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RBI सरकार को देगा ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड:पिछले साल से 7% की बढ़ोतरी; ईरान-इजराइल संकट के बीच खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

RBI सरकार को देगा ₹2.87 लाख करोड़ का डिविडेंड:पिछले साल से 7% की बढ़ोतरी; ईरान-इजराइल संकट के बीच खजाने को मिलेगी बड़ी राहत

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ का डिविडेंड (प्रोफिट का हिस्सा) देने की मंजूरी दी है। शुक्रवार को RBI के सेंट्रल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान है। पिछले साल RBI ने ₹2.11 लाख करोड़ के मुकाबले 27% ज्यादा यानी ₹2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया था। इस बार की राशि पिछले रिकॉर्ड से भी करीब 7% अधिक है। मिडल ईस्ट संकट के बीच सरकार को मिला सुरक्षा कवच मिडल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में RBI से मिली यह बड़ी रकम केंद्र सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे सरकार को खाद और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। RBI की कमाई 26% बढ़ी, बैलेंस शीट ₹91 लाख करोड़ पार रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उसकी कुल कमाई में लगभग 26% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बैंक के खर्चों में भी करीब 28% का इजाफा हुआ है। RBI की बैलेंस शीट अब 20% बढ़कर करीब ₹92 लाख करोड़ की हो गई है।
अगर बैंक के शुद्ध मुनाफे की बात करें (किसी भी तरह के रिस्क फंड को अलग रखने से पहले), तो इस साल RBI ने ₹3.95 लाख करोड़ कमाए हैं, जो पिछले साल के ₹3.13 लाख करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। रिस्क बफर में कटौती, ताकि सरकार को मिल सके ज्यादा पैसा RBI ने इस बार अपने ‘इमरजेंसी फंड’ (कंटीजेंसी रिस्क बफर) में से थोड़ी कटौती करने का फैसला किया है। यह वह पैसा होता है जिसे रिजर्व बैंक किसी भी अचानक आने वाले आर्थिक संकट या बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए संभालकर रखता है। पहले RBI अपनी कुल संपत्ति (बैलेंस शीट) का 7.5% हिस्सा इस फंड में रखता था, जिसे अब घटाकर 6.5% कर दिया गया है। चूंकि बैंक ने अपने इमरजेंसी फंड में पैसा कम डाला, इसीलिए उसके पास ज्यादा बचत (सरप्लस) बच गई, जिसे उसने सरकार को दे दिया। यही वजह है कि इस साल सरकार को मिलने वाले पैसे में इतनी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इसे एक उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपकी कमाई ₹100 है और आप हर महीने ₹7.50 ‘इमरजेंसी गुल्लक’ में डालते थे। इस महीने आपने तय किया कि आप गुल्लक में सिर्फ ₹6.50 डालेंगे। ऐसा करने से आपकी जेब में ₹1 एक्स्ट्रा बच गया। RBI ने भी ठीक ऐसा ही किया, जिससे सरकार को देने के लिए उसके पास ज्यादा पैसा जमा हो गया। बजट घाटे को कंट्रोल करने में होगी आसानी रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, RBI का यह डिविडेंड उनकी उम्मीदों के अनुरूप है। हालांकि, फर्टिलाइजर और फ्यूल सब्सिडी के कारण सरकार का वित्तीय घाटा दबाव में रह सकता है। नायर ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की औसत कीमत $95 प्रति बैरल रहने की स्थिति में वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार का वित्तीय घाटा GDP के 4.3% के लक्ष्य से 40 बेसिस पॉइंट ज्यादा रह सकता है। भारी डिविडेंड इस घाटे को कम रखने में मदद करेगा। मिडिल ईस्ट वॉर का भारत पर असर: बॉन्ड यील्ड बढ़ी ईरान के युद्ध की वजह से भारत के सरकारी बॉन्ड (सरकारी निवेश योजना) पर मिलने वाला ब्याज यानी यील्ड 0.40% तक बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ कि अब कंपनियों के लिए बाजार से कर्ज लेना काफी महंगा हो गया है, जो पिछले कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर है। भारत पर इस संकट का सबसे ज्यादा बुरा असर इसलिए पड़ रहा है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदते हैं। हालांकि, आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर रोक लगा रखी है, ताकि तेल कंपनियां तुरंत दाम न बढ़ाएं। बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड यह एक तरह का मीटर है जिससे पता चलता है कि बाजार में पैसा कितना महंगा या सस्ता है। इसके बढ़ने का मतलब है कि अब बैंकों और कंपनियों को पैसा उधार लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। डिविडेंड क्या होता है? जैसे किसी कंपनी को मुनाफा होने पर वह अपने मालिकों या शेयरधारकों को पैसा बांटती है, वैसे ही RBI साल भर की अपनी कमाई में से खर्चों और जरूरी रिजर्व फंड को निकालकर बचा हुआ पैसा सरकार को सौंप देता है। इसी को ‘सरप्लस’ या ‘डिविडेंड’ कहते हैं।

