Thursday, 09 Jul 2026 | 01:05 AM

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Airtel Top Gainer | Market Cap Boost; Bajaj Finance, ICICI Bank Rise

Airtel Top Gainer | Market Cap Boost; Bajaj Finance, ICICI Bank Rise

मुंबई7 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले कारोबारी हफ्ते में देश की टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 6 का कुल मार्केट वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया। इस तेजी में भारतीय एयरटेल टॉप गेनर रही। एयरटेल की वैल्युएशन 36,529 करोड़ रुपए बढ़कर 11.63 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, ICICI बैंक, LIC, HDFC बैंक और HUL का मार्केट कैप भी बढ़ा है। वहीं बाजार की इस तेजी के बीच टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते घटी है। जिसमें लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, SBI और TCS के नाम शामिल हैं। बीते हफ्ते सेंसेक्स 663 अंक चढ़ा था बीते हफ्ते सेंसेक्स 663.44 अंक और निफ्टी 214.85 अंक चढ़ा था। वहीं शुक्रवार को सेंसेक्स 261 अंक की तेजी के साथ 77,764 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 95 अंक की बढ़त रही, ये 24,270 के स्तर पर बंद हुआ था। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Airtel Top Gainer | Market Cap Boost; Bajaj Finance, ICICI Bank Rise

Airtel Top Gainer | Market Cap Boost; Bajaj Finance, ICICI Bank Rise

मुंबई23 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले कारोबारी हफ्ते में देश की टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 6 का कुल मार्केट वैल्यूएशन 1 लाख करोड़ रुपए बढ़ गया। इस तेजी में भारतीय एयरटेल टॉप गेनर रही। एयरटेल की वैल्युएशन 36,529 करोड़ रुपए बढ़कर 11.63 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गई। इसके अलावा बजाज फाइनेंस, ICICI बैंक, LIC, HDFC बैंक और HUL का मार्केट कैप भी बढ़ा है। वहीं बाजार की इस तेजी के बीच टॉप-10 सबसे वैल्यूएबल कंपनियों में से 4 की वैल्यू बीते हफ्ते घटी है। जिसमें लार्सन एंड टुब्रो, रिलायंस इंडस्ट्रीज, SBI और TCS के नाम शामिल हैं। देश की टॉप-10 कंपनियों में से 6 की वैल्यू ₹1 लाख करोड़ बढ़ी कंपनी हफ्ते भर में चेंज (₹ करोड़ में) मौजूदा मार्केट कैप (₹ लाख करोड़ में) भारती एयरटेल +36,529 11.64 बजाज फाइनेंस +33,059 6.43 ICICI बैंक +16,084 10.11 LIC +8,602 5.44 HDFC बैंक +7,665 12.34 हिंदुस्तान यूनिलीवर +6,461 5.17 लार्सन एंड टुब्रो -26,572 5.54 रिलायंस इंडस्ट्रीज -18,945 17.65 SBI -4,846 9.60 TCS -1,031 7.57 सोर्स: BSE (29 जून – 03 जुलाई, 2026) रिलायंस देश की सबसे वैल्यूएबल कंपनी मार्केट कैप के हिसाब से रिलायंस इंडस्ट्रीज देश की सबसे मूल्यवान कंपनी के रूप में पहले नंबर पर बनी हुई है। इसके बाद दूसरे स्थान पर HDFC बैंक, तीसरे पर भारती एयरटेल, चौथे पर ICICI बैंक और पांचवें पर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया है। इस लिस्ट में छठे स्थान पर TCS, सातवें पर बजाज फाइनेंस, आठवें पर लार्सन एंड टुब्रो, नौवें पर LIC और दसवें स्थान पर हिंदुस्तान यूनिलीवर मौजूद है। बीते हफ्ते सेंसेक्स 663 अंक चढ़ा था बीते हफ्ते सेंसेक्स 663.44 अंक और निफ्टी 214.85 अंक चढ़ा था। वहीं शुक्रवार को सेंसेक्स 261 अंक की तेजी के साथ 77,764 के स्तर पर बंद हुआ। निफ्टी में 95 अंक की बढ़त रही, ये 24,270 के स्तर पर बंद हुआ था। मार्केट कैपिटलाइजेशन क्या होता है? मार्केट कैप किसी भी कंपनी के टोटल आउटस्टैंडिंग शेयरों यानी वे सभी शेयर जो फिलहाल उसके शेयरहोल्डर्स के पास हैं, उनकी वैल्यू है। इसका कैलकुलेशन कंपनी के जारी शेयरों की कुल संख्या को उनकी कीमत से गुणा करके किया जाता है। इसे एक उदाहरण से समझें… मान लीजिए… कंपनी ‘A’ के 1 करोड़ शेयर मार्केट में लोगों ने खरीद रखे हैं। अगर एक शेयर की कीमत 20 रुपए है, तो कंपनी की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ x 20 यानी 20 करोड़ रुपए होगी। कंपनियों की मार्केट वैल्यू शेयर की कीमतों के बढ़ने या घटने के चलते बढ़ता-घटता है। इसके और कई कारण हैं… बढ़ने का क्या मतलब घटने का क्या मतलब शेयर की कीमत में बढ़ोतरी शेयर प्राइस में गिरावट मजबूत वित्तीय प्रदर्शन खराब नतीजे पॉजिटीव न्यूज या इवेंट नेगेटिव न्यूज या इवेंट पॉजिटीव मार्केट सेंटिमेंट इकोनॉमी या मार्केट में गिरावट हाई प्राइस पर शेयर जारी करना शेयर बायबैक या डीलिस्टिंग मार्केट कैप के उतार-चढ़ाव का कंपनी और निवेशकों पर क्या प्रभाव पड़ता है? कंपनी पर असर : बड़ा मार्केट कैप कंपनी को मार्केट से फंड जुटाने, लोन लेने या अन्य कंपनी एक्वायर करने में मदद करता है। वहीं, छोटे या कम मार्केट कैप से कंपनी की फाइनेंशियल डिसीजन लेने की क्षमता कम हो जाती है। निवेशकों पर असर : मार्केट कैप बढ़ने से निवेशकों को डायरेक्ट फायदा होता है। क्योंकि उनके शेयरों की कीमत बढ़ जाती है। वही, गिरावट से नुकसान हो सकता है, जिससे निवेशक शेयर बेचने का फैसला ले सकते हैं। उदाहरण: अगर TCS का मार्केट कैप ₹12.43 लाख करोड़ बढ़ता है, तो निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, और कंपनी को भविष्य में निवेश के लिए ज्यादा पूंजी मिल सकती है। लेकिन मार्केट कैप गिरता है तो इसका नुकसान हो सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार

नई बायोपिक:15 साल बाद बड़े परदे पर लौटेंगी सेलिना, निभाएंगी ‘सिस्टर निवेदिता’ का किरदार

सेलीना जेटली करीब 15 साल बाद बड़े परदे पर वापसी करने जा रही हैं। वह निर्देशक राम कमल मुखर्जी की अगली बायोपिक में सिस्टर निवेदिता (मार्गरेट नोबल) का किरदार निभाएंगी। अपने एक इंटरव्यू में सेलिना ने कहा कि यह फिल्म उनके करियर के सबसे खास अनुभवों में से एक है। उन्होंने बताया कि राम कमल मुखर्जी के साथ काम करना उनके लिए अलग अनुभव रहा और इस किरदार को निभाना उनके लिए सिर्फ अभिनय नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी जैसा है। सेलिना कहती है…‘सिस्टर निवेदिता मुझे सबसे ज्यादा इसलिए प्रभावित करती हैं, क्योंकि उनका जन्म भारत में नहीं हुआ था, फिर भी उन्होंने अपना जीवन भारत, इसकी संस्कृति, आध्यात्मिक विचारधारा और लोगों की सेवा में समर्पित कर दिया।’ कौन हैं सिस्टर निवेदिता सिस्टर निवेदिता स्वामी विवेकानंद की आयरिश शिष्या थीं, जिन्होंने अपना जीवन भारत की शिक्षा, समाजसेवा और राष्ट्रजागरण को समर्पित कर दिया। महिला शिक्षा और भारतीय संस्कृति के प्रचार-प्रसार में उनके योगदान को आज भी प्रेरणास्रोत माना जाता है।

अल्ट्रा-रिच का ट्रेंड:अमीर लोग दर्जनों-सैकड़ों बच्चे पैदा करने को ‘प्रोजेक्ट’ मान रहे; यह वंश बचाने नहीं, शक्ति-प्रभाव का नया प्रतीक बना

अल्ट्रा-रिच का ट्रेंड:अमीर लोग दर्जनों-सैकड़ों बच्चे पैदा करने को ‘प्रोजेक्ट’ मान रहे; यह वंश बचाने नहीं, शक्ति-प्रभाव का नया प्रतीक बना

