Saturday, 20 Jun 2026 | 06:56 AM

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सीएम हेल्पलाइन शिकायतें लंबित, 14 अधिकारियों को नोटिस

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ग्वालियर| सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर दर्ज शिकायतों का समय-सीमा में निराकरण नहीं करने पर कलेक्टर रुचिका चौहान ने 14 अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें 13 अधिकारी एल-1 और एक एल-2 स्तर का है। एल-1 स्तर के उप प्रबंधक बिजली कंपनी प्रिंस वैश्य, सहायक यंत्री सुनील गुप्ता, प्रभारी वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी रविन्द्र सिंह, सहायक आपूर्ति अधिकारी सौरभ जैन, सहायक संपत्ति अधिकारी शैलेन्द्र चौहान व देवेन्द्र बुधौलिया, प्रभारी नायब तहसीलदार शिवदयाल शर्मा, सहायक प्राध्यापक (संगीत विवि) डॉ. श्याम रस्तोगी, सहायक आयुक्त वाणिज्यकर अभिषेक खरे, कोटक महिन्द्रा के आफाक मंसूरी व देवेन्द्र पाल सिंह, इंडियन ओवरसीज बैंक के शंकरानंद झा, भवन निरीक्षक बृजेश राजपूत तथा एल-2 स्तर के निगम के कार्यपालन यंत्री संजीव गुप्ता शामिल हैं।

अखंड भारत के केंद्र बिंदु से है बरसाली पंचायत की पहचान

अखंड भारत के केंद्र बिंदु से है बरसाली पंचायत की पहचान

भास्कर संवाददाता | बैतूल बैतूल ब्लॉक में आने वाली ग्राम पंचायत बरसाली के किसान उन्नत हैं। यहां किसान खेती के साथ- साथ दूध का व्यवसाय भी करते हैं। प्रतिदिन 1500 लीटर से अधिक दूध उत्पादन होने से यहां का मावा भी बैतूल सहित आसपास के जिलों में जाता है। इस पंचायत की खासियत यह है कि यहां अखंड भारत का केंद्र बिंदु होने का दावा किया जाता है। केंद्र बिंदु के नाम पर यहां सेंट्रल पाइंट (सीपी) लिखा पत्थर गड़ा हुआ है। रेलवे पटरी के दूसरी ओर होने के कारण यहां लोग पहुंचते हैं। हालांकि लोगों की सुविधा के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। सांसद ने यहां भारत- माता की प्रतिमा लगाने की घोषणा की थी, लेकिन वह आज तक नहीं लगी। पंचायत में बरसाली, काजी जामठी, बागदा गांव आते हैं। ग्रामीणों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। यादव समाज के अधिकांश लोग पशुपालन करते हैं। ग्राम पंचायत के सरपंच राजेंद्र यादव ने बताया कि यहां किसान गन्ना, सोयाबीन, मक्का, गेहूं के साथ सब्जियों की फसलें भी लगाते हैं। इसके अलावा पशुपालन भी किया जाता है। लगभग हर घर में गाय- भैंस पाली जाती हैं। इससे प्रतिदिन 1500 लीटर के करीब दूध होता है, जिसे किसान डेयरी में बेचते हैं। ग्रामीण दूध के साथ मावा बनाकर जिले में बेचते हैं। केद्र बिंदू के नाम पर केवल सीपी लिखा पत्थर गड़ा है। केंद्र बिंदु पर बरसाली पंचायत में रेलवे स्टेशन भी है। यह स्टेशन वर्षों पुराना है। इस गांव के एक ओर सड़क है। पीछे की ओर रेलवे स्टेशन है। इसके कारण परिवहन की बेहतर सुविधा है। पंचायत के सरपंच राजेंद्र यादव ने बताया कि बरसाली स्टेशन बेहद पुराना है। बरसाली गांव के पीछे पटरी पार कर अखंड भारत के केंद्र बिंदु पर जाना होता है। ग्राम पंचायत के सरपंच राजेंद्र बताते हैं कि अखंड भारत के केंद्र बिंदु के रूप में यहां सेंट्रल पाइंट (सीपी) लिखा पत्थर है। यहां लोगों के बैठने के लिए चेयर लगाई गई हैं। सरपंच ने बताया कि लोगों का दावा है कि यहां सेंट्रल पाइंट है, लेकिन सरकारी अभिलेखों में दर्ज नहीं है। इसके कारण पंचायत यहां विकास कार्य नहीं करवा पा रही है। यहां भारत माता की प्रतिमा लगवाकर इसे विकसित करने का प्लान था, लेकिन लगी नहीं।

मकानों की गिनती करने आज से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक:आप कौन सा अनाज खाते हैं, आपके घर का रहन-सहन कैसा है, इसकी रिपोर्ट बनेगी

मकानों की गिनती करने आज से घर-घर पहुंचेंगे प्रगणक:आप कौन सा अनाज खाते हैं, आपके घर का रहन-सहन कैसा है, इसकी रिपोर्ट बनेगी

