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‘अशोभनीय, अक्षम्य’: पीएम मोदी पर अनुचित टिप्पणी को लेकर बीजेपी ने कांग्रेस के अजय राय पर साधा निशाना | भारत समाचार

SRH vs RCB Live Score: Follow Sunrisers Hyderabad vs Royal Challengers Bengaluru IPL 2026 match updates and scorecard from Hyderabad. (Picture Credit: X/@IPL)

आखरी अपडेट:22 मई, 2026, 18:22 IST बीजेपी पार्टी के नेताओं ने कांग्रेस नेता पर राजनीतिक शालीनता की सारी सीमाएं लांघने का आरोप लगाते हुए वीडियो ऑनलाइन शेयर किया. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी; उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय (एल) (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी (यूपीसीसी) के प्रमुख अजय राय का शुक्रवार को एक वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया, जिसमें उन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ अनुचित टिप्पणी करते हुए दिखाया गया है। यह घटना, जब राय एक कार के अंदर थे, रिकॉर्ड की गई, तेजी से सोशल मीडिया पर वायरल हो गई। क्लिप में, राय टिप्पणी करते समय समर्थकों के एक समूह की ओर हाथ हिलाते हुए दिखाई दे रहे हैं, जिसकी सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने तीखी आलोचना की है। पार्टी नेताओं ने कांग्रेस नेता पर राजनीतिक शालीनता की सभी सीमाएं लांघने का आरोप लगाते हुए वीडियो ऑनलाइन साझा किया। कुछ दिन पहले जब यूपीपीसीसी प्रमुख अजय राय रैली थे, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने सार्वजनिक रूप से उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की थी। यही कांग्रेस की राजनीति का स्तर है -… pic.twitter.com/AkbPemddlq – अमित मालवीय (@amitmalviya) 22 मई 2026 यह विवाद तब से बड़े पैमाने पर राजनीतिक टकराव में बदल गया है, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विपक्षी पार्टी पर कड़े हमले शुरू कर दिए हैं। बीजेपी की कड़ी प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टिप्पणियों की निंदा करते हुए उन्हें “अशोभनीय, असंसदीय और अक्षम्य” बताया। उन्होंने कहा कि यह बयान कांग्रेस पार्टी की “राजनीतिक भ्रष्टता” को दर्शाता है, उन्होंने कहा कि बार-बार की हार ने पार्टी को “हताशा और हताशा” में धकेल दिया है। आदित्यनाथ ने एक्स पर लिखा, “कांग्रेस अब हताशा, निराशा, हताशा और मानसिक दिवालियापन के चरम पर पहुंच गई है। अब वे देशवासियों से माफी मांगने लायक भी स्थिति में नहीं हैं।” आदर्श प्रधानमंत्री श्री @नरेंद्र मोदी जी के विषय में उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा अभद्र, असंसदीय और विकलांग टिप्पणी कांग्रेस के राजनीतिक कुसंस्कारों को प्रकट करती है। पूर्व में कांग्रेस के ‘युवराज’ भी अपने कुसंस्कारों का परिचय दे चुके हैं। कांग्रेस अब कज़रा,… – योगी आदित्यनाथ (@mयोगीआदित्यनाथ) 22 मई 2026 भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने भी राय की आलोचना करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में एक बीमारी के दौरान उनके अच्छे होने की कामना की थी। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इस तरह का शिष्टाचार निभाया गया, जिसे उन्होंने अपमानजनक भाषा बताया। मालवीय ने कहा, “यह कांग्रेस की राजनीति का स्तर है – शिष्टाचार का जवाब अशिष्टता से देना।” इस बीच, उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के भीतर अभद्र भाषा व्यापक हो गई है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने “मर्यादा की सभी सीमाओं को पार कर लिया है” और उस पर अभद्र भाषा को राजनीतिक उपकरण के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे दावा किया कि बार-बार चुनावी असफलताओं ने कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक रूप से कमजोर कर दिया है। मौर्य ने कहा, “सच्चाई यह है कि माननीय प्रधान मंत्री जी के खिलाफ कांग्रेस नेताओं द्वारा बोला गया हर अपमानजनक शब्द उनकी बार-बार की राजनीतिक हार से होने वाले दर्द और सत्ता से दूर होने की हताशा का प्रमाण है। देश की जनता ऐसे अहंकारी और संस्कृतिहीन नेताओं को एक शानदार लोकतांत्रिक जवाब देगी।” चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : उत्तर प्रदेश, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया ‘अशोभनीय, अक्षम्य’: बीजेपी ने पीएम मोदी पर अनुचित टिप्पणी को लेकर कांग्रेस के अजय राय को जिम्मेदार ठहराया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)अजय राय की नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी(टी)अजय राय विवाद(टी)उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रमुख(टी)मोदी की अभद्र टिप्पणी(टी)बीजेपी की प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश(टी)योगी आदित्यनाथ की आलोचना(टी)अमित मालवीय की प्रतिक्रिया(टी)राजनीतिक विवाद कांग्रेस बीजेपी

ध्रुव राठी बोले- मोदी जहां भी जाएं, उन्हें शर्मिंदा करें:भड़कीं एक्ट्रेस गुल पनाग; बोलीं- विदेशी धरती पर प्रधानमंत्री पद का मजाक उड़ाना गलत

ध्रुव राठी बोले- मोदी जहां भी जाएं, उन्हें शर्मिंदा करें:भड़कीं एक्ट्रेस गुल पनाग; बोलीं- विदेशी धरती पर प्रधानमंत्री पद का मजाक उड़ाना गलत