Hindi News International Wealthy People Are Treating Having Dozens And Hundreds Of Children As A ‘project’; It’s Not About Preserving Lineage, But Rather About Becoming A New Symbol Of Power And Influence. द न्यू यॉर्क टाइम्स. वॉशिंगटन8 मिनट पहले कॉपी लिंक मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। – प्रतीकात्मक फोटो विकसित देशों में जन्मदर रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। बहुत से लोग कहते हैं कि वे एक बच्चे का खर्च नहीं उठा पा रहे हैं। वहीं, एक छोटा-सा वर्ग अति धनी लोगों का है, जो तकनीक और लगभग असीम संसाधनों के दम पर ज्यादा से ज्यादा बच्चे पैदा कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों में कहीं स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे, कहीं 200 बच्चों की इच्छा तो कहीं 300 बच्चे पैदा करने के दावे सामने आए हैं। इस ट्रेंड को ‘किडमैक्सिंग’ कहा जा रहा है। यानी बच्चों की संख्या का ही ताकत, विरासत, प्रभाव और भविष्य पर कब्जे का प्रतीक बन जाना। यह कहानी असमानता का सबसे ठोस रूप भी दिखाती है। एक ओर लोग आईवीएफ के लिए कर्ज लेते हैं। दूसरी तरफ अरबपति दो करोड़ रु. या इससे ज्यादा खर्च कर सरोगेसी और डोनर एग्स से ‘ऑर्डर’ की तरह बच्चे बनवा रहे हैं। इसमें सबसे चर्चित नामों में इलॉन मस्क हैं। उनके 14 बच्चे हैं। टेलीग्राम के संस्थापक पावेल डुरोव का दावा है कि उनके स्पर्म डोनेशन से 100 से ज्यादा बच्चे पैदा हुए हैं। अमेरिकी बीमा उद्योगपति ग्रेग लिंडबर्ग ने ‘बेबी प्रोजेक्ट’ चलाया। इसमें मॉडल्स को धोखे से एग डोनेशन के लिए फंसाने के आरोप भी लगे। उनके 12 बच्चों की बात सामने आई है। वहीं, यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन ने एक समय अपने डीएनए को ‘फैलाने’ की सनक तक जाहिर की थी। कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी की आर्ली रसेल कहती हैं, ‘अरबपति एक साथ कई सरोगेट्स के जरिए ‘बैच’ में बच्चे पैदा करवा सकते हैं। आईवीएफ तकनीक अब सिर्फ संतान पाने का जरिया नहीं है। यह लिंग चयन, बीमारी और कुछ जीन संबंधी गुणों को चुनने का औजार बन चुकी है। इसका खर्च अरबपति ही उठा सकते हैं।’ मनोवैज्ञानिक ​कहते हैं कि जैसे पुराने समय के राजा अपनी वंशावली को शक्ति का स्रोत मानते थे, वैसे ही आज के कुछ टेक-किंग्स अपने खून को भविष्य की पूंजी मान रहे हैं। फर्क बस इतना है कि अब तलवार की जगह तकनीक है। नतीजा: ‘परिवार’ की भावना और सोच ही खतरे में पड़ी अमेरिकी लेखिका अन्ना लोई सुसमैन के अनुसार, अरबपतियों की इस सनक की शिकार कुछ महिलाएं और बच्चे हैं। सरोगेट माताओं के शोषण, सहमति उल्लंघन, बच्चों की देखभाल पर सवाल उठे हैं। कई मामलों में बच्चे ननों के भरोसे, दूसरे देशों में पले-बढ़े, जबकि पिता के लिए वे सिर्फ आंकड़े बनकर रह गए। समाजशास्त्री इवा इलूज चेतावनी देती हैं, ‘अगर इस पर सख्ती और नैतिक चर्चा नहीं हुई, तो परिवार की नींव ही हिल जाएगी।’ दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: सुबह की ताजगी ही दिखती है थकावत तो खाली पेट पीएं खीरा और पुदीना का रस, शरीर को मिलती है ताजगी की ऊर्जा

खीरा पुदीना ड्रिंक: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब लाइफस्टाइल और असंतुलित खानपान के कारण सुबह उठते ही थकान, सुस्ती और भारीपन महसूस होना एक आम समस्या बन गई है। कई बार भरपूर नींद लेने के बाद भी शरीर में वो ऊर्जा नहीं होती, हमें आपके लिए जरूरी होती है। अगर आप भी सुबह-सुबह चाय या फूला के साथ अपनी नींद भटकते हैं, तो आपकी इस आदत को बदलने का समय आ गया है। अपनी सुबह की शुरुआत कैफीन के बजाय आप खीरा और पुदीना के सेवन से करें। इसे खाली पेट पीने से शरीर में सुस्ती नहीं रहेगी। बल्कि आपको ऊर्जावान ऊर्जा भी प्राप्त होगी। खीरा और पुदीना का संयोजन क्यों है खास? खेड़ा और पुदीना, दोनों ही आपके ठंडे तासीर और ताजगी देने वाले गुणों के लिए जाते हैं। जब इन दोनों को एक साथ जोड़ा जाता है, तो यह एक बेहतरीन डिटॉक्स ड्रिंक बन जाता है जो शरीर के अंदर से साफ और एनर्जेटिक काम करता है। पोटेशियम में लगभग 95% पानी होता है, जो शरीर को तुरंत नष्ट कर देता है। इसके अलावा, विटामिन सी, विटामिन के, पोटेशियम और मैग्नीशियम जैसे आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो शरीर के चयापचय को बढ़ावा देते हैं। वहीं पुदीन की मित्र एंटीऑक्सीडेंट और मेन्थॉल सेपरेटिटी होती हैं। यह केवल आपके पाचन तंत्र को स्थापित नहीं करता है, बल्कि मानसिक थकान को कम करके मूड को तुरंत ताजा करने का काम करता है। खाली पेट खेडा-पुदीना के बेमिसाल फायदे सुबह-सुबह खाली पेट इस खाद्य पदार्थ को पीने से शरीर की कोशिकाओं की तुरंत बिक्री हो जाती है, जिससे गरीबी दूर हो जाती है और आप खुद को ऊर्जावान महसूस करते हैं।रात भर में शरीर में जमा हुआ विकिरण टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में यह पेय बहुत ही लाभकारी है। अगर आपको सुबह पेट साफ नहीं है या गैस-एसिडिटी की समस्या है तो यह आपके लिए जरूरी है। यह पाचन अग्नि को शांत करता है और ब्लोटिंग से राहत देता है।प्रतिदिन पीने से खून साफ ​​होता है। जिससे चेहरे के कील-मुंहसे दूर होते हैं और त्वचा में निखार आता है। सबसे पहले मिठाई को अच्छे से ढोकर छोटे से मिश्रण में काट लें। अब एक जरूरी या ज्यूसर में कटे हुए टुकड़े, पुदीने की सब्जियां और एक कप पानी के ढांचे को अच्छी तरह से ब्लेंड कर लें। यह एक अच्छा लेंस में से एक है। इसमें नींबू का रस, काला नमक और संबंधित जीरा पाउडर मिलाकर अच्छे से मिलाएं। नोट – आप इसे सुबह खाली पेट पीएं और इसे कम से कम 30 से 45 मिनट बाद तक पिएं।

