Thursday, 21 May 2026 | 07:23 AM

Trending :

EXCLUSIVE

Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy

Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy

Hindi News National Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy | BJP Targets Rahul Gandhi नई दिल्ली5 मिनट पहले कॉपी लिंक 10 मई को शपथ के दौरान राहुल गांधी के साथ एक्टर विजय। TVK सरकार को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने बैन किए गए संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के फाउंडर वी प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इस पर कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि वो सत्ता में शामिल हैं। कांग्रेस अब तमिलनाडु में विजय की सरकार को सपोर्ट कर रही है। प्रभाकरन को 1991 में राजीव गांधी की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया था। एक मौजूदा प्रधानमंत्री की हाई-प्रोफाइल हत्या में उसकी भूमिका के लिए LTTE को भारत में बैन कर दिया गया था। विजय ने मुलिवाइक्कल को याद किया प्रभाकरन को 18 मई, 2009 को श्रीलंका के मुलिवाइक्कल में श्रीलंका की सेना ने गोली मार दी थी। उनकी डेथ एनिवर्सरी पर विजय ने कल उस जगह का ज़िक्र किया और X पर लिखा, “हम मुलिवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में रखेंगे! हम समुद्र के पार रहने वाले अपने तमिल रिश्तेदारों के अधिकारों के लिए हमेशा एकता में खड़े रहेंगे!” भाजपा बोली- कांग्रेस सत्ता के लिए चुप भाजपा के मीडिया सेल चीफ अमित मालवीय ने विजय के प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने पर राहुल गांधी को याद दिलाया कि उनके पिता की हत्या में LTTE का रोल था। उन्होंने लिखा- तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री ने LTTE चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी है, जिसके संगठन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की थी। राहुल गांधी को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस सत्ता में शामिल है। DMK भी LTTE का समर्थक था फिर भी कांग्रेस उसके साथ गठबंधन में रही। पहले भी प्रभाकरन का जिक्र कर चुके हैं विजय विजय इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान ईलम तमिलों और प्रभाकरन का जिक्र कर चुके हैं। पिछले साल नागापट्टिनम में एक सभा में उन्होंने कहा था कि श्रीलंका और दुनियाभर में रहने वाले तमिल ऐसे नेता को खोने के दुख में हैं, जिसने उन्हें मां जैसा प्यार दिया। उन्होंने कहा था कि ईलम तमिलों के लिए आवाज उठाना उनका कर्तव्य है। तमिलनाडु की मुख्यधारा की पार्टियां आमतौर पर खुले तौर पर प्रभाकरन के समर्थन से बचती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का यह रुख राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। विजय की सरकार को विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) का समर्थन हासिल है। VCK लंबे समय से श्रीलंकाई तमिलों और LTTE के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी मानी जाती रही है। मुलिवाइक्कल क्यों अहम है दुनियाभर में लंकाई तमिल आबादी और भारत में तमिलों का एक हिस्सा 18 मई को मुलिवाइकल रिमेंबरेंस डे (या तमिल जेनोसाइड रिमेंबरेंस डे) के तौर पर मनाता है। यह उन हजारों तमिल नागरिकों को याद करता है जो 2009 में श्रीलंकाई सिविल वॉर के दौरान मुलिवाइकल के तटीय गांव में हमले के दौरान मारे गए थे। करीब 30 साल तक चला श्रीलंका का गृहयुद्ध तमिलों के लिए अलग देश की मांग से शुरू हुआ था। बाद में यह श्रीलंकाई सेना और LTTE के बीच बड़े सशस्त्र संघर्ष में बदल गया। 2009 में मुलिवाइक्कल में हुए अंतिम सैन्य अभियान के साथ युद्ध खत्म हुआ। 18 मई 2009 को LTTE चीफ प्रभाकरन की मौत के साथ ही श्रीलंका सरकार ने LTTE के खात्मे की घोषणा की थी। 10 मई को विजय ने CM बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं थीं। पार्टी चीफ सी जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार गैर-द्रविड़ दल (DMK या AIADMK) का मुख्यमंत्री बना है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… विजय की शपथ में राष्ट्रगान–वंदेमातरम पर विवाद, DMK बोली- पहले तमिल गीत बजाने की परंपरा, इसे तीसरे नंबर पर धकेला तमिलनाडु में सीएम विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाजथु’ (तमिल राज्य गीत) से पहले ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ बजाने पर डीएमके ने इस पर आपत्ति जताई। डीएमके का कहना है कि राज्य के सम्मान के लिए तमिल राज्य गीत सबसे पहले बजाया जाना चाहिए था, लेकिन उसे तीसरे नंबर पर धकेल दिया गया। ये परंपरा के खिलाफ है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

मुल्लीवैक्कल दिवस पर विजय ने लिट्टे प्रमुख को याद किया, लंकाई तमिलों के साथ एकजुटता की शपथ ली | स्पार्क्स पंक्ति

मुल्लीवैक्कल दिवस पर विजय ने लिट्टे प्रमुख को याद किया, लंकाई तमिलों के साथ एकजुटता की शपथ ली | स्पार्क्स पंक्ति

