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माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा – ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा - ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

क्या आप भी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक कंप्यूटर के सामने बैठकर डेस्क जॉब करते हैं? अगर हां, तो परप्लेक्सिटी एआई के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का दावा आपको चौंका सकता है। श्रीनिवास का कहना है कि यह 9 से 5 की डेस्क जॉब इंसानी काम का कोई स्वाभाविक विकास नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स द्वारा तैयार की गई एक बेहद सफल बिजनेस स्ट्रैटजी थी। हाल ही में मशहूर पॉडकास्ट ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ में बातचीत के दौरान श्रीनिवास ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सॉफ्टवेयर बेचने के लिए जानबूझकर ‘आधुनिक ऑफिस वर्कर’ का कॉन्सेप्ट तैयार किया था। श्रीनिवास ने कहा, ‘माइक्रोसॉफ्ट ने ऑफिस वर्कर की इस पूरी अवधारणा को सिर्फ इसलिए खड़ा किया क्योंकि वे अपना ऑफिस सॉफ्टवेयर बेचना चाहते थे। बिल गेट्स का मिशन ही यही था कि हर डेस्क पर एक पीसी (कंप्यूटर) हो और लोग उससे चिपके रहें।’ उन्होंने आगे बताया कि दिनभर डेस्क पर बैठकर स्क्रीन को घूरते रहने वाले इस वर्क कल्चर को सुनियोजित तरीके से नीचे से ऊपर तक तैयार किया गया था। सीईओ श्रीनिवास का यह दावा सुनकर पॉडकास्ट के होस्ट जो रोगन भी हैरान रह गए। रोगन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वाह! इस तरह की लाइफस्टाइल बहुत ही हालिया चीज है जिसे हम सबने अब सामान्य मान लिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले में सटीक निशाना लगाया।’ परप्लेक्सिटी प्रमुख श्रीनिवास ने समझाया कि इस रणनीति के तहत कॉरपोरेट जगत में आने से पहले ही पीढ़ियों को माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादों का आदी बनाया गया। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि हम सभी को बचपन से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल का इस्तेमाल करना सिखाया गया। एक बार जब आप यह सीख गए, तो आप किसी ऐसी कंपनी में काम करने के लिए तैयार हो गए जिसके डेस्क पर पीसी हो और जो माइक्रोसॉफ्ट को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के पैसे दे रही हो।’ स्कूलों और शुरुआती कॉरपोरेट कल्चर में वर्ड और एक्सेल को अनिवार्य बनाकर माइक्रोसॉफ्ट ने मुनाफे का एक कभी न खत्म होने वाला चक्र तैयार कर लिया। गेट्स का मकसद जॉब्स की तरह कंप्यूटिंग को सुंदर बनाना नहीं था – सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने बिल गेट्स के आक्रामक कॉरपोरेट विजन की तुलना एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स से की। उन्होंने कहा कि जहां स्टीव जॉब्स का ध्यान सुंदर, आकर्षक और आसान मशीनें बनाने पर था, वहीं माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना था। श्रीनिवास ने कहा, ‘जैसा स्टीव जॉब्स सोचते थे। उन्हें सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर बेचने की परवाह थी, क्योंकि ज्यादा सॉफ्टवेयर बेचने से ही आप अमीर बनते हैं।’

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माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा – ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

माइक्रोसॉफ्ट ने सॉफ्टवेयर बेचने दुनिया को स्क्रीन से चिपकाया:सीईओ श्रीनिवास का दावा - ‘बिल गेट्स ने दुनिया को 9-5 की जॉब में फंसाया

क्या आप भी सुबह 9 से शाम 5 बजे तक कंप्यूटर के सामने बैठकर डेस्क जॉब करते हैं? अगर हां, तो परप्लेक्सिटी एआई के सीईओ अरविंद श्रीनिवास का दावा आपको चौंका सकता है। श्रीनिवास का कहना है कि यह 9 से 5 की डेस्क जॉब इंसानी काम का कोई स्वाभाविक विकास नहीं है, बल्कि माइक्रोसॉफ्ट के को-फाउंडर बिल गेट्स द्वारा तैयार की गई एक बेहद सफल बिजनेस स्ट्रैटजी थी। हाल ही में मशहूर पॉडकास्ट ‘द जो रोगन एक्सपीरियंस’ में बातचीत के दौरान श्रीनिवास ने यह दावा किया। उन्होंने कहा कि माइक्रोसॉफ्ट ने अपने सॉफ्टवेयर बेचने के लिए जानबूझकर ‘आधुनिक ऑफिस वर्कर’ का कॉन्सेप्ट तैयार किया था। श्रीनिवास ने कहा, ‘माइक्रोसॉफ्ट ने ऑफिस वर्कर की इस पूरी अवधारणा को सिर्फ इसलिए खड़ा किया क्योंकि वे अपना ऑफिस सॉफ्टवेयर बेचना चाहते थे। बिल गेट्स का मिशन ही यही था कि हर डेस्क पर एक पीसी (कंप्यूटर) हो और लोग उससे चिपके रहें।’ उन्होंने आगे बताया कि दिनभर डेस्क पर बैठकर स्क्रीन को घूरते रहने वाले इस वर्क कल्चर को सुनियोजित तरीके से नीचे से ऊपर तक तैयार किया गया था। सीईओ श्रीनिवास का यह दावा सुनकर पॉडकास्ट के होस्ट जो रोगन भी हैरान रह गए। रोगन ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘वाह! इस तरह की लाइफस्टाइल बहुत ही हालिया चीज है जिसे हम सबने अब सामान्य मान लिया है। माइक्रोसॉफ्ट ने इस मामले में सटीक निशाना लगाया।’ परप्लेक्सिटी प्रमुख श्रीनिवास ने समझाया कि इस रणनीति के तहत कॉरपोरेट जगत में आने से पहले ही पीढ़ियों को माइक्रोसॉफ्ट के उत्पादों का आदी बनाया गया। उन्होंने कहा, ‘यही वजह है कि हम सभी को बचपन से माइक्रोसॉफ्ट वर्ड और एक्सेल का इस्तेमाल करना सिखाया गया। एक बार जब आप यह सीख गए, तो आप किसी ऐसी कंपनी में काम करने के लिए तैयार हो गए जिसके डेस्क पर पीसी हो और जो माइक्रोसॉफ्ट को सॉफ्टवेयर इस्तेमाल करने के पैसे दे रही हो।’ स्कूलों और शुरुआती कॉरपोरेट कल्चर में वर्ड और एक्सेल को अनिवार्य बनाकर माइक्रोसॉफ्ट ने मुनाफे का एक कभी न खत्म होने वाला चक्र तैयार कर लिया। गेट्स का मकसद जॉब्स की तरह कंप्यूटिंग को सुंदर बनाना नहीं था – सीईओ अरविंद श्रीनिवास ने बिल गेट्स के आक्रामक कॉरपोरेट विजन की तुलना एपल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स से की। उन्होंने कहा कि जहां स्टीव जॉब्स का ध्यान सुंदर, आकर्षक और आसान मशीनें बनाने पर था, वहीं माइक्रोसॉफ्ट का लक्ष्य केवल मुनाफा कमाना था। श्रीनिवास ने कहा, ‘जैसा स्टीव जॉब्स सोचते थे। उन्हें सिर्फ कंप्यूटर और सॉफ्टवेयर बेचने की परवाह थी, क्योंकि ज्यादा सॉफ्टवेयर बेचने से ही आप अमीर बनते हैं।’

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