Parents Set Rs 15,000 Monthly Limit

नई दिल्ली7 मिनट पहले कॉपी लिंक पेटीएम ने टीनेजर्स के लिए ‘पेटीएम पॉकेट मनी’ फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले सुरक्षित डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इस नए फीचर में पैरेंट्स को बच्चों के खर्च पर नजर रखने, मंथली लिमिट तय करने और रीयल-टाइम ट्रैकिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी। फिनटेक फर्म वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने 18 मई, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया है। पैरेंट्स के पास रहेगा खर्च का पूरा कंट्रोल कंपनी के बयान के मुताबिक, पैरेंट्स और परिवार के भरोसेमंद सदस्य अपने बच्चों को सुरक्षित और रेगुलेटेड पेमेंट एक्सेस दे सकते हैं। वे अपने पेटीएम एप के जरिए बच्चों के लिए एक तय खर्च सीमा निर्धारित कर सकेंगे। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों के हर ट्रांजैक्शन को लगातार ट्रैक कर पाएंगे और उनका कंट्रोल हमेशा बना रहेगा। रोजमर्रा के खर्चों को डिजिटल बनाने की कोशिश भारत में टीनेजर्स हर दिन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, मेट्रो किराया, कैब बुकिंग और स्कूल-कॉलेज की कैंटीन जैसे जरूरी कामों के लिए लगातार डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। वर्तमान में कई बच्चे इन खर्चों के लिए पूरी तरह पैरेंट्स या कैश पर निर्भर हैं। ‘पेटीएम पॉकेट मनी’ के जरिए बच्चों को एक सुरक्षित माध्यम मिलेगा, जिससे परिवारों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदार वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद मिलेगी। अब ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं होगी इस फीचर के एक्टिवेट होने के बाद टीनेजर्स अपने खुद के फोन में पेटीएम एप का इस्तेमाल करके ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स को सुरक्षित यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए अब उन्हें पेमेंट करते समय पैरेंट्स से ओटीपी मांगने, उनका फोन उधार लेने या पैरेंट्स को वॉट्सएप पर क्यूआर कोड भेजने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। 15 हजार का मंथली कैप तय किया गया पेटीएम पॉकेट मनी के तहत पैरेंट्स एनपीसीआई के ‘यूपीआई सर्कल’ के माध्यम से बच्चों को इनवाइट कर सकते हैं। इसके तहत पूरे यूपीआई नेटवर्क पर मंथली लिमिट अधिकतम 15,000 रुपए और एक बार में इंडिविजुअल पेमेंट की लिमिट 5,000 रुपए तक सेट की जा सकती है। यह सर्विस सेविंग्स और करंट दोनों तरह के अकाउंट्स पर अवेलेबल है, लेकिन इससे इंटरनेशनल पेमेंट्स और कैश विड्रॉल करने पर पाबंदी रहेगी। स्पेंड समरी से पूरा बजट ट्रैक होगा यह नया फीचर पेटीएम स्पेंड समरी के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट है, जो हर एक पेमेंट को ऑटोमैटिकली अलग-अलग कैटेगरीज में बांट देता है। इससे परिवार आसानी से अपने कुल खर्चों पर नजर रख सकते हैं, पॉकेट मनी के बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और बच्चों को पैसों के सही इस्तेमाल की सीख दे सकते हैं। एप में पेमेंट हिस्ट्री देखने का भी पूरा ऑप्शन मिलेगा। सुरक्षा के लिए इन-बिल्ट सेफ्टी मेजर्स पेटीएम ने इसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। फीचर एक्टिवेट होने के शुरुआती 30 मिनट में केवल 500 रुपए और पहले 24 घंटों में अधिकतम 5,000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। किसी भी समय जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स अपने पेटीएम यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके खर्च की लिमिट को बदल सकते हैं या बच्चों का एक्सेस तुरंत कैंसल कर सकते हैं। इसके अलावा डिवाइस लॉक होना भी अनिवार्य है। पेटीएम पॉकेट मनी इस तरह सेट करें सबसे पहले अपने फोन में अपडेटेड पेटीएम एप खोलें और ‘टू मोबाइल / कॉन्टैक्ट’ पर टैप करें। अब एक्टिवेशन प्रोसेस शुरू करने के लिए ‘पॉकेट मनी’ ऑप्शन पर जाएं और उस कॉन्टैक्ट को सिलेक्ट करें जिसके लिए इसे सेटअप करना है। इसके बाद उस कॉन्टैक्ट नंबर से लिंक्ड यूपीआई आईडी दर्ज करें या उनका यूपीआई क्यूआर कोड एंटर करें। अकाउंट सेटअप को आगे बढ़ाने के लिए मांगे गए जरूरी दस्तावेजों (डॉक्यूमेंट्स) को वेरिफाई करें। अब अपना प्राइमरी बैंक अकाउंट चुनें, अपना पेटीएम यूपीआई पिन डालें और प्रीसेट या कस्टम ऑप्शंस में से कोई एक मंथली लिमिट तय करें। सेटअप पूरा होने के बाद नामित यूजर (बच्चे) को एक्टिवेशन के लिए इनविटेशन एक्सेप्ट करना होगा। यदि एप में यह विकल्प नहीं दिख रहा है, तो एप स्टोर या प्ले