बॉलीवुड एक्ट्रेस गुल पनाग ने सोशल मीडिया पर यूट्यूबर ध्रुव राठी के एक पोस्ट की आलोचना की है। ध्रुव राठी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर एक पोस्ट लिखा था, जिसमें उन्होंने पीएम को विदेशी धरती पर शर्मिंदा करने की बात कही थी। इस पर जवाब देते हुए गुल पनाग ने कहा कि सरकार से असहमत होना और विरोध करना लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन विदेश में देश के प्रधानमंत्री और उनके पद का मजाक बनाना ठीक नहीं है। एक्ट्रेस के मुताबिक, ऐसा करने से देश की संस्थाएं और खुद भारतीय कमजोर होते हैं। ध्रुव राठी ने लिखा- मोदी को शर्मिंदा करें यूट्यूबर ध्रुव राठी ने 19 मई को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट शेयर किया था। इसमें उन्होंने लिखा था कि मोदी जहां भी जाएं, उन्हें हर जगह शर्मिंदा किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री बनने के बाद पिछले 12 साल में उन्होंने एक भी प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं की है। ध्रुव राठी ने आगे लिखा कि वे दूसरे देशों के विदेशी पत्रकारों से भी कहेंगे कि वे पीएम मोदी से जहां भी मिलें, उनसे सवाल जरूर पूछें। उन्हें लोगों के सामने जवाब देने के लिए मजबूर करें। ध्रुव राठी के इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस शुरू हो गई थी। पत्रकार के वीडियो के बाद शुरू हुआ विवाद यह पूरा विवाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नॉर्वे दौरे के बाद शुरू हुआ। ओस्लो में नॉर्वे की पत्रकार हेले लेंग ने प्रधानमंत्री से भारत में मानवाधिकारों और लोकतंत्र को लेकर सवाल पूछने की कोशिश की थी। इस दौरान पीएम मोदी बिना जवाब दिए आगे बढ़ गए थे। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया दो हिस्सों में बंट गया था, जिसके बाद ध्रुव राठी ने पत्रकार के समर्थन में यह पोस्ट लिखा था। विरोध करना अलग, लेकिन यह तरीका सही नहीं ध्रुव राठी के इस पोस्ट को री-पोस्ट करते हुए गुल पनाग ने लिखा कि आप किसी प्रधानमंत्री को नापसंद कर सकते हैं, सरकार से असहमत हो सकते हैं, डिबेट कर सकते हैं और अलग तरह से वोट कर सकते हैं। यही लोकतंत्र है। लेकिन भारत के प्रधानमंत्री के ऑफिस और विदेश में वे जिसे रिप्रेजेंट करते हैं, उसका विदेशी धरती पर मजाक बनाना सही नहीं है। यह विरोध का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे हमारा ही नुकसान होता है। राजनीति में भी सक्रिय रह चुकी हैं एक्ट्रेस गुल पनाग एक्टिंग के साथ-साथ राजनीति और सामाजिक कार्यों से भी जुड़ी रही हैं। साल 2014 के आम चुनाव में उन्होंने चंडीगढ़ लोकसभा सीट से आम आदमी पार्टी (AAP) के टिकट पर चुनाव लड़ा था, जहां वे तीसरे स्थान पर रही थीं। बाद में उन्होंने खुद को राजनीतिक गतिविधियों से अलग कर लिया और जून 2021 में आम आदमी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वे एक एनजीओ भी चलाती हैं जो शिक्षा और लैंगिक समानता के लिए काम करता है।

कनखजूरा गलती से कान में चला जाए तो कैसे जानें, ऐसे में कौन सी सावधानियों का रखें ध्यान? जानें

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कनखजूरा (Centipede) एक जहरीला कीट होता है, जो आमतौर पर नम और अंधेरी जगहों में पाया जाता है. कई बार यह गलती से कान में घुस सकता है, जो बेहद असहज और डरावनी स्थिति पैदा कर देता है. हालांकि, सही समय पर सही कदम उठाने से इस स्थिति को संभाला जा सकता है. कान में कनखजूरा जाने पर क्या हो सकता है?अगर कनखजूरा कान में चला जाए, तो व्यक्ति को तुरंत कुछ लक्षण महसूस हो सकते हैं: तेज दर्द और जलन: कनखजूरा हिलने-डुलने से कान में तेज दर्द हो सकता है.अचानक सरसराहट या हलचल महसूस होना.घबराहट और बेचैनी.सुनने में परेशानी.कभी-कभी जहर के कारण सूजन या जलन.हालांकि, आमतौर पर यह जानलेवा नहीं होता, लेकिन अगर समय पर इलाज न हो तो संक्रमण या चोट हो सकती है. क्या कनखजूरा खतरनाक होता है?कनखजूरा हल्का विषैला होता है. अगर यह काट दे या अंदर ज्यादा देर तक फंसा रहे, तो: कान में सूजन बढ़ सकती है.इन्फेक्शन का खतरा हो सकता है.कान के पर्दे को नुकसान पहुंच सकता है.इसलिए इसे हल्के में बिल्कुल न लें. ऐसी स्थिति में क्या करें?अगर कनखजूरा कान में चला जाए, तो तुरंत ये उपाय करें:1. घबराएं नहींसबसे पहले शांत रहें, क्योंकि घबराहट में आप गलत कदम उठा सकते हैं. 2. तेल या गुनगुना पानी डालेंसरसों का तेल, नारियल तेल या बेबी ऑयल की 2–3 बूंदें कान में डालें.इससे कनखजूरा मर जाता है या बाहर निकल सकता है. 3. सिर को झुकाएंजिस कान में कीट है, उस तरफ सिर झुकाकर बंद करें ताकि वह बाहर निकल सके. 4. रुई, पिन या सुई का इस्तेमाल न करेंकान में कोई नुकीली चीज डालने से स्थिति और खराब हो सकती है और चोट लग सकती है. 5. तुरंत डॉक्टर से संपर्क करेंअगर कीट बाहर न निकले या दर्द ज्यादा हो, तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं. क्या बिल्कुल नहीं करना चाहिए?कान में उंगली या तीली डालना.तेज झटके से निकालने की कोशिश करना.देर तक इंतजार करना.ये सभी चीजें नुकसान बढ़ा सकती हैं. बचाव कैसे करें?सोने से पहले आसपास साफ-सफाई रखें.जमीन पर सीधे न सोएं.नम और गंदे स्थानों से दूर रहें.बच्चों का खास ध्यान रखें.

