Friday, 23 Oct 2026 | 12:59 PM

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Katni Traders Fall Prey to Fake Payment App; Accounts Emptied

Katni Traders Fall Prey to Fake Payment App; Accounts Emptied

छोटे दुकानदारों के पास लगे ऑनलाइन पेमेंट के लिए लगे QR कोड।

डिजिटल क्रांति ने भारत के छोटे से छोटे कस्बे को ग्लोबल मार्केट से जोड़ दिया है, लेकिन इसी क्रांति की ओट में ‘साइबर ठगों’ ने एक ऐसा वायरस तैयार किया है जो बिना इंटरनेट के भी आपकी मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहा है। मध्य प्रदेश का कटनी जिला, जो अपने व्या

.

क्यूआर कोड लगाकर सब्जी बेचता विक्रेता।

केस 1: ममता की आड़ में धोखाधड़ी ​बड़वारा ग्राम की बबीता सिंह रघुवंशी, जो ‘कपिल ऑनलाइन’ नाम से एक छोटी सी दुकान चलाती हैं, इस नए दौर की ठगी का पहला बड़ा उदाहरण हैं। उनके पास एक युवक आया, जिसने खुद को बहुत मजबूर बताया। उसने कहा कि उसके पास घर जाने के लिए किराया नहीं है और बैंक सर्वर डाउन होने के कारण वह पैसे नहीं निकाल पा रहा।

बबीता जी ने इंसानियत के नाते उसे ₹200 नकद देने का मन बनाया। युवक ने उनका QR कोड स्कैन किया। मोबाइल की स्क्रीन पर ‘बबीता सिंह’ का नाम चमका, और फिर एक चिर-परिचित ‘टिन-टिन’ की आवाज के साथ Payment Successful का मैसेज आया।

युवक चला गया, लेकिन शाम को जब बबीता जी ने बैंक स्टेटमेंट देखा, तो वह ₹200 कहीं दर्ज ही नहीं थे। यह सिर्फ ₹200 की बात नहीं थी, यह उस भरोसे की हत्या थी जो एक ग्रामीण व्यापारी डिजिटल सिस्टम पर करता है।

​केस 2: पसीने की कमाई पर डाका ​विश्राम बाबा गेट के पास फल और सब्जी का ठेला लगाने वाले कमल कार्तिकेय जैसे लोग इस ठगी के सबसे आसान शिकार हैं। कमल बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में उनके साथ दो बार ऐसा हुआ। वह दिन भर धूप में खड़े होकर हजार-बारह सौ का व्यापार करते हैं।

शाम को जब उन्होंने अपनी PhonePe हिस्ट्री चेक की, तो पता चला कि दो ग्राहकों के ₹600 लगभग आधा मुनाफा.खाते में आए ही नहीं थे। कमल कहते हैं, साहब, उन्होंने मुझे मोबाइल पर रसीद दिखाई थी, जिसमें मेरा नाम और ₹300 लिखे थे। मुझे लगा पैसा आ गया। अब हम जैसों को क्या पता कि मोबाइल की स्क्रीन भी झूठ बोल सकती है।

छोटी दुकान चलाने वाली युवती।

छोटी दुकान चलाने वाली युवती।

कैसे काम करता है यह जाली साम्राज्य ​भास्कर की टीम ने इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों और एक स्थानीय नागरिक की मदद ली जिसने अपने फोन पर इस APK फाइल को इंस्टॉल किया था। इस ऐप का विश्लेषण करने पर जो बातें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं

यह कोई साधारण ऐप नहीं है। इसे डार्क वेब या थर्ड-पार्टी टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फैलाया जा रहा है। इसका इंटरफेस असली PhonePe से 99% मेल खाता है। फोंट, रंग, एनीमेशन और यहां तक कि वह ‘ब्लू टिक’ भी इसमें मौजूद है जो सफल भुगतान का प्रतीक है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि यह ऐप ऑफलाइन काम करता है।

असली ऐप को पेमेंट प्रोसेस करने के लिए सर्वर से जुड़ना पड़ता है, लेकिन यह जाली ऐप केवल एक ‘एनीमेशन जनरेटर’ है। आप कोई भी नंबर या नाम डालें, यह तुरंत ‘सफल भुगतान’ दिखा देगा। ठग अक्सर ऐसी जगहों पर इसका इस्तेमाल करते हैं जहाँ नेटवर्क कम हो, ताकि वे नेटवर्क की समस्या का बहाना बनाकर जल्दी से निकल सकें। जब ठग किसी व्यापारी का QR कोड स्कैन करता है, तो यह ऐप मोबाइल के कैमरा और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक का इस्तेमाल कर स्कैनर पर लिखा नाम पढ़ लेता है। जैसे ही ठग ₹500 भरता है, ऐप तुरंत दिखाता है- “Paid to [Merchant Name] ₹500″। दुकानदार को लगता है कि ऐप ने उसका नाम पहचान लिया है, तो पैसा भी आ ही गया होगा।

