न आम, न तरबूज…उत्तराखंड की गर्मियों का साथी ये नन्हा फल, पहाड़ों पर इसके गाए जाते गीत

Last Updated:May 18, 2026, 21:33 IST Kafal Benefits : उत्तराखंड के पहाड़ों में गर्मियों के मौसम में मिलने वाला काफल इन दिनों लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. गहरे लाल रंग का यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद और औषधीय गुणों की वजह से काफी प्रसिद्ध है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है. काफल केवल फल नहीं बल्कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति और परंपराओं का अहम हिस्सा भी है. प्रसिद्ध लोकगीत ‘काफल पाको मैनी चाखो’ ने इसे देशभर में पहचान दिलाई है. पहाड़ों में यह गीत आज भी लोगों की जुबान पर रहता है. काफल पकने का मतलब गर्मियों के आगमन. इसी के साथ जंगलों में रौनक बढ़ने लगती है. गांवों में बच्चे और महिलाएं जंगलों में काफल तोड़ने जाते हैं, जो एक तरह की पारंपरिक गतिविधि बन चुकी है. कई मेलों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भी काफल जान है. काफल को प्राकृतिक ऊर्जा देने वाला फल माना जाता है. गर्मियों में इसे खाने से शरीर को ताजगी और ठंडक मिलती है. इसमें मौजूद पोषक तत्व शरीर की कमजोरी दूर करने में मदद करते हैं. स्थानीय लोग लंबे समय से इसे पारंपरिक स्वास्थ्यवर्धक फल के रूप में उपयोग करते आए हैं. पहाड़ों में जंगलों से लौटते समय लोग काफल खाकर थकान मिटाते हैं. इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट शरीर को कई बीमारियों से बचाने में मदद करते हैं. बिना किसी मिलावट और केमिकल के मिलने वाला काफल आज के समय में लोगों के लिए हेल्दी विकल्प बन चुका है. गर्मियों के मौसम में काफल स्थानीय ग्रामीणों के लिए अच्छी आय का साधन बन जाता है. गांवों के लोग जंगलों से काफल इकट्ठा कर बाजारों में बेचते हैं, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी होती है. सड़क किनारे और स्थानीय बाजारों में काफल की अच्छी कीमत मिलती है. पर्यटक भी इसे खरीदने में काफी रुचि दिखाते हैं. कई परिवारों की मौसमी आय का बड़ा हिस्सा काफल बिक्री से आता है. खासकर महिलाओं और युवाओं को इससे रोजगार मिलता है. पहाड़ों में सीमित रोजगार के बीच यह जंगली फल लोगों के लिए आर्थिक सहारा बन रहा है. हर साल काफल सीजन का उन्हें बेसब्री से इंतजार रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google पिछले कुछ वर्षों में काफल की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. पहले यह केवल पहाड़ी क्षेत्रों तक सीमित था, लेकिन अब शहरों में भी इसकी मांग बढ़ने लगी है. लोग इसे उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान के रूप में पसंद कर रहे हैं. कई स्थानीय व्यापारी काफल को पैक करके दूसरे शहरों तक पहुंचा रहे हैं. सोशल मीडिया और पर्यटन के कारण भी इसकी पहचान मजबूत हुई है. गर्मियों में बाजारों में काफल की दुकानें लोगों को आकर्षित करती हैं. बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इसका स्वाद पसंद करते हैं. प्राकृतिक, स्वादिष्ट और स्वास्थ्यवर्धक होने के कारण काफल आज उत्तराखंड के सबसे चर्चित जंगली फलों में शामिल हो गया है. बागेश्वर के किशन मलड़ा लोकल 18 से बताते हैं कि काफल की सबसे खास बात यह है कि इसकी खेती नहीं की जाती है. यह मध्य हिमालय के जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगने वाला जंगली फल है. उत्तराखंड के बागेश्वर, अल्मोड़ा, नैनीताल और पिथौरागढ़ जिलों के जंगलों में यह बड़ी मात्रा में मिलता है. करीब 1500 से 2500 मीटर की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में काफल के पेड़ अधिक पाए जाते हैं. ग्रामीण लोग हर साल मौसम आने पर जंगलों से काफल इकट्ठा करते हैं. पहाड़ों के पर्यावरण और जैव विविधता में भी इसका महत्त्वपूर्ण योगदान है. बिना किसी रासायनिक खाद या दवा के उगने वाला यह फल पूरी तरह प्राकृतिक होता है. बागेश्वर के चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि काफल केवल स्वादिष्ट फल ही नहीं बल्कि औषधीय गुणों का भी खजाना है. इसमें विटामिन सी, आयरन, कैल्शियम और एंटी-ऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है. काफल पाचन तंत्र को मजबूत करने और पेट की समस्याओं से राहत देने में उपयोगी है. इसकी छाल का उपयोग दांत दर्द और गले की खराश में भी किया जाता है. गर्मियों में शरीर को ठंडक पहुंचाने वाला यह फल प्राकृतिक औषधि की तरह काम करता है. उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों के बीच काफल काफी लोकप्रिय होता जा रहा है. पहाड़ घूमने पहुंचे लोग स्थानीय बाजारों और सड़कों पर काफल खरीदते नजर आते हैं. इसका अनोखा स्वाद पर्यटकों को बेहद पसंद आता है. कई लोग इसे पहाड़ों की खास पहचान मानते हैं. काफल से बने नमक-मसाले वाले स्वाद को लोग बड़े चाव से खाते हैं. सोशल मीडिया पर भी काफल की तस्वीरें और वीडियो खूब वायरल होते हैं. गर्मियों में पहाड़ी पर्यटन के साथ काफल की बिक्री भी बढ़ जाती है. स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि बाहर से आने वाले लोग अक्सर काफल के बारे में पूछते हैं, इसका स्वाद चखने के बाद दोबारा जरूर खरीदते हैं. गर्मियों का मौसम शुरू होते ही उत्तराखंड के पहाड़ों में काफल की मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह जंगली फल अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पसंद आता है. लाल और गहरे बैंगनी रंग का काफल जंगलों में प्राकृतिक रूप से उगता है, मई-जून के महीनों में बाजारों में दिखाई देता है. स्थानीय लोग सुबह-सुबह जंगलों से काफल तोड़कर बाजारों तक पहुंचाते हैं. सड़क किनारे छोटे दुकानदार भी इसे बेचते नजर आते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तराखंड की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
