LLB छात्रा से रेप के आरोपी ने जुलूस निकाला:गाजियाबाद जेल से छूटने पर समर्थकों ने फूल बरसाए, हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रहा

गाजियाबाद में रविवार को LLB छात्रा से रेप का आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आया। हिंदू युवा वाहिनी का नगर अध्यक्ष रह चुका है। 8 महीने बाद डासना जेल से निकलते ही उसके समर्थकों ने पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। इसके बाद उसे कंधे पर बैठाकर जेल परिसर से सड़क तक ले गए। फिर गाड़ियों का काफिला निकालकर जुलूस निकाला गया। समर्थकों ने इसका वीडियो बनाकर इंस्टाग्राम पर अपलोड कर दिया। 8 अगस्त 2025 को आरोपी सुशील प्रजापति ने LLB की एक छात्रा के साथ रेप किया था। इसके बाद उसे किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। देर रात करीब 11 बजे छात्रा मुरादनगर थाने पहुंची। उसके समर्थन में बजरंग दल के लोग भी पहुंचे और हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने आरोपी की गिरफ्तारी के लिए 25 हजार रुपए का इनाम घोषित किया था। 11 अगस्त 2025 को उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। 17 मई को सुशील प्रजापति जेल से बाहर आया। देखिए 3 तस्वीरें… अब जानिए पूरा मामला… 2021 में हुई थी मुलाकात पुलिस के मुताबिक, नवंबर 2021 में गाजियाबाद निवासी सुशील प्रजापति की मुलाकात LLB की एक छात्रा से हुई थी। इसके बाद सुशील उसे लगातार फोन कर हालचाल लेने लगा। छात्रा ने उससे बताया कि वह लॉ की पढ़ाई के साथ मेरठ कोर्ट में एक सीनियर वकील के पास प्रैक्टिस भी करती है। इस पर सुशील ने उससे कहा कि वह गाजियाबाद कोर्ट में बैठना शुरू कर दे। उसने दावा किया कि उसके जानकार वहां सीनियर एडवोकेट हैं, जो उसे हर महीने पैसे भी दिलवा देंगे। साथ ही, उसके जानने वाले लोग भी छात्रा के पास केस लेकर आएंगे। सुशील ने यह भी कहा कि गाजियाबाद, मोदीनगर के ज्यादा करीब है। इस पर छात्रा ने उससे गाजियाबाद कोर्ट में बैठने की व्यवस्था कराने को कहा। थार में बैठाकर ले गया था सुशील 8 अगस्त 2025 की सुबह करीब 11 बजे सुशील ने छात्रा को फोन कर कहा कि उसकी गाजियाबाद के एक सीनियर वकील से बात हो गई है और वह उसी दिन मुलाकात करा देगा। इसके बाद छात्रा मेरठ से बस के जरिए गाजियाबाद के मुरादनगर पहुंची। वहां सुशील पहले से थार गाड़ी लेकर खड़ा था। उसने कहा, “जल्दी बैठो, वकील साहब इंतजार कर रहे हैं। अभी उनसे मिलना है। इसके बाद वह छात्रा को एक फ्लैट पर ले गया। वहां उसने उसे कोल्ड ड्रिंक पीने के लिए दी और कहा कि वकील साहब आने वाले हैं। आरोप है कि कोल्ड ड्रिंक पीते ही छात्रा को नींद आने लगी। इसी दौरान सुशील प्रजापति ने उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद सुशील ने उसे धमकी दी कि अगर उसने किसी को इस बारे में बताया तो उसकी हत्या करवा देगा। उसने कहा कि उसके बड़े-बड़े लोगों से संबंध हैं और वह हिंदू युवा वाहिनी संगठन से जुड़ा हुआ है। इसके बाद वह छात्रा को अपनी कार से सड़क पर छोड़कर चला गया और कहा कि यहां से चुपचाप मेरठ लौट जाओ। छात्रा के पक्ष में जुटे कई संगठन होश आने के बाद छात्रा रात करीब 11 बजे मुरादनगर थाने पहुंची। सूचना मिलते ही उसके समर्थन में गोरक्षक दल और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए। उन्होंने आरोपी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने की मांग को लेकर हंगामा किया। इसके बाद पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर आरोपी सुशील को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। करीब 8 महीने तक डासना जेल में रहने के बाद वह रविवार को जमानत पर जेल से बाहर आया। —————- यह खबर भी पढ़िए… लखनऊ में ढाबा संचालक की हत्या:झगड़े का वीडियो बनाने पर दबंगों ने सिर में मारी गोली, 3 संदिग्ध हिरासत में लखनऊ में दबंगों ने एक ढाबा संचालक के सिर में गोली मारकर हत्या कर दी। उसने ढाबे के सामने रोड पर लड़ाई कर रहे युवकों का वीडियो बनाया था। इससे नाराज होकर दबंग युवकों ने घटना को अंजाम दिया। ढाबा संचालक को गंभीर हालत में ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी ऑपेरशन के दौरान मौत हो गई। पूरी खबर पढ़ें
योगी बोले- नमाज पढ़नी है तो शिफ्ट में पढ़िए:सड़क पर नहीं पढ़ी जाएगी; प्यार से मानेंगे तो ठीक, नहीं तो दूसरा तरीका अपनाएंगे