स्टोर से एप अपडेट करें। क्या होता है यूपीआई सर्कल और इन-बिल्ट सेफ्टी? यूपीआई सर्कल: यह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुरू की गई एक खास तकनीक है। इसके तहत एक प्राइमरी बैंक अकाउंट होल्डर अपने परिवार के किसी ऐसे सदस्य को डिजिटल पेमेंट की अनुमति दे सकता है, जिसके पास अपना खुद का बैंक अकाउंट नहीं है। इसमें पूरा कंट्रोल मैन अकाउंट होल्डर के पास ही रहता है। इन-बिल्ट सेफ्टी: ऑनलाइन फ्रॉड या गलत ट्रांजैक्शन से बच्चों को बचाने के लिए एप के भीतर पहले से तय किए गए सुरक्षा नियम होते हैं। जैसे नए एक्टिवेशन पर शुरुआती लिमिट लगाना, इंटरनेशनल पेमेंट ब्लॉक रखना और पैरेंट्स को सीधे यूपीआई पिन से पूरा एक्सेस ब्लॉक करने की पावर देना। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Parents Set Rs 15,000 Monthly Limit

नई दिल्ली23 मिनट पहले कॉपी लिंक पेटीएम ने टीनेजर्स के लिए ‘पेटीएम पॉकेट मनी’ फीचर लॉन्च किया है, जिसके जरिए वे बिना खुद का बैंक अकाउंट खोले सुरक्षित डिजिटल पेमेंट कर सकेंगे। इस नए फीचर में पैरेंट्स को बच्चों के खर्च पर नजर रखने, मंथली लिमिट तय करने और रीयल-टाइम ट्रैकिंग करने की पूरी सुविधा मिलेगी। फिनटेक फर्म वन 97 कम्युनिकेशंस लिमिटेड (पेटीएम) ने 18 मई, सोमवार को आधिकारिक तौर पर इसका ऐलान किया है। पैरेंट्स के पास रहेगा खर्च का पूरा कंट्रोल कंपनी के बयान के मुताबिक, पैरेंट्स और परिवार के भरोसेमंद सदस्य अपने बच्चों को सुरक्षित और रेगुलेटेड पेमेंट एक्सेस दे सकते हैं। वे अपने पेटीएम एप के जरिए बच्चों के लिए एक तय खर्च सीमा निर्धारित कर सकेंगे। इससे पैरेंट्स अपने बच्चों के हर ट्रांजैक्शन को लगातार ट्रैक कर पाएंगे और उनका कंट्रोल हमेशा बना रहेगा। रोजमर्रा के खर्चों को डिजिटल बनाने की कोशिश भारत में टीनेजर्स हर दिन शॉपिंग, मोबाइल रिचार्ज, मेट्रो किराया, कैब बुकिंग और स्कूल-कॉलेज की कैंटीन जैसे जरूरी कामों के लिए लगातार डिजिटल पेमेंट कर रहे हैं। वर्तमान में कई बच्चे इन खर्चों के लिए पूरी तरह पैरेंट्स या कैश पर निर्भर हैं। ‘पेटीएम पॉकेट मनी’ के जरिए बच्चों को एक सुरक्षित माध्यम मिलेगा, जिससे परिवारों में छोटी उम्र से ही जिम्मेदार वित्तीय आदतें विकसित करने में मदद मिलेगी। अब ओटीपी मांगने की जरूरत नहीं होगी इस फीचर के एक्टिवेट होने के बाद टीनेजर्स अपने खुद के फोन में पेटीएम एप का इस्तेमाल करके ऑनलाइन और ऑफलाइन मर्चेंट्स को सुरक्षित यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। इसके लिए अब उन्हें पेमेंट करते समय पैरेंट्स से ओटीपी मांगने, उनका फोन उधार लेने या पैरेंट्स को वॉट्सएप पर क्यूआर कोड भेजने की कोई जरूरत नहीं पड़ेगी। 15 हजार का मंथली कैप तय किया गया पेटीएम पॉकेट मनी के तहत पैरेंट्स एनपीसीआई के ‘यूपीआई सर्कल’ के माध्यम से बच्चों को इनवाइट कर सकते हैं। इसके तहत पूरे यूपीआई नेटवर्क पर मंथली लिमिट अधिकतम 15,000 रुपए और एक बार में इंडिविजुअल पेमेंट की लिमिट 5,000 रुपए तक सेट की जा सकती है। यह सर्विस सेविंग्स और करंट दोनों तरह के अकाउंट्स पर अवेलेबल है, लेकिन इससे इंटरनेशनल पेमेंट्स और कैश विड्रॉल करने पर पाबंदी रहेगी। स्पेंड समरी से पूरा बजट ट्रैक होगा यह नया फीचर पेटीएम स्पेंड समरी के साथ पूरी तरह इंटीग्रेट है, जो हर एक पेमेंट को ऑटोमैटिकली अलग-अलग कैटेगरीज में बांट देता है। इससे परिवार आसानी से अपने कुल खर्चों पर नजर रख सकते हैं, पॉकेट मनी के बजट को बेहतर तरीके से मैनेज कर सकते हैं और बच्चों को पैसों के सही इस्तेमाल की सीख दे सकते हैं। एप में पेमेंट हिस्ट्री देखने का भी पूरा ऑप्शन मिलेगा। सुरक्षा के लिए इन-बिल्ट सेफ्टी मेजर्स पेटीएम ने इसमें सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। फीचर एक्टिवेट होने के शुरुआती 30 मिनट में केवल 500 रुपए और पहले 24 घंटों में अधिकतम 5,000 रुपए तक का ही ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा। किसी भी समय जरूरत पड़ने पर पैरेंट्स अपने पेटीएम यूपीआई पिन का इस्तेमाल करके खर्च की लिमिट को बदल सकते हैं या बच्चों का एक्सेस तुरंत कैंसल कर सकते हैं। इसके अलावा डिवाइस लॉक होना भी अनिवार्य है। क्या होता है यूपीआई सर्कल और इन-बिल्ट सेफ्टी? यूपीआई सर्कल: यह नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा शुरू की गई एक खास तकनीक है। इसके तहत एक प्राइमरी बैंक अकाउंट होल्डर अपने परिवार के किसी ऐसे सदस्य को डिजिटल पेमेंट की अनुमति दे सकता है, जिसके पास अपना खुद का बैंक अकाउंट नहीं है। इसमें पूरा कंट्रोल मैन अकाउंट होल्डर के पास ही रहता है। इन-बिल्ट सेफ्टी: ऑनलाइन फ्रॉड या गलत ट्रांजैक्शन से बच्चों को बचाने के लिए एप के भीतर पहले से तय किए गए सुरक्षा नियम होते हैं। जैसे नए एक्टिवेशन पर शुरुआती लिमिट लगाना, इंटरनेशनल पेमेंट ब्लॉक रखना और पैरेंट्स को सीधे यूपीआई पिन से पूरा एक्सेस ब्लॉक करने की पावर देना। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक की सामने से आ रहे कंटेनर से टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में सवार होकर जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है।