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और टीवीके प्रमुख विजय ने श्रीलंका में मुल्लीवैक्कल नामक स्थान को याद करते हुए श्रीलंकाई तमिलों के साथ एकजुटता व्यक्त की, जहां लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के संस्थापक और दुनिया के सबसे क्रूर गुरिल्ला नेताओं में से एक को 18 मई, 2009 को श्रीलंकाई सेना ने मार डाला था। समुद्र पार रहने वाले हमारे तमिल रिश्तेदारों के अधिकारों के लिए एकजुटता से खड़े हों!” -right-standNews18 मोबाइल ऐप – https://onelink.to/desc-youtube आखरी अपडेट: 19 मई, 2026, 21:12 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्रेकिंग इंडिया न्यूज(टी)श्रीलंका गृहयुद्ध(टी)तमिलनाडु राजनीति

Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy

Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy

Hindi News National Tamil Nadu CM Vijay Prabhakaran Tribute Controversy | BJP Targets Rahul Gandhi नई दिल्ली39 मिनट पहले कॉपी लिंक 10 मई को शपथ के दौरान राहुल गांधी के साथ एक्टर विजय। TVK सरकार को कांग्रेस ने समर्थन दिया है। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने बैन किए गए संगठन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम (LTTE) के फाउंडर वी प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने पर विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा ने इस पर कहा कि कांग्रेस और विपक्ष के नेता राहुल गांधी को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि वो सत्ता में शामिल हैं। कांग्रेस अब तमिलनाडु में विजय की सरकार को सपोर्ट कर रही है। प्रभाकरन को 1991 में राजीव गांधी की हत्या का मुख्य आरोपी बनाया गया था। एक मौजूदा प्रधानमंत्री की हाई-प्रोफाइल हत्या में उसकी भूमिका के लिए LTTE को भारत में बैन कर दिया गया था। विजय ने मुलिवाइक्कल को याद किया प्रभाकरन को 18 मई, 2009 को श्रीलंका के मुलिवाइक्कल में श्रीलंका की सेना ने गोली मार दी थी। उनकी डेथ एनिवर्सरी पर विजय ने कल उस जगह का ज़िक्र किया और X पर लिखा, “हम मुलिवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में रखेंगे! हम समुद्र के पार रहने वाले अपने तमिल रिश्तेदारों के अधिकारों के लिए हमेशा एकता में खड़े रहेंगे!” भाजपा बोली- कांग्रेस सत्ता के लिए चुप भाजपा के मीडिया सेल चीफ अमित मालवीय ने विजय के प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देने पर राहुल गांधी को याद दिलाया कि उनके पिता की हत्या में LTTE का रोल था। उन्होंने लिखा- तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री ने LTTE चीफ वेलुपिल्लई प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी है, जिसके संगठन ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की थी। राहुल गांधी को इससे कोई दिक्कत नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस सत्ता में शामिल है। DMK भी LTTE का समर्थक था फिर भी कांग्रेस उसके साथ गठबंधन में रही। पहले भी प्रभाकरन का जिक्र कर चुके हैं विजय विजय इससे पहले भी चुनाव प्रचार के दौरान ईलम तमिलों और प्रभाकरन का जिक्र कर चुके हैं। पिछले साल नागापट्टिनम में एक सभा में उन्होंने कहा था कि श्रीलंका और दुनियाभर में रहने वाले तमिल ऐसे नेता को खोने के दुख में हैं, जिसने उन्हें मां जैसा प्यार दिया। उन्होंने कहा था कि ईलम तमिलों के लिए आवाज उठाना उनका कर्तव्य है। तमिलनाडु की मुख्यधारा की पार्टियां आमतौर पर खुले तौर पर प्रभाकरन के समर्थन से बचती रही हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री बनने के बाद विजय का यह रुख राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है। विजय की सरकार को विदुथलाई चिरुथैगल काची (VCK) का समर्थन हासिल है। VCK लंबे समय से श्रीलंकाई तमिलों और LTTE के प्रति सहानुभूति रखने वाली पार्टी मानी जाती रही है। मुलिवाइक्कल क्यों अहम है दुनियाभर में लंकाई तमिल आबादी और भारत में तमिलों का एक हिस्सा 18 मई को मुलिवाइकल रिमेंबरेंस डे (या तमिल जेनोसाइड रिमेंबरेंस डे) के तौर पर मनाता है। यह उन हजारों तमिल नागरिकों को याद करता है जो 2009 में श्रीलंकाई सिविल वॉर के दौरान मुलिवाइकल के तटीय गांव में हमले के दौरान मारे गए थे। करीब 30 साल तक चला श्रीलंका का गृहयुद्ध तमिलों के लिए अलग देश की मांग से शुरू हुआ था। बाद में यह श्रीलंकाई सेना और LTTE के बीच बड़े सशस्त्र संघर्ष में बदल गया। 2009 में मुलिवाइक्कल में हुए अंतिम सैन्य अभियान के साथ युद्ध खत्म हुआ। 18 मई 2009 को LTTE चीफ प्रभाकरन की मौत के साथ ही श्रीलंका सरकार ने LTTE के खात्मे की घोषणा की थी। 10 मई को विजय ने CM बने तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में 234 में 108 सीटें जीतीं थीं। पार्टी चीफ सी जोसेफ विजय ने 10 मई को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। तमिलनाडु में 1967 के बाद पहली बार गैर-द्रविड़ दल (DMK या AIADMK) का मुख्यमंत्री बना है। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… विजय की शपथ में राष्ट्रगान–वंदेमातरम पर विवाद, DMK बोली- पहले तमिल गीत बजाने की परंपरा, इसे तीसरे नंबर पर धकेला तमिलनाडु में सीएम विजय के शपथ ग्रहण समारोह में ‘तमिल थाई वाजथु’ (तमिल राज्य गीत) से पहले ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम’ बजाने पर डीएमके ने इस पर आपत्ति जताई। डीएमके का कहना है कि राज्य के सम्मान के लिए तमिल राज्य गीत सबसे पहले बजाया जाना चाहिए था, लेकिन उसे तीसरे नंबर पर धकेल दिया गया। ये परंपरा के खिलाफ है। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