यूपी में बकरीद से पहले सड़कों पर नमाज को लेकर सीएम योगी ने चेतावनी दी है। लखनऊ में सोमवार को एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा- सड़कें नमाज पढ़ने या किसी तरह की भीड़ जुटाने के लिए नहीं हैं। लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या यूपी में सड़कों पर नमाज होती है? मैं कहता हूं- कतई नहीं। उन्होंने कहा- सड़कें आम लोगों के चलने के लिए हैं। कोई भी आकर ट्रैफिक डिस्टर्ब करे, यह अधिकार किसी को नहीं है। नमाज पढ़नी है तो तय जगह पर पढ़िए। संख्या ज्यादा है तो शिफ्ट में पढ़ लीजिए। हम नमाज नहीं रोकेंगे, लेकिन सड़क पर अराजकता नहीं होने देंगे। योगी ने आगे कहा- सरकार पहले संवाद से समाधान चाहती है। लेकिन, कानून तोड़ने वालों पर सख्ती भी होगी। प्यार से मानेंगे तो ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। सीएम योगी ने बरेली में हुए बवाल का भी जिक्र किया। कहा- बरेली में लोगों ने हाथ आजमाया था, ताकत भी देख ली। कानून सभी के लिए बराबर है। किसी को भी सड़क जाम करने या अव्यवस्था फैलाने की छूट नहीं दी जाएगी। दरअसल, यूपी में सितंबर 2025 में आई लव मोहम्मद को लेकर विवाद हुआ था। बरेली में मुस्लिम नेता मौलाना तौकीर रजा ने नमाज के बाद धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया। पुलिस ने रोका तो पथराव हो गया। इसके बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया था। CM बोले- पहले कट्टा-बम बनते थे, अब ब्रह्मोस मिसाइल बन रही योगी ने यूपी के विकास और निवेश का जिक्र किया। कहा- पहले प्रदेश की पहचान कट्टा और बम से होती थी, लेकिन अब यहां ब्रह्मोस मिसाइल बन रही है। नकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन माफिया’ पैदा होगा। सकारात्मक माहौल होगा तो ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ बनेगा। यूपी में तेजी से निवेश आ रहा है। रोजगार बढ़ रहे हैं। यूपी जल्द 1 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी बनेगा। यूपी में महिलाओं की सुरक्षा बेहतर हुई योगी ने कहा- यूपी में पहले महिलाएं दिन में भी बाहर निकलने से डरती थीं। अब वे नाइट शिफ्ट में काम कर रही हैं। सुरक्षित घर लौट रही हैं। अब कोई बेटी से छेड़खानी नहीं कर सकता। उन्होंने कहा- यूपी अब ‘बीमारू राज्य’ नहीं, बल्कि रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बन चुका है। पिछले 6 साल से यूपी लगातार रेवेन्यू सरप्लस में है। अब प्रदेश को किसी के सामने हाथ फैलाने की जरूरत नहीं पड़ती। यूपी के पास कृषि, इंफ्रास्ट्रक्चर और युवाओं की ताकत जैसी अपार संभावनाएं हैं। सरकार सभी 75 जिलों के संतुलित विकास पर काम कर रही है। बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान सड़क पर नमाज का मुद्दा उठाया था सीएम योगी ने हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान सड़कों पर नमाज के मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी पर तुष्टीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए कहा था कि दीदी सड़कों पर नमाज पढ़वाती हैं और हिंदू त्योहारों पर पाबंदी लगाती हैं। यूपी में कोई सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ सकता। सड़कें यातायात के लिए हैं, नमाज के लिए नहीं। नो कर्फ्यू, नो दंगा, यूपी में सब चंगा। योगी सरकार ने सड़क पर नमाज पढ़ने पर रोक लगाई थी योगी सरकार ने 2022-2023 में सड़कों पर नमाज पर पूरी तरह से रोक लगा दी थी। आदेश दिया कि ईद, अलविदा जुमा या किसी भी अन्य दिन सड़कों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। धार्मिक कार्यक्रम केवल ईदगाह, मस्जिदों या निर्धारित धार्मिक स्थलों के अंदर ही होने चाहिए। ———————- ये खबर भी पढ़ें… लखनऊ में हंगामा, पथराव और लाठीचार्ज: बुलडोजर से वकीलों के 240 चैंबर ढहाए; अखिलेश बोले- भाजपा किसी की सगी नहीं लखनऊ जिला कोर्ट के बाहर रविवार को जमकर हंगामा हुआ। बुलडोजर से चैंबर तोड़े जाने के विरोध में वकील भड़क गए। वकीलों की भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज कर दिया। पुलिस ने दौड़ा-दौड़ाकर लाठियां बरसाईं। इस दौरान भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। VIDEO में देखिए पूरा बवाल…
फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। टूर्नामेंट के 104 मैचों के लिए इस बार ऐसी प्राकृतिक घास तैयार की जा रही है, जो अलग-अलग मौसम और स्टेडियम की परिस्थितियों में भी एक जैसी खेले। इसके लिए फीफा ने करीब 47 करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई है। टीम ने पिछले 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग किए हैं, ताकि खिलाड़ियों की चोट का खतरा घटे और ट्रैक्शन व बॉल बाउंस बेहतर रहे। 2024 के कोपा अमेरिका टूर्नामेंट में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अटलांटा स्टेडियम की अस्थाई प्राकृतिक घास की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि पिच ‘डिजास्टर’ (बेहद खराब) है और गेंद ‘स्प्रिंगबोर्ड’ की तरह अजीब ढंग से उछल रही है। साल 2026 के वर्ल्ड कप में मेजबान अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ऐसी बदनामी से बचना चाहते हैं। 5 मिलीमीटर का अंतर भी बदल सकता है खेल का मिजाज टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन सोरोचन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रे रोजर्स की देखरेख में वर्ल्ड कप के 16 स्टेडियमों के लिए पिच तैयार हो रही हैं। सोरोचन के मुताबिक घास की ऊंचाई में सिर्फ 5 मिलीमीटर का फर्क भी खेल का मिजाज बदल देता है। इसे परखने के लिए लैब के छोटे मैदानों पर चमकदार लाल रंग की मशीनों से फुटबॉल को शूट किया गया। इससे बॉल की स्पीड तक मापा गया।
लेकिन असल में निशांत कुमार कौन हैं?

