Monday, 26 Oct 2026 | 01:44 PM

Trending :

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

मार्केट वैल्यू के आधार पर दुनिया की टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों की लिस्ट से अब भारत की सभी कंपनियां बाहर हो गई हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत की तीन कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS शामिल थीं, लेकिन आज इनमें से एक भी कंपनी टॉप 100 लिस्ट में नहीं है। घरेलू शेयर बाजार में लगातार जारी बिकवाली और भारी गिरावट के कारण इन भारतीय कंपनियों की वैल्यू घटी है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्लोबल रैंकिंग में फिसलकर अब 106वें स्थान पर आ गई है। यह कंपनी साल 2025 की शुरुआत में 57वें और साल 2026 की शुरुआत में 73वें स्थान पर थी। वहीं देश के प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की रैंक अब 190 हो गई है, जो साल 2025 की शुरुआत में 97वें नंबर पर थी। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल भी साल 2026 की शुरुआत में 164वें स्थान पर थी, जो अब गिरकर 202वें स्थान पर आ गई है। एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट दूसरे और एपल तीसरे नंबर पर जहां एक तरफ भारतीय कंपनियां रेंकिंग में पीछे हो गई हैं, वहीं ग्लोबल मार्केट्स में दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। एनवीडिया वर्तमान में 5.33 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट 4.7 ट्रिलियन डॉलर और एपल 4.3 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन चौथे और पांचवें नंबर पर है। ICICI, SBI और IT सेक्टर की कंपनियों की रैंकिंग भी घटी बैंक और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की रैंकिंग भी तेजी से नीचे आई है। साल 2026 की शुरुआत में ICICI बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 215वें और 231वें स्थान पर थे, लेकिन अब वे गिरकर 274वें और 276वें स्थान पर पहुंच गए हैं। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS की रैंकिंग में सबसे तेज गिरावट आई है। TCS की ग्लोबल रैंक साल 2025 की शुरुआत में 84वीं और 2026 की शुरुआत में 171वीं थी, जो अब गिरकर 314वें स्थान पर पहुंच गई है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT फर्म इन्फोसिस अब 590वें स्थान पर है, जबकि साल 2025 की शुरुआत में यह 198वें और 2026 की शुरुआत में 330वें स्थान पर थी। इसके अलावा ITC भी साल 2025 की शुरुआत में 296वें और 2026 की शुरुआत में 466वें स्थान से फिसलकर अब 702वें स्थान पर आ गई है। टॉप 500 में भारत की 15 कंपनियों में से सिर्फ 9 बचीं ग्लोबल मार्केट कैप के टॉप 500 की लिस्ट में भारत की कंपनियों की संख्या साल 2025 की शुरुआत में 15 और साल 2026 की शुरुआत में 13 थी, जो अब घटकर केवल 9 रह गई है। घरेलू स्तर पर भी 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाली लिस्टेड भारतीय कंपनियों का क्लब भी अब छोटा हो गया है। साल की शुरुआत में ऐसी करीब 6 कंपनियां थीं, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गई हैं। 100 बिलियन डॉलर क्लब में सिर्फ तीन कंपनियां बचीं भारतीय बाजार में लगातार गिरावट के कारण देश के दूसरे सबसे बड़े लेंडर ICICI बैंक, सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक SBI और TCS ने यह स्टेटस खो दिया है। अब सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और भारती एयरटेल है, जिनका मार्केट कैप 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय बाजारों में इस गिरावट की शुरुआत 2024 के मीड से शुरू हो गई थी। ज्यादा वैल्युएशन, सुस्त अर्निंग्स, रुपए में कमजोरी और ट्रेड वार की चिंताओं के बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय शेयरों में गिरावट का लंबा दौर शुरू हुआ। इसके बाद अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई बाजार पर दबाव बढ़ने का एक मुख्य कारण ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज का रेटिंग घटाना भी रहा। मार्च में UBS, मॉर्गन स्टेनली और नोमुरा ने भारतीय बाजारों पर अपनी रेटिंग घटाई है। जिसके बाद अप्रैल में जेपी मॉर्गन, HSBC और गोल्डमैन सैक्स ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई है। मई के पहले सप्ताह में सीटी बैंक भी इसमें शामिल हो गई। इन सभी रिपोर्ट्स में हाई वैल्युएशन प्रीमियम, तेल के कारण अर्निंग्स रिस्क, कमजोर होता रुपया और हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी व AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर में भारत के सीमित एक्सपोजर को लेकर समान चिंताएं जताई गई हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल के दाम 90 पैसे बढ़े: 4 दिन पहले ₹3-3 बढ़ाए थे; 15 राज्यों में पेट्रोल ₹100 लीटर पार, डीजल 17 में ₹90 से ऊपर देश में पेट्रोल और डीजल आज 19 मई से औसतन 90 पैसे प्रति लीटर और महंगा हो गया है। इससे पहले 15 मई, शुक्रवार को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पांच दिन के भीतर में यह दूसरी बढ़ोतरी है। देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल 100 रुपए लीटर के ऊपर बिक रहा है। वहीं 17 में डीजल का दाम 90 रुपए लीटर से ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
नेपाल बाढ़ में बैंक का लॉकर बहा, ₹57 लाख लूटे:सेफ तोड़कर कैश निकालने के आरोप में 29 हिरासत में