फल और सब्जी व्यापारी।

फल और सब्जी व्यापारी।

अवैध वेबसाइट होते हैं डाउनलोड ​इस मामले ने कटनी पुलिस के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। समाजसेवी इंद्र मिश्रा ने पुलिस नगर अधीक्षक को एक लिखित शिकायत दी है, शिकायत में मांग की गई है कि ​APK फाइलों पर प्रतिबंध: गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे ऐप्स नहीं होते, ये अवैध वेबसाइटों से डाउनलोड किए जाते हैं। पुलिस को इन लिंक्स को ब्लॉक करना चाहिए। शिकायत में मांग की गई है कि साइबर सेल केवल बड़ी ठगी का इंतजार न करे, बल्कि इन छोटे-छोटे मामलों को मिलाकर एक ‘सीरियल फ्रॉड’ के रूप में जांचे। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ऐप का इस्तेमाल करना और बनाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर अपराध है। इसमें 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

​नहीं हुई अब तक लिखित शिकायत कटनी जिले के साइबर प्रभारी अनूप सिंह ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी ने इस संबंध में ‘लिखित एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने कहा, “हमें पता चला है कि इस तरह की ऐप्स बाजार में हैं। हम इसकी तकनीकी जांच कर रहे हैं। व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है, बस सावधान रहने की जरूरत है।

जिले का साइबर सेल कार्यालय।

जिले का साइबर सेल कार्यालय।

साधारण नागरिक से अपराधी बनने तक का सफर ​भास्कर की पड़ताल में एक डरावना सामाजिक पहलू भी सामने आया। पहले साइबर अपराध के लिए जामताड़ा जैसे गिरोहों की जरूरत होती थी, लेकिन अब यह तकनीक एक आम आदमी, छात्र या बेरोजगार युवक के हाथ में पहुंच गई है। ​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह ऐप अब कॉलेज के लड़कों और छोटे-मोटे नशेड़ियों के बीच भी चर्चा का विषय है। एक साधारण व्यक्ति, जिसे कभी पुलिस थाने का रास्ता नहीं पता था, वह भी इस ऐप के लालच में आकर ₹100-200 की ठगी कर रहा है। यह प्रवृत्ति कटनी के सामाजिक ढांचे के लिए घातक है, क्योंकि यह नई पीढ़ी को आसान पैसे और अपराध की ओर धकेल रही है।

कटनी का एसपी कार्यालय।

कटनी का एसपी कार्यालय।

​नोटिफिकेशन पर भरोसा करें, स्क्रीन पर नहीं ​

व्यापारियों और आम जनता के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि ग्राहक का मोबाइल देखने के बजाय अपने मोबाइल पर आए SMS या Bank App के नोटिफिकेशन पर भरोसा करें। ​Sound Box है सबसे कारगर पेटीएम, फोनपे या गूगल-पे के ‘साउंड बॉक्स’ (स्पीकर) लगवाएं। जब तक डिब्बा न बोले, तब तक ग्राहक को जाने न दें। ​History Verify करें अपने ऐप की Transaction History खोलें और देखें कि क्या अभी वाला ट्रांजेक्शन सबसे ऊपर दिख रहा है। ​APK फाइल से तौबा कोई भी अनजान व्यक्ति अगर आपको कोई ऐप भेजने या डाउनलोड करने को कहे, तो उसे तुरंत ब्लॉक करें अपनी दुकान पर कम से कम एक कैमरा पेमेंट काउंटर की ओर जरूर रखें ताकि अपराधी के चेहरे और उसके मोबाइल की गतिविधि को रिकॉर्ड किया जा सके।

छोटे व्यापारियों को जागरूक होना होगा ​कटनी में फैल रहा यह साइबर फ्रॉड केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए व्यापारियों के संगठनों, व्यापार मंडलों और स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना होगा। जब तक हर छोटा व्यापारी जागरूक नहीं होगा, तब तक ये ठग तकनीक की आड़ में आम आदमी के पसीने की कमाई लूटते रहेंगे।