15 साल बाद आज से प्रदेश में जनगणना कार्यक्रम के अंतर्गत मकानों की गणना का काम शुरू होने वाला है। तीस मई तक प्रदेश में कच्चे, पक्के सभी तरह के मकानों की गणना करने के साथ जनगणना प्रगणकों द्वारा उन मकानों में रहने वाले परिवारों की जानकारी ली जाएगी। मकान गणना में शॉपिंग मॉल्स, ऑफिसेस जैसे गैर आवासीय भवनों को भी गिनती में रखा जाएगा। लेकिन उन मकानों में मौजूद अन्य सुविधाओं की बारीकी से जानकारी नहीं ली जाएगी। इसके विपरीत आवासीय उपयोग में आने वाले हर घर में उपयोग संसाधनों, परिवार द्वारा खाए जाने वाले अनाज की भी जानकारी ली जाएगी। मध्यप्रदेश के प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेया गोयल और अपर सचिव गृह मनीषा सेंतिया ने आज से शुरू होने वाली मकान गणना को लेकर कहा कि कोई भी व्यक्ति जानकारी देने से मना नहीं कर सकता है। अगर किसी व्यक्ति ने गलत जानकारी दी और प्रगणक को लगा कि वह गलत जानकारी दे रहा है तो ऐसे मामले में प्रगणक तुरंत डिजिटल रिपोर्टिंग करने के बजाय गलत जानकारी देने वाले को समझाईश देने का काम भी कर सकता है। गोयल ने साफ किया है कि जो भी जानकारी दी जाएगी वह सिर्फ देश की प्रगति और विकास के लिए बनाई जाने वाली योजनाओं में उपयोग होगी। इसका डेटा किसी को शेयर नहीं हो सकता है। इसलिए सबको खुलकर जानकारी देना चाहिए। गरीबी का स्तर जानने पूछेंगे, कौन सा अनाज खाते हैं परिवार के लोग छग कैडर के आईएएस अधिकारी और एमपी के प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेया गोयल ने कहा कि प्रगणक द्वारा जो सवाल पूछे जाने हैं वह फिक्स हैं। इसके अलावा कोई सवाल वह नहीं पूछेंगे। इसमें एक सवाल यह है कि परिवार द्वारा उपयोग किया जाने वाला मुख्य अनाज क्या है? यह जानकारी इसलिए ली जा रही है ताकि यह पता चल सके कि देश में कितने लोग आने वाले दिनों में पीडीएस का अनाज लेने के दायरे में आ रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि अगर किसी ने अच्छा अनाज खाने या घर में मौजूद किसी आधुनिक सुविधा संसाधन की जानकारी दी तो इस गणना कार्यवाही के बाद उसको पहले से सरकार की ओर से मिलने वाली कोई सेवा बंद नहीं होगी? इसलिए सबको सही जानकारी ही देना है। ऐसे रहेगी जनगणना में तैनात कर्मचारी अधिकारी की स्थिति इतने जिले, नगर निकाय और ग्रामों में होगी गणना सेल्फ एनुमरेशन (स्वगणना) पोर्टल बंद मकानों की घर घर जाकर गणना शुरू करने के पहले गुरुवार शुक्रवार की आधी रात 12 बजे से सेल्फ एनुमरेशन (स्वगणना) के जरिये जानकारी देने संबंधी पोर्टल बंद हो गया है। इसको लेकर जनगणना निदेशालय के अफसरों ने कहा कि जो लोग स्वगणना में जानकारी दे चुके हैं उनके घर भी प्रगणक पहुंचे हैं और जिन्होंने जानकारी नहीं भरी है उनके यहां भी प्रगणक आकर जानकारी लेंगे। यह जानकारी सिर्फ 33 सवालों की होगी जो पहले से सार्वजनिक की जा चुकी है। एक माह तक नहीं मिलेगा अवकाश राज्य शासन ने केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय के आदेश पर राष्ट्रीय महत्व के इस काम के चलते फील्ड में तैनात कर्मचारियों, अधिकारियों के अवकाश पर एक माह के लिए रोक लगा दी है। खासतौर पर उन मैदानी अफसरों कर्मचारियों को अवकाश के साथ तबादले से मुक्त रखा जाएगा जिनकी ड्यूटी मकान गणना के काम में लगाई गई है। ऑफिस, मॉल्स, शापिंग काम्प्लेक्स में सिर्फ उपयोग की रिपोर्ट जनगणना निदेशालय के अफसरों ने बताया कि प्रगणक सभी 33 सवाल सिर्फ आ‌वासीय मकान में रहने वाले लोगों से पूछेंगे और उसे डिजिटली मोबाइल के माध्यम से भरेंगे लेकिन ऐसा नहीं होगा कि कोई शॉपिंग काम्प्लेक्स, मॉल, ऑफिस का भवन है तो उसे गणना में नहीं लिया जाएगा। ऐसे भवनों की गिनती भी होगी लेकिन उसमें शुरुआती सुविधाओं की जानकारी ही भरी जाएगी। जो मकान बाद में बनेंगे, उनकी गणना भी फरवरी 2027 में होगी प्रभारी जनगणना निदेशक कार्तिकेय गोयल ने बताया कि तीस मई तक जो मकान बने हैं और लोग रहते हैं उनकी गणना का काम किया जाएगा लेकिन अगर कोई मकान बन रहा है और वह फरवरी 2027 के पहले कम्प्लीट हो जाता है तो उसे भी गणना में शामिल किया जाएगा। यह गणना फरवरी 2027 की जनगणना के दौरान की जाएगी। टोल फ्री नम्बर पर भी मिलेगी जानकारी जनगणना संबंधित जानकारी के लिए टोल फ्री नम्बर 1855 जारी किया गया है। यह टोल फ्री नम्बर सुबह 9 बजे से शाम छह बजे तक चलता रहेगा। इसमें सातों दिन जानकारी दी जाएगी और लोगों द्वारा पूछे जाने वाले सवालों का समाधान किया जाएगा। वीडियो कांफ्रेंसिंग से कलेक्टरों को बताईं बारीकियां इसके पहले गुरुवार को प्रभारी जनगणना निदेशक ने प्रदेश के सभी कलेक्टरों और प्रमुख जनगणना अधिकारियों के साथ वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक की और जनगणना के अंतर्गत मकान गणना की बारीकियों के बारे में जानकारी देकर सख्त मॉनिटरिंग के लिए कहा। उन्होंने यह भी कहा कि शहरी क्षेत्रों में बंद गेट वाली कॉलोनियों और अपार्टमेंट परिसरों में गणना कार्य को लेकर विशेष रणनीति बनाई गई है। आवासीय समितियों और प्रबंधन समूहों को निर्देश जारी किए जा रहे हैं ताकि उनके समन्वय व सहयोग से प्रगणकों को प्रवेश में किसी प्रकार की बाधा न हो और कोई भी परिवार गणना से वंचित न रहे। इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में मुनादी आदि के माध्यम से जनगणना के महत्व एवं जागरूकता उत्पन्न करने के भी निर्देश जारी किए गए हैं।

पाटीदार के कैच पर विवाद, अंपायर से नाखुश दिखे कोहली:भुवनेश्वर के टी-20 क्रिकेट में 350 विकेट, गुजरात का दूसरा सबसे तेज रनचेज; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

पाटीदार के कैच पर विवाद, अंपायर से नाखुश दिखे कोहली:भुवनेश्वर के टी-20 क्रिकेट में 350 विकेट, गुजरात का दूसरा सबसे तेज रनचेज; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

