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अमेरिका में खुफिया विभाग चीफ तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा दिया:पति हड्डी के कैंसर से जूझ रहे, कहा- मुश्किल वक्त में साथ रहना चाहती हूं

अमेरिका में खुफिया विभाग चीफ तुलसी गबार्ड ने इस्तीफा दिया:पति हड्डी के कैंसर से जूझ रहे, कहा- मुश्किल वक्त में साथ रहना चाहती हूं

अमेरिकी राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, उन्होंने यह फैसला अपने पति की गंभीर बीमारी के कारण लिया है। बताया गया है कि उनके पति एक बेहद दुर्लभ हड्डी के कैंसर से जूझ रहे हैं और गैबार्ड इस मुश्किल समय में उनके साथ रहना चाहती हैं। रिपोर्ट के अनुसार, गबार्ड ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से मुलाकात के दौरान उन्हें अपने इस्तीफे की जानकारी दी। ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) में उनका आखिरी दिन 30 जून होने की उम्मीद है। गबार्ड ने अपने चिट्ठी में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का धन्यवाद भी किया और कहा कि राष्ट्रीय खुफिया कार्यालय का नेतृत्व करना उनके लिए सम्मान की बात रही। गबार्ड बोलीं- पति सबसे मजबूत सहारा गबार्ड ने अपने 11 साल के वैवाहिक जीवन का जिक्र करते हुए कहा कि अब्राहम (पति) हमेशा उनके सबसे मजबूत सहारे रहे हैं। उन्होंने लिखा, “पूर्वी अफ्रीका में मेरी तैनाती हो, कोई राजनीतिक अभियान हो या फिर इस पद पर मेरी सेवा। हर मुश्किल समय में वे मजबूती से मेरे साथ खड़े रहे।” उन्होंने आगे कहा, “उनकी ताकत और प्यार ने मुझे हर चुनौती से लड़ने की शक्ति दी है। ऐसे में मैं उनसे यह उम्मीद नहीं कर सकती कि वह इस कठिन लड़ाई का अकेले सामना करें जबकि मैं इतने व्यस्त और जिम्मेदारी वाले पद पर बनी रहूं।” गबार्ड ने यह भी कहा कि उन्होंने ऑफिस ऑफ डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस (ODNI) में काम करते हुए खुफिया तंत्र में पारदर्शिता बढ़ाने और उसकी विश्वसनीयता बहाल करने की दिशा में अहम प्रगति की है। हालांकि उन्होंने माना कि अभी भी कई महत्वपूर्ण काम बाकी हैं। तुलसी गबार्ड के 5 बड़े काम

Natural way to purify drinking water| पीने का पानी साफ करने का नेचुरल तरीका

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Last Updated:May 22, 2026, 22:44 IST Water Purify Seed: महंगे वाटर फिल्टर पानी में मौजूद जिन माइक्रोप्लास्टिक को नहीं छान पाते हैं, उन्हें आप मोरिंगा के बीज से अलग कर सकते हैं. ब्राजील के शोधकर्ताओं ने इसकी पुष्टि की है. यहां आप पानी को साफ करने के लिए मोरिंगा सीड के इस्तेमाल के तरीके को जान सकते हैं. ख़बरें फटाफट दुनिया भर में पीने के लिए साफ पानी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. इस समस्या ने वाटर फिल्टर का बड़ा मार्केट तो तैयार कर दिया है, लेकिन समस्या ये है कि सबके के लिए इसे अफोर्ड कर पाना आज भी मुश्किल है. ऐसे में बचाव के लिए सामने आता है नेचुरल उपाय. जिसके लिए आपको कोई भारी कीमत चुकाने की जरूरत नहीं पड़ती है और फायदे हजारों के मिल जाते हैं. ऐसा ही एक नेचुरल तरीका यहां आप जानेंगे जो पानी को साफ करके पीने योग्य बनाता है. आजकल जब भी हम नल का पानी पीते हैं, तो उसके साथ शरीर में बहुत छोटे-छोटे प्लास्टिक के कण के जाने का भी खतरा होता है, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहा जाता है. ये प्लास्टिक के बेहद छोटे टुकड़े होते हैं, जो बोतलों, पैकेजिंग और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक चीजों से टूटकर पानी में मिल जाते हैं. ये इतने छोटे होते हैं कि आसानी से दिखाई नहीं देते. चिंता का विषय ये है कि ये नदियों, पीने के पानी और यहां तक कि इंसानों के खून में भी पाए गए हैं. रिसर्च में मिला नेचुरल सॉल्यूशनअब तक माइक्रोप्लास्टिक हटाने के लिए कई रासायनिक तरीकों का इस्तेमाल किया जाता रहा है, लेकिन इनमें इस्तेमाल होने वाले केमिकल भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. ऐसे में वैज्ञानिकों ने एक प्राकृतिक उपाय खोजा है, जो मोरिंगा यानी सहजन का पौधा है. ब्राजील के साओ पाउलो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पाया कि मोरिंगा के बीज पानी को साफ करने में मदद कर सकते हैं. मोरिंगा के बीजों से पानी की सफाईमोरिंगा भारत में भी काफी पाया जाता है और इसके पत्ते व बीज खाने में इस्तेमाल किए जाते हैं. यह पौधा पौष्टिक गुणों के लिए पहले से ही प्रसिद्ध है. शोध में पता चला कि मोरिंगा के बीजों से तैयार किया गया नमक वाला अर्क पानी को साफ करने में उसी तरह काम करता है, जैसे पानी साफ करने वाले प्लांट्स में इस्तेमाल होने वाला एल्युमिनियम सल्फेट करता है. यह पदार्थ गंदगी और माइक्रोप्लास्टिक को एक जगह इकट्ठा कर देता है, जिससे उन्हें आसानी से हटाया जा सकता है. ऐसे करें यूजमोरिंगा के बीजों से पानी साफ करने के लिए सबसे पहले सूखे बीजों का छिलका हटाकर अंदर के बीज निकाल लें. इन्हें अच्छी तरह पीसकर बारीक पाउडर बना लें. अब एक लीटर साफ पानी में लगभग 1-2 चम्मच मोरिंगा पाउडर मिलाएं. इस मिश्रण को 5 मिनट तक अच्छे से हिलाएं, फिर 10-15 मिनट धीरे-धीरे चलाएं. इसके बाद पानी को 1-2 घंटे तक बिना छेड़े छोड़ दें. मोरिंगा के तत्व गंदगी और छोटे कणों को आपस में चिपकाकर नीचे बैठा देते हैं. ऊपर का साफ पानी कपड़े से छानकर इस्तेमाल किया जा सकता है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