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डिजिटल क्रांति ने भारत के छोटे से छोटे कस्बे को ग्लोबल मार्केट से जोड़ दिया है, लेकिन इसी क्रांति की ओट में ‘साइबर ठगों’ ने एक ऐसा वायरस तैयार किया है जो बिना इंटरनेट के भी आपकी मेहनत की कमाई पर डाका डाल रहा है। मध्य प्रदेश का कटनी जिला, जो अपने व्या

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क्यूआर कोड लगाकर सब्जी बेचता विक्रेता।

केस 1: ममता की आड़ में धोखाधड़ी ​बड़वारा ग्राम की बबीता सिंह रघुवंशी, जो ‘कपिल ऑनलाइन’ नाम से एक छोटी सी दुकान चलाती हैं, इस नए दौर की ठगी का पहला बड़ा उदाहरण हैं। उनके पास एक युवक आया, जिसने खुद को बहुत मजबूर बताया। उसने कहा कि उसके पास घर जाने के लिए किराया नहीं है और बैंक सर्वर डाउन होने के कारण वह पैसे नहीं निकाल पा रहा।

बबीता जी ने इंसानियत के नाते उसे ₹200 नकद देने का मन बनाया। युवक ने उनका QR कोड स्कैन किया। मोबाइल की स्क्रीन पर ‘बबीता सिंह’ का नाम चमका, और फिर एक चिर-परिचित ‘टिन-टिन’ की आवाज के साथ Payment Successful का मैसेज आया।

युवक चला गया, लेकिन शाम को जब बबीता जी ने बैंक स्टेटमेंट देखा, तो वह ₹200 कहीं दर्ज ही नहीं थे। यह सिर्फ ₹200 की बात नहीं थी, यह उस भरोसे की हत्या थी जो एक ग्रामीण व्यापारी डिजिटल सिस्टम पर करता है।

​केस 2: पसीने की कमाई पर डाका ​विश्राम बाबा गेट के पास फल और सब्जी का ठेला लगाने वाले कमल कार्तिकेय जैसे लोग इस ठगी के सबसे आसान शिकार हैं। कमल बताते हैं कि पिछले एक सप्ताह में उनके साथ दो बार ऐसा हुआ। वह दिन भर धूप में खड़े होकर हजार-बारह सौ का व्यापार करते हैं।

शाम को जब उन्होंने अपनी PhonePe हिस्ट्री चेक की, तो पता चला कि दो ग्राहकों के ₹600 लगभग आधा मुनाफा.खाते में आए ही नहीं थे। कमल कहते हैं, साहब, उन्होंने मुझे मोबाइल पर रसीद दिखाई थी, जिसमें मेरा नाम और ₹300 लिखे थे। मुझे लगा पैसा आ गया। अब हम जैसों को क्या पता कि मोबाइल की स्क्रीन भी झूठ बोल सकती है।

छोटी दुकान चलाने वाली युवती।

छोटी दुकान चलाने वाली युवती।

कैसे काम करता है यह जाली साम्राज्य ​भास्कर की टीम ने इस मामले में तकनीकी विशेषज्ञों और एक स्थानीय नागरिक की मदद ली जिसने अपने फोन पर इस APK फाइल को इंस्टॉल किया था। इस ऐप का विश्लेषण करने पर जो बातें सामने आईं, वे चौंकाने वाली हैं

यह कोई साधारण ऐप नहीं है। इसे डार्क वेब या थर्ड-पार्टी टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फैलाया जा रहा है। इसका इंटरफेस असली PhonePe से 99% मेल खाता है। फोंट, रंग, एनीमेशन और यहां तक कि वह ‘ब्लू टिक’ भी इसमें मौजूद है जो सफल भुगतान का प्रतीक है। और सबसे खतरनाक बात यह है कि यह ऐप ऑफलाइन काम करता है।

असली ऐप को पेमेंट प्रोसेस करने के लिए सर्वर से जुड़ना पड़ता है, लेकिन यह जाली ऐप केवल एक ‘एनीमेशन जनरेटर’ है। आप कोई भी नंबर या नाम डालें, यह तुरंत ‘सफल भुगतान’ दिखा देगा। ठग अक्सर ऐसी जगहों पर इसका इस्तेमाल करते हैं जहाँ नेटवर्क कम हो, ताकि वे नेटवर्क की समस्या का बहाना बनाकर जल्दी से निकल सकें। जब ठग किसी व्यापारी का QR कोड स्कैन करता है, तो यह ऐप मोबाइल के कैमरा और ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) तकनीक का इस्तेमाल कर स्कैनर पर लिखा नाम पढ़ लेता है। जैसे ही ठग ₹500 भरता है, ऐप तुरंत दिखाता है- “Paid to [Merchant Name] ₹500″। दुकानदार को लगता है कि ऐप ने उसका नाम पहचान लिया है, तो पैसा भी आ ही गया होगा।

