैं, उनको लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। कांग्रेस का रुख स्पष्ट है। वह महिला आरक्षण बिल का समर्थन करती है, लेकिन जनसंख्या के आधार पर लोकसभा सीटों को 850 तक बढ़ाने के प्रस्ताव दक्षिणी राज्यों के लिए स्वीकार्य नहीं है। यह देश के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। मल्लिकार्जुन खड़गे- कांग्रेस महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं है। सरकार इसे राजनीतिक कारणों से आगे बढ़ा रही है। केसी वेणुगोपाल- महिला आरक्षण की आड़ में गलत डिलिमिटेशन लाया जा रहा है। यह संघीय ढांचे के खिलाफ है। शशि थरूर- डिलिमिटेशन से पहले सभी राज्यों और पार्टियों से चर्चा होनी चाहिए। जल्दबाजी देश के संघीय ढांचे के लिए ठीक नहीं है। किरण रिजिजू- किसी भी पार्टी ने महिला आरक्षण बिल का विरोध नहीं किया है। कुछ बयान सिर्फ राजनीतिक मकसद से दिए जा रहे हैं। महिला आरक्षण में अब और देरी नहीं होनी चाहिए। 40 साल इंतजार के बाद इसे जल्द लागू करना जरूरी है। एकनाथ शिंदे- शिवसेना महिला आरक्षण बिल का पूरा समर्थन करती है। इसे 2029 से पहले लागू किया जाना चाहिए। सवाल- जवाब में जानिए, इस बदलाव को 1. सीटें कितने बढ़ेंगी: लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 हो जाएंगी। राज्यों में 815 व केंद्र शासित क्षेत्रों के लिए 35 सीटें। इस बदलाव का असर राज्यसभा और देश की सभी विधानसभाओं पर भी होगा। यहां भी सीटें की संख्या बदल जाएंगी। 2. महिला आरक्षण कितने साल के लिए होगा : कुल सीटों में से 33% यानी 273 महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। महिलाओं के लिए यह आरक्षण 15 साल के लिए होगा। यानी 2029, 2034 और 2039 के लोकसभा चुनावों तक। इसके बाद इसे बढ़ाने का फैसला संसद करेगी। आरक्षित सीटें हर चुनाव में बदलती रहेंगी, ताकि महिलाओं का हर जगह प्रतिनिधित्व मिल सके। इसमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल होगा। ये आरक्षित सीटें अलग-अलग क्षेत्रों में रोटेशन के आधार पर तय की जाएंगी। 3. आरक्षण कैसे होगा: परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। 4. संसद में महिलाओं की अभी क्या स्थिति है: 4. परिसीमन में क्या होगा: अभी तक सीटों का आधार 1971 की जनगणना थी, जो 2026 तक के लिए मान्य थी। परिसीमन कब होगा और किस जनगणना (जैसे 2011 या 2027) के आधार पर होगा, यह संविधान की जगह संसद एक साधारण कानून बनाकर तय कर सकेगी। सरकार इसमें बदलाव कर रही है। इसके लिए जनसंख्या (आबादी) की परिभाषा को बदला जाएगा है। इससे संसद को यह तय करने का अधिकार मिलता है कि सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए किस डेटा को आधार बनाया जाए। इसके लिए 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात कही गई है। संविधान में संशोधन कर सरकार परिसीमन आयोग बनाएगी। अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज होंगे। आयोग सभी निर्वाचन क्षेत्र (लोकसभा सीटें) दोबारा तय करेगा। आयोग का निर्णय अंतिम होगा। इसके फैसले को कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकते। 5. क्या सरकार लोकसभा में बिल पास करा पाएगी: संविधान संशोधन पारित कराने के लिए सरकार को बैक-चैनल बातचीत करनी होगी। भारतीय संविधान के ऑर्टिकल 368 के तहत, संविधान में संशोधन के लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी होता है। कुल सदस्यों का बहुमत (50% से अधिक) और उपस्थित एवं मतदान करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई बहुमत। लोकसभा की वर्तमान संख्या 540 (कुल 543 में से) है। 3 सीटें खाली हैं। यदि सभी सांसद उपस्थित होकर मतदान करते हैं, तो कम से कम 360 सांसदों (दो तिहाई) को इसके पक्ष में वोट देना होगा। वर्तमान में, भाजपा-नेतृत्व वाले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (NDA) के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA (विपक्ष) के पास 233 सांसद हैं। 15 सांसद किसी गठबंधन के साथ नहीं हैं। यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती है मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ सकती है। यहां 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। ———– ये खबर भी पढ़ें… 2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी
केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…













































