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Jasmine Sandlas Struggle Success Story; Dhurandhar Songs

Jasmine Sandlas Struggle Success Story; Dhurandhar Songs

19 मिनट पहलेलेखक: वीरेंद्र मिश्र

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जैस्मीन जालंधर में पैदा हुईं। उन्होंने स्कूल के दिनों में गाना शुरू कर दिया था।

‘धुरंधर’ से बड़ी पहचान बनाने वाली सिंगर जैस्मीन सैंडलस की जिंदगी सफलता के साथ संघर्ष और दर्द से भरी रही है। एक वक्त वह अंदर से टूट गई थीं और शराब की लत में फंस गई थीं। आज वह उस दौर पर पछतावा मानती हैं।

अमेरिका में शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया। पिता भारत में अच्छी नौकरी छोड़कर पेट्रोल पंप पर काम करने लगे, जबकि मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं। परिवार ने गरीबी में दिन गुजारे।

इन हालातो के बावजूद जैस्मीन ने म्यूजिक का साथ नहीं छोड़ा। ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ से उन्हें पहचान मिली, लेकिन ‘धुरंधर’ के गानों ने उन्हें नई ऊंचाई तक पहुंचाया।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानिए जैस्मीन सैंडलस के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें…

जैस्मीन को गायिकी की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी।

जैस्मीन को गायिकी की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी।

गायिकी की प्रेरणा मां से मिली

जैस्मीन सैंडलस का जन्म 4 सितंबर 1985 को पंजाब के जालंधर में हुआ। वह साधारण पंजाबी परिवार से हैं। बचपन से उन्हें मां से गायिकी की प्रेरणा मिली, जो उन्हें गाने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। स्कूल के दिनों से उन्होंने स्टेज पर गाना शुरू किया और कम उम्र में ही गाने लिखने लगी थीं।

अमेरिका का सफर: बेहतर भविष्य की तलाश

करीब 12-13 साल की उम्र में उनका परिवार कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गया। शुरुआती समय में वे न्यूयॉर्क भी रहीं। उन्हें इंग्लिश नहीं आती थी, इसलिए लोकल स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा। उनके पिता भारत में हाई-प्रोफाइल नौकरी में थे और लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया।

अमेरिका में संघर्ष: गरीबी, छोटे काम और मुश्किल हालात

अमेरिका में परिवार ने मुश्किल हालात देखे। छह लोगों का परिवार एक छोटे कमरे में रहता था और फूड कूपन पर निर्भर था। पिता को छोटे काम करने पड़े, यहां तक कि पेट्रोल पंप पर भी काम किया। मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं और चेरी तोड़ती थीं।

पढ़ाई और म्यूजिक की ओर झुकाव

जैस्मीन ने अमेरिका में पढ़ाई पूरी की। उन्होंने साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन और प्री-लॉ की पढ़ाई की, लेकिन मन हमेशा म्यूजिक में रहा।

जैस्मीन सैंडलस ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में कहा- हम न्यूयॉर्क पहुंचे। मुझे इंग्लिश नहीं आती थी। जो भी लोकल स्कूल था, पापा ने हमें वहीं एडमिशन दिला दिया। हम एक छोटे अपार्टमेंट में रहते थे, जो गरीब परिवार के लिए था और हम छह लोग थे।

पापा ने पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी

मेरे पापा इंडिया में हाई प्रोफाइल जॉब करते थे। वह लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन अमेरिका जाने पर 3-4 साल पढ़ाई या नौकरी करनी पड़ती है। इसलिए पापा ने हमारे लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी।

मुझे लगता है कि अमेरिका में उनकी पहली नौकरी पेट्रोल पंप पर थी, जहां वह पेट्रोल भरते थे। मुझे याद है, वह बर्फ में बैठे थे और पैरों में जूते नहीं थे। पूछने पर उन्होंने कहा कि बर्फ के जूते बहुत महंगे हैं।

फूड कूपन से चलती थी जिंदगी

हम उन घरों में रहते थे, जो गरीबी रेखा वालों के लिए होते हैं, इसलिए फूड कूपन मिलते थे। मेरी मां फैक्ट्री में काम करती थीं और चेरी तोड़ती थीं। वह वहां मजदूर के रूप में काम करती थीं।

जब हम कैलिफोर्निया गए, तो मेरे पिता ने फिर से कानूनी पेशे में एंट्री की और इंटरप्रेटर बन गए। इसके बाद हमारी आर्थिक स्थिति बेहतर हो गई।