India Continues Russia Oil Buys Despite US Sanctions; May Imports Hit 2.3M BPD

Hindi News Business India Continues Russia Oil Buys Despite US Sanctions; May Imports Hit 2.3M BPD नई दिल्ली8 मिनट पहले कॉपी लिंक सोमवार को पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने देश में पेट्रोल-डीजल और LPG की सप्लाई की जानकारी दी। अमेरिका की तरफ से मिलने वाली प्रतिबंधों की छूट खत्म होने के बाद भी भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखेगा। पेट्रोलियम मंत्रालय की जॉइंट सेक्रेटरी सुजाता शर्मा ने सोमवार को प्रेस ब्रीफिंग में साफ किया कि रूस से कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की खरीद आगे भी जारी रहेगी। अमेरिकी प्रतिबंधों की छूट खत्म होने से भारत के इम्पोर्ट प्लान पर कोई असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि भारत का यह फैसला किसी देश की रियायत पर नहीं, बल्कि शुद्ध रूप से व्यापारिक सूझबूझ और देश के आर्थिक हित पर आधारित है। कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम है उन्होंने कहा कि भारत का रुख इस मामले में हमेशा से साफ रहा है। भारत अमेरिकी छूट मिलने से पहले भी रूस से तेल खरीद रहा था, छूट के दौरान भी खरीदा और आगे भी इसे जारी रखेगा। सरकार ने देश की जरूरत के मुताबिक पहले ही कच्चे तेल की पर्याप्त सप्लाई का इंतजाम कर लिया है, इसलिए देश में क्रूड ऑयल की कोई कमी नहीं है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने मई महीने में रूस से रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन कच्चे तेल का आयात किया है। 16 मई को खत्म हो चुकी है अमेरिका की दी हुई मोहलत यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि भारत ने अमेरिका से रूसी तेल आयात पर छूट की समयसीमा बढ़ाने की मांग की है। दरअसल, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के कारण ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई काफी प्रभावित हुई है। वैश्विक बाजार में तेल की कीमतें काबू में रखने और सप्लाई बनाए रखने के लिए अमेरिका ने मार्च में एक छूट जारी की थी, जिसे बाद में बढ़ाकर 16 मई तक के लिए वैध किया गया था। हालांकि, रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से ही वाशिंगटन लगातार भारत पर इस बात का दबाव बनाता रहा है कि वह रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीदना कम करे। घरेलू बाजार में महंगाई रोकने के लिए सप्लाई जरूरी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों ने अमेरिकी प्रशासन को स्पष्ट कर दिया था कि ग्लोबल मार्केट में उतार-चढ़ाव के बीच देश की तेल सप्लाई को बनाए रखना सरकार की सबसे पहली प्राथमिकता है। अधिकारियों ने चेतावनी भी दी थी कि अगर तेल की सप्लाई में कोई रुकावट आती है, तो इसका सीधा असर भारतीय उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। इससे देश में डोमेस्टिक कुकिंग गैस (LPG) जैसी जरूरी चीजों की किल्लत और महंगाई बढ़ सकती है। हालांकि, इस पूरे मामले पर भारत के तेल मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी विभाग की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई थी। मई में रूस से तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा अमेरिकी छूट की डेडलाइन खत्म होने से पहले भारतीय रिफाइनरी कंपनियों ने रूस से कच्चे तेल की खरीद काफी तेज कर दी है। डेटा इंटेलिजेंस एजेंसी केपलर के आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में अब तक भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड 23 लाख बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गया है, जो अब तक का सबसे ऊंचा आंकड़ा है। विश्लेषकों का अनुमान है कि पूरे मई महीने का औसत आयात भी करीब 19 लाख बैरल प्रति दिन के आसपास रहने वाला है। भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए रूसी तेल खरीदता रहा है पिछले साल नवंबर में यूक्रेन के साथ जंग के चलते ट्रम्प प्रशासन ने रूसी तेल कंपनियों लुकोइल और रोजनेफ्ट पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। इसके बाद जनवरी में भारत का रूसी तेल आयात गिरकर 11 लाख बैरल प्रति दिन रह गया था, जो नवंबर 2022 के बाद सबसे कम था। हालांकि, फरवरी में यह हिस्सेदारी फिर से बढ़कर 30% तक पहुंच गई है। भारत लगातार अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए रियायती दरों पर रूसी तेल खरीदता रहा है। ——————— ये खबर भी पढ़ें… रूस से 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल खरीदेगा भारत: रिलायंस-IOC ने बुकिंग की, ईरान जंग के बीच सप्लाई बंद होने के बाद फैसला ईरान-इजराइल में जारी जंग के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज रूट बंद हो गया है। ऐसे में कच्चे तेल की सप्लाई बंद होने के बाद भारत करीब 3 करोड़ बैरल कच्चा तेल रूस से खरीदेगा। यह दावा ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट में बताया कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) और रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों ने रूस से तेल के एग्रीमेंट किए हैं। हाल ही में अमेरिका ने समुद्र में फंसे रूसी तेल के शिपमेंट्स खरीदने के लिए भारत को 30 दिन (3 अप्रैल तक) की छूट देने का दावा किया था। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
