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सुबह के वक्त अच्छी नींद क्यों आती है? अलार्म बजने के बाद भी नहीं खुलती आंख, जान लीजिए इसकी वजह

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Last Updated:April 19, 2026, 08:16 IST Morning Sleep Causes: अक्सर आपने महसूस किया होगा कि सुबह के वक्त बहुत अच्छी नींद आती है और लोगों की आंख नहीं खुलती है. एक्सपर्ट्स की मानें तो इसकी वजह हमारे शरीर की सर्कैडियन रिदम, REM नींद की वृद्धि और हार्मोनल बदलाव होते हैं. सुबह के वक्त नींद हल्की, लेकिन आरामदायक होती है, जिससे व्यक्ति को ज्यादा संतुष्टि महसूस होती है. सुबह के वक्त अच्छी नींद आने के पीछे कई वजह होती हैं. Deep Morning Sleep: हर मौसम में लोगों को सुबह के वक्त सोना सबसे अच्छा लगता है. अलार्म बजने के बावजूद सुबह-सुबह आंख नहीं खुलती है और सोने का मन करता है. खासतौर पर छोटे बच्चे सुबह उठने में सबसे ज्यादा नखरे करते हैं. लगभग हर उम्र के लोगों के साथ ऐसा होता है. कई बार ऐसा लगता है कि ऑफिस न जाकर नींद पूरी कर ली जाए. अधिकतर लोगों को लगता है कि अगर नींद पूरी नहीं होती है, तब ऐसा होता है. हालांकि सुबह के वक्त अच्छी नींद के पीछे शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक और हार्मोनल एक्टिविटीज का पूरा खेल है. चलिए जानते हैं कि सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद क्यों आती है. स्लीप फाउंडेशन की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह के वक्त अच्छी नींद आने का सबसे पहला कारण हमारे शरीर की सर्कैडियन रिदम है. यह बॉडी की बायोलॉजिकल क्लॉक है, जो हमारे सोने-जागने के पैटर्न को कंट्रोल करती है. रात के समय यह हमें सोने के लिए तैयार करती है, जबकि सुबह के समय जागने के संकेत देती है. हालांकि दिलचस्प बात यह है कि सुबह के अंतिम घंटों में यह क्लॉक धीरे-धीरे नींद को हल्का करती है, जिससे हम रेपिड आई मूवमेंट (REM) स्लीप स्टेज में ज्यादा समय बिताते हैं. यही वह स्टेज है, जिसमें सपने आते हैं और नींद ज्यादा आरामदायक महसूस होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. REM स्लीप के बढ़ने से सुबह-सुबह सुकूनभरी नींद आती है. रात के पहले हिस्से में गहरी नींद ज्यादा होती है, जबकि सुबह के समय REM नींद का प्रतिशत बढ़ जाता है. REM नींद मानसिक रूप से ज्यादा सक्रिय होती है और इसमें व्यक्ति को आरामदायक व सुखद अनुभव होता है. इसी वजह से सुबह की नींद अधिक मीठी और सुकूनभरी लगती है. सुबह-सुबह अच्छी नींद आने का तीसरा सबसे बड़ा कारण हार्मोन का असर है. मेलाटोनिन और कोर्टिसोल हार्मोन्स इसकी बड़ी वजह हैं. रात में मेलाटोनिन हार्मोन का स्तर अधिक होता है, जो नींद को बढ़ावा देता है. सुबह होते-होते इसका स्तर घटने लगता है, जबकि कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने लगता है, जो शरीर को जगाने में मदद करता है. हालांकि इस बदलाव के दौरान एक छोटा सा समय ऐसा होता है, जब दोनों हार्मोन संतुलन में होते हैं, जिससे नींद का अनुभव बहुत सुखद हो जाता है. अगर कोई व्यक्ति रात में पर्याप्त नींद नहीं लेता है, तो उसका शरीर सुबह के समय अतिरिक्त नींद लेने की कोशिश करता है. यही वजह है कि छुट्टी वाले दिन या जब हमें देर तक सोने का मौका मिलता है, तब सुबह की नींद और भी ज्यादा गहरी और आरामदायक महसूस होती है. यह शरीर की एक तरह की रिकवरी प्रक्रिया होती है. इसके अलावा सुबह के समय आमतौर पर शांति, कम शोर और ठंडा मौसम होता है, जो नींद के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनाता है. सूरज की हल्की रोशनी धीरे-धीरे शरीर को जगाने की प्रक्रिया शुरू करती है, जिससे नींद का अनुभव अचानक टूटने के बजाय धीरे-धीरे खत्म होता है और यह प्रक्रिया अधिक सुखद लगती है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 19, 2026, 08:16 IST

IVF Cases in Jodhpur | What is IVF | जोधपुर में आईवीएफ केस बढ़े | Rising IVF Cases in Jodhpur News

