Friday, 16 Oct 2026 | 11:51 AM

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31 सीटों पर जीत का अंतर SIR–वोट कटौती से कम:बंगाल हार पर TMC का दावा; सुप्रीम कोर्ट बोला- नई याचिकाएं दाखिल करें

31 सीटों पर जीत का अंतर SIR–वोट कटौती से कम:बंगाल हार पर TMC का दावा; सुप्रीम कोर्ट बोला- नई याचिकाएं दाखिल करें

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य नेता बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के खिलाफ नई याचिका दाखिल कर सकते हैं। दावा है कि बंगाल चुनाव में कई सीटों पर जीत का अंतर, वोटर लिस्ट से हटाए गए वोटों से कम था। सोमवार को TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच से कहा कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर, SIR के दौरान हटाए गए वोटों से कम था। इससे पहले TMC ने कहा था कि एक मामले में उनके क्लाइंट की हार 862 वोटों से हुई, जबकि उस सीट पर 5000 से ज्यादा वोटर नाम लिस्ट से हटाए गए थे। TMC और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर करीब 32 लाख था और वोट डिलीशन के खिलाफ 35 अपीलें अभी भी पेंडिंग हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सही उपाय चुनाव याचिका दाखिल करना है। आयोग का कहना है कि SIR और उससे जुड़े विवादों में इसी प्रक्रिया के तहत जवाबदेही तय की जा सकती है। अपीलों को निपटाने में 4 साल लगेंगे सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा रफ्तार से अपीलीय ट्रिब्यूनल्स को इन अपीलों को निपटाने में करीब 4 साल लग सकते हैं। हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतीं हैं, जबकि TMC को 80 सीटें मिली हैं। इन चुनावों में राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई। भाजपा को कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 वोट मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 60 लाख 13 हजार 377 वोट मिले हैं। BJP को TMC से 32 लाख 11 हजार 427 ज्यादा वोट मिले हैं। यानी 293 सीटों के हिसाब से भाजपा को हर सीट पर औसत 10,960 वोट ज्यादा मिले। राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से कुल 91 लाख वोट कटे। यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोटरों के नाम काटे गए। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा। भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं SC ने कहा था- वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम पर दखल नहीं देंगे SIR को लेकर ममता सरकार की याचिका पर हाल में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर हटाए गए वोटों की संख्या जीत के अंतर से कम है, तो कोर्ट दखल नहीं देगा। क्योंकि उन वोटों के होने या न होने से रिजल्ट पर असर नहीं पड़ता।’ कोर्ट ने कहा कि दखल तब देंगे जब यह दिखाया जा सके कि हटाए गए वोट इतने अधिक थे कि वे जीत-हार के अंतर को बदल सकते थे। इस उदाहरण से आसानी से समझिए… मान लीजिए विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 95 हजार वोट तो मार्जिन हुआ 5 हजार वोट। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं तो असर नहीं। लेकिन ज्यादा हैं तो नतीजों पर असर संभव। भाजपा का वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे। बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है। …………………… पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें…

टीएमसी का कहना है कि बंगाल एसआईआर ने 31 सीटों पर बीजेपी की जीत के अंतर से ज्यादा वोट डिलीट कर दिए; सुप्रीम कोर्ट ने नई याचिका मांगी | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 16:23 IST टीएमसी नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि 31 निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर विलोपन भाजपा की जीत के अंतर से अधिक था। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी. (पीटीआई) ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने पश्चिम बंगाल चुनाव परिणामों को लेकर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें दावा किया गया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के परिणामस्वरूप मतदाता विलोपन ने कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में परिणामों को प्रभावित किया। भाजपा ने पश्चिम बंगाल में ऐतिहासिक जनादेश हासिल किया, 207 सीटों पर जीत हासिल की और टीएमसी के 15 साल के शासनकाल को समाप्त कर दिया, जो 80 सीटों पर सिमट गई थी। टीएमसी ने बड़े पैमाने पर चुनावी कदाचार और बीजेपी के पक्ष में वोटों से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है. भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान, टीएमसी नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने प्रस्तुत किया कि 31 निर्वाचन क्षेत्रों में एसआईआर विलोपन भाजपा की जीत के अंतर से अधिक था। उन्होंने कहा, कई मामलों में, विलोपन और मार्जिन लगभग समान थे। कल्याण बनर्जी ने कहा कि एक निर्वाचन क्षेत्र में एक उम्मीदवार 862 वोटों से हार गया, जहां 5,432 से अधिक व्यक्तियों को निर्णय के लिए नामावली से हटा दिया गया था। अनुसरण करने के लिए और भी बहुत कुछ… चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना न्यूज़ इंडिया टीएमसी का कहना है कि बंगाल एसआईआर ने 31 सीटों पर बीजेपी की जीत के अंतर से ज्यादा वोट डिलीट कर दिए; SC ने नई याचिका मांगी अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल चुनाव परिणाम(टी)ममता बनर्जी(टी)तृणमूल कांग्रेस(टी)टीएमसी सुप्रीम कोर्ट की याचिका(टी)भाजपा ऐतिहासिक जनादेश(टी)मतदाता विलोपन एसआईआर(टी)चुनावी कदाचार के आरोप(टी)भाजपा जीत का अंतर