स्किन फास्टिंग: बिना सरकारी प्रोडक्ट्स के नेचुरल ग्लो, गर्मियों में तेजी से ट्रेंड कर रही है स्किन फास्टिंग

18 मई 2026 को 21:05 IST पर अद्यतन किया गया स्किन फास्टिंग: बिना सरकारी प्रोडक्ट्स के ही गर्मियों में स्किन पे सेकीन चमकती है। इस सीजन में बहुत तेजी से ट्रेंड हो रहा है ये स्किन फास्टिंग का तरीका। (टैग्सटूट्रांसलेट)स्किन फास्टिंग(टी)ग्रीष्मकालीन स्किनकेयर(टी)प्राकृतिक चमक टिप्स(टी)स्किनकेयर रूटीन(टी)न्यूनतम स्किनकेयर(टी)स्किन बैरियर रिपेयर(टी)स्वस्थ त्वचा टिप्स(टी)सौंदर्य रुझान 2026(टी)प्राकृतिक रूप से चमकती त्वचा(टी)चेहरे की देखभाल के टिप्स
ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया | भारत समाचार

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 20:40 IST पलानीस्वामी ने कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि अन्नाद्रमुक द्रमुक के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है। एक विद्रोही खेमे के टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार से हाथ मिलाने के बाद एआईएडीएमके सुप्रीमो एडप्पादी के पलानीस्वामी को बड़ा झटका लगा। (पीटीआई/फ़ाइल) अन्नाद्रमुक के संकटग्रस्त प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी ने सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय पर विधायकों को “खरीद-फरोख्त” करके लुभाने का आरोप लगाया और सरकार बनाने के लिए द्रमुक के साथ उनकी पार्टी के गठबंधन की अफवाहों को खारिज कर दिया। उनकी टिप्पणी एसपी वेलुमणि और सी वे षणमुगम के नेतृत्व वाले एक विद्रोही अन्नाद्रमुक गुट द्वारा ईपीएस पर कट्टर प्रतिद्वंद्वी द्रमुक के साथ सरकार बनाने का प्रयास करने का आरोप लगाने के बाद विजय को बाहरी समर्थन देने के बाद आई है। हालांकि, पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा कि फर्जी खबरें प्रसारित की गईं जिसमें आरोप लगाया गया कि एआईएडीएमके डीएमके के समर्थन से सरकार बनाने की योजना पर काम कर रही है, उन्होंने कहा कि पार्टी की स्थापना 1972 में डीएमके के विरोध के सिद्धांत पर की गई थी। ईपीएस ने ‘बैकस्टैबर’ विजय की आलोचना की अन्नाद्रमुक सुप्रीमो ने विजय की तमिलागा वेट्री कड़गम (टीवीके) पर “खरीद-फरोख्त” और मंत्री पद की पेशकश के जरिए अन्नाद्रमुक पदाधिकारियों को लुभाने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “जो पार्टी शुद्ध ताकत होने का दावा करती है, वह द्रमुक सहयोगियों के चरणों में गिर गई है। उसी पार्टी ने विधायकों की खरीद-फरोख्त कर अन्नाद्रमुक की पीठ में छुरा घोंपा है।” पलानीस्वामी ने आगे कहा कि टीवीके थोड़े समय के लिए ही टिकेगी और उन्हें विश्वास है कि तमिलनाडु में जल्द ही एआईएडीएमके की सरकार बनेगी। उन्होंने कहा, ”एमजीआर और जयललिता के दिनों से, हमने विश्वासघात करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की है और अगर वे पश्चाताप करते हैं तो उन्हें वापस ले लेते हैं।” इस बीच, बागी एआईएडीएमके नेता सी वे शनमुगम ने ईपीएस पर चुनाव से पहले टीवीके के साथ गठबंधन करने के लिए वरिष्ठ नेताओं की बार-बार सलाह को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उनकी टिप्पणी पलानीस्वामी द्वारा 13 मई को विधानसभा विश्वास प्रस्ताव के दौरान नेतृत्व की अवहेलना करने के लिए विधायक एसपी वेलुमणि और सी विजयभास्कर सहित कई बागी नेताओं को पार्टी पदों से निष्कासित करने के बाद आई है। अन्नाद्रमुक ने यह भी कहा कि उन्होंने उन 25 विधायकों को अयोग्य ठहराने के लिए आवेदन किया है जिन्होंने पार्टी के व्हिप की अवज्ञा की और टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन देने के लिए मतदान किया, जो ईपीएस नेतृत्व के तहत पार्टी में सबसे गंभीर संकट को दर्शाता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया ईपीएस ने ‘पीठ में छुरा घोंपने वाले’ विजय पर ‘हॉर्स-ट्रेडिंग’ का आरोप लगाया, एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन की रिपोर्टों को खारिज किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)तमिलनाडु की राजनीति(टी)तमिलनाडु सरकार(टी)ईपीएस विजय(टी)ईपीएस बनाम विजय(टी)एआईएडीएमके-डीएमके गठबंधन(टी)एआईएडीएमके बागी विधायक(टी)विजय सरकार
खांसी में कौन से फल खाएं ताकि दवा से भी तेजी से मिले आराम? जानिए ये 4 असरदार फ्रूट्स का राज

