Tuesday, 04 Aug 2026 | 06:32 PM

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Health Screening Tests Age Wise List & Guide

Health Screening Tests Age Wise List & Guide

1 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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आमतौर पर लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब किसी बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखते हैं। लेकिन हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते। स्क्रीनिंग की मदद से स्पष्ट लक्षणों से पहले ही इन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

इसलिए हेल्थ स्क्रीनिंग को ‘साइलेंट लाइफसेवर’ कहा जाता है। इससे न सिर्फ बीमारी का जल्दी पता लगता है, बल्कि इलाज भी आसान हो जाता है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है। साथ ही जानेंगे कि-

  • हेल्थ स्क्रीनिंग कराना क्यों जरूरी है?
  • कौन सी जांचें आपकी जिंदगी बचा सकती हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है और यह करवाना क्यों जरूरी है?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग एक प्रिवेंटिव मेडिकल टेस्ट प्रक्रिया है।

  • इसका उद्देश्य बीमारियों का शुरुआती दिनों में पता लगाना है।
  • इसमें ब्लड टेस्ट, BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल जैसी जांचें शामिल हैं।
  • लक्षण न दिखने पर भी रिस्क पहचाना जा सकता है।
  • इसकी मदद से समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग में कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग में जरूरी टेस्ट उम्र, जेंडर और रिस्क फैक्टर के अनुसार तय होते हैं। सामान्य गाइडलाइन इस तरह हैं-

अब समझते हैं कि कॉमन बीमारियों का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं-

डायबिटीज

  • डायबिटीज की जांच के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रेंडियल शुगर और HbA1c टेस्ट जरूरी होते हैं।
  • HbA1c पिछले 2-3 महीनों का एवरेज शुगर लेवल बताता है।
  • इससे प्री-डायबिटीज पहचानने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट

  • इसमें टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है।
  • इससे हार्ट डिजीज के रिस्क का आकलन होता है।
  • LDL बढ़ने पर धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है।
  • नियमित स्क्रीनिंग से हार्ट डिजीज का समय से पहले पता चल सकता है।

यूरिक एसिड

  • इस ब्लड टेस्ट से शरीर में यूरिक एसिड का लेवल पता चलता है।
  • इसका लेवल बढ़ने पर गाउट, जोड़ों के दर्द और किडनी स्टोन का रिस्क हो सकता है।
  • हाई-प्रोटीन डाइट लेने वालों को और मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स होने पर रेगुलर चेकअप कराना चाहिए।

विटामिन डेफिशिएंसी

  • विटामिन D और B12 की जांच काफी कॉमन है।
  • इनकी कमी से बोन वीकनेस, और नर्व प्रॉब्लम हो सकती है।
  • ब्लड टेस्ट से कमी का पता लगाकर सही सप्लीमेंट और डाइट से सुधार किया जा सकता है।

लिवर हेल्थ

  • इसमें लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) में SGPT, SGOT, बिलीरुबिन और प्रोटीन लेवल चेक किए जाते हैं।
  • इनसे लिवर की कार्यक्षमता, इंफ्लेमेशन और डैमेज का पता लगाया जाता है।
  • फैटी लिवर, दवाओं के साइड इफेक्ट को मॉनिटर करने के लिए यह स्क्रीनिंग जरूरी है।

किडनी हेल्थ

  • किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) में क्रिएटिनिन, यूरिया और eGFR की जांच होती है।
  • ये किडनी की फिल्टरिंग क्षमता बताते हैं।
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या उम्र बढ़ने पर किडनी डैमेज का खतरा बढ़ता है। इसलिए रेगुलर चेकअप जरूरी है।

थायरॉइड

  • TSH, T3 और T4 टेस्ट थायरॉइड हाॅर्मोन का लेवल बताते हैं।
  • असंतुलन से वजन बढ़ना/घटना, थकान, मूड स्विंग जासी समस्याएं हो सकती है। हार्ट रेट भी प्रभावित हो सकती है।
  • 30+ उम्र वालों को और खासकर महिलाओं को यह जांच जरूर मानी करवानी चाहिए, ताकि हॉर्मोनल संतुलन बना रहे।

ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ

  • ब्लड प्रेशर, ECG और जरूरत होने पर इको टेस्ट से हार्ट हेल्थ का आकलन करते हैं।
  • हाई BP ’साइलेंट किलर’ माना जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है।
  • रेगुलर मॉनिटरिंग से समय रहते कंट्रोल संभव है।

सवाल- कितने अंतराल पर हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?

जवाब- यह उम्र और रिस्क फैक्टर से तय होता है-

20-30 वर्ष: हर 2-3 साल में बेसिक जांच।

30-40 वर्ष: हर 1-2 साल में स्क्रीनिंग।

40+ वर्ष: हर साल फुल बॉडी चेकअप

डायबिटीज/बीपी/थायरॉइड पेशेंट: 6-12 महीने में

फैमिली हिस्ट्री या हाई रिस्क: डॉक्टर की सलाह के मुताबिक

लाइफस्टाइल (स्मोकिंग, मोटापा) के अनुसार अंतराल घट-बढ़ सकता है।

सवाल- अगर कोई लक्षण न हो, क्या तब भी हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?

जवाब- हां, लक्षणों के बिना भी स्क्रीनिंग जरूरी है, क्योंकि कई बीमारियों में लक्षण नहीं दिखते हैं।

  • डायबिटीज, हाई BP, कोलेस्ट्रॉल के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं।
  • स्क्रीनिंग से प्रीक्लिनिकल स्टेज में ही पहचान संभव है।
  • समय पर इलाज से कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते हैं।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग से शुरुआती स्टेज में ही किन बीमारियों का पता चल सकता है?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग के जरिए कई बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है-

सवाल- क्या मेंटल हेल्थ की जांच भी जरूरी है और यह कैसे की जाती है?

जवाब- हां, मेंटल हेल्थ भी उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल हेल्थ है।

  • डिप्रेशन, एंग्जाइटी के शुरुआती फेज में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं।
  • स्क्रीनिंग में क्लिनिकल इंटरव्यू और क्वेश्चनायर (PHQ-9, GAD-7) शामिल होते हैं।
  • जरूरत पर साइकोलॉजिकल टेस्ट/काउंसलिंग की जाती है।
  • नींद, व्यवहार, मूड पैटर्न का आकलन किया जाता है।
  • इससे लाइफ क्वालिटी सुधारने में मदद मिलती है।

सवाल- आंखों की और सुनने की क्षमता की जांच कितने समय में करानी चाहिए?

जवाब- ये रिस्क फैक्टर के हिसाब से बदल सकता है।

20-40 वर्ष: हर 2 साल में आंखों की जांच कराएं।

40+ वर्ष: साल में एक बार (ग्लूकोमा रिस्क बढ़ता है।) कराएं।

डायबिटिक लोग: हर साल रेटिना जांच जरूरी है।

कान की जांच: 50+ उम्र में हर 1-2 साल में जांच करवाएं।

  • तेज आवाज वाले माहौल में काम करने वालों को रेगुलर जांच करवानी चाहिए।
  • शुरुआती स्टेज में पहचान से आंखें और सुनने की क्षमता बचाई जा सकती है।

सवाल- क्या डेंटल हेल्थ के लिए भी कोई एडवांस टेस्ट और स्क्रीनिंग होती है?