चौलाई का साग रेसिपी: पनीर-चिकन सब हो जाएगा फेल, घर में ऐसे बनाएं चौलाई का साग; गर्मी में खाने का स्वाद होगा दोगुना

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 2 गुच्छे चौलाई का सागा, 1 टमाटर का साग, 2 टमाटर, 5-6 लहसुन की कलियां, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, 1/2 मोटा जीरा, 1/2 छोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/4 मोटा हल्दी, स्वादानुसार नमक, घी छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले चूली के दुकानदारों को अच्छे से धो लें ताकि साड़ी मिट्टी साफ हो जाए। अब इसे मोटा-मोटा काट लें। इसके बाद गैस पर एक कड़ाही रखें और इसमें थोड़ा सा तेल या घी गर्म करें। छवि: एआई अब जीरा डालो। जब जीरा चटकने लगे तो सुमधुर कोटा ओंगैज ऑरेंज होने तक भुन लें। अब अदरक, लहसुन और हरी मिर्च स्टॉइल कुछ सेकंड तक का काम। फिर कटे हुए टमाटर और चिप्स के साथ बढ़िया से भून लें। छवि: एआई जब मसाला अच्छी तरह से तैयार हो जाए, तब इसमें कटी हुई चुलाई डाल दीजिए। ऊपर से नमक, हल्दी और लाल मिर्च नमक अच्छी तरह मिला लें। अब 10-15 मिनिट तक कच्चे ही को मसाले और कच्चे मकान पर पकाया जाता है. छवि: एआई बीच-बीच में रुकें ताकि नीचे न लगें। जब सागा पूरी तरह से नग्न हो जाए, तब गैस बंद कर दीजिए। अगर आप चाहें तो इसे पिक्चर मैश भी कर सकते हैं। शरीर को ठंडक देने में मदद करता है। पाचन क्रिया बेहतर बनी रहती है। छवि: फ्रीपिक गरमा-गरम चौलाई का साग मक्के की रोटी, परांठे या सादी रोटी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगती है. ऊपर से छोटी सा सफेद मक्खन दाल, स्वाद और भी बढ़ जाएगा। आयरन की कमी दूर करने में सहायता मिलती है। छवि: एआई समुद्रतट में शरीर को शक्ति और ऊर्जा की पराकाष्ठा होती है। वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसका देसी स्वाद घर के सभी लोगों को बहुत पसंद आता है। छवि: एआई

जम गया खून का थक्का, बाहर आने लगी आंखें…कानपुर के डॉक्टरों का चमत्कार, दुनिया में पहली बार लौटी रोशनी