गुजरात टाइटंस ने IPL 2026 में गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 4 विकेट से हरा दिया। अहमदाबाद में खेले गए इस मैच में गुजरात ने 25 गेंद रहते 156 रन का टारगेट हासिल किया। यह IPL में गुजरात का दूसरा सबसे तेज रनचेज है। भुवनेश्वर कुमार टी20 में 350 विकेट पूरे करने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज बने। RCB की पारी के दौरान रजत पाटीदार के कैच को लेकर विराट कोहली अंपयार से बहस करते दिखे। पढ़िए बेंगलुरु-गुजरात मैच में बने ऐसे ही कुछ रिकॉर्ड और मोमेंट्स… सबसे पहले टॉप-2 रिकॉर्ड 1. भुवनेश्वर कुमार ने टी-20 क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए बेंगलुरु के गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने पुरुष टी-20 क्रिकेट में अपने 350 विकेट पूरे कर लिए हैं। वे ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज बन गए हैं। भुवी से पहले युजवेंद्र चहल यह कारनामा कर चुके हैं। चहल 391 विकेट के साथ टॉप पर हैं। भुवी ने बुमराह और अश्विन जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। 2. गुजरात का दूसरा सबसे तेज रन चेज गुजरात टाइटंस ने गुरुवार को आरसीबी के खिलाफ 25 गेंद रहते जीत दर्ज की। यह गुजरात के इतिहास का दूसरा सबसे तेज रनचेज है। सबसे ज्यादा गेंद रहते उनकी सबसे बड़ी जीत 2023 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आई थी। तब टीम ने 37 गेंद रहते टारगेट हासिल किया था। यहां से मैच के टॉप-7 मोमेंट्स 1. कोहली ने रबाडा के ओवर में लगातार 5 चौके मारे विराट कोहली ने गुजरात के खिलाफ एक ओवर में 5 चौके मारे। उन्होंने कगिसो रबाडा पहली गेंद से ही प्रहार किया। उन्होंने पहली गेंद को मिडविकेट, दूसरी को मिड ऑफ, तीसरी को डिप प्वाइंट पर चौका जड़ा। चौथी गेंद को थर्ड मैन और पांचवी गेंद को कवर पर चार रन के लिए भेजा। 2. पाटीदार के कैच पर अंपायर के फैसले से नाराज दिखे कोहली बेंगलुरु की पारी के 8वें ओवर में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। अरशद खान के ओवर की चौथी गेंद पर रजत पाटीदार ने पुल शॉट खेला। गेंद डीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग की ओर गई, जहां जेसन होल्डर ने डाइव लगाकर शानदार कैच पकड़ा। इस दौरान डग आउट पर बैठे विराट कोहली अंपायर के फैसले से नाराज दिखे। उनका मानना था कि कैच क्लीन नहीं है। हालांकि थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखकर आउट दिया था। 3. वेंकटेश अय्यर को कोहनी पर गेंद लगी 18वें ओवर में अरशद खान की तीखी शॉर्ट पिच गेंद वेंकटेश अय्यर की कोहनी पर जा लगी। इसके बाद वह काफी दर्द में नजर आए। अय्यर पुल शॉट मारने की कोशिश में जल्दी बल्ला घुमा बैठे और गेंद सीधे उनकी कोहनी पर जा लगी। फिजियो को तुरंत मैदान पर आना पड़ा। हालांकि अय्यर ने बल्लेबाजी जारी रखी। 4. बेंगलुरु की पारी में 23 गेंद बाद लगी बाउंड्री बेंगलुरु की पारी के दौरान 14 से 18 ओवर के बीच 23 गेंद तक कोई बाउंड्री नहीं लगी। आखिरकार 18वें ओवर में अरशद खान की चौथी गेंद पर चौका लगाकर भुवनेश्वर कुमार ने बाउंड्री का सूखा खत्म किया। इससे पहले 14वें ओवर में राशिद खान की चौथी गेंद पर रोमारियो शेफर्ड ने छक्का लगाया था। 5. रनआउट से सिमटी बेंगलुरु की पारी पहली पारी के 20वें ओवर में बेंगलुरू ऑलआउट हो गई। ओवर की दूसरी गेंद पर रनआउट के जरिए टीम इस सीजन पहली बार ऑलआउट हुई। अरशद खान की गेंद पर जोश हेडलवुड ने पुश कर सिंगल चुराने की कोशिश की, लेकिन शुभमन गिल ने डायरेक्ट थ्रो पर स्टंप बिखेर दी। 6. गिल ने हेजलवुड के ओवर में 24 रन बनाए गुजरात की पारी के दूसरे ओवर में शुभमन गिल ने 24 रन बना दिए। उन्होंने हेजलवुड के इस ओवर में 3 चौके और 2 छक्के जड़े। गिल ने पहली, दूसरी गेंद पर चौका लगाया। चौथी गेंद पर छक्का और पांचवी गेद पर चौका जड़ा। फिर डीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर से छक्का लगा ओवर खत्म किया। 7. जितेश शर्मा ने बटलर का कैच छोड़ा दूसरी पारी के चौथे ओवर में जोश बटलर का कैच छूटा। जोश हेजलवुड ने ओवर की 5वीं गेंद शॉर्ट डाली। बटलर ने स्कूप मारना चाहा, लेकिन गेंद ग्लव्स से लगकर पीछे गई। कीपर जितेश शर्मा ने अपने दाईं ओर डाइव लगाकर एक हाथ से कैच पकड़ने की कोशिश की, पर गेंद छिटक गई। 8. राशिद ने चौका जड़कर गुजरात को दिलाई जीत 16वें ओवर में सुयश शर्मा की गेंद पर राशिद खान ने मैच खत्म कर दिया। ऑफ-स्टंप के बाहर गिरी फ्लैट लेंथ डिलीवरी पर राशिद ने क्रीज से बाहर निकलकर ‘फ्लैट-बैट’ शॉट खेला। गेंद एक टप्पे के बाद एक्स्ट्रा कवर बाउंड्री के पार चली गई। गुजरात की जीत के बाद विराट कोहली ने मुस्कुराते हुए राशिद खान को गले लगा लिया। ——————————————————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL- बेंगलुरु सीजन में तीसरा मैच हारी; गुजरात ने 4 विकेट से हराया गुजरात टाइटंस ने IPL में गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 4 विकेट से हरा दिया। अहमदाबाद में गुजरात ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। बेंगलुरु 19.2 ओवर में 155 रन पर ऑलआउट हो गई। मेजबान टीम ने 156 रन का टारगेट 15.5 ओवर में 6 विकेट पर चेज कर लिया। राशिद खान ने सुयश शर्मा की बॉल पर चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। पढ़ें पूरी खबर

पाटीदार के कैच पर विवाद, अंपायर से नाखुश दिखे कोहली:भुवनेश्वर के टी-20 क्रिकेट में 350 विकेट, गुजरात का दूसरा सबसे तेज रनचेज; मोमेंट्स-रिकॉर्ड्स

