प्रदेश में समर्थन मूल्य पर चना खरीदी को लेकर किसानों का कहना है कि खरीदी प्रक्रिया में लागू स्लॉट बुकिंग व्यवस्था उनके लिए सबसे बड़ी बाधा बन गई है। मंदसौर जिले के मल्हारगढ़ तहसील के किसानों का चना पिपलियामंडी स्थित विपणन सहकारी समिति के माध्यम से खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि पंजीयन होने के बावजूद उन्हें स्लॉट बुकिंग नहीं मिल पा रही है, जिससे वे अपनी उपज बेचने के लिए भटकने को मजबूर हैं। कई बार प्रयास के बाद भी स्लॉट नहीं मिलने से बार-बार नई तारीख दी जा रही है, जिससे असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पंजीयन के बाद भी क्यों नई प्रक्रिया?
राजेश शर्मा दोबड़ा, रुपसिंह शक्तावत, कृपाल सिंह रिंच्छा, अनिल प्रजापत (खेड़ाखादान) सहित अन्य किसानों ने बताया कि कई कोशिशों के बाद भी स्लॉट बुकिंग नहीं हो पा रही है। अधिकारियों द्वारा 6 मई से स्लॉट बुकिंग शुरू होने की बात कही जा रही है, जिससे किसानों की चिंता और बढ़ गई है। किसानों का सवाल है कि जब पंजीयन पहले ही हो चुका है, तो स्लॉट बुकिंग जैसी अतिरिक्त प्रक्रिया क्यों लागू की गई है। जांच और सख्ती से बढ़ी देरी
किसानों ने खरीदी केंद्रों पर अत्यधिक सख्ती और बार-बार जांच किए जाने पर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि इससे खरीदी प्रक्रिया में देरी हो रही है और उन्हें कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ रहा है। आर्थिक दबाव में बढ़ रही परेशानी
किसानों का कहना है कि शादी-ब्याह, बच्चों की फीस और घरेलू खर्च जैसी जिम्मेदारियों के चलते उन्हें तत्काल पैसों की जरूरत होती है। ऐसे में स्लॉट बुकिंग जैसी जटिल प्रक्रिया उन्हें और अधिक परेशानी में डाल रही है, जिसका सीधा फायदा व्यापारी उठा रहे हैं। ओलावृष्टि से नुकसान का नहीं मिला मुआवजा
किसानों ने हाल ही में हुई ओलावृष्टि और बारिश से फसलों को हुए नुकसान का मुद्दा भी उठाया। उनका कहना है कि प्रभावित किसानों को अब तक न तो उचित मुआवजा मिला है और न ही बीमा राशि का भुगतान किया गया है। यह हैं किसानों की मांग
चने की खरीदी समर्थन मूल्य के बजाय भावांतर योजना के तहत की जाए। स्लॉट बुकिंग प्रक्रिया को सरल बनाया जाए या समाप्त किया जाए। पंजीयन के बाद सीधे खरीदी की व्यवस्था लागू हो। ओलावृष्टि प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा और बीमा राशि दी जाए।















