Last Updated:May 18, 2026, 20:39 IST खांसी और गले की खराश होने पर सही खानपान शरीर को जल्दी रिकवर करने में मदद कर सकता है. अनानास, अनार का जूस, केला और कीवी जैसे फल विटामिन, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं, जो इम्यूनिटी मजबूत करने में सहायक माने जाते हैं. खांसी में खाने वाले फल. मौसम बदलते ही खांसी, गले में खराश और बलगम जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं. कई लोग दवाइयों के साथ खानपान पर भी ध्यान देते हैं, क्योंकि कुछ चीजें गले को राहत पहुंचाने में मदद कर सकती हैं. खासतौर पर फल शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट देते हैं, जिससे इम्यूनिटी मजबूत होती है और शरीर जल्दी रिकवर करने में मदद पाता है. हालांकि खांसी में हर फल फायदेमंद नहीं होता, इसलिए ऐसे फलों का चुनाव जरूरी है जो गले को आराम दें और शरीर को हाइड्रेट रखें. सही फल खाने से कमजोरी कम होती है और गले की जलन में भी राहत मिल सकती है. आइए जानते हैं कौनसे फल आपको राहत दे सकते हैं. अनानासअनानास में ब्रोमेलिन नाम का एंजाइम पाया जाता है, जो गले में जमा बलगम को पतला करने और सूजन कम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई लोग खांसी और गले की खराश में अनानास को फायदेमंद मानते हैं. इसमें विटामिन C भी होता है, जो इम्यूनिटी को सपोर्ट करता है. लेकिन बहुत ज्यादा खट्टा अनानास कुछ लोगों के गले में जलन भी कर सकता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना चाहिए. अनार का जूसअनार का जूस एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स से भरपूर होता है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने और कमजोरी कम करने में मदद कर सकता है. खांसी के दौरान जब शरीर थका हुआ महसूस करता है, तब अनार का जूस एनर्जी देने का काम कर सकता है. इसे बहुत ठंडा पीने से बचना चाहिए, क्योंकि ठंडी चीजें कुछ लोगों की खांसी बढ़ा सकती हैं. केलाकेला पोषक तत्वों से भरपूर और आसानी से पचने वाला फल माना जाता है. इसमें फास्ट-एक्टिंग कार्बोहाइड्रेट और सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर को जल्दी एनर्जी देने में मदद करता है. खांसी, सर्दी या कमजोरी के दौरान केला रिकवरी में मददगार माना जाता है. यही वजह है कि BRAT डाइट में भी केले को शामिल किया जाता है. हालांकि अगर केला खाने से बलगम बढ़ता महसूस हो, तो इसकी मात्रा कम रखनी चाहिए. कीवी भी काफी फायदेमंद कीवी भले ही खांसी में थोड़ा अलग विकल्प लगे, लेकिन इसे इम्यूनिटी बढ़ाने वाले फलों में गिना जाता है. इसमें विटामिन C और कई माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को इंफेक्शन से लड़ने में मदद कर सकते हैं. कुछ स्टडीज के मुताबिक, सर्दी-जुकाम के दौरान कीवी खाने से गले की परेशानी और रिकवरी में फायदा मिल सकता है. इसे भी सामान्य तापमान पर खाना बेहतर माना जाता है. About the Author Vividha SinghSub Editor विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Delhi,Delhi,Delhi
लौकी पनीर चिल्ला रेसिपी: मिनटों में असली से भरपूर लौकी-पनीर चीला, नोट करें कम तेल वाली ये रेसिपी रेसिपी

18 मई 2026 को 20:25 IST पर अपडेट किया गया लौकी पनीर चीला रेसिपी: आज कल लोग अपनी सामग्री को बनाने के लिए बार-बार सामग्री और टेस्टी डिश की तलाश में रहते हैं। ऐसे में लौकी और पनीर से तैयार होने वाला चीला एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। यह रेसिपी सिर्फ जल्दी बन जाती है, बल्कि इतनी स्वादिष्ट होती है, खास बात यह है कि यह नॉन फ्राइड डिश लंबे समय तक पेट भरने में भी मदद करती है। अनुसरण करना : चीला बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 200 ग्राम पनीरएक प्रारंभिक आकार की लौकीएक चौथाई कप बेसनहरी मिर्चहरा धनियाइसके अलावा जीरा पाउडरआधी काली मिर्च पाउडरसेंधा नमकपानीदेसी घी छवि: फ्रीपिक सबसे पहले लोकी को छीलकर अच्छी तरह धो लें और फिर कद्दू कर लें। इसके साथ पनीर को भी बढ़िया कर लीजिये. अब एक बड़े बाउल में लॉकी और क्रीमी बिल्डिंग बेसन को अच्छी तरह से मिक्स करें। छवि: एक्स अब इस कंपनी में इलेक्ट्रोनिक कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, बाकी जीरा पाउडर, काली मिर्च और नमक डाला जाता है। फिर छोटा सा पानी एलेसेम्बल बैटर तैयार करें ताकि आसानी से बनाया जा सके। छवि: एक्स तवा गर्म करें और उस पर थोड़ी घी डालें। रेडी बैटर को करचूल की मदद से फैलाया गया और कैमरे में कैद कर लिया गया। जब चीला एक तरफ से पक जाए तो उसे पलटकर दूसरी तरफ से भी सेंक लें। इससे चीला अंदर तक अच्छी तरह से पैक होगा। छवि: फ्रीपिक गर्मागर्म लोकी-पनीर चीले को हरी चटनी के साथ सर्व करें। यह रेसिपी स्वाद के साथ स्वास्थ्य का भी पूरा ध्यान रखती है। ये एक प्रत्यक्ष दृश्य है, जिससे आपका पेट भरा हुआ महसूस होगा। छवि: एक्स द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 18 मई 2026 को 20:25 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)फलाहारी चीला(टी)पनीर लौकी चीला(टी)स्वस्थ व्रत रेसिपी(टी)नवरात्रि नाश्ता(टी)लौकी पनीर रेसिपी(टी)कुट्टू आटा रेसिपी(टी)भारतीय व्रत भोजन(टी)स्वस्थ चीला रेसिपी(टी)नवरात्रि स्पेशल डिश(टी)नॉन फ्राइड रेसिपी
NALCO Recruitment 268 Posts | Sarkari Naukri Latest Updates

