चिकन बनाने से पहले धोना चाहिए या नहीं? अगर आप करते हैं ये गलती तो कोई फायदा नहीं, जानें क्या कहते हैं एक्सपर्ट

Last Updated:April 29, 2026, 16:11 IST फूड सेफ्टी एक्सपर्ट्स के मुताबिक कच्चे चिकन को धोना जरूरी नहीं, इससे बैक्टीरिया किचन में फैल सकते हैं. चिकन को लगभग 75 डिग्री पर अच्छी तरह पकाना ज्यादा सुरक्षित है. ख़बरें फटाफट घर में चिकन बनाते समय ज्यादातर लोग सबसे पहले उसे पानी से अच्छी तरह धोते हैं. कई लोगों को लगता है कि ऐसा करने से चिकन साफ हो जाता है, बदबू निकल जाती है और बैक्टीरिया भी खत्म हो जाते हैं. यह आदत सालों से रसोई में चली आ रही है, इसलिए लोग इसे सही मानते हैं. लेकिन फूड सेफ्टी एक्सपर्ट्स का कहना है कि कच्चे चिकन को पकाने से पहले धोना जरूरी नहीं है, बल्कि कई मामलों में यह नुकसानदायक भी साबित हो सकता है. यह सुनकर हैरानी जरूर होती है, लेकिन इसके पीछे वैज्ञानिक वजह भी है. TOI में छपी रिपोर्ट के अनुसार, कच्चे चिकन में कई तरह के हानिकारक बैक्टीरिया हो सकते हैं, जैसे साल्मोनेला और कैंपिलोबैक्टर. ये बैक्टीरिया पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं. लोग सोचते हैं कि पानी से धोने पर ये बैक्टीरिया हट जाएंगे, लेकिन असल में सिर्फ पानी डालने से ये खत्म नहीं होते. उल्टा, जब चिकन को नल के नीचे धोया जाता है, तो पानी के छींटों के साथ बैक्टीरिया सिंक, किचन स्लैब, बर्तनों, कपड़ों और हाथों तक फैल सकते हैं. यही वजह है कि एक्सपर्ट्स चिकन धोने से मना करते हैं. विशेषज्ञों के अनुसार, चिकन को धोने से ज्यादा जरूरी है उसे सही तरीके से पकाना. जब चिकन को अच्छी तरह हाई तापमान पर पकाया जाता है, तब उसमें मौजूद बैक्टीरिया खत्म हो जाते हैं. इसलिए सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि चिकन को पूरी तरह पकाएं. अगर चिकन अंदर से कच्चा रह जाए या हल्का गुलाबी दिखे, तो बैक्टीरिया बच सकते हैं. इसलिए चिकन पकाते समय ध्यान रखें कि वह अच्छी तरह से तैयार हो जाए. अगर फूड थर्मामीटर हो तो उसका तापमान लगभग 75 डिग्री सेल्सियस या 165 फारेनहाइट तक पहुंचना बेहतर माना जाता है. कई लोगों को चिकन की सतह पर चिपचिपापन महसूस होता है, इसलिए वे उसे धोना पसंद करते हैं. अगर यही वजह है, तो पानी से धोने के बजाय पेपर टॉवल या साफ टिश्यू से हल्के हाथ से पोंछा जा सकता है. इससे अतिरिक्त नमी और सतह की चिपचिपाहट कम हो सकती है. इसके बाद चिकन को सीधे मसालों में मेरिनेट करके पकाना बेहतर विकल्प है. इस तरीके से स्वाद भी अच्छा आता है और बैक्टीरिया फैलने का खतरा भी कम रहता है. अगर कोई व्यक्ति फिर भी चिकन धोना चाहता है, तो बहुत सावधानी बरतनी चाहिए. चिकन धोने के बाद सिंक, नल, प्लेटफॉर्म और आसपास की जगह को अच्छे से साफ करें. जिस चाकू, कटिंग बोर्ड या बर्तन का इस्तेमाल किया गया हो, उन्हें गर्म पानी और साबुन से धोना चाहिए. साथ ही हाथों को भी कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से धोना जरूरी है. इससे बैक्टीरिया फैलने का खतरा कम किया जा सकता है. कच्चे चिकन को स्टोर करने का तरीका भी बहुत अहम है. इसे हमेशा ढककर फ्रिज में रखें और दूसरे खाने की चीजों से अलग रखें, ताकि उसका रस किसी और खाद्य पदार्थ पर न लगे. फ्रीजर या फ्रिज में नीचे की शेल्फ पर रखना बेहतर माना जाता है. इससे क्रॉस कंटैमिनेशन का खतरा कम होता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : April 29, 2026, 16:10 IST
Delhi high court Virtual Hearing Disrupted by Porn Video; Chief Justice Present