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गुजरात टाइटंस ने IPL 2026 में गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 4 विकेट से हरा दिया। अहमदाबाद में खेले गए इस मैच में गुजरात ने 25 गेंद रहते 156 रन का टारगेट हासिल किया। यह IPL में गुजरात का दूसरा सबसे तेज रनचेज है। भुवनेश्वर कुमार टी20 में 350 विकेट पूरे करने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज बने। RCB की पारी के दौरान रजत पाटीदार के कैच को लेकर विराट कोहली अंपयार से बहस करते दिखे। पढ़िए बेंगलुरु-गुजरात मैच में बने ऐसे ही कुछ रिकॉर्ड और मोमेंट्स… सबसे पहले टॉप-2 रिकॉर्ड 1. भुवनेश्वर कुमार ने टी-20 क्रिकेट में 350 विकेट पूरे किए बेंगलुरु के गेंदबाज भुवनेश्वर कुमार ने पुरुष टी-20 क्रिकेट में अपने 350 विकेट पूरे कर लिए हैं। वे ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय गेंदबाज बन गए हैं। भुवी से पहले युजवेंद्र चहल यह कारनामा कर चुके हैं। चहल 391 विकेट के साथ टॉप पर हैं। भुवी ने बुमराह और अश्विन जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की। 2. गुजरात का दूसरा सबसे तेज रन चेज गुजरात टाइटंस ने गुरुवार को आरसीबी के खिलाफ 25 गेंद रहते जीत दर्ज की। यह गुजरात के इतिहास का दूसरा सबसे तेज रनचेज है। सबसे ज्यादा गेंद रहते उनकी सबसे बड़ी जीत 2023 में राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ आई थी। तब टीम ने 37 गेंद रहते टारगेट हासिल किया था। यहां से मैच के टॉप-7 मोमेंट्स 1. कोहली ने रबाडा के ओवर में लगातार 5 चौके मारे विराट कोहली ने गुजरात के खिलाफ एक ओवर में 5 चौके मारे। उन्होंने कगिसो रबाडा पहली गेंद से ही प्रहार किया। उन्होंने पहली गेंद को मिडविकेट, दूसरी को मिड ऑफ, तीसरी को डिप प्वाइंट पर चौका जड़ा। चौथी गेंद को थर्ड मैन और पांचवी गेंद को कवर पर चार रन के लिए भेजा। 2. पाटीदार के कैच पर अंपायर के फैसले से नाराज दिखे कोहली बेंगलुरु की पारी के 8वें ओवर में हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। अरशद खान के ओवर की चौथी गेंद पर रजत पाटीदार ने पुल शॉट खेला। गेंद डीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग की ओर गई, जहां जेसन होल्डर ने डाइव लगाकर शानदार कैच पकड़ा। इस दौरान डग आउट पर बैठे विराट कोहली अंपायर के फैसले से नाराज दिखे। उनका मानना था कि कैच क्लीन नहीं है। हालांकि थर्ड अंपायर ने रिप्ले देखकर आउट दिया था। 3. वेंकटेश अय्यर को कोहनी पर गेंद लगी 18वें ओवर में अरशद खान की तीखी शॉर्ट पिच गेंद वेंकटेश अय्यर की कोहनी पर जा लगी। इसके बाद वह काफी दर्द में नजर आए। अय्यर पुल शॉट मारने की कोशिश में जल्दी बल्ला घुमा बैठे और गेंद सीधे उनकी कोहनी पर जा लगी। फिजियो को तुरंत मैदान पर आना पड़ा। हालांकि अय्यर ने बल्लेबाजी जारी रखी। 4. बेंगलुरु की पारी में 23 गेंद बाद लगी बाउंड्री बेंगलुरु की पारी के दौरान 14 से 18 ओवर के बीच 23 गेंद तक कोई बाउंड्री नहीं लगी। आखिरकार 18वें ओवर में अरशद खान की चौथी गेंद पर चौका लगाकर भुवनेश्वर कुमार ने बाउंड्री का सूखा खत्म किया। इससे पहले 14वें ओवर में राशिद खान की चौथी गेंद पर रोमारियो शेफर्ड ने छक्का लगाया था। 5. रनआउट से सिमटी बेंगलुरु की पारी पहली पारी के 20वें ओवर में बेंगलुरू ऑलआउट हो गई। ओवर की दूसरी गेंद पर रनआउट के जरिए टीम इस सीजन पहली बार ऑलआउट हुई। अरशद खान की गेंद पर जोश हेडलवुड ने पुश कर सिंगल चुराने की कोशिश की, लेकिन शुभमन गिल ने डायरेक्ट थ्रो पर स्टंप बिखेर दी। 6. गिल ने हेजलवुड के ओवर में 24 रन बनाए गुजरात की पारी के दूसरे ओवर में शुभमन गिल ने 24 रन बना दिए। उन्होंने हेजलवुड के इस ओवर में 3 चौके और 2 छक्के जड़े। गिल ने पहली, दूसरी गेंद पर चौका लगाया। चौथी गेंद पर छक्का और पांचवी गेद पर चौका जड़ा। फिर डीप बैकवर्ड स्क्वायर लेग के ऊपर से छक्का लगा ओवर खत्म किया। 7. जितेश शर्मा ने बटलर का कैच छोड़ा दूसरी पारी के चौथे ओवर में जोश बटलर का कैच छूटा। जोश हेजलवुड ने ओवर की 5वीं गेंद शॉर्ट डाली। बटलर ने स्कूप मारना चाहा, लेकिन गेंद ग्लव्स से लगकर पीछे गई। कीपर जितेश शर्मा ने अपने दाईं ओर डाइव लगाकर एक हाथ से कैच पकड़ने की कोशिश की, पर गेंद छिटक गई। 8. राशिद ने चौका जड़कर गुजरात को दिलाई जीत 16वें ओवर में सुयश शर्मा की गेंद पर राशिद खान ने मैच खत्म कर दिया। ऑफ-स्टंप के बाहर गिरी फ्लैट लेंथ डिलीवरी पर राशिद ने क्रीज से बाहर निकलकर ‘फ्लैट-बैट’ शॉट खेला। गेंद एक टप्पे के बाद एक्स्ट्रा कवर बाउंड्री के पार चली गई। गुजरात की जीत के बाद विराट कोहली ने मुस्कुराते हुए राशिद खान को गले लगा लिया। ——————————————————– IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL- बेंगलुरु सीजन में तीसरा मैच हारी; गुजरात ने 4 विकेट से हराया गुजरात टाइटंस ने IPL में गुरुवार को रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु को 4 विकेट से हरा दिया। अहमदाबाद में गुजरात ने टॉस जीतकर गेंदबाजी चुनी। बेंगलुरु 19.2 ओवर में 155 रन पर ऑलआउट हो गई। मेजबान टीम ने 156 रन का टारगेट 15.5 ओवर में 6 विकेट पर चेज कर लिया। राशिद खान ने सुयश शर्मा की बॉल पर चौका लगाकर टीम को जीत दिलाई। पढ़ें पूरी खबर