जवाब- हां, डेंटल स्क्रीनिंग में बेसिक और एडवांस दोनों जांच होती हैं।

ओरल एग्जाम: कैविटी, मसूड़ों की बीमारी की पहचान होती है।

डेंटल एक्स-रे: अंदरूनी सड़न और इन्फेक्शन का पता चलता है।

  • ओरल कैंसर स्क्रीनिंग (हाई रिस्क में) करवानी चाहिए।
  • स्केलिंग और गम हेल्थ एसेसमेंट करवाना होता है।
  • हर 6-12 महीने में जांच की सलाह दी जाती है।
  • समय पर जांच से दांत बचाए जा सकते हैं।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च कितना आता है और क्या ये जांचें इंश्योरेंस में कवर होती हैं?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च इस बात से तय होता है कि किस लेवल की स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।

बेसिक हेल्थ चेकअप: 1,000-3,000 रुपए।

फुल बॉडी पैकेज: 3,000- 10,000 रुपए।

एडवांस टेस्ट में यह खर्च बढ़ सकता है।

इंश्योरेंस

  • कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में फ्री प्रिवेंटिव चेकअप शामिल होते हैं।
  • आमतौर पर साल में एक बार कवर मिलता है।
  • हर इंश्योरेंस में पॉलिसी की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- तरबूज खाने से पूरे परिवार की मौत: गर्मियों में बढ़ता फूड पॉइजनिंग का रिस्क, जानें लक्षण, सावधानी, बचाव के तरीके 25 अप्रैल को मुंबई में एक परिवार के चार लोगों की डायरिया और उल्टी के कारण मौत हो गई। पूरे परिवार ने डिनर के बाद देर रात तरबूज खाया था। अटॉप्सी रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है। आगे पढ़िए…

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राजनीति

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1 मिनट पहलेलेखक: गौरव तिवारी

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आमतौर पर लोग डॉक्टर के पास तब जाते हैं, जब किसी बीमारी के स्पष्ट लक्षण दिखते हैं। लेकिन हार्ट डिजीज, किडनी डिजीज और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के लक्षण शुरुआत में नजर नहीं आते। स्क्रीनिंग की मदद से स्पष्ट लक्षणों से पहले ही इन बीमारियों का पता लगाया जा सकता है।

इसलिए हेल्थ स्क्रीनिंग को ‘साइलेंट लाइफसेवर’ कहा जाता है। इससे न सिर्फ बीमारी का जल्दी पता लगता है, बल्कि इलाज भी आसान हो जाता है।

इसलिए ‘जरूरत की खबर’ में आज समझेंगे कि हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है। साथ ही जानेंगे कि-

  • हेल्थ स्क्रीनिंग कराना क्यों जरूरी है?
  • कौन सी जांचें आपकी जिंदगी बचा सकती हैं?

एक्सपर्ट: डॉ. संचयन रॉय, सीनियर कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, दिल्ली

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग क्या है और यह करवाना क्यों जरूरी है?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग एक प्रिवेंटिव मेडिकल टेस्ट प्रक्रिया है।

  • इसका उद्देश्य बीमारियों का शुरुआती दिनों में पता लगाना है।
  • इसमें ब्लड टेस्ट, BP, शुगर, कोलेस्ट्रॉल जैसी जांचें शामिल हैं।
  • लक्षण न दिखने पर भी रिस्क पहचाना जा सकता है।
  • इसकी मदद से समय पर इलाज शुरू किया जा सकता है।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग में कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग में जरूरी टेस्ट उम्र, जेंडर और रिस्क फैक्टर के अनुसार तय होते हैं। सामान्य गाइडलाइन इस तरह हैं-

अब समझते हैं कि कॉमन बीमारियों का पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट करवाने जरूरी हैं-

डायबिटीज

  • डायबिटीज की जांच के लिए फास्टिंग ब्लड शुगर, पोस्टप्रेंडियल शुगर और HbA1c टेस्ट जरूरी होते हैं।
  • HbA1c पिछले 2-3 महीनों का एवरेज शुगर लेवल बताता है।
  • इससे प्री-डायबिटीज पहचानने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद मिलती है।

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट

  • इसमें टोटल कोलेस्ट्रॉल, LDL (खराब कोलेस्ट्रॉल), HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच होती है।
  • इससे हार्ट डिजीज के रिस्क का आकलन होता है।
  • LDL बढ़ने पर धमनियों में प्लाक जमा हो सकता है।
  • नियमित स्क्रीनिंग से हार्ट डिजीज का समय से पहले पता चल सकता है।