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

संडे प्रोफाइल : टकर कार्लसन:कभी ट्रम्प के समर्थक थे, अब रखा तीसरी पार्टी का विचार

अमेरिका की दक्षिणपंथी राजनीति की प्रभावशाली आवाज टकर कार्लसन फिर चर्चा में हैं। कभी उनकी लोकप्रियता फिल्मी सितारों जैसी थी। अब वे राष्ट्रपति ट्रम्प से मतभेद और नई राजनीतिक पार्टी के विचार को लेकर सुर्खियों में हैं। कार्लसन लंबे समय से अमेरिकी राजनीति और मीडिया की सबसे प्रभावशाली दक्षिणपंथी आवाजों में गिने जाते हैं। इमिग्रेशन विरोध, श्वेत पहचान और राष्ट्रवादी मुद्दों पर उनके आक्रामक विचारों ने उन्हें अलग पहचान दिलाई है। वे वर्षों तक रिपब्लिकन पार्टी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रबल समर्थक रहे, लेकिन हाल के महीनों में दोनों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए हैं। कार्लसन ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का विरोध किया और कहा कि ट्रम्प ने अपने चुनावी वादों के विपरीत कदम उठाया है। उन्होंने अपने पॉडकास्ट पर यह स्वीकार भी किया कि ट्रम्प को लेकर उन्होंने लोगों को गुमराह किया था। इसी दौरान उन्होंने अमेरिका में तीसरी राजनीतिक पार्टी बनाने का विचार सामने रखकर हलचल पैदा कर दी। वे वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी के प्रयासों पर भी सवाल उठा चुके हैं। ट्रम्प द्वारा अल्लाह शब्द के इस्तेमाल और सोशल मीडिया पर खुद को ईसा मसीह जैसी छवि में प्रस्तुत करने की भी उन्होंने आलोचना की। गौरतलब है कि अमेरिका में मुख्य रूप से दो-दलीय राजनीतिक व्यवस्था (टू-पार्टी सिस्टम) है, जिसमें डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी का दबदबा रहता है। 58 वर्षीय कार्लसन को पत्रकारिता विरासत में मिली। उनके पिता रिचर्ड वार्नर कार्लसन मीडिया जगत से जुड़े रहे। इतिहास में स्नातक करने के बाद टकर ने पत्रिकाओं और अखबारों में काम किया तथा 1995 में पीबीएस से टीवी करियर की शुरुआत की। उन्हें सबसे ज्यादा पहचान 2016 से 2023 के बीच फॉक्स न्यूज के शो ‘टकर कार्लसन टुनाइट’ से मिली। यह शो औसतन करीब 30 लाख दर्शकों तक पहुंचता था और कार्लसन अमेरिकी कंजरवेटिव राजनीति की सबसे प्रभावशाली आवाजों में शामिल हो गए थे। उनकी लोकप्रियता इतनी थी कि उनके नाम वाली टी-शर्ट और मग की बिक्री कई बार ट्रम्प से जुड़े उत्पादों से भी अधिक बताई गई। रिपब्लिकन रणनीतिकार जेफ रो के मुताबिक 2020-21 के दौरान कंजरवेटिव राजनीति में कार्लसन जैसा प्रभाव रखने वाला शायद ही कोई दूसरा व्यक्ति था। हालांकि उनकी पहचान विवादों से भी जुड़ी रही। उन्होंने इमिग्रेशन, नस्ल और पहचान की राजनीति पर कई तीखी टिप्पणियां कीं। वे बार-बार यह दावा करते रहे कि अमेरिका का अभिजात वर्ग श्वेत ईसाई मतदाताओं की जगह नए प्रवासी मतदाताओं को स्थापित करना चाहता है। इन विवादों के चलते डिज्नी और लेक्सस जैसी कंपनियों ने उनके शो से विज्ञापन हटा लिए थे। 2023 में फॉक्स न्यूज से अलग होने के बाद उन्होंने अपना स्ट्रीमिंग मंच ‘टकर कार्लसन नेटवर्क’ शुरू किया। आज भी वे अमेरिकी दक्षिणपंथी राजनीति की सबसे चर्चित और विवादास्पद आवाजों में शामिल हैं।