महाराष्ट्र के पालघर में ट्रक-कंटेनर की टक्कर, 12 की मौत:25 घायल; ट्रक में 100 से ज्यादा लोग सवार थे, सभी सगाई में जा रहे थे

महाराष्ट्र के पालघर में मुंबई-अहमदाबाद नेशनल हाईवे पर सोमवार को ट्रक और कंटेनर की टक्कर हो गई। हादसे में ट्रक सवार 12 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 20 से 25 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। जानकारी के मुताबिक डहाणू तहसील के बापूगांव से 100 से ज्यादा लोग एक सगाई कार्यक्रम में शामिल होने के लिए ट्रक में जा रहे थे। इसी दौरान पालघर जिले के धानीवरी गांव के पास सामने से आ रहे कंटेनर से ट्रक की आमने-सामने भिड़ंत हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि ट्रक और कंटेनर दोनों सड़क पर पलट गए। हादसे में ट्रक पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे के बाद ट्रक में बैठे कई लोग उसके नीचे दब गए। मृतकों और घायलों में महिलाएं और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। हादसे से जुड़ी 3 तस्वीरें… घायलों का अस्पताल में इलाज जारी घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग और हाईवे पुलिस मौके पर पहुंचे। लोगों की मदद से ट्रक में फंसे घायलों को बाहर निकाला गया और तुरंत कासा उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इस दुर्घटना के कारण मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर लंबा जाम लग गया। पुलिस ने क्रेन की मदद से क्षतिग्रस्त वाहनों को हटाकर ट्रैफिक बहाल कराया। पुलिस के मुताबिक शुरुआती जांच में हादसे की वजह तेज रफ्तार और ड्राइवर की लापरवाही मानी जा रही है। खबर लगातार अपडेट की जा रही है…..
India Vs Sri Lanka Test Series 2026 Schedule; BCCI

स्पोर्ट्स डेस्क15 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत और श्रीलंका के बीच अगस्त में 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के इस सीरीज के लिए 15 से 27 अगस्त के बीच की विंडो तय की है। श्रीलंका क्रिकेट और BCCI के सूत्रों के अनुसार, इस शेड्यूल की जानकारी भारतीय टीम समेत सभी संबंधित पक्षों को दे दी गई है। यह टेस्ट सीरीज लंका प्रीमियर लीग (LPL) के बाद खेली जाएगी, जिसका फाइनल 9 अगस्त को होना है। वहीं, दौरे में प्रस्तावित 3 मैचों की टी-20 सीरीज को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। श्रीलंका क्रिकेट में अंतरिम कमेटी का गठन BCCI सचिव देवजीत सैकिया इस समय ICC के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में श्रीलंका के दौरे पर हैं। वे वहां श्रीलंका क्रिकेट की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने गए हैं, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार ने भंग कर दिया गया था। सरकार ने इसके बाद एक अंतरिम संस्था का गठन किया है, जिसे ‘श्रीलंका क्रिकेट ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी’ नाम दिया गया है। भारत-श्रीलंक के बीच आखिरी टेस्ट सीरीज 2022 में खेली गई थी। इसे भारत ने 2-0 से जीता था। टी-20 मैचों के आयोजन में शेड्यूल की चुनौती श्रीलंका दौरे पर सैकिया की मुलाकात के दौरान ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सदस्य टी-20 सीरीज का मुद्दा उनके सामने उठा सकते हैं। इन 3 टी-20 मैचों को पिछले साल नवंबर में आए चक्रवात ‘दित्वह’ के पीड़ितों के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया था। लेकिन भारतीय टीम के लिए सितंबर का महीना बेहद व्यस्त होने के कारण इस सीरीज के लिए विंडो निकालना एक बड़ी चुनौती होगी। सितंबर में बांग्लादेश दौरे का है प्रस्ताव भारतीय टीम के लिए सितंबर में बांग्लादेश में 6 मैचों की व्हाइट-बॉल सीरीज की योजना बनाई गई है, जिसमें 3 वनडे और 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच शामिल हैं। अगर यह बांग्लादेश दौरा होता है, तो शेड्यूल बनाने वालों के लिए चीजें काफी मुश्किल हो सकती हैं। सैकिया ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में बांग्लादेश सीरीज के होने या न होने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि ध्यान वर्तमान में तय कार्यक्रमों पर होना चाहिए। बांग्लादेश का यह दौरा पिछले साल स्थगित हुई सीरीज का हिस्सा है, जिसे दोनों देशों के बीच तनाव के कारण टाल दिया गया था। अब भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में जमी बर्फ पिघलती हुई दिख रही है, लेकिन यह सीरीज आखिरकार होगी या नहीं, यह अभी भी केवल अनुमान का विषय है। भारतीय टीम का आगामी इंटरनेशनल शेड्यूल भारतीय टीम 6 जून से मुल्लांपुर में अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट मैच के साथ अपने इंटरनेशनल सीजन की शुरुआत करेगी, जिसके बाद 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी। इसके बाद भारतीय टीम श्रीलंका दौरे से पहले आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे का दौरा करेगी। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका के खिलाफ अभी तक एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
India Vs Sri Lanka Test Series 2026 Schedule; BCCI

स्पोर्ट्स डेस्क31 मिनट पहले कॉपी लिंक भारत और श्रीलंका के बीच अगस्त में 2 मैचों की टेस्ट सीरीज खेली जाएगी। क्रिकबज की रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप (WTC) के इस सीरीज के लिए 15 से 27 अगस्त के बीच की विंडो तय की है। श्रीलंका क्रिकेट और BCCI के सूत्रों के अनुसार, इस शेड्यूल की जानकारी भारतीय टीम समेत सभी संबंधित पक्षों को दे दी गई है। यह टेस्ट सीरीज लंका प्रीमियर लीग (LPL) के बाद खेली जाएगी, जिसका फाइनल 9 अगस्त को होना है। वहीं, दौरे में प्रस्तावित 3 मैचों की टी-20 सीरीज को लेकर अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। श्रीलंका क्रिकेट में अंतरिम कमेटी का गठन BCCI सचिव देवजीत सैकिया इस समय ICC के प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में श्रीलंका के दौरे पर हैं। वे वहां श्रीलंका क्रिकेट की मौजूदा स्थिति का जायजा लेने गए हैं, जिसे हाल ही में राष्ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके की सरकार ने भंग कर दिया गया था। सरकार ने इसके बाद एक अंतरिम संस्था का गठन किया है, जिसे ‘श्रीलंका क्रिकेट ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी’ नाम दिया गया है। भारत-श्रीलंक के बीच आखिरी टेस्ट सीरीज 2022 में खेली गई थी। इसे भारत ने 2-0 से जीता था। टी-20 मैचों के आयोजन में शेड्यूल की चुनौती श्रीलंका दौरे पर सैकिया की मुलाकात के दौरान ट्रांसफॉर्मेशन कमेटी के सदस्य टी-20 सीरीज का मुद्दा उनके सामने उठा सकते हैं। इन 3 टी-20 मैचों को पिछले साल नवंबर में आए चक्रवात ‘दित्वह’ के पीड़ितों के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से प्रस्तावित किया गया था। लेकिन भारतीय टीम के लिए सितंबर का महीना बेहद व्यस्त होने के कारण इस सीरीज के लिए विंडो निकालना एक बड़ी चुनौती होगी। सितंबर में बांग्लादेश दौरे का है प्रस्ताव भारतीय टीम के लिए सितंबर में बांग्लादेश में 6 मैचों की व्हाइट-बॉल सीरीज की योजना बनाई गई है, जिसमें 3 वनडे और 3 टी-20 इंटरनेशनल मैच शामिल हैं। अगर यह बांग्लादेश दौरा होता है, तो शेड्यूल बनाने वालों के लिए चीजें काफी मुश्किल हो सकती हैं। सैकिया ने हाल ही में मीडिया से बातचीत में बांग्लादेश सीरीज के होने या न होने पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया और कहा कि ध्यान वर्तमान में तय कार्यक्रमों पर होना चाहिए। बांग्लादेश का यह दौरा पिछले साल स्थगित हुई सीरीज का हिस्सा है, जिसे दोनों देशों के बीच तनाव के कारण टाल दिया गया था। अब भारत और बांग्लादेश के बीच राजनयिक संबंधों में जमी बर्फ पिघलती हुई दिख रही है, लेकिन यह सीरीज आखिरकार होगी या नहीं, यह अभी भी केवल अनुमान का विषय है। भारतीय टीम का आगामी इंटरनेशनल शेड्यूल भारतीय टीम 6 जून से मुल्लांपुर में अफगानिस्तान के खिलाफ एक टेस्ट मैच के साथ अपने इंटरनेशनल सीजन की शुरुआत करेगी, जिसके बाद 3 मैचों की वनडे सीरीज खेली जाएगी। इसके बाद भारतीय टीम श्रीलंका दौरे से पहले आयरलैंड, इंग्लैंड और जिम्बाब्वे का दौरा करेगी। भारतीय कप्तान शुभमन गिल ने श्रीलंका के खिलाफ अभी तक एक भी टेस्ट मैच नहीं खेला है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
जिस शकरकंद के छिल्के को आप फेंक देते हैं, उसमें छिपा है कैंसर का काल, वैज्ञानिकों ने भी माना लोहा