वो वीडियो जिसने बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री को रातों-रात मशहूर बना दिया: बिहार के नए स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार का वीडियो गलत कारणों से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिखाया गया है कि वह सार्वजनिक कार्यक्रमों में स्पष्ट रूप से भ्रमित दिखाई दे रहे हैं – अपने पिता के पैर छूते समय हिलना, गुरुद्वारे में अपने कपड़ों को संभालने के लिए संघर्ष करना, अपनी कुर्सी पर अस्थिर रूप से हिलना, और बुनियादी सवाल पूछे जाने पर बीच वाक्य से पीछे हटना। सोशल मीडिया ने स्पष्ट रूप से पूछा कि क्या वह व्यक्ति जो अब 130 मिलियन से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य सेवा का प्रभारी है, स्पष्ट रूप से कहें तो ठीक है। न तो मंत्री और न ही जेडीयू ने कोई स्पष्टीकरण दिया है. तो वास्तव में निशांत कुमार कौन है – और वह यहां कैसे पहुंचा? (एक्स/@दिनेशरेडबुल) उनके अधिकांश जीवन में, किसी ने उनके बारे में नहीं सुना: 20 जुलाई 1975 को जन्मे निशांत कुमार नीतीश कुमार और मंजू सिन्हा के इकलौते बेटे हैं। 2007 में उनकी मां का निधन हो गया और तब से निशांत ने पटना में काफी हद तक निजी जीवन व्यतीत किया। भारत में कई राजनीतिक उत्तराधिकारियों के विपरीत, वह शायद ही कभी सार्वजनिक कार्यक्रमों में दिखाई देते थे और वर्षों तक राजनीतिक जिम्मेदारियों से बचते रहे। उन्होंने पटना के सेंट करेन और मसूरी के मानव भारती इंटरनेशनल स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त की, फिर बीआईटी मेसरा, रांची से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में स्नातक की उपाधि प्राप्त की। वह अविवाहित हैं, उनकी कोई संतान नहीं है और उन्होंने दशकों तक खुद को लगभग पूरी तरह से सार्वजनिक रडार से दूर रखा। 2017 में, उन्होंने कहा कि वह राजनीति से कोई लेना-देना नहीं चाहते: लंबे समय तक निशांत ने दावा किया था कि उनका राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं है. 2017 में उन्होंने साफ तौर पर कहा था, “मुझे न तो राजनीति में रुचि है और न ही इस क्षेत्र के बारे में कोई जानकारी है. मेरा पहला प्यार अध्यात्म है और फिलहाल मैं अध्यात्म की राह पर आगे बढ़ रहा हूं.” हाल ही में पिछले साल की तरह, उन्हें पार्टी का टिकट नहीं दिया गया था और उनसे सक्रिय राजनीति में प्रवेश की उम्मीद नहीं की गई थी। जेडीयू के अधिकांश अंदरूनी सूत्रों ने निजी तौर पर मान लिया था कि वह स्थायी रूप से किनारे पर रहेंगे। फिर उनके पिता ने छोड़ने का फैसला किया और सब कुछ बदल गया: मार्च 2026 में नीतीश कुमार द्वारा मुख्यमंत्री पद से अपने लंबित इस्तीफे और राज्यसभा चुनाव लड़ने के इरादे की घोषणा के बाद, उनके बेटे निशांत जद (यू) में शामिल हो गए – एक कदम जिसे व्यापक रूप से नीतीश की वंशवाद विरोधी लंबे समय से चली आ रही नीति से प्रस्थान के रूप में देखा जाता है। राजनीति में उनका आधिकारिक प्रवेश 7 मार्च, 2026 को हुआ। उनका लॉन्च कार्यक्रम वाल्मिकी नगर से “सद्भाव यात्रा” था – वही शुरुआती बिंदु जो उनके पिता ने मुख्यमंत्री के रूप में अपने लगभग दो दशक के कार्यकाल के दौरान कई यात्राओं के लिए चुना था। प्रतीकवाद अचूक था. दो महीने बाद, वह कैबिनेट मंत्री बने: निशांत कुमार को 7 मई, 2026 को एक भव्य समारोह में बिहार कैबिनेट में शामिल किया गया, जिसमें पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह शामिल हुए। उन्हें स्वास्थ्य मंत्रालय सौंपा गया – जो बिहार के सबसे महत्वपूर्ण विभागों में से एक है, जो 130 मिलियन से अधिक लोगों के लिए स्वास्थ्य देखभाल की देखरेख करता है। वह ठीक 61 दिनों तक पार्टी के सदस्य रहे। फिर, 48 घंटों के भीतर, वीडियो प्रसारित होने लगे – और सवाल शुरू हो गए। ‘1925’ भाषण और गुरुद्वारा क्लिप्स: वायरल सामग्री लहरों में आई। शपथ लेने के तुरंत बाद एनडीटीवी से बात करते हुए, निशांत कुमार ने जेडीयू को “1925 के बिहार चुनाव में 200 सीटें” जिताने के लिए बिहार के मतदाताओं को धन्यवाद दिया – यह तारीख भारत की आजादी, जेडीयू के अस्तित्व और आधुनिक लोकतंत्र से भी पहले की है। कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने तुरंत क्लिप शेयर किया. फिर गुरुद्वारे के वीडियो आए. फिर शपथ ग्रहण का फुटेज. मीम्स से भरा सोशल मीडिया. टिप्पणियाँ “पुनर्वास से मंत्रालय तक” से लेकर “जब आपके पिता आपके लिए आपका करियर तय करते हैं” से लेकर “बिहार कभी भी एक राज्य के रूप में विकसित नहीं हो पाएगा” तक शामिल थीं। सबसे बड़ा सवाल जिसका जवाब कोई नहीं देना