सवाल पूछना अधिकार, पर मकसद सच की तलाश होना चाहिए:इंसान की बड़ी क्षमता उसका दिमाग और दिमाग का सबसे असरदार औजार- एक अच्छा सवाल

सवाल पूछना अधिकार, पर मकसद सच की तलाश होना चाहिए:इंसान की बड़ी क्षमता उसका दिमाग और दिमाग का सबसे असरदार औजार- एक अच्छा सवाल

भारतीय सभ्यता की सबसे बड़ी ताकत हमेशा यह रही है कि उसने सवाल पूछने से कभी डरना नहीं सीखा। उपनिषदों में शिष्य गुरु से बेझिझक प्रश्न करता है। बुद्ध सदियों से चली आ रही मान्यताओं को चुनौती देते हैं। चार्वाक ईश्वर और वेदों तक पर सवाल उठाते हैं। कबीर धर्म और समाज में फैले पाखंड पर खुलकर चोट करते हैं। भारतीय दर्शन की लगभग हर परंपरा का आधार संवाद, तर्क और वाद-विवाद की समृद्ध परंपरा रही है। इंसान की सबसे बड़ी कुव्वत उसका दिमाग है और दिमाग का सबसे असरदार औजार है- एक अच्छा सवाल। इंसान और बाकी तमाम जीव-जंतुओं के बीच सबसे बड़ा फर्क सिर्फ यह नहीं है कि इंसान दो पैरों पर चलता है, औजार बनाता है या आसमान छूती इमारतें खड़ी कर लेता है। असली फर्क यह है कि इंसान सवाल पूछता है। वह सिर्फ यह नहीं देखता कि सूरज हर सुबह निकलता है; वह जानना चाहता है कि सूरज उगता हुआ दिखाई क्यों देता है। वह किसी बात को महज इसलिए सच नहीं मान लेता कि सब उसे सच मानते हैं; वह पूछता है आखिर यह सच क्यों है, और यही जिज्ञासा, यही सवाल करने की बेचैनी इंसान को इंसान बनाती है। किसी छोटे बच्चे को देखिए। दुनिया में आने के कुछ ही सालों में वह सवालों की चलती-फिरती मशीन बन जाता है। यह क्या है? वह कौन है? ऐसा क्यों है? वैसा क्यों नहीं है? अगर हम गौर से देखें, तो समझ आएगा कि जिज्ञासा इंसान की सबसे स्वाभाविक फितरत है। इतिहास गवाह है कि जिस समाज ने सवालों को दबाया, वह ठहर गया; और जिसने सवालों का इस्तकबाल किया, वह आगे बढ़ता गया। जरा सोचिए, विज्ञान की पूरी इमारत किस बुनियाद पर खड़ी है? किसी दिन न्यूटन के दिमाग में यह सवाल कौंधा कि पेड़ से गिरता हुआ सेब हमेशा नीचे ही क्यों आता है, ऊपर क्यों नहीं चला जाता। अगर कुछ सवाल कभी न पूछे गए होते तो शायद हम आज भी अंधविश्वासों और गलत धारणाओं के जंगल में भटक रहे होते। विज्ञान जवाबों नहीं, सवालों से जन्म लेता है। सवाल सिर्फ विज्ञान के दायरे तक ही नहीं रहते हैं। अदब, फन और फलसफा भी सवालों की कोख से ही जन्म लेते हैं। एक शायर जब पूछता है कि इंसान दु:खी क्यों है, मोहब्बत क्या है, तन्हाई क्यों है, इंसाफ किसे कहते हैं, तब शायरी पैदा होती है। एक लेखक जब अपने समाज से सवाल करता है, एक फिल्मकार जब अपने दौर की उलझनों, नाइंसाफियों और विसंगतियों पर उंगली रखता है, तब मायने रखने वाला सिनेमा बनता है। कला का काम तैयार जवाब बांटना नहीं, ऐसे सवाल पैदा करना है जो हमें अपने बारे में कुछ नया सोचने