Last Updated:May 18, 2026, 18:24 IST Sweet potato benefits: शकरकंद के कई फायदे के बारे में हम जानते हैं लेकिन जब भी हम शकरकंद खाते हैं तो उसके साथ कभी उसका छिल्का नहीं खाते. यह अक्सर डस्ट बिन में ही जाता है. अब एक नए रिसर्च में जो बात सामने आई है उसके हिसाब से आप इस छिल्के को नहीं फेकेंगे. रिसर्च के मुताबिक शकरकंद के छिल्के में कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता है. शकरकंद के छिलके से कैंसर पर लगाम लग सकता है. Sweet potato peels Prevent cancer: शकरकंद रूट वेजिटेबल है जिसके कई फायदे हैं. इन फायदों के बारे में हम पहले से जानते हैं लेकिन एक रिसर्च में दावा किया गया है कि जिस शकरकंद के छिलके को हम फेंक देते हैं, उससे कैंसर जैसी बीमारियों को खत्म करने की क्षमता है. इस अध्ययन में दावा किया गया है कि शकरकंद के छिलके में ऐसे-ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो कैंसर होने के जोखिम को बहुत कम कर देता है. रिसर्च के मुताबिक शकरकंद में भी कैंसररोधी गुण होता है. शकरकंद में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं जो शरीर में फ्री रेडिकल्स को खत्म करने में मदद करता है. फ्री रेडिकल्स जब कोशिकाओं में बनने लगते हैं तब आसपास की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है. इससे कोशिकाओं के अंदर डीएनए, लिपिड और प्रोटीन डैमेज होने लगते हैं जो कैंसर कोशिकाओं में बदलने का कारण बनता है. छिल्के में मिले कैंसर को खत्म करने वाले कंपाउंडअमेरिकी नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसीन की वेबसाइट और पबमेड जर्नल में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक शकरकंद के छिलके में कैंसररोधी गुण को साबित करने के लिए एक परीक्षण किया गया. इस परीक्षण में शकरकंद के छिलके में मौजूद विभिन्न तत्वों को निकाला गया और इसके बाद इसका विश्लेषण किया गया. इसके बाद शकरकंद के छिलके में स्लफोरहोडामाइन बी और 2, 2 डाइफिनाइल-1 पिकराइलड्रेजाइल जैसे तत्व पाए गए. इन तत्वों में एंटीकैंसर गुण से भरपूर होते हैं. इसके साथ ही इसमें कई एंटीऑक्सीडेंट्स भी मिले जो कैंसर से बचाने में बहुत मददगार है. दरअसल, कोलोन, ब्रेस्ट, ओवरी, नेक, लंग्स जैसे कैंसर में जो तत्व पाए जाते हैं, उन तत्वों को शकरकंद के छिलके पाए जाने वाले कंपाउड कम कर देते हैं. ये सारे तत्व इन कैंसर को होने से रोक सकता है. अध्ययन के मुताबिक शकरकंद के छिलके कई तरह के कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकने में सक्षम है. स्किन पर लाता है ग्लोकई वैज्ञानिक शोधों से पता चला है कि शकरकंद के छिलकों में गूदे या पल्प के मुकाबले दस गुना ज्यादा एंटीऑक्सीडेंट्स और फाइबर होते हैं. यह न केवल पाचन को दुरुस्त रखता है बल्कि शरीर में कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकने में भी सहायक पाया गया है. इसमें मौजूद अघुलनशील फाइबर कब्ज की समस्या को दूर करता है और आंतों की सेहत के लिए वरदान है. शकरकंद के छिलके हार्ट के लिए भी बहुत फायदेमंद है. शकरकंद के छिलके में मौजूद पोटैशियम बीपी को नियंत्रित करने और हार्ट की धमनियों को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इससे स्किन में निखार आता है. एंटीऑक्सीडेंट्स की अधिकता के कारण यह फ्री रेडिकल्स से लड़ता है, जिससे समय से पहले झुर्रियां नहीं आतीं और त्वचा चमकदार बनी रहती है. टाइप 2 डायबिटीज में भी फायदेमंदएक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक शकरकंद के छिलके डायबिटीज के जोखिम को कम करने में माहिर है. आमतौर पर यही समझा जाता है कि शकरकंद मीठा होता है इसलिए यह डायबिटीज मरीजों को नहीं खाना चाहिए. लेकिन बीबीसी की एक रिपोर्ट ने रिसर्च का हवाला देते हुए बताया है कि 80 ग्राम शकरकंद में 285 किलो जूल ऊर्जा मिलती है. इसके साथ ही इसमें 0.9 ग्राम प्रोटीन, 0.2 ग्राम फैट, 6.7 ग्राम शुगर, 280 मिलीग्राम पोटैशियम, 14 मिलीग्राम विटामिन सी सहित कई तरह के मिनिरलस् पाए जाते हैं. ये सारे तत्व कई बीमारियों से बचाते हैं. इतना ही नहीं शकरकंद से टाइप 2 डायबिटीज से भी मुक्ति दिलाता है. अध्ययन के मुताबिक अगर शकरकंद की कम खुराक का सेवन किया जाए तो यह टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित लोगों में ब्लड शुगर लेवल को बहुत घटा देता है. शकरकंद में कई तरह के विटामिन, मिनिरल्स और माइक्रो न्यूट्रेंट्स होते हैं जो हमारे शरीर के लिए फायदेमंद है. शकरकंद के नियमित सेवन से वजन भी घटाया जा सकता है. शकरकंद वसा के मेटाबोलिज्म को तेज करता है. शकरकंद का सेवन करने के बाद भूख बहुत कम लगती है और लंबे समय तक कुछ खाने की चाहत नहीं होती है. इसी कारण शकरकंद वजन को कम करने में मदद करता है. इतना ही नहीं माना जाता है कि शकरकंद के सेवन से ब्लड शुगर भी नियंत्रित रहता है. शकरकंद एनर्जी बूस्टर भी है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