यूरिक एसिड

  • इस ब्लड टेस्ट से शरीर में यूरिक एसिड का लेवल पता चलता है।
  • इसका लेवल बढ़ने पर गाउट, जोड़ों के दर्द और किडनी स्टोन का रिस्क हो सकता है।
  • हाई-प्रोटीन डाइट लेने वालों को और मेटाबॉलिक प्रॉब्लम्स होने पर रेगुलर चेकअप कराना चाहिए।

विटामिन डेफिशिएंसी

  • विटामिन D और B12 की जांच काफी कॉमन है।
  • इनकी कमी से बोन वीकनेस, और नर्व प्रॉब्लम हो सकती है।
  • ब्लड टेस्ट से कमी का पता लगाकर सही सप्लीमेंट और डाइट से सुधार किया जा सकता है।

लिवर हेल्थ

  • इसमें लिवर फंक्शन टेस्ट (LFT) में SGPT, SGOT, बिलीरुबिन और प्रोटीन लेवल चेक किए जाते हैं।
  • इनसे लिवर की कार्यक्षमता, इंफ्लेमेशन और डैमेज का पता लगाया जाता है।
  • फैटी लिवर, दवाओं के साइड इफेक्ट को मॉनिटर करने के लिए यह स्क्रीनिंग जरूरी है।

किडनी हेल्थ

  • किडनी फंक्शन टेस्ट (KFT) में क्रिएटिनिन, यूरिया और eGFR की जांच होती है।
  • ये किडनी की फिल्टरिंग क्षमता बताते हैं।
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या उम्र बढ़ने पर किडनी डैमेज का खतरा बढ़ता है। इसलिए रेगुलर चेकअप जरूरी है।

थायरॉइड

  • TSH, T3 और T4 टेस्ट थायरॉइड हाॅर्मोन का लेवल बताते हैं।
  • असंतुलन से वजन बढ़ना/घटना, थकान, मूड स्विंग जासी समस्याएं हो सकती है। हार्ट रेट भी प्रभावित हो सकती है।
  • 30+ उम्र वालों को और खासकर महिलाओं को यह जांच जरूर मानी करवानी चाहिए, ताकि हॉर्मोनल संतुलन बना रहे।

ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ

  • ब्लड प्रेशर, ECG और जरूरत होने पर इको टेस्ट से हार्ट हेल्थ का आकलन करते हैं।
  • हाई BP ’साइलेंट किलर’ माना जाता है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है।
  • रेगुलर मॉनिटरिंग से समय रहते कंट्रोल संभव है।

सवाल- कितने अंतराल पर हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?

जवाब- यह उम्र और रिस्क फैक्टर से तय होता है-

20-30 वर्ष: हर 2-3 साल में बेसिक जांच।

30-40 वर्ष: हर 1-2 साल में स्क्रीनिंग।

40+ वर्ष: हर साल फुल बॉडी चेकअप

डायबिटीज/बीपी/थायरॉइड पेशेंट: 6-12 महीने में

फैमिली हिस्ट्री या हाई रिस्क: डॉक्टर की सलाह के मुताबिक

लाइफस्टाइल (स्मोकिंग, मोटापा) के अनुसार अंतराल घट-बढ़ सकता है।

सवाल- अगर कोई लक्षण न हो, क्या तब भी हेल्थ स्क्रीनिंग करवानी चाहिए?

जवाब- हां, लक्षणों के बिना भी स्क्रीनिंग जरूरी है, क्योंकि कई बीमारियों में लक्षण नहीं दिखते हैं।

  • डायबिटीज, हाई BP, कोलेस्ट्रॉल के स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं।
  • स्क्रीनिंग से प्रीक्लिनिकल स्टेज में ही पहचान संभव है।
  • समय पर इलाज से कॉम्प्लिकेशन रोके जा सकते हैं।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग से शुरुआती स्टेज में ही किन बीमारियों का पता चल सकता है?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग के जरिए कई बीमारियों का शुरुआती स्टेज में पता लगाया जा सकता है-

सवाल- क्या मेंटल हेल्थ की जांच भी जरूरी है और यह कैसे की जाती है?