रिश्तों में दरार, पिता का निधन और टूटता मन

जैस्मीन ने माना कि उनके और माता-पिता के रिश्ते आसान नहीं रहे। वह कहती हैं- मेरे और परिवार के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। बहुत कुछ अंदर ही अंदर मुझे तोड़ रहा था। मैं 23 साल की थी, तभी पिता का निधन हो गया। उस समय मैं करियर में ठीक कर रही थी, लेकिन अंदर से टूट गई थी।

शराब की लत और पछतावा

इस दर्द ने जैस्मीन को ऐसे दौर में धकेला, जहां उन्होंने खुद को खो दिया। वह कहती हैं- मैंने खुद को शराब में डुबो लिया था। मैं बहुत ज्यादा शराब पीती थी और आज भी पछतावा है। उस वक्त वही मेरे लिए सहारा था। मैं पूरी जिंदगी ऐसे सुकून और घर की तलाश में भटकती रही, जो बचपन में नहीं मिला।

खुद को कमजोर और असहाय महसूस करने लगी थी

मेरी मां और परिवार ने रिकवरी में बहुत मदद की। जब मैं टूट चुकी थी, तब भी उन्होंने मुझसे प्यार किया। मेरी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से थी। उस समय मुश्किल होता था, क्योंकि दिन शुरू होते ही मैं पुरानी आदतों में फंस जाती थी। मैंने भगवान से प्रार्थना की- ‘प्लीज मुझे बचा लो, मुझे बस एक और मौका दे दो।

मैं बहुत बेबस महसूस कर रही थी। उस दौर से बाहर आने के लिए चीजों को ‘नहीं’ कहने की हिम्मत चाहिए होती है। परिवार का साथ जरूरी है, उनसे दूर मत भागिए। जब मैंने जिंदगी से जहरीली चीजें निकाल दीं, तो लगा जैसे नई जिंदगी मिल गई हो।’

दिल्ली के क्लब्स से शुरू हुआ असली संघर्ष

म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं था। 2007 से 2010 के बीच उन्होंने दिल्ली के क्लब्स, कैफे और लोकल इवेंट्स में परफॉर्म किया। उस दौर में न बड़ा प्लेटफॉर्म था और न मजबूत सपोर्ट सिस्टम, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

वह खुद गाने लिखतीं, कंपोज करतीं और रिकॉर्ड कर मिक्स CDs बनाती थीं। इन्हें 20 रुपए में बेचती थीं, ताकि ज्यादा लोग उनके संगीत तक पहुंच सकें। यही संघर्ष और मेहनत आगे उनके करियर की नींव बना।

जैस्मीन ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट सॉन्ग ‘मुस्कान’ से की थी।

जैस्मीन ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट सॉन्ग ‘मुस्कान’ से की थी।

करियर की शुरुआत और पहला एल्बम

जैस्मीन के करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट गाने ‘मुस्कान’ से हुई, जिससे उन्हें पहचान मिली। इसी साल पहला एल्बम ‘द डायमंड’ रिलीज हुआ, जिसमें उनके वेस्टर्न-पंजाबी फ्यूजन को सराहा गया और म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनी।

‘गुलाबी’ से मिली पहचान, बना करियर का टर्निंग पॉइंट

2012 में रिलीज एल्बम ‘गुलाबी’ उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। इसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया, जो उस समय इंटरनेशनल पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे।

‘गुलाबी’ एक म्यूजिक स्टाइल बनकर उभरा, जिसमें वेस्टर्न बीट्स और पंजाबी लिरिक्स का फ्यूजन था, जिसने युवाओं को आकर्षित किया। उनकी आवाज, बोल्ड स्टाइल और एटीट्यूड ने अलग पहचान दी।

इस सफलता के बाद उन्हें ‘गुलाबी क्वीन’ का टैग मिला, जो आज भी उनकी पहचान है। इस गाने ने उन्हें भारत के साथ इंटरनेशनल ऑडियंस में भी पॉपुलर बना दिया।

सलमान की ‘किक’ से मिला बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक

बॉलीवुड में जैस्मीन को बड़ा मौका 2014 में ‘किक’ से मिला, जिसमें सलमान खान लीड रोल में थे। इस फिल्म में उन्होंने यो यो हनी सिंह के साथ ‘यार ना मिले’ गाया। यह ट्रैक रिलीज होते ही चार्टबस्टर बना और पार्टी, क्लब व रेडियो प्लेलिस्ट का हिस्सा बन गया।