Health Alert : वजन कम के चक्कर में आप भी कर रहे ये गलती? बॉडी स्टोर करने लगेगी फैट

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Last Updated:May 11, 2026, 16:22 IST Weight loss mistakes : फरीदाबाद में बदलती लाइफस्टाइल और जंक फूड की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. कई लोग मोटापा घटाने के लिए अपनी डाइट कम कर देते हैं. लोकल 18 से फरीदाबाद की चिकित्सक डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि खाना छोड़ना वजन घटाने का सही तरीका नहीं है, बल्कि इससे शरीर कमजोर होता है. इससे बॉडी स्ट्रेस मोड में चली जाती है और फैट को स्टोर करने लगती है. सही डाइट, हाइड्रेशन और हेल्दी दिनचर्या अपनाकर मोटापा, डायबिटीज और थकान जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है. डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. ये गलती आगे चलकर घातक हो सकती है. फरीदाबाद. भागदौड़ भरी जिंदगी, बाहर का खाना, ठंडे ड्रिंक और देर रात तक खाने की आदत लोगों की सेहत पर भारी पड़ रही है. बड़े ही नहीं बल्कि बच्चे भी जंक फूड की वजह से मोटापा, कमजोरी और थकान जैसी समस्याओं का सामना कर रहे हैं. कई लोग जल्दी वजन घटाने के चक्कर में खाना छोड़ देते हैं, लेकिन इससे शरीर को फायदा कम और नुकसान ज्यादा होता है. ऐसे में सही खानपान और अच्छी दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी हो गया है. लोकल 18 से फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल की सीनियर डाइटिशियन और न्यूट्रिशन कंसल्टेंट डॉ. रितिका शर्मा बताती हैं कि आजकल लोग अपने वजन को लेकर बहुत ज्यादा फोकस रहते हैं, लेकिन इसी दौरान कई गलतियां कर बैठते हैं. डॉ. रितिका कहती हैं कि सबसे बड़ी गलती लोग खाना छोड़कर करते हैं. लोगों को लगता है कि अगर खाना छोड़ देंगे तो वजन जल्दी कम हो जाएगा, जबकि ऐसा बिल्कुल नहीं है. जब हम लंबे समय तक खाना नहीं खाते तो शरीर स्ट्रेस मोड में चला जाता है और फैट को स्टोर करने लगता है. इससे वजन कम होने के बजाय शरीर कमजोर होने लगता है, एनर्जी भी घटती है. गर्मियों में इसका ध्यान जरूरी डॉ. रितिका बताती हैं कि कई बार लोग काम में इतने व्यस्त हो जाते हैं कि खाना खाना भूल जाते हैं. खासकर युवा सोचते हैं कि अभी शरीर में ताकत है तो खाना मिस करने से कोई फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन यही आदत आगे चलकर शरीर को नुकसान पहुंचाती है. शरीर को सही समय पर पोषण मिलना बहुत जरूरी है. गर्मियों में पानी पी लेना ही हाइड्रेशन नहीं बल्कि सही तरीके से पानी पीना जरूरी है. लोग इन्फ्यूज वॉटर का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फल और सब्जियों को पानी में डालकर रखा जाता है, जिससे शरीर को विटामिन और मिनरल भी मिलते रहते हैं. तरबूज और खरबूजा जैसे फलों का सेवन भी गर्मियों में काफी फायदेमंद रहता है, क्योंकि इनमें पानी की मात्रा ज्यादा होती है और शरीर को ठंडक मिलती है. बच्चों को कैसे रोकें डॉ. रितिका के मुताबिक, बच्चे आजकल जंग फूड ज्यादा खाते हैं. बच्चों को जबरदस्ती रोकना आसान नहीं होता लेकिन समझदारी से इसे कंट्रोल किया जा सकता है. अगर बच्चा बाहर की चीजें पसंद करता है तो वही चीज घर पर हेल्दी तरीके से बनाकर दें. बच्चे पैकेट देखकर आकर्षित होते हैं इसलिए घर की बनी चीजों को उसी तरह पैक करके दिया जा सकता है. बच्चों को बाहर ले जाने से पहले घर का खाना जरूर खिलाएं ताकि बाहर जाकर उनकी भूख ज्यादा न बढ़े और वे जंक फूड की तरफ कम आकर्षित हों. सुबह उठते ही पानी पीने के ये फायदे डॉ. रितिका बताती हैं कि डायबिटीज, बीपी और मोटापे जैसी बीमारियां काफी हद तक लाइफस्टाइल और खानपान से जुड़ी होती हैं. अगर लोग बैलेंस डाइट और सही दिनचर्या अपनाएं तो इन बीमारियों को कंट्रोल किया जा सकता है. सुबह उठते ही सबसे पहले पानी पीना चाहिए क्योंकि पूरी रात शरीर बिना पानी और खाने के रहता है. सुबह खाली पेट चाय या कॉफी पीना नहीं चाहिए. इसकी जगह एक या दो गिलास पानी, ग्रीन जूस या इन्फ्यूज वॉटर लेना शरीर के लिए ज्यादा फायदेमंद रहता है. इससे शरीर को विटामिन, मिनरल और अच्छी एनर्जी मिलती है. About the Author Priyanshu Gupta प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana

अचानक पेट दर्द होने लगे, तो क्या करें? डॉक्टर के पास कब जाएं, एक्सपर्ट ने बताई काम की बात

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Last Updated:May 11, 2026, 16:10 IST Sudden Stomach Pain Medicine: कई बार लोगों के पेट में अचानक दर्द होने लगता है. दर्द से निजात पाने के लिए अक्सर लोग पेनकिलर का सहारा लेते हैं. डॉक्टर्स की मानें तो पेट में हल्का दर्द हो, तो आराम करें, पर्याप्त पानी पिएं और हल्का खाना खाएं. इससे दर्द से धीरे-धीरे राहत मिलने लगेगी. अगर तेज दर्द के साथ बुखार, उल्टी या चक्कर जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. एक्सपर्ट की सलाह के बिना दर्द निवारक दवाएं लेना नुकसानदायक भी हो सकता है. पेट में अचानक दर्द होने लगे, तो हल्की सिकाई कर सकते हैं. Stomach Pain First Aid Tips: गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ जाती हैं. कई बार लोगों को एसिडिटी का सामना करना पड़ता है, तो कभी पेट में अचानक दर्द होने लगता है. पेट दर्द एक कॉमन समस्या है, जो गैस या अपच का संकेत होता है. कई बार यह गंभीर बीमारी का संकेत हो सकता है. अचानक पेट दर्द होने पर लोग अक्सर घबरा जाते हैं और बिना समझे दवा खा लेते हैं. हालांकि ऐसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है. डॉक्टर्स का कहना है कि पेट दर्द की सही वजह समझे बिना पेनकिलर या घरेलू नुस्खों का ज्यादा इस्तेमाल कंडीशन बिगाड़ सकता है. ऐसे में सही समय पर इलाज जरूरी है. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया अगर किसी व्यक्ति को अचानक हल्का पेट दर्द शुरू हो, तो सबसे पहले आराम करना चाहिए और भारी या तला-भुना खाना खाने से बचना चाहिए. शरीर में पानी की कमी न हो, इसलिए थोड़ा-थोड़ा पानी पीते रहना जरूरी माना जाता है. अगर दर्द गैस, अपच या हल्की ऐंठन की वजह से हो, तो कुछ समय आराम करने और हल्का खाना खाने से राहत मिल सकती है. अगर पेट दर्द के साथ तेज बुखार, उल्टी, खून वाली उल्टी, मल में खून, पेट में सूजन, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ या बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है. ऐसे मामलों में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. डॉक्टर ने बताया सीने में दर्द के साथ पेट दर्द होना भी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है और इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. पेट दर्द की जगह और उसका प्रकार कई बीमारियों का संकेत देता है. पेट के दाहिने निचले हिस्से में तेज दर्द अपेंडिक्स की समस्या का संकेत हो सकता है, जबकि ऊपरी हिस्से में दर्द एसिडिटी, अल्सर या गॉलब्लैडर से जुड़ा हो सकता है. महिलाओं में कई बार पीरियड्स, यूरिन इन्फेक्शन या यौन संबंधी समस्याओं के कारण भी अचानक पेट दर्द हो सकता है. इसलिए दर्द बार-बार हो रहा हो या लंबे समय तक बना रहे, तो जांच करवाना जरूरी माना जाता है. अगर पेट दर्द के फर्स्ट ऐड की बात करें, तो फर्स्ट एड के तौर पर डॉक्टर गर्म पानी की बोतल या हल्की गर्म सिकाई को मददगार मानते हैं, लेकिन अगर दर्द बहुत तेज हो, पेट सूजा हुआ लगे या छूने पर ज्यादा दर्द महसूस हो, तो गर्म सिकाई से बचना चाहिए. ऐसे समय में खुद इलाज करने के बजाय मेडिकल सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित माना जाता है. पेट दर्द के साथ उल्टी या दस्त होने पर शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी हो सकती है. ऐसी कंडीशन में ORS का सेवन करना चाहिए. कई गंभीर बीमारियां जैसे अपेंडिसाइटिस, गॉलब्लैडर स्टोन, फूड पॉइजनिंग, अल्सर या संक्रमण की शुरुआत भी पेट दर्द से हो सकती है. सही समय पर पहचान और इलाज से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें

चूँकि कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 16:04 IST पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल बीजेपी प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” तिरुवनंतपुरपुरम में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान केरल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर। (पीटीआई फोटो) केरल मुख्यमंत्री गतिरोध: केरल का अगला मुख्यमंत्री कौन बनेगा इस पर सस्पेंस जारी है क्योंकि राष्ट्रीय राजधानी में कई दौर की चर्चा के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने अभी तक अपने अंतिम निर्णय की घोषणा नहीं की है। देरी ने कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) के भीतर तीव्र राजनीतिक बहस छेड़ दी है, वरिष्ठ नेताओं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला के समर्थकों ने केरल और दिल्ली में विरोध, पोस्टर और प्रदर्शनों के माध्यम से अपने पसंदीदा उम्मीदवारों का खुले तौर पर समर्थन किया है। सियासी रस्साकशी के बीच बीजेपी की केरल इकाई भी अपने पसंदीदा उम्मीदवार के संकेत देती नजर आई। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेतृत्व के संघर्ष का मज़ाक उड़ाते हुए कहा गया, “केरल बीजेपी और राष्ट्रीय बीजेपी के बीच हास्यास्पद कड़ी लड़ाई। केरल बीजेपी केरल में केसी वेणुगोपाल को चाहती है, राष्ट्रीय बीजेपी दिल्ली में केसी वेणुगोपाल को चाहती है।” पोस्ट में सुझाव दिया गया कि भाजपा नेतृत्व शायद चाहता है कि वेणुगोपाल राष्ट्रीय राजधानी में ही रहें क्योंकि वहां उनके लिए बहुत कम राजनीतिक खतरा है, जबकि केरल भाजपा भी राज्य में इसी तरह के कारणों से उन्हें मुख्यमंत्री के रूप में पसंद करेगी। पोस्ट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए, पूर्व केंद्रीय मंत्री और केरल भाजपा प्रमुख राजीव चंद्रशेखर ने हंसते हुए और मुंह बंद करने वाले इमोजी के साथ जवाब दिया, “मैं न तो पुष्टि करूंगा और न ही इनकार करूंगा कि यह सच है।” उनकी प्रतिक्रिया ने सोशल मीडिया पर तुरंत ध्यान आकर्षित किया और केरल के मुख्यमंत्री पद पर चल रहे राजनीतिक नाटक में एक और मोड़ जोड़ दिया। केरल में क्या हो रहा है? कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ ने 140 विधानसभा सीटों में से 102 सीटों पर कब्जा कर लिया, जिससे एक दशक के बाद ऐतिहासिक वापसी हुई और वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सिर्फ 35 सीटों पर सिमट गया। हालाँकि, जीत ने जल्द ही अंदरूनी कलह को जन्म दे दिया, क्योंकि प्रमुख राजनेताओं के समर्थकों ने शीर्ष पद के लिए अपना जोर तेज कर दिया। यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) ने केरल में एक दशक के बाद सत्ता में वापसी करते हुए निर्णायक वापसी की है। लेकिन जश्न थमने से पहले ही सारा ध्यान तेजी से मुख्यमंत्री के चयन के बड़े सवाल पर केंद्रित हो गया है. केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए तीन प्रमुख नाम सबसे आगे चल रहे हैं, वे हैं वीडी सतीसन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला। इस स्थिति में क्लासिक कांग्रेस सत्ता संघर्ष के सभी तत्व मौजूद हैं – संगठनात्मक प्रभुत्व बनाम विधायी नेतृत्व, पीढ़ीगत बदलाव बनाम अनुभव, और दिल्ली का प्रभाव बनाम राज्य इकाई की प्राथमिकता। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को एआईसीसी महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल, वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला और वीडी सतीसन और केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ अलग-अलग और संयुक्त बैठकें कीं। तीन घंटे से अधिक समय तक चली इस मंत्रणा में एआईसीसी पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने भाग लिया। रिपोर्टों से संकेत मिलता है कि कांग्रेस नेतृत्व जानबूझकर आम सहमति सुनिश्चित करने और केरल में पार्टी की जोरदार जीत के बाद और शर्मिंदगी को रोकने के लिए समय ले रहा है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम, भारत, भारत न्यूज़ इंडिया जैसे ही कांग्रेस ने केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा में देरी की, भाजपा ने एक नाम सुझाया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री गतिरोध(टी)केरल के सीएम की दौड़(टी)कांग्रेस नेतृत्व की खींचतान(टी)यूडीएफ सत्ता संघर्ष(टी)वीडी सतीसन(टी)केसी वेणुगोपाल(टी)रमेश चेन्निथला(टी)राजीव चन्द्रशेखर प्रतिक्रिया