How to stop scalp itching | सिर की खुजली को कैसे खत्म करें

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Last Updated:May 22, 2026, 17:27 IST Head Scalp Itching in Summer: झुलसती गर्मी का प्रकोप चारों तरफ शुरू हो चुका है. इस गर्मी में कई तरह की दिक्कतें एक साथ आने लगती है. शरीर के कई हिस्सों में खुजली बढ़ जाती है लेकिन इसके साथ ही कुछ लोगों के सिर की स्किन में खुजली परेशान करने लगती है. यह बहुत इरीटेट करने वाली परेशानी होती है. पर यह खुजली होती क्यों है. क्या है सिर की खुजली का कारण. इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने डॉ. बांगिया स्किन एंड लेजर क्लिनिक के डायरेक्टर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित बांगिया से बात की. सिर में खुजली के कारण. जैसे-जैसे तपिश बढ़ रही है शरीर में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगी है. एक तो गर्मी में बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है दूसरी ओर घर के अंदर भी गर्मी के कारण कई तरह की परेशानियां होने लगती है. जब उमस बढ़ती है तो पूरे शरीर में खुजली होने लगती है लेकिन अधिकांश लोग इससे कहीं ज्यादा सिर की खुजली से परेशान रहते हैं. इस खुजली के कारण चिड़चिड़ापन आ जाती है. भीषण गर्मी और पसीने के कारण सिर में होने वाली खुजली न केवल परेशानी का सबब है बल्कि यह बालों के झड़ने और स्कैल्प इंफेक्शन का कारण भी बन सकती है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि गर्मियों में सिर में खुजली इतनी क्यों बढ़ जाती है. इन सवालों का जवाब जानने के लिए हमने डॉ. बांगिया स्किन एंड लेजर क्लिनिक के डायरेक्टर और डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. अमित बांगिया से बात की. सिर में खुजली बढ़ने के कारण पसीना सबसे बड़ा कारण- डॉ. अमित बांगिया ने बताया कि गर्मी के मौसम में सिर के स्कैल्प में खुजली के कई कारण है लेकिन सबसे बड़ा कारण गर्मी में सिर से ज्यादा पसीना निकलना है. जब सिर में ज्यादा पसीना निकलता है तो यह बालों में फंसकर सिर के स्कैल्प में फंस जाता है. पसीने में पानी के अलावा भी कई चीजें होती हैं. पसीना धूल, मिट्टी और नमक का मिश्रण होता है. जब यह स्कैल्प में चिपकता है तो डैंड्रफ, फंगस और बैक्टीरिया के लिए उपजाऊ जमीन तैयार कर देते हैं. वहीं ये सूक्ष्म जीव अपना घर बना लेते हैं और इंफेक्शन के कारण खुजली को जन्म देते हैं. इसके साथ पानी में नमक के कारण नमक स्कैल्प की परत को इरीटेट करता है जिसकी वजह से सिर में चुलचुलाहट पैदा होती है. जिन लोगों को पहले से डैंड्रफ, इंफेक्शन, सोराइसिस जैसी परेशानी है उनके लिए यह ज्यादा मुसीबत है. सनबर्न-गर्मी के दिनों में सूरज की रोशनी सीधे स्किन के अंदर घुसती है. जब आप बाहर ज्यादा जाएंगे तो सूरज से निकलने वाली अल्ट्रावायलेट रेज स्कैल्प को डैमेज करने लगते हैं जिसकी वजह से वहां इरीटेशन होने लगता है और जब वहां फंगस ज्यादा हो जाते हैं तो और भी परेशानी बढ़ने लगती है. डिहाइड्रेशन-गर्मी के दिनों में शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इस डिहाइड्रेशन के कारण स्कैल्प ड्राई हो सकता है. इसकी वजह से वहां इरीटेशन होता है और सिर में खुजली ज्यादा बढ़ने लगती है. जिन लोगों को पहले से कुछ न कुछ परेशानी है उन्हें तो ज्यादा ही खुजली करती है. क्लोरीन वाला पानी-गर्मी के दिनों में लोग स्वीमिंग पूल में ज्यादा नहाने के लिए जाते हैं. अगर स्वीमिंग पूल में क्लोरीन का मात्रा ज्यादा है तो वह हैवी मेट स्कैल्प में घुसकर उसे छेड़छाड़ करता है और इससे इरीटेशन और खुजली बढ़ जाती है. तेल का इस्तेमाल-कुछ लोगों को हमेशा तेल लगाने की आदत होती है. अगर गर्मी में आप बालों में तेल लगाएंगे तो तेल में मौजूद हैवी मेटल स्कैल्प में परेशानी पैदा करेगा. इससे त्वचा में इरीटेशन बढती है और खुलजी ज्यादा होने लगती है. ज्यादा ह्यूमिडिटी के कारण भी स्कैल्प में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ता है. इन परेशानियों से कैसे बचें डॉ. अमित बांगिया कहते हैं कि गर्मी में सिर की खुजली से बचने का सबसे बेहतर तरीका यह है कि आप दिन भर में दो बार नहाएं. एक बार सुबह एक बार शाम. यदि दो समय नहाएंगे तो इस तरह की दिक्कतें होंगी ही नहीं. आप जितना हाइजीन यानी बालों की साफ-सफाई पर ध्यान देंगे, उतना आपके लिए फायदा होगा. गर्मी के दिनों में सप्ताह में 4 से 5 बार बाल में शैंपू लगाएं. शैंपू को सही तरीके से लगाएं. इसे लगाने के लिए आप शैंपू को बाल में लगाकर 2 से 3 मिनट के लिए छोड़ दें. इससे स्कैल्प अच्छे से क्लीन हो जाएगी. गर्मी के दिनों में बाल में तेल न लगाएं. अगर आप साबुन लगाना चाहते हैं तो वह भी लगा सकते हैं लेकिन साबुन को सप्ताह में तीन से चार बार ही लगाएं. यदि कंडीशनर लगाना चाहते हैं तो सप्ताह में एक ही बार लगाएं. हां, बाल में हेयर मिस्ट लगाएंगे तो यह ज्यादा अच्छा रहेगा. डॉक्टर से कब दिखाना चाहिएसामान्य तौर पर खुजली से ज्यादा कुछ नुकसान नहीं होता लेकिन यदि खुजली कई दिनों से हो रही है और यह ठीक नहीं हो रही है, इसके कारण इरीटेशन है और आप इलाज नहीं करा रहे हैं तो इससे हेयर फॉल होना शुरू हो जाएगा. इतना ही नहीं यदि लंबे वक्त तक आप इसका इलाज नहीं कराएंगे तो इससे परमानेंट हेयर लॉस भी हो सकता है. इसलिए ज्यादा दिन सिर में खुजली होने पर तुरंत डॉक्टर से दिखाना चाहिए. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

लौकी रसम रेसिपी: दाल खा गए हैं बोर? उदयपुर में मिठाई चटपटी लोकी रसम, चावल के साथ सबसे अच्छा; यूनिक विधि नोट करें

तस्वीर का विवरण

लोकी बॉडी को ठंडक ड्रॉस्ट्रिक का काम करती है, वहीं रसम का कट्टा-तीखा स्वाद खाने का मजा दोगुना कर देती है। आइये जानते हैं इसकी आसान रेसिपी। छवि: फ्रीपिक लोकी रसम बनाने की सामग्री: 1 लोकी, 1 टमाटर, 2 बड़ी लौकी अरहर दाल, 1 छोटी लौकी रसम पाउडर, 1/2 छोटी लौकी, 1 छोटा लौकी, स्वादानुसार नमक, 1 छोटी लौकी इमली का पल्प, 3 कप पानी, हरा धनियां छवि: फ्रीपिक धन्यवाद के लिए: 1 छोटा चम्मच घी, 1/2 छोटा चम्मच घी, 1 सूखी लाल मिर्च, 7-8 कैरी पत्ते, चुटकी भर हींग। यह पेट के लिए भी स्वादिष्ट है। छवि: फ्रीपिक लोकी रसम बनाने की विधि: सबसे पहले लोकी को ढोकर की छोटी सी टोकरी में काट लें। अब हो रहा है एक पैन में लोकी, टमाटर, हल्दी और थोड़ा सा पानी का गैस्ट्रोनॉमी तक पका लें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद एक छोटा तड़का पैन में घी गर्म करें। सम्मिलित राई। जब राई चटकने लगे तो सूखी लाल मिर्च, कैरी पत्ते और हींग डाल दें। तैयार हो जाओ दादी को रसम में। छवि: एआई यह हल्की और आसानी से पचने वाली डिश है। गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने में मदद मिलती है। चावल के साथ इसका स्वाद बेहद शानदार लगता है. कम वजन में भी टेस्टी बन जाती है। छवि: एआई अगर आप इसे और अधिक स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो इसमें थोड़ी सी काली मिर्च पाउडर और लहसुन का तड़का भी डाल सकते हैं। वहीं नारियल की चटनी और पापड़ के साथ इसका मजा डबल हो जाता है। छवि: सोशल मीडिया

schizophrenia diagnosis| Twisha sharma death case: सिजोफ्रेनिया कौन-सी बीमारी है? ट्विशा की सास के दावे में कितनी सच्चाई, डॉक्टर ने बताया

