Tuesday, 13 Oct 2026 | 05:44 AM

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रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

रेडियो इंडस्ट्री की सरकार से 5 प्रमुख अपेक्षाएं:FM इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, राहत नहीं मिली तो थम जाएगी रफ्तार

देश का प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर इस समय कई चुनौतियों का सामना कर रहा है। विज्ञापन घट रहे हैं, खर्च बढ़ रहा है और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की वजह से रेडियो की कमाई पर असर पड़ रहा है। ऐसे में रेडियो कंपनियां सरकार से नियमों में कुछ बड़े बदलाव चाहती हैं। इंडस्ट्री एक्स्पर्ट्स का कहना है कि अगर जल्द राहत नहीं मिली तो आने वाले समय में और FM स्टेशन बंद हो सकते हैं। वहीं सही फैसले होने पर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है और नए रोजगार के साथ स्थानीय कंटेंट को भी बढ़ावा मिलेगा। रेडियो कंपनियों की सरकार से 5 बड़ी अपेक्षाएं 1. FM रेडियो को न्यूज प्रसारण की अनुमति मिले भारत में प्राइवेट FM रेडियो चैनलों को स्वतंत्र रूप से न्यूज प्रसारण की इजाजत नहीं है। रेडियो कंपनियों का कहना है कि सिर्फ गानों के भरोसे अब ग्लोबल म्यूजिक और स्ट्रीमिंग ऐप्स से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। ऐसे में न्यूज का प्रसारण रेडियो को नई पहचान दे सकता है। कंपनियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर बिना किसी कंट्रोल के लाखों लोग न्यूज कंटेंट बना रहे हैं, जबकि FM रेडियो पहले से तय नियमों के तहत काम करता है। 2. 2030 के बाद लाइसेंस रिन्यूअल बाजार के हिसाब से हो रेडियो कंपनियों का कहना है कि पुराना ऑक्शन मॉडल अब मौजूदा बाजार के हिसाब से फिट नहीं बैठता। विज्ञापन बाजार बदल चुका है, इसलिए 2030 के बाद FM फेज-3 लाइसेंस का रिन्यूअल बाजार के हिसाब से तय कीमतों पर किया जाना चाहिए। 3. एनुअल लाइसेंस फीस खत्म हो रेडियो सेक्टर का कहना है कि उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। ऐसे में कंटेंट, टेक्नोलॉजी और नए शहरों में विस्तार के लिए निवेश करना मुश्किल हो रहा है। इसलिए एनुअल लाइसेंस फीस खत्म करने की मांग की गई है। 4. GST 18% से घटाकर 5% किया जाए रेडियो कंपनियों की मांग है कि FM सेक्टर पर लगने वाले GST को 18% से घटाकर 5% किया जाए। कंपनियों का कहना है कि इससे रेडियो को दूसरे मीडिया प्लेटफॉर्म्स के मुकाबले टिके रहने में मदद मिलेगी। 5. स्मार्टफोन में FM फीचर जरूरी हो आजकल आने वाले ज्यादातर स्मार्टफोन में FM रेडियो फीचर नहीं होता। इंडस्ट्री की मांग है कि सरकार मोबाइल कंपनियों के लिए FM रिसीवर एक्टिव रखना अनिवार्य करे। रेडियो कंपनियों का कहना है कि आपदा के समय, नेटवर्क फेल होने पर या इमरजेंसी जैसी स्थिति में रेडियो सबसे भरोसेमंद माध्यम साबित हुआ है। कॉपीराइट-डिजिटल स्ट्रीमिंग मुद्दों पर भी राहत की मांग रेडियो सेक्टर, कॉपीराइट मुद्दों का हल निकलने का लंबे समय से इंतजार कर रहा है। साथ ही FM के प्रसारण को मौजूदा रॉयल्टी व्यवस्था के तहत डिजिटल लाइव स्ट्रीमिंग यानी साइमलकास्ट (एक साथ प्रसारण) की अनुमति देने की मांग भी है। इंडस्ट्री पर बढ़ता संकट, बड़े शहरों में बंद हो रहे FM स्टेशन देश के कई बड़े शहरों में अब FM रेडियो स्टेशनों पर संकट साफ दिखाई देने लगा है। हाल ही में HT मीडिया ग्रुप ने मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में अपने कुछ FM रेडियो लाइसेंस सरेंडर करने का फैसला किया है। इससे पहले TV टुडे नेटवर्क भी कई शहरों में अपने रेडियो ऑपरेशन बंद कर चुका है और Red FM ने भी मुंबई में अपना एक स्टेशन बंद किया था। FM स्टेशनों के बंद होने का असर रोजगार पर भी पड़ा है। इंडस्ट्री से जुड़े हजारों लोगों की नौकरियों पर इसका असर हुआ है। साथ ही सरकार की कमाई भी प्रभावित हुई है, क्योंकि DTH के बाद FM रेडियो ऐसा मीडिया सेक्टर है जो सरकार को लाइसेंस फीस देता है। जानकारों का कहना है कि कभी देश के सबसे बड़े मीडिया माध्यमों में गिने जाने वाला प्राइवेट FM रेडियो सेक्टर अब लगातार दबाव में है। रेडियो कंपनियों का मानना है कि ज्यादा फीस, नीतियों में देरी और लगातार पाबंदियों की वजह से सेक्टर की आर्थिक हालत कमजोर होती गई। AROI के मुताबिक, देश का मीडिया और एंटरटेनमेंट सेक्टर लगातार बढ़ रहा है, लेकिन रेडियो इंडस्ट्री अभी भी संघर्ष कर रही है। रेडियो कंपनियों के मुताबिक, उनकी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा फीस और टैक्स में चला जाता है। इसमें GST, एनुअल लाइसेंस फीस, टावर और स्पेक्ट्रम चार्ज जैसे खर्च शामिल हैं। ऐसे में कंपनियों के पास कंटेंट, टेक्नोलॉजी और विस्तार पर निवेश के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं बचते। रेडियो सेक्टर की चुनौतियां अब विज्ञापन बाजार में भी असर दिखाने लगी हैं। देशभर में FM स्टेशनों की संख्या बढ़ी, लेकिन इंडस्ट्री की कमाई उस रफ्तार से नहीं बढ़ पाई। कंपनियों का कहना है कि अगर समय रहते जरूरी बदलाव नहीं हुए, तो आने वाले समय में रेडियो सेक्टर की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। ऐसे में सवाल यह भी है कि जिस रेडियो को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ जैसे कार्यक्रम के जरिए देश से संवाद का मजबूत माध्यम बनाया, क्या उसी रेडियो इंडस्ट्री की ‘मन की बात’ अब सरकार तक पहुंच पाएगी?