Yoga Benefits: डिप्रेशन को दूर रखने के आसान तरीके, करें ये 5 योगासन, आयुष मंत्रालय की सलाह

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Last Updated:May 22, 2026, 22:06 IST Yoga For Depression: योग करने से शरीर में तनाव बढ़ाने वाले हार्मोन कम होते हैं और मन शांत रहता है. इससे चिंता, घबराहट और डिप्रेशन जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है. यहां आप खास योगासन और प्राणायाम मानसिक स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभकारी माने जाते हैं. ख़बरें फटाफट Yoga For Depression: आज के समय में मेंटल हेल्थ इश्यू बहुत तेजी से बढ़ रहे हैं. कम उम्र से ही लोग एंग्जायटी और डिप्रेशन से स्ट्रगल कर रहे हैं. ऐसे में आ रहे विश्व योग दिवस के मौके पर भारत सरकार का आयुष मंत्रालय लोगों को योग के फायदे बता रहा है. मंत्रालय का उद्देश्य है कि लोग योग अपनाकर शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ रहें. आयुष मंत्रालय ने खासतौर पर ऐसे योगासन और प्राणायाम बताए हैं, जो डिप्रेशन और तनाव को कम करने में मदद करते हैं. योग विशेषज्ञों के अनुसार, योग केवल शरीर को फिट रखने का तरीका नहीं है, बल्कि यह मन को शांत करने और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने में भी बहुत फायदेमंद है. आज की तेज रफ्तार जिंदगी, काम का तनाव, पारिवारिक समस्याएं और मानसिक दबाव के कारण डिप्रेशन की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे समय में रोजाना योग करना बहुत जरूरी हो गया है. योग से रखें रोग को दूरआयुष मंत्रालय का संदेश है “योग युक्त, रोग मुक्त.” मंत्रालय लोगों से अपील कर रहा है कि वे हर दिन सुबह कुछ समय योग के लिए निकालें. शुरुआत में 15 से 20 मिनट योग करना पर्याप्त है और बाद में धीरे-धीरे समय बढ़ाया जा सकता है. नियमित योगाभ्यास करने से शरीर स्वस्थ रहता है और मानसिक तनाव भी कम होता है. डिप्रेशन में फायदेमंद ये योगासन पवनमुक्तासनयह आसन पेट से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मदद करता है, साथ ही यह मन की बेचैनी और नकारात्मक सोच को कम करने में भी फायदेमंद है. भ्रामरी प्राणायामइस प्राणायाम में भौंरे जैसी आवाज निकालते हुए सांस ली और छोड़ी जाती है. इससे दिमाग शांत होता है और तनाव व चिंता कम होती है. ताड़ासनखड़े होकर किया जाने वाला यह आसान शरीर को ऊर्जा देता है. इससे शरीर का संतुलन और आत्मविश्वास बढ़ता है. भुजंगासनसांप की मुद्रा जैसा यह आसन रीढ़ की हड्डी को मजबूत बनाता है और छाती की जकड़न कम करता है. यह मन में आने वाली नकारात्मक भावनाओं को भी कम करने में मदद करता है. अनुलोम-विलोमयह प्राणायाम मन को शांत रखने और दिमाग के दोनों हिस्सों में संतुलन बनाने में मदद करता है. इसे नियमित करने से मानसिक तनाव कम होता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

मसाला स्वीट कॉर्न रेसिपी: तला-भुना नहीं, घर में ऐसे बनाएं 20 रुपये की चटनी से मेकर स्वीट कॉर्न,बनाना भी है आसान