authorimg

Last Updated:May 19, 2026, 21:06 IST Kanpur News : महिला मरीज आंखों में खून का थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर रोग से जूझ रही थी. कानपुर के डॉक्टरों ने इसे ठीक करने के लिए दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें बाहर की तरफ निकल आई थीं. नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि कानपुर में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. इलाज सफल रहा. महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई है. कानपुर. यूपी स्थित कानपुर के एलएलआर अस्पताल में डॉक्टरों ने चमत्कार कर दिखाया है. आंखों में खून का खतरनाक थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर हालत से जूझ रही महिला मरीज की रोशनी डॉक्टरों ने लौटा दी. कहा जा रहा है कि ऐसा इलाज दुनिया में पहली बार इस तकनीक से किया गया. डॉक्टरों ने दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. इसके साथ सुप्रा कोरोडियल निडल तकनीक का सहारा लिया गया. इलाज सफल रहा और महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई. महिला मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें पूरी तरह लाल थीं और बाहर की तरफ निकल आई थीं. दर्द इतना ज्यादा था कि वह लगातार कराह रही थी. डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की तो पता चला कि आंखों के अंदर खून के थक्के जम चुके हैं और आंखों का प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है. हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह आई काम नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने मामले को गंभीर देखते हुए शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा से संपर्क किया. दिल में जमे खून के थक्कों को हटाने की प्रक्रिया समझने के बाद डॉक्टरों ने तय किया कि यही तकनीक आंखों में भी इस्तेमाल की जा सकती है. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन और सुप्रा कोरोडियल निडल की मदद से इलाज शुरू किया. कुछ ही समय में मरीज को आराम मिलने लगा. आंखों का प्रेशर सामान्य होने लगा और महिला की चली गई रोशनी लौट आई. डॉ. परवेज खान ने बताया कि विभाग में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. यह इलाज भविष्य में आंखों की गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, महिला में ‘हेमोरेजिक किसिंग कोरोइड’ बीमारी जैसे लक्षण मिले थे. इस बीमारी में आंखों के अंदर सूजन बढ़ जाती है और खून के थक्के जमने लगते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है. मरीज से नहीं लिया कोई शुल्क इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि आमतौर पर इस बीमारी को ठीक होने में करीब 20 दिन लग जाते हैं, लेकिन नई तकनीक की मदद से मरीज को काफी जल्दी राहत मिल गई. इस इलाज की सबसे बड़ी बात यह रही कि महिला मरीज से किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया गया. डॉक्टरों की इस सफलता पर मेडिकल जगत में खूब चर्चा हो रही है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

मार्केट वैल्यू के आधार पर दुनिया की टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों की लिस्ट से अब भारत की सभी कंपनियां बाहर हो गई हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत की तीन कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS शामिल थीं, लेकिन आज इनमें से एक भी कंपनी टॉप 100 लिस्ट में नहीं है। घरेलू शेयर बाजार में लगातार जारी बिकवाली और भारी गिरावट के कारण इन भारतीय कंपनियों की वैल्यू घटी है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्लोबल रैंकिंग में फिसलकर अब 106वें स्थान पर आ गई है। यह कंपनी साल 2025 की शुरुआत में 57वें और साल 2026 की शुरुआत में 73वें स्थान पर थी। वहीं देश के प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की रैंक अब 190 हो गई है, जो साल 2025 की शुरुआत में 97वें नंबर पर थी। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल भी साल 2026 की शुरुआत में 164वें स्थान पर थी, जो अब गिरकर 202वें स्थान पर आ गई है। एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट दूसरे और एपल तीसरे नंबर पर जहां एक तरफ भारतीय कंपनियां रेंकिंग में पीछे हो गई हैं, वहीं ग्लोबल मार्केट्स में दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। एनवीडिया वर्तमान में 5.33 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट 4.7 ट्रिलियन डॉलर और एपल 4.3 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन चौथे और पांचवें नंबर पर है। ICICI, SBI और IT सेक्टर की कंपनियों की रैंकिंग भी घटी बैंक और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की रैंकिंग भी तेजी से नीचे आई है। साल 2026 की शुरुआत में ICICI बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 215वें और 231वें स्थान पर थे, लेकिन अब वे गिरकर 274वें और 276वें स्थान पर पहुंच गए हैं। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS की रैंकिंग में सबसे तेज गिरावट आई है। TCS की ग्लोबल रैंक साल 2025 की शुरुआत में 84वीं और 2026 की शुरुआत में 171वीं थी, जो अब गिरकर 314वें स्थान पर पहुंच गई है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT फर्म इन्फोसिस अब 590वें स्थान पर है, जबकि साल 2025 की शुरुआत में यह 198वें और 2026 की शुरुआत में 330वें स्थान पर थी। इसके अलावा ITC भी साल 2025 की शुरुआत में 296वें और 2026 की शुरुआत में 466वें स्थान से फिसलकर अब 702वें स्थान पर आ गई है। टॉप 500 में भारत की 15 कंपनियों में से सिर्फ 9 बचीं ग्लोबल मार्केट कैप के टॉप 500 की लिस्ट में भारत की कंपनियों की संख्या साल 2025 की शुरुआत में 15 और साल 2026 की शुरुआत में 13 थी, जो अब घटकर केवल 9 रह गई है। घरेलू स्तर पर भी 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाली लिस्टेड भारतीय कंपनियों का क्लब भी अब छोटा हो गया है। साल की शुरुआत में ऐसी करीब 6 कंपनियां थीं, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गई हैं। 100 बिलियन डॉलर क्लब में सिर्फ तीन कंपनियां बचीं भारतीय बाजार में लगातार गिरावट के कारण देश के दूसरे सबसे बड़े लेंडर ICICI बैंक, सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक SBI और TCS ने यह स्टेटस खो दिया है। अब सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और भारती एयरटेल है, जिनका मार्केट कैप 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय बाजारों में इस गिरावट की शुरुआत 2024 के मीड से शुरू हो गई थी। ज्यादा वैल्युएशन, सुस्त अर्निंग्स, रुपए में कमजोरी और ट्रेड वार की चिंताओं के बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय शेयरों में गिरावट का लंबा दौर शुरू हुआ। इसके बाद अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई बाजार पर दबाव बढ़ने का एक मुख्य कारण ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज का रेटिंग घटाना भी रहा। मार्च में UBS, मॉर्गन स्टेनली और नोमुरा ने भारतीय बाजारों पर अपनी रेटिंग घटाई है। जिसके बाद अप्रैल में जेपी मॉर्गन, HSBC और गोल्डमैन सैक्स ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई है। मई के पहले सप्ताह में सीटी बैंक भी इसमें शामिल हो गई। इन सभी रिपोर्ट्स में हाई वैल्युएशन प्रीमियम, तेल के कारण अर्निंग्स रिस्क, कमजोर होता रुपया और हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी व AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर में भारत के सीमित एक्सपोजर को लेकर समान चिंताएं जताई गई हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल के दाम 90 पैसे बढ़े: 4 दिन पहले ₹3-3 बढ़ाए थे;