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सिजोफ्रेनिया शब्द इन दिनों आपने टीवी, इंटरनेट और अखबार में खूब देखा, सूना होगा. ये एक गंभीर मानसिक बीमारी है. इसका जिक्र ट्विशा शर्मा केस में भी किया गया है. मृतक ट्विशा की सास ने मीडिया में बताया कि उन्हें सिजोफ्रेनिया नाम की बीमारी थी. हालांकि ये बीमारी ट्रीटेबल है, लेकिन बहुत ही रेयर और सीरियस होती है. जिन लोगों को सिजोफ्रेनिया का पता चलता है, उन्हें यह समझने में दिक्कत हो सकती है कि क्या असली है और क्या काल्पनिक है. सिर्फ 100 में से एक को ही ये बीमारी होती है. खासबात ये है कि मरीज को खुद अपनी इस बीमारी का पता नहीं लग पाता है. नई दिल्ली स्थित तुलसी हेल्थकेयर के सीनियर साइकेट्रिस्ट और सी ई ओ डॉक्टर गौरव गुप्ता से हमने इस बीमारी के बारे में गहराई से समझने के लिए बात की. डॉक्टर ने बताया कि सिजोफ्रेनिया ट्रीटेबल मेंटल बीमारी है जो किसी व्यक्ति के सोचने के तरीके, भावनाओं, टास्क और रियलिटी की समझ पर असर डालती है. लेकिन इसका निदान तुरंत नहीं होता है. इसके लिए कई हफ्तों और महीनों तक मरीज की काउंसलिंग करनी पड़ती है. लेकिन इससे पहले भी जरूरी है कि इसके लिए लक्षण नजर आए. तो चलिए समझते हैं सिजोफ्रेनिया के लक्षण और इसके निदान के लिए क्या प्रोसेस किया जाता है और कितना समय निकलता है. सिजोफ्रेनिया के लक्षण ऐसी चीजें देखना और सुनना जो असल में वहां नहीं हैं.हेल्लुसिनेशन होना, ऐसी चीजों का अनुभव करना या उन पर यकीन करना जो सच नहीं हैं.उलझे हुए और रैंडम थॉट्स आना.अजीबोगरीब व्यवहार करना.सामाजिक मेलजोल से दूर रहना.बहुत कम या बिल्कुल भी भावनाएं जाहिर न करना.ध्यान न लगा पाना.नींद का पैटर्न बिगड़ जाना.रोजमर्रा के काम न कर पाना.साफ-सफाई का ध्यान न रखना.व्यक्तित्व में बदलाव.दूसरों पर विश्वास न करना या शक करना. बीमारी को समझने में हो सकती है गलत!एक्सपर्ट बताते हैं कि सिजोफ्रेनिया को अक्सर गलत समझा जाता है, क्योंकि यह माना जाता है कि इस बीमारी वाले व्यक्ति की स्प्लिट पर्सनैलिटी होती है. जबकि सिजोफ्रेनिया और स्प्लिट पर्सनैलिटी एक ही चीज नहीं हैं. लेकिन अगर आपने ट्विशा की सास को मीडिया ट्रायल में ये कहते हुए सुना है कि ट्विशा की दो स्प्लिट पर्सनैलिटी नजर आने लगी थी, तो आपको डॉक्टर की बात पर गौर करने की जरूरत है. क्योंकि सिजोफ्रेनिया में ऐसा नहीं होता है. कैसे शुरु होती है ये बीमारीएक्सपर्ट ने बताया कि इस बीमारी की शुरुआत धीरे-धीरे होती है, लेकिन जिन लोगों को यह बीमारी होती है, उनमें लक्षण अचानक भी उभर सकते हैं. सिजोफ्रेनिया के लक्षण अक्सर दूसरी मानसिक बीमारियों, जिनमें अन्य साइकोटिक या न्यूरोलॉजिकल बीमारियां भी शामिल हैं, के लक्षण एक जैसे ही लगते हैं. इसलिए, सिजोफ्रेनिया का पता लगाने के लिए डॉक्टर को व्यक्ति का ध्यान से असेसमेंट करना पड़ता है निदान में कितना समय लगता हैएक्सपर्ट ने ये बात साफ कहा है कि तुरंत किसी व्यक्ति को देखकर सिजोफ्रेनिया की पुष्टि नहीं की जा सकती है. इसके निदान के लिए एक पूरा प्रोसेस फॉलो किया जाता है, जिसमें कुछ हफ्तों से लेकर कई महीनों तक का समय लग सकता है. अगर लक्षण 6 महीने या उससे ज्यादा समय तक बने रहें, तब डॉक्टर इस बीमारी को कन्फर्म करते है. क्योंकि डायग्नोसिस के लिए डॉक्टर को मरीज के व्यवहार, सोच और मानसिक स्थिति को लगातार जांचना पड़ता है. क्या है डायग्नोसिस का पूरा प्रोसेससिजोफ्रेनिया के डायग्नोसिस प्रोसेस के बारे में डॉक्टर ने बताया कि इसका का पता किसी एक लैब टेस्ट, डायग्नोस्टिक स्कैन या किसी अन्य मेडिकल प्रॉसिजर के जरिए नहीं लगाया जा सकता है. जांच प्रक्रिया के दौरान, आमतौर पर मरीज की पूरी तरह से मानसिक जांच करके आकलन की प्रक्रिया शुरू की जाती है. – असेसमेंट के इंटरव्यू वाले हिस्से के दौरान, साइकेट्रिस्ट व्यक्ति के मानसिक स्थिति, कामकाज और रोजमर्रा के काम-काज के बारे में सावल पूछे जाते हैं ताकि सिजोफ्रेनिया का पता लगाने के लिए एक क्लिनिकल आधार बनाया जा सके. मरीज की पिछली या मौजूदा मेडिकल हिस्ट्री पर भी गौर किया जाता है, जिसमें परिवार में मानसिक समस्याएं, ड्रग्स या शराब का इस्तेमाल, और नींद से जुड़े दूसरे जरूरी दस्तावेज शामिल हैं. हर इंटरव्यू साइकेट्रिस्ट को मरीज की अपनी सोच, भावनाओं और व्यवहार को जाहिर करने की काबिलियत और तरीके को समझने का मौका देता है. – इसके अलावा मेडिकल जांच भी किया जाता है. इसमें ब्लड टेस्ट और ब्रेन इमेजिंग शामिल हैं, साथ ही साइकोलॉजिकल जांच भी, बीमारी का पता लगाने में मददगार साबित होती है. इन टेस्ट का मकसद यह पता लगाना है कि क्या मरीज के लक्षण ड्रग्स के इस्तेमाल, हार्मोन के असामान्य स्तर, इन्फेक्शन, न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर या किसी दूसरी शारीरिक समस्या से जुड़े हैं. – मरीज की जांच में परिवार के सदस्यों को भी शामिल किया जाता है. क्योंकि वे ऐसी बहुत सी जानकारी देते हैं जो हेल्थकेयर देने वालों को मरीज की पर्सनैलिटी में आए बदलावों, जैसे कि अग्रेशन , सबसे अलग-थलग रहना, भ्रम या कामकाज और सोशल एक्टिविटी में सफलता के लेवल में कमी, को पहचानने में मदद करती है, जिनके बारे में शायद मरीज को खुद पता न हो. क्या है इलाजउपचार में आमतौर पर दवाएं , साइकोथेरेपी , फॅमिली थेरेपी , रिहैबिलिटेशन , जीवनशैली संबंधी सहायता और लगातार मनोचिकित्सकीय जांच-पड़ताल शामिल होती है. जिन लोगों में सिजोफ्रेनिया का डायग्नोसिस हुआ है, वे लगातार देखभाल और एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम मिलने पर अपने लक्षणों को कंट्रोल कर सकते हैं और अपने जीवन की क्वालिटी में सुधार ला सकते हैं. क्या ट्विशा की बीमारी को लेकर किया दावा सही?यदि यहां बताए गए जानकारी और ट्विशा की सास के दावों को देखा जाए तो दिमाग में कुछ सवाल खड़े होते हैं. पहला- जब शादी को ही 5 महीने हुए थे तो ट्विशा को ऐसी मेंटल डिजीज कैस हो सकती है जिसके निदान में ही 6 महीने तक समय लग जाता है? दूसरा- ट्विशा की सास ने ये बात भी खुद कही है कि शादी के 1-2 महीने तक सब कुछ ठीक था, उनका व्यवहार भी अच्छा था, तो अचानक उन्हें सिजोफ्रेनिया कैसे हो सकता है, जो कि बहुत ही धीरे- धीरे होता है? हालांकि अभी इस मामले में जजमेंट आना बाकी है, हम सिर्फ इस बीमारी के बारे में आपको जानकारी दे रहे

