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नाखून और बाल काटने पर क्यों नहीं होता है दर्द? शायद ही जानते होंगे जवाब, यह है असली वजह

नाखून और बाल काटने पर क्यों नहीं होता है दर्द? शायद ही जानते होंगे जवाब, यह है असली वजह

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Why Cutting Nails and hair no pain: क्या कभी आपने सोचा है कि शरीर के एक कतरे में भी कहीं छोटी सी सूई चुभ जाती है या जल जाती है तो हम छटपटाने लगते हैं लेकिन शरीर के ही अंग नाखून और बाल को जब हम काटते हैं तो हमें रत्ती भर दर्द नहीं होता. बेशक इसके वैज्ञानिक कारण है लेकिन यह एक तरह से कुदरत का करिश्मा है. दरअसल हमारे शरीर के ये दो हिस्से मरे हुए होते हैं, लेकिन पूरी तरह से नहीं! आइए जानते हैं इसके पीछे का वह रहस्य जो आज भी बहुत से लोगों के लिए पहेली बना हुआ है.

विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले इंसानी शरीर कुदरत का अद्भुत करिश्मा है. जब हल्की सी सुई चुभने भर से हम दर्द से कराह उठते हैं, वहीं कैंची से बाल काटने या नेल कटर से नाखून काटने पर हमें रत्ती भर भी अहसास नहीं होता. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? लोग अक्सर इसे एक सामान्य बात मानकर टाल देते हैं, लेकिन इसके पीछे विज्ञान का एक बहुत बड़ा कारण है.

हमारी त्वचा और मांसपेशियों में करोड़ों नर्व सेल्स होते हैं. कहीं भी चोट लगती है तो ये नसें तुरंत दिमाग को सिग्नल भेजती हैं जिससे हमें दर्द महसूस होता है. इसलिए हमें दर्द साफ-साफ महसूस होता है. लेकिन बाल और नाखून के मामले में बात अलग होती है.

इनका बाहरी हिस्सा ‘केराटिन’ नाम के मजबूत प्रोटीन से बना होता है, जो मृत कोशिकाएं होती हैं. मतलब इन हिस्सों में नसें या खून की नलियां नहीं होतीं. इसलिए बाल या नाखून काटने पर नहीं दर्द होता है और न खून निकलता है. यह हमारे शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा है. अगर ऐसा न होता तो हर बार बाल या नाखून काटना बहुत मुश्किल हो जाता.

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लेकिन बाल पूरी तरह से मृत नहीं होते. हम जो हिस्सा देखते हैं वो ही मृत होता है. बाल की जड़ें (फॉलिकल्स) त्वचा के अंदर होती हैं और वो जीवित कोशिकाओं और नसों से जुड़ी रहती हैं. इसलिए बाल काटने पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर बाल को जोर से खींचा जाए तो तुरंत दर्द महसूस होता है.

लेकिन बाल पूरी तरह से मृत नहीं होते. हम जो हिस्सा देखते हैं वो ही मृत होता है. बाल की जड़ें (फॉलिकल्स) त्वचा के अंदर होती हैं और वो जीवित कोशिकाओं और नसों से जुड़ी रहती हैं. इसलिए बाल काटने पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर बाल को जोर से खींचा जाए तो तुरंत दर्द महसूस होता है.  

इसी तरह नाखून का बाहर दिखने वाला सफेद हिस्सा भी मृत होता है. लेकिन नाखून के नीचे जो हिस्सा त्वचा के पास होता है (नेल बेड), वो बहुत संवेदनशील होता है. वहां नसें और रक्तवाहिनियां होती हैं, इसलिए अगर वो हिस्सा चोटिल हो जाए या ज्यादा कट जाए तो दर्द होता है. कई बार अगर नाखून गहराई से काटते हैं तो दर्द क्यों होता, इसका कारण यही है. जब हम मृत हिस्से को पार करके जीवित हिस्से के पास काटते हैं, वहां की नसें प्रतिक्रिया देती हैं और दिमाग को दर्द का संकेत भेजती हैं. इसलिए नाखून सावधानी से काटना चाहिए.   

साधारण शब्दों में समझें तो हमारे बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होते हैं. चूंकि ये कोशिकाएं जीवित नहीं होतीं, इसलिए इनमें तंत्रिकाएं नहीं होतीं जो मस्तिष्क तक दर्द का संकेत भेज सकें. इसलिए जब हम बाल काटते हैं तो हमें दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होता. दूसरी ओर नाखून और बाल में केराटिन प्रोटीन होता है जो निर्जीव होता है. यह प्रोटीन काफी सख्त होता है और इसमें ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता.

साधारण शब्दों में समझें तो हमारे बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होते हैं. चूंकि ये कोशिकाएं जीवित नहीं होतीं, इसलिए इनमें तंत्रिकाएं नहीं होतीं जो मस्तिष्क तक दर्द का संकेत भेज सकें. इसलिए जब हम बाल काटते हैं तो हमें दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होता. दूसरी ओर नाखून और बाल में केराटिन प्रोटीन होता है जो निर्जीव होता है. यह प्रोटीन काफी सख्त होता है और इसमें ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता.

नाखून असल में हमारी उंगलियों के नाजुक सिरों की सुरक्षा के लिए होते हैं. ये मृत हिस्से हमारे शरीर के ऐसे एक्सटेंशन हैं जो बिना किसी दर्द के बढ़ते और कटते रहते हैं. (डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य अनुमान पर आधारित है. News18  ने इसकी पुष्टि नहीं की है. कृपया इन्हें अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.)

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विज्ञान चाहे कितनी भी तरक्की कर ले इंसानी शरीर कुदरत का अद्भुत करिश्मा है. जब हल्की सी सुई चुभने भर से हम दर्द से कराह उठते हैं, वहीं कैंची से बाल काटने या नेल कटर से नाखून काटने पर हमें रत्ती भर भी अहसास नहीं होता. क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों है? लोग अक्सर इसे एक सामान्य बात मानकर टाल देते हैं, लेकिन इसके पीछे विज्ञान का एक बहुत बड़ा कारण है.

हमारी त्वचा और मांसपेशियों में करोड़ों नर्व सेल्स होते हैं. कहीं भी चोट लगती है तो ये नसें तुरंत दिमाग को सिग्नल भेजती हैं जिससे हमें दर्द महसूस होता है. इसलिए हमें दर्द साफ-साफ महसूस होता है. लेकिन बाल और नाखून के मामले में बात अलग होती है.

इनका बाहरी हिस्सा ‘केराटिन’ नाम के मजबूत प्रोटीन से बना होता है, जो मृत कोशिकाएं होती हैं. मतलब इन हिस्सों में नसें या खून की नलियां नहीं होतीं. इसलिए बाल या नाखून काटने पर नहीं दर्द होता है और न खून निकलता है. यह हमारे शरीर की एक प्राकृतिक सुरक्षा है. अगर ऐसा न होता तो हर बार बाल या नाखून काटना बहुत मुश्किल हो जाता.

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लेकिन बाल पूरी तरह से मृत नहीं होते. हम जो हिस्सा देखते हैं वो ही मृत होता है. बाल की जड़ें (फॉलिकल्स) त्वचा के अंदर होती हैं और वो जीवित कोशिकाओं और नसों से जुड़ी रहती हैं. इसलिए बाल काटने पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर बाल को जोर से खींचा जाए तो तुरंत दर्द महसूस होता है.

लेकिन बाल पूरी तरह से मृत नहीं होते. हम जो हिस्सा देखते हैं वो ही मृत होता है. बाल की जड़ें (फॉलिकल्स) त्वचा के अंदर होती हैं और वो जीवित कोशिकाओं और नसों से जुड़ी रहती हैं. इसलिए बाल काटने पर दर्द नहीं होता, लेकिन अगर बाल को जोर से खींचा जाए तो तुरंत दर्द महसूस होता है.  

इसी तरह नाखून का बाहर दिखने वाला सफेद हिस्सा भी मृत होता है. लेकिन नाखून के नीचे जो हिस्सा त्वचा के पास होता है (नेल बेड), वो बहुत संवेदनशील होता है. वहां नसें और रक्तवाहिनियां होती हैं, इसलिए अगर वो हिस्सा चोटिल हो जाए या ज्यादा कट जाए तो दर्द होता है. कई बार अगर नाखून गहराई से काटते हैं तो दर्द क्यों होता, इसका कारण यही है. जब हम मृत हिस्से को पार करके जीवित हिस्से के पास काटते हैं, वहां की नसें प्रतिक्रिया देती हैं और दिमाग को दर्द का संकेत भेजती हैं. इसलिए नाखून सावधानी से काटना चाहिए.   

साधारण शब्दों में समझें तो हमारे बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होते हैं. चूंकि ये कोशिकाएं जीवित नहीं होतीं, इसलिए इनमें तंत्रिकाएं नहीं होतीं जो मस्तिष्क तक दर्द का संकेत भेज सकें. इसलिए जब हम बाल काटते हैं तो हमें दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होता. दूसरी ओर नाखून और बाल में केराटिन प्रोटीन होता है जो निर्जीव होता है. यह प्रोटीन काफी सख्त होता है और इसमें ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता.

साधारण शब्दों में समझें तो हमारे बाल और नाखून मृत कोशिकाओं से बने होते हैं. चूंकि ये कोशिकाएं जीवित नहीं होतीं, इसलिए इनमें तंत्रिकाएं नहीं होतीं जो मस्तिष्क तक दर्द का संकेत भेज सकें. इसलिए जब हम बाल काटते हैं तो हमें दर्द का अहसास बिल्कुल नहीं होता. दूसरी ओर नाखून और बाल में केराटिन प्रोटीन होता है जो निर्जीव होता है. यह प्रोटीन काफी सख्त होता है और इसमें ब्लड सर्कुलेशन नहीं होता.

नाखून असल में हमारी उंगलियों के नाजुक सिरों की सुरक्षा के लिए होते हैं. ये मृत हिस्से हमारे शरीर के ऐसे एक्सटेंशन हैं जो बिना किसी दर्द के बढ़ते और कटते रहते हैं. (डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी सामान्य अनुमान पर आधारित है. News18  ने इसकी पुष्टि नहीं की है. कृपया इन्हें अपनाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.)

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