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 1 छोटी चम्मच, 1 छोटी चम्मच काली मिर्च, 1/2 छोटी चम्मच काली मिर्च, 1/2 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर, 1/2 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी चम्मच काली मिर्च पाउडर, 1 छोटी चम्मच काली मिर्च का रस, 1/2 छोटी चम्मच हरी धनिया छवि: फ्रीपिक सबसे पहले छल्ली से मकई के दाने निकाले। अब एक पोएट्री में पानी गर्म करें और कॉर्नस्टैंड 5 से 7 मिनट तक का हिस्सा लें। जब कॉर्न नैचुरल हो जाए, तो पानी गुडकर क्वे एक बाउल में निकाल लें। छवि: एआई अब इसमें शामिल करें ताकि मक्के का स्वाद और भी बढ़ जाए। अब जमे हुए मक्के में काला नमक, चाट मसाला, लाल मिर्च पाउडर और काली मिर्च के मसाले से मिश्रण करें। छवि: फ्रीपिक इसके ऊपर नींबू का रस और हरा धनिया मिला दिया गया। आपका चटपटा मसाला स्वीट कॉर्न तैयार है। अगर आपको ज्यादातर मसालों का स्वाद पसंद है, तो इसमें रंगीन कटी हरी मिर्च भी डाल सकते हैं। छवि: एआई चीज पसंद करने वाले लोग ऊपर से छोटी कद्दूकस की हुई चीज मशीनरी इसे और भी टेस्टी बना सकते हैं। मीठे मकई में विटामिन और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। छवि: एआई यह पेट लंबे समय तक भरा रहता है और जल्दी भूख भी नहीं लगती। बाजार के स्वाद-भुने समुद्र तट की जगह अगर आप घर का बना मसाला मीठा मक्का खाएंगे, तो स्वाद के साथ सेहत भी बनी रहेगी। छवि: फ्रीपिक सिर्फ 20 रुपये प्रति किलो से आप घर के बाजार में पिज्जा जैसे स्वीट कॉर्न तैयार कर सकते हैं। बच्चों से लेकर बड़ों तक, इसका स्वाद हर किसी को पसंद आता है। छवि: फ्रीपिक (टैग अनुवाद करने के लिए)मसालेदार स्वीट कॉर्न रेसिपी(टी)मसाला स्वीट कॉर्न(टी)मसाला स्वीट कॉर्न रेसिपी(टी)स्नैक रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)स्वस्थ आहार(टी)स्वीट कॉर्न रेसिपी(टी)मसालेदार स्वीट कॉर्न(टी)स्वीट कॉर्न स्नैक रेसिपी घर पर

weak bones Symptoms: ऑस्टियोपोरोसिस के शुरुआती लक्षण

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Last Updated:May 22, 2026, 20:00 IST Bones Weaking Disease Sign: हड्डियों में कमजोरी जीवन को मुश्किल बना सकती है. यदि आपको मूवमेंट में तकलीफ होती है, छोटी सी चोट भी फ्रेक्चर का कारण बन रही है, तो ये ऑस्टियोपोरोसिस की गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. ख़बरें फटाफट हड्डियां हमारे शरीर का बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. वे शरीर को सहारा देती हैं, चलने-फिरने में मदद करती हैं और अंदरूनी अंगों की सुरक्षा करती हैं. लेकिन बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं. बहुत ज्यादा कमजोरी जिससे चलना-फिरने में परेशानी होने लगे तो इसे ऑस्टियोपोरोसिस कहा जाता है. इसे “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके कोई खास लक्षण दिखाई नहीं देते. अक्सर लोगों को इसका पता तब चलता है जब हड्डी टूट जाती है या तेज दर्द होने लगता है. ऑस्टियोपोरोसिस में हड्डियों की घनत्व यानी बोन डेंसिटी कम हो जाती है. शरीर नई हड्डियां कम बनाता है और पुरानी हड्डियां तेजी से कमजोर होने लगती हैं. कमजोर हड्डियां हल्की चोट, गिरने या अचानक झटका लगने से भी टूट सकती हैं. यह समस्या खासतौर पर रीढ़, कूल्हों और कलाई की हड्डियों को अधिक प्रभावित करती है. 50 के बाद बढ़ता है रिस्कलखनऊ के मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में अस्थि रोग एवं जोड़ प्रतिस्थापन के निदेशक, डॉ. प्रसून कांत शमशेरी बताते हैं कि यह बीमारी किसी को भी हो सकती है, लेकिन 50 साल से अधिक उम्र की महिलाओं में इसका खतरा ज्यादा होता है. मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है, जिससे हड्डियां जल्दी कमजोर होने लगती हैं. हालांकि पुरुषों में भी उम्र बढ़ने के साथ यह समस्या हो सकती है. क्योंकि इसके होने का एक बड़ा कारण कैल्शियम और विटामिन D की कमी होता है.साथ ही गलत खानपान, धूम्रपान, शराब और व्यायाम की कमी भी हड्डियों को नुकसान पहुंचाते हैं. ऑस्टियोपोरोसिस के कुछ शुरुआती संकेतकद कम होनापीठ दर्दकमजोरी महसूस होनापकड़ कमजोर होनानाखून का जल्दी टूटनाअचानक फ्रैक्चर होना बचाव के उपायडॉक्टर बताते हैं कि इस बीमारी से बचाव के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है. ऐसे में हड्डियों को मजबूत रखने के लिए दूध, दही, पनीर, बाजरा, तिल, बादाम और हरी सब्जियां खाएं, क्योंकि इसमें कैल्शियम की अच्छी मात्रा होती है. इसके साथ ही सुबह की धूप में कुछ देर बिना सनस्क्रिन बैठें, जिससे आपके शरीर को पर्याप्त विटामिन D मिल सके. इसके अलावा रोजाना चलना, योग, सीढ़ियां चढ़ना और हल्का व्यायाम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. इस बात का भी रखें ध्यानडॉक्टर 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को समय-समय पर बोन डेंसिटी टेस्ट करवाने की भी सलाह देते हैं. इससे समय रहते बीमारी का पता चलने पर सही इलाज, सप्लीमेंट और अच्छी जीवनशैली से हड्डियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : New Delhi,Delhi Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