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जोधपुर. राजस्थान के जोधपुर शहर में आधुनिक जीवनशैली और करियर को प्राथमिकता देने के चलते विवाह की उम्र में 5 से 10 साल की देरी अब एक बड़ी सामाजिक और स्वास्थ्य समस्या बनकर उभर रही है. इस बढ़ते ट्रेंड का सीधा असर दंपतियों की प्रजनन क्षमता पर पड़ रहा है, जिसके परिणामस्वरूप माता-पिता बनने के लिए ‘इन विट्रो फर्टिलाइजेशन’ (IVF) का सहारा लेने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हुआ है. आंकड़ों के अनुसार, जोधपुर में हर साल करीब 1500 नए आईवीएफ मामले सामने आ रहे हैं. आर्थिक दृष्टि से देखें तो एक औसत आईवीएफ प्रक्रिया पर लगभग 2 लाख रुपये का खर्च आता है, जिससे शहर में इस तकनीक पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च किए जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि तनाव, असंतुलित खानपान और बढ़ती उम्र के कारण प्राकृतिक रूप से संतान सुख पाने में चुनौतियां बढ़ गई हैं. 30 के बाद जैविक सीमाओं का बढ़ता प्रभाव जोधपुर के विनायक हॉस्पिटल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. कविता शर्मा के अनुसार, महिलाओं के शरीर में 20 से 30 वर्ष की आयु गर्भधारण के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. जैसे ही उम्र 30 के पार पहुँचती है, अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता में गिरावट शुरू हो जाती है. 35 वर्ष की आयु के बाद यह गिरावट और भी तीव्र हो जाती है, जिससे प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं बेहद कम रह जाती हैं. डॉक्टर बताती हैं कि देरी से शादी करने वाले जोड़ों को अक्सर इसी जैविक बाधा का सामना करना पड़ता है, जिसके बाद उनके पास मेडिकल सहायता लेने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता. हालांकि आईवीएफ की सफलता दर वर्तमान में 40 से 50 प्रतिशत के बीच है, लेकिन यह भी पूरी तरह से महिला की उम्र पर निर्भर करती है. आधुनिक तकनीक और बदलता दृष्टिकोणव्यस्त जीवनशैली के इस दौर में कामकाजी महिलाएं अब ‘एग फ्रीजिंग’ (अंडाणु संरक्षण) जैसी आधुनिक तकनीकों की ओर भी आकर्षित हो रही हैं, ताकि भविष्य में करियर स्थिर होने पर वे मातृत्व का आनंद ले सकें. आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने सफलता दर में सुधार जरूर किया है, लेकिन डॉक्टर शर्मा का मानना है कि करियर और जैविक प्राथमिकताओं के बीच संतुलन बनाना अनिवार्य है. कई बार महिलाएं जल्दी परिणाम की चाह में भी सीधे आईवीएफ प्रक्रिया को चुन लेती हैं. विशेषज्ञों की सलाह है कि अगर किसी कारणवश मातृत्व में देरी हो रही है, तो समय रहते विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए. सही समय पर लिया गया चिकित्सकीय फैसला और संतुलित दिनचर्या कई शारीरिक और मानसिक परेशानियों को कम कर सकती है. Q1. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने की मुख्य वजह क्या है?Ans. जोधपुर में IVF मामलों के बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह बदलती जीवनशैली और देर से शादी करने का ट्रेंड है. आज के समय में युवा पहले अपने करियर को स्थिर करना चाहते हैं, जिसके चलते शादी की उम्र 30 वर्ष या उससे अधिक हो रही है. इसके साथ ही तनाव, फास्ट फूड, अनियमित दिनचर्या और शारीरिक गतिविधियों की कमी भी प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही है. इन सभी कारणों के चलते प्राकृतिक रूप से गर्भधारण मुश्किल हो रहा है, जिससे दंपतियों को IVF जैसी मेडिकल तकनीकों का सहारा लेना पड़ रहा है. Q2. जोधपुर में हर साल कितने दंपति IVF का सहारा ले रहे हैं और इसका क्या मतलब है?Ans. जोधपुर में हर साल लगभग 1500 दंपति IVF तकनीक का सहारा ले रहे हैं, जो यह दर्शाता है कि शहर में बांझपन या गर्भधारण में कठिनाई की समस्या तेजी से बढ़ रही है. यह आंकड़ा सिर्फ एक मेडिकल ट्रेंड नहीं बल्कि एक सामाजिक बदलाव की ओर भी इशारा करता है. पहले जहां लोग प्राकृतिक तरीके से माता-पिता बनते थे, वहीं अब बड़ी संख्या में लोग चिकित्सा सहायता ले रहे हैं. इससे यह भी साफ होता है कि आधुनिक जीवनशैली और बढ़ती उम्र का असर सीधे तौर पर परिवार नियोजन पर पड़ रहा है. Q3. IVF प्रक्रिया पर होने वाला खर्च समाज पर क्या प्रभाव डाल रहा है?Ans. IVF प्रक्रिया का खर्च आम लोगों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है, क्योंकि एक बार के इलाज में लगभग 2 लाख रुपये तक खर्च आता है. जोधपुर में इस पर सालाना 25 से 30 करोड़ रुपये तक खर्च हो रहे हैं, जो एक बड़ी आर्थिक गतिविधि बन चुकी है. इससे एक तरफ मेडिकल इंडस्ट्री को बढ़ावा मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है. कई दंपति अपने सपने को पूरा करने के लिए कर्ज तक लेने को मजबूर हो जाते हैं, जिससे यह सिर्फ स्वास्थ्य नहीं बल्कि आर्थिक चुनौती भी बन गई है. Q4. 30 साल के बाद महिलाओं की फर्टिलिटी में क्या बदलाव आते हैं और यह क्यों चिंता का विषय है?Ans. 30 साल की उम्र के बाद महिलाओं के शरीर में प्राकृतिक रूप से अंडाणुओं की संख्या और उनकी गुणवत्ता कम होने लगती है. 35 साल के बाद यह गिरावट और तेजी से होती है, जिससे गर्भधारण की संभावना काफी कम हो जाती है. यही कारण है कि डॉक्टर इस उम्र के बाद गर्भधारण को चुनौतीपूर्ण मानते हैं. यह स्थिति इसलिए चिंता का विषय है क्योंकि आज के समय में अधिकतर महिलाएं इसी उम्र के बाद मातृत्व की योजना बनाती हैं, जिससे उन्हें मेडिकल सहायता की जरूरत पड़ती है और मानसिक तनाव भी बढ़ता है. Q5. एग फ्रीजिंग जैसी तकनीक क्यों लोकप्रिय हो रही है और इसके क्या फायदे हैं?Ans. एग फ्रीजिंग तकनीक आज की कामकाजी महिलाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, क्योंकि यह उन्हें अपने करियर और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने का विकल्प देती है. इस प्रक्रिया में महिलाएं कम उम्र में अपने अंडाणु सुरक्षित रख सकती हैं और भविष्य में जब वे तैयार हों, तब उनका उपयोग कर सकती हैं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि बढ़ती उम्र के बावजूद भी गर्भधारण की संभावना बनी रहती है. हालांकि यह तकनीक महंगी है, लेकिन यह उन महिलाओं के लिए एक सुरक्षित विकल्प बन रही है जो देर से शादी या मातृत्व की योजना बना रही हैं.