पर मजबूर कर दें। मुझे तब फिक्र होती है, जब लोग किसी फिल्म, किताब या खयाल से असहमत होने के बजाय उसे चुप करा देना चाहते हैं। किसी सवाल को सिर्फ इसलिए दबा देना कि वह असुविधाजनक है, किसी आत्मविश्वास से भरे समाज की निशानी नहीं हो सकती। अगर कोई बच्चा पूछ ले कि यह नियम क्यों है, तो उसे चुप करा दिया जाता है। अगर कोई नौजवान जानना चाहे कि यह परंपरा किस बुनियाद पर बनी है, तो उससे कहा जाता है, बहुत सवाल मत करो। अगर कोई नागरिक सरकार से पूछ ले कि यह फैसला क्यों लिया गया, तो उसे विरोधी मान लिया जाता है। जबकि सच यह है कि सवाल पूछना विरोध नहीं, बल्कि समाज में अपनी हिस्सेदारी निभाने का तरीका है। जो शख्स सवाल पूछ रहा है, वह बता रहा है कि उसे समाज की फिक्र है। धर्म और आस्था के मामले में भी यही बात लागू होती है। आस्था का सम्मान करने का यह हरगिज मतलब नहीं कि इंसान अपनी सोचने-समझने की ताकत पर ताला लगा दे। पर सवाल पूछना और हर बात का विरोध करना एक ही चीज नहीं हैं। कुछ लोग समझते हैं हर बात में नुक्स निकालना ही अक्लमंदी की निशानी है। ऐसा नहीं है। सवाल पूछने का मकसद सच तक पहुंचना होना चाहिए। अगर आपका इरादा सामने वाले को नीचा दिखाना भर है, तो वह जिज्ञासा नहीं, अहंकार है, लेकिन अगर आपकी कोशिश समझने की है, सीखने की है, सच के थोड़ा और करीब जाने की है, तो आपका सवाल पूछना एक रचनात्मक सरोकार बन जाता है। बौद्धिक ईमानदारी की पहली शर्त यही है कि इंसान जो सवाल दूसरों से पूछता है, उसे अपने आप से भी पूछे। हम अक्सर दूसरों के खयालों को कसौटी पर कसते हैं, लेकिन अपने यकीनों की जांच नहीं करते। हमें खुद से भी यह पूछने का हौसला होना चाहिए कि मैं जो मानता हूं, उसे मानने की बुनियाद क्या है। कहीं ऐसा तो नहीं कि मैंने कोई राय सिर्फ इसलिए अपना ली क्योंकि मेरे आसपास के ज्यादातर लोग उसे सही मानते हैं? अपने ही विश्वासों से सवाल करना आसान नहीं होता, लेकिन यही मानसिक परिपक्वता की सबसे बड़ी निशानी है। आज के दौर में, जब जानकारी पहले से कहीं ज्यादा और कहीं तेजी से हमारे सामने आती है, तब सवाल पूछने की जरूरत और भी बढ़ जाती है। इंटरनेट पर हर रोज लाखों दावे किए जाते हैं। हर विचार के हक में भी दलीलें मिल जाती हैं और उसके खिलाफ भी। ऐसे में आंख मूंदकर किसी बात को सच मान लेना खतरनाक हो सकता है। हमें पूछना होगा- इसका स्रोत क्या है? इसका सबूत क्या है? इसकी दलील क्या है? यही आलोचनात्मक सोच हमें भ्रम, अफवाह और प्रचार के जाल से बचाती है।सवाल पूछना सिर्फ हमारा अधिकार नहीं, हमारी जिम्मेदारी भी है। जो समाज सवाल पूछना छोड़ देता है, वह धीरे-धीरे सोचने की अपनी ताकत खो देता है, और जो इंसान सवाल पूछना छोड़ देता है, वह सीखना भी छोड़ देता है। (संपादन और समन्वय- अरविंद मण्डलोई)