गर्मियों के लिए सत्तू की छाछ रेसिपी: घर पर बनाएं सत्तू की छाछ, गर्मी में चाहिए सत्तू की छाछ; स्वाद ऐसा की सब पूछेंगे रेसिपी

तस्वीर का विवरण

सामग्री: 4 बड़े चम्मच सत्तू, 2 चम्मच हरा धनिया, 1 हरी मिर्च पाउडर, थोड़ा सा जीरा पाउडर, स्वाद में काला नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा साधारण नमक, थोड़ा सा हरा धनिया, कुछ पुदीने की मिठाई छवि: फ्रीपिक बनाने की विधि: सबसे पहले एक बड़ा पोछे में सत्तू डाला। अब इसमें शामिल हैं छोटा-थोड़ा करके छाछ रेवेरे और अच्छे से शौकीन बने रहें ताकि छोटे-मोटे न बनें। छवि: फ्रीपिक इसके बाद इसमें प्याज, हरी मिर्च, अन्य जीरा, काला और साधारण नमक शामिल हैं। अब ऊपर से हरा धनियां और पुदीने की पत्तियां। छवि: एआई साड़ी को अच्छी तरह से लाइक करें। अगर आपको ज्यादा ठंडा पसंद है तो इसमें कुछ बर्फ के टुकड़े भी डाल सकते हैं. अब आपकी मंहगी-ठंडी और स्वादिष्ट सत्तू की छाछ तैयार है। छवि: एआई सत्तू शरीर को ठंडक की सलाह में मदद करता है। इसके अलावा, भोजन की खपत और पाचन क्षमता बेहतर होती है। गर्मी में लू और डिहाइड्रेशन से बचने के लिए यह ड्रिंक काफी खतरनाक साबित होती है। छवि: फ्रीपिक पर्यटक तो इसमें थोड़ा नींबू रस भी मिला सकते हैं। पुदीना से स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ते हैं। अगर बच्चे बना रहे हैं तो हरी मिर्च न डालें। छवि: फ्रीपिक गर्मी के दिनों में जब भी कुछ ठंडा और कॉकटेल पीने का मन करे, तब सत्तू की छाछ जरूर बनाएं। इसका देसी स्वाद हर किसी को पसंद आएगा। छवि: एआई अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें।

बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

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Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे,आज हैं फैशन आइकन:मेट गाला से माइकल जैक्सन तक; मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

500 रु. में नौकरी की, ताने सहे, आज फैशन आइकन:मनीष मल्होत्रा के संघर्ष की कहानी, रंगीला से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे

फैशन डिजाइनर मनीष मल्होत्रा किसी परिचय के मोहताज नहीं। लेकिन इस मुकाम पर पहुंचने के लिए उन्हें कई चुनौतियां पार करनी पड़ी हैं। अभी मनीष “मेट गाला’ में प्रदर्शित अपने विशेष परिधानों को लेकर चर्चा में हैं। जानते हैं उनकी संघर्ष से सफलता की कहानी…. मुंबई के एक मध्यमवर्गीय पंजाबी परिवार में 5 दिसंबर 1966 को जन्मे मनीष अपने स्कूली दिनों में मां के साथ न सिर्फ साड़ी खरीदने जाते, बल्कि साड़ियों को लेकर उन्हें फैशन टिप्स भी देने लगे थे। यहीं से फैशन और कॉस्ट्यूम डिजाइन के प्रति उनका लगाव बढ़ने लगा। बचपन से ही वे फिल्मों के बेहद शौकीन थे। वे लगभग हर ​फिल्म देखने जाते, लेकिन कलाकारों के अभिनय से ज्यादा मनीष का ध्यान उनके पहनावे पर होता था। कलाकारों के परिधान देख कर वे फैशन की बारीकियां समझने लगे। संघर्ष – डिजाइनिंग की डिग्री नहीं ले पाए, सेट पर लोग कपड़े सिलने वाला बोलते 1980 के दशक में फैशन डिजाइनिंग को पुरुषों का पेशा नहीं माना जाता था। लोग उनका मजाक उड़ाते थे। मनीष कभी डिजाइनिंग की औपचारिक पढ़ाई भी नहीं कर पाए, क्योंकि तब देश में पुरुषों के लिए फैशन डिजाइनिंग कोर्स नहीं होते थे। और विदेश जाकर कोर्स करने के पैसे उनके पास नहीं ​थे। कॅरिअर की शुरुआत में उन्होंने मुम्बई के “इक्विनॉक्स’ बुटीक में महज 500 रुपए महीने की नौकरी की। यहां उन्हें ग्राहकों को कपड़े दिखाने और उन्हें तह करने का काम मिला। खाली समय में मनीष छिप कर डिजाइन स्केच बनाते थे। बॉलीवुड के शुरुआती वर्षों में प्रोड्यूसर उनके डिजाइन को अधिक ग्लैमरस बता कर रिजेक्ट कर देते। सेट पर उनसे कहा जाता कि तुम कपड़े सिलने वाले हो, उन्हें दो और चलते बनो। शुरुआत – “रंगीला’ से बने बॉलीवुड के बड़े चेहरे, जैक्सन की जैकेट डिजाइन की मल्होत्रा ने 1990 में फिल्म “स्वर्ग’ में जूही चावला के लिए कॉस्ट्यूम ​​डिजाइन कर बॉलीवुड में ​डेब्यू किया। मनीष बताते हैं कि “गुमराह’ के लिए उन्हें पहली बार यश जौहर ने 10 हजार रुपए दिए। 1995 में “रंगीला’ में उर्मिला मातोंडकर के आउटफिट ​डिजाइन ने उन्हें रातोंरात बॉलीवुड का बड़ा चेहरा बना दिया। 1996 में माइकल जैक्सन भारत आए थे तो मनीष ने उनकी जैकेट डिजाइन की थी। सफलता – खुद के नाम को ही लग्जरी ब्रांड बनाया, श्रमिकों के कल्याण से भी जुड़े मनीष ने 2005 में अपने नाम से ही डिजाइनर कपड़ों का लग्जरी ब्रांड लॉन्च किया। वे स्किन केयर और ज्वेलरी में भी अपने कलेक्शन लॉन्च कर चुके हैं। आईफा, फिल्मफेयर समेत कई अवॉर्ड उन्हें मिल चुके हैं। वे चिकनकारी की ​महिला श्रमिकों के ​कल्याण की एक सामाजिक संस्था से भी जुड़े हैं। उनकी नेटवर्थ करीब 2500 करोड़ रुपए बताई जाती है।

