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जम गया खून का थक्का, बाहर आने लगी आंखें…कानपुर के डॉक्टरों का चमत्कार, दुनिया में पहली बार लौटी रोशनी

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Kanpur News : महिला मरीज आंखों में खून का थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर रोग से जूझ रही थी. कानपुर के डॉक्टरों ने इसे ठीक करने के लिए दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें बाहर की तरफ निकल आई थीं. नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि कानपुर में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. इलाज सफल रहा. महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई है.

कानपुर. यूपी स्थित कानपुर के एलएलआर अस्पताल में डॉक्टरों ने चमत्कार कर दिखाया है. आंखों में खून का खतरनाक थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर हालत से जूझ रही महिला मरीज की रोशनी डॉक्टरों ने लौटा दी. कहा जा रहा है कि ऐसा इलाज दुनिया में पहली बार इस तकनीक से किया गया. डॉक्टरों ने दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. इसके साथ सुप्रा कोरोडियल निडल तकनीक का सहारा लिया गया. इलाज सफल रहा और महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई. महिला मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें पूरी तरह लाल थीं और बाहर की तरफ निकल आई थीं. दर्द इतना ज्यादा था कि वह लगातार कराह रही थी. डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की तो पता चला कि आंखों के अंदर खून के थक्के जम चुके हैं और आंखों का प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है.

हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह आई काम

नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने मामले को गंभीर देखते हुए शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा से संपर्क किया. दिल में जमे खून के थक्कों को हटाने की प्रक्रिया समझने के बाद डॉक्टरों ने तय किया कि यही तकनीक आंखों में भी इस्तेमाल की जा सकती है. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन और सुप्रा कोरोडियल निडल की मदद से इलाज शुरू किया. कुछ ही समय में मरीज को आराम मिलने लगा. आंखों का प्रेशर सामान्य होने लगा और महिला की चली गई रोशनी लौट आई.

डॉ. परवेज खान ने बताया कि विभाग में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. यह इलाज भविष्य में आंखों की गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, महिला में ‘हेमोरेजिक किसिंग कोरोइड’ बीमारी जैसे लक्षण मिले थे. इस बीमारी में आंखों के अंदर सूजन बढ़ जाती है और खून के थक्के जमने लगते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.

मरीज से नहीं लिया कोई शुल्क

इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि आमतौर पर इस बीमारी को ठीक होने में करीब 20 दिन लग जाते हैं, लेकिन नई तकनीक की मदद से मरीज को काफी जल्दी राहत मिल गई. इस इलाज की सबसे बड़ी बात यह रही कि महिला मरीज से किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया गया. डॉक्टरों की इस सफलता पर मेडिकल जगत में खूब चर्चा हो रही है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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Kanpur News : महिला मरीज आंखों में खून का थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर रोग से जूझ रही थी. कानपुर के डॉक्टरों ने इसे ठीक करने के लिए दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें बाहर की तरफ निकल आई थीं. नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने बताया कि कानपुर में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. इलाज सफल रहा. महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई है.

कानपुर. यूपी स्थित कानपुर के एलएलआर अस्पताल में डॉक्टरों ने चमत्कार कर दिखाया है. आंखों में खून का खतरनाक थक्का जमने और आंखें बाहर निकलने जैसी गंभीर हालत से जूझ रही महिला मरीज की रोशनी डॉक्टरों ने लौटा दी. कहा जा रहा है कि ऐसा इलाज दुनिया में पहली बार इस तकनीक से किया गया. डॉक्टरों ने दिल में जमे खून के थक्के को गलाने वाले टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन का इस्तेमाल आंखों के इलाज में किया. इसके साथ सुप्रा कोरोडियल निडल तकनीक का सहारा लिया गया. इलाज सफल रहा और महिला की आंखों की रोशनी वापस आ गई. महिला मरीज जब अस्पताल पहुंची तो उसकी आंखें पूरी तरह लाल थीं और बाहर की तरफ निकल आई थीं. दर्द इतना ज्यादा था कि वह लगातार कराह रही थी. डॉक्टरों ने तुरंत जांच शुरू की तो पता चला कि आंखों के अंदर खून के थक्के जम चुके हैं और आंखों का प्रेशर खतरनाक स्तर तक पहुंच गया है.

हृदय रोग विशेषज्ञ की सलाह आई काम

नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. परवेज खान ने मामले को गंभीर देखते हुए शहर के हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. राकेश वर्मा से संपर्क किया. दिल में जमे खून के थक्कों को हटाने की प्रक्रिया समझने के बाद डॉक्टरों ने तय किया कि यही तकनीक आंखों में भी इस्तेमाल की जा सकती है. इसके बाद डॉक्टरों की टीम ने टेनेक्टेप्लेस इंजेक्शन और सुप्रा कोरोडियल निडल की मदद से इलाज शुरू किया. कुछ ही समय में मरीज को आराम मिलने लगा. आंखों का प्रेशर सामान्य होने लगा और महिला की चली गई रोशनी लौट आई.

डॉ. परवेज खान ने बताया कि विभाग में ही नहीं बल्कि दुनिया में पहली बार इस तरह की तकनीक का इस्तेमाल आंखों में जमे खून के थक्के हटाने के लिए किया गया है. यह इलाज भविष्य में आंखों की गंभीर बीमारियों के मरीजों के लिए नई उम्मीद बन सकता है. डॉक्टरों के मुताबिक, महिला में ‘हेमोरेजिक किसिंग कोरोइड’ बीमारी जैसे लक्षण मिले थे. इस बीमारी में आंखों के अंदर सूजन बढ़ जाती है और खून के थक्के जमने लगते हैं. अगर समय पर इलाज न मिले तो मरीज की आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है.

मरीज से नहीं लिया कोई शुल्क

इलाज करने वाले डॉक्टरों ने बताया कि आमतौर पर इस बीमारी को ठीक होने में करीब 20 दिन लग जाते हैं, लेकिन नई तकनीक की मदद से मरीज को काफी जल्दी राहत मिल गई. इस इलाज की सबसे बड़ी बात यह रही कि महिला मरीज से किसी तरह का कोई शुल्क नहीं लिया गया. डॉक्टरों की इस सफलता पर मेडिकल जगत में खूब चर्चा हो रही है.

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प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें

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