सत्तू वेजी कटलेट रेसिपी: शाम की चाय का असर है कुरकुरे सत्तू-वेजी कटलेट, फटाफट नोट कर लें रेसिपी

सत्तू वेजी कटलेट

22 मई 2026 को 16:57 IST पर अद्यतन किया गया सत्तू वेजी कटलेट रेसिपी: शाम की चाय का मजा तब और डबल हो जाए जब साथ में कुछ गरम-गरम और कुरकुरी जगह मिल जाए। अगर आप समोसे-कचौड़ी खाख बोर हो गए हैं और कुछ स्ट्रेंथ और टेस्टी टोकरा बनाना चाहते हैं, तो ‘सत्तू वेजी कट मेकर’ एक बेहतरीन विकल्प है। प्रोटीन से भरपूर सत्तू और हरे नारियल के मेल से बने ये कट ज़ायकेदार न सिर्फ खाने में लाजवाब हैं, बल्कि मिनटों में तैयार भी हो जाते हैं। आइए नोट करते हैं इसकी आसान और झटपट बनने वाली रेसिपी। अनुसरण करना : सामग्री 1 कप सत्तू 1/2 कप इलेक्ट्रोनिक कटी गाजर, गुजराती मिर्च, खपत 1 छोटा हुआ आलू तरबूज़ कटा हरी मिर्च हरा धनिया 1 मसाला मसाला आधा-अंतर जीरा पाउडर नमक का स्वाद तेल के लिए सेकने। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले एक बड़े मिक्सिंग बाउल में 1 कप सत्तू डाला गया। अब इसमें आपकी पसंद की सभी इलेक्ट्रोनिक कटी हुई साबुत गाजर, मीठा मिर्च, और कद्दूकस किया हुआ आलू मिला लें। छवि: फ्रीपिक अब इस मिश्रण में नींबू कटी हरी मिर्च, हरा धनिया, चाट मसाला, अन्य जीरा पाउडर और स्वाद मसाला शामिल है। नींबू का रस भी मिला सकते हैं, इससे कट मसाला का स्वाद और चटपटा हो जाएगा। छवि: एआई सभी को हाथो से अच्छे तरह मिला लें। हॉल के मॉस्कर से ही यह बंद होगा। अगर मिश्रण ज्यादा है तो इसमें सिर्फ 1-2 पानी छिड़कें और एक कड़ाही तैयार कर लें। छवि: एआई आपके शानदार, कुरकुरे और प्रोटीन से भरपूर सत्तू वेजी कट मसाला तैयार हैं। उदाहरण के लिए, प्लेट में नमक और शाम की गरमा-गरम चाय के साथ हरी चटनी या टोमैटो केचप के साथ सर्व करें। छवि: एआई अब हाथों पर थोड़ा सा तेल का सामान और मिक्सचर से लेकर छोटा-छोटा हिस्सा लेकर उन्हें कटलेट, टिक्की या ओवल के टुकड़े दें। ध्यान रहे कि कट म्यूजिक ज्यादातर मोटा न हो, ताकि वे अंदर तक अच्छे से सिक असिस्टेंट हों। छवि: फ्रीपिक एक नॉन-स्टिक पैन या तवे पर 2 तेल गर्म करें। अब तैयार कट मूवी को टेवे पर रखें और दोनों तरफ से साउंड और क्रिस्पी होने तक की सलाह फ्री में दें। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 22 मई 2026 16:57 IST पर (टैग्सटूट्रांसलेट)सत्तू कटलेट रेसिपी(टी)स्वस्थ शाम के स्नैक्स(टी)वेज कटलेट रेसिपी हिंदी में(टी)सत्तू रेसिपी(टी)क्रिस्पी वेजी कटलेट(टी)झटपट चाय के समय के स्नैक्स