चाहता: मीम्स के पीछे एक तीखा राजनीतिक सवाल है. जैसा कि एक व्यापक रूप से साझा की गई पोस्ट में कहा गया है: “उनके पास शासन में कोई बड़ा राजनीतिक अनुभव नहीं है। सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधारों में कोई दृश्य रिकॉर्ड नहीं है। बड़ी प्रणालियों को संभालने की कोई सिद्ध प्रशासनिक पृष्ठभूमि नहीं है। फिर भी बिहार के सबसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों में से एक उनसे जुड़ा हुआ है क्योंकि वह नीतीश कुमार के बेटे हैं। यह वही बिहार है जहां सरकारी अस्पतालों में भीड़ रहती है और कई मरीज़ अभी भी उचित इलाज के लिए राज्य के बाहर जाते हैं।” राजद के एक प्रवक्ता ने कहा, “जिन नेताओं ने हमें दशकों तक जंगल राज और भाई-भतीजावाद पर व्याख्यान दिया, उन्होंने अब अपने राजनीतिक भविष्य को सुरक्षित करने के लिए उसी परिवारवाद को अपना लिया है।” बिहार के लिए वीडियो सिर्फ मनोरंजन नहीं है. वे इस बारे में सवाल हैं कि सत्ता किसे मिलती है – और क्यों।
लू में ज्यादा बाहर न निकलें, आंखों की इन 3 समस्याओं का हो जाएंगे शिकार, डॉक्टर से समझें खतरे

Last Updated:May 18, 2026, 14:04 IST Eye Problems in Summer Heat: तेज गर्मी और लू का असर आंखों पर भी बुरी तरह पड़ता है. अगर आप भीषण गर्मी में आंखों को खयाल नहीं रखेंगे, तो इससे ड्राई आई, एलर्जी और इंफेक्शन जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. डॉक्टर्स की मानें तो आंखों को धूप से बचाना जरूरी होता है. इसके लिए घर से निकलते वक्त सनग्लासेस जरूर इस्तेमाल करने चाहिए. गर्मी में आंखों को हेल्दी रखने के लिए धूप में बाहर जाने से बचें. How Summer Heat Affect Eyes: देश के कई हिस्सों में इस वक्त भीषण गर्मी का प्रकोप देखने को मिल रहा है. दिल्ली-एनसीआर में पारा 45 के पार हो गया है. मौसम विभाग की मानें तो अगले एक सप्ताह तक इसी तरह आसमान से आग बरसेगी. गर्मी में तेज धूप और गर्म हवाएं आंखों को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं. लू के दौरान लंबे समय तक बाहर रहने से आंखों में ड्राइनेस, जलन, लालिमा और संक्रमण जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगती हैं. डॉक्टर्स के अनुसार तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट किरणें और गर्म हवाएं आंखों की संवेदनशील परत को प्रभावित करती हैं. नई दिल्ली के विजन आई सेंटर के मेडिकल डायरेक्टर और रिफ्रेक्टिव सर्जन डॉ. तुषार ग्रोवर ने News18 को बताया गर्मी और लू की वजह से आंखों की नमी तेजी से कम होने लगती है. जब आंखों में पर्याप्त आंसू नहीं बनते या जल्दी सूख जाते हैं, तो ड्राई आई सिंड्रोम की समस्या हो सकती है. लंबे समय तक धूप में रहना, कम पानी पीना, लगातार स्क्रीन देखना और AC में ज्यादा समय बिताना इस समस्या को बढ़ा सकता है. इस कंडीशन में लोगों को आंखों में जलन, चुभन, खुजली, धुंधला दिखना और लालिमा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार आंखों से बार-बार पानी भी आने लगता है. अगर समय पर इसका इलाज न किया जाए, तो आंखों में इंफेक्शन और कॉर्निया से जुड़ी परेशानियां भी हो सकती हैं. डॉक्टर ग्रोवर के मुताबिक गर्मियों में धूल, पसीना और प्रदूषण बढ़ने से आंखों में एलर्जी और संक्रमण का खतरा काफी ज्यादा हो जाता है. तेज गर्मी और नमी में बैक्टीरिया और वायरस तेजी से फैलते हैं, जिससे कंजंक्टिवाइटिस यानी आई फ्लू जैसी समस्या हो सकती है. आई फ्लू होने पर लोगों को आंखों में रेडनेस, खुजली, सूजन, पानी आना और चिपचिपा पदार्थ निकलने जैसी परेशानियां देखने को मिल सकती हैं. कुछ लोगों को तेज रोशनी में आंखें खोलने में भी परेशानी होती है. अगर गंदे हाथों से आंखों को बार-बार छुआ जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है. एक्सपर्ट ने बताया कि तेज धूप में मौजूद अल्ट्रावायलेट यानी UV किरणें आंखों के लिए काफी नुकसानदायक मानी जाती हैं. बिना सनग्लासेस के लंबे समय तक धूप में रहने से आंखों की बाहरी सतह प्रभावित हो सकती है. लगातार UV एक्सपोजर से भविष्य में मोतियाबिंद और रेटिना से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ सकता है. धूप में ज्यादा काम करने वाले लोग, बाइक चलाने वाले, बच्चे और बुजुर्ग इस खतरे की चपेट में जल्दी आ सकते हैं. इसलिए आंखों को सीधी धूप से बचाना बेहद जरूरी है. अब सवाल है कि गर्मी में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए क्या करें? डॉक्टर ग्रोवर ने बताया कि गर्मियों में आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बाहर निकलते समय हमेशा UV प्रोटेक्शन