IPL 2026: 1 करोड़+ वाले 41 खिलाड़ी कम मैच खेले:दावा-कम कीमत वाले खिलाड़ियों को ज्यादा मौके , 200 करोड़ बेंच पर खर्च

IPL 2026: 1 करोड़+ वाले 41 खिलाड़ी कम मैच खेले:दावा-कम कीमत वाले खिलाड़ियों को ज्यादा मौके , 200 करोड़ बेंच पर खर्च

IPL ऑक्शन में टीमें करोड़ों रुपए खर्च कर बड़े खिलाड़ियों को अपने साथ जोड़ती हैं। हालांकि, चोट या टीम कॉम्बिनेशन जैसी वजहों से कई महंगे खिलाड़ी प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं बना पा रहे हैं। मौजूदा सीजन का लगभग एक-तिहाई हिस्सा पूरा हो चुका है। सभी टीमें कम से कम 5 मैच खेल चुकी हैं। फिर भी 1 करोड़ या उससे ज्यादा कीमत वाले 41 खिलाड़ी ऐसे हैं, जो या तो एक भी मैच नहीं खेले हैं या सिर्फ इक्का-दुक्का मुकाबलों तक सीमित रहे हैं। इस सीजन में कई कम कीमत वाले खिलाड़ियों को ज्यादा मौके मिल रहे हैं, जबकि महंगे खिलाड़ी बेंच पर बैठे हैं। नतीजतन, टीमों की बेंच स्ट्रेंथ पर खर्च की गई कुल राशि 200 करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर चुकी है। जिनकी बेंच स्ट्रेंथ सबसे महंगी, वे टॉप में नहीं… दिल्ली- मुंबई अपवाद बेंच स्ट्रेंथ महंगी होने का मतलब है कि टीमें संसाधनों का उचित उपयोग नहीं कर रहीं। प्रदर्शन में भी इसका असर। सनराइजर्स के सर्वाधिक 34 करोड़ रु., लखनऊ के 33.20 करोड़ रु., दिल्ली के 29.95 करोड़ रु., चेन्नई के 29.70 करोड़ रु. और कोलकाता के 23 करोड़ रु. के खिलाड़ी बेंच पर हैं। इनमें से सिर्फ दिल्ली टॉप-4 में है। चेन्नई और कोलकाता तो अंतिम-3 स्थानों पर हैं। मुंबई भी इसका अपवाद है, जिसके सिर्फ 6.25 करोड़ रुपए के खिलाड़ी बेंच पर हैं, इसके बावजूद वह 9वें स्थान पर है। इम्पैक्ट प्लेयर नियम के कारण टीमें 11 के बजाय 12 खिलाड़ियों का उपयोग कर रही हैं। कुछ स्टार खिलाड़ी जो ‘ऑलराउंडर’ के तौर पर महंगे खरीदे गए थे, लेकिन किसी एक विभाग (बैटिंग या बॉलिंग) में थोड़े कमजोर हैं, तो वे सीधे बेंच पर चले गए हैं। ————————————-

आसाराम केस का गवाह ब्लैकमेलिंग में अरेस्ट:पानीपत में सरपंच से ₹70 लाख हड़पे, महेंद्र के भाई- भतीजे और मां पर भी FIR

आसाराम केस का गवाह ब्लैकमेलिंग में अरेस्ट:पानीपत में सरपंच से ₹70 लाख हड़पे, महेंद्र के भाई- भतीजे और मां पर भी FIR

हरियाणा के पानीपत में आसाराम केस के मुख्य गवाह महेंद्र चावला को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। महेंद्र ने एक केस में सरपंच से ब्लैकमेल कर 70 लाख रुपए हड़प लिए। रुपए देने के बाद भी आरोपी 80 लाख रुपए की डिमांड करता रहा। महेंद्र को रुपए देने की अब एक वीडियो भी सामने आई है, जिसमें एक व्यक्ति बैग ले जाता दिख रहा है। दावा किया जा रहा है कि महेंद्र का भाई एक मीडिएटर के घर से बैग में 70 लाख रुपए कैश ले गया। सीआईए ने मामले में कार्रवाई करते हुए महेंद्र, भाई देवेंद्र और भतीजे राम को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं पुलिस ने महेंद्र की मां गोपाली देवी के खिलाफ भी FIR दर्ज कर ली है। जानिए महेंद्र ने कैसे ठगे ₹70 लाख आसाराम से कैसे जुड़ा महेंद्र पानीपत के सनौली खुर्द गांव का रहने वाला महेंद्र 1996 में आसाराम से जुड़ा है। काफी दिनों तक आसाराम के अहमदाबाद और सूरत आश्रम में भी उनके साथ रहा। परिजनों के अनुसार, महेंद्र 2006 में वापस गांव लौट गया। 2008 में आसाराम के अहमदाबाद आश्रम में 2 बच्चों के मरने की घटना से महेंद्र आहत हुआ था। इसके बाद से ही उसने आसाराम से दूरी बनानी शुरू कर दी। जब दोनों आसाराम और बेटे नारामण साई पर दुराचार के आरोप लगे तो महेंद्र आश्रम से अलग रहने ला। साल 2013 में एक नाबालिग ने आसाराम पर यौन शोषण का आरोप लगाया था, इस केस में महेंद्र चावला ने गवाही दी थी। सरपंच के पक्ष में दी गवाही शिकायतकर्ता भगत सिंह ने बताया कि 2 मार्च को महेंद्र चावला ने सरपंच के पक्ष में गवाही दी। उस समय उसने कोर्ट में अपने ही परिचितों को पहचानने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसने और रुपए हड़पने की प्लानिंग शुरू की। 5 मार्च को अगली तारीख पर पेश न होने के लिए झूठा मेडिकल सर्टिफिकेट जमा करा दिया। 3 पॉइंट में पढ़िए…क्यों मुकरा महेंद्र चावला महेंद्र के खिलाफ शिकायत दर्ज हुई 15 अप्रैल को भगत सिंह ने महेद्र के खिलाफ चांदनीबाग थाने में शिकायत दर्ज कराई। जिसमें आरोप लगाया कि महेंद्र, उसके भाई देवेंद्र और उसके बेटे राम, मां गोपाली देवी ने ब्लैकमेल कर उनसे 70 लाख रुपए हड़प लिए। इसके बाद और रुपयों की भी डिमांड की गई। रुपए न देने पर जान से मारने की धमकी दी गई। DSP बोले- तीन लोगों को गिरफ्तार किया DSP हेडक्वार्टर सतीश वत्स ने बताया कि चांदनी बाग थाना में दर्ज ब्लैकमेलिंग के एक मुकदमे में महेंद्र चावला, देवेंद्र चावला और राम को गिरफ्तार किया गया है। तीनों को आज कोर्ट में पेश किया जाएगा। रुपए लेने से संबंधित वीडियो की भी जांच की जा रही है।