फल और सब्जी व्यापारी।

फल और सब्जी व्यापारी।

अवैध वेबसाइट होते हैं डाउनलोड ​इस मामले ने कटनी पुलिस के सामने एक नई चुनौती पेश कर दी है। समाजसेवी इंद्र मिश्रा ने पुलिस नगर अधीक्षक को एक लिखित शिकायत दी है, शिकायत में मांग की गई है कि ​APK फाइलों पर प्रतिबंध: गूगल प्ले स्टोर पर ऐसे ऐप्स नहीं होते, ये अवैध वेबसाइटों से डाउनलोड किए जाते हैं। पुलिस को इन लिंक्स को ब्लॉक करना चाहिए। शिकायत में मांग की गई है कि साइबर सेल केवल बड़ी ठगी का इंतजार न करे, बल्कि इन छोटे-छोटे मामलों को मिलाकर एक ‘सीरियल फ्रॉड’ के रूप में जांचे। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ऐप का इस्तेमाल करना और बनाना सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 66D (कंप्यूटर संसाधन का उपयोग कर धोखाधड़ी) और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत गंभीर अपराध है। इसमें 3 साल तक की जेल और भारी जुर्माने का प्रावधान है।

​नहीं हुई अब तक लिखित शिकायत कटनी जिले के साइबर प्रभारी अनूप सिंह ने स्पष्ट किया कि अभी तक किसी ने इस संबंध में ‘लिखित एफआईआर दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने कहा, “हमें पता चला है कि इस तरह की ऐप्स बाजार में हैं। हम इसकी तकनीकी जांच कर रहे हैं। व्यापारियों को डरने की जरूरत नहीं है, बस सावधान रहने की जरूरत है।

जिले का साइबर सेल कार्यालय।

जिले का साइबर सेल कार्यालय।

साधारण नागरिक से अपराधी बनने तक का सफर ​भास्कर की पड़ताल में एक डरावना सामाजिक पहलू भी सामने आया। पहले साइबर अपराध के लिए जामताड़ा जैसे गिरोहों की जरूरत होती थी, लेकिन अब यह तकनीक एक आम आदमी, छात्र या बेरोजगार युवक के हाथ में पहुंच गई है। ​स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह ऐप अब कॉलेज के लड़कों और छोटे-मोटे नशेड़ियों के बीच भी चर्चा का विषय है। एक साधारण व्यक्ति, जिसे कभी पुलिस थाने का रास्ता नहीं पता था, वह भी इस ऐप के लालच में आकर ₹100-200 की ठगी कर रहा है। यह प्रवृत्ति कटनी के सामाजिक ढांचे के लिए घातक है, क्योंकि यह नई पीढ़ी को आसान पैसे और अपराध की ओर धकेल रही है।

कटनी का एसपी कार्यालय।

कटनी का एसपी कार्यालय।

​नोटिफिकेशन पर भरोसा करें, स्क्रीन पर नहीं ​

व्यापारियों और आम जनता के लिए साइबर एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि ग्राहक का मोबाइल देखने के बजाय अपने मोबाइल पर आए SMS या Bank App के नोटिफिकेशन पर भरोसा करें। ​Sound Box है सबसे कारगर पेटीएम, फोनपे या गूगल-पे के ‘साउंड बॉक्स’ (स्पीकर) लगवाएं। जब तक डिब्बा न बोले, तब तक ग्राहक को जाने न दें। ​History Verify करें अपने ऐप की Transaction History खोलें और देखें कि क्या अभी वाला ट्रांजेक्शन सबसे ऊपर दिख रहा है। ​APK फाइल से तौबा कोई भी अनजान व्यक्ति अगर आपको कोई ऐप भेजने या डाउनलोड करने को कहे, तो उसे तुरंत ब्लॉक करें अपनी दुकान पर कम से कम एक कैमरा पेमेंट काउंटर की ओर जरूर रखें ताकि अपराधी के चेहरे और उसके मोबाइल की गतिविधि को रिकॉर्ड किया जा सके।

छोटे व्यापारियों को जागरूक होना होगा ​कटनी में फैल रहा यह साइबर फ्रॉड केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए व्यापारियों के संगठनों, व्यापार मंडलों और स्वयंसेवी संस्थाओं को आगे आना होगा। जब तक हर छोटा व्यापारी जागरूक नहीं होगा, तब तक ये ठग तकनीक की आड़ में आम आदमी के पसीने की कमाई लूटते रहेंगे।

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