हीटवेव का हो जाएं शिकार तो कैसे बचें? पैरासिटामोल दवा भी नहीं आती काम, डॉक्टर से जानिए आखिर करें तो क्या करें?

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Last Updated:May 21, 2026, 18:29 IST Heatwave Prevention Tips: अक्सर लू लग जाने पर या गर्मी में बुखार आ जाने पर लोग सीधी पैरासिटामोल दवा का इस्तेमाल करते हैं. लेकिन, इससे राहत नहीं मिलती. डॉक्टरों का कहना है कि लू लगने पर बिना सलाह पैरासिटामोल खाने से अंग फेल हो सकता है. जानें लू लगने पर क्या करना चाहिए… Heatwave Prevention Tips: मध्य प्रदेश के उज्जैन में भीषण गर्मी ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. तेज धूप और झुलसा देने वाली गर्म हवाओं ने जनजीवन पर गहरा असर डाला है. पिछले एक सप्ताह से शहर का दिन का तापमान लगातार 44 डिग्री के पार बना है, जबकि रात में भी लोगों को राहत नहीं है. रात का पारा करीब 30 डिग्री तक पहुंचने से उमस और गर्मी ने परेशानी बढ़ा दी है. दिनभर सड़कों पर सन्नाटा नजर आ रहा है. लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. लगातार बढ़ती गर्मी अब लोगों के सब्र की कड़ी परीक्षा ले रही है. जीवाजीराव वेधशाला के रिकॉर्डनुसार, गर्मी का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है. हालात यह है कि दिन के साथ रात में भी तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है. वर्ष 2025 में इस समय दिन का तापमान 43.4 डिग्री ओर रात का 27 डिग्री था. वहीं, शुक्रवार को दिन में 45 डिग्री तक पहुंच गया है. वहीं, मौसम विभाग की मानें तो आने वाले दिनों में पारा और अधिक बढ़ने की संभावना हैं. सड़कें सूनीं, ठंडे पेय का सहारातेज धूप और गर्म हवाओं के चलते सुबह 10 बजे से ही सड़कें लगभग सूनी नजर आईं. लोग केवल जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकल रहे हैं. निकलना भी पड़ रहा है तो लोग सिर पर कपड़ा बांधकर निकलते दिखाई दिए. वहीं, कई लोग गर्मी से राहत पाने के लिए शीतल पेय, जूस और ठंडी चीजों का सहारा लेते नजर आए. डॉक्टर की सलाह अनुसार भी लोग दोपहर में बाहर निकलने से बचे और बाहर निकलने पर मुंह ढककर निकले ओर पर्याप्त पानी पीते रहे. क्या कहते हैं डॉक्टर?एमबीबीएस, आरसीजीपी चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय, डॉ. जितेन्द्र शर्मा ने बताया कि हीट स्ट्रोक या लू लगने की स्थिति सामान्य बुखार से बिल्कुल अलग होती है. सामान्य बुखार में इन्फेक्शन के कारण दिमाग का थर्मोस्टेट (तापमान तय करने वाला हिस्सा) बढ़ जाता है, जिसे पैरासिटामोल कम कर देती है. लेकिन, हीट स्ट्रोक के दौरान, शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (पसीना आना आदि) फेल हो जाता है और शरीर बाहर की अत्यधिक गर्मी को झेल नहीं पाता. ऐसी अवस्था में पैरासिटामोल खाने से कोई फायदा नहीं होता और उल्टे अंगों को नुकसान (ऑर्गन फेलियर) पहुंच सकता है. हीट वेव (लू) लगने पर क्या करें?यदि कोई व्यक्ति हीट स्ट्रोक या हीट एग्जॉशन का शिकार हो जाए, तो उन्हें तुरंत कुछ उपचार चालू कर देना चाहिए. अगर किसी व्यक्ति को तेज गर्मी या लू लगने के लक्षण दिखें, तो सबसे पहले उसे तुरंत धूप से हटाकर ठंडी और हवादार जगह पर ले जाएं. शरीर के तंग या भारी कपड़े ढीले कर दें, ताकि गर्मी बाहर निकल सके. इसके बाद ठंडे पानी से शरीर को पोंछें या स्पंज करें और पंखे की हवा दें. गर्दन, बगल और जांघों के जोड़ पर ठंडी पट्टियां या आइस पैक रखें, इससे शरीर का तापमान तेजी से कम होता है. यदि मरीज होश में हो तो उसे धीरे-धीरे पानी या ओआरएस दें. साथ ही बिना देरी किए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं. About the Author Rishi mishra एक दशक से अधिक समय से पत्रकारिता में सक्रिय. प्रिंट मीडिया से शुरुआत. साल 2023 से न्यूज 18 हिंदी के साथ डिजिटल सफर की शुरुआत. न्यूज 18 के पहले दैनिक जागरण, अमर उजाला में रिपोर्टिंग और डेस्क पर कार्य का अनुभव. म…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Ujjain,Madhya Pradesh Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।