गाने में उनकी आवाज ने अलग एनर्जी जोड़ी, जो दर्शकों को पसंद आई। इसकी सफलता ने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई और बड़े प्रोजेक्ट्स के दरवाजे खोले। इसके बाद उन्होंने कई हिट गाने दिए और इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई, जहां उनकी आवाज और स्टाइल पहचाने जाने लगे।

हिट गानों से बनाई अलग पहचान

जैस्मीन ने कई हिट गाने दिए हैं, जिनमें ‘स्ट्रीट डांसर 3D’ के ‘इलीगल वेपन 2.0’ और ‘सिप सिप’, ‘नाम शबाना’ का ‘बेबी बेशरम’, ‘मुंज्या’ का ‘तरस नी आया तुझको’, ‘रेड 2’ का ‘नशा’, ‘थामा’ का ‘पॉइजन बेबी’ और ‘इक्कीस’ का ‘बन के दिखा इक्कीस’ शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों और एल्बमों में भी आवाज दी है। उनके गानों में पंजाबी बीट्स और वेस्टर्न स्टाइल का फ्यूजन खास पहचान है।

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ से नई ऊंचाई

फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल ‘धुरंधर 2’ ने जैस्मीन के करियर को नई उड़ान दी। इन फिल्मों के गाने ‘शरारत’, ‘जाइए सजना’, ‘आरी आरी’ और ‘मैं और तू’ ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया।

खास बात यह रही कि उन्होंने एक गाने की रिकॉर्डिंग रिलीज वाले दिन सुबह तक पूरी की, जो उनके समर्पण और प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है। उनकी आवाज और एक्सप्रेशन ने गानों को अलग पहचान दी, जिससे उनका क्रेज और बढ़ गया।

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जैस्मीन जालंधर में पैदा हुईं। उन्होंने स्कूल के दिनों में गाना शुरू कर दिया था।

‘धुरंधर’ से बड़ी पहचान बनाने वाली सिंगर जैस्मीन सैंडलस की जिंदगी सफलता के साथ संघर्ष और दर्द से भरी रही है। एक वक्त वह अंदर से टूट गई थीं और शराब की लत में फंस गई थीं। आज वह उस दौर पर पछतावा मानती हैं।

अमेरिका में शुरुआती साल बेहद कठिन रहे। माता-पिता ने बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया। पिता भारत में अच्छी नौकरी छोड़कर पेट्रोल पंप पर काम करने लगे, जबकि मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं। परिवार ने गरीबी में दिन गुजारे।

इन हालातो के बावजूद जैस्मीन ने म्यूजिक का साथ नहीं छोड़ा। ‘किक’ के गाने ‘यार ना मिले’ से उन्हें पहचान मिली, लेकिन ‘धुरंधर’ के गानों ने उन्हें नई ऊंचाई तक पहुंचाया।

आज की सक्सेस स्टोरी में जानिए जैस्मीन सैंडलस के करियर और निजी जीवन से जुड़ी बातें…

जैस्मीन को गायिकी की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी।

जैस्मीन को गायिकी की प्रेरणा अपनी मां से मिली थी।

गायिकी की प्रेरणा मां से मिली

जैस्मीन सैंडलस का जन्म 4 सितंबर 1985 को पंजाब के जालंधर में हुआ। वह साधारण पंजाबी परिवार से हैं। बचपन से उन्हें मां से गायिकी की प्रेरणा मिली, जो उन्हें गाने के लिए प्रोत्साहित करती थीं। स्कूल के दिनों से उन्होंने स्टेज पर गाना शुरू किया और कम उम्र में ही गाने लिखने लगी थीं।

अमेरिका का सफर: बेहतर भविष्य की तलाश

करीब 12-13 साल की उम्र में उनका परिवार कैलिफोर्निया शिफ्ट हो गया। शुरुआती समय में वे न्यूयॉर्क भी रहीं। उन्हें इंग्लिश नहीं आती थी, इसलिए लोकल स्कूल में एडमिशन लेना पड़ा। उनके पिता भारत में हाई-प्रोफाइल नौकरी में थे और लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सबकुछ छोड़ दिया।

अमेरिका में संघर्ष: गरीबी, छोटे काम और मुश्किल हालात

अमेरिका में परिवार ने मुश्किल हालात देखे। छह लोगों का परिवार एक छोटे कमरे में रहता था और फूड कूपन पर निर्भर था। पिता को छोटे काम करने पड़े, यहां तक कि पेट्रोल पंप पर भी काम किया। मां फैक्ट्री में मजदूरी करती थीं और चेरी तोड़ती थीं।