क्या आप भी फ्रिज में रखते हैं कटे फल? ये गलती सेहत पर पड़ सकती है भारी, एक्सपर्ट ने बताया कब बन जाते हैं जहरीले

Cut Fruits Storage: गर्मियों में ज्यादातर लोग तरबूज, खरबूजा, पपीता या अनानास जैसे फलों को काटकर फ्रिज में रख देते हैं ताकि बार-बार काटने की झंझट न रहे और ठंडे फल आसानी से मिल जाएं. देखने में यह आदत काफी आसान लगती है, लेकिन कई बार यही छोटी सी लापरवाही सेहत पर भारी पड़ सकती है. बहुत से लोग सोचते हैं कि फ्रिज में रखने के बाद फल पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, जबकि सच यह है कि कटने के बाद फलों की ताजगी तेजी से कम होने लगती है. हवा, नमी और बैक्टीरिया के संपर्क में आने के बाद उनमें खराबी शुरू हो जाती है, अगर सही तरीके से स्टोर न किया जाए तो कटे हुए फल पेट से जुड़ी दिक्कतों की वजह भी बन सकते हैं. खासकर गर्म मौसम में बैक्टीरिया तेजी से फैलते हैं और फल जल्दी खराब हो जाते हैं. यही कारण है कि एक्सपर्ट कटे फलों को ज्यादा देर तक स्टोर करने से बचने की सलाह देते हैं, अगर आप भी अक्सर कटे हुए फल फ्रिज में रखते हैं, तो यह जानना जरूरी है कि उन्हें कितनी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है और स्टोर करने का सही तरीका क्या है. कटे हुए फल जल्दी क्यों खराब होते हैं?जब भी किसी फल को काटा जाता है, उसकी बाहरी सुरक्षा परत हट जाती है. इसके बाद फल सीधे हवा और नमी के संपर्क में आ जाता है. यही वजह है कि उनमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं. साल्मोनेला, ई. कोलाई और लिस्टेरिया जैसे हानिकारक बैक्टीरिया कटे फलों में तेजी से बढ़ सकते हैं. फ्रिज बैक्टीरिया की रफ्तार को धीमा जरूर करता है, लेकिन उन्हें पूरी तरह खत्म नहीं करता. इसलिए यह मान लेना गलत है कि फ्रिज में रखा हर कटे फल पूरी तरह सुरक्षित है. ऑक्सीडाइजेशन से कम हो जाते हैं पोषक तत्वआपने कई बार देखा होगा कि कटने के कुछ देर बाद सेब या केला भूरा पड़ने लगता है. यह ऑक्सीडाइजेशन की वजह से होता है. हवा के संपर्क में आने पर फलों में मौजूद विटामिन-सी जैसे पोषक तत्व धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. यानी फल सिर्फ स्वाद ही नहीं खोते, बल्कि उनका न्यूट्रिशन भी कम होने लगता है. लंबे समय तक कटे फल रखने से उनकी गुणवत्ता प्रभावित होती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. कितने समय तक सुरक्षित रहते हैं कटे फल?कटे फलों की सुरक्षा इस बात पर निर्भर करती है कि उन्हें किस तापमान पर रखा गया है. अगर फल कमरे के तापमान पर रखे हैं, तो उन्हें 4 से 6 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए. अगर फ्रिज का तापमान 4 डिग्री सेल्सियस से कम है, तो ज्यादातर कटे फल करीब 24 घंटे तक ठीक रह सकते हैं. तरबूज, खरबूजा, पपीता और अनानास जैसे ज्यादा पानी वाले फल जल्दी खराब होते हैं. केला और सेब जैसे फल जल्दी रंग बदलते हैं, इसलिए इन्हें काटने के तुरंत बाद खाना बेहतर माना जाता है. लोग स्टोर करते समय कौन सी गलतियां करते हैं?कई लोग कटे फलों को प्लेट में खुला छोड़ देते हैं या हल्के फॉयल में ढककर फ्रिज में रख देते हैं. इससे फल लगातार हवा के संपर्क में बने रहते हैं और जल्दी खराब हो जाते हैं. इसके अलावा बार-बार फ्रिज खोलने से अंदर का तापमान बदलता रहता है. तापमान में उतार-चढ़ाव होने पर फलों में खराबी तेजी से बढ़ती है. कई बार लोग एक ही कंटेनर को बार-बार खोलते रहते हैं, जिससे बाहर की दूषित हवा अंदर पहुंचती रहती है. कटे फलों को सुरक्षित रखने का सही तरीका 1. एयरटाइट कंटेनर का इस्तेमाल करेंकटे हुए फलों को हमेशा कांच या अच्छी क्वालिटी के एयरटाइट कंटेनर में रखें. इससे हवा अंदर कम जाती है और फल ज्यादा समय तक ताजे बने रहते हैं. 2. साफ-सफाई का ध्यान रखेंफल काटने से पहले हाथ, चाकू और कटिंग बोर्ड अच्छी तरह साफ करें. गंदे बर्तन या चाकू से बैक्टीरिया सीधे फल के अंदर पहुंच जाते हैं. 3. तुरंत फ्रिज में रखेंफल काटने के बाद उन्हें ज्यादा देर बाहर न छोड़ें. तुरंत फ्रिज में रखना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. 4. छोटे हिस्सों में स्टोर करेंअगर ज्यादा फल काट रहे हैं, तो उन्हें छोटे-छोटे कंटेनर में रखें. इससे हर बार पूरा कंटेनर खोलने की जरूरत नहीं पड़ेगी. कैसे पहचानें कि फल खराब हो चुके हैं?कई बार फल देखने में ठीक लगते हैं, लेकिन अंदर से खराब हो चुके होते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है. फल से खट्टी या फर्मेंटेशन जैसी गंध आना, फल का चिपचिपा हो जाना, ज्यादा पानी छोड़ना, रंग का बहुत ज्यादा गहरा या काला पड़ जाना, स्वाद में बदलाव महसूस होना. अगर इनमें से कोई भी संकेत दिखे, तो ऐसे फल खाने से बचना चाहिए. बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा जरूरी सावधानीकटे हुए खराब फल बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए ज्यादा नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे लोगों में फूड पॉइजनिंग का खतरा बढ़ जाता है. इसलिए उनके लिए हमेशा ताजे और तुरंत कटे फल देना ज्यादा सुरक्षित रहता है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)