औषधीय गुणों से भरपूर कनेर, जानिए क्यों भगवान शिव को है यह फूल प्रिय

कनेर

Last Updated:April 19, 2026, 07:50 IST कनेर एक ऐसा पौधा है जो अपनी खूबसूरती के साथ-साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. इसके पत्तों और फूलों का उपयोग त्वचा रोग, दर्द और अन्य समस्याओं में किया जाता है. साथ ही, धार्मिक मान्यता के अनुसार यह फूल भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है, जिससे इसका महत्व और बढ़ जाता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में कई औषधि पौधे पाए जाते हैं जो कि हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माने जाते हैं, उनमें से एक पौधा है कनेर जो कि अपनी खूबसूरती के साथ-साथ औषधि गुणों के लिए जाना जाता है. कनेर के फूल पीले सफेद रंग के होते हैं कनेर के पत्तों में एंटी-बैक्टीरियल, एंटी-सेप्टिक और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से लोग इनका इस्तेमाल दर्द, खुजली और त्वचा रोगों में करते आ रहे हैं. कनेर का फूल खासतौर पर भगवान शिव को प्रिय माना जाता है. इसे पूजा में चढ़ाने से मनोकामना पूरी होने का विश्वास है. यह फूल सालभर उपलब्ध रहता है और इसमें विशेष ऊर्जा मानी जाती है. परंतु पूजा के साथ-साथ औषधि गुणों के लिए भी इस फूल का इस्तेमाल कई वर्षों से किया जाता है कनेर के फूल की पत्तियां भी बहुत फायदेमंद माने जाते हैं अगर आप भी दाद खाज खुजली जैसी समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं और लंबे समय से दाद की समस्या से छुटकारा पाना चाहते हैं तो कनेर के पत्ते राहत दे सकते हैं. कनेर के पत्तों को नारियल तेल में धीमी आंच पर पकाएं, ठंडा होने पर छान लें और प्रभावित जगह पर लगाएं. लंबे समय तक नियमित इस्तेमाल से दाद की जलन, खुजली और दाग कम होने लगते हैं. जिससे आपको धीरे-धीरे दाद की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा। Add News18 as Preferred Source on Google अगर आप भी दर्द जैसी समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं कई बार कमर में दर्द होने लगती है बदलता मौसम के कारण जोड़ों के दर्द की समस्या अचानक बढ़ जाती है ऐसे में आज हम एक ऐसी औषधि के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे दर्द की समस्या से राहत मिल सकता है।घुटनों, कमर या कंधे का दर्द हो तो कनेर का लेप आज़माया जाता है. ताज़ी पत्तियां पीसें, उसमें थोड़ा जैतून का तेल मिलाकर हल्का गर्म करें और दर्द वाली जगह पर मालिश करें. धीरे-धीरे सूजन कम होती है. बदलते खान-पान के कारण त्वचा पर मुहासे फोड़े फुंसी या दाग धब्बों की समस्या बढ़ जाती है ऐसे में अक्सर लोग परेशान हो जाते हैं दाग धब्बे फोड़े फुंसी से छुटकारा पाने के लिए आप कनेर की छाल का इस्तेमाल कर सकते हैं सबसे पहले कनेर की छाल का पेस्ट बनाएं उसके बाद इस पेस्ट को चेहरे पर लगाकर. धीरे-धीरे चेहरे के दाग धब्बों से आपको छुटकारा मिल जाएगा. इस उपाय को करने से फोड़े फुंसी की समस्या से राहत मिल सकती है महिलाओं में मासिक धर्म के दौरान होने वाले दर्द और बेचैनी से रहा पाने के लिए महिलाएं कनेर के फूलों से काढ़ा बनाकर सेवन कर सकते हैं जिससे दर्द और बेचैनी से राहत मिल सकती है इस उपाय को करने के लिए सबसे पहले आप कनेर के ताज़े फूलों को ले लीजिए उसके बाद उन फूलों को साफ पानी में धो लें फिर काढ़ा तैयार कर ले उसके बाद सुबह खाली पेट कल सेवन करने से दर्द और बेचैनी से राहत मिल सकती है अगर आप भी पाइल्स की समस्या से अक्सर परेशान रहते हैं तो आज हम आपको एक ऐसी देसी उपाय के बारे में बताने जा रहे हैं जिसकी मदद से आप पाइल्स की समस्या से राहत पा सकते हैं. पाइल्स की समस्या से निजात पाने के लिए कनेर के फूल की मदद ले सकते हैं कनेर के पौधे के ताजी पत्तियां और नीम की पत्तियों को पीसकर पेस्ट तैयार कर ले. उसके बाद तैयार किए गए पेस्ट को उसे बवासीर के मस्सों पर रोजाना दिन में तीन बार लगाए जिससे राहत मिल सकती है राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय की डॉक्टर ऋचा श्रीवास्तव ने बताया ने जानकारी देते हुए बताया कि कनेर का पौधा हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है परंतु कई बार लोगों को सही जानकारी न होने के कारण वह जानकारी के अभाव के कारण फूल और पत्तियों का सेवन अधिक मात्रा में कर लेते हैं जिस कारण डायरिया सिर दर्द ,पेट दर्द, जैसी समस्या हो जाती है इसके लिए सबसे पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहद जरूरी होता है। First Published : April 19, 2026, 07:50 IST