पढ़ाई और म्यूजिक की ओर झुकाव

जैस्मीन ने अमेरिका में पढ़ाई पूरी की। उन्होंने साइकोलॉजी में ग्रेजुएशन और प्री-लॉ की पढ़ाई की, लेकिन मन हमेशा म्यूजिक में रहा।

जैस्मीन सैंडलस ने रणवीर अल्लाहबादिया के पॉडकास्ट में कहा- हम न्यूयॉर्क पहुंचे। मुझे इंग्लिश नहीं आती थी। जो भी लोकल स्कूल था, पापा ने हमें वहीं एडमिशन दिला दिया। हम एक छोटे अपार्टमेंट में रहते थे, जो गरीब परिवार के लिए था और हम छह लोग थे।

पापा ने पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी

मेरे पापा इंडिया में हाई प्रोफाइल जॉब करते थे। वह लॉ स्कूल टॉपर थे, लेकिन अमेरिका जाने पर 3-4 साल पढ़ाई या नौकरी करनी पड़ती है। इसलिए पापा ने हमारे लिए अपनी पूरी जिंदगी कुर्बान कर दी।

मुझे लगता है कि अमेरिका में उनकी पहली नौकरी पेट्रोल पंप पर थी, जहां वह पेट्रोल भरते थे। मुझे याद है, वह बर्फ में बैठे थे और पैरों में जूते नहीं थे। पूछने पर उन्होंने कहा कि बर्फ के जूते बहुत महंगे हैं।

फूड कूपन से चलती थी जिंदगी

हम उन घरों में रहते थे, जो गरीबी रेखा वालों के लिए होते हैं, इसलिए फूड कूपन मिलते थे। मेरी मां फैक्ट्री में काम करती थीं और चेरी तोड़ती थीं। वह वहां मजदूर के रूप में काम करती थीं।

जब हम कैलिफोर्निया गए, तो मेरे पिता ने फिर से कानूनी पेशे में एंट्री की और इंटरप्रेटर बन गए। इसके बाद हमारी आर्थिक स्थिति बेहतर हो गई।

रिश्तों में दरार, पिता का निधन और टूटता मन

जैस्मीन ने माना कि उनके और माता-पिता के रिश्ते आसान नहीं रहे। वह कहती हैं- मेरे और परिवार के रिश्ते उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। बहुत कुछ अंदर ही अंदर मुझे तोड़ रहा था। मैं 23 साल की थी, तभी पिता का निधन हो गया। उस समय मैं करियर में ठीक कर रही थी, लेकिन अंदर से टूट गई थी।

शराब की लत और पछतावा

इस दर्द ने जैस्मीन को ऐसे दौर में धकेला, जहां उन्होंने खुद को खो दिया। वह कहती हैं- मैंने खुद को शराब में डुबो लिया था। मैं बहुत ज्यादा शराब पीती थी और आज भी पछतावा है। उस वक्त वही मेरे लिए सहारा था। मैं पूरी जिंदगी ऐसे सुकून और घर की तलाश में भटकती रही, जो बचपन में नहीं मिला।

खुद को कमजोर और असहाय महसूस करने लगी थी

मेरी मां और परिवार ने रिकवरी में बहुत मदद की। जब मैं टूट चुकी थी, तब भी उन्होंने मुझसे प्यार किया। मेरी सबसे बड़ी लड़ाई खुद से थी। उस समय मुश्किल होता था, क्योंकि दिन शुरू होते ही मैं पुरानी आदतों में फंस जाती थी। मैंने भगवान से प्रार्थना की- ‘प्लीज मुझे बचा लो, मुझे बस एक और मौका दे दो।

मैं बहुत बेबस महसूस कर रही थी। उस दौर से बाहर आने के लिए चीजों को ‘नहीं’ कहने की हिम्मत चाहिए होती है। परिवार का साथ जरूरी है, उनसे दूर मत भागिए। जब मैंने जिंदगी से जहरीली चीजें निकाल दीं, तो लगा जैसे नई जिंदगी मिल गई हो।’

दिल्ली के क्लब्स से शुरू हुआ असली संघर्ष

म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनाना आसान नहीं था। 2007 से 2010 के बीच उन्होंने दिल्ली के क्लब्स, कैफे और लोकल इवेंट्स में परफॉर्म किया। उस दौर में न बड़ा प्लेटफॉर्म था और न मजबूत सपोर्ट सिस्टम, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।

वह खुद गाने लिखतीं, कंपोज करतीं और रिकॉर्ड कर मिक्स CDs बनाती थीं। इन्हें 20 रुपए में बेचती थीं, ताकि ज्यादा लोग उनके संगीत तक पहुंच सकें। यही संघर्ष और मेहनत आगे उनके करियर की नींव बना।