Hindi News National Delhi High Court Virtual Hearing Disrupted By Porn Video; Chief Justice Present 7 मिनट पहले कॉपी लिंक दिल्ली हाईकोर्ट में बुधवार को लाइव वर्चुअल सुनवाई के दौरान अश्लील वीडियो और म्यूजिक चल गया। उस वक्त चीफ जस्टिस देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तेजस खरिया की बेंच सुनवाई कर रही थी। दोपहर करीब 12:56 बजे सुनवाई के दौरान अचानक पोर्न वीडियो चलने लगा। इसके तुरंत बाद सुनवाई रोक दी गई। कुछ मिनट बाद सुनवाई दोबारा शुरू हुई, तो ‘Sh**t Singh’ नाम से लॉगिन करने वाले यूजर ने फिर पोर्न वीडियो चला दिया। वीडियो कॉन्फ्रेंस के दौरान वीडियो दो बार स्क्रीन पर दिखाई दिया। स्क्रीन पर हैक होने का मैसेज इसके बाद उसी यूजर ने ‘आपका सिस्टम हैक हो गया है’, का मैसेज स्क्रीन पर दिखाना शुरू कर दिया। फिर तीसरी बार उसने म्यूजिक चलाकर सुनवाई में बाधा डाली। इसके बाद चीफ जस्टिस को वर्चुअल कार्यवाही बंद करनी पड़ी। मामले की शिकायत दिल्ली पुलिस की IFSO यूनिट को दी गई है, जो इसकी जांच कर रही है। मामले पर एडिशनल सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने इस मुद्दे को चीफ जस्टिस के सामने कहा कि पहले भी कई अदालतों की वर्चुअल कार्यवाही के दौरान ऐसी चिंताजनक घटनाएं हुईं। इससे कोर्ट की गरिमा पर आसर पड़ता है। 17 सितंबर को दिल्ली कोर्ट में वर्चुअल सुनवाई में अंडरगार्मेंट्स पहने शामिल हुआ शख्स। कोर्ट में अश्लील वीडियो क्लिप की पिछली घटनाएं… 2025- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (मुंबई) में दिसंबर 2024 में डिजिटल डिस्प्ले सिस्टम हैक होने के कारण अदालत के स्क्रीन पर अश्लील वीडियो क्लिप चल गए। 2025- नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (कोलकाता) में जुलाई 2025 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुनवाई के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति ने जुड़कर अश्लील कंटेंट स्क्रीन-शेयर कर दिया। 2024- गुजरात हाई कोर्ट में अगस्त 2025 में वीडियो सुनवाई के दौरान एक व्यक्ति के टॉयलेट से जुड़ने जैसी अभद्र घटनाओं के बाद कोर्ट ने कड़े नियम (SOP) लागू किए। 2021- इलाहाबाद हाई कोर्ट में साल 2021 में एक वकील द्वारा स्कूटर चलाते हुए वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बहस करने को कोर्ट ने अनुशासनहीनता माना। ———————————————– ये खबर भी पढ़ें… वर्चुअल कोर्ट सुनवाई में अंडरगार्मेंट्स पहने शामिल हुआ शख्स गिरफ्तार:शराब-सिगरेट भी पीता दिखा था, कोर्ट के आदेश पर भी नहीं माना दिल्ली पुलिस ने कोर्ट की वर्चुअल सुनवाई में शर्मनाक हरकत करने वाले शख्स को गिरफ्तार किया है। आरोपी वीडियो कॉन्फ्रेंस में सिर्फ अंडरगार्मेंट्स पहनकर शामिल हुआ और शराब-सिगरेट पीता रहा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
IPL 2026: आज मुंबई इंडियंस बनाम सनराइजर्स हैदराबाद:ईशान किशन पर टिकेंगी सबकी नजरें, अबतक के 7 मैचों में बनाए हैं 238 रन

आईपीएल 2026 में आज मुंबई इंडियंस और सनराइजर्स हैदराबाद के बीच मैच खेला जाएगा। आज फिर सबकी नजरें हैदराबाद से खेल रहे बिहार के खिलाड़ी ईशान किशन पर रहेंगी। आज के मुकाबले में ईशान की बल्लेबाजी SRH के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है। ईशान किशन ने IPL 2026 के जारी सीजन में सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) की कप्तानी (स्टैंड-इन कप्तान) करते हुए अब तक शानदार प्रदर्शन किया है। उन्होंने इस सीजन में अपनी बल्लेबाजी से कई महत्वपूर्ण पारियां खेली हैं। IPL 2026 में ईशान किशन का प्रदर्शन रन: 7 मैच में 238 रन औसत और स्ट्राइक रेट: बल्लेबाजी औसत 34.00 और स्ट्राइक रेट 188.88 अर्धशतक: 2 सर्वश्रेष्ठ स्कोर: 91 रन हालिया मैच: राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ 31 गेंदों में 11 चौकों और 3 छक्कों से 74 रन वानखेड़े में रन बरसने की पूरी उम्मीद मैच मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में शाम 7:30 बजे से खेला जाएगा। यह मैदान हाई-स्कोरिंग मुकाबलों के लिए जाना जाता है और यहां की छोटी बाउंड्री बल्लेबाजों को खुलकर खेलने का मौका देती है। अब तक यहां खेले गए कई मुकाबलों में 200+ स्कोर देखने को मिले हैं, जिससे साफ है कि आज भी रन बरसने की पूरी उम्मीद है। मौसम रहेगा साफ, बारिश की कोई आशंका नहीं मैच के दौरान बारिश की कोई संभावना नहीं है। तापमान 