रुड़की की सोनिया ने सीनियर नेशनल एथलेटिक्स में जीता सिल्वर:रांची के ट्रैक पर 10 हजार मीटर दौड़ीं; पहले ही दिन हासिल किया पदक

रुड़की की सोनिया ने सीनियर नेशनल एथलेटिक्स में जीता सिल्वर:रांची के ट्रैक पर 10 हजार मीटर दौड़ीं; पहले ही दिन हासिल किया पदक

झारखंड की राजधानी रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में शुक्रवार से शुरू हुई 29वीं नेशनल सीनियर एथलेटिक्स फेडरेशन चैंपियनशिप में उत्तराखंड की बेटी ने पहले ही दिन पदक हासिल कर लिया। रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट कुमारी सोनिया ने महिला वर्ग की 10,000 मीटर रेस में सिल्वर मेडल जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया। सोनिया ने यह रेस 36 मिनट 16.22 सेकंड में पूरी की। वह स्पोर्ट्स कॉलेज में उत्तराखंड के वरिष्ठ कोच लोकेश कुमार से प्रशिक्षण ले रही हैं। सोनिया की इस सफलता के पीछे उनके संघर्षों की एक लंबी कहानी है। यह वही सोनिया हैं, जिन्होंने संसाधनों की भारी कमी के बावजूद कभी हालातों के आगे घुटने नहीं टेके। फटे जूतों से रांची के पोडियम तक का सफर सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेलों के दौरान बनी थी, जब उन्होंने 10,000 मीटर की दौड़ में ही ब्रॉन्ज मेडल जीता था। उस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि सोनिया के पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरी थीं। इसके बाद उन्होंने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में भी ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया था। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह ऑनलाइन मिलने वाले सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। स्नेह राणा ने बढ़ा था हौसला, दिए थे नए स्पाइक्स हाल ही में जब सोनिया के संघर्ष की यह कहानी भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची थी, तो उन्होंने देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर सोनिया को बुलाया था। फटे जूतों में दौड़ने वाली सोनिया को जब स्नेह राणा ने प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा, तो वह भावुक हो गई थीं। नए स्पाइक्स और स्नेह राणा से मिले उसी नए आत्मविश्वास को लेकर सोनिया रांची के ट्रैक पर उतरीं और सिल्वर मेडल अपने नाम कर लिया। पिता करते हैं मजदूरी, बहनों ने निभाया मां का फर्ज सोनिया का पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब तंगी के कारण ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। बहनों ने ही मां की कमी पूरी की और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। गांव के तानों को बनाया अपनी ताकत सोनिया के सफर में सिर्फ गरीबी ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन, सोनिया ने इन बातों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। उन्होंने लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से खुद को साबित करने का रास्ता चुना और आज रांची में जीता गया यह सिल्वर मेडल उन सभी तानों का जवाब है।

गर्मियों के लिए फालसा छाछ ड्रिंक: गर्मी में शरीर को ऊर्जा देने का काम करेगा फालसे का ठंडा-ठंडा छाछ, मिनटों में लू की होगी छुट्टी

तस्वीर का विवरण

फालसा अपने आश्रम-मी थे स्वाद और विश्वविद्यालय तासीर के लिए जाना जाता है। साथ ही छाछ पेट को ठंडा रखने और पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है। इन दोनों का कॉम्बिनेशन समर के लिए किसी भी सुपर ड्रिंक से कम नहीं है। छवि: सोशल मीडिया फालसा छाछ बनाने की सामग्री: 1 कप समुद्री फालसे, 2 कप जैतून छाछ, 1 छोटा चम्मच बाकी जीरा पाउडर, स्वादानुसार काला नमक, 4-5 पुदीने की सब्जी, बर्फ के टुकड़े, थोड़ा सा या शहद चीनी छवि: एआई सबसे पहले झूठ को अच्छी तरह धो लें। अब बड़े पैमाने पर एक बाउल में बेकार का रस मिला दिया गया। छवि: एआई इसमें जीरा पाउडर, काला नमक और पुदीने की सामग्री के साथ मिश्रण भी शामिल करें। अगर आपको इसमें मेला पसंद है तो थोड़ा सा शहद या चीनी भी मिला सकते हैं। अब इसमें बर्फ डालें और ठंडा-ठंडा सर्व करें। छवि: एआई शरीर को तुरंत ठंडक दिशानिर्देश में मदद मिलती है। लू और डायग्नोस्टिक्स से बचाव में सहायक होता है। पेट को असर और ठंडा होता है। पाचन को बेहतर बनाने में मदद मिलती है। छवि: एआई गर्मी में शरीर की थकान और कमजोरी को दूर करना उपयोगी माना जाता है। अगर आप इसका स्वाद और ज्यादा मजा बनाना चाहते हैं तो ऊपर से छोटी सी चाट मसाला डाल सकते हैं। छवि: एआई पुदीने की जगह तुलसी के पौधे से भी इसका स्वाद काफी ताज़ा लगता है। समरस्लैम में जापान के समुद्री डाकू और चॉकलेट ड्रिंक पीने का मन हो तो फालसे की छाछ एक बेहतरीन पद हो सकता है। छवि: एआई