सुदर्शन बोले-चेन्नई की बस देखने सड़क पर खड़ा रहता था:आज उनके खिलाफ खेलना खास, शुभमन गिल को बताया मास्टरमाइंड

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गुजरात टाइटंस के बल्लेबाज साई सुदर्शन ने बताया कि एक समय ऐसा था, जब वह सिर्फ चेन्नई सुपर किंग्स की टीम बस देखने के लिए स्कूल के बाहर सड़क पर खड़े रहते थे। आज IPL में गुजरात का मुकाबला चेन्नई से होना है। मैच से पहले सुदर्शन ने जियोस्टार से बातचीत में अपनी भावनाएं साझा कीं। सुदर्शन ने कहा, क्रीज पर समय बिताना हमेशा खास होता है, खासकर जब मैं चेन्नई के खिलाफ खेलता हूं। चाहे कुछ भी कहा जाए, चेन्नई के साथ मेरा एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव है। मैं चेन्नई को खेलते हुए देखकर बड़ा हुआ हूं। उन्होंने आगे कहा, हम स्कूल के पास सड़क पर सिर्फ उनकी टीम बस को गुजरते देखने के लिए खड़े हो जाया करते थे। वो यादें आज भी बेहद खास हैं। भगवान का शुक्रगुजार हूं कि मुझे चेन्नई के खिलाफ कुछ यादगार पारियां खेलने का मौका मिला। सुदर्शन ने अपना पहला शतक चेन्नई के खिलाफ ही लगाया सुदर्शन ने मई 2023 के IPL फाइनल में चेन्नई के खिलाफ 96 रन बनाए थे। यह उस सीजन की सबसे यादगार पारियों में गिनी जाती है। इसके बाद 2024 में सुदर्शन ने इसी टीम के खिलाफ अपना पहला IPL शतक लगाया। यह उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट माना गया। कप्तान शुभमन गिल के साथ साझेदारी और तालमेल कप्तान शुभमन गिल के साथ अपनी साझेदारी और समझ को लेकर सुदर्शन ने कहा, शुभमन एक मास्टरमाइंड हैं। वे खेल को बहुत अच्छी तरह समझते हैं और रणनीतिक रूप से बेहद मजबूत हैं। उनके साथ होने से आपको कुछ भी करने की आजादी मिलती है क्योंकि आपको पता होता है कि शुभमन वहां मौजूद हैं। मुझे लगता है कि इसका उल्टा भी उतना ही सच है, जब वे गेंदबाजों पर हावी होने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें पता होता है कि मैं वहां हूं और पारी को संभाल हमारे बीच बेहतरीन संबंध हैं, हम एक-दूसरे को बहुत अच्छी तरह समझते हैं। बल्लेबाजों को भी खुद को बदलना होगा इस सीजन धीमी शुरुआत पर सुदर्शन ने कहा, मैं चीजों को जितना हो सके खुला रखने की कोशिश करता हूं। अगर मैच अच्छा रहा है, तो हां, हम उस आत्मविश्वास को आगे ले जा सकते हैं, लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ है, तो हम आगामी मैचों के लिए अपने दिमाग को जितना संभव हो उतना फ्रेश रखने की कोशिश करते हैं। यह समझना भी महत्वपूर्ण है कि खेल कैसे बदल रहा है क्योंकि टी-20 क्रिकेट बहुत तेजी से बदलता है। बल्लेबाजों के रूप में हमें पता होना चाहिए कि टीम या स्थिति की मांग के अनुसार खुद को ढाल सकें। अगर हम ऐसा करने में सक्षम हैं, तो मुझे लगता है कि यह सबसे अच्छी बात है।