28 से 31 डिग्री के बीच रहने का अनुमान है, यानी खिलाड़ियों और दर्शकों दोनों के लिए परिस्थितियां अनुकूल रहेंगी। अगर टीमों के मौजूदा फॉर्म पर नजर डालें तो मुंबई इंडियंस इस सीजन में संघर्ष करती दिखी है। टीम को 7 में से 5 मैचों में हार का सामना करना पड़ा है और वह पॉइंट्स टेबल में निचले पायदान पर है। हालांकि, रोहित शर्मा की संभावित वापसी टीम के लिए बड़ी राहत हो सकती है। दूसरी ओर सनराइजर्स हैदराबाद शानदार फॉर्म में है और लगातार 4 मैच जीतकर टॉप-3 में अपनी जगह मजबूत कर चुकी है। हेड टू हेड में मुंबई का पलड़ा भारी हेड-टू-हेड आंकड़ों में भी मुंबई इंडियंस का पलड़ा भारी रहा है। दोनों टीमों के बीच अब तक 25 मुकाबले खेले गए हैं, जिनमें मुंबई ने 14 और हैदराबाद ने 10 मैच जीते हैं, जबकि एक मैच टाई रहा। वानखेड़े में भी मुंबई का रिकॉर्ड बेहतर है, जहां 9 मुकाबलों में से 7 में उसे जीत मिली है। इस सीजन के प्रदर्शन की बात करें तो हैदराबाद के लिए अभिषेक शर्मा टॉप स्कोरर हैं, जिन्होंने 8 मैचों में 380 रन बनाए हैं। वहीं गेंदबाजी में ईशान malinha ने 14 विकेट लेकर टीम को मजबूती दी है। दूसरी तरफ मुंबई के लिए तिलक वर्मा ने मिडिल ऑर्डर में अहम योगदान दिया है, जबकि अश्वनी कुमार ने कम मैचों में ही गेंदबाजी से असर छोड़ा है।
धनिया मिर्ची की चटनी रेसिपी: गरमा गरम पेट की चटनी में धनिया-मिर्ची की चटनी, खाने का स्वाद भी होगा दोगुना; विधि नोट करें

आवश्यक सामग्री: हरा धनिया, 2-3 हरी मिर्च, 3-4 लहसुन की कलियाँ, 1 छोटा मसाला अदरक, 1-2 मसाले का रस, स्वादानुसार नमक, 1-2 मसाला पानी छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले हरे धनिये को अच्छी तरह धो लें ताकि कोई मिट्टी न रह जाए। अब मिक्सर जार में धनिया, हरी मिर्च, लहसुन और अदरक डालें। छवि: फ्रीपिक इसमें नमक और थोड़ा सा पानी इलेक्ट्रोलाइट पीस लें। अब तैयार है मेन्यूलैब का रसोइये महानतम से मिला लें। आपका स्वादिष्ट धनिया-मिर्ची की रेसिपी तैयार है। छवि: फ्रीपिक यह मैकेनिज्म पेट को ठंडक देता है, क्योंकि धनिया शरीर की गर्मी को कम करने में मदद करता है। खाने के साथ लेना भूख फ्रैंक तलाशना है। शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में सहायक होता है। छवि: एआई यह पाचन क्रिया को मजबूत बनाता है। इस रेसिपी को आप परांठे, दाल-चावल, रोटी-सब्जी या फिर समोसा, पकौड़े के साथ खा सकते हैं. छवि: फ्रीपिक अगर आप स्वाद में थोड़े बदलाव चाहते हैं, तो इसमें पुदीना के पत्ते भी मिला सकते हैं। इससे नौकर और भी लालची और अल्पविकसित कर्मचारी। छवि: मेटा एआई
वैज्ञानिकों को मिला डेंजरस लिंक, मोटापा से 13 तरह के कैंसर का खतरा, कम करने के क्या है उपाय

Last Updated:April 29, 2026, 15:55 IST Obesity link to 13 Type of Cancer: मोटापा ऐसी बीमारी है जो लिवर, हार्ट और किडनी की बीमारियों को बढ़ा देता है. अब तक हमें यही पता था लेकिन अब एक नई स्टडी में यह दावा किया जा रहा है कि मोटापा 13 तरह के कैंसर के जोखिम को बढ़ा देता है. इसलिए शरीर का अधिक वजन बेहद जानलेवा साबित हो सकता है. ऐसे में हर हाल में मोटापा को कम करने की जरूरत है. मोटापे से कैंसर का खतरा. Obesity link to 13 Type of Cancer: मोटापा आपकी सोच से कहीं ज्यादा खतरनाक बीमारी है. मोटापा इतना खतरनाक बनता जा रहा है कि इसकी वजह से 13 तरह के कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है. ऐसे में इसे महज खबर न समझें बल्कि यह समय रहते सचेत होने का अलर्ट है. ब्रिटेन में जितने लोगों को कैंसर होते है उनमे से आधे लोगों को किसी न किसी तरह से मोटापा ही वजह है. ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने पाया है कि कैंसर होने के बाद महज कभी-कभार वजन करना जीवन को जोखिम में डालने जैसा है क्योंकि मोटापा कैंसर मरीजों के जीवन को बहुत प्रभावित करता है. यह तो कैंसर होने के बाद की स्थिति है लेकिन खतरनाक स्थिति यह है कि अधिकांश कैंसर का संबंध मोटापा से जुड़ा हुआ है. सिर्फ एक बार वजन करना काफी नहीं अध्ययन के मुताबिक मोटापा कम से कम 13 प्रकार के कैंसर से जुड़ा हुआ पाया गया है. इसलिए एक्सपर्ट ने चेतावनी देते हुए कहा है कि वजन को कम करना बेहद आवश्यक है. वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड के डॉ. हेलेन क्रोकर ने बताया कि इस शोध के बाद एक बात तो तय है कि जब डॉक्टर किसी व्यक्ति का किसी भी बीमारी का इलाज कर रहा है कि तो उसके वजन से संबंधित इतिहास को जरूर ध्यान में रखना चाहिए. इसी आधार पर आगे का इलाज करना चाहिए. उन्होंने कहा कि हालांकि मोटापा और कैंसर के जोखिम के बीच संबंध अच्छी तरह स्थापित है, लेकिन कैंसर के परिणामों पर इसका प्रभाव अभी भी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है. ऐसे में केवल इलाज शुरू होने के समय के बीएमआई पर निर्भर रहना उचित नहीं है. इससे कैंसर का पूर्वानुमान लगाने में भूल हो सकती है. शोधकर्ताओं ने एक दशक तक इस अध्ययन में शामिल लोगों के हेल्थ डेटा का खंगाला इसके बाद पाया कि सभी 13 प्रकार के कैंसर में इसकी दर 50 प्रतिशत से अधिक थी.यानी जितने लोगों को कैंसर हुआ उनमें 50 प्रतिशत लोगों में किसी न किसी तरह का मोटापा था. इन 13 अंगों पर मंडरा रहा है खतरा शोधकर्ताओं के अनुसार मोटापे के कारण जिन अंगों में कैंसर का जोखिम सबसे ज्यादा होता है, वे हैं ब्रेस्ट कैंसर (मेनोपॉज के बाद), कोलोरेक्टल कैंसर, गर्भाशय (एंडोमेट्रियल) कैंसर, इसोफेगस कैंसर, गॉल ब्लैडर कैंसर, किडनी कैंसर, लिवर कैंसर, पैंक्रिएटिक कैंसर, ओवरी कैंसर, थायरॉयड कैंसर, मल्टीपल मायलोमा, पेट का ऊपरी हिस्से में कैंसर, मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में कैंसर. कैंसर का खतरा कम करने के उपायकैंसर को कम करने का सबसे बेहतर तरीका यही है कि कुदरती तरीके से रहिए. जैसे सौ साल पहले हमारे पूर्वज रहते थे, वैसा ही रहिए. मसलन घर का कुदरती भोजन कीजिए, ताजा भोजन कीजिए, साग-सब्जी का सेवन कीजिए, फल, सीड्स, साबुत अनाज आदि खाइए. बाहर की पैकेटबंद चीजें, आधुनिक खान -पान जैसे कि पिज्जा, बर्गर, दारु, शराब, सिगरेट, गुटखा, खैनी जैसी चीजों को कभी भी हाथ न लगाएं. प्रोसेस्ड शुगर और मैदा कम करें. शरीर में हाई इंसुलिन लेवल कैंसर सेल्स के लिए ईंधन का काम करता है. खराब तरह के कार्बोहाइड्रैट इस इंसुलिन को बढ़ा देता है. इसके बाद पहले के लोगों की तरह एक्टिव लाइफस्टाइल रखिए. हमेशा शरीर को थकाते रहिए. हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की एक्सरसाइज कीजिए. इसमें ब्रिस्क वॉकिंग, रनिंग, घर का भारी काम, वजन उठाना, सीढ़िया चढ़ना आदि गतिविधियां करते रहिए. वजन को बढ़ने न दीजिए. डाइट में एंटी-ऑक्सीडेंट चीजों को शामिल कीजिए. अपनी थाली में रंग-बिरंगी सब्जियां और फल बढ़ाएं. ये शरीर के भीतर होने वाले ऑक्सीडेटिव डैमेज को रोकते हैं. अगर आपका BMI 30 से ऊपर है, तो डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से कैंसर स्क्रीनिंग टेस्ट कराते रहें. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 29, 2026, 15:55 IST
पन्ना में युवक संदिग्ध परिस्थितियों में मिला शव:पिता ने चार लोगों पर चाकू गोदकर हत्या का आरोप लगाया

अमानगंज थाना क्षेत्र के ग्राम बम्होरी में 30 वर्षीय युवक अनिल दहायत का शव ककरन तलैया के पास संदिग्ध अवस्था में मिला। बुधवार, 29 अप्रैल को मिले इस शव पर धारदार हथियार से वार के निशान पाए गए हैं। मृतक अनिल दहायत मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उसके निधन से उसकी दो बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है। मृतक के पिता बैजू दहायत ने गांव के चार व्यक्तियों पर अनिल की हत्या का आरोप लगाया है। उन्होंने बताया कि अनिल मंगलवार शाम करीब 5 बजे घर से निकला था और वापस नहीं लौटा। बुधवार सुबह गांव वालों ने उन्हें तलैया के पास शव मिलने की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपियों की तलाश जारी है। हत्या के वास्तविक कारणों का खुलासा जांच पूरी होने के बाद ही होगा। एसडीओपी राजीव सिंह भदौरिया ने बताया कि अमानगंज थाना क्षेत्र के बम्होरी गांव में अनिल दहायत नामक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। उसका शव गांव के बाहर तालाब के पास संदिग्ध परिस्थितियों में मिला। एसडीओपी के अनुसार, युवक के शरीर पर धारदार हथियारों के कई निशान हैं। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि मृतक नशे का आदी था और घटना के समय उसके साथ किसी अन्य व्यक्ति के होने के सबूत मिले हैं। पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कर शव का पोस्टमार्टम कराया है और गहन जांच जारी है। उन्होंने जल्द ही मामले का खुलासा करने का आश्वासन दिया।
पश्चिम बंगाल फैसला: 7 बनाने या तोड़ने वाले कारक जो परिणाम को आकार दे सकते हैं | भारत समाचार

आखरी अपडेट:29 अप्रैल, 2026, 15:33 IST एसआईआर बंगाल चुनाव का सबसे बड़ा फ्लैशप्वाइंट बनकर उभरा है। 90 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.75 करोड़ हो गई है। बीजेपी ने 2019 और 2021 के बाद से काफी विस्तार किया है और खुद को टीएमसी के मुख्य विकल्प के रूप में स्थापित किया है। पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: पश्चिम बंगाल चुनाव के लिए दूसरे चरण का मतदान समाप्त होने में केवल कुछ ही घंटे बचे हैं, अब ध्यान इस बात पर केंद्रित हो गया है कि क्या तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सत्ता पर बनी रहेगी या भाजपा आखिरकार सरकार बनाने के लिए ममता बनर्जी के गढ़ में सेंध लगाएगी। भाजपा के अभियान का नेतृत्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने किया, साथ ही पार्टी के कई मुख्यमंत्रियों ने भी बड़े पैमाने पर प्रचार किया, क्योंकि पार्टी पश्चिम बंगाल में अपनी पहली सरकार बनाना चाहती है। दूसरी ओर, ममता बनर्जी ने टीएमसी के चुनाव अभियान का नेतृत्व किया, जबकि इसके स्थानीय नेतृत्व और कैडर एक और कार्यकाल सुरक्षित करने के लिए सड़कों पर उतरे। यहां 2026 पश्चिम बंगाल के फैसले को आकार देने वाले बनाने या तोड़ने वाले कारकों का विवरण दिया गया है: 1. सर और घुसपैठ मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) इस चुनाव का सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है। 90 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए हैं, जिससे कुल मतदाताओं की संख्या 7.66 करोड़ से घटकर 6.75 करोड़ हो गई है। टीएमसी ने आरोप लगाया है कि यह कवायद उसके समर्थकों को “मताधिकार से वंचित करने की साजिश” है। हालाँकि, भाजपा ने अपनी घुसपैठ की कहानी को दोगुना कर दिया है, यह तर्क देते हुए कि संशोधन अवैध प्रवासियों और “फर्जी मतदाताओं” को हटाने के लिए एक आवश्यक सफाई अभियान है, खासकर सीमावर्ती जिलों में। 2. महिला वोट: ‘शी-शक्ति शक्ति’ महिलाएं लंबे समय से टीएमसी के समर्थन का आधार रही हैं, जिन्हें लक्ष्मीर भंडार जैसी कल्याणकारी योजनाओं से बल मिला है। हालाँकि, भाजपा ने अपने “मातृ शक्ति” अभियान के माध्यम से इस महत्वपूर्ण वर्ग तक अपनी पहुंच बढ़ा दी है, और केंद्रीय कल्याण लाभों तक पहुंच में बढ़ी हुई सुरक्षा और समानता का वादा किया है। महिलाओं का वोट महाराष्ट्र और बिहार सहित कई चुनावों में निर्णायक साबित हुआ है, जहां भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारों ने विधानसभा चुनावों से पहले नकद हस्तांतरण योजनाएं शुरू कीं। भाजपा ने संसद में महिला आरक्षण के परिसीमन से जुड़े कार्यान्वयन के खिलाफ विपक्ष के एकजुट रुख की ओर इशारा करते हुए टीएमसी को “महिला विरोधी” के रूप में चित्रित करने की भी कोशिश की है। 