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पशुपालकों के लिए अलर्ट! अप्रैल-मई की गर्मी में ऐसे रखें पशुओं का ख्याल, नहीं तो होगा नुकसान

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गर्मियों का मौसम सिर्फ इंसानों के लिए ही नहीं, पशुओं के लिए भी बड़ी चुनौती बनकर आता है. अप्रैल और मई की तेज धूप, लू और बढ़ते तापमान का सीधा असर पशुओं की सेहत और दूध उत्पादन पर पड़ता है. कई बार सही देखभाल न होने पर पशु बीमार पड़ जाते हैं और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में पशुपालन करने वाले किसानों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि गर्मियों में पशुओं को कैसे सुरक्षित रखा जाए. एक्सपर्ट्स ने कुछ आसान उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और दूध उत्पादन भी बेहतर बनाए रखा जा सकता है.

लखीमपुर खीरी. जिले में किसान अब पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. वही पशुपालन विभाग की ओर से लगातार किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है. परंतु गर्मियों के मौसम में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है.

पशुपालन तो हर किसान करना चाहता है तो वही पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है. परंतु जानकारी के अभाव के कारण सही तरीके से पशुओं की देखभाल नहीं कर पाते हैं ऐसे में अप्रैल और मई के महीने में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है.

इन दो महीने में सबसे अधिक हीट वेव भीषण गर्मी और लू के कारण पशुओं के दूध में कमी आती है. जिससे किसान बेहद परेशान हो जाते हैं. हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और ब्लोट (पेट फूलना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं.

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हीट स्ट्रोक की स्थिति में पशु को तेज बुखार आ सकता है, वह हांफने लगता है, आंखें लाल हो जाती हैं. शरीर बहुत गर्म महसूस होता है. वहीं पानी की कमी होने पर पशु कमजोर पड़ जाता है.

लोकल 18 से बातचीत करते हुए डॉक्टर हेमंत सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आजीविका को चलाने के लिए पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं. लेकिन गर्मियों के मौसम में पशुओं को धूप से बचाना बेहद जरूरी होता है, थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है.

पशुओं को सीधे धूप और लू से बचने के लिए छायादार और हवादार स्थानों पर 11:00 से लेकर 4:00 तक सुरक्षित स्थान पर बांध कर रखें. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में तीन बार पर्याप्त मात्रा में ठंडा पानी दें.

पशुओं को संतुलित आहार देते समय नमक और मिलर मिक्सर मिले. ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी ना हो. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में दो से तीन बार स्नान का ध्यान रखें. सुरक्षित छायादार स्थान का चयन कर वहीं पर ही पशुओं को स्नान कराए, धूप में पशुओं को स्नान न कराएं.

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लखीमपुर खीरी. जिले में किसान अब पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं जिस कारण किसानों को अच्छा खासा मुनाफा होता है. वही पशुपालन विभाग की ओर से लगातार किसानों को जागरूक भी किया जा रहा है. परंतु गर्मियों के मौसम में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी होता है. थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मौत भी हो जाती है.

पशुपालन तो हर किसान करना चाहता है तो वही पशुपालन विभाग की ओर से किसानों को अनुदान भी दिया जा रहा है. परंतु जानकारी के अभाव के कारण सही तरीके से पशुओं की देखभाल नहीं कर पाते हैं ऐसे में अप्रैल और मई के महीने में पशुओं की देखभाल करना बेहद जरूरी हो जाता है.

इन दो महीने में सबसे अधिक हीट वेव भीषण गर्मी और लू के कारण पशुओं के दूध में कमी आती है. जिससे किसान बेहद परेशान हो जाते हैं. हीट स्ट्रोक (लू लगना), डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) और ब्लोट (पेट फूलना) जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं.

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लोकल 18 से बातचीत करते हुए डॉक्टर हेमंत सिंह ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में किसान अपनी आजीविका को चलाने के लिए पशुपालन पर अधिक जोर दे रहे हैं. लेकिन गर्मियों के मौसम में पशुओं को धूप से बचाना बेहद जरूरी होता है, थोड़ी सी लापरवाही होने के कारण पशुओं की मृत्यु भी हो सकती है.

पशुओं को सीधे धूप और लू से बचने के लिए छायादार और हवादार स्थानों पर 11:00 से लेकर 4:00 तक सुरक्षित स्थान पर बांध कर रखें. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में तीन बार पर्याप्त मात्रा में ठंडा पानी दें.

पशुओं को संतुलित आहार देते समय नमक और मिलर मिक्सर मिले. ताकि शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी ना हो. गर्मियों के मौसम में पशुओं को दिन में दो से तीन बार स्नान का ध्यान रखें. सुरक्षित छायादार स्थान का चयन कर वहीं पर ही पशुओं को स्नान कराए, धूप में पशुओं को स्नान न कराएं.

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