Emotional Dependency Signs; Loneliness Anxiety – How To Overcome

Emotional Dependency Signs; Loneliness Anxiety - How To Overcome

Hindi News Lifestyle Emotional Dependency Signs; Loneliness Anxiety How To Overcome | Mental Health 14 मिनट पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी उम्र 32 साल है। मेरी प्रॉब्लम है इमोशनल डिपेंडेंसी। मैं बिल्कुल अकेला नहीं रह सकता। मेरी खुशी हमेशा किसी बाहरी चीज पर डिपेंड करती है। मुझे या तो दोस्त चाहिए या फैमिली। अगर कभी ऐसा हो जाए कि मैं घर पर अकेला रह जाऊं और आसपास कोई न हो तो मुझे अजीब सी घबराहट होने लगती है। मैं रात में 12 बजे नोएडा से 40 किलोमीटर ड्राइव करके गुड़गांव जा सकता हूं, लेकिन मैं अकेले नहीं रह सकता। अकेले होते ही मन में अजीब-अजीब से ख्याल आने लगते हैं। एंग्जाइटी होने लगती है। मैं जानता हूं कि ये नॉर्मल नहीं है। मैं इस डिपेंडेंसी से कैसे बाहर निकलूं? एक्सपर्ट- डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर। जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आप जो बता रहे हैं, वह कोई ‘कमजोरी’ नहीं है। यह एंग्जाइटी, इमोशनल डिपेंडेंसी और सेफ्टी सीकिंग बिहेवियर का एक चक्र है। यह एक पैटर्न है, जो समय के साथ बना है और इसे बदला भी जा सकता है। आपकी बातों से तीन चीजें साफ दिखती हैं- अकेले होने पर घबराहट (सेपरेशन एंग्जाइटी जैसा रिस्पांस) खुशी का बाहरी लोगों पर निर्भर होना (बाहरी वैलिडेशन की जरूरत) अकेलेपन से जुड़े नकारात्मक ख्याल (रूमिनेशन+एंग्जाइटी लूप) अब इसे थोड़ा व्यवस्थित तरीके से समझते हैं और फिर उससे बाहर निकलने का रास्ता बनाते हैं। आपकी समस्या की गहरी समझ मनोविज्ञान में इसे अक्सर इमोशनल डिपेंडेंसी या एंक्शस अटैचमेंट पैटर्न के रूप में समझा जाता है। जॉन बॉल्बी की अटैचमेंट थ्योरी के मुताबिक, बचपन या पिछले रिश्तों के अनुभव हमारे ‘जुड़ाव के तरीके’ को तय करते हैं। इस केस में आपके दिमाग ने एक यकीन बना लिया है: “अकेला = असुरक्षित/असहज” “दूसरे लोगों का साथ = सुरक्षा/राहत” इसी वजह से जब भी आप अकेले होते हैं, तो आपका दिमाग खतरे का अलार्म बजा देता है। अच्छी बात यह है कि यह सीखा हुआ पैटर्न है और इसे बदला भी जा सकता है। इमोशनल डिपेंडेंसी क्यों होती है? आइए, इमोशनल डिपेंडेंसी के मनोवैज्ञानिक कारणों को समझने की कोशिश करते हैं। 1. आत्मसम्मान की भूमिका इमोशनल डिपेंडेंसी की जड़ में अक्सर कुछ गहरे विश्वास होते हैं: “मैं अकेले नहीं संभाल सकता।” “मैं कमजोर हूं।” “मैं तभी तक ठीक हूं, जब तक कोई मेरे साथ हो।” मनोविज्ञान में इसे ‘लो सेल्फ एफिकेसी’ कहते हैं यानी खुद की क्षमता पर भरोसे की कमी। जैसेकि ये गहरा विश्वास– “मैं ये काम नहीं कर पाऊंगा।” “ये मेरे बस की बात नहीं है।” “मैं कोशिश भी करूं तो फेल हो जाऊंगा।” रिसर्च बताती है कि जिन लोगों का आत्मसम्मान कम होता है, वे तनाव की स्थिति में खुद पर भरोसा करने की बजाय दूसरों पर ज्यादा निर्भर हो जाते हैं। इसका नतीजा ये होता है कि जो अकेलापन बहुत सामान्य हो सकती था, वह एक खतरे की तरह महसूस होने लगता है। 2. अटैचमेंट स्टाइल मनोविज्ञान की अटैचमेंट थ्योरी के मुताबिक बचपन में बने रिश्तों का असर हमारे वयस्क जीवन पर पड़ता है। जैसेकि अगर आपके बचपन में– माता-पिता अनिश्चित स्थिति में रहते थे। कभी बहुत ज्यादा ध्यान देते, कभी उपेक्षा करते तो ऐसे में बच्चे के भीतर एंक्शस अटैचमेंट स्टाइल विकसित हो सकता है। इस अटैचमेंट स्टाइल के सारे संकेत नीचे ग्राफिक में देखें– एंक्शस अटैचमेंट स्टाइल का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि व्यक्ति ‘बीमार’ है। इसका मतलब ये है कि उसका ब्रेन सुरक्षा को दूसरों से जोड़कर देखना सीख गया है। 3. बाहरी नियंत्रण की सोच जब किसी को ये लगता है कि उसका मूड दूसरों पर निर्भर है, उसकी शांति इस बात पर निर्भर करती है कि उसके साथ कौन है तो मनोविज्ञान की भाषा में इसे एक्सटर्नल लोकस ऑफ कंट्रोल (external locus of control) कहते हैं। इसके विपरीत, जिन लोगों में इंटर्नल लोकस ऑफ कंट्रोल (internal locus of control) होता है, वे मानते हैं कि “मैं अपनी भावनाओं को खुद संभाल सकता हूं।” इमोशनल डिपेंडेंसी होने पर कंट्रोल का यह संतुलन बिगड़ जाता है। 4. दिमाग का ‘फॉल्स अलार्म सिस्टम’ न्यूरोसाइंस के अनुसार, जब हम खतरा महसूस करते हैं तो हमारे मस्तिष्क का एक हिस्सा सक्रिय हो जाता है। उस हिस्से का नाम है– एमिग्डला। लेकिन इमोशनल डिपेंडेंसी की स्थिति में: कोई असली खतरा नहीं होता। लेकिन ब्रेन का एमिग्डला खतरे का अलार्म बजा देता है। ये ‘फॉल्स अलार्म’ होता है। जैसेकि अकेले होना कोई खतरा नहीं है। लेकिन दिमाग इसे खतरा समझकर अलार्म बजा देता है। 5. इमोशनल डिपेंडेंसी का चक्र आप समझिए कि इमोशनल डिपेंडेंसी का ये साइकल कैसे काम करता है– व्यक्ति घर में अकेला होता है। उसके मन में बुरे–बुरे ख्याल आने लगते हैं। कुछ गलत हो जाएगा, कुछ बुरा होगा। ये डर फिजिकल सिंम्पटम्स के रूप में भी दिखता है। दिल की धड़कन तेज हो जाती है। पसीना निकलता है, बेचैनी होती है। व्यक्ति तुरंत किसी को कॉल करता है, कहीं बाहर चला जाता है। ऐसा करने पर उसे तुरंत राहत महसूस होती है। दिमाग ये सीखता है कि अकेले होने में खतरा है। भागकर दूसरों के पास जाने, उनके साथ होने में सुरक्षा है। क्या आप इमोशनली डिपेंडेंट हैं? करें सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 12 सवाल हैं। आपको इन सवालों को 0 से 4 के स्केल पर रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए अगर आपका जवाब ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘बहुत ज्यादा’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें। आप अकेले होने पर क्या सोचते हैं? सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट 2 यह टेस्ट इस बात से संंबंधित है कि जब आप अकेले होते हैं तो आपके मन में किस तरह के विचार आते हैं। नीचे दिए गए सवालों को ध्यान से पढ़ें और इस स्कोर चार्ट के मुताबिक उसे रेट करें– 4 सप्ताह का CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान सप्ताह 1 अवेयरनेस क्या और कैसे करें? पहले हफ्ते में आपका फोकस सिर्फ खुद को समझने पर होना चाहिए। कुछ बदलने की जल्दी नहीं, बस अपने अनुभव को साफ-साफ पकड़ना है। जब भी