जैस्मीन ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट सॉन्ग ‘मुस्कान’ से की थी।

जैस्मीन ने अपने करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट सॉन्ग ‘मुस्कान’ से की थी।

करियर की शुरुआत और पहला एल्बम

जैस्मीन के करियर की शुरुआत 2008 में इंडिपेंडेंट गाने ‘मुस्कान’ से हुई, जिससे उन्हें पहचान मिली। इसी साल पहला एल्बम ‘द डायमंड’ रिलीज हुआ, जिसमें उनके वेस्टर्न-पंजाबी फ्यूजन को सराहा गया और म्यूजिक इंडस्ट्री में पहचान बनी।

‘गुलाबी’ से मिली पहचान, बना करियर का टर्निंग पॉइंट

2012 में रिलीज एल्बम ‘गुलाबी’ उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। इसमें उन्होंने रैपर बोहेमिया के साथ काम किया, जो उस समय इंटरनेशनल पंजाबी म्यूजिक इंडस्ट्री का बड़ा नाम थे।

‘गुलाबी’ एक म्यूजिक स्टाइल बनकर उभरा, जिसमें वेस्टर्न बीट्स और पंजाबी लिरिक्स का फ्यूजन था, जिसने युवाओं को आकर्षित किया। उनकी आवाज, बोल्ड स्टाइल और एटीट्यूड ने अलग पहचान दी।

इस सफलता के बाद उन्हें ‘गुलाबी क्वीन’ का टैग मिला, जो आज भी उनकी पहचान है। इस गाने ने उन्हें भारत के साथ इंटरनेशनल ऑडियंस में भी पॉपुलर बना दिया।

सलमान की ‘किक’ से मिला बॉलीवुड में बड़ा ब्रेक

बॉलीवुड में जैस्मीन को बड़ा मौका 2014 में ‘किक’ से मिला, जिसमें सलमान खान लीड रोल में थे। इस फिल्म में उन्होंने यो यो हनी सिंह के साथ ‘यार ना मिले’ गाया। यह ट्रैक रिलीज होते ही चार्टबस्टर बना और पार्टी, क्लब व रेडियो प्लेलिस्ट का हिस्सा बन गया।

गाने में उनकी आवाज ने अलग एनर्जी जोड़ी, जो दर्शकों को पसंद आई। इसकी सफलता ने उन्हें बॉलीवुड में पहचान दिलाई और बड़े प्रोजेक्ट्स के दरवाजे खोले। इसके बाद उन्होंने कई हिट गाने दिए और इंडस्ट्री में अलग जगह बनाई, जहां उनकी आवाज और स्टाइल पहचाने जाने लगे।

हिट गानों से बनाई अलग पहचान

जैस्मीन ने कई हिट गाने दिए हैं, जिनमें ‘स्ट्रीट डांसर 3D’ के ‘इलीगल वेपन 2.0’ और ‘सिप सिप’, ‘नाम शबाना’ का ‘बेबी बेशरम’, ‘मुंज्या’ का ‘तरस नी आया तुझको’, ‘रेड 2’ का ‘नशा’, ‘थामा’ का ‘पॉइजन बेबी’ और ‘इक्कीस’ का ‘बन के दिखा इक्कीस’ शामिल हैं।

इसके अलावा उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों और एल्बमों में भी आवाज दी है। उनके गानों में पंजाबी बीट्स और वेस्टर्न स्टाइल का फ्यूजन खास पहचान है।

‘धुरंधर’ और ‘धुरंधर 2’ से नई ऊंचाई

फिल्म ‘धुरंधर’ और इसके सीक्वल ‘धुरंधर 2’ ने जैस्मीन के करियर को नई उड़ान दी। इन फिल्मों के गाने ‘शरारत’, ‘जाइए सजना’, ‘आरी आरी’ और ‘मैं और तू’ ने उन्हें फिर से सुर्खियों में ला दिया।

खास बात यह रही कि उन्होंने एक गाने की रिकॉर्डिंग रिलीज वाले दिन सुबह तक पूरी की, जो उनके समर्पण और प्रोफेशनलिज्म को दिखाता है। उनकी आवाज और एक्सप्रेशन ने गानों को अलग पहचान दी, जिससे उनका क्रेज और बढ़ गया।

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दीपिका पादुकोण को हिट फिल्म के बाद भी ताने मिले:बोलने के तरीके का मजाक उड़ाया, डिप्रेशन का शिकार हुईं; नेटवर्थ ₹500 करोड़ से ज्यादा

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