वाले सनग्लासेस पहनें. दोपहर 12 बजे से 4 बजे के बीच तेज धूप में बाहर निकलने से बचें. शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए पर्याप्त पानी पिएं और आंखों को बार-बार हाथ लगाने से बचें. बाहर से आने के बाद आंखों को साफ पानी से धोना फायदेमंद हो सकता है. लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप स्क्रीन देखने से भी आंखों पर दबाव बढ़ सकता है, इसलिए बीच-बीच में आंखों को आराम देना जरूरी है. अगर आंखों में तेज दर्द, लगातार रेडनेस, सूजन, धुंधला दिखना या रोशनी से ज्यादा परेशानी हो रही हो, तो तुरंत आंखों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
Cherry benefits I चेरी खाने के फायदे

Last Updated:May 18, 2026, 14:00 IST चेरी सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ अच्छी नींद में भी मदद करते हैं. नियमित रूप से सीमित मात्रा में चेरी का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों से बचाव में सहायक माना जाता है. सुल्तानपुर. फलों का महत्व प्राचीन समय से ही चला आ रहा है, उन्हीं में एक फल है चेरी. जो स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर फल माना जाता है. इसका रंग काफी आकर्षक होता है और मीठा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, वहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह काफी लाभकारी होती है. चेरी में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस, में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन-सी, विटामिन-ए, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ त्वचा की चमक और पाचन बेहतर बनाता है. इन बीमारियों में है रामबाण फिजीशियन डॉ. एस बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि चेरी का सेवन हृदय रोग के खतरे को कम करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंथोसाइनिन और फ्लेवोनोइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर दिल को स्वस्थ रखते हैं. इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है. चेरी खाने से ब्लड शुगर लेवल भी संतुलित रहता है, इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. इसमें मिलती है राहतचेरी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह नींद से जुड़ी समस्याओं में राहत देती है. दरअसल, चेरी में मेलाटोनिन पाया जाता है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसे रात के खाने के बाद और सोने से कुछ समय पहले सेवन करने की सलाह देते हैं.इसके अलावा चेरी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाते हैं. ऐसे करें सेवन अगर बात करें सेवन के तरीके की, तो चेरी को सुबह खाली पेट खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसे सीधे फल के रूप में खाया जा सकता है या फिर सलाद, स्मूदी और जूस में भी शामिल किया जा सकता है. दिन में 8 से 10 चेरी खाना पर्याप्त होता है.हालांकि, जिन लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh
Companies are building their image with outsiders

बीजिंग14 मिनट पहले कॉपी लिंक चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।- प्रतीकात्मक फोटो चीन के कॉरपोरेट जगत में ‘वाइट मंकी’ नाम का एक गैर-कानूनी ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसके तहत कंपनियां अपने घरेलू प्रोडक्ट्स और ब्रांड को इंटरनेशनल दिखाने के लिए विदेशियों को मोटी रकम देकर हायर कर रही हैं। कई मामलों में बिना किसी अनुभव के सिर्फ ‘गैर-चीनी’ चेहरे के आधार पर इन्हें नकली डॉक्टर, वैज्ञानिक, वकील, शेफ और यहां तक कि फर्जी विदेशी सीईओ तक बना दिया जाता है। भर्तियां वीचैट के गुप्त ग्रुप्स के जरिए होती हैं। कई कंपनियां गंभीर प्रोफेशनल मीटिंग्स में भी इनका इस्तेमाल करती हैं। पियर्स को एक बड़ी डील के दौरान पुडोंग के हाई-टेक पार्क में ‘इंटरनेशनल वकील’ बनाकर मीटिंग में बैठाया गया। वहां उसने सिर्फ नोट्स लेने का नाटक किया। इसी तरह रूसी नागरिक एंज़ो को महीनों तक एक ऑटोमोबाइल कंपनी का फर्जी विदेशी सीईओ बनाकर अलग-अलग शहरों में घुमाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां जर्मन या अमेरिकी नागरिकों के मुकाबले रूसी और यूरोपीय लोगों को 2 से 3 गुना कम वेतन देती हैं। विदेशी चेहरों का क्रेज 2008 के फूड स्कैंडल के बाद बढ़ा बताया गया कि 2008 में मिलावटी दूध और फूड स्कैंडल के बाद घरेलू सामानों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ। सानलु कंपनी के शिशु मिल्क पाउडर में मेलामाइन मिलने