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इंटिमेसी बढ़ाने के लिए खाया ‘मैड हनी’, 25 साल के युवक को आया कार्डियक अरेस्ट, 40 मिनट चला CPR

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Mad Honey Becomes Fatal For 25 Year Old: नेचुरल चीजें भी किस कदर घातक हो सकती हैं, इसका ताजा उदाहरण पटना में देखने को मिला जहां एक 25 साल के युवक की खास तरह का शहद लेने से ऐसी हालत हो गई कि वो वेंटिलेटर तक पहुंच गया. उसने इंटिमेसी टाइम बढ़ाने के लिए नेपाल से मैड हनी खरीदा था. इसका सेवन करने से उसे दिल का दौरा पड़ गया.

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पटना. आम तौर पर शहद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन पटना के एक युवक के लिए यह खतरनाक साबित हो गया. हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे दिल का दौरा पड़ गया. करीब 40 मिनट तक लगातार सीपीआर देने के बाद डॉक्टरों को उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. हालांकि, समय रहते डॉक्टरों की समझदारी और इलाज से उसकी जान बचा ली गई. हैरानी की बात यह है कि युवक की उम्र सिर्फ 25 साल थी और उसका कोई भी मेडिकल इतिहास नहीं था. वह पूरी तरह से स्वस्थ था. दिल का दौरा पड़ने की वजह समझने के लिए डॉक्टरों को काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ी. कई किताबों और रिसर्च पेपर का अध्ययन करने के बाद जाकर असली कारण सामने आ सका.

मैड हनी का सेवन और 40 मिनट सीपीआर
पटना स्थित मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थीसियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने लोकल 18 को बताया कि युवक की तबीयत बिगड़ने से पहले वह अपनी पत्नी के साथ नेपाल घूमने गया था. वहीं से वह मैड हनी लेकर पटना लौटा. इसके असर को परखने के लिए उसने रात में इसकी डोज ली. इसके बाद उसकी दिल की धड़कन धीरे-धीरे कम होने लगी और स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते कार्डियक अरेस्ट तक पहुंच गई.

परिजन उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इमरजेंसी में हम लोगों ने करीब 40 मिनट तक सीपीआर दिया. हालत नाजुक होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. लगभग दस दिनों तक चले इलाज और लगातार निगरानी के बाद युवक की स्थिति में सुधार हुआ. अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

क्या है मैड हनी
मैड हनी के बारे में बताते हुए डॉ. किशोर झुनझुनवाला कहते हैं कि यह एक दुर्लभ किस्म का शहद है जो नेपाल और यूरोप के कुछ हिस्सों में आसानी से मिलता है. यह हिमालयी रोडोडेंड्रॉन (बुरांश) के फूलों से खास मधुमक्खियों के द्वारा निकाला जाता है. इसमें ग्रेयानोटॉक्सिन्स पाए जाते हैं, जो दिल और नसों पर असर डालते हैं. इसका रंग गहरा और लालिमा लिए होता है.

इसे कम मात्रा में कथित औषधीय और यौन स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. दावा किया जाता है कि इससे सेक्स टाइम बढ़ता है. इसके सेवन से हैलुसिनेशन जैसा महसूस होता है. मात्रा अधिक होने पर लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन धीमी होना, बेहोशी और कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है. कभी-कभी कुछ नेचुरल प्रोडक्ट का कम डोज भी सेहत पर गलत असर डाल सकता है. इस केस में यही हुआ.

भ्रामक प्रचार और दावों से बचें
जब मरीज आईसीयू में भर्ती हुआ, तब डॉक्टरों ने उसकी हालत के पीछे की वजह जानने की हर संभव कोशिश की, लेकिन परिजन शुरू में सब कुछ सामान्य ही बता रहे थे. बाद में जब रात के खाने और अन्य चीजों के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई, तब हनी के सेवन की बात सामने आई. चूंकि इसे नेचुरल प्रोडक्ट माना जा रहा था, इसलिए घरवालों ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन जब डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने कुछ लिटरेचर और अन्य स्रोतों से इस हनी के बारे में जानकारी जुटाई तो मालूम चला कि यह मैड हनी है और युवक की ऐसी हालत का असली कारण यही है.

उन्होंने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि नेचुरल के नाम पर किए जाने वाले भ्रामक दावों से सावधान रहना जरूरी है. हर प्राकृतिक चीज फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है. इसलिए किसी भी ऐसे प्रोडक्ट का सेवन सोच-समझकर और सावधानी के साथ ही करना चाहिए.