मूंग दाल इडली रेसिपी: जानें मूंग दाल की इडली, स्वाद के साथ मिलेगा हाई प्रोटीन; बनाना भी है मिनट का काम

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मूंग दाल इडली बनाने के लिए आवश्यक सामग्री: 1 कप ढीली मूंग दाल, 2 बड़ी मूंग सूजी, 1/2 कप दही, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, नमक का स्वाद, 1/2 छोटा चम्मच ईनो या सोया सोडा, तेल, हरा धनिया छवि: फ्रीपिक सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह ढोकर 2 से 3 घंटे के लिए पानी में डुबोकर देखें। इसके बाद पानी की दाल को हरी मिर्च, अदरक और छोटे पानी के मसाले में पीस लें। छवि: एआई अब इस पेस्ट को एक बड़े पॉट में रखा और उसमें सूजी, दही और नमक के टुकड़े से मिला लिया। बैटर बहुमत लागे तो थोड़ा पानी मिला सकते हैं। छवि: फ्रीपिक इडली स्टैंड को तेल लगाकर ग्रीस कर लें। अब बैटर में इनो और हाथ से मिला दिया। तुरंत बैटर को इडली मोल्ड में डालें। इसके बाद स्टीमर या कुकर में 10 से 12 मिनट तक इडली को स्टीमर में पकाएं। छवि: एआई जब इडली फूल जाए और नर्म हो जाए तो गैस बंद कर दें। थोड़ी ठंडी होने पर इडली को मोल्ड से निकाल लें. तैयार है गर्मागर्म मूंग दाल इडली। छवि: एआई आप इसमें कद्दूकस की हुई गाजर, साबुत मिर्च या मटर भी मिला सकते हैं। इससे इडली और अधिकांश कलाकृतियां और रंग-बिरंगे बनेंगे। इसे नारियल चिप्स, टमाटर चिप्स या सांबर के साथ सर्व करें। छवि: फ्रीपिक मूंग दाल प्रोटीन, गाजर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है। यह पाचन में शामिल होता है और वजन नियंत्रित करने वालों के लिए भी अच्छा वर्गीकरण होता है। छवि: फ्रीपिक (टैग्सटूट्रांसलेट)घर पर मूंग दाल इडली कैसे बनाएं(टी)मूंग दाल इडली कैसे बनाएं(टी)मूंग दाल इडली रेसिपी(टी)घर पर बनी मूंग दाल इडली रेसिपी(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)भारतीय व्यंजन(टी)दक्षिण भारतीय डिश(टी)मूंग दाल की इडली

RBI सरकार को देगा ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड:पिछले साल से 7% की बढ़ोतरी; ईरान-इजराइल संकट के बीच खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