चेहरा चमकाने के लिए स्किन में इंजेक्शन घुसेड़ा तो खैर नहीं, ब्यूटी क्लिनिकों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश, लड़कियां भी ध्यान दें

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CDSCO Warn against Injectable Cosmetic Products: शहरों में ब्यूटी क्लिनिकों की कोई कमी नहीं है. ऐसे कई ब्यूटी क्लिनिक मिल जाएंगे जहां दावा किया जाएगा कि हमारे पास प्रतिष्ठित संस्थानों से ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट है. कुछ क्लिनिकों में चेहरे काया पलट करने के लिए खास सलाह दी जाती है. इसमें कहा जाता है कि जो क्रीम आप चेहरे पर लगाते हैं वह जल्दी असर नहीं करती, इसलिए इसका इंजेक्शन लगा लीजिए. कुछ लोग इस झांसे में आ जाते हैं और झट से इस इंजेक्शन को लगा लेते हैं. इस प्रैक्टिस पर सख्त नराजगी जताते हुए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी CDSCO ने एक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में कहा गया है कि किसी भी हाल में कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में मंजूरी नहीं है. इसलिए यदि कोई ब्यूटी क्लीनिक ऐसा करता है तो उसके खिलाफ सख्स से सख्त कार्रवाई की जाएगी. कॉस्मेटिक का इस्तेमाल इंजेक्शन के लिए नहीं दरअसल, कई ऐसी शिकायतें आ रही थी जिनमें किसी व्यक्ति ने चेहरे में इंजेक्शन लगाया और उसे कई तरह की परेशानियां हो गईं. इसी के बाद CDSCO ने यह नोटिस जारी की. केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन यानी सीडीएससीओ ने साफ किया है कि किसी भी कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं है. सरकार ने चेतावनी दी है कि अगर कोई कंपनी, क्लीनिक या विक्रेता कॉस्मेटिक उत्पादों को इंजेक्शन के जरिए इस्तेमाल करने का दावा करता है या उसका प्रचार करता है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी की ओर से जारी नोटिस में कहा गया है कि कॉस्मेटिक कंपनियां ऐसे दावे नहीं कर सकतीं जो लोगों को गुमराह करें. किसी भी उत्पाद के लेबल, पैकेजिंग या विज्ञापन में झूठे, बढ़ा-चढ़ाकर या इलाज जैसे दावे करना नियमों का उल्लंघन माना जाएगा. कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध सरकार ने स्पष्ट किया है कि ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट 1940 के तहत कॉस्मेटिक वे उत्पाद हैं, जो शरीर पर लगाने, छिड़कने या बाहरी इस्तेमाल के लिए होते हैं. इनका उद्देश्य केवल सफाई, सुंदरता बढ़ाना और आकर्षक दिखाना है. इन्हें इलाज या इंजेक्शन के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. नोटिस में यह भी कहा गया है कि असुरक्षित या प्रतिबंधित सामग्री वाले कॉस्मेटिक उत्पादों का इस्तेमाल और कॉस्मेटिक्स को इलाज के रूप में पेश करना कानूनन अपराध है. सीडीएससीओ ने लोगों से अपील की है कि अगर कहीं कॉस्मेटिक उत्पादों का गलत इस्तेमाल, भ्रामक प्रचार या इंजेक्शन के जरिए उपयोग होता दिखे, तो इसकी जानकारी तुरंत नियामक एजेंसियों या राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरण को दें. अधिकारियों के मुताबिक यह चेतावनी खास तौर पर एस्थेटिक, ब्यूटी और वेलनेस क्लीनिकों के लिए अहम है, जहां स्किन ग्लो, एंटी-एजिंग और ब्यूटी ट्रीटमेंट के नाम पर इंजेक्शन आधारित प्रक्रियाएं की जा रही हैं. सीडीएससीओ के पास हाल के दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए थे, जिसके बाद यह सख्त कदम उठाया गया है. क्यों खतरनाक हैं ये ब्यूटी इंजेक्शन  हेल्थ एक्सपर्ट की मानें तो किसी भी तरह के कॉस्मेटिक प्रोडेक्ट में कई तरह के केमिकल होते हैं. इसलिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को इस तरह से बनाया जाता है कि इसमें मौजूद खतरनाक भारी मेटल स्किन के अंदर न घुसे. अगर स्किन की सतह पर लगाए जाने वाले कॉस्मेटिक्स को सीधे इंजेक्शन के जरिए स्किन की भीतरी परतों में डाल दिया जाए, तो यह एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी बन सकती है. यह कोशिकाओं के स्तर पर विनाशकारी साबित हो सकता है. इसके कई कारण है. इन कॉस्मेटिक प्रोडक्ट में पैराबेंस, फेथलेट्स, फॉर्मलडिहाइड, मर्करी, पारा, लेड, सीसा जैसे अत्यंत हानिकारक तत्व होते हैं. इसलिए इसमें सिलिकॉन और मिनिरल ऑयल मिले होते हैं तो त्वचा में लगाने के साथ तुरंत एक सिंथेटिक परत बना लें लेकिन जब ये भारी टॉक्सिक तत्व स्किन के अंदर घुस जाएंगे तो खून में पहुंचकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाने लगते है. मर्करी, लेड जैसे तत्व सीधे नर्वस सिस्टम को अटैक करते हैं. फॉर्मेल्डिहाइड जैसे तत्व कैंसर का कारण भी बन सकता है. कभी-कभी गलत डोज के कारण चेहरा संवारने के बजाय चेहरा बदसूरत होने लगता है. गलत डोज या गलत तरीके से सुई लगाने से चेहरे पर परमानेंट निशान, सूजन या पैरालिसिस तक हो सकता है. लड़कियां खास ध्यान दें  इन ब्यूटी क्लिनिकों में अधिकांश लड़कियां जाती हैं. उन्हें इस बात पर खास ध्यान देने की जरूरत है क्योंकि उन्हें नहीं पता होता है कि कॉस्मेटिक प्रोडक्ट को इंजेक्शन के रूप में लेने के बाद इसका क्या अंजाम होता है. अगर कोई इंजेक्शन या लेजर ट्रीटमेंट का सुझाव दे रहा है, तो पहले सुनिश्चित करें कि वह डर्मेटोलॉजिस्ट है या नहीं. उसका लाइसेंस देखें, उस क्लिनिक के पास हेल्थ डिपार्टमेंट से सर्जिकल या कॉस्मेटिक प्रक्रिया का लाइसेंस है या नहीं यह भी देखना चाहिए. आप किस डॉक्टर से इलाज करा रहे हैं, उसके बारे में सब कुछ पहले पता करें. सबसे बेहतर यही है कि नेचुरल पर भरोसा करें. इंस्टेंट निखार के बजाय अच्छी डाइट, पर्याप्त पानी, नींद और तनाव रहित जीवन को अपनाएं.