से लाखों बच्चे बीमार हुए और 6 की मौत हुई थी। इसके बाद विदेशी चेहरों वाले विज्ञापनों को लोग क्वालिटी और सेफ्टी की गारंटी मानने लगे। दुनियाभर के चेहरों से चीनी प्रोडक्ट्स को मिली प्रतिष्ठा मैनचेस्टर चाइना इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर श्याओबिंग वांग के अनुसार, लोग चीनी स्टार की पसंद को सिर्फ स्थानीय मानते हैं। लेकिन जब साल 2025 में दिग्गज पूर्व फुटबॉलर डेविड बेखम ने चीनी खिलौना ‘लाबुबु’ के साथ फोटो पोस्ट की, तो वह वायरल हो गई। बेखम जैसे ग्लोबल चेहरे चीनी प्रोडक्ट्स को दुनिया में असली वैधता और प्रतिष्ठा दिलाते हैं। विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स अवैध चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। कानून के मुताबिक स्टूडेंट वीसा पर ऐसे काम करने पर करीब 70 हजार से 2 लाख रुपए जुर्माना, 15 दिन तक की जेल और डिपोर्टेशन हो सकता है। ऐसे ही मामले में युगांडा के एक छात्र को अवैध रूप से पढ़ाने पर भारी जुर्माना और डिपोर्ट झेलना पड़ा था। फर्जी ‘प्रोफेसर’ का खुलासा, जांच शुरू हाल ही में लाइव-स्ट्रीमिंग इन्फ्लुएंसर ‘श्यांगयी’ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। उसने विटामिन्स के प्रचार के लिए विदेशी मॉडल ‘लिंडा’ को सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बताया था। जांच में खुलासा हुआ कि उसने महज 71 हजार रुपए लेकर स्क्रिप्ट पढ़ी थी। अथॉरिटी मामले की जांच कर रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
गर्मी में अमृत है मऊ का तरबूज! मिठास ऐसी कि विदेश तक है डिमांड, स्वाद के साथ मिलेगी जबरदस्त ठंडक

Last Updated:May 18, 2026, 13:42 IST गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद माना जाता है, लेकिन मऊ का देसी तरबूज अपनी खास मिठास और स्वाद की वजह से अलग पहचान बना चुका है. नदी किनारे उगाया जाने वाला यह तरबूज न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पानी की कमी दूर करने और ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. यही वजह है कि इसकी मांग उत्तर प्रदेश से लेकर बड़े शहरों और विदेशों तक बनी रहती है. गर्मियों का सीजन आते ही लोग तरबूज और खरबूजा खाना खूब पसंद करते हैं, लेकिन इन दिनों मऊ का तरबूज लोगों के बीच खास पहचान बना रहा है. माना जाता है कि यहां का तरबूज खाते ही शरीर को ठंडक महसूस होती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि लोग इस तरबूज को बड़े चाव से खाते हैं. इसकी मिठास और स्वाद लोगों को इतना पसंद आता है कि सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों में जाने वाले लोग भी इसे अपने साथ लेकर जाते हैं. इस खास तरबूज की खेती के लिए जनवरी से फरवरी के बीच बीजों की बुवाई की जाती है. इसके बाद फसल धीरे-धीरे तैयार होती है और अप्रैल के अंतिम दिनों से लेकर मई की शुरुआत में बाजार में आना शुरू हो जाती है. इस तरबूज को तैयार होने में काफी समय और मेहनत लगती है, इसलिए किसान इसकी खेती में विशेष ध्यान रखते हैं. तरबूज की अच्छी पैदावार और मिठास के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. ऐसी मिट्टी में उगाए गए तरबूज में ज्यादा मिठास आती है, जिसकी वजह से इसका स्वाद लोगों को बेहद पसंद आता है. मऊ में उगाए जाने वाले इस खास तरबूज की मांग सिर्फ उत्तर प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे बड़े शहरों तक भी इसकी सप्लाई की जाती है. इतना ही नहीं, यहां आने वाले कई लोग इस तरबूज को अपने साथ विदेश तक लेकर जाते हैं. लोगों का मानना है कि मऊ के तरबूज जैसी मिठास प्रदेश में दूसरी जगह आसानी से नहीं मिलती. यही वजह है कि इसकी डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है. खास बात यह भी है कि खेतों से निकलने के बाद यह तरबूज कई दिनों तक खराब नहीं होता, इसलिए लोग इसे आसानी से लंबी दूरी तक लेकर जा सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अगर मऊ में मिलने वाले तरबूज की कीमत की बात करें, तो यह खेतों से काफी सस्ते दामों में आसानी से मिल जाता है. जहां बाजारों में इसकी कीमत ज्यादा होती है, वहीं सीधे खेतों से खरीदने पर यह करीब 20 रुपये प्रति किलो तक मिल जाता है. यही तरबूज बाद में बाजारों में अधिक दामों पर बेचा जाता है. मऊ में बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती होने की वजह से यहां इसकी कीमत अपेक्षाकृत कम रहती है. यही कारण है कि लोग ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य वाहनों से यहां पहुंचकर बड़ी मात्रा में तरबूज खरीदकर दूसरे