RBI सरकार को देगा ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड:पिछले साल से 7% की बढ़ोतरी; ईरान-इजराइल संकट के बीच खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ का डिविडेंड (प्रोफिट का हिस्सा) देने की मंजूरी दी है। शुक्रवार को RBI के सेंट्रल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान है। पिछले साल RBI ने ₹2.11 लाख करोड़ के मुकाबले 27% ज्यादा यानी ₹2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया था। इस बार की राशि पिछले रिकॉर्ड से भी करीब 7% अधिक है। मिडल ईस्ट संकट के बीच सरकार को मिला सुरक्षा कवच मिडल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में RBI से मिली यह बड़ी रकम केंद्र सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे सरकार को खाद और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। RBI की कमाई 26% बढ़ी, बैलेंस शीट ₹91 लाख करोड़ पार रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उसकी कुल कमाई में लगभग 26% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बैंक के खर्चों में भी करीब 28% का इजाफा हुआ है। RBI की बैलेंस शीट अब 20% बढ़कर करीब ₹92 लाख करोड़ की हो गई है। अगर बैंक के शुद्ध मुनाफे की बात करें (किसी भी तरह के रिस्क फंड को अलग रखने से पहले), तो इस साल RBI ने ₹3.95 लाख करोड़ कमाए हैं, जो पिछले साल के ₹3.13 लाख करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। रिस्क बफर में कटौती, ताकि सरकार को मिल सके ज्यादा पैसा RBI ने इस बार अपने ‘इमरजेंसी फंड’ (कंटीजेंसी रिस्क बफर) में से थोड़ी कटौती करने का फैसला किया है। यह वह पैसा होता है जिसे रिजर्व बैंक किसी भी अचानक आने वाले आर्थिक संकट या बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए संभालकर रखता है। पहले RBI अपनी कुल संपत्ति (बैलेंस शीट) का 7.5% हिस्सा इस फंड में रखता था, जिसे अब घटाकर 6.5% कर दिया गया है। चूंकि बैंक ने अपने इमरजेंसी फंड में पैसा कम डाला, इसीलिए उसके पास ज्यादा बचत (सरप्लस) बच गई, जिसे उसने सरकार को दे दिया। यही वजह है कि इस साल सरकार को मिलने वाले पैसे में इतनी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इसे एक उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपकी कमाई ₹100 है और आप हर महीने ₹7.50 ‘इमरजेंसी गुल्लक’ में डालते थे। इस महीने आपने तय किया कि आप गुल्लक में सिर्फ ₹6.50 डालेंगे। ऐसा करने से आपकी जेब में ₹1 एक्स्ट्रा बच गया। RBI ने भी ठीक ऐसा ही किया, जिससे सरकार को देने के लिए उसके पास ज्यादा पैसा जमा हो गया। बजट घाटे को कंट्रोल करने में होगी आसानी रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, RBI का यह डिविडेंड उनकी उम्मीदों के अनुरूप है। हालांकि, फर्टिलाइजर और फ्यूल सब्सिडी के कारण सरकार का वित्तीय घाटा दबाव में रह सकता है। नायर ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की औसत कीमत $95 प्रति बैरल रहने की स्थिति में वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार का वित्तीय घाटा GDP के 4.3% के लक्ष्य से 40 बेसिस पॉइंट ज्यादा रह सकता है। भारी डिविडेंड इस घाटे को कम रखने में मदद करेगा। मिडिल ईस्ट वॉर का भारत पर असर: बॉन्ड यील्ड बढ़ी ईरान के युद्ध की वजह से भारत के सरकारी बॉन्ड (सरकारी निवेश योजना) पर मिलने वाला ब्याज यानी यील्ड 0.40% तक बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ कि अब कंपनियों के लिए बाजार से कर्ज लेना काफी महंगा हो गया है, जो पिछले कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर है। भारत पर इस संकट का सबसे ज्यादा बुरा असर इसलिए पड़ रहा है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदते हैं। हालांकि, आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर रोक लगा रखी है, ताकि तेल कंपनियां तुरंत दाम न बढ़ाएं। बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड यह एक तरह का मीटर है जिससे पता चलता है कि बाजार में पैसा कितना महंगा या सस्ता है। इसके बढ़ने का मतलब है कि अब बैंकों और कंपनियों को पैसा उधार लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। डिविडेंड क्या होता है? जैसे किसी कंपनी को मुनाफा होने पर वह अपने मालिकों या शेयरधारकों को पैसा बांटती है, वैसे ही RBI साल भर की अपनी कमाई में से खर्चों और जरूरी रिजर्व फंड को निकालकर बचा हुआ पैसा सरकार को सौंप देता है। इसी को ‘सरप्लस’ या ‘डिविडेंड’ कहते हैं।

Ebola Outbreak 2026: कोरोना से कम संक्रामक पर 50% मृत्यु दर, इबोला के बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर क्यों काम नहीं कर रही पुरानी वैक्सीन? WHO का रेड अलर्ट!