गर्मियों में दादी-नानी के ये देसी नुस्खे हैं रामबाण! डॉक्टर बोले…शरीर रहेगा कूल-कूल, नहीं होगी पानी की कमी

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Last Updated:May 21, 2026, 17:44 IST Summer Health Tips: गर्मियों के मौसम में आसमान से बरसती आग और भयंकर लू ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है. ऐसे में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और कमजोरी जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं. रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने इस भीषण गर्मी से बचने के लिए आयुर्वेद के कुछ बेहद आसान और असरदार घरेलू नुस्खे बताए हैं. आखिर बिना ज्यादा पैसे खर्च किए आप अपने शरीर को अंदर से कैसे ठंडा और तरोताजा रख सकते हैं, आइए जानते हैं. रामपुर: उत्तर प्रदेश में इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. तेज धूप, बढ़ते तापमान और उमस ने लोगों की दिनचर्या को पूरी तरह से बदल कर रख दिया है. हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है और लोग घरों से बाहर निकलने में भी कतरा रहे हैं. इस मौसम में सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें काम के सिलसिले में लगातार धूप में बाहर रहना पड़ता है. तेज धूप में ज्यादा पसीना निकलने के कारण शरीर बहुत जल्दी थक जाता है और बॉडी में पानी की कमी होने लगती है. जिसकी वजह से लू, डिहाइड्रेशन, चक्कर आना और थकान जैसी परेशानियां सामने आ रही हैं. खासकर बच्चे, बुजुर्ग और कामकाजी लोग इसकी चपेट में ज्यादा आ रहे हैं. ऐसे में रामपुर के आयुष चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर मोहम्मद इकबाल ने कुछ ऐसे पुराने घरेलू नुस्खे बताए हैं जो आपको इस गर्मी में एकदम फिट रखेंगे. फ्रिज के ठंडे पानी से बेहतर हैं ये देसी पेय डॉक्टर मोहम्मद इकबाल के मुताबिक, गर्मी के इस मौसम में सबसे ज्यादा जरूरी अपने शरीर को अंदर से ठंडा रखना है. आजकल लोग गर्मी से तुरंत राहत पाने के लिए बाजार में मिलने वाली ज्यादा ठंडी चीजें या कोल्ड ड्रिंक पी लेते हैं. इससे कुछ देर के लिए तो राहत मिलती है, लेकिन यह शरीर को असली फायदा नहीं पहुंचाती. इसके बजाय हमारे घरों में बनने वाले पारंपरिक और देसी पेय सबसे ज्यादा असरदार होते हैं. बेल का शरबत, सत्तू, छाछ और नींबू पानी जैसी चीजें न सिर्फ शरीर को अंदरूनी ठंडक देती हैं, बल्कि दिनभर काम करने के लिए जरूरी एनर्जी भी बनाए रखती हैं. यह भी पढ़ें: पार्क-मैदानों में दिखने वाली इस मामूली हरी घास में छिपा है सेहत का बड़ा राज, इसके फायदे जान चौंक जाएंगे पानी पीने में कभी न करें ये बड़ी गलतीअक्सर लोग इस मौसम में सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे पानी बहुत कम पीते हैं. डॉक्टर इकबाल ने बताया कि कई बार हमें प्यास का अहसास नहीं होता, लेकिन शरीर के अंदर पानी की कमी लगातार होती रहती है. यही कारण है कि लोगों को अचानक चक्कर आने लगते हैं, सिर भारी हो जाता है और कमजोरी महसूस होने लगती है. इससे बचने के लिए जरूरी है कि आप थोड़ी-थोड़ी देर में पानी पीते रहें. इसके अलावा जब भी घर से बाहर निकलें, तो कभी भी खाली पेट न जाएं. धूप में निकलने से पहले अपने सिर को किसी हल्के कपड़े से जरूर ढक लें. मिट्टी के घड़े का पानी है वरदानआयुर्वेद भी मानता है कि गर्मियों के दिनों में हमारा खानपान बेहद हल्का होना चाहिए. ज्यादा मसालेदार, तला-भुना और गर्म तासीर वाला भोजन शरीर की गर्मी को और ज्यादा बढ़ा देता है. इसकी जगह अपने दैनिक आहार में दही, खीरा, तरबूज, ककड़ी और मौसमी फलों को शामिल करना चाहिए. ये चीजें शरीर को ठंडक और तरोताजा बनाए रखती हैं. इसके साथ ही गांवों में आज भी लोग मिट्टी के घड़े का पानी पीते हैं, जिसे आयुर्वेद में सबसे उत्तम माना गया है. घड़े का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा होता है और इसका शरीर पर कोई भी गलत असर नहीं पड़ता. दोपहर 12 से 3 बजे की धूप से बचेंडॉक्टर इकबाल ने खास तौर पर सलाह दी है कि दोपहर 12 बजे से लेकर 3 बजे तक की धूप सबसे ज्यादा खतरनाक होती है. इस दौरान बहुत जरूरी काम होने पर ही घर या ऑफिस से बाहर निकलें. धूप में जाते समय हमेशा हल्के और सूती (कॉटन) कपड़े ही पहनें, क्योंकि सूती कपड़ों में हवा का प्रवाह अच्छा रहता है और पसीना आसानी से सूख जाता है. इस मौसम में सूखे और गर्म वातावरण के कारण सेहत बिगड़ने का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए इन छोटे-छोटे घरेलू उपायों को अपनी लाइफस्टाइल में शामिल करें. About the Author Seema Nath सीमा नाथ 6 साल से मीडिया के क्षेत्र में काम कर रही हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत शाह टाइम्स में रिपोर्टिंग के साथ की जिसके बाद कुछ समय उत्तरांचल दीप, न्यूज अपडेट भारत के साथ ही लोकल 18 (नेटवर्क18) में काम …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Rampur,Uttar Pradesh

लौकी हरे प्याज के पकौड़े रेसिपी: लौकी हरे प्याज के पकौड़े, कम तेल में होंगे तैयार; बड़ी चाय का स्वाद