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने वेस्टइंडीज दौरे के लिए टेस्ट टीम का ऐलान करते हुए बड़ा फैसला लिया है। शान मसूद को टेस्ट कप्तानी से हटा दिया गया है। बाबर आजम को दूसरी बार टीम की कमान सौंपी गई है। पाकिस्तान इस महीने के अंत में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगा। शान मसूद को खराब प्रदर्शन के बाद हटाया गया है। पाकिस्तान लगातार अपने पिछले सात टेस्ट मैच भी हार चुका है, जो टीम के इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे लंबी हार की श्रृंखला है। करीब 3 साल पहले बाबर की जगह टेस्ट कप्तान बनाए गए शान मसूद ने 16 टेस्ट मैचों में कप्तानी की, जिसमें से टीम को 12 हार का सामना करना पड़ा। टेस्ट इतिहास में कोई भी कप्तान अपने शुरुआती 16 टेस्ट में 12 मैच नहीं हारा था। PCB ने इस पोस्ट के जरिए टेस्ट टीम का ऐलान किया… आकिब जावेद ने बोले- कप्तान मैच खत्म नहीं करा पाए पाकिस्तान के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद ने कहा- ‘टीम बार-बार जीते हुए मैच गंवा रही है। शान मसूद की कप्तानी में लीडरशिप नजर नहीं आती है। जावेद ने कहा, ‘शान का व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन कप्तान के रूप में वे टीम को नतीजे नहीं दिला सके। कप्तान की जिम्मेदारी सिर्फ टॉस तक सीमित नहीं होती, बल्कि मैच को खत्म करना, डीआरएस लेना और टीम को सही दिशा देना भी उसकी जिम्मेदारी है।’ मसूद की कप्तानी गई, टीम में रहेंगे जावेद ने साफ किया है कि कप्तानी से हटाए जाने के बाद शान मसूद टेस्ट टीम का हिस्सा रहेंगे। जावेद ने कहा- कप्तान बदलने का फैसला शान मसूद के बल्लेबाजी प्रदर्शन से जुड़ा नहीं है। कप्तान बनने के बाद उनका बल्लेबाजी औसत पहले से बेहतर हुआ और उन्होंने इस दौरान दो शतक तथा सात अर्धशतक लगाए। बाबर आजम दूसरी बार कप्तान बने बाबर आजम दूसरी बार पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कप्तानी संभालेंगे। इससे पहले उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने 20 टेस्ट में 10 जीत दर्ज की थीं। उनकी कप्तानी में टीम ने दक्षिण अफ्रीका को घरेलू सीरीज में 2-0 से हराया था, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका में भी टेस्ट सीरीज जीती थी। हालांकि उनके कार्यकाल में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 3-0 की ऐतिहासिक हार भी मिली थी। ——————————————————-

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर 3 साल बाद पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बने:शान मसूद को खराब प्रदर्शन के कारण हटाया, विंडीज से 2 मैच की सीरीज

बाबर आजम एक बार फिर पाकिस्तान टेस्ट टीम के कप्तान बनाए गए हैं। उन्हें दूसरी बार टेस्ट टीम की कमान सौंपी गई है। जबकि, शान मसूद को टीम के खराब प्रदर्शन के कारण कप्तानी से हटा दिया गया है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने रविवार को टेस्ट टीम का ऐलान किया। PCB के हाई-परफॉर्मेंस डायरेक्टर आकिब जावेद ने कहा- ‘टीम बार-बार जीते हुए मैच गंवा रही है। शान मसूद की कप्तानी में लीडरशिप नजर नहीं आती है। पाकिस्तानी टीम इस महीने के अंत में वेस्टइंडीज के खिलाफ दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेलेगी। पहला मैच 25 से तारोबा में और दूसरा मैच 2 अगस्त से पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला जाएगा। इसके बाद पाकिस्तानी टीम इंग्लैंड दौरे पर जाएगी। PCB ने इस पोस्ट के जरिए टेस्ट टीम का ऐलान किया… मसूद की कप्तानी गई, टीम में रहेंगे कप्तानी से हटाने के बाद शान मसूद टेस्ट टीम का हिस्सा हैं। आकिब जावेद ने कहा, ‘शान का व्यक्तिगत प्रदर्शन अच्छा रहा, लेकिन कप्तान के रूप में वे टीम को नतीजे नहीं दिला सके। कप्तान की जिम्मेदारी सिर्फ टॉस तक सीमित नहीं होती, बल्कि मैच को खत्म करना, DRS लेना और टीम को सही दिशा देना भी उसकी जिम्मेदारी है।’ बता दें कि कप्तान बनने के बाद उनका बैटिंग औसत पहले से बेहतर हुआ। उन्होंने दो शतक तथा सात अर्धशतक लगाए। मसूद खराब प्रदर्शन के बाद हटाए गए शान मसूद की कप्तानी में पाकिस्तान लगातार अपने पिछले सात टेस्ट मैच भी हार चुका है। जो टीम के इतिहास में संयुक्त रूप से सबसे लंबी हार की श्रृंखला है। करीब 3 साल पहले टेस्ट कप्तान बनाए गए शान मसूद ने 16 मैचों में कप्तानी की, जिसमें से टीम को 12 हार का सामना करना पड़ा। टेस्ट इतिहास में कोई भी कप्तान अपने शुरुआती 16 टेस्ट में 12 मैच नहीं हारा है। बाबर आजम दूसरी बार कप्तानी करेंगे बाबर आजम दूसरी बार पाकिस्तान की टेस्ट टीम की कप्तानी संभालेंगे। इससे पहले उनके नेतृत्व में पाकिस्तान ने 20 टेस्ट में 10 जीत दर्ज की थीं। उनकी कप्तानी में टीम ने दक्षिण अफ्रीका को घरेलू सीरीज में 2-0 से हराया था, जबकि बांग्लादेश और श्रीलंका में भी टेस्ट सीरीज जीती थी। हालांकि उनके कार्यकाल में इंग्लैंड के खिलाफ घरेलू मैदान पर 3-0 की ऐतिहासिक हार भी मिली थी। ——————————————————-