5 मिनट पहले कॉपी लिंक आज की सरकारी नौकरी में जानकारी रेलवे में 6565 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी होने की। इस भर्ती के लिए 30 जून से आवेदन की शुरुआत होगी। NALCO में 268 पदों पर निकली भर्ती। साथ में दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति में 150 ओपनिंग्स की। इन जॉब्स के बारे में पूरी जानकारी के साथ आवेदन की प्रक्रिया यहां देखिए… 1. रेलवे में 6565 भर्ती का नोटिफिकेशन जारी, 30 जून से आवेदन शुरू रेलवे भर्ती बोर्ड ने टेक्नीशियन ग्रेड-I और ग्रेड-III के 6565 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया है। आवेदन 30 जून 2026 से शुरू होंगे। उम्मीदवार वेबसाइट www.rrbapply.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकेंगे। बोर्ड के अनुसार फॉर्म भरते समय अपनी पर्सनल डिटेल्स को कक्षा 10वीं के सर्टिफिकेट से मैच करें। फॉर्म जमा करने से पहले आधार कार्ड को लिंक कराना जरूरी है। जोन वाइस वैकेंसी डिटेल्स : जोन का नाम पदों की संख्या मध्य रेलवे 870 पूर्व तटीय रेलवे 169 पूर्व मध्य रेलवे 186 पूर्व रेलवे 291 इंटीग्रल कोच फैक्ट्री 236 उत्तर मध्य रेलवे 268 पूर्वोत्तर रेलवे 169 पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे 701 उत्तर रेलवे 548 उत्तर पश्चिम रेलवे 199 रेल पहिया कारखाना 05 दक्षिण मध्य रेलवे 368 दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 90 दक्षिण पूर्व रेलवे 576 दक्षिण रेलवे 785 दक्षिण पश्चिम रेलवे 240 पश्चिम मध्य रेलवे 231 पश्चिम रेलवे 544 कुल 6565 अप्रूव्ड वैकेंसी : पद का नाम वैकेंसी का नाम टेक्नीशियन ग्रेड 3 6242 टेक्नीशियन ग्रेड 1 323 कुल पदों की संख्या 6565 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : टेक्नीशियन ग्रेड 1 – सिग्नल : बीएससी, संबंधित क्षेत्र में डिप्लोमा टेक्नीशियन ग्रेड 2 : 10वीं पास, संबंधित क्षेत्र में आईटीआई की डिग्री एज लिमिट : पद का नाम एज लिमिट टेक्नीशियन ग्रेड-I सिग्नल 18 – 33 साल टेक्नीशियन ग्रेड-III 18 – 30 साल आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार आयु में छूट दी जाएगी। फीस : जनरल, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस : 500 रुपएएससी, एसटी, पीडब्ल्यूडी : 250 रुपए सिलेक्शन प्रोसेस : कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन मेडिकल एग्जाम सैलरी : पद का नाम सैलरी टेक्नीशियन ग्रेड 3 29,200 रुपए प्रतिमाह टेक्नीशियन ग्रेड 1 19,900 रुपए प्रतिमाह RRB टेक्नीशियन ग्रेड – 1 सिग्नल सीबीटी एग्जाम पैटर्न : निगेटिव मार्किंग : एक तिहाई ड्यूरेशन : 90 मिनट सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या टोटल मार्क्स जनरल अवेयरनेस 10 10 जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग 15 15 बेसिक ऑफ कंप्यूटर्स एंड एप्लिकेशन्स 20 15 मैथमेटिक्स 20 20 बेसिक साइंस एंड इंजीनियरिंग 35 35 टोटल 100 100 RRB टेक्नीशियन ग्रेड – 3 सिग्नल सीबीटी एग्जाम पैटर्न : सब्जेक्ट प्रश्नों की संख्या टोटल मार्क्स मैथमेटिक्स 25 25 जनरल इंटेलिजेंस एंड रीजनिंग 25 25 जनरल साइंस 40 40 जनरल अवेयरनेस 10 10 टोटल 100 100 ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट rrbapply.gov.in पर जाएं। होमपेज पर अप्लाई ऑनलाइन के लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके मांगी गई डिटेल्स दर्ज करें। रजिस्ट्रेशन होने के बाद लॉग इन करें। फॉर्म का प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक 2. NALCO में 268 पदों पर निकली भर्ती, फीस 100 रुपए नेशनल एल्युमीनियम कंपनी लिमिटेड (NALCO) ने 268 पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट mudira.nalcoindia.co.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। वैकेंसी डिटेल्स : 1 पद का नाम पदों की संख्या 2 ऑपरेटर (HEMM) Gr. III 6 3 माइनिंग मेट Gr. III 21 4 जूनियर फोरमैन (माइन्स) 8 5 जूनियर फोरमैन (इलेक्ट्रिकल) 3 6 SUPT(JOT)-ऑपरेटर 55 7 ऑपरेटर Gr. III 54 8 SUPT(JOT)-फिटर 12 9 टेक्नीशियन (फिटर) Gr. III 13 10 SUPT(JOT)-इलेक्ट्रिकल 35 11 टेक्नीशियन (इलेक्ट्रिकल) Gr. III 35 12 SUPT(JOT) – लैबोरेटरी 6 13 SUPT(JOT)-इंस्ट्रूमेंटेशन / इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक 10 14 टेक्नीशियन (इंस्ट्रूमेंटेशन / इंस्ट्रूमेंट मैकेनिक) Gr. III 10 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : उम्मीदवारों को 10वीं के साथ पदानुसार संबंधित क्षेत्र (डिसिप्लिन) में आईटीआई/ डिप्लोमा/ बीएससी पास होना चाहिए। एज लिमिट : न्यूनतम : 27 साल अधिकतम : 35 साल सिलेक्शन प्रोसेस : कंप्यूटर बेस्ट एग्जाम ट्रेड टेस्ट मेडिकल फिटेनस टेस्ट फीस : जनरल, ओबीसी (एनसीएल), ईडब्ल्यूएस : 100 रुपए एससी, एसटी, पीडब्ल्यूबीडी, इंटरनल, एक्स सर्विसमैन, : नि:शुल्क स्टाइपेंड : पद के अनुसार, 12,000 – 15,500 रुपए प्रतिमाह प्लेसेमेंट के बाद सैलरी : 29,500 – 3% – 70,000 रुपए प्रतिमाह अन्य अलाउंस का लाभ भी मिलेगा। एग्जाम पैटर्न : एग्जाम टाइप ड्यूरेशन टोटल क्वेश्चन कंप्यूटर बेस्ड एग्जाम 120 मिनट 100 इन स्टेट में होगा एग्जाम : आंध्र प्रदेश असम महाराष्ट्र दिल्ली ओडिशा तमिलनाडु पश्चिम बंगाल जरूरी डॉक्यूमेंट्स : आईटीआई / डिप्लोमा सर्टिफिकेट मार्कशीट आधार कार्ड पासपोर्ट साइज फोटो सिग्नेचर जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो) अनुभव प्रमाण पत्र ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट nalcoindia.com पर जाएं। वेबसाइट पर मेनू में जाकर करियर लिंक पर क्लिक करें। अगले पेज पर Apply लिंक पर क्लिक करें। न्यू रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन कर लें। लॉग इन के माध्यम से अन्य जानकारी दर्ज करें। फीस जमा करें। भरे हुए फॉर्म का प्रिंटआउट निकालकर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक 3. दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति में 150 भर्ती, बिना एग्जाम, इंटरव्यू के सिलेक्शन दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), पर्यावरण विभाग, दिल्ली सरकार ने संविदा आधार पर 150 टेक्निकल और साइंटिफिक अप्रेंटिस के पदों पर भर्ती निकाली है। उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट dpcc.delhi.