Katni Traders Fall Prey to Fake Payment App; Accounts Emptied

Katni Traders Fall Prey to Fake Payment App; Accounts Emptied

छोटे दुकानदारों के पास लगे ऑनलाइन पेमेंट के लिए लगे QR कोड। डिजिटल क्रांति ने भारत के छोटे से छोटे कस्बे को ग्लोबल मार्केट से जोड़ दिया है, लेकिन इसी क्रांति की ओट में ‘साइबर ठगों’ ने एक ऐसा वायरस तैयार किया है जो बिना इंटरनेट के भी आपकी मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहा है। मध्य प्रदेश का कटनी जिला, जो अपने व्या . क्यूआर कोड लगाकर सब्जी बेचता विक्रेता। केस 1: ममता की आड़ में धोखाधड़ी ​बड़वारा ग्राम की बबीता सिंह रघुवंशी, जो ‘कपिल ऑनलाइन’ नाम से एक छोटी सी दुकान चलाती हैं, इस नए दौर की ठगी का पहला बड़ा उदाहरण हैं। उनके पास एक युवक आया, जिसने खुद को बहुत मजबूर बताया। उसने कहा कि उसके पास घर जाने के लिए किराया नहीं है और बैंक सर्वर डाउन होने के कारण वह पैसे नहीं निकाल पा रहा। बबीता जी ने इंसानियत के नाते उसे ₹200 नकद देने का मन बनाया। युवक ने उनका QR कोड स्कैन किया। मोबाइल की स्क्रीन पर ‘बबीता सिंह’ का नाम चमका, और फिर एक चिर-परिचित ‘टिन-टिन’ की आवाज के साथ Payment Successful का मैसेज आया। युवक चला गया, लेकिन शाम को जब बबीता जी ने बैंक स्टेटमेंट देखा, तो वह ₹200 कहीं दर्ज ही नहीं थे। यह सिर्फ ₹200 की बात नहीं थी, यह उस भरोसे की हत्या थी जो एक ग्रामीण व्यापारी डिजिटल सिस्टम पर करता है। ​केस 2: पसीने की कमाई पर डाका ​विश्राम बाबा गेट के पास फल और सब्जी का ठेला लगाने वाले कमल कार्तिकेय जैसे लोग इस ठगी के सबसे आसान शिकार हैं। कमल बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में उनके साथ दो बार ऐसा हुआ। वह दिन भर धूप में खड़े होकर हजार-बारह सौ का व्यापार करते हैं। शाम को जब उन्होंने अपनी PhonePe हिस्ट्री चेक की, तो पता चला कि दो ग्राहकों के ₹600 लगभग आधा मुनाफा.खाते में आए ही नहीं थे। कमल कहते हैं, साहब, उन्होंने मुझे मोबाइल पर रसीद दिखाई थी, जिसमें मेरा नाम और ₹300 लिखे थे। मुझे लगा पैसा आ गया। अब हम जैसों को क्या पता कि मोबाइल की स्क्रीन भी झूठ बोल सकती है। छोटी दुकान चलाने वाली युवती। कैसे काम करता है यह जाली साम्राज्य ​भास्कर की टीम ने इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों और एक स्थानीय नागरिक की मदद ली जिसने अपने फोन पर इस APK फाइल को इंस्टॉल किया था। इस ऐप का विश्लेषण करने पर जो बातें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं यह कोई साधारण ऐप नहीं है। इसे डार्क वेब या थर्ड-पार्टी टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फैलाया जा रहा है। इसका इंटरफेस असली PhonePe से 99% मेल खाता है। फोंट, रंग, एनीमेशन और यहां तक कि वह ‘ब्लू टिक’ भी इसमें मौजूद है जो सफल भुगतान का प्रतीक है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि यह ऐप ऑफलाइन काम करता है। असली ऐप को पेमेंट प्रोसेस करने के लिए सर्वर से जुड़ना पड़ता है, लेकिन यह जाली ऐप केवल एक ‘एनीमेशन जनरेटर’ है। आप कोई भी नंबर या नाम डालें, यह तुरंत ‘सफल भुगतान’ दिखा देगा। ठग अक्सर ऐसी जगहों पर इसका इस्तेमाल करते हैं जहाँ नेटवर्क कम हो, ताकि वे नेटवर्क की समस्या का बहाना बनाकर जल्दी से निकल सकें। जब ठग किसी व्यापारी का QR कोड स्कैन करता है, तो यह ऐप मोबाइल के कैमरा और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक का इस्तेमाल कर स्कैनर पर लिखा नाम पढ़ लेता है। जैसे ही ठग ₹500 भरता है, ऐप तुरंत दिखाता है- “Paid to [Merchant Name] ₹500″। दुकानदार को लगता है कि ऐप ने उसका नाम पहचान लिया है, तो पैसा भी आ ही गया होगा। फल और सब्जी व्यापारी। अवैध वेबसाइट होते हैं डाउनलोड ​इस मामले ने कटनी पुलिस के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। समाजसेवी इंद्र मिश्रा ने पुलिस नगर अधीक्षक को एक लिखित शिकायत दी है, शिकायत में मांग की गई है कि ​APK फाइलों पर प्रतिबंध: गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे ऐप्स नहीं होते, ये अवैध वेबसाइटों से डाउनलोड किए जाते हैं। पुलिस को इन लिंक्स को ब्लॉक करना चाहिए। शिकायत में मांग की गई है कि साइबर सेल केवल बड़ी ठगी का इंतजार न करे, बल्कि इन छोटे-छोटे मामलों को मिलाकर एक ‘सीरियल फ्रॉड’ के रूप में जांचे। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ऐप का इस्तेमाल करना और बनाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर अपराध है। इसमें 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है। ​नहीं हुई अब तक लिखित शिकायत कटनी जिले के साइबर प्रभारी अनूप सिंह ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी ने इस संबंध में ‘लिखित एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने कहा, “हमें पता चला है कि इस तरह की ऐप्स बाजार में हैं। हम इसकी तकनीकी जांच कर रहे हैं। व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है, बस सावधान रहने की जरूरत है। जिले का साइबर सेल कार्यालय। साधारण नागरिक से अपराधी बनने तक का सफर ​भास्कर की पड़ताल में एक डरावना सामाजिक पहलू भी सामने आया। पहले साइबर अपराध के लिए जामताड़ा जैसे गिरोहों की जरूरत होती थी, लेकिन अब यह तकनीक एक आम आदमी, छात्र या बेरोजगार युवक के हाथ में पहुंच गई है। ​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह ऐप अब कॉलेज के लड़कों और छोटे-मोटे नशेड़ियों के बीच भी चर्चा का विषय है। एक साधारण व्यक्ति, जिसे कभी पुलिस थाने का रास्ता नहीं पता था, वह भी इस ऐप के लालच में आकर ₹100-200 की ठगी कर रहा है। यह प्रवृत्ति कटनी के सामाजिक ढांचे के लिए घातक है, क्योंकि यह नई पीढ़ी को आसान पैसे और अपराध की ओर धकेल रही है। कटनी का एसपी कार्यालय। ​नोटिफिकेशन पर भरोसा करें, स्क्रीन पर नहीं ​ व्यापारियों और आम जनता के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि ग्राहक का मोबाइल देखने के बजाय अपने मोबाइल पर आए SMS या Bank App के नोटिफिकेशन पर भरोसा करें। ​Sound Box है सबसे कारगर पेटीएम, फोनपे या गूगल-पे के ‘साउंड बॉक्स’ (स्पीकर) लगवाएं। जब तक डिब्बा न बोले, तब तक ग्राहक को जाने न दें।