Jasmine Sandlas Struggle Success Story; Dhurandhar Songs

Jasmine Sandlas Struggle Success Story; Dhurandhar Songs

19 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र कॉपी लिंक जैस्मीन जालंधर में पैदा हुईं। उन्होंने स्कूल के दिनों में गाना शुरू कर दिया था। ‘धुरंधर’ से बड़ी पहचान बनाने वाली सिंगर जैस्मीन सैंडलस की जिंदगी सफलता के साथ संघर्ष और दर्द से भरी रही है। एक वक्त वह अंदर से टूट गई थीं और शराब की लत में फंस गई थीं। आज वह उस दौर पर पछतावा मानती हैं। अमेरिका में शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया। पिता भारत में अच्छी नौकरी छोड़कर पेट्रोल पंप पर काम करने लगे, जबकि मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं। परिवार ने गरीबी में दिन गुजारे। इन हालातो के बावजूद जैस्मीन ने म्यूजिक का साथ नहीं छोड़ा। ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ से उन्हें पहचान मिली, लेकिन ‘धुरंधर’ के गानों ने उन्हें नई ऊंचाई तक पहुंचाया। आज की सक्सेस स्टोरी में जानिए जैस्मीन सैंडलस के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें… जैस्मीन को गायिकी की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी। गायिकी की प्रेरणा मां से मिली जैस्मीन सैंडलस का जन्म 4 सितंबर 1985 को पंजाब के जालंधर में हुआ। वह साधारण पंजाबी परिवार से हैं। बचपन से उन्हें मां से गायिकी की प्रेरणा मिली, जो उन्हें गाने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। स्कूल के दिनों से उन्होंने स्टेज पर गाना शुरू किया और कम उम्र में ही गाने लिखने लगी थीं। अमेरिका का सफर: बेहतर भविष्य की तलाश करीब 12-13 साल की उम्र में उनका परिवार कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गया। शुरुआती समय में वे न्यूयॉर्क भी रहीं। उन्हें इंग्लिश नहीं आती थी, इसलिए लोकल स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा। उनके पिता भारत में हाई-प्रोफाइल नौकरी में थे और लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया। अमेरिका में संघर्ष: गरीबी, छोटे काम और मुश्किल हालात अमेरिका में परिवार ने मुश्किल हालात देखे। छह लोगों का परिवार एक छोटे कमरे में रहता था और फूड कूपन पर निर्भर था। पिता को छोटे काम करने पड़े, यहां तक कि पेट्रोल पंप पर भी काम किया। मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं और चेरी तोड़ती थीं। पढ़ाई और म्यूजिक की ओर झुकाव जैस्मीन ने अमेरिका में पढ़ाई पूरी की। उन्होंने साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन और प्री-लॉ की पढ़ाई की, लेकिन मन हमेशा म्यूजिक में रहा। जैस्मीन सैंडलस ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में कहा- हम न्यूयॉर्क पहुंचे। मुझे इंग्लिश नहीं आती थी। जो भी लोकल स्कूल था, पापा ने हमें वहीं एडमिशन दिला दिया। हम एक छोटे अपार्टमेंट में रहते थे, जो गरीब परिवार के लिए था और हम छह लोग थे। पापा ने पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी मेरे पापा इंडिया में हाई प्रोफाइल जॉब करते थे। वह लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन अमेरिका जाने पर 3-4 साल पढ़ाई या नौकरी करनी पड़ती है। इसलिए पापा ने हमारे लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी। मुझे लगता है कि अमेरिका में उनकी पहली नौकरी पेट्रोल पंप पर थी, जहां वह पेट्रोल भरते थे। मुझे याद है, वह बर्फ में बैठे थे और पैरों में जूते नहीं थे। पूछने पर उन्होंने कहा कि बर्फ के जूते बहुत महंगे हैं। फूड कूपन से चलती थी जिंदगी हम उन घरों में रहते थे, जो गरीबी रेखा वालों के लिए होते हैं, इसलिए फूड कूपन मिलते थे। मेरी मां फैक्ट्री में काम करती थीं और चेरी तोड़ती थीं। वह वहां मजदूर के रूप में काम करती थीं। जब हम कैलिफोर्निया गए, तो मेरे पिता ने फिर से कानूनी पेशे में एंट्री की और इंटरप्रेटर बन गए। इसके बाद हमारी आर्थिक स्थिति बेहतर हो गई। रिश्तों में दरार, पिता का निधन और टूटता मन जैस्मीन ने माना कि उनके और माता-पिता के रिश्ते आसान नहीं रहे। वह कहती हैं- मेरे और परिवार के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। बहुत कुछ अंदर ही अंदर मुझे तोड़ रहा था। मैं 23 साल की थी, तभी पिता का निधन हो गया। उस समय मैं करियर में ठीक कर रही थी, लेकिन अंदर से टूट गई थी। शराब की लत और पछतावा इस दर्द ने जैस्मीन को ऐसे दौर में धकेला, जहां उन्होंने खुद को खो दिया। वह कहती हैं- मैंने खुद को शराब में डुबो लिया था। मैं बहुत ज्यादा शराब पीती थी और आज भी पछतावा है। उस वक्त वही मेरे लिए सहारा था। मैं पूरी जिंदगी ऐसे सुकून और घर की तलाश में भटकती रही, जो बचपन में नहीं मिला। खुद को कमजोर और असहाय महसूस करने लगी थी मेरी मां और परिवार ने रिकवरी में बहुत मदद की। जब मैं टूट चुकी थी, तब भी उन्होंने मुझसे प्यार किया। मेरी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से थी। उस समय मुश्किल होता था, क्योंकि दिन शुरू होते ही मैं पुरानी आदतों में फंस जाती थी। मैंने भगवान से प्रार्थना की- ‘प्लीज मुझे बचा लो, मुझे बस एक और मौका दे दो। मैं बहुत बेबस महसूस कर रही थी। उस दौर से बाहर आने के लिए चीजों को ‘नहीं’ कहने की हिम्मत चाहिए होती है। परिवार का साथ जरूरी है, उनसे दूर मत भागिए। जब मैंने जिंदगी से जहरीली चीजें निकाल दीं, तो लगा जैसे नई जिंदगी मिल गई हो।’ दिल्ली के क्लब्स से शुरू हुआ असली संघर्ष म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं था। 2007 से 2010 के बीच उन्होंने दिल्ली के क्लब्स, कैफे और लोकल इवेंट्स में परफॉर्म किया। उस दौर में न बड़ा प्लेटफॉर्म था और न मजबूत सपोर्ट सिस्टम, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। वह खुद गाने लिखतीं, कंपोज करतीं और रिकॉर्ड कर मिक्स CDs बनाती थीं। इन्हें 20 रुपए में बेचती थीं, ताकि ज्यादा लोग उनके संगीत तक पहुंच सकें। यही संघर्ष और मेहनत आगे उनके करियर की नींव बना। जैस्मीन ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट सॉन्ग ‘मुस्कान’ से की थी। करियर की शुरुआत और पहला एल्बम जैस्मीन के करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट गाने ‘मुस्कान’ से हुई, जिससे उन्हें पहचान मिली। इसी साल पहला एल्बम ‘द डायमंड’ रिलीज हुआ, जिसमें उनके वेस्टर्न-पंजाबी फ्यूजन को सराहा गया और म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनी। ‘गुलाबी’ से मिली पहचान, बना करियर का टर्निंग पॉइंट 2012 में रिलीज एल्बम ‘गुलाबी’ उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। इसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के