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर की जाएगी। अप्रेंटिस को शुरुआत में 6 महीने के लिए रखा जाएगा। अगर उनका काम अच्छा रहता है और जरूरत होगी तो अप्रेंटिस की अवधि अधिकतम 3 साल तक की जा सकती है। यह अवधि 6-6 महीने में बढ़ाई जाएगी। कैटेगरी वाइस वैकेंसी डिटेल्स : कैटेगरी का नाम पदों की संख्या एससी 22 एसटी 11 ओबीसी (एनसीएल) – दिल्ली 40 ईडब्ल्यूएस 15 अनारक्षित 62 कुल 150 एजुकेशनल क्वालिफिकेशन : टेक्निकल अप्रेंटिस : बीई, बी.टेक की डिग्री। साइंटिफिक अप्रेंटिस : साइंस में एमएससी की डिग्री। सिलेक्शन प्रोसेस : मेरिट बेसिस पर एज लिमिट : सरकारी नियमों के अनुसार स्टाइपेंड : पहले साल : 25,000 रुपए दूसरे साल 26, 500 रुपए तीसरे साल : 28, 500 रुपए ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट dpcc.delhi.gov.in पर जाएं। होमपेज पर “Recruitment/Vacancy” सेक्शन पर क्लिक करें। अब DPCC Trainee Recruitment 2026 के आवेदन लिंक को खोलें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। फीस भरकर फॉर्म सब्मिट करें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें। ऑनलाइन आवेदन लिंक ऑफिशियल नोटिफिकेशन लिंक
‘परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाओ’: कांग्रेस विधायक ने कर्नाटक में नेतृत्व की नई चर्चा छेड़ी | बेंगलुरु-न्यूज़ न्यूज़

आखरी अपडेट:18 मई, 2026, 19:35 IST राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर (फाइल फोटो) कर्नाटक में संभावित नेतृत्व परिवर्तन पर ताजा राजनीतिक चर्चा सोमवार को तब तेज हो गई जब वरिष्ठ कांग्रेस विधायक केएन राजन्ना ने कहा कि अगर सिद्धारमैया को हटाया जाता है तो गृह मंत्री जी परमेश्वर को मुख्यमंत्री पद के लिए विचार किया जाना चाहिए। पूर्व मंत्री राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने अवसर के लिए लंबे समय से इंतजार किया था और अगर कांग्रेस नेतृत्व ने बदलाव करने का फैसला किया तो वह राज्य का नेतृत्व करने का मौका पाने के हकदार थे। पत्रकारों से बात करते हुए, राजन्ना ने कहा कि परमेश्वर ने आठ साल तक कर्नाटक कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में कार्य किया था और अगर वह अपनी सीट जीतते तो 2013 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन सकते थे। शीर्ष पद के लिए गृह मंत्री का समर्थन करते हुए राजन्ना ने कहा, “वह तब चुनाव हार गए थे और उनका बकाया अभी भी लंबित है।” ‘राहुल गांधी और हाईकमान करेंगे फैसला’ राजन्ना ने इस बात पर जोर दिया कि वह केवल अपनी निजी राय व्यक्त कर रहे हैं और कहा कि अंतिम निर्णय कांग्रेस आलाकमान और राहुल गांधी पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि अगर उनकी राय मांगी गई तो वह चाहेंगे कि सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने रहें। हालांकि, अगर पार्टी नेतृत्व परिवर्तन का फैसला करती है तो वह परमेश्वर का समर्थन करेंगे। कर्नाटक नेतृत्व वार्ता संभवत: केरल में हुई होगी राजन्ना ने यह भी दावा किया कि कर्नाटक के नेतृत्व के बारे में चर्चा सोमवार को तिरुवनंतपुरम में हुई होगी, जहां कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता नई केरल सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के लिए एकत्र हुए थे। इस कार्यक्रम में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पार्टी नेता राहुल गांधी, मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार मौजूद थे। राजन्ना ने कहा कि यह उनका “भविष्यवाणी” था कि बैठक के दौरान कर्नाटक की राजनीति पर चर्चा हुई होगी। ‘दलित मुख्यमंत्री’ की मांग तेज़ यह टिप्पणी कर्नाटक में किसी दलित नेता को मुख्यमंत्री बनाने की कांग्रेस के एक वर्ग के भीतर बढ़ती मांग के बीच आई है। यदि ऐसा कोई निर्णय लिया जाता है तो परमेश्वर को अग्रणी नामों में से एक के रूप में देखा जा रहा है। संभावित नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चर्चा के दौरान उनका नाम कई बार सामने आया है, खासकर पार्टी में अहिंदा नेताओं के बीच। AHINDA अल्पसंख्यकों, पिछड़े वर्गों और दलितों का एक राजनीतिक और सामाजिक समूह है, जो सिद्धारमैया की राजनीति से निकटता से जुड़ा हुआ है। सत्ता साझेदारी पर बहस जारी है नवंबर 2025 में कांग्रेस सरकार द्वारा अपने पांच साल के कार्यकाल का आधा पड़ाव पार करने के बाद से नेतृत्व में फेरबदल की अटकलें जारी हैं। शिवकुमार के समर्थकों ने बार-बार मांग की है कि 2023 के विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस की सरकार बनने पर कथित सत्ता साझेदारी व्यवस्था का हवाला देते हुए उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाना चाहिए। चल रही राजनीतिक चर्चा से राज्य में कैबिनेट फेरबदल की अफवाहें भी तेज हो गई हैं। इस बीच, कर्नाटक के वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण मंत्री ईश्वर खंड्रे ने पहले कहा था कि कैबिनेट बदलाव के संबंध में कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री और कांग्रेस आलाकमान द्वारा लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान शासन और विकास कार्यों पर केंद्रित है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक राजनीति(टी)कर्नाटक राजनीति समाचार(टी)राजनीतिक हलचल(टी)कर्नाटक सीएम
Indias First Bullet Train Launch Hope 2026

अहमदाबाद5 मिनट पहले कॉपी लिंक बुलेट ट्रेन को नारंग, काला, मैटेलिक व्हाइट और ग्रे कलर में रंगा गया है। भारत की पहली बुलेट ट्रेन की पहली झलक सोमवार को सामने आई है। दिल्ली में रेल मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) की फोटो लगाई गई है। रेल मंत्रालय ने भरोसा जताया है कि इसी साल गुजरात के सूरत और बिलिमोरा के बीच (करीब 50 किमी) देश की पहली बुलेट ट्रेन चलाई जा सकती है। ANI के मुताबिक, 508 किमी लंबा मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल प्रोजेक्ट जापान सरकार की टेक्निकल और फाइनेंसिअल मदद से बन रहा है। यह प्रोजेक्ट गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा और नगर हवेली से होकर गुजरेगा। इसमें मुंबई, ठाणे, विरार, बोइसर, वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आनंद, अहमदाबाद और साबरमती समेत 12 स्टेशन बनाए जा रहे हैं। दिल्ली में रेल मंत्रालय के गेट नंबर 4 पर मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (MAHSR) की फोटो लगाई। बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के 12 में से 8 स्टेशनों का काम पूरा रेलवे मंत्रालय ने बताया कि प्रोजेक्ट में शामिल 12 में से 8 स्टेशनों का नींव का काम पूरा हो चुका है। इनमें वापी, बिलिमोरा, सूरत, भरूच, आनंद, वडोदरा, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। 17 नदी पुल पूरे हो चुके हैं, जबकि नर्मदा, माही, तापी और साबरमती जैसी 4 बड़ी नदियों पर पुल का काम तेजी से चल रहा है। महाराष्ट्र में भी 4 नदी पुलों पर काम जारी है। रेल डिपो के काम की बात करें तो ठाणे, सूरत और साबरमती में डिपो तेजी से बनाए जा रहे हैं। मुंबई के बांद्रा कुर्ला कॉम्प्लेक्स (BKC) में सिविल वर्क अच्छा चल रहा है। यहां खुदाई का 91% काम पूरा हो चुका है और बेसमेंट स्लैब का काम लेवल-4 तक 100% पूरा हो गया है। रेल रूट में अंडर-सी टनल भी इस प्रोजेक्ट का एक अहम हिस्सा अंडर-सी टनल भी है। करीब 21 किमी लंबी इस टनल का काम शुरू हो चुका है। इसमें से महाराष्ट्र के घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किमी टनल का काम पूरा हो गया है। इसमें 16 किमी सुरंग टनल बोरिंग मशीनों से और बाकी 5 किमी सुरंग न्यू ऑस्ट्रियन टनलिंग मेथड से बनाई जा रही है। इसमें ठाणे क्रीक के नीचे 7 किलोमीटर लंबी समुद्री सुरंग भी शामिल है। मंत्रालय के मुताबिक इस प्रोजेक्ट से देश में हाई स्पीड रेल के लिए नई तकनीक और अनुभव विकसित होगा। इसमें ट्रैक निर्माण, एडवांस सिग्नलिंग, ट्रेन निर्माण और मेंटेनेंस जैसी क्षमताएं शामिल हैं। इससे भविष्य में ऐसे और कॉरिडोर बनाने में मदद मिलेगी। महाराष्ट्र के घनसोली और शिलफाटा के बीच 4.8 किमी टनल का काम पूरा हो गया है। जापान में भी चल रही स्टाफ की ट्रेनिंग, 2030 तक तैयार होगा प्रोजेक्ट NHSRCL ने जापानी एजेंसियों के साथ मिलकर हाई स्पीड रेल कोर स्टाफ ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किया है। हाल में ट्रेनिंग के लिए 14 जूनियर मैनेजर जापान भेजे गए थे। इस प्रोजेक्ट की लागत शुरुआत में 1.08 लाख करोड़ रुपए आंकी गई थी। ये बढ़कर 1.6 लाख करोड़ से 2 लाख करोड़ रुपए के बीच जा सकती है। पूरा प्रोजेक्ट 2030 तक तैयार होने की उम्मीद है। NHSRCL के मैनेजिंग डायरेक्टर विवेक कुमार गुप्ता बताते हैं कि बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच का सफर दो से ढाई घंटे में पूरा होगा। बुलेट ट्रेन में भूकंप के लिए वॉर्निंग सिस्टम बुलेट ट्रेन में पहली बार अर्थक्वेक वॉर्निंग सिस्टम लगाया जा रहा है। यह सिस्टम जापानी तकनीक पर बेस्ड है। भूकंप आने पर यह सिस्टम तुरंत बिजली सप्लाई बंद कर देगा। बिजली बंद होते ही ट्रेन में इमरजेंसी ब्रेक लगेंगे और ट्रेन वहीं रुक जाएगी। इस सिस्टम के तहत कुल 28 सीस्मोमीटर लगाए जाएंगे। इनमें से 22 मशीनें ट्रेन के रूट पर लगेंगी। महाराष्ट्र में 8 और गुजरात में 14 मशीनें लगाई जाएंगी। बाकी 6 मशीनें उन जगहों पर लगेंगी, जहां भूकंप का खतरा ज्यादा रहता है। इनमें 4 महाराष्ट्र में और 2 गुजरात में लगेंगी। देश में बन रहे हाई स्पीड ट्रेन के पार्ट्स इसी के साथ रेलवे ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत हाई स्पीड ट्रेन सिस्टम और उसके पार्ट्स का देश में ही निर्माण बढ़ा रहा है। वंदे भारत ट्रेन की सफलता के बाद इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) और भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) मिलकर 280 किमी प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड वाली ट्रेन बना रहे हैं। प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण कानून के तहत किया गया है और प्रभावित लोगों को मुआवजा दिया गया है। राज्यों के साथ मिलकर पुनर्वास और अन्य सुविधाएं भी दी गई हैं। यह कॉरिडोर ज्यादा फ्रीक्वेंसी और बड़ी संख्या में यात्रियों को संभालने के लिए तैयार किया जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
गर्मियों में वरदान है ये देसी फल! आंखों की रोशनी से लेकर खून बढ़ाने तक में फायदेमंद, गांवों से शहरों तक लोग हैं दीवाने

Last Updated:May 18, 2026, 19:06 IST उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी के तराई क्षेत्रों में पाया जाने वाला बड़हर का फल गर्मियों में खास तौर पर लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाला यह देसी फल न सिर्फ स्वाद में खास होता है, बल्कि आंखों की रोशनी बढ़ाने, पाचन सुधारने, शरीर को ठंडक देने और खून की कमी दूर करने में भी फायदेमंद माना जाता है. उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तराई इलाके में कई ऐसे पेड़-पौधे पाए जाते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इन्हीं में से एक है बड़हर का फल, जो खासतौर पर गर्मियों के मौसम में मिलता है और अपने स्वाद के साथ औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. बड़हर का फल केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य लाभ के कारण भी वर्षों से उपयोग किया जाता रहा है. गांवों में आज भी लोग गर्मी के मौसम का बेसब्री से इंतजार करते हैं, ताकि इस फल का सेवन कर सकें. माना जाता है कि यह शरीर को ताजगी देने के साथ कई स्वास्थ्य लाभ पहुंचाने में भी मदद करता है. बड़हर का फल मई से लेकर जुलाई महीने तक बाजारों में आसानी से मिल जाता है. वहीं ग्रामीण इलाकों में आज भी यह फल पेड़ों पर भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जिसके कारण लोग इसे बिना पैसे खर्च किए भी आसानी से प्राप्त कर लेते हैं. जैसे-जैसे यह फल पकता है, इसका रंग हरे से बदलकर हल्का पीला, गुलाबी और फिर भूरा होने लगता है. बाजार में बड़हर के फल की कीमत करीब 5 से 10 रुपये तक होती है, लेकिन इसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन बड़े शौक से करते हैं. अगर आप भी आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या से परेशान हैं, तो गर्मियों में मिलने वाला बड़हर का फल आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है. आज के डिजिटल दौर में लगातार मोबाइल और स्क्रीन का इस्तेमाल करने की वजह से युवाओं में आंखों की रोशनी कमजोर होने की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में यह फल आंखों के लिए बेहद लाभकारी माना जाता है. मंकी फ्रूट के नाम से पहचाने जाने वाले बड़हर के फल में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है, जो आंखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है. माना जाता है कि विटामिन-ए से भरपूर आहार रतौंधी जैसी समस्याओं को दूर रखने में भी सहायक हो सकता है. इस फल का सेवन लोग कई तरीकों से करते हैं और गर्मियों में इसे स्वास्थ्य के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google गर्मियों के मौसम में लोग अक्सर पाचन संबंधी समस्याओं से परेशान रहते हैं, लेकिन बड़हर का फल पाचन तंत्र के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यह फल पाचन शक्ति को मजबूत बनाने में मदद करता है और इसके सेवन से पेट से जुड़ी कई समस्याओं में राहत मिल सकती है. गर्मी के दिनों में शरीर जल्दी थक जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. ऐसे में बड़हर के फल में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने का काम करते हैं और दिनभर ताजगी बनाए रखने में मदद करते हैं. त्वचा की झुर्रियों और स्किन एजिंग जैसी समस्याओं से बचने के लिए भी बड़हर का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर यह फल त्वचा को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करता है और बढ़ती उम्र के असर को कम करने में सहायक माना जाता है. माना जाता है कि बड़हर त्वचा के घावों को भरने में भी मदद कर सकता है. इसके लिए लोग बड़हर के पेड़ की छाल को सुखाकर उसका पाउडर तैयार करते हैं और उसे प्रभावित जगह पर लगाते हैं. इससे घाव जल्दी भरने में मदद मिल सकती है. बड़हर के फल में आयरन समेत कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी को पूरा करने में मददगार माने जाते हैं. माना जाता है कि नियमित रूप से बड़हर का सेवन करने से खून की कमी यानी एनीमिया जैसी समस्या से बचाव में सहायता मिल सकती है. गर्मियों के मौसम में कई लोगों के शरीर में कमजोरी और खून की कमी की समस्या देखने को मिलती है. ऐसे में यह फल स्वास्थ्य के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि गर्मियों में बड़हर का फल आसानी से बाजारों और ग्रामीण इलाकों में उपलब्ध हो जाता है. गर्मियों के मौसम में लोग ऐसे खाद्य पदार्थों की तलाश करते हैं, जो शरीर को ठंडक और ताजगी प्रदान कर सकें. यही वजह है कि आज भी ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक बड़ी संख्या में लोग बड़हर के फल का सेवन करना पसंद करते हैं. माना जाता है कि यह फल शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाने और दिनभर ताजगी बनाए रखने में सहायक होता है. बड़हर में एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण भी पाए जाते हैं, जो लिवर को स्वस्थ रखने में मददगार माने जाते हैं. खास बात यह है कि इस फल का सेवन लोग कच्चा और पका, दोनों रूपों में कर सकते हैं. बड़हर का पेड़ सामान्य पेड़ों की तुलना में काफी बड़ा और घना माना जाता है. इसकी शाखाएं दूर तक फैली रहती हैं और इसकी छाया बेहद ठंडी मानी जाती है, यही वजह है कि गर्मियों में लोग इसके नीचे बैठना पसंद करते हैं. बड़हर का फल कई पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं. गर्मियों के मौसम में शरीर में पानी और पोषण की कमी होना आम बात है, ऐसे में यह फल शरीर को ताजगी और जरूरी पोषण देने के लिए फायदेमंद माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।