August 29, 2026/
5:04 pm

नेपाल में भीषण बाढ़ के दौरान भोटेकोशी इलाके से एक बैंक का लॉकर बहकर कई किलोमीटर दूर पहुंच गया। बाद...

नेपाल ने चीन के सामने कालापानी-लिपुलेख का मुद्दा उठाया:कहा- भारत के साथ समझौता किस आधार पर; चीन बोला- ये आप दोनों का मामला

June 16, 2026/
8:06 pm

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने बीजिंग में चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के दौरान कालापानी,...

मंडला में अंजनिया बाईपास पर पेपर लोड ट्रक पलटा:NH-30 पर हादसे में ड्राइवर मामूली घायल

April 11, 2026/
11:55 am

मंडला जिले के अंजनिया बाईपास स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर एक ट्रक पलट गया। इस हादसे में ट्रक चालक को मामूली...

अक्षय तृतीया पर भिंड में गरीब कन्याओं के सामूहिक विवाह:माता-पिता ने बेटियों के हाथ पीले कर कन्यादान की रस्म निभाई, समाजजनों ने दिए उपहार

April 19, 2026/
8:08 pm

भिंड में अक्षय तृतीया के पावन अवसर पर आदर्श प्रजापति समाज सुधार समिति ने तृतीय सामूहिक विवाह सम्मेलन किया। शहर...

भाजपा नेता के गृह प्रवेश में देवी-देवताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी:मोहल्ले में तनाव, कैलाशपुरी में दो पक्ष आमने-सामने

February 26, 2026/
7:23 pm

रीवा शहर के कैलाशपुरी इलाके में गुरुवार शाम एक भाजपा नेता के घर गृह प्रवेश कार्यक्रम आयोजित किया गया। आरोप...

महिलाओं पर आतंकी हमले से भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी:नाइजीरिया में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं की हत्या की, एक्ट्रेस बोलीं- इन राक्षसों के लिए नरक में जगह

May 14, 2026/
4:30 pm

साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले...

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी की हत्या:19 साल की बेटी के सामने लुटेरे ने पिता को गोली मारी

August 23, 2026/
10:46 am

अमेरिका में भारतीय मूल के कारोबारी सुरेश पटेल की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना टेनेसी राज्य के जैक्सन...

राजनीति

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

भारत की सभी कंपनियां टॉप-100 ग्लोबल लिस्ट से बाहर:मार्केट वैल्यू में रिलायंस 73वें से 105वें नंबर पर आई; एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट-एपल टॉप-3 में शामिल