लक्ष्मीर भंडार जारी रहेगा: बीजेपी बंगाल में ममता की फ्लैगशिप योजना को क्यों खत्म नहीं करेगी | भारत समाचार

Venugopal has emerged as a key contender in the race for Kerala CM

आखरी अपडेट:11 मई, 2026, 14:59 IST टीएमसी ने मतदाताओं, विशेषकर महिला लाभार्थियों को बार-बार चेतावनी दी थी कि अगर राज्य में सत्ता में आई तो भाजपा लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को बंद कर देगी। सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, जो राज्य में एक महत्वपूर्ण राजनीतिक विकास है। छवि/एक्स पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोमवार को तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सबसे बड़े चुनाव प्रचार अभियानों में से एक को बेअसर करने के लिए तेजी से कदम उठाया और घोषणा की कि बंगाल में लक्ष्मी भंडार योजना और अन्य सभी चल रहे कल्याण कार्यक्रम नई भाजपा सरकार के तहत जारी रहेंगे। अपनी पहली कैबिनेट बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए – जहां सरकार ने छह प्रमुख फैसले लिए – अधिकारी ने कहा: “लक्ष्मीर भंडार को कोई रोक नहीं होगी…बंगाल में चल रही सभी लाभार्थी योजनाएं बंद नहीं होंगी।” यह घोषणा बड़ा राजनीतिक महत्व रखती है क्योंकि लक्ष्मीर भंडार 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अभियान के केंद्रीय फ्लैशप्वाइंट में से एक के रूप में उभरा था। तृणमूल कांग्रेस और उसकी प्रमुख ममता बनर्जी के लिए, यह योजना केवल एक कल्याणकारी कार्यक्रम नहीं थी बल्कि एक राजनीतिक ढाल थी जिसके चारों ओर अधिकांश अभियान बनाया गया था। टीएमसी ने बार-बार महिला मतदाताओं और लाभार्थियों को चेतावनी दी कि अगर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आई तो लक्ष्मीर भंडार और अन्य प्रत्यक्ष-लाभ योजनाओं को रद्द कर देगी। बनर्जी ने हर रैली में इस मुद्दे को उठाया और चुनाव को बंगाल के कल्याण मॉडल और भाजपा सरकार के तहत इसके संभावित निराकरण के बीच एक विकल्प के रूप में पेश करने का प्रयास किया। पूरे अभियान के दौरान, टीएमसी ने भाजपा को “महिला विरोधी” के रूप में चित्रित करने की कोशिश की, यह तर्क देते हुए कि भगवा पार्टी न तो प्रत्यक्ष नकद-हस्तांतरण योजनाओं में विश्वास करती है और न ही यह समझती है कि लक्ष्मीर भंडार जैसे कार्यक्रम पूरे बंगाल में घरेलू वित्त के साथ कितनी गहराई से जुड़े हुए हैं। भाजपा इस मुद्दे पर बार-बार बचाव की मुद्रा में दिखी। जबकि कई भाजपा नेताओं ने मतदाताओं को आश्वासन दिया कि योजना जारी रहेगी – कुछ ने बढ़े हुए भुगतान का भी वादा किया – दूसरों ने यह सुझाव देकर विवाद पैदा कर दिया कि ऐसे कल्याण कार्यक्रमों की समीक्षा की जा सकती है या बंद कर दिया जा सकता है। प्रतिक्रिया ने अंततः भाजपा नेतृत्व को बार-बार यह स्पष्ट करने के लिए मजबूर किया कि यदि पार्टी सरकार बनाती है तो लक्ष्मीर भंडार को रोका नहीं जाएगा। यह योजना, जिसने 2021 में बनर्जी को सत्ता विरोधी लहर से निपटने में मदद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वर्तमान में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति समुदायों की 25 से 60 वर्ष की आयु की महिलाओं को प्रति माह 1,200 रुपये तक प्रदान करती है, जबकि अन्य श्रेणियों के लाभार्थियों को 1,000 रुपये मासिक मिलते हैं। यह भी पढ़ें | भाजपा की बंगाल विजय को बनने में 15 साल