ईरान बोला- होर्मुज पर हमारा कंट्रोल, सीजफायर उल्लंघन मंजूर नहीं:गलती की तो जवाब देंगे, सेना तैयार, अमेरिका को भरोसा जीतना होगा

ईरान बोला- होर्मुज पर हमारा कंट्रोल, सीजफायर उल्लंघन मंजूर नहीं:गलती की तो जवाब देंगे, सेना तैयार, अमेरिका को भरोसा जीतना होगा

ईरान ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका पूरा कंट्रोल है। संसद स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि होर्मुज में किसी भी माइन-क्लियरिंग को सीजफायर का उल्लंघन माना जाएगा और जवाब दिया जाएगा। गालिबाफ ने अमेरिका की ईरानी बंदरगाहों पर नाकेबंदी को लापरवाह और गलत फैसला बताया। उन्होंने कहा कि अगर ईरान इस रास्ते से नहीं गुजर सकता, तो अन्य देशों को भी अनुमति नहीं दी जाएगी। ईरान ने कहा कि उसे अमेरिका पर भरोसा नहीं है और हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं, इसलिए उसकी सेना तैयार है। गालिबाफ ने कहा कि ईरान कूटनीति के रास्ते पर आगे बढ़ने को तैयार है, लेकिन यह कमजोरी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका के पास संसाधन और हथियार हैं, लेकिन रणनीतिक तौर पर वह ईरान के सामने कमजोर पड़ा है। ईरानी स्पीकर बोले- अमेरिका से अंतिम समझौता अभी दूर गालिबाफ ने कहा कि अमेरिका और ईरान की बातचीत में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन कई अहम मुद्दे अनसुलझे हैं और अंतिम समझौता दूर है। गालिबाफ के मुताबिक, किसी भी डील को चरणबद्ध और पारस्परिक कार्रवाई के आधार पर लागू किया जाएगा। ईरान ने अमेरिका से कहा कि उसे एकतरफा और दबाव बनाने वाली नीतियों से दूर हटकर ईरानी जनता का भरोसा जीतना होगा। गालिबाफ ने चेतावनी दी, “अगर उन्होंने जरा सी भी गलती की, तो पूरी ताकत से जवाब दिया जाएगा।” पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स ईरान ने होर्मुज में 2 भारतीय जहाजों पर फायरिंग की। 14 जहाज रोके गए, 13 वापस लौटे। भारत ने राजदूत को तलब कर विरोध जताया। ईरान ने अमेरिका पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए स्ट्रेट दोबारा बंद किया। सप्लाई संकट के बीच अमेरिका ने इमरजेंसी रिजर्व से 2.6 करोड़ बैरल तेल निकालकर कंपनियों को दिया। सोमवार को पाकिस्तान में नई बातचीत हो सकती है। दोनों पक्षों ने अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ट्रम्प बोले- समझौता करीब है, लेकिन डील होने तक ईरान पर नौसैनिक नाकेबंदी जारी रहेगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos and More From Dainik Bhaskar