जवाब- हां, मेंटल हेल्थ भी उतनी ही जरूरी है जितनी फिजिकल हेल्थ है।

  • डिप्रेशन, एंग्जाइटी के शुरुआती फेज में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं।
  • स्क्रीनिंग में क्लिनिकल इंटरव्यू और क्वेश्चनायर (PHQ-9, GAD-7) शामिल होते हैं।
  • जरूरत पर साइकोलॉजिकल टेस्ट/काउंसलिंग की जाती है।
  • नींद, व्यवहार, मूड पैटर्न का आकलन किया जाता है।
  • इससे लाइफ क्वालिटी सुधारने में मदद मिलती है।

सवाल- आंखों की और सुनने की क्षमता की जांच कितने समय में करानी चाहिए?

जवाब- ये रिस्क फैक्टर के हिसाब से बदल सकता है।

20-40 वर्ष: हर 2 साल में आंखों की जांच कराएं।

40+ वर्ष: साल में एक बार (ग्लूकोमा रिस्क बढ़ता है।) कराएं।

डायबिटिक लोग: हर साल रेटिना जांच जरूरी है।

कान की जांच: 50+ उम्र में हर 1-2 साल में जांच करवाएं।

  • तेज आवाज वाले माहौल में काम करने वालों को रेगुलर जांच करवानी चाहिए।
  • शुरुआती स्टेज में पहचान से आंखें और सुनने की क्षमता बचाई जा सकती है।

सवाल- क्या डेंटल हेल्थ के लिए भी कोई एडवांस टेस्ट और स्क्रीनिंग होती है?

जवाब- हां, डेंटल स्क्रीनिंग में बेसिक और एडवांस दोनों जांच होती हैं।

ओरल एग्जाम: कैविटी, मसूड़ों की बीमारी की पहचान होती है।

डेंटल एक्स-रे: अंदरूनी सड़न और इन्फेक्शन का पता चलता है।

  • ओरल कैंसर स्क्रीनिंग (हाई रिस्क में) करवानी चाहिए।
  • स्केलिंग और गम हेल्थ एसेसमेंट करवाना होता है।
  • हर 6-12 महीने में जांच की सलाह दी जाती है।
  • समय पर जांच से दांत बचाए जा सकते हैं।

सवाल- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च कितना आता है और क्या ये जांचें इंश्योरेंस में कवर होती हैं?

जवाब- हेल्थ स्क्रीनिंग का खर्च इस बात से तय होता है कि किस लेवल की स्क्रीनिंग करवा रहे हैं।

बेसिक हेल्थ चेकअप: 1,000-3,000 रुपए।

फुल बॉडी पैकेज: 3,000- 10,000 रुपए।

एडवांस टेस्ट में यह खर्च बढ़ सकता है।

इंश्योरेंस

  • कई हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी में फ्री प्रिवेंटिव चेकअप शामिल होते हैं।
  • आमतौर पर साल में एक बार कवर मिलता है।
  • हर इंश्योरेंस में पॉलिसी की शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।

……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- तरबूज खाने से पूरे परिवार की मौत: गर्मियों में बढ़ता फूड पॉइजनिंग का रिस्क, जानें लक्षण, सावधानी, बचाव के तरीके 25 अप्रैल को मुंबई में एक परिवार के चार लोगों की डायरिया और उल्टी के कारण मौत हो गई। पूरे परिवार ने डिनर के बाद देर रात तरबूज खाया था। अटॉप्सी रिपोर्ट में फूड पॉइजनिंग की पुष्टि हुई है। आगे पढ़िए…

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