Health Screening Tests Age Wise List & Guide

Health Screening Tests Age Wise List & Guide

1 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक आमतौर पर लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब किसी बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखते हैं। लेकिन हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते। स्क्रीनिंग की मदद से स्पष्ट लक्षणों से पहले ही इन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है। इसलिए हेल्थ स्क्रीनिंग को ‘साइलेंट लाइफसेवर’ कहा जाता है। इससे न सिर्फ बीमारी का जल्दी पता लगता है, बल्कि इलाज भी आसान हो जाता है। इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है। साथ ही जानेंगे कि- हेल्थ स्क्रीनिंग कराना क्यों जरूरी है? कौन सी जांचें आपकी जिंदगी बचा सकती हैं? एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है और यह करवाना क्यों जरूरी है? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग एक प्रिवेंटिव मेडिकल टेस्ट प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य बीमारियों का शुरुआती दिनों में पता लगाना है। इसमें ब्लड टेस्ट, BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल जैसी जांचें शामिल हैं। लक्षण न दिखने पर भी रिस्क पहचाना जा सकता है। इसकी मदद से समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग में कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग में जरूरी टेस्ट उम्र, जेंडर और रिस्क फैक्टर के अनुसार तय होते हैं। सामान्य गाइडलाइन इस तरह हैं- अब समझते हैं कि कॉमन बीमारियों का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं- डायबिटीज डायबिटीज की जांच के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रेंडियल शुगर और HbA1c टेस्ट जरूरी होते हैं। HbA1c पिछले 2-3 महीनों का एवरेज शुगर लेवल बताता है। इससे प्री-डायबिटीज पहचानने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। लिपिड प्रोफाइल टेस्ट इसमें टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है। इससे हार्ट डिजीज के रिस्क का आकलन होता है। LDL बढ़ने पर धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है। नियमित स्क्रीनिंग से हार्ट डिजीज का समय से पहले पता चल सकता है। यूरिक एसिड इस ब्लड टेस्ट से शरीर में यूरिक एसिड का लेवल पता चलता है। इसका लेवल बढ़ने पर गाउट, जोड़ों के दर्द और किडनी स्टोन का रिस्क हो सकता है। हाई-प्रोटीन डाइट लेने वालों को और मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स होने पर रेगुलर चेकअप कराना चाहिए। विटामिन डेफिशिएंसी विटामिन D और B12 की जांच काफी कॉमन है। इनकी कमी से बोन वीकनेस, और नर्व प्रॉब्लम हो सकती है। ब्लड टेस्ट से कमी का पता लगाकर सही सप्लीमेंट और डाइट से सुधार किया जा सकता है। लिवर हेल्थ इसमें लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) में SGPT, SGOT, बिलीरुबिन और प्रोटीन लेवल चेक किए जाते हैं। इनसे लिवर की कार्यक्षमता, इंफ्लेमेशन और डैमेज का पता लगाया जाता है। फैटी लिवर, दवाओं के साइड इफेक्ट को मॉनिटर करने के लिए यह स्क्रीनिंग जरूरी है। किडनी हेल्थ किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) में क्रिएटिनिन, यूरिया और eGFR की जांच होती है। ये किडनी की फिल्टरिंग क्षमता बताते हैं। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या उम्र बढ़ने पर किडनी डैमेज का खतरा बढ़ता है। इसलिए रेगुलर चेकअप जरूरी है। थायरॉइड TSH, T3 और T4 टेस्ट थायरॉइड हाॅर्मोन का लेवल बताते हैं। असंतुलन से वजन बढ़ना/घटना, थकान, मूड स्विंग जासी समस्याएं हो सकती है। हार्ट रेट भी प्रभावित हो सकती है। 30+ उम्र वालों को और खासकर महिलाओं को यह जांच जरूर मानी करवानी चाहिए, ताकि हॉर्मोनल संतुलन बना रहे। ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ ब्लड प्रेशर, ECG और जरूरत होने पर इको टेस्ट से हार्ट हेल्थ का आकलन करते हैं। हाई BP ’साइलेंट किलर’ माना जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है। रेगुलर मॉनिटरिंग से समय रहते कंट्रोल संभव है। सवाल- कितने अंतराल पर हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए? जवाब- यह उम्र और रिस्क फैक्टर से तय होता है- 20-30 वर्ष: हर 2-3 साल में बेसिक जांच। 30-40 वर्ष: हर 1-2 साल में स्क्रीनिंग। 40+ वर्ष: हर साल फुल बॉडी चेकअप डायबिटीज/बीपी/थायरॉइड पेशेंट: 6-12 महीने में फैमिली हिस्ट्री या हाई रिस्क: डॉक्टर की सलाह के मुताबिक लाइफस्टाइल (स्मोकिंग, मोटापा) के अनुसार अंतराल घट-बढ़ सकता है। सवाल- अगर कोई लक्षण न हो, क्या तब भी हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए? जवाब- हां, लक्षणों के बिना भी स्क्रीनिंग जरूरी है, क्योंकि कई बीमारियों में लक्षण नहीं दिखते हैं। डायबिटीज, हाई BP, कोलेस्ट्रॉल के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। स्क्रीनिंग से प्रीक्लिनिकल स्टेज में ही पहचान संभव है। समय पर इलाज से कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते हैं। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग से शुरुआती स्टेज में ही किन बीमारियों का पता चल सकता है? जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग के जरिए कई बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है- सवाल- क्या मेंटल हेल्थ की जांच भी जरूरी है और यह कैसे की जाती है? जवाब- हां, मेंटल हेल्थ भी उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल हेल्थ है। डिप्रेशन, एंग्जाइटी के शुरुआती फेज में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं। स्क्रीनिंग में क्लिनिकल इंटरव्यू और क्वेश्चनायर (PHQ-9, GAD-7) शामिल होते हैं। जरूरत पर साइकोलॉजिकल टेस्ट/काउंसलिंग की जाती है। नींद, व्यवहार, मूड पैटर्न का आकलन किया जाता है। इससे लाइफ क्वालिटी सुधारने में मदद मिलती है। सवाल- आंखों की और सुनने की क्षमता की जांच कितने समय में करानी चाहिए? जवाब- ये रिस्क फैक्टर के हिसाब से बदल सकता है। 20-40 वर्ष: हर 2 साल में आंखों की जांच कराएं। 40+ वर्ष: साल में एक बार (ग्लूकोमा रिस्क बढ़ता है।) कराएं। डायबिटिक लोग: हर साल रेटिना जांच जरूरी है। कान की जांच: 50+ उम्र में हर 1-2 साल में जांच करवाएं। तेज आवाज वाले माहौल में काम करने वालों को रेगुलर जांच करवानी चाहिए। शुरुआती स्टेज में पहचान से आंखें और सुनने की क्षमता बचाई जा सकती है। सवाल- क्या डेंटल हेल्थ के लिए भी कोई एडवांस टेस्ट और स्क्रीनिंग होती है? जवाब- हां, डेंटल स्क्रीनिंग में बेसिक और एडवांस दोनों जांच होती हैं। ओरल एग्जाम: कैविटी, मसूड़ों की बीमारी की पहचान होती है। डेंटल एक्स-रे: अंदरूनी सड़न और इन्फेक्शन का पता चलता है। ओरल कैंसर स्क्रीनिंग (हाई रिस्क में) करवानी चाहिए। स्केलिंग और गम हेल्थ एसेसमेंट करवाना होता है। हर 6-12 महीने में जांच की सलाह दी जाती है। समय पर जांच से दांत बचाए जा सकते हैं। सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च कितना आता है और क्या ये