लगे: इसके उदय के पीछे के वास्तुकारों पर एक नजर अभियान के दौरान टीएमसी की कल्याण राजनीति की तीखी आलोचना करने के बावजूद लक्ष्मीर भंडार को बनाए रखने के भाजपा के फैसले की तुलना इस बात से की गई है कि 2014 में सत्ता में आने के बाद नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यूपीए-युग की कई प्रमुख योजनाओं को कैसे संभाला था। सबसे प्रमुख उदाहरण महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) था, जिसे भाजपा ने शुरू में कांग्रेस-युग की “विफलता” के प्रतीक के रूप में हमला किया था, अंततः इसे बनाए रखने, विस्तार करने और राजनीतिक रूप से पुन: पैकेजिंग करने से पहले। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में संसद में मनरेगा को कांग्रेस की विफलताओं का “जीवित स्मारक” कहा था, फिर भी यह योजना बाद में केंद्र के सबसे बड़े ग्रामीण कल्याण कार्यक्रमों में से एक बन गई, खासकर कोविड-19 के दौरान। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना ​​​​है कि भाजपा बंगाल में इसी तरह की रणनीति का प्रयास कर सकती है – पहले लाभार्थियों को आश्वासन देना कि लक्ष्मीर भंडार सार्वजनिक प्रतिक्रिया से बचना जारी रखेगा, फिर योजना का ऑडिट या पुनर्गठन करना, टीएमसी के तहत कथित “रिसाव” या भ्रष्टाचार को उजागर करना, और अंततः भाजपा सरकार के स्वयं के कल्याण आख्यान के तहत इसे राजनीतिक रूप से पुनः ब्रांड या विस्तारित करने का प्रयास करना। लक्ष्मीर भंडार को बरकरार रखने के अलावा, अधिकारी ने अवैध आव्रजन को रोकने के उद्देश्य से लंबित बाड़ लगाने के काम को पूरा करने के लिए सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के लिए बांग्लादेश सीमा पर भूमि अधिग्रहण का रास्ता भी साफ कर दिया – एक मुद्दा जिसे भाजपा ने अभियान के दौरान आक्रामक रूप से सामने रखा था। भाजपा ने बार-बार टीएमसी सरकार पर एक छिद्रित सीमा की अनुमति देने का आरोप लगाया था, जिसने कथित तौर पर मुस्लिम-बहुल बांग्लादेश से बिना दस्तावेज वाले प्रवासियों को भारत में प्रवेश करने और चुनावी समर्थन के बदले में अज्ञात रहने में सक्षम बनाया था। एक और बड़ी घोषणा केंद्र की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना, आयुष्मान भारत को बंगाल में लागू करना थी। अधिकारी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वाली सभी केंद्रीय कल्याण योजनाएं अब राज्य में लागू की जाएंगी, जो कई केंद्र सरकार के कार्यक्रमों के लिए बनर्जी के लंबे समय से चले आ रहे विरोध के उलट है। पूर्व मुख्यमंत्री ने अक्सर केंद्र प्रायोजित योजनाओं को अपनाने से इनकार कर दिया था जब बंगाल में पहले से ही अपने समानांतर संस्करण थे, जैसा कि आयुष्मान भारत के मामले में था। 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा के प्रदर्शन ने राज्य के राजनीतिक इतिहास में सबसे बड़ी सफलता दर्ज की, जिसने भगवा पार्टी को बंगाल की प्रमुख राजनीतिक ताकत के रूप में मजबूती से स्थापित किया। 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद आक्रामक विस्तार के रूप में जो शुरू हुआ, उसका समापन भाजपा द्वारा राज्य में अपनी पहली सरकार बनाने के साथ हुआ, जिसने नाटकीय रूप से बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार दिया। उस उभार के केंद्र में अधिकारी थे, जो 2021 के विधानसभा चुनावों से पहले टीएमसी से अलग होने के बाद बंगाल