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नई दिल्ली: सेंट्रल अफ्रीका में फैले नए इबोला वायरस ने पूरी दुनिया को डरा दिया है. डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) और युगांडा में इंफेक्शन बहुत तेजी से पैर पसार रहा है. सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और मामलों का ग्राफ लगातार ऊपर जा रहा है. एक्सपर्ट्स को डर है कि मई की शुरुआत में हुई एक ‘सुपर स्प्रेडर’ घटना के बाद यह वायरस कई देशों में फैल सकता है. इसी बीच वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन (WHO) के डायरेक्टर जनरल डॉ. टेड्रोस एडहानोम गेब्रिएसस ने एक ऐसी घोषणा की है, जिसने सबको चिंता में डाल दिया है. उनका कहना है कि इस नए इबोला आउटब्रेक से निपटने के लिए अगले 6 से 9 महीने तक कोई भी वैक्सीन उपलब्ध नहीं हो पाएगी. जब दुनिया के पास पहले से ही इबोला की वैक्सीन मौजूद है, तो इस बार ऐसा क्यों हो रहा है. आखिर क्यों मौजूदा मेडिकल साइंस इस नए खतरे के सामने बेबस नजर आ रही है. इसके पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक कारण है, जिसे समझना बेहद जरूरी है. इबोला का इतिहास क्या है? इबोला वायरस की खोज पहली बार साल 1976 में हुई थी. यह एक बेहद खतरनाक और जानलेवा बीमारी है, जो इंसानों और प्राइमेट्स (जैसे चिंपैंजी और गोरिल्ला) को अपना शिकार बनाती है. WHO की रिपोर्ट बताती है कि यह वायरस चमगादड़, साही और प्राइमेट्स के जरिए इंसानों में आता है. इसके बाद यह मरीजों के खून, शारीरिक तरल पदार्थ (बॉडी फ्लूइड्स) और उनके कपड़ों के संपर्क में आने से दूसरे इंसानों में फैलता है. इस बीमारी की औसतन मृत्यु दर लगभग 50 परसेंट है. आज से करीब एक दशक पहले साल 2014 में वेस्ट अफ्रीका में इबोला का सबसे खतरनाक हमला हुआ था. उस आउटब्रेक में दुनिया भर में 11,000 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी. उस समय तबाही मचाने वाला वायरस इबोला का ‘जायरे स्ट्रेन’ (Zaire strain) था. वह इतिहास का सबसे बड़ा आउटब्रेक था, जो गिनी से शुरू होकर सिएरा लियोन और लाइबेरिया तक फैल गया था. जायरे स्ट्रेन का इलाज न होने पर मृत्यु दर 90 परसेंट तक पहुंच जाता है. यही वजह थी कि वैज्ञानिकों ने रात-दिन एक करके इस खास स्ट्रेन के खिलाफ दो बेहतरीन वैक्सीन और मोनोक्लोनल एंटीबॉडीज तैयार कर ली थीं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन क्या है और यह क्यों खतरनाक है? मौजूदा संकट के पीछे असली विलेन इबोला का एक बिल्कुल अलग रूप है, जिसे ‘बुंडिबुग्यो स्ट्रेन’ (Bundibugyo strain) कहा जाता है. इंसानों को बीमार करने वाले इबोला के मुख्य रूप से चार स्ट्रेन हैं, जिनमें जायरे और बुंडिबुग्यो शामिल हैं. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन का इतिहास बहुत छोटा है. इतिहास में इसके सिर्फ दो आउटब्रेक देखे गए हैं. पहला साल 2007 में युगांडा में और दूसरा साल 2012 में कांगो में हुआ था. इस स्ट्रेन की चपेट में आने वाले करीब एक-तिहाई मरीजों की मौत हो जाती है. सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि हमारे पास जो 5 लाख से ज्यादा वैक्सीन डोज (जैसे एरवेबो वैक्सीन) का स्टॉक मौजूद है, वह जायरे स्ट्रेन के लिए बना है. बुंडिबुग्यो स्ट्रेन पर वह वैक्सीन काम करेगी या नहीं, इसका कोई ठोस सबूत नहीं है. वायरस की बनावट अलग होने के कारण पुरानी वैक्सीन इस नए आउटब्रेक को रोकने में नाकाम साबित हो रही है. नई वैक्सीन आने में 9 महीने का समय क्यों लगेगा? WHO के एडवाइजर डॉ. वासी मूंथी के मुताबिक, बुंडिबुग्यो इबोला के खिलाफ दो ‘कैंडिडेट वैक्सीन’ पर काम चल रहा है, लेकिन अभी तक इनका इंसानों पर ट्रायल (क्लीनिकल ट्रायल) नहीं हुआ है. पहली वैक्सीन उसी रीकॉम्बीनेंट वेसिकुलर स्टोमेटाइटिस वायरस (rVSV) प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जिससे जायरे स्ट्रेन की सफल वैक्सीन बनी थी. इसे सबसे ज्यादा उम्मीद जगाने वाली वैक्सीन माना जा रहा है, लेकिन इसके क्लीनिकल ट्रायल में 6 से 9 महीने का समय लगना तय है. दूसरी वैक्सीन को ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी और सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) मिलकर तैयार कर रहे हैं. यह एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन की तरह ChAdOx प्लेटफॉर्म पर काम करती है. यह वैक्सीन अगले दो से तीन महीनों में क्लीनिकल ट्रायल के लिए तैयार हो सकती है. हालांकि, अभी तक इसका जानवरों पर भी पूरी तरह टेस्ट नहीं हुआ है, जिससे इसकी सफलता को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है. जानवरों के टेस्ट सफल होने के बाद ही इसे इंसानों के ट्रायल के लिए मंजूरी मिलेगी. इसी वजह से WHO ने वैक्सीन उपलब्ध होने के लिए 6 से 9 महीने की समयसीमा तय की है. इस पूरे मामले पर एक्सपर्ट्स का क्या कहना है? हेल्थ एक्सपर्ट्स इस स्थिति को बेहद गंभीर मान रहे हैं. डलास की यूटी साउथवेस्टर्न मेडिकल सेंटर की एसोसिएट प्रोफेसर कृतिका कुप्पल्ली कहती हैं कि भले ही बुंडिबुग्यो के आउटब्रेक पहले कम हुए हों, लेकिन यह एक बेहद घातक पैथोजन (बीमारी फैलाने वाला वायरस) है. इस बार स्थिति इसलिए ज्यादा डरावनी है क्योंकि हमारे पास इसके लिए कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या खास दवा उपलब्ध नहीं है. स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के फिजिशियन डॉ. अबरार करन इसे ‘परफेक्ट स्टॉर्म’ यानी एक बहुत बड़ी मुसीबत की शुरुआत बताते हैं. हालांकि, राहत की बात यह है कि इबोला हवा के जरिए नहीं फैलता. इसलिए यह कोविड-19 या खसरे (Measles) जितना संक्रामक नहीं है. इबोला के मरीजों का इलाज कर चुकीं डॉ. नाहिद भदेलिया बताती हैं कि इबोला का एक मरीज औसतन दो लोगों को संक्रमित करता है, जबकि खसरे का एक मरीज 18 लोगों को बीमार कर सकता है. भले ही यह कम फैलता हो, लेकिन इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है. इस आउटब्रेक को लेकर क्या राजनीति हो रही है? इस महामारी के बीच अंतरराष्ट्रीय राजनीति भी शुरू हो गई है. अमेरिका के सेक्रेटरी ऑफ स्टेट मार्को रुबियो ने आरोप लगाया है कि WHO ने इस आउटब्रेक को संभालने में काफी देर कर दी. दूसरी तरफ, कांगो के इस संकट के बीच अमेरिकी प्रशासन ने वहां 50 इबोला ट्रीटमेंट क्लिनिक बनाने के लिए 23 मिलियन डॉलर की मदद का एलान किया है. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) ने भी आपातकालीन फंड से 60 मिलियन डॉलर जारी किए हैं. हालांकि, युगांडा के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अमेरिका की तरफ से ऐसे किसी ट्रीटमेंट सेंटर बनाए जाने की कोई जानकारी नहीं मिली है. मार्को रुबियो के आरोपों का

हरे प्याज़ मटर का पराठा रेसिपी: पनीर-आलू नहीं, घर में ऐसे बनाएं हरे प्याज़ और मटर का पराठा, खाते ही खाते रह जायेंगे उगलियाँ

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 2 कप आटे का आटा, 1 कप हरा प्याज, 1/2 कप मसाले वाले मटर, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा अदरक, 1/2 छोटा जीरा, 1/2 छोटा लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा धनिया पाउडर, नमक का स्वाद, घी छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बाउल में सुलगते हुए मटर को इम्पैक्ट मैश कर लें। अब इसमें हरी प्याज, हरी मिर्च, अदरक, जीरा, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर और नमक के मसाले अच्छी तरह मिला लें। छवि: फ्रीपिक एक बड़े पैमाने पर मिट्टी के बर्तनों का आटा लें और आवश्यकता के अनुसार पानी के टुकड़ों में आटा गूंध लें। क्रूज़ तो इसमें थोड़ा सा तेल भी मिला सकते हैं, इससे पराठे नरम बने होते हैं। आटे की छोटी-छोटी लोट्टियाँ बना लें। छवि: एआई अब एक लोई को प्रभाव बेलें और उसके बीच में तैयार स्टफिंग भर दें। बच्चे को बंद करके धीरे-धीरे-धीरे-धीरे पराठा बेल लें। गरम तवे पर पराठा डालें और दोनों तरफ घी या तेल का मिश्रण, सोना और कुरकुरा होने तक सेक लें। छवि: एआई गरमा-गरम हरे प्याज और मटर का पराठा दही, अचार या सफेद मक्खन के साथ सर्व करें। चाय के साथ इसका स्वाद और भी शानदार लगता है। छवि: एआई अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च कम डालें। परांठे को ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए थोड़ा सा चाट मसाला भी मिला सकते हैं. मटर का इस्तेमाल करेंगे तो स्वाद और बेहतर आएगा। छवि: फ्रीपिक घर में मौजूद है आसान गुमनाम से बनने वाला यह पराठा स्वाद और स्वास्थ्य मित्र का बेहतरीन संयोजन है। एक बार इसे जरूर बनाएं, परिवार वाले बार-बार इसे जरूर बनाएं। छवि: फ्रीपिक

भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला:सऊदी-US पीछे छूटे; होर्मुज बंद होने के बाद भारतीय कंपनियों ने खरीद बढ़ाई

भारत का तीसरा सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना वेनेजुएला:सऊदी-US पीछे छूटे; होर्मुज बंद होने के बाद भारतीय कंपनियों ने खरीद बढ़ाई

होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के बाद वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मच गई है। ऐसे वक्त में जब मिडिल ईस्ट के देशों के तेल सप्लाई पर असर पड़ा वेनेजुएला अचानक भारत का तीसरा सबसे बड़ा कच्चा तेल सप्लायर बनकर उभरा है। एनर्जी ट्रैकिंग डेटा केप्लर के मुताबिक वेनेजुएला ने मई 2026 में सऊदी अरब और अमेरिका दोनों को पीछे छोड़ दिया है। अभी केवल रूस और UAE ही उससे आगे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक इस महीने भारत को वेनेजुएला से होने वाली तेल सप्लाई अप्रैल के मुकाबले करीब 50 फीसदी बढ़ गई है। अमेरिका ने जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ने के बाद वहां के तेल निर्यात पर कुछ ढील दी थी। उसी के बाद अप्रैल से भारत में फिर से वेनेजुएला का तेल आना शुरू हुआ। 9 महीने बाद भारत ने तेल खरीदना शुरू किया केप्लर डेटा के मुताबिक, मई में अब तक भारत ने वेनेजुएला से करीब 4.17 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा है। अप्रैल में यह आंकड़ा 2.83 लाख बैरल प्रतिदिन था, जबकि उससे पहले लगातार 9 महीने तक भारत ने वेनेजुएला से कोई तेल नहीं खरीदा था। इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह दो हैं। पहली, मिडिल ईस्ट में युद्ध और होर्मुज स्ट्रेट संकट की वजह से सप्लाई प्रभावित हुई है। दूसरी, वेनेजुएला का भारी और हाई-सल्फर वाला कच्चा तेल सस्ता पड़ रहा है। रिलायंस जैसी भारतीय रिफाइनरियां इसे प्रोसेस करने में सक्षम हैं, इसलिए उन्होंने खरीद बढ़ा दी। केपलर के एनालिस्ट निखिल दुबे के मुताबिक भारतीय रिफाइनर लंबे समय से वेनेजुएला के तेल में दिलचस्पी दिखाते रहे हैं क्योंकि यह सस्ता है और भारत की जटिल रिफाइनिंग प्रणाली के अनुकूल है। खास तौर पर गुजरात में रिलायंस की रिफाइनरी इस तेल के लिए काफी उपयुक्त मानी जाती है। सऊदी अरब ने तेल की कीमत बढ़ाई भारत का कुल कच्चा तेल आयात मई में बढ़कर 49 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया है, जो अप्रैल से 8% ज्यादा है। लेकिन यह अभी भी फरवरी के 52 लाख बैरल प्रतिदिन के स्तर से नीचे है। फरवरी के बाद ईरान युद्ध और होर्मुज संकट ने पश्चिम एशिया से तेल सप्लाई को प्रभावित किया। ईरान से भारत को अप्रैल में 7 साल बाद फिर तेल मिला था क्योंकि अमेरिकी प्रतिबंधों में ढील दी गई थी। लेकिन मई में अब तक ईरानी तेल नहीं पहुंचा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की वजह से ईरान के बंदरगाहों से सप्लाई रुक गई। वहीं इराक से कुछ सप्लाई दोबारा शुरू हुई है, लेकिन वह भी फरवरी के मुकाबले बहुत कम है। सऊदी अरब की सप्लाई में भी भारी गिरावट आई है। अप्रैल में भारत को सऊदी अरब से 6.7 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला था, जो मई में घटकर करीब 3.4 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया। केप्लर के मुताबिक इसकी वजह सऊदी तेल की बढ़ी कीमतें हैं, यानी भारतीय कंपनियों को वेनेजुएला का तेल ज्यादा सस्ता पड़ रहा है। वेनेजुएला की राष्ट्रपति जल्द भारत आएंगी अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज अगले हफ्ते भारत आ सकती हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान तेल आपूर्ति को लेकर बातचीत होगी। करीब 303 अरब बैरल तेल भंडार के साथ वेनेजुएला दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार वाला देश माना जाता है। यह भंडार सऊदी अरब और अमेरिका से भी ज्यादा है। हालांकि वर्षों तक अमेरिकी प्रतिबंधों और सरकारी कुप्रबंधन की वजह से वहां तेल उत्पादन बुरी तरह प्रभावित रहा। अब अमेरिका और वेनेजुएला दोनों कोशिश करेंगे कि भारत के साथ ऐसा समझौता हो जाए जिससे वेनेजुएला से तेल निर्यात में आई यह तेजी आगे भी जारी रह सके। वेनेजुएलाई तेल को बाजार में एंट्री दिलाने की कोशिश में अमेरिका अब जब पश्चिम एशिया युद्ध की चपेट में है और तेल बाजार में आपूर्ति संकट पैदा हो गया है, तो अमेरिका, वेनेजुएला के तेल को फिर से वैश्विक बाजार में लाने की कोशिश करता दिख रहा है। भारत पहले से ही रूस से ज्यादा तेल खरीद रहा था। अमेरिका इससे नाराज रहा है। ट्रम्प सरकार का कहना है कि इससे रूस को यूक्रेन युद्ध के लिए पैसा मिल रहा है। ईरान युद्ध शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फरवरी में रूसी तेल खरीद कम करने और अमेरिका व वेनेजुएला से ज्यादा तेल लेने का वादा किया था। अब मार्को रुबियो जो खुद भी 23 से 26 मई तक भारत दौरे पर आने वाले हैं, कह रहे हैं कि अमेरिका चाहता है कि भारत ज्यादा से ज्यादा अमेरिकी और वेनेजुएलाई तेल खरीदे। रुबियो ने कहा, “हम भारत को जितनी ऊर्जा बेच सकते हैं, बेचना चाहते हैं। हमें लगता है कि वेनेजुएलाई तेल में भी बड़ा मौका है।” एक्सपर्ट्स का कहना है कि मार्को रुबियो और डेल्सी रोड्रिगेज की लगभग एक साथ भारत यात्रा यह दिखाती है कि अब तेल और ऊर्जा से जुड़ी राजनीति पर युद्ध और दुनिया की बड़ी ताकतों के टकराव का सीधा असर पड़ रहा है। भारत के 13 जहाज होर्मुज में अभी भी फंसे हैं आम तौर पर भारत का लगभग आधा कच्चा तेल खाड़ी देशों से होर्मुज स्ट्रेट के जरिए आता है। इसी रास्ते से बड़ी मात्रा में LNG और पेट्रोलियम गैस भी आती है। लेकिन ईरान के आसपास बढ़ते युद्ध और समुद्री संघर्ष की वजह से यह अहम समुद्री रास्ता लगभग बंद जैसा हो गया है। भारतीय अधिकारियों ने खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई है। इस समय 13 भारतीय जहाज वहां फंसे हुए हैं। भारत पहले उन्हें सुरक्षित निकालना चाहता है, उसके बाद ही नए जहाज ईंधन लेने भेजे जाएंगे। हाल के दिनों में भारत से जुड़े कई जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट और ओमान तट के पास हमले हुए हैं। एक भारतीय झंडे वाला मालवाहक जहाज ओमान के समुद्री इलाके में आग लगने के बाद डूब गया। आशंका है कि उस पर ड्रोन या मिसाइल हमला हुआ था। इन हालात ने वैश्विक तेल सप्लाई को बुरी तरह प्रभावित किया है और अब दुनिया वैकल्पिक तेल स्रोत तलाश रही है। इसी वजह से वेनेजुएला जैसे देशों के लिए मौका पैदा हुआ है।