About the Author

Raina Shukla

बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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पटना. आम तौर पर शहद को सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है, लेकिन पटना के एक युवक के लिए यह खतरनाक साबित हो गया. हालत इतनी बिगड़ गई कि उसे दिल का दौरा पड़ गया. करीब 40 मिनट तक लगातार सीपीआर देने के बाद डॉक्टरों को उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. हालांकि, समय रहते डॉक्टरों की समझदारी और इलाज से उसकी जान बचा ली गई. हैरानी की बात यह है कि युवक की उम्र सिर्फ 25 साल थी और उसका कोई भी मेडिकल इतिहास नहीं था. वह पूरी तरह से स्वस्थ था. दिल का दौरा पड़ने की वजह समझने के लिए डॉक्टरों को काफी जांच-पड़ताल करनी पड़ी. कई किताबों और रिसर्च पेपर का अध्ययन करने के बाद जाकर असली कारण सामने आ सका.

मैड हनी का सेवन और 40 मिनट सीपीआर
पटना स्थित मेदांता इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिटिकल केयर एंड एनेस्थीसियोलॉजी के डायरेक्टर डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने लोकल 18 को बताया कि युवक की तबीयत बिगड़ने से पहले वह अपनी पत्नी के साथ नेपाल घूमने गया था. वहीं से वह मैड हनी लेकर पटना लौटा. इसके असर को परखने के लिए उसने रात में इसकी डोज ली. इसके बाद उसकी दिल की धड़कन धीरे-धीरे कम होने लगी और स्थिति बिगड़ते-बिगड़ते कार्डियक अरेस्ट तक पहुंच गई.

परिजन उसे तुरंत मेदांता अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां इमरजेंसी में हम लोगों ने करीब 40 मिनट तक सीपीआर दिया. हालत नाजुक होने के कारण उसे वेंटिलेटर पर रखना पड़ा. लगभग दस दिनों तक चले इलाज और लगातार निगरानी के बाद युवक की स्थिति में सुधार हुआ. अब वह पूरी तरह स्वस्थ है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है.

क्या है मैड हनी
मैड हनी के बारे में बताते हुए डॉ. किशोर झुनझुनवाला कहते हैं कि यह एक दुर्लभ किस्म का शहद है जो नेपाल और यूरोप के कुछ हिस्सों में आसानी से मिलता है. यह हिमालयी रोडोडेंड्रॉन (बुरांश) के फूलों से खास मधुमक्खियों के द्वारा निकाला जाता है. इसमें ग्रेयानोटॉक्सिन्स पाए जाते हैं, जो दिल और नसों पर असर डालते हैं. इसका रंग गहरा और लालिमा लिए होता है.

इसे कम मात्रा में कथित औषधीय और यौन स्वास्थ्य लाभ के लिए इस्तेमाल किया जाता है. दावा किया जाता है कि इससे सेक्स टाइम बढ़ता है. इसके सेवन से हैलुसिनेशन जैसा महसूस होता है. मात्रा अधिक होने पर लो ब्लड प्रेशर, दिल की धड़कन धीमी होना, बेहोशी और कार्डियक अरेस्ट तक हो सकता है. कभी-कभी कुछ नेचुरल प्रोडक्ट का कम डोज भी सेहत पर गलत असर डाल सकता है. इस केस में यही हुआ.

भ्रामक प्रचार और दावों से बचें
जब मरीज आईसीयू में भर्ती हुआ, तब डॉक्टरों ने उसकी हालत के पीछे की वजह जानने की हर संभव कोशिश की, लेकिन परिजन शुरू में सब कुछ सामान्य ही बता रहे थे. बाद में जब रात के खाने और अन्य चीजों के बारे में विस्तार से पूछताछ की गई, तब हनी के सेवन की बात सामने आई. चूंकि इसे नेचुरल प्रोडक्ट माना जा रहा था, इसलिए घरवालों ने शुरुआत में इसे गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन जब डॉ. किशोर झुनझुनवाला ने कुछ लिटरेचर और अन्य स्रोतों से इस हनी के बारे में जानकारी जुटाई तो मालूम चला कि यह मैड हनी है और युवक की ऐसी हालत का असली कारण यही है.

उन्होंने युवाओं को सचेत करते हुए कहा कि नेचुरल के नाम पर किए जाने वाले भ्रामक दावों से सावधान रहना जरूरी है. हर प्राकृतिक चीज फायदेमंद हो, यह जरूरी नहीं है. इसलिए किसी भी ऐसे प्रोडक्ट का सेवन सोच-समझकर और सावधानी के साथ ही करना चाहिए.

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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें

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