3. एकीकरण बनाम अल्पसंख्यक वोटों का विभाजन लगभग 30% मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करने वाला, अल्पसंख्यक वोट टीएमसी की सबसे महत्वपूर्ण ढाल है। हालाँकि, आईएसएफ का उद्भव और मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे जिलों में अधिक मुखर वामपंथी और कांग्रेस की उपस्थिति एक संभावित फ्रैक्चर का संकेत देती है। यदि इस ब्लॉक का एक छोटा प्रतिशत भी टीएमसी से दूर चला जाता है, तो दक्षिण 24 परगना और उत्तरी बंगाल की कई सीटें भाजपा की ओर जा सकती हैं। हालाँकि, एसआईआर और घुसपैठ पर भाजपा का आक्रामक रुख मुसलमानों को ममता बनर्जी के पीछे खड़े होने के लिए एकजुट कर सकता है। 4. वाम-कांग्रेस का “मौन” लाभ जबकि मुकाबला काफी हद तक टीएमसी और बीजेपी के बीच द्विध्रुवीय है, वाम मोर्चा और कांग्रेस का कोई भी पुनरुत्थान संतुलन को बिगाड़ सकता है। यदि इन पार्टियों का दबदबा बढ़ता है, तो वे दो मुख्य दावेदारों के वोट शेयर में कटौती कर सकते हैं। वामपंथियों या कांग्रेस की ओर हिंदू वोटों का झुकाव प्रमुख सीटों पर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकता है, जबकि उनके पीछे मुस्लिम वोटों का एकीकरण टीएमसी के समर्थन आधार को नष्ट कर सकता है। 5 कारण जिनकी वजह से बीजेपी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को खत्म कर सकती है 5. ‘बंगाली अस्मिता’ बनाम हिंदुत्व टीएमसी ने भाजपा के हिंदुत्व आख्यान का मुकाबला करने के लिए “बंगाली अस्मिता” के नारे का उपयोग करते हुए चुनाव को “बाहरी लोगों” से बंगाली संस्कृति की रक्षा करने की लड़ाई के रूप में तैयार किया है। यह सांस्कृतिक रस्साकशी विशेष रूप से चरण 2 की 142 सीटों पर प्रबल है, जहां दक्षिण बंगाल के गढ़ की क्षेत्रीय पहचान अक्सर भाजपा की राष्ट्रवादी पिच से टकराती है। 6. प्रवासी मतदाताओं की “वापसी”। इस डर से कि उनके वोट मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे, देश भर से हजारों प्रवासी कामगार अपना मतदान करने के लिए पश्चिम बंगाल लौट आए। एक महत्वपूर्ण मतदाता आधार का प्रतिनिधित्व करते हुए, उनकी पसंद निर्णायक साबित हो सकती है – यथास्थिति पर निराशा के साथ संभावित रूप से भाजपा के “परिवर्तन” की कहानी को बल मिलेगा, जबकि राज्य कल्याण योजनाओं पर निरंतर निर्भरता उन्हें टीएमसी के साथ जोड़े रख सकती है। भाजपा की बंगाल चुनाव रणनीति को डिकोड करना: नरम स्वर, स्थानीय दबाव और सांस्कृतिक रीसेट 7. 15 साल की सत्ता विरोधी लहर 15 वर्षों तक सत्ता में रहने के बाद, टीएमसी अपरिहार्य शासन थकान से जूझ रही है। सत्ता विरोधी लहर का मुकाबला करने के लिए, पार्टी ने 74 मौजूदा विधायकों को हटा दिया है और नए उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। इस रणनीति की असली परीक्षा भबनीपुर में होगी, जहां मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ेगा – एक प्रतियोगिता जिसे व्यापक रूप से राज्य के लिए मनोवैज्ञानिक बैरोमीटर के रूप में देखा जाता है। जैसे ही 2026 के विधानसभा चुनावों में मतदान समाप्त हो रहा है, ईवीएम को स्ट्रांगरूम में ले जाया जा रहा है। सभी की निगाहें अब 4 मई, 2026 पर हैं, जब गिनती से पता चलेगा कि इनमें से किस कारक ने अंततः फैसले को आकार दिया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 29 अप्रैल, 2026, 15:27 IST न्यूज़ इंडिया पश्चिम बंगाल फैसला: 7 बनाने या तोड़ने वाले कारक जो परिणाम तय कर सकते हैं अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने
पशुपालकों के लिए अलर्ट! अप्रैल-मई की गर्मी में ऐसे रखें पशुओं का ख्याल, नहीं तो होगा नुकसान

Last Updated:April 29, 2026, 15:28 IST गर्मियों का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, पशुओं के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर आता है. अप्रैल और मई की तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान का सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार सही देखभाल न होने पर पशु बीमार पड़ जाते हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गर्मियों में पशुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए. एक्सपर्ट्स ने कुछ आसान उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है. लखीमपुर खीरी. जिले में किसान अब पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. वही पशुपालन विभाग की ओर से लगातार किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है. परंतु गर्मियों के मौसम में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है. पशुपालन तो हर किसान करना चाहता है तो वही पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है. परंतु जानकारी के अभाव के कारण सही तरीके से पशुओं की देखभाल नहीं कर पाते हैं ऐसे में अप्रैल और मई के महीने में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है. इन दो महीने में सबसे अधिक हीट वेव भीषण गर्मी और लू के कारण पशुओं के दूध में कमी आती है. जिससे किसान बेहद परेशान हो जाते हैं. हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और ब्लोट (पेट फूलना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google हीट स्ट्रोक की स्थिति में पशु को तेज बुखार आ सकता है, वह हांफने लगता है, आंखें लाल हो जाती हैं. शरीर बहुत गर्म महसूस होता है. वहीं पानी की कमी होने पर पशु कमजोर पड़ जाता है. लोकल 18 से बातचीत करते हुए डॉक्टर हेमंत सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आजीविका को चलाने के लिए पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं. लेकिन गर्मियों के मौसम में पशुओं को धूप से बचाना बेहद जरूरी होता है, थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है. पशुओं को सीधे धूप और लू से बचने के लिए छायादार और हवादार स्थानों पर 11:00 से लेकर 4:00 तक सुरक्षित स्थान पर बांध कर रखें. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में तीन बार पर्याप्त मात्रा में ठंडा पानी दें. पशुओं को संतुलित आहार देते समय नमक और मिलर मिक्सर मिले. ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी ना हो. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में दो से तीन बार स्नान का ध्यान रखें. सुरक्षित छायादार स्थान का चयन कर वहीं पर ही पशुओं को स्नान कराए, धूप में पशुओं को स्नान न कराएं. First Published : April 29, 2026, 15:28 IST
समर्थन मूल्य पर चना खरीदी में अड़चनें:पंजीयन के बाद भी स्लॉट नहीं मिलने से किसान नाराज, भावांतर की भी मांग

प्रदेश में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी को लेकर किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया में लागू स्लॉट बुकिंग व्यवस्था उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई है। मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ तहसील के किसानों का चना पिपलियामंडी स्थित विपणन सहकारी समिति के माध्यम से खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि पंजीयन होने के बावजूद उन्हें स्लॉट बुकिंग नहीं मिल पा रही है, जिससे वे अपनी उपज बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई बार प्रयास के बाद भी स्लॉट नहीं मिलने से बार-बार नई तारीख दी जा रही है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंजीयन के बाद भी क्यों नई प्रक्रिया? राजेश शर्मा दोबड़ा, रुपसिंह शक्तावत, कृपाल सिंह रिंच्छा, अनिल प्रजापत (खेड़ाखादान) सहित अन्य किसानों ने बताया कि कई कोशिशों के बाद भी स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है। अधिकारियों द्वारा 6 मई से स्लॉट बुकिंग शुरू होने की बात कही जा रही है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का सवाल है कि जब पंजीयन पहले ही हो चुका है, तो स्लॉट बुकिंग जैसी अतिरिक्त प्रक्रिया क्यों लागू की गई है। जांच और सख्ती से बढ़ी देरी किसानों ने खरीदी केंद्रों पर अत्यधिक सख्ती और बार-बार जांच किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इससे खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही है और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। आर्थिक दबाव में बढ़ रही परेशानी किसानों का कहना है कि शादी-ब्याह, बच्चों की फीस और