Dog Care Tips: इंसानों ही नहीं, पालतू कुत्तों के लिए भी खतरनाक है गर्मी, अपनाएं ये टिप्स, वरना हो सकती है परेशानी

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Last Updated:May 22, 2026, 16:01 IST Dog Summer Care Tips: भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने इन दिनों हर किसी का हाल बेहाल कर दिया है. चिलचिलाती धूप और गर्म हवाओं के थपेड़ों से सिर्फ इंसान ही नहीं बल्कि बेजुबान जानवर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं. अगर आप भी एक डॉग लवर हैं और आपके घर पर कुत्ता है, तो यह खबर आपके लिए बेहद जरूरी है. आज हम आपको बताएंगे कि गर्मी में डॉग का कैसे खयाल रखा जाए. (रिपोर्ट: शिवांक द्विवेदी/सतना) इसानों के मुकाबले कुत्तों को गर्मी अधिक सताती है. गर्मी में आपकी जरा सी लापरवाही आपके प्यारे डॉग की जान पर भारी पड़ सकती है. पशु चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि इस तपती गर्मी में डॉग्स को हीटस्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गंभीर स्किन इंफेक्शन का सबसे ज्यादा खतरा होता है. लोकल 18 से खास बातचीत में सतना के पशु चिकित्सक डॉ. बृहस्पति भारती ने कहा कि वेटनरी में इस समय सबसे ज्यादा मामले हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के आ रहे हैं. कुत्ते इंसानों की तरह शरीर से पसीना नहीं बहा सकते, इसलिए वे गर्मी से राहत पाने के लिए अपनी जीभ बाहर निकालकर लगातार हांफते यानी पेंटिंग करते हैं. हांफते समय उनकी जीभ, मुंह और श्वसन नली से लार वाष्पित होती है, जिससे उनके शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है. गर्मियों के सीजन में कुत्तों में टिक्स यानी किलनी का प्रकोप काफी बढ़ जाता है. लंबे बालों वाली ब्रीड जैसे- गोल्डन रिट्रीवर, जर्मन शेफर्ड और कॉकर स्पैनियल में घने बालों के कारण टिक्स आसानी से छिप जाते हैं. इन टिक्स के कारण बेबेसिओसिस नाम की गंभीर प्रोटोजोअन बीमारी हो सकती है, जिसे आम भाषा में टिक फीवर भी कहते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google इसमें कुत्ते का तापमान 105 से 106 डिग्री तक पहुंच जाता है. इस बीमारी में कुत्तों की नाक से खून भी आने लगता है, जिसे मेडिकल भाषा में एपिस्टेक्सिस और बघेलखंड में लोग विनास फूटना भी कहते हैं. वहीं इस बीमारी में कुत्तों की जान जाने का खतरा बहुत अधिक होता है. गर्मी से बचाव के लिए डॉग्स को सुबह 9 से 10 बजे से पहले और शाम को 6 बजे के बाद ही सैर पर बाहर ले जाएं. दोपहर की तेज धूप में उन्हें बिल्कुल बाहर न निकालें. चूंकि कुत्तों में स्वेट ग्लैंड्स नहीं होतीं, इसलिए उन्हें रोज नहलाना इतना जरूरी नहीं है लेकिन हफ्ते में एक बार अच्छे से नहलाना चाहिए है. डॉग्स को बहुत ज्यादा पानी में न रखें और पंजे साफ रखें क्योंकि लगातार गीलेपन से पंजों में रेडनेस, इचिंग या पायोडर्मा जैसी बीमारियां पनप सकती हैं. वहीं साइबेरियन हस्की जैसे विदेशी ब्रीड वाले डॉग्स को तो दिन-रात कूलर या एसी में ही रखना अनिवार्य है. अक्सर कई लोग डॉग्स को दिन में एक-दो बार पानी देकर भूल जाते हैं. उन्हें हमेशा साफ और ठंडा पानी उपलब्ध कराएं. आप बाजार में मिलने वाले डॉग्स स्पेशल ओआरएस घोल का इस्तेमाल भी कर सकते हैं. साथ ही उन्हें हल्का और सुपाच्य भोजन दें. अगर आपका डॉग वेजिटेरियन डाइट पर है, तो आप उसे पानी से भरपूर फल जैसे- तरबूज और खरबूजा खिला सकते हैं. डॉग्स इसे बड़े चाव से खाते हैं और इससे उनका डिहाइड्रेशन भी दूर होता है. कुत्तों का समय-समय पर टीकाकरण कराना बेहद जरूरी है. अन्यथा, उन्हें पार्वोवायरस जैसी घातक बीमारियां हो सकती हैं. गर्मियों के दौरान टिक संक्रमण भी तेजी से फैलता है, जिससे कुत्तों को कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं. इसलिए, नियमित रूप से डॉक्टर से परामर्श लेकर टिक संक्रमण का इलाज कराना जरूरी है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।