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Hindi News National Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar 1 घंटे पहले कॉपी लिंक उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के लोनी थाने में शनिवार रात अचानक आग लग गई, जिससे परिसर में खड़े करीब 15 से 20 जब्त वाहनों में आग लग गई। पुलिस के मुताबिक, घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई। घटना की जानकारी मिलते ही फायर डिपार्टमेंट की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। आज की अन्य बड़ी खबरें… वसेंट्रल मुंबई में चॉल में बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी आग मुंबई के मुंबई सेंट्रल इलाके में डी बी मार्ग के पास रविवार को रिलायंस मॉल के सामने एक चॉल में लगी आग गई। कई दुकानें और कमरे आग की चपेट में आ गए। हालांकि कोई घायल नहीं हुआ। घटना की जानकारी मिलते ही बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) की फायर ब्रिगेड, पुलिस, बेस्ट (BEST) के कर्मचारी और वार्ड स्टाफ मौके पर पहुंच गए और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। कांग्रेस विधायक अमीन पटेल के मुताबिक, आग रात करीब 10:30 से 10:45 बजे के बीच लगी। शुरुआती तौर पर इसे बिजली के शॉर्ट सर्किट से लगी आग माना जा रहा है। दिल्ली में 1 करोड़ की चोरी; 5 आरोपी गिरफ्तार दिल्ली के मधु विहार के अपार्टमेंट में हुई 1 करोड़ रुपए की चोरी के मामले में पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है और चोरी गए सामान का बड़ा हिस्सा बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, 4 अप्रैल को इस चोरी की शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने बताया कि उन्होंने 31 मार्च की शाम करीब 7:30 बजे घर को लॉक किया था, लेकिन अगले दिन लौटने पर ताले टूटे मिले। घर से करीब 1 करोड़ रुपए के सोने, चांदी और हीरे के गहने के साथ लगभग 12 लाख रुपए नकद चोरी हो चुके थे। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने आसपास के 150 से ज्यादा CCTV कैमरों की फुटेज खंगाली। आरोपियों की गतिविधियों को ट्रैक करते हुए उनके भागने के रास्ते को करीब 10 किलोमीटर तक मैप किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह बोले; भारत स्थिति अस्थिर, हर हालात के लिए तैयार रहे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि मिडिल ईस्ट में अस्थिर और अनिश्चित बनी हुई है। ऐसे में भारत को किसी भी अचानक बढ़ते संकट के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने वेस्ट एशिया की स्थिति पर नजर रखने के लिए गठित मंत्रियों के अनौपचारिक समूह की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी, रसायन एवं उर्वरक मंत्री जेपी नड्डा, परिवहन मंत्री सर्बानंद सोनोवाल और बिजली मंत्री मनोहर लाल सहित कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। जनगणना 2027 के लिए अधिकारियों को लद्दाख में 4 दिन की ट्रेनिंग जनगणना 2027 की तैयारियों के तहत जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में मास्टर ट्रेनर्स के लिए चार दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन एंड रूरल डेवलपमेंट (IMPARD) में आयोजित किया गया। डायरेक्टर ऑफ सेंसस ऑपरेशंस और चीफ प्रिंसिपल सेंसस ऑफिसर, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख, अमित शर्मा ने बताया कि जनगणना पूरी तरह डिजिटल फॉर्मेट में होगी, जिसके लिए सभी स्तरों पर प्रशिक्षित कर्मियों की आवश्यकता होगी। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Gujarat Teacher Jobs & Punjab Power Vacancies: 21K Jobs This Week

Gujarat Teacher Jobs & Punjab Power Vacancies: 21K Jobs This Week

Hindi News Career Gujarat Teacher Jobs & Punjab Power Vacancies: 21K Jobs This Week 1 घंटे पहले कॉपी लिंक इस हफ्ते देशभर के अलग-अलग विभागों में 21042 पदों पर भर्तियां निकली हैं। अगर आप भी इन पदों के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, तो इन 6 नौकरियों की डिटेल्ड जानकारी 6 ग्राफिक्स के जरिए जानिए: पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें पूरी खबर यहां पढ़ें . दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं… आज की सरकारी नौकरी: बिहार में इंस्ट्रक्टर की 726 वैकेंसी ; यूपी में 295 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, उत्तराखंड में 335 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: यूपी में 2085 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी; पंजाब स्टेट पावर कॉर्पोरेशन में 622 वैकेंसी, पंजाब एंड सिंध बैंक में 27 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर आज की सरकारी नौकरी: SSC में 3003 पदों पर निकली भर्ती; बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन में 899 वैकेंसी, मप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में 28 ओपनिंग्स जॉब – एजुकेशन कॉपी लिंक शेयर