घरेलू खर्च जैसी जिम्मेदारियों के चलते उन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में स्लॉट बुकिंग जैसी जटिल प्रक्रिया उन्हें और अधिक परेशानी में डाल रही है, जिसका सीधा फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। ओलावृष्टि से नुकसान का नहीं मिला मुआवजा किसानों ने हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही बीमा राशि का भुगतान किया गया है। यह हैं किसानों की मांग चने की खरीदी समर्थन मूल्य के बजाय भावांतर योजना के तहत की जाए। स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए या समाप्त किया जाए। पंजीयन के बाद सीधे खरीदी की व्यवस्था लागू हो। ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा और बीमा राशि दी जाए।
ITC & Godfrey Phillips Shares Surge

Hindi News Business ITC & Godfrey Phillips Shares Surge | Cigarette Prices To Rise 17% In May मुंबई17 मिनट पहले कॉपी लिंक देश में अगले महीने से सिगरेट पीना महंगा हो सकता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख सिगरेट कंपनियां ITC और गॉडफ्रे फिलिप्स मई में कीमतों में 17% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। इस खबर के बाद सोमवार यानी 29 अप्रैल को इन कंपनियों के शेयरों में 6.5% तक की तेजी दर्ज की गई। मई में ₹20 तक बढ़ सकते हैं दाम डिस्ट्रीब्यूटर्स के फीडबैक और चैनल चेक के आधार पर आई एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट में कहा गया है कि कीमतों में बदलाव केवल प्रीमियम प्रोडक्ट्स तक सीमित नहीं रहेगा। कंपनियां वैल्यू-एंड ब्रांड्स (सस्ते सिगरेट) के दामों में भी इजाफा कर सकती हैं। उदाहरण के लिए ITC की गोल्डफ्लेक प्रीमियम के एक पैकेट की कीमत मई 2026 में ₹115 से बढ़कर ₹135 के करीब पहुंच सकती है। बाजार में सिगरेट कंपनियों का दबदबा 29 अप्रैल को ITC का शेयर करीब 4% और गॉडफ्रे फिलिप्स का शेयर करीब 8% की तेजी के साथ बंद हुआ। निफ्टी FMCG इंडेक्स में भी 2% की तेजी देखी गई, जिसमें ITC सबसे आगे रहा। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के रिसर्च हेड विनोद नायर के मुताबिक, सिगरेट कंपनियों के पास कीमतों को कंट्रोल करने की अच्छी ताकत है। इससे टैक्स बढ़ने के बावजूद वे अपना मुनाफा बचाने में सफल रहती हैं। एक्साइज ड्यूटी बढ़ने से लागत बढ़ी इस साल की शुरुआत में संसद ने सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल, 2025 को मंजूरी दी थी। इसके तहत सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर ड्यूटी बढ़ा दी गई है। 1 फरवरी से प्रभावी इस नियम के अनुसार, सिगरेट की लंबाई के आधार पर ₹2,050 से ₹8,500 प्रति 1,000 स्टिक की एक्साइज ड्यूटी लगाई गई है। यह ड्यूटी 40% GST के अतिरिक्त है। लंबी सिगरेट की लागत में 22-28% की बढ़ोतरी ICICI सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का कहना है कि 75-85 mm लंबी सिगरेट की कुल लागत में 22-28% की बढ़ोतरी हुई है। ITC की कुल बिक्री में 75 mm से लंबी सिगरेट का हिस्सा करीब 16% है। नई लेवी के कारण ऐसी सिगरेट के दाम प्रति स्टिक (एक सिगरेट) ₹2 से ₹3 तक बढ़ सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ी हुई कीमतों से बिक्री पर अस्थायी असर पड़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनियां मुनाफा बनाए रखेंगी। क्या होती है एक्साइज ड्यूटी और लेवी? एक्साइज ड्यूटी: यह एक इनडायरेक्ट टैक्स है जो देश में बनने वाले सामान के उत्पादन पर लगाया जाता है। इसे ‘उत्पाद शुल्क’ भी कहते हैं। सिगरेट जैसे उत्पादों पर इसे खपत घटाने और राजस्व बढ़ाने के लिए समय-समय पर बढ़ाया जाता है। लेवी: जब सरकार किसी विशेष उद्देश्य के लिए कोई टैक्स या शुल्क अनिवार्य रूप से लगाती है, तो उसे लेवी कहा जाता है। सिगरेट पर लगाई गई नई ड्यूटी इसकी कुल लागत बढ़ा देती है, जिसे कंपनियां ग्राहकों से वसूलती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…