दुनिया की टॉप-100 कंपनियों में एक भी भारतीय नहीं:रिलायंस, एयरटेल और TCS की मार्केट वैल्यू घटी; शेयर मार्केट में लगातार गिरावट का असर

दुनिया की टॉप-100 कंपनियों में एक भी भारतीय नहीं:रिलायंस, एयरटेल और TCS की मार्केट वैल्यू घटी; शेयर मार्केट में लगातार गिरावट का असर

मार्केट वैल्यू के आधार पर दुनिया की टॉप-100 कंपनियों की लिस्ट में अब भारत की एक भी कंपनी नहीं बची है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत की तीन कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS शामिल थीं, लेकिन अब इस लिस्ट में एक भी कंपनी शामिल नहीं है। घरेलू शेयर बाजार में लगातार गिरावट के कारण इन भारतीय कंपनियों की वैल्यू घटी है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्लोबल रैंकिंग में 106वें स्थान पर आ गई है। यह कंपनी 2025 की शुरुआत में 57वें और 2026 की शुरुआत में 73वें स्थान पर आ गई थी। देश के प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की रैंकिंग अब 190 हो गई है, जो 2025 की शुरुआत में 97वें नंबर पर थी। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल भी 2026 की शुरुआत में 164वें स्थान पर थी, जो अब गिरकर 202वें स्थान पर आ गई है। एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट दूसरे और एपल तीसरे पर जहां एक तरफ भारतीय कंपनियां रेंकिंग में पीछे हो गई हैं, वहीं ग्लोबल मार्केट्स में दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। एनवीडिया वर्तमान में 5.33 ट्रिलियन डॉलर (₹513 लाख करोड़) के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट 4.7 ट्रिलियन डॉलर (₹455 लाख करोड़) और एपल 4.3 ट्रिलियन डॉलर (₹416 लाख करोड़) के मार्केट कैप के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन चौथे और पांचवें नंबर पर है। ICICI, SBI और IT सेक्टर की कंपनियों की रैंकिंग भी घटी टॉप 500 में भारत की 15 कंपनियों में सिर्फ 9 बचीं ग्लोबल मार्केट कैप के टॉप 500 की लिस्ट में भारत की कंपनियों की संख्या साल 2025 की शुरुआत में 15 और साल 2026 की शुरुआत में 13 थी, जो अब घटकर केवल 9 रह गई है। घरेलू स्तर पर भी 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाली लिस्टेड भारतीय कंपनियों का क्लब भी अब छोटा हो गया है। साल की शुरुआत में ऐसी करीब 6 कंपनियां थीं, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गई हैं। 100 बिलियन डॉलर क्लब में सिर्फ तीन कंपनियां बचीं भारतीय बाजार में लगातार गिरावट के कारण देश के दूसरे सबसे बड़े लेंडर ICICI बैंक, सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक SBI और TCS ने यह स्टेटस खो दिया है। अब सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और भारती एयरटेल है, जिनका मार्केट कैप 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय बाजारों में इस गिरावट की शुरुआत 2024 के मीड से शुरू हो गई थी। ज्यादा वैल्युएशन, सुस्त अर्निंग्स, रुपए में कमजोरी और ट्रेड वार की चिंताओं के बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय शेयरों में गिरावट का लंबा दौर शुरू हुआ। इसके बाद अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई बाजार पर दबाव बढ़ने का एक मुख्य कारण ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज का रेटिंग घटाना भी रहा। मार्च में UBS, मॉर्गन स्टेनली और नोमुरा ने भारतीय बाजारों पर अपनी रेटिंग घटाई है। जिसके बाद अप्रैल में जेपी मॉर्गन, HSBC और गोल्डमैन सैक्स ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई है। मई के पहले सप्ताह में सीटी बैंक भी इसमें शामिल हो गई। इन सभी रिपोर्ट्स में हाई वैल्युएशन प्रीमियम, तेल के कारण अर्निंग्स रिस्क, कमजोर होता रुपया और हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी व AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर में भारत के सीमित एक्सपोजर को लेकर समान चिंताएं जताई गई हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल के दाम 90 पैसे बढ़े: 4 दिन पहले ₹3-3 बढ़ाए थे; 15 राज्यों में पेट्रोल ₹100 लीटर पार, डीजल 17 में ₹90 से ऊपर देश में पेट्रोल और डीजल आज 19 मई से औसतन 90 पैसे प्रति लीटर और महंगा हो गया है। इससे पहले 15 मई, शुक्रवार को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पांच दिन के भीतर में यह दूसरी बढ़ोतरी है। देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल 100 रुपए लीटर के ऊपर बिक रहा है। वहीं 17 में डीजल का दाम 90 रुपए लीटर से ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…