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सामग्री: 1 लोकी, 1 हरा प्याज, 1 कप बेसन, 2 हरी मिर्च , 1 छोटा बड़ा अदरक, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा प्याज हल्दी, 1/2 छोटा प्याज हल्दी, नमक, हरा धनिया, आवश्यक पानी, तेल छवि: फ्रीपिक सबसे पहले कद्दू की हुई लौकी को हाथ से पानी निकाल लें। अब एक बड़ा नमक में लोकी, हरा प्याज, प्याज, हरी मिर्च, अदरक, हल्दी, लाल मिर्च, अजवायन, नमक और हरा धनिया धनिया अच्छी तरह मिला लें। छवि: एआई अगर मिश्रण ज्यादा सूखा लगे तो थोड़ा-थोड़ा पानी डाले हुए टेस्ला बैटर तैयार करें। ध्यान दें कि बातर बहुत हल्का न हो। छवि: एआई अब तवा या पैन पर गैस गर्म करें और तेल का इस्तेमाल करें। छोटे-छोटे होने वाले पकौड़े दोनों तरफ से सुनहरे और कुरकुरे तक सेक लें। ‍ड्रामा तो कृप्या कम तेल में शैलो फ्राई भी कर सकते हैं। छवि: एआई स्वाद बढ़ाने के लिए बैटर में छोटे चावल का आटा मिलाने से पकौड़े ज्यादातर कुरकुरे बनते हैं. अगर तीखा पसंद है तो हरी मिर्च की मात्रा बढ़ाई जा सकती है। इन पकौड़ों को हरी चटनी या टमाटर सॉस के साथ सर्व करें. छवि: एआई लोकी बॉडी को ठंडक देने में मदद करता है और हरे प्याज के स्वाद के साथ लौकी कुरकुराहट भी देता है। ऐसे में यह मूलभूत स्वाद और स्वास्थ्य दोनों का अच्छा संयोजन बन गया है। छवि: फ्रीपिक कम तेल में बनने की वजह से इसे बिना ज्यादा से ज्यादा खाया जा सकता है। छवि: एआई

तरबूज-खरबूज से ज्यादा ताकतवर, दिखने में जेली और शरीर रखता है बर्फ सा ठंडा, जानें आइस एप्पल के फायदे

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आइस एप्पल जिसे ताड़गोला भी कहा जाता है, पोषक तत्वों से भरा गर्मी का सुपरफ्रूट है. वैसे तो इस मौसम में मार्केट में हर तरफ तरबूज और खरबूज का बोलबाला होता है. लेकिन इस बीच ताड़गोला कहीं दब सा जाता है, जबकि इसके फायदे दोनों से ज्यादा हैं. यदि आप सिर्फ ताड़गोल खा लें तो आपको तरबूज और खरबूज दोनों के न्यूट्रिएंट्स एक साथ एक ही बार में मिल जाते हैं. ताड़गोला पाम की एक प्रजाति ताड़ के पेड़ पर लगने वाला फल है. बिहार, बंगाल और झारखंड में इसे आप सड़कों के किनारे और खेतों में आसानी से देख सकते हैं. लेकिन चौंकाने वाली बात है कि इसके फायदों के बारे में लोग कम ही जानते हैं. यदि आप भी इसमें से एक हैं, तो लेख आपके लिए है. क्योंकि इस साल गर्मी से बचने के लिए सिर्फ कूलर और एसी काम नहीं आएंगे. सेहत को बनाए रखने के लिए ज्यादा से ज्यादा ऐसे फलों और सब्जियों को खाने की जरूरत है, जो आपको अंदर से ठंडा और हाइड्रेट रखे. ताड़गोला के फायदेआइस एप्पल यानी ताड़गोला शरीर को ठंडक देने वाला फल है. इसमें 90 प्रतिशत पानी होता है, जो इसे तरबूज को कड़ी टक्कर देने वाला फल बनाता है. इसलिए गर्मियों में यह शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है. इसे खाने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी पूरी होती है. यह थकान, सिरदर्द और शरीर में सूखापन जैसी समस्याओं से बचाने में सहायक होता है. आइस एप्पल में एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से होने वाले नुकसान से बचाते हैं. इससे हार्ट डिजीज, डायबिटीज और अन्य बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. यह शरीर की रोगों से लड़ने की क्षमता को मजबूत बनाता है और लंबे समय तक स्वस्थ रहने में मदद करता है. इस फल में फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन क्रिया को सही रखता है. यह कब्ज की समस्या को कम करने और पेट को साफ रखने में मदद करता है. आइस एप्पल पेट की जलन, गैस और अपच जैसी परेशानियों में भी राहत देता है. इसे खाने से आंतों में अच्छे बैक्टीरिया बढ़ते हैं, जिससे पाचन तंत्र स्वस्थ रहता है. आइस एप्पल का ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, इसलिए यह ब्लड शुगर को तेजी से नहीं बढ़ाता. इसमें मौजूद प्राकृतिक शुगर धीरे-धीरे ऊर्जा देती है. फाइबर की वजह से शरीर में शुगर धीरे अवशोषित होती है, जिससे डायबिटीज के मरीजों को लाभ मिल सकता है. इसके विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा को चमकदार और मुलायम बनाते हैं. यह त्वचा की नमी बनाए रखता है और झुर्रियों को कम करने में सहायक होता है. आइस एप्पल में विटामिन C और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. यह शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है और संक्रमण से बचाव करता है. नियमित सेवन से शरीर मजबूत और स्वस्थ बना रहता है. इस बात का रखें ध्यानइसमें कोई दोराय नहीं कि ताड़गोला गर्मी के मौसम का सुपरफ्रूट है, लेकिन यदि आप इसे ज्यादा मात्रा में खाते हैं, तो ये नुकसान भी कर सकता है. इसलिए रोजाना थोड़ी मात्रा में सेवन करना सेहतमंद माना जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल ने बनाया मेलोडी टॉफी पर वीडियो:पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की टॉफी; सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मेलोडी ट्रेंड

सोनाक्षी सिन्हा-जहीर इकबाल ने बनाया मेलोडी टॉफी पर वीडियो:पीएम मोदी ने मेलोनी को गिफ्ट की टॉफी; सोशल मीडिया पर शुरू हुआ मेलोडी ट्रेंड

बॉलीवुड एक्ट्रेस सोनाक्षी सिन्हा और उनके पति जहीर इकबाल सोशल मीडिया पर चल रहे ‘मेलोडी’ ट्रेंड में शामिल हो गए हैं। दोनों ने बुधवार को अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक मजेदार वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में जहीर मेलोडी टॉफी की मशहूर टैगलाइन बोलते नजर आ रहे हैं। दरअसल, यह पूरा ट्रेंड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को मेलोडी टॉफी देने के बाद शुरू हुआ है। जॉइंट इंस्टाग्राम पोस्ट में शेयर किए गए इस वीडियो में सोनाक्षी अपने पति जहीर से पूछती हैं, “तुम क्या पूछना चाहते हो?” इस पर जहीर जवाब देते हैं, “तुम अच्छी तरह जानती हो कि मैं तुमसे कितना प्यार करता हूं।” जब सोनाक्षी चिढ़ाते हुए कहती हैं “नहीं”, तो जहीर तुरंत अपनी जेब से मेलोडी टॉफी निकालते हैं और कहते हैं, “मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।” पीएम मोदी और मेलोनी के वीडियो से शुरू हुआ ट्रेंड इस मेलोडी ट्रेंड का बैकग्राउंड काफी दिलचस्प है। हाल ही में इंस्टाग्राम पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी का एक वीडियो सामने आया था। इस वीडियो में दोनों नेताओं के बीच हल्के-फुल्के अंदाज में बातचीत हो रही थी। जी-7 समिट या द्विपक्षीय मुलाकात के दौरान भारत की तरफ से इटली को मेलोडी टॉफी का एक पैकेट गिफ्ट किया गया था। इसके बाद से ही यह मामला चर्चा में आया। ‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ’ की कहानी वीडियो में इटली की पीएम जॉर्जिया मेलोनी कहती हैं, “प्रधानमंत्री मोदी हमारे लिए एक गिफ्ट लेकर आए हैं, यह बहुत अच्छी टॉफी है।” इस पर पीएम मोदी हंसते हुए कहते हैं, “मेलोडी।” इसके बाद दोनों नेता हंसने लगते हैं। दोनों देशों के बड़े नेताओं के बीच हुई इस बातचीत के बाद से ही सोशल मीडिया पर मेलोडी को लेकर अलग-अलग रील्स और वीडियो बनाने का ट्रेंड शुरू हो गया, जिसमें अब बॉलीवुड के ये सेलिब्रिटीज भी शामिल हो रहे हैं। स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत की थी शादी बता दें कि सोनाक्षी और जहीर ने साल 2024 में ‘स्पेशल मैरिज एक्ट’ के तहत शादी की थी। यह कानून अलग-अलग धर्मों के लोगों को बिना धर्म बदले शादी करने की अनुमति देता है। चूंकि यह एक अंतरधार्मिक विवाह था, इसलिए सोशल मीडिया पर इसे लेकर काफी चर्चा और बहस हुई थी। सलमान खान की पार्टी में हुई थी पहली मुलाकात सोनाक्षी और जहीर की लव स्टोरी करीब 10 साल पुरानी है। दोनों की पहली मुलाकात साल 2016 में सलमान खान की एक पार्टी में हुई थी। यहीं से उनकी दोस्ती शुरू हुई, जो समय के साथ और मजबूत होती गई। साल 2017 से दोनों ने एक-दूसरे को डेट करना शुरू किया।