50 मिनट पहले
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16 अक्टूबर 1948
आज से 78 साल पहले तमिलनाडु के अम्मानकुड़ी में जया लक्ष्मी प्रसव के आखिरी चरण में थीं। दो बेटे पहले से थे, तो तीसरे बच्चे के जन्म से पहले ही उन्होंने पति वी.एस.आर.चक्रवर्ती से कहा- ‘देखना, बेटी ही होगी। मैं उसका नाम हेमा मालिनी रखूंगी, जो बड़ी होकर क्लासिकल डांसर बनेगी।’
कमरे में दुर्गा, सरस्वती के बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए।
जया लक्ष्मी की कही बात सच साबित हुई, अस्पताल में किलकारी गूंजी, बेटी हुई थी। नाम रखा गया हेमा मालिनी, जिसे आज पूरा देश ड्रीम गर्ल के नाम से भी जानता है।
मां के फैसले के अनुसार, हेमा मालिनी पहले क्लासिकल डांसर बनीं और फिर हीरोइन, लेकिन यही स्टारडम वजह रहा कि उन्होंने अपने पिता को खो दिया। वजह रही एक पाकिस्तानी फैन का घर में घुसना और फिर किचन नाइफ से दहशत फैलाना।
आज हेमा मालिनी के बर्थडे के खास मौके पर जानिए उनकी जिंदगी की रोचक कहानी-
हेमा मालिनी ने होश संभाला ही था कि मां ने उनका दाखिला क्लासिकल डांसिंग में करवा दिया। खेल-कूद की कोई गुंजाइश ही नहीं थी। स्कूल से लौटते ही हेमा कभी डांस क्लास, तो कभी सिंगिंग क्लास जातीं। कोई टीचर सिखाने में कोताही बरतता, तो मां तुरंत क्लासेस बदल देतीं।