बंगाल में इमाम-मुअज्जिन और पुजारियों का भत्ता बंद:महिलाओं को 1 जून से ₹3000 मिलेंगे; TMC सरकार में हुए भ्रष्टाचार-महिला उत्पीड़न की जांच होगी

पश्चिम बंगाल के सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कैबिनेट बैठक में कई बड़े फैसले लिए। राज्य सरकार ने इमाम, मुअज्जिन और पुजारियों को दिए जाने वाले भत्ते को 1 जून से बंद करने का फैसला किया है। इसके अलावा TMC सरकार के कार्यकाल में हुए भ्रष्टाचार और महिला उत्पीड़न की जांच के लिए 2 आयोग बनेंगे। दोनों आयोगों की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज करेंगे। साथ ही महिलाओं को अन्नपूर्णा योजना के तहत हर महीने 3000 रुपए देने, मुफ्त बस यात्रा शुरू करने, सातवां वेतन आयोग गठित करने और OBC सूची में बदलाव जैसे अहम निर्णय भी लिए गए। मार्च में बढ़ाया था मानदेय पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सरकार ने इसी साल मार्च में धार्मिक नेताओं के मानदेय में 500 रुपए की बढ़ोतरी की थी। इसके बाद राज्य की रजिस्टर्ड मस्जिदों के इमामों को हर महीने 3000 रुपए, जबकि मुअज्जिन और पुजारियों को 2000 रुपए की मदद दी जा रही थी। नई सरकार ने अब इस योजना को बंद करने का फैसला लिया है। हालांकि सरकार ने साफ किया है कि छात्रों की कोई भी छात्रवृत्ति योजना बंद नहीं की जाएगी। महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना कैबिनेट ने महिलाओं को आर्थिक सहायता देने के लिए ‘अन्नपूर्णा योजना’ को मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत 1 जून से महिलाओं को हर महीने 3000 रुपए दिए जाएंगे। सरकार ने कहा कि जो महिलाएं पहले से ‘लक्ष्मी भंडार योजना’ का लाभ ले रही हैं, उन्हें दोबारा आवेदन करने की जरूरत नहीं होगी। राशि सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर की जाएगी। सरकार जल्द ही नया वेब पोर्टल भी शुरू करेगी, ताकि नई पात्र महिलाएं आवेदन कर सकें। राज्य सरकार ने 1 जून से महिलाओं को सरकारी बसों में मुफ्त यात्रा की भी मंजूरी दी है। हालांकि फिलहाल बसों की संख्या बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। CAA आवेदकों को भी मिलेगा लाभ सरकार ने स्पष्ट किया कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के तहत आवेदन करने वाली महिलाएं और वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए ट्रिब्यूनल पहुंचने वाली महिलाओं को भी अन्नपूर्णा योजना का लाभ मिलेगा। भ्रष्टाचार-उत्पीड़न की जांच के लिए 2 आयोग सरकार ने संस्थागत भ्रष्टाचार की जांच के लिए रिटायर्ड जस्टिस बिस्वजीत बसु की अध्यक्षता में आयोग बनाया है। इसमें एडीजी रैंक के IPS अधिकारी जयरामन सदस्य सचिव होंगे। आयोग कटमनी, रिश्वतखोरी, सरकारी धन के दुरुपयोग और आम लोगों से धोखाधड़ी जैसे मामलों की जांच करेगा। इसके दायरे में सरकारी अधिकारी, पंचायत प्रतिनिधि, बिचौलिए, ठेकेदार, एनजीओ और सहकारी संस्थाएं भी आएंगी। दूसरा आयोग महिलाओं और बच्चियों पर कथित अत्याचार के मामलों की जांच करेगा। इसकी अध्यक्षता रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी करेंगी, जबकि IPS अधिकारी दमयंती सेन सदस्य सचिव होंगी। CM शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि आयोग पिछले कई वर्षों में महिलाओं और बच्चों, खासकर SC, ST और अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचारों की जांच करेगा। OBC सूची में होगा बदलाव सरकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट के 2024 के फैसले के आधार पर राज्य की मौजूदा OBC सूची को रद्द करने और उसमें संशोधन करने का फैसला लिया है। दरअसल, तृणमूल कांग्रेस सरकार के दौरान 77 समुदायों को OBC सूची में शामिल किया गया था, जिनमें 75 मुस्लिम समुदाय थे। इस फैसले को लेकर कानूनी विवाद हुआ था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस सूची को रद्द कर दिया था और 2010 के बाद जारी करीब 5 लाख OBC प्रमाणपत्रों को अमान्य घोषित कर दिया था। नई सरकार अब OBC आरक्षण के लिए पात्रता तय करने हेतु एक नई समिति बनाएगी। सातवें वेतन आयोग को मंजूरी