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15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

15,000 Jobs Cut Globally; India Hit Hardest

नई दिल्ली17 मिनट पहले

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IT सेक्टर की बड़ी कंपनी कॉग्निजेंट अपने वर्कफोर्स में बड़ी कटौती करने जा रही है, जिससे दुनिया भर में 15,000 से ज्यादा कर्मचारियों पर असर पड़ सकता है। मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस छंटनी में भारत में सबसे ज्यादा कर्मचारियों की नौकरियां जाएंगी, जो ओरेकल और अमेजन के बाद इस साल की सबसे बड़ी टेक छंटनी मानी जा रही है।

कॉग्निजेंट के कुल 3.57 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में से 2.50 लाख कर्मचारी भारत में काम करते हैं। हालांकि, कंपनी ने छंटनी की सटीक संख्या का अभी ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, 12,000 से 15,000 के बीच नौकरियां जा सकती हैं। भारत कंपनी का सबसे बड़ा वर्कफोर्स हब है, इसलिए यहां असर भी सबसे ज्यादा होने की संभावना है।

सेवरेंस पर 320 मिलियन डॉलर खर्च करेगी कंपनी

कंपनी ने छंटनी का अनुमान ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत तय किए गए बजट के आधार पर लगाया है। 29 अप्रैल को तिमाही नतीजों की घोषणा के दौरान कॉग्निजेंट ने बताया कि वह सेवरेंस कॉस्ट (कर्मचारियों को हटाते समय दिया जाने वाला मुआवजा) पर 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर खर्च करने की उम्मीद कर रही है। इसमें कर्मचारियों को दिया जाने वाला कंपनसेशन और अन्य बेनेफिट्स शामिल हैं।

भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी ₹15 लाख

भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग 15 लाख रुपए है। यदि छंटनी में निकाले गए कर्मचारियों को 6 महीने की सैलरी के बराबर सेवरेंस पे दिया जाता है, तो हर एक कर्मचारी को लगभग 7.5 लाख रुपए मिलेंगे। इस हिसाब से कंपनी द्वारा तय बजट अकेले भारत में ही लगभग 12,000 से 13,000 कर्मचारियों की छंटनी को कवर कर सकता है।

क्लाइंट्स की बदलती पसंद और नया मॉडल

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्लाइंट अब पुराने ‘स्टाफिंग पिरामिड’ मॉडल से दूर जा रहे हैं, जो एंट्री-लेवल के कर्मचारियों पर निर्भर रहता था। अब क्लाइंट्स नए फ्रेशर्स के बड़े बैच को ट्रेनिंग देने का खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब अपने स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं।

सीईओ रवि कुमार एस का विजन

कॉग्निजेंट के CEO रवि कुमार एस ने दुनिया भर में किए जा रहे इन बदलावों की पुष्टि की है। उन्होंने अर्निंग्स कॉल के दौरान कहा कि कंपनी अब एक ‘व्यापक और छोटे पिरामिड’ की ओर बढ़ रही है।

इसमें डिजिटल लेबर और ह्यूमन लेबर यानी इंसानी श्रम और तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में कॉग्निजेंट के प्रमुख ऑफिस बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में हैं।

सेवरेंस पैकेज क्या होता है?

जब कोई कंपनी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना नौकरी से निकालती है, तो उसे आर्थिक सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि को सेवरेंस पे कहते हैं।

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कॉग्निजेंट के कुल 3.57 लाख से ज्यादा कर्मचारियों में से 2.50 लाख कर्मचारी भारत में काम करते हैं। हालांकि, कंपनी ने छंटनी की सटीक संख्या का अभी ऐलान नहीं किया है, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, 12,000 से 15,000 के बीच नौकरियां जा सकती हैं। भारत कंपनी का सबसे बड़ा वर्कफोर्स हब है, इसलिए यहां असर भी सबसे ज्यादा होने की संभावना है।

सेवरेंस पर 320 मिलियन डॉलर खर्च करेगी कंपनी

कंपनी ने छंटनी का अनुमान ‘प्रोजेक्ट लीप’ के तहत तय किए गए बजट के आधार पर लगाया है। 29 अप्रैल को तिमाही नतीजों की घोषणा के दौरान कॉग्निजेंट ने बताया कि वह सेवरेंस कॉस्ट (कर्मचारियों को हटाते समय दिया जाने वाला मुआवजा) पर 230 मिलियन डॉलर से 320 मिलियन डॉलर खर्च करने की उम्मीद कर रही है। इसमें कर्मचारियों को दिया जाने वाला कंपनसेशन और अन्य बेनेफिट्स शामिल हैं।

भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी ₹15 लाख

भारत में कर्मचारियों की औसत सालाना सैलरी लगभग 15 लाख रुपए है। यदि छंटनी में निकाले गए कर्मचारियों को 6 महीने की सैलरी के बराबर सेवरेंस पे दिया जाता है, तो हर एक कर्मचारी को लगभग 7.5 लाख रुपए मिलेंगे। इस हिसाब से कंपनी द्वारा तय बजट अकेले भारत में ही लगभग 12,000 से 13,000 कर्मचारियों की छंटनी को कवर कर सकता है।

क्लाइंट्स की बदलती पसंद और नया मॉडल

इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स का कहना है कि क्लाइंट अब पुराने ‘स्टाफिंग पिरामिड’ मॉडल से दूर जा रहे हैं, जो एंट्री-लेवल के कर्मचारियों पर निर्भर रहता था। अब क्लाइंट्स नए फ्रेशर्स के बड़े बैच को ट्रेनिंग देने का खर्च उठाने के लिए तैयार नहीं हैं। यही वजह है कि कंपनियां अब अपने स्ट्रक्चर में बदलाव कर रही हैं।

सीईओ रवि कुमार एस का विजन

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इसमें डिजिटल लेबर और ह्यूमन लेबर यानी इंसानी श्रम और तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया जाएगा। भारत में कॉग्निजेंट के प्रमुख ऑफिस बेंगलुरु, चेन्नई, हैदराबाद और पुणे जैसे शहरों में हैं।

सेवरेंस पैकेज क्या होता है?

जब कोई कंपनी कर्मचारी को उसकी मर्जी के बिना नौकरी से निकालती है, तो उसे आर्थिक सहायता के रूप में दी जाने वाली राशि को सेवरेंस पे कहते हैं।

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