मार्केट वैल्यू के आधार पर दुनिया की टॉप 100 लिस्टेड कंपनियों की लिस्ट से अब भारत की सभी कंपनियां बाहर हो गई हैं। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2025 की शुरुआत तक इस ग्लोबल लिस्ट में भारत की तीन कंपनियां- रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और TCS शामिल थीं, लेकिन आज इनमें से एक भी कंपनी टॉप 100 लिस्ट में नहीं है। घरेलू शेयर बाजार में लगातार जारी बिकवाली और भारी गिरावट के कारण इन भारतीय कंपनियों की वैल्यू घटी है। देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज ग्लोबल रैंकिंग में फिसलकर अब 106वें स्थान पर आ गई है। यह कंपनी साल 2025 की शुरुआत में 57वें और साल 2026 की शुरुआत में 73वें स्थान पर थी। वहीं देश के प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक HDFC बैंक की रैंक अब 190 हो गई है, जो साल 2025 की शुरुआत में 97वें नंबर पर थी। देश की सबसे बड़ी टेलीकॉम ऑपरेटर भारती एयरटेल भी साल 2026 की शुरुआत में 164वें स्थान पर थी, जो अब गिरकर 202वें स्थान पर आ गई है। एनवीडिया नंबर-1, अल्फाबेट दूसरे और एपल तीसरे नंबर पर जहां एक तरफ भारतीय कंपनियां रेंकिंग में पीछे हो गई हैं, वहीं ग्लोबल मार्केट्स में दुनिया की बड़ी टेक्नोलॉजी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है। एनवीडिया वर्तमान में 5.33 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दुनिया की सबसे वैल्यूएबल कंपनी बनी हुई है। इसके बाद अल्फाबेट 4.7 ट्रिलियन डॉलर और एपल 4.3 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ दूसरे और तीसरे नंबर पर हैं। माइक्रोसॉफ्ट और अमेजन चौथे और पांचवें नंबर पर है। ICICI, SBI और IT सेक्टर की कंपनियों की रैंकिंग भी घटी बैंक और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों की रैंकिंग भी तेजी से नीचे आई है। साल 2026 की शुरुआत में ICICI बैंक और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) 215वें और 231वें स्थान पर थे, लेकिन अब वे गिरकर 274वें और 276वें स्थान पर पहुंच गए हैं। देश की सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी TCS की रैंकिंग में सबसे तेज गिरावट आई है। TCS की ग्लोबल रैंक साल 2025 की शुरुआत में 84वीं और 2026 की शुरुआत में 171वीं थी, जो अब गिरकर 314वें स्थान पर पहुंच गई है। भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT फर्म इन्फोसिस अब 590वें स्थान पर है, जबकि साल 2025 की शुरुआत में यह 198वें और 2026 की शुरुआत में 330वें स्थान पर थी। इसके अलावा ITC भी साल 2025 की शुरुआत में 296वें और 2026 की शुरुआत में 466वें स्थान से फिसलकर अब 702वें स्थान पर आ गई है। टॉप 500 में भारत की 15 कंपनियों में से सिर्फ 9 बचीं ग्लोबल मार्केट कैप के टॉप 500 की लिस्ट में भारत की कंपनियों की संख्या साल 2025 की शुरुआत में 15 और साल 2026 की शुरुआत में 13 थी, जो अब घटकर केवल 9 रह गई है। घरेलू स्तर पर भी 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा मार्केट कैप वाली लिस्टेड भारतीय कंपनियों का क्लब भी अब छोटा हो गया है। साल की शुरुआत में ऐसी करीब 6 कंपनियां थीं, जो अब घटकर सिर्फ 3 रह गई हैं। 100 बिलियन डॉलर क्लब में सिर्फ तीन कंपनियां बचीं भारतीय बाजार में लगातार गिरावट के कारण देश के दूसरे सबसे बड़े लेंडर ICICI बैंक, सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर बैंक SBI और TCS ने यह स्टेटस खो दिया है। अब सिर्फ रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक और भारती एयरटेल है, जिनका मार्केट कैप 100 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली और कच्चे तेल की कीमतों का असर भारतीय बाजारों में इस गिरावट की शुरुआत 2024 के मीड से शुरू हो गई थी। ज्यादा वैल्युएशन, सुस्त अर्निंग्स, रुपए में कमजोरी और ट्रेड वार की चिंताओं के बीच विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के कारण भारतीय शेयरों में गिरावट का लंबा दौर शुरू हुआ। इसके बाद अमेरिका-ईरान-इजराइल संघर्ष ने कच्चे तेल की कीमतों को 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंचा दिया, जिससे महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ गया। ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई बाजार पर दबाव बढ़ने का एक मुख्य कारण ग्लोबल ब्रोकरेज हाउसेज का रेटिंग घटाना भी रहा। मार्च में UBS, मॉर्गन स्टेनली और नोमुरा ने भारतीय बाजारों पर अपनी रेटिंग घटाई है। जिसके बाद अप्रैल में जेपी मॉर्गन, HSBC और गोल्डमैन सैक्स ने भी भारतीय बाजार की रेटिंग घटाई है। मई के पहले सप्ताह में सीटी बैंक भी इसमें शामिल हो गई। इन सभी रिपोर्ट्स में हाई वैल्युएशन प्रीमियम, तेल के कारण अर्निंग्स रिस्क, कमजोर होता रुपया और हाई-ग्रोथ टेक्नोलॉजी व AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सेक्टर में भारत के सीमित एक्सपोजर को लेकर समान चिंताएं जताई गई हैं। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोल-डीजल के दाम 90 पैसे बढ़े: 4 दिन पहले ₹3-3 बढ़ाए थे; 15 राज्यों में पेट्रोल ₹100 लीटर पार, डीजल 17 में ₹90 से ऊपर देश में पेट्रोल और डीजल आज 19 मई से औसतन 90 पैसे प्रति लीटर और महंगा हो गया है। इससे पहले 15 मई, शुक्रवार को ही पेट्रोल-डीजल की कीमतों में 3-3 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई थी। यानी पांच दिन के भीतर में यह दूसरी बढ़ोतरी है। देश के 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में पेट्रोल 100 रुपए लीटर के ऊपर बिक रहा है। वहीं 17 में डीजल का दाम 90 रुपए लीटर से ज्यादा है। पूरी खबर पढ़ें…

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.