कैबिनेट ने सरकारी कर्मचारियों के वेतन में संशोधन के लिए सातवें वेतन आयोग के गठन को भी मंजूरी दे दी है। इसका फायदा सरकारी विभागों के अलावा नगर निकाय, स्थानीय निकाय, शिक्षा बोर्ड और सरकारी शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों को भी मिलेगा। हालांकि राज्य कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में बढ़ोतरी का मुद्दा सोमवार की बैठक में शामिल नहीं था। ———————————- ये खबर भी पढ़ें… कोलकाता में पुलिस पर पथराव, 3 जवान घायल, 40 गिरफ्तार, अतिक्रमण हटाने के विरोध में प्रदर्शन हो रहा था कोलकाता में रविवार को पार्क सर्कस इलाके में अतिक्रमण हटाने के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया। इस दौरान पुलिस पर पथराव भी हुआ, जिसमें 3 पुलिसकर्मी घायल हो गए। सुरक्षाबलों की गाड़ियों में भी तोड़फोड़ की गई। बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कहा कि मामले में अब तक 40 लोगों को गिरफ्तार किया है। पूरी खबर पढ़ें…
गर्मी में जांघ के आसपास खुजली से हैं परेशान, अपनाएं 5 असरदार देसी उपाय, तुरंत मिलेगा आराम

Last Updated:May 18, 2026, 18:15 IST Itching Home Remedies: गर्मियों में पसीना और नमी बढ़ने से जांघों के आसपास खुजली और रैशेज की समस्या होने लगती है. खासकर टाइट कपड़े पहनने के बाद यह परेशानी हो जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो नारियल तेल, एलोवेरा जेल और नीम जैसे घरेलू उपाय जांघ के आसपास होने वाली खुजली से तुरंत राहत दिला सकते हैं. सूती कपड़े भी काफी राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के लिए एलोवेरा जेल या नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. Home Remedies of Itching: गर्मी के मौसम में स्किन से जुड़ी समस्याएं सबसे ज्यादा परेशान करती हैं. पसीना, उमस और स्किन में नमी बढ़ने की वजह से जांघों के आसपास खुजली, जलन और रैशेज की समस्या काफी आम है. जो लोग लंबे समय तक बाहर रहते हैं या ज्यादा पसीना बहाते हैं, उन्हें यह परेशानी ज्यादा हो सकती है. कई बार लगातार खुजलाने से त्वचा लाल हो जाती है और इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है. हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार जांघों के आसपास खुजली की वजह फंगल इंफेक्शन, पसीना, टाइट कपड़े या त्वचा में रगड़ भी हो सकती है. ऐसे में कुछ आसान घरेलू उपाय जल्द राहत दे सकते हैं. खुजली से निजात पाने के देसी नुस्खे नारियल तेल : नारियल तेल में एंटीबैक्टीरियल और मॉइस्चराइजिंग गुण पाए जाते हैं, जो स्किन को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकते हैं. अगर खुजली हल्की हो, तो प्रभावित जगह को साफ करके वहां हल्का नारियल तेल लगाया जा सकता है. इससे त्वचा की ड्राइनेस कम होती है और जलन में राहत मिल सकती है. एलोवेरा जेल : एलोवेरा को त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें मौजूद कूलिंग गुण खुजली और जलन को शांत करने में मदद कर सकते हैं. ताजा एलोवेरा जेल को प्रभावित जगह पर लगाने से त्वचा को ठंडक मिलती है और लालिमा कम हो सकती है. नीम का पानी : नीम में एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं. अगर खुजली पसीने या हल्के फंगल इंफेक्शन की वजह से हो रही हो, तो नीम के पत्तों को पानी में उबालकर उस पानी से प्रभावित जगह साफ की जा सकती है. इससे त्वचा को राहत मिल सकती है. एंटीफंगल पाउडर : जांघों के आसपास लगातार नमी बने रहने से बैक्टीरिया और फंगस तेजी से बढ़ सकते हैं. इसलिए नहाने के बाद उस हिस्से को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. जरूरत पड़ने पर एंटीफंगल पाउडर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है. ढीले और सूती कपड़े : गर्मी में टाइट और सिंथेटिक कपड़े पहनने से पसीना ज्यादा जमा होता है, जिससे खुजली और रैशेज बढ़ सकते हैं. डॉक्टर के अनुसार सूती और ढीले कपड़े पहनने से त्वचा को हवा मिलती है और पसीना जल्दी सूखता है. इससे संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. डॉक्टर से कब करें संपर्क? इस समस्या से बचने के लिए पसीने से गीले कपड़े ज्यादा देर तक न पहनें. दूसरों का तौलिया या कपड़े इस्तेमाल करने से बचें. त्वचा को बार-बार खुजलाने से बचें. अगर खुजली लंबे समय तक बनी रहे, त्वचा पर लाल चकत्ते, सूजन, बदबू या पस बनने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में डर्मेटोलॉजिस्ट से मिलकर सलाह लेना जरूरी हो सकता है, क्योंकि यह फंगल या बैक्टीरियल इंफेक्शन का संकेत हो सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें