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भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए केंद्र सरकार को ₹2,86,588.46 करोड़ का डिविडेंड (प्रोफिट का हिस्सा) देने की मंजूरी दी है। शुक्रवार को RBI के सेंट्रल बोर्ड की बैठक में यह फैसला लिया गया। यह अब तक का सबसे बड़ा डिविडेंड भुगतान है। पिछले साल RBI ने ₹2.11 लाख करोड़ के मुकाबले 27% ज्यादा यानी ₹2.69 लाख करोड़ का डिविडेंड दिया था। इस बार की राशि पिछले रिकॉर्ड से भी करीब 7% अधिक है। मिडल ईस्ट संकट के बीच सरकार को मिला सुरक्षा कवच मिडल ईस्ट में जारी तनाव की वजह से ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, जिससे सरकारी खजाने पर बोझ बढ़ रहा है। ऐसे में RBI से मिली यह बड़ी रकम केंद्र सरकार के लिए एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। इससे सरकार को खाद और ईंधन पर दी जाने वाली सब्सिडी के बढ़ते खर्चों को संभालने में मदद मिलेगी। RBI की कमाई 26% बढ़ी, बैलेंस शीट ₹91 लाख करोड़ पार रिजर्व बैंक ने बताया कि पिछले साल की तुलना में उसकी कुल कमाई में लगभग 26% की बढ़ोतरी हुई है। हालांकि, बैंक के खर्चों में भी करीब 28% का इजाफा हुआ है। RBI की बैलेंस शीट अब 20% बढ़कर करीब ₹92 लाख करोड़ की हो गई है।
अगर बैंक के शुद्ध मुनाफे की बात करें (किसी भी तरह के रिस्क फंड को अलग रखने से पहले), तो इस साल RBI ने ₹3.95 लाख करोड़ कमाए हैं, जो पिछले साल के ₹3.13 लाख करोड़ के मुकाबले काफी ज्यादा है। रिस्क बफर में कटौती, ताकि सरकार को मिल सके ज्यादा पैसा RBI ने इस बार अपने ‘इमरजेंसी फंड’ (कंटीजेंसी रिस्क बफर) में से थोड़ी कटौती करने का फैसला किया है। यह वह पैसा होता है जिसे रिजर्व बैंक किसी भी अचानक आने वाले आर्थिक संकट या बाजार के उतार-चढ़ाव से निपटने के लिए संभालकर रखता है। पहले RBI अपनी कुल संपत्ति (बैलेंस शीट) का 7.5% हिस्सा इस फंड में रखता था, जिसे अब घटाकर 6.5% कर दिया गया है। चूंकि बैंक ने अपने इमरजेंसी फंड में पैसा कम डाला, इसीलिए उसके पास ज्यादा बचत (सरप्लस) बच गई, जिसे उसने सरकार को दे दिया। यही वजह है कि इस साल सरकार को मिलने वाले पैसे में इतनी बड़ी बढ़ोतरी हुई है। इसे एक उदाहरण से समझें: मान लीजिए आपकी कमाई ₹100 है और आप हर महीने ₹7.50 ‘इमरजेंसी गुल्लक’ में डालते थे। इस महीने आपने तय किया कि आप गुल्लक में सिर्फ ₹6.50 डालेंगे। ऐसा करने से आपकी जेब में ₹1 एक्स्ट्रा बच गया। RBI ने भी ठीक ऐसा ही किया, जिससे सरकार को देने के लिए उसके पास ज्यादा पैसा जमा हो गया। बजट घाटे को कंट्रोल करने में होगी आसानी रेटिंग एजेंसी इक्रा (ICRA) की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर के मुताबिक, RBI का यह डिविडेंड उनकी उम्मीदों के अनुरूप है। हालांकि, फर्टिलाइजर और फ्यूल सब्सिडी के कारण सरकार का वित्तीय घाटा दबाव में रह सकता है। नायर ने अनुमान जताया है कि कच्चे तेल की औसत कीमत $95 प्रति बैरल रहने की स्थिति में वित्त वर्ष 2027 के लिए सरकार का वित्तीय घाटा GDP के 4.3% के लक्ष्य से 40 बेसिस पॉइंट ज्यादा रह सकता है। भारी डिविडेंड इस घाटे को कम रखने में मदद करेगा। मिडिल ईस्ट वॉर का भारत पर असर: बॉन्ड यील्ड बढ़ी ईरान के युद्ध की वजह से भारत के सरकारी बॉन्ड (सरकारी निवेश योजना) पर मिलने वाला ब्याज यानी यील्ड 0.40% तक बढ़ गई है। इसका असर यह हुआ कि अब कंपनियों के लिए बाजार से कर्ज लेना काफी महंगा हो गया है, जो पिछले कई सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर है। भारत पर इस संकट का सबसे ज्यादा बुरा असर इसलिए पड़ रहा है, क्योंकि हम अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल दूसरे देशों से खरीदते हैं। हालांकि, आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए सरकार ने अभी पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ाने पर रोक लगा रखी है, ताकि तेल कंपनियां तुरंत दाम न बढ़ाएं। बेंचमार्क बॉन्ड यील्ड यह एक तरह का मीटर है जिससे पता चलता है कि बाजार में पैसा कितना महंगा या सस्ता है। इसके बढ़ने का मतलब है कि अब बैंकों और कंपनियों को पैसा उधार लेने के लिए ज्यादा ब्याज देना पड़ेगा। डिविडेंड क्या होता है? जैसे किसी कंपनी को मुनाफा होने पर वह अपने मालिकों या शेयरधारकों को पैसा बांटती है, वैसे ही RBI साल भर की अपनी कमाई में से खर्चों और जरूरी रिजर्व फंड को निकालकर बचा हुआ पैसा सरकार को सौंप देता है। इसी को ‘सरप्लस’ या ‘डिविडेंड’ कहते हैं।

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