Body Cooling Foods List; Watermelon Cucumber

Body Cooling Foods List; Watermelon Cucumber

Hindi News Lifestyle Body Cooling Foods List; Watermelon Cucumber | Hydrating Drinks Summer Benefits 4 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा कॉपी लिंक गर्मियों में टेम्परेचर बढ़ने पर थकान, कमजोरी और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याएं कॉमन हैं। हमारे शरीर के सभी ऑर्गन्स की सही फंक्शनिंग के लिए खास बॉडी टेम्परेचर (लगभग 37°C) की जरूरत होती है। गर्मियों में ये बैलेंस बिगड़ सकता है, जिससे हीट से जुड़ी परेशानियां बढ़ जाती हैं। गलत खानपान से ये समस्याएं और बढ़ सकती हैं। सही फूड चॉइस से इससे निपटने में मदद मिलती है। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में जानेंगे कि- कौन से फूड्स बॉडी को कूल रखते हैं? गर्मियों में कौन-से फूड्स नहीं खाने चाहिए? कूलिंग फूड्स लेने का सही समय और तरीका क्या है? एक्सपर्ट: डॉ. अमृता मिश्रा, सीनियर डाइटीशियन, दिल्ली सवाल- गर्मियों में बाहर का तापमान बढ़ने पर शरीर का तापमान भी बढ़ता है। ऐसे में शरीर उस गर्मी से कैसे डील करता है? जवाब- शरीर अपने सामान्य तापमान (लगभग 37°C) को बनाए रखने के लिए ऑटोमैटिक सिस्टम पर काम करता है। इसे ‘थर्मोरेगुलेशन’ कहा जाता है। पॉइंटर्स से इसे समझते हैं- शरीर पसीना बनाता है। पसीना सूखने की प्रक्रिया (इवैपोरेशन) से बॉडी टेम्परेचर कम होता है। गर्मियों में स्किन की ब्लड वेसल्स फैल जाती हैं। इससे स्किन लेयर की तरफ ब्लड फ्लो बढ़ जाता है, जिससे हीट बाहर निकलती है। हार्ट तेजी से ब्लड पंप करता है। इससे बॉडी हीट जल्दी बाहर निकलती है। सवाल- गर्मियों शरीर को ठंडा रखना क्यों जरूरी है? जवाब- गर्मियों में बॉडी टेम्परेचर कंट्रोल न किया जाए तो- डिहाइड्रेशन, थकान, चक्कर, हीट एग्जॉशन, हीट स्ट्रोक जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इससे एनर्जी लेवल कम होता है और पाचन तंत्र कमजोर हो जाता है। ज्यादा गर्मी से शरीर के वाइटल ऑर्गन्स ब्रेन, हार्ट और किडनी का कामकाज प्रभावित होता है। सवाल- शरीर को भीतर से ठंडा रखने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इसके लिए कुछ बातों का ख्याल रखें। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कौन-कौन से फूड्स शरीर को भीतर से ठंडा रखने में मदद करते हैं? जवाब- पानी से भरपूर फूड्स शरीर में ठंडक बनाए रखने में मदद करते हैं। ग्राफिक में इनकी लिस्ट देखिए- सवाल- क्या ठंडे फूड का मतलब ‘फ्रिज में रखी हुई ठंडी चीजें’ हैं? जवाब- नहीं, ‘कूलिंग फूड’ यानी जो शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं और जिनकी तासीर ठंडी होती है। उदाहरण के लिए- तरबूज, खीरा, ककड़ी, दही और छाछ जैसे फूड्स की तासीर ठंडी होती है। ये शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और बॉडी टेम्परेचर बैलेंस रखने में मदद करते हैं। वहीं कोल्ड ड्रिंक्स, कोल्ड कॉफी या फ्रिज का ज्यादा ठंडा पानी कुछ मिनट के लिए ठंडक देते हैं, लेकिन ये शरीर को अंदर से कूल नहीं करते हैं। सवाल- कूलिंग फूड्स बॉडी टेम्परेचर को कैसे कंट्रोल करते हैं? जवाब- ये कई तरीकों से बॉडी टेम्परेचर बैलेंस करने में मदद करते हैं। इनमें पानी के साथ जरूरी मिनरल्स (जैसे पोटेशियम और सोडियम) होते हैं। ये शरीर में फ्लूइड और इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखते हैं। इससे कमजोरी, चक्कर या ओवरहीटिंग का रिस्क कम होता है। ये फूूड्स डाइजेशन को भी सपोर्ट करते हैं, जिससे शरीर का ओवरऑल टेम्परेचर बैलेंस्ड रहता है। सवाल- क्या ये कूलिंग फूड बॉडी को डिहाइड्रेशन से बचाते हैं? जवाब- हां, इनमें पानी की भरपूर मात्रा होती है। इससे शरीर में फ्लूइड बैलेंस बना रहता है और बार-बार प्यास भी नहीं लगती है। सवाल- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में इन फूड की क्या भूमिका होती है? जवाब- इनमें पानी के साथ जरूरी मिनरल्स (सोडियम, पोटेशियम और मैग्नीशियम) पर्याप्त मात्रा में होते हैं, जो पसीने से निकलने वाले इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करते हैं। साथ ही ये सेल्स में फ्लूइड बैलेंस बनाए रखते हैं और नर्व्स व मसल्स के सही कामकाज में मदद करते हैं। सवाल- क्या ये कूलिंग फूड हीट स्ट्रोक (लू) से बचा सकते हैं? जवाब- कूलिंग फूड्स लू से बचा सकते हैं, लेकिन ये पूरी सुरक्षा नहीं देते। अगर धूप में ज्यादा समय बिताते हैं और पानी कम पीते हैं तो सिर्फ फूड्स से बचाव नहीं होगा। सवाल- क्या गर्मी से बचने के लिए सिर्फ ठंडी तासीर वाली चीजें खाना पर्याप्त है? जवाब- नहीं, सिर्फ कूलिंग फूड्स खाना ही काफी नहीं है। गर्मी से बचने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त पानी और सही लाइफस्टाइल तीनों जरूरी हैं। सवाल- क्या कुछ लोगों के लिए ये कूलिंग फूड नुकसानदायक भी हो सकता है? किन लोगों को इसे सीमित मात्रा में लेना चाहिए? जवाब- कुछ लोगों को इन्हें सीमित मात्रा में लेना चाहिए, वरना फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। जिनका पाचन कमजोर है। जिन्हें बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। जिन्हें टूथ-सेंसिटिविटी है। जिन्हें साइनस की समस्या है। जिन्हें लो बीपी है। छोटे बच्चे और बुजुर्ग। सवाल- वो कौन-सी चीजें हैं, जिसे लोग कूलिंग फूड समझकर खाते हैं, लेकिन असल में वो नुकसान पहुंचाती हैं? जवाब- जो भी चीजें ठंडी लगती हैं, उसे हम ‘कूलिंग’ मान लेते हैं। लेकिन हर ठंडी चीज शरीर को अंदर से ठंडा नहीं करती। कुछ चीजें नुकसान भी पहुंचाती हैं। ग्राफिक में देखिए- सवाल- गर्मियों में कौन-सी चीजें नहीं खानी चाहिए या बहुत कम मात्रा में खानी चाहिए? जवाब- गर्मियों में कुछ चीजें खाने से हेल्थ प्रॉब्लम्स बढ़ सकती हैं, इसलिए इन्हें खाने से बचना चाहिए। ग्राफिक में देखिए- सवाल- कूलिंग फूड्स लेने का सही समय और तरीका क्या है? जवाब- सुबह से लेकर दोपहर का समय सभी फूड्स के लिए सबसे मुफीद समय है। इस दौरान शरीर का तापमान स्वाभाविक रूप से बढ़ता है और उसे ठंडक व हाइड्रेशन की जरूरत होती है। पॉइंटर्स से समझते हैं- सुबह खाली पेट या नाश्ते के साथ नारियल पानी, फल जैसे तरबूज-खरबूजा लेना फायदेमंद है। दोपहर में दही, छाछ, खीरा-ककड़ी जैसे फूड्स शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं। रात में दही या छाछ जैसे कूलिंग फूड्स लेने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे पाचन धीमा पड़ सकता है और सर्दी-खांसी हो सकती है। कूलिंग फूड्स खाने का सही तरीका इन्हें हमेशा नेचुरल और संतुलित रूप में लें यानी फल और सब्जियां जूस की बजाय साबुत खाएं। साथ ही इन्हें फ्रिज से बहुत ठंडा निकालकर खाने की बजाय सामान्य तापमान पर लें ताकि पाचन प्रभावित न हो। एक बार में बहुत ज्यादा या कई