Anita Advani on Rajesh Khanna Relation

Anita Advani on Rajesh Khanna Relation

48 मिनट पहले कॉपी लिंक बॉम्बे हाई कोर्ट के राजेश खन्ना के साथ अनीता आडवाणी के रिश्ते को शादी मानने से इनकार करने के बाद अब अनीता ने अपनी नाराजगी जाहीर की है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कोर्ट के फैसले को ‘न्याय का घोर मजाक’ बताया है। अनीता ने साफ कर दिया है कि वह इस कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी और अपनी गरिमा के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों में से नहीं हैं जो डरकर घर बैठ जाएं। दरअसल अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि वह 10 साल से ज्यादा समय तक राजेश खन्ना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं। उन्होंने इस रिश्ते को ‘वैध विवाह’ की मान्यता देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी। हालांकि, 1 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। ‘बिना मुकदमे के फैसला कैसे हो सकता है’ अनीता आडवाणी ने कोर्ट के रुख पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, “मैं थकी नहीं हूं और कभी नहीं थकूंगी। मैं कायर या बिना रीढ़ वाले लोगों में से नहीं हूं जो अन्याय के खिलाफ चुप रहें।” उन्होंने सवाल उठाया कि 14 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अपना पक्ष साबित करने का मौका क्यों नहीं मिला? अनीता के मुताबिक, बिना किसी प्रॉपर ट्रायल या गवाही के दीवानी मामले का फैसला सुना देना गलत है। घरेलू हिंसा कानून में पत्नी जैसा हक मांगा इंटरव्यू के दौरान अनीता ने अपनी कानूनी स्थिति को साफ किया। उन्होंने कहा, “मैंने एक शादीशुदा के रूप में पत्नी बनने का हक मांगा था, न कि शादी का अधिकार। दोनों में अंतर है।” उनके तर्क के मुताबिक, घरेलू हिंसा अधिनियम में लिव-इन रिलेशनशिप को पत्नी के बराबर मान्यता दी गई है। उन्होंने दावा किया कि अगर दो एडल्ट पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, तो उन्हें विवाह के स्वरूप वाले संबंध में माना जाना चाहिए। ‘अस्पताल में मिलने नहीं दिया, वसीयत भी गायब हो गई’ अनीता ने राजेश खन्ना के आखिरी दिनों का दर्द भी साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुपरस्टार के परिवार ने उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने तक नहीं दिया। परिवार की ओर से दावा किया गया था कि राजेश खन्ना खुद उनसे नहीं मिलना चाहते, जिसे अनीता ने सरासर झूठ बताया। उन्होंने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि राजेश खन्ना ने एक वसीयत बनाई थी, जिसमें उनका हक था, लेकिन वह गायब हो गई। प्राइवेट सेरेमनी में पहनाया था मंगलसूत्र अपने पुराने दावों को दोहराते हुए अनीता ने कहा कि सुपरस्टार के साथ उनका रिश्ता कोई छिपाने वाली बात नहीं थी। उन्होंने बताया कि घर के मंदिर में एक छोटी और निजी रस्म हुई थी, जिसमें राजेश खन्ना ने उन्हें सिंदूर लगाया और मंगलसूत्र पहनाया था। अनीता ने भावुक होते हुए कहा कि वह राजेश खन्ना के साथ उनके पैसे के लिए नहीं, बल्कि प्यार की वजह से थीं। उन्होंने कहा कि उनके साथ हुआ दुर्व्यवहार बहुत दर्दनाक था और वह सिर्फ अपना सम्मान वापस चाहती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Anita Advani on Rajesh Khanna Relation

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2 घंटे पहले कॉपी लिंक बॉम्बे हाई कोर्ट के राजेश खन्ना के साथ अनीता आडवाणी के रिश्ते को शादी मानने से इनकार करने के बाद अब अनीता ने अपनी नाराजगी जाहीर की है। एक हालिया इंटरव्यू में उन्होंने कोर्ट के फैसले को ‘न्याय का घोर मजाक’ बताया है। अनीता ने साफ कर दिया है कि वह इस कानूनी लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगी और अपनी गरिमा के लिए संघर्ष जारी रखेंगी। उन्होंने कहा कि वह उन लोगों में से नहीं हैं जो डरकर घर बैठ जाएं। दरअसल अनीता आडवाणी ने दावा किया था कि वह 10 साल से ज्यादा समय तक राजेश खन्ना के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं। उन्होंने इस रिश्ते को ‘वैध विवाह’ की मान्यता देने के लिए बॉम्बे हाई कोर्ट में अपील की थी। हालांकि, 1 अप्रैल 2026 को कोर्ट ने उनकी अर्जी खारिज कर दी। ‘बिना मुकदमे के फैसला कैसे हो सकता है’ अनीता आडवाणी ने कोर्ट के रुख पर निराशा जताई। उन्होंने कहा, “मैं थकी नहीं हूं और कभी नहीं थकूंगी। मैं कायर या बिना रीढ़ वाले लोगों में से नहीं हूं जो अन्याय के खिलाफ चुप रहें।” उन्होंने सवाल उठाया कि 14 साल बीत जाने के बाद भी उन्हें अपना पक्ष साबित करने का मौका क्यों नहीं मिला? अनीता के मुताबिक, बिना किसी प्रॉपर ट्रायल या गवाही के दीवानी मामले का फैसला सुना देना गलत है। घरेलू हिंसा कानून में पत्नी जैसा हक मांगा इंटरव्यू के दौरान अनीता ने अपनी कानूनी स्थिति को साफ किया। उन्होंने कहा, “मैंने एक शादीशुदा के रूप में पत्नी बनने का हक मांगा था, न कि शादी का अधिकार। दोनों में अंतर है।” उनके तर्क के मुताबिक, घरेलू हिंसा अधिनियम में लिव-इन रिलेशनशिप को पत्नी के बराबर मान्यता दी गई है। उन्होंने दावा किया कि अगर दो एडल्ट पति-पत्नी की तरह साथ रहते हैं, तो उन्हें विवाह के स्वरूप वाले संबंध में माना जाना चाहिए। ‘अस्पताल में मिलने नहीं दिया, वसीयत भी गायब हो गई’ अनीता ने राजेश खन्ना के आखिरी दिनों का दर्द भी साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि सुपरस्टार के परिवार ने उन्हें अस्पताल में उनसे मिलने तक नहीं दिया। परिवार की ओर से दावा किया गया था कि राजेश खन्ना खुद उनसे नहीं मिलना चाहते, जिसे अनीता ने सरासर झूठ बताया। उन्होंने एक और बड़ा दावा करते हुए कहा कि राजेश खन्ना ने एक वसीयत बनाई थी, जिसमें उनका हक था, लेकिन वह गायब हो गई। प्राइवेट सेरेमनी में पहनाया था मंगलसूत्र अपने पुराने दावों को दोहराते हुए अनीता ने कहा कि सुपरस्टार के साथ उनका रिश्ता कोई छिपाने वाली बात नहीं थी। उन्होंने बताया कि घर के मंदिर में एक छोटी और निजी रस्म हुई थी, जिसमें राजेश खन्ना ने उन्हें सिंदूर लगाया और मंगलसूत्र पहनाया था। अनीता ने भावुक होते हुए कहा कि वह राजेश खन्ना के साथ उनके पैसे के लिए नहीं, बल्कि प्यार की वजह से थीं। उन्होंने कहा कि उनके साथ हुआ दुर्व्यवहार बहुत दर्दनाक था और वह सिर्फ अपना सम्मान वापस चाहती हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