जिलों और शहरों तक ले जाते हैं. तरबूज बाहर से हरे रंग का दिखाई देता है, लेकिन काटने पर अंदर से इसका गूदा गहरे लाल रंग का होता है. यही लाल रंग वाला तरबूज अपने बेहद मीठे स्वाद के लिए जाना जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाना पसंद करते हैं. तरबूज खाने का सबसे अच्छा तरीका यह माना जाता है कि बाजार से लाने के बाद इसे कुछ देर तक ठंडे पानी में रखा जाए. इसके बाद इसे छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर छिलके अलग कर दिए जाएं और फिर इसका सेवन किया जाए. इसकी मिठास शरीर को अंदर से ताजगी देने का काम करती है और यह शरीर में खून बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि गर्मी के मौसम में तरबूज लोगों की पहली पसंद बना रहता है. अगर मऊ जनपद के सबसे फेमस तरबूज की बात करें, तो भातकोल बाजार का तरबूज सबसे ज्यादा मशहूर माना जाता है. यहां नदी किनारे बड़े पैमाने पर तरबूज की खेती की जाती है, जिससे फल में खास मिठास आती है. किसान खेतों से ताजा तरबूज सीधे बाजार में लेकर आते हैं, इसलिए यहां मिलने वाला तरबूज पूरी तरह ताजा और स्वादिष्ट माना जाता है. लोगों का कहना है कि भातकोल बाजार के तरबूज जैसी मिठास पूरे मऊ जिले में कहीं और नहीं मिलती. यही वजह है कि इस बाजार के तरबूज की मांग दूर-दूर तक रहती है और लोग खास तौर पर यहां से तरबूज खरीदने पहुंचते हैं. गर्मी के मौसम में तरबूज को शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. यही वजह है कि लोग गर्मियों में इसका सेवन सबसे ज्यादा करते हैं. तरबूज शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ ताजगी बनाए रखने में भी मदद करता है. मऊ में खास तौर पर नदी किनारे तरबूज की खेती की जाती है, जिससे इसमें प्राकृतिक मिठास अधिक आती है. यही खास स्वाद और मिठास लोगों को बेहद पसंद आती है, जिसके कारण यहां का तरबूज दूर-दूर तक भेजा जाता है और इसकी मांग लगातार बनी रहती है. अगर तरबूज को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर ऊपर से हल्का काला नमक छिड़क कर खाया जाए, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. गर्मियों में लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं, क्योंकि यह शरीर को ठंडक और ताजगी देने का काम करता है. तरबूज में पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, इसलिए इसे शरीर में पानी की कमी दूर करने और खून बढ़ाने के लिए फायदेमंद माना जाता है. खास बात यह है कि मऊ जनपद का तरबूज अपनी जबरदस्त मिठास और देसी स्वाद की वजह से काफी मशहूर है. यही कारण है कि इसकी मांग सिर्फ आसपास के इलाकों में ही नहीं, बल्कि दूर-दराज और विदेशों तक भी बनी रहती है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Mushfiqur-Liton Century Stand | Bangladesh Leads Pakistan by 300 in 2nd Test

सिलहट1 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में मजबूत पकड़ बना ली है। सिलहट इंटरनेशनल स्टेडियम में सोमवार को मैच का तीसरा दिन है। खबर लिखे जाने तक टीम ने दूसरी पारी में 5 विकेट पर 255 रन बना लिए हैं। उसकी बढ़त 301 रन हो चुकी है। मुशफिकुर रहीम फिफ्टी बनाकर खेल रहे हैं। मेहदी हसन मिराज उनका साथ दे रहे हैं। रहीम ने लिटन दास के साथ 5वें विकेट के लिए 123 रन की साझेदारी की। लिटन ने 69 रन बनाए। 110/3 के स्कोर से दिन की शुरुआत करने वाली बांग्लादेशी टीम ने रविवार को पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑलआउट कर दिया था। टीम ने पहली पारी में 278 रन बनाए थे। हसन ने तोड़ी शतकीय साझेदारी, लिटन आउट पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली ने लंच के बाद 62वें ओवर की चौथी गेंद पर शतकीय साझेदारी तोड़ी। उन्होंने लिटन दास को डीप थर्ड मैन पर सऊद शकील के हाथों कैच कराया। लिटन ऑफ स्टंप के बाहर की शॉर्ट बॉल पर कट करना चाहते थे, लेकिन थर्ड मैन पर खड़े शकील को कैच दे बैठे। बांग्लादेशी टीम ने लंच ब्रेक तक दूसरी पारी में 53 ओवर में 4 विकेट पर 203 रन बनाए थे। मुशफिकुर रहीम 39 और लिटन दास 48 रन पर नाबाद थे। शांतो महज 2 रन ही जोड़ सके बांग्लादेश ने दिन के पहले घंटे में नजमुल हसन शांतो का विकेट गंवा दिया था। शांतो अपनी पारी में महज 2 रन ही जोड़ सके। उन्हें खुर्रम शहजाद ने LBW किया। खुर्रम ने चौथे स्टंप लाइन पर लेंथ बॉल डाली, जो तेजी से अंदर आई और नीचे रही। शांतो पहले से मिडविकेट की दिशा में शॉट खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन गेंद सीधे उनके फ्रंट पैड पर लगी। पाकिस्तान ने अपील की और अंपायर ने उंगली उठा दी। शांतो ने रिव्यू लिया, लेकिन बॉल ट्रैकिंग में गेंद लेग स्टंप पर लगती दिखी। शांतो 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। एक दिन पहले वे 13 रन पर नाबाद लौटे थे। शांतो का विकेट सेलिब्रेट करते खुर्रम शहजाद। ————————————————— सिलहट टेस्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. दूसरा दिन- पाकिस्तान पहली पारी में 232 पर ऑलआउट, बांग्लादेश 110/3 बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में 156 रन की बढ़त बना ली है। सिलहट में मेजबान टीम ने रविवार को स्टंप्स तक दूसरी पारी में 3 विकेट पर 110 रन बना डाले हैं। महमूदुल हसन ने 52 रन की पारी खेली। इससे पहले पाकिस्तान पहली पारी को 232 रन पर ऑलआउट हो गया और मेजबान टीम को 46 रन की बढ़त मिली। पढ़ें पूरी खबर 2. पहला दिन- हसन अली के सिर में चोट, स्ट्रेचर पर बाहर गए; ठीक होने पर दोबारा गेंदबाजी की पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली को बांग्लादेश के खिलाफ आज से शुरू हुए दूसरे टेस्ट के दौरान सिर पर चोट गई। इसके बाद उन्हें स्ट्रेचर से मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। हालांकि, पाकिस्तान टीम के लिए राहत की बात यह रही कि वे कुछ समय बाद ही मैदान पर लौट आए और दोबारा गेंदबाजी शुरू कर दी। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
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सिलहट18 मिनट पहले कॉपी लिंक बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में मजबूत पकड़ बना ली है। सिलहट इंटरनेशनल स्टेडियम में सोमवार को मैच का तीसरा दिन है। खबर लिखे जाने तक टीम ने दूसरी पारी में 5 विकेट पर 255 रन बना लिए हैं। उसकी बढ़त 301 रन हो चुकी है। मुशफिकुर रहीम फिफ्टी बनाकर खेल रहे हैं। मेहदी हसन मिराज उनका साथ दे रहे हैं। रहीम ने लिटन दास के साथ 5वें विकेट के लिए 123 रन की साझेदारी की। लिटन ने 69 रन बनाए। 110/3 के स्कोर से दिन की शुरुआत करने वाली बांग्लादेशी टीम ने रविवार को पाकिस्तान को पहली पारी में 232 रन पर ऑलआउट कर दिया था। टीम ने पहली पारी में 278 रन बनाए थे। हसन ने तोड़ी शतकीय साझेदारी, लिटन आउट पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली ने लंच के बाद 62वें ओवर की चौथी गेंद पर शतकीय साझेदारी तोड़ी। उन्होंने लिटन दास को डीप थर्ड मैन पर सऊद शकील के हाथों कैच कराया। लिटन ऑफ स्टंप के बाहर की शॉर्ट बॉल पर कट करना चाहते थे, लेकिन थर्ड मैन पर खड़े शकील को कैच दे बैठे। बांग्लादेशी टीम ने लंच ब्रेक तक दूसरी पारी में 53 ओवर में 4 विकेट पर 203 रन बनाए थे। मुशफिकुर रहीम 39 और लिटन दास 48 रन पर नाबाद थे। शांतो महज 2 रन ही जोड़ सके बांग्लादेश ने दिन के पहले घंटे में नजमुल हसन शांतो का विकेट गंवा दिया था। शांतो अपनी पारी में महज 2 रन ही जोड़ सके। उन्हें खुर्रम शहजाद ने LBW किया। खुर्रम ने चौथे स्टंप लाइन पर लेंथ बॉल डाली, जो तेजी से अंदर आई और नीचे रही। शांतो पहले से मिडविकेट की दिशा में शॉट खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन गेंद सीधे उनके फ्रंट पैड पर लगी। पाकिस्तान ने अपील की और अंपायर ने उंगली उठा दी। शांतो ने रिव्यू लिया, लेकिन बॉल ट्रैकिंग में गेंद लेग स्टंप पर लगती दिखी। शांतो 15 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। एक दिन पहले वे 13 रन पर नाबाद लौटे थे। शांतो का विकेट सेलिब्रेट करते खुर्रम शहजाद। ————————————————— सिलहट टेस्ट से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए… 1. दूसरा दिन- पाकिस्तान पहली पारी में 232 पर ऑलआउट, बांग्लादेश 110/3 बांग्लादेश ने पाकिस्तान के खिलाफ दूसरे टेस्ट में 156 रन की बढ़त बना ली है। सिलहट में मेजबान टीम ने रविवार को स्टंप्स तक दूसरी पारी में 3 विकेट पर 110 रन बना डाले हैं। महमूदुल हसन ने 52 रन की पारी खेली। इससे पहले पाकिस्तान पहली पारी को 232 रन पर ऑलआउट हो गया और मेजबान टीम को 46 रन की बढ़त मिली। पढ़ें पूरी खबर 2. पहला दिन- हसन अली के सिर में चोट, स्ट्रेचर पर बाहर गए; ठीक होने पर दोबारा गेंदबाजी की पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हसन अली को बांग्लादेश के खिलाफ आज से शुरू हुए दूसरे टेस्ट के दौरान सिर पर चोट गई। इसके बाद उन्हें स्ट्रेचर से मैदान से बाहर ले जाना पड़ा। हालांकि, पाकिस्तान टीम के लिए राहत की बात यह रही कि वे कुछ समय बाद ही मैदान पर लौट आए और दोबारा गेंदबाजी शुरू कर दी। पढ़ें पूरी खबर दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…