Instagram Meta Notice: Child Abuse Content Blocked

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नई दिल्ली17 मिनट पहले कॉपी लिंक इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेट को बढ़ावा देने वाले विज्ञापनों को लेकर सरकार ने पैरेंट कंपनी Meta को नोटिस भेजा। न्यूज एजेंसी PTI के अनुसार कंपनी को 7 दिन में इस नोटिस का जबाव देना होगा। ये नोटिस 4 जुलाई को जारी किया गया है। मीडिया रिपोर्टस के अनुसार IT मिनिस्ट्री ने इंस्टाग्राम को अपने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण को बढ़ावा देने वाले या ऐसे कंटेंट तक पहुंच बनाने वाले सभी विज्ञापनों को तुरंत ब्लॉक करने और हटाने के निर्देश दिए हैं। दरअसल, बीबीसी ने अपनी इन्वेस्टिगेटिव रिपोर्ट में बताया था कि इंस्टाग्राम भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़े विज्ञापन दिखा रहा है। इससे पहले सरकार ने 1 जुलाई को Meta को नोटिस जारी कर WhatsApp के यूजरनेम फीचर पर नोटिस भेजा था। BBC रिपोर्ट- Meta पर यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट सस्ता मिल रहा BBC की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इंस्टाग्राम पर चाइल्ड सेक्शुअल एब्यूज मेटेरियल मौजूद हैं। भारत में इंस्टाग्राम पर ऐसे पेड विज्ञापन चल रहे थे, जिनमें ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। इन विज्ञापनों पर क्लिक करने के बाद यूजर्स को टेलीग्राम चैनलों पर भेजा जाता था, जहां कथित तौर पर बच्चों के यौन शोषण से जुड़ा कंटेंट बेहद कम कीमत 99 रुपए में बेचा जा रहा था। रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम पर दिखने वाले सभी विज्ञापन पहले Meta के मॉडरेशन सिस्टम से मंजूरी मिलने के बाद ही लाइव होते हैं। BBC ने जब ऐसे ही एक विज्ञापन की शिकायत इंस्टाग्राम से की, तो करीब 24 घंटे बाद कंपनी ने जवाब दिया कि यह पोस्ट उसकी कम्यूनिटी गाइडलाइन का उल्लंघन नहीं है। इसके बाद BBC ने मेटा से इस मामले पर जवाब मांगा। तब कंपनी ने कहा कि उसने कई विज्ञापनों को हटा दिया है, संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड किया है और उन URL को हटा देने का दावा किया। Meta ने यह भी माना कि कोई भी मॉडरेशन सिस्टम पूरी तरह परफेक्ट नहीं होता और रिव्यू प्रोसेस हर नियम उल्लंघन की पहचान नहीं कर पाती। भास्कर नॉलेज: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री का बनाना, रखना अपराध सवाल: भारत में बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री पर क्या कानून है? जवाब: बच्चों के यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को बनाना, रखना, देखना, शेयर करना, बेचना या प्रसारित करना अपराध है। सवाल: IT Act की धारा 67B में क्या सजा है? जवाब: पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और 10 लाख रुपए तक जुर्माना। दोबारा अपराध करने पर 7 साल तक की जेल और जुर्माना। सवाल: सोशल मीडिया कंपनियों की क्या जिम्मेदारी है? जवाब: भारत के आईटी, 2021 के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को अवैध कंटेंट हटाने के लिए त्वरित कार्रवाई करनी होती है। जांच एजेंसियों के साथ सहयोग करना होता है। बच्चों के यौन शोषण से जुड़े कंटेंट की पहचान और रोकथाम के लिए उचित तकनीकी उपाय करने होते हैं। सवाल: अगर कोई ऐसा कंटेंट दिखे तो क्या करें? जवाब: उसे डाउनलोड, शेयर या फॉरवर्ड न करें। संबंधित प्लेटफॉर्म पर तुरंत रिपोर्ट करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें। जरूरत पड़ने पर स्थानीय पुलिस या साइबर सेल को सूचना दें। सवाल: सरकार इस मामले में क्या कर सकती है? जवाब: सोशल मीडिया कंपनी से जवाब मांग सकती है। प्लेटफॉर्म से कंटेंट हटाने का निर्देश दे सकती है। जांच एजेंसियों के जरिए आपराधिक जांच शुरू कर सकती है। नियमों के उल्लंघन पर आईटी कानूनों के तहत कार्रवाई कर सकती है। सवाल: क्या सिर्फ प्लेटफॉर्म ही जिम्मेदार होता है? जवाब: नहीं। ऐसे कंटेंट को अपलोड करने, खरीदने, बेचने, शेयर करने या जानबूझकर प्रसारित करने वाले व्यक्ति भी भारतीय कानून के तहत आपराधिक कार्रवाई के दायरे में आते हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…