शिमला मशरूम फ्राई रेसिपी: सिर्फ 15 मिनट में सूखे बा स्टाइल्स, नमकीन मिर्च फ्राई, उगलियां चाटते रह जाएंगे लोग, नोट करें रेसिपी

तस्वीर का विवरण

डिश बनाने के लिए आपको कटे हुए किशमिश, मीठे मिर्च प्याज, टमाटर, अदरक-लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, गर्म मसाला, धनिया पाउडर, कसूरी मेथी, तेल और स्वाद नमक मिलाना चाहिए। छवि: एआई सबसे पहले पकौड़े में तेल गरम करें। तेल गरम होने के बाद कटे हुए नमक और नमक का मिश्रण 2 से 3 मिनट के लिए परा सा भून लें। जब ये पतला मुलायम हो गया, तो एक प्लेट में निकाला हुआ लें। छवि: एआई मसाले में थोड़ा और तेल डालें और जीरा चटकाएं। इसके बाद एफएमसीजी कटा हुआ प्याज और इंगर-लहसुन का पेस्टस्टैंडर ऑस्टिन तक हो रहा है। फिर टमाटर और हरी मिर्च का मठ तब तक जब तक टमाटर पूरी तरह से गल न जाए। छवि: एआई जब टमाटर पकाया जाता है तो उसमें हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और नमक मिलाया जाता है। छवि: मेटा एआई मसाले से तेल अलग पर इसमें भुने हुए मशरूम होते हैं और मीठी मिर्ची दाल होती है। सभी बच्चों को अच्छी तरह से मिला लें ताकि मसाला पर महान से दोस्ती हो जाए। छवि: फ्रीपिक सब्जी को कच्चे माल पर पकाया जाता है। आख़िर में गर्म मसाला और कसूरी मेथी हाथों से प्यार करके डालें। आपका हॉटआग्राम ढेबा स्टाइल्स मधुर मिर्च फ्राई तैयार है। इसे रोटी, पराठे या नान के साथ बनाएं। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)मशरूम शिमला मिर्च फ्राई रेसिपी(टी)ढाबा स्टाइल मशरूम शिमला मिर्च रेसिपी(टी)15 मिनट की मशरूम रेसिपी(टी)मशरूम फ्राई कैसे बनाएं(टी)मशरूम शिमला मिर्च की सब्जी(टी)मशरूम शिमला मिर्च की आसान रेसिपी हिंदी में(टी)झटपट डिनर रेसिपी(टी)झटपट लंच बॉक्स रेसिपी(टी)रेस्तरां स्टाइल मशरूम फ्राई

नौतपा 2026: कब से शुरू हो रहा है नौतपा? जिसमें सूर्य देवता उगलेंगे आग, भीषण गर्मी से बचने के लिए क्या करें?

छवि अपलोड की गई

नौतपा 2026 जानिए क्या करें और क्या नहीं: मई होने का आधा हिस्सा चुकाया गया है और सूर्य देवता के तेरह अभी से पता लग गए हैं। उत्तर भारत समेत कई देशों में पारा तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। लेकिन असली परीक्षा तो अभी बाकी है। हर साल की तरह इस साल भी 9 सबसे हॉट दिन यानी ‘नौतपा’ आने वाले हैं। इस दौरान सूर्य देव मानो आकाश से उगलते हैं। तो जानिए इस साल नौतपा कब से शुरू हो रहा है, इसके पीछे क्या कारण है और इस भीषण गर्मी से खुद को कितना सुरक्षित रखें। नौतपा 2026 कब से शुरू हो रहा है? ज्योतिष गणना एवं पंचांग के अनुसार, इस वर्ष नौतपा 25 मई 2026, सोमवार से प्रारंभ हो रहा है और 2 जून 2026 तक जारी रहेगा। इतनी गर्मी क्यों है? 25 मई को सूर्य देव दोपहर लगभग 03:37 बजे रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। सूर्य इस नक्षत्र में कुल 15 दिन तक रहते हैं, लेकिन इसके शुरुआती 9 दिनों में सूर्य का ताप चरम पर होता है। इसी अवधि को ‘नौतपा’ कहा जाता है। वैज्ञानिक कारण: इस समय पृथ्वी सूर्य के अत्यंत निकट और झिलमिलाती है, जिससे सूर्य की किरणें सीधी पृथ्वी पर पड़ती हैं। इस कारण तापमान 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है और गर्म हवाएं यानी ‘हीटवेव’ चलती हैं। धार्मिक और पारंपरिक पद्धतियों के अनुसार, नौतपा में जितनी तेज़ गर्मी होती है और धरती उतनी ही तापती है, धार्मिक और पारंपरिक पद्धतियों में उतनी ही अच्छी होती है और बारिश शानदार होती है। भीषण गर्मी और लू से बचने के अचूक उपाय नौतपा के इन 9 दिनों में सेहत का विशेष महत्व रखना जरूरी है क्योंकि जरा सी इंडस्ट्री डायहाइड्रेशन या हीट स्ट्रोक यानी लू की समस्या का कारण बन सकती है। यहां कुछ बेहद आसान और असरदार उपाय दिए गए हैं: शरीर में पानी की कमी नहीं होती रिजर्व में कम से कम 3 से 4 लीटर पानी जरूर पीएं, भले ही आपको प्यास न लगी हो। रेस्तरां पानी के अलावा नींबू का पानी, नारियल का पानी, छाछ, लस्सी और आम पना का सेवन करें। ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं। खान-पान में बदलाव इन 9 दिनों में भारी, ज्यादा तेल-मसालेदार और तामसिक भोजन से पूरी तरह परहेज करें। ऐसा है शरीर का भंडार। अपने आहार में तरबूज़, खरबूजा, खेडा, ककड़ी और संतरा जैसे पानी से लेकर शानदार पेड़-पौधों को शामिल करें। दोपहर के खाने में प्याज का कूसा जरूर देखें। पेज लू से बचने के लिए रामबाण माना जाता है। प्रोडक्ट के चुनाव पर ध्यान बाहरी समय में हमेशा के लिए आलीशान रंग के, बाज़ार-ढाले और सूती यानी सूती कपड़े के कपड़े। गाजर का आटा नहीं सोया और त्वचा की सुंदरता को बढ़ाया जा सकता है। जब भी धूप में निकलें, अपने सिर और चेहरे को सूती कपड़े या गमछे से ढक कर रखें। धूप का चश्मा और छाते का इस्तेमाल जरूर करें। दोपहर की धूप से बचें दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तेज होती है, तो बहुत जरूरी नहीं है कि घर या ऑफिस से बाहर आगमन से। अगर बाहर काम ही करना पड़े, तो बीच-बीच में छांव या अनोखी जगह पर थोड़ा आराम जरूर लें। नौतपा प्रकृति का एक चक्र है, जिसमें चिंता की नहीं बल्कि सावधानी की जरूरत है। खुद को प्रमाणित सामान, घर के बुजुर्गों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें और अपने परिवार और अपने आप को सुरक्षित रखें। यह अवश्य पढ़ें: अनुपूरक कैसे चुनें: आप स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन क्या लेते हैं? इन बातों के खास नुस्खे, सेहत को हो सकता है भारी नुकसान! अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)नौतपा 2026(टी)नौतपा 2026(टी)त्वचा देखभाल युक्तियाँ(टी)गर्मियों में त्वचा की देखभाल(टी)निर्जलीकरण(टी)गर्मियों में क्या खाएं(टी)ग्रीष्मकालीन सर्वोत्तम आहार(टी)सन बर्न(टी)त्वचा टैनिंग(टी)गर्मियों के लिए स्वास्थ्य युक्तियाँ

टीएमसी की ‘पुष्पा’ विल्ट? फाल्टा पुनर्मतदान से पीछे हटने पर जहांगीर खान को लेकर विवाद | भारत समाचार

Yashasvi Jaiswal becomes joint-fourth fastest Indian to score 4000 runs in T20s. (Picture Credit: AP)

आखरी अपडेट:19 मई, 2026, 19:38 IST जहांगीर खान, जो खुद को टीएमसी का “पुष्पा” कहते थे, ने अप्रत्याशित रूप से 21 मई को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में फिर से चुनाव से अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। टीएमसी के जहांगीर खान अचानक फाल्टा में दोबारा चुनाव से हट गए। (फ़ाइल) तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान 21 मई को होने वाले फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पुन: चुनाव से अप्रत्याशित रूप से अपनी उम्मीदवारी वापस लेने के बाद पश्चिम बंगाल के बदलते राजनीतिक परिदृश्य में हलचल मच गई। कभी अभिषेक बनर्जी के गढ़ डायमंड हार्बर में टीएमसी के कद्दावर नेता रहे खान ने कहा कि पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज के वादे ने उन्हें यह निर्णय लेने के लिए प्रेरित किया। इस निर्णय ने जहांगीर खान के लिए एक अप्रत्याशित बदलाव को चिह्नित किया, जो कभी खुद को “पुष्पा” कहते थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को खुली चुनौती देते थे, इससे पहले कि भगवा पार्टी ने बंगाल चुनावों में जीत हासिल की और राज्य में ममता बनर्जी के 15 साल के शासनकाल को समाप्त कर दिया। जहांगीर खान कौन है? जबकि उन्होंने सीपीआई (एम) के साथ अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की, टीएमसी में जहांगीर खान के उदय का श्रेय 2014 में डायमंड हार्बर से अभिषेक बनर्जी की जीत को दिया गया, जब पार्टी ने वामपंथियों को सत्ता से उखाड़ फेंका। पार्टी के प्रति खान की वफादारी और उनके संगठनात्मक प्रयासों ने टीएमसी को उन्हें फाल्टा यूथ तृणमूल कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करने के लिए प्रेरित किया। खान फाल्टा में टीएमसी का एक महत्वपूर्ण चेहरा बनकर उभरे और 2023 में जिला परिषद के सदस्य बने। हालांकि, उनके आलोचकों ने उन पर फाल्टा में मतदाताओं को डराने-धमकाने का आरोप लगाया है। खान पर 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान अभिषेक बनर्जी को डायमंड हार्बर में भारी बढ़ावा देने के लिए मतदाताओं पर दबाव डालने का आरोप लगाया गया था। यह भी पढ़ें: जहांगीर खान के फाल्टा पुनर्मतदान से नामांकन वापस लेने पर टीएमसी ने तोड़ी चुप्पी: ‘कार्यकर्ता दबाव में’ जहांगीर खान से जुड़े विवाद यूपी के ‘सिंघम’ से आमना-सामना खान पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले तब सुर्खियों में आए, जब उत्तर प्रदेश-कैडर के आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा के साथ टकराव ने सुर्खियां बटोरीं। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट और “सिंघम” कहे जाने वाले शर्मा को 27 अप्रैल को खान से जुड़े आवास पर जाते और उनके परिवार के सदस्यों को डराने-धमकाने की किसी भी कोशिश के खिलाफ सख्त चेतावनी देते देखा गया था। खान के सहयोगियों से कथित तौर पर जुड़े मतदाताओं को डराने-धमकाने की खबरों के बाद शर्मा को यह कहते हुए सुना गया, “जहांगीर के परिवार के सदस्य यहां खड़े हैं; उन्हें ठीक से बताएं- हमें बार-बार खबरें मिल रही हैं कि उनके लोग धमकियां दे रहे हैं… बाद में रोना और पछताना मत करना।” ‘अगर वह सिंघम है, तो मैं पुष्पा हूं’ शर्मा की धमकी के जवाब में, जहांगीर खान ने तेलुगु ब्लॉकबस्टर पुष्पा का हवाला देते हुए उन पर “अवैध धमकी” देने और “भाजपा एजेंट” के रूप में कार्य करने के लिए एक तटस्थ पर्यवेक्षक के रूप में अपने संवैधानिक जनादेश को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने पिछले महीने कहा था, “हम उनके सामने नहीं झुकेंगे। यह बंगाल है; अगर वह ‘सिंघम’ हैं, तो मैं ‘पुष्पा’ हूं। उत्तर प्रदेश के भाजपा द्वारा नियुक्त पुलिस अधिकारियों द्वारा फाल्टा में किसी भी तरह की धमकी या जबरदस्ती की अनुमति नहीं दी जाएगी।” और पढ़ें: ‘वह भाग गया’: बंगाल के सीएम सुवेंदु ने फाल्टा पुनर्मतदान से हटने के लिए टीएमसी के जहांगीर का मजाक उड़ाया फाल्टा पुनर्मतदान चुनाव आयोग ने चुनावी कदाचार और “लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तोड़फोड़” के व्यापक आरोपों के कारण 21 मई को फाल्टा विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान का आदेश दिया। भाजपा ने जहांगीर खान पर निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी कदाचार की साजिश रचने का आरोप लगाया। भाजपा ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी के पक्ष में मतदान के लिए ईवीएम बटन फाल्टा के बूथों पर टेप या ब्लॉक कर दिए गए थे, जहां खान चुनाव लड़ रहे थे। उच्च जोखिम वाले चुनाव के दौरान यह एक प्रमुख राजनीतिक टकराव का बिंदु बन गया। ज़बरदस्ती कार्रवाई के खिलाफ खान ने उच्च न्यायालय का रुख किया भाजपा के सत्ता में आने के बाद, खान ने अपने खिलाफ किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा की मांग करते हुए कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया और आरोप लगाया कि उनके खिलाफ बार-बार आपराधिक मामले दर्ज किए जा रहे हैं। उनकी टिप्पणी मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की चेतावनी के बाद आई है कि वह “पुष्पा” के मामले को व्यक्तिगत रूप से संभालेंगे। अधिकारी ने 16 मई को भाजपा कार्यकर्ताओं से कहा, ”वह (खान) एक नामित सबसे कुख्यात अपराधी है और मैं व्यक्तिगत रूप से उसका मामला संभालूंगा। तथाकथित पुष्पा अब मेरी जिम्मेदारी है।” केंद्रीय मंत्री सुकांत मजूमदार ने भी टिप्पणी की कि ‘पुष्पा’ इस बार ‘फुस्स’ (फ्लॉप) थी। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी की ‘पुष्पा’ विल्ट? फाल्टा पुनर्मतदान से पीछे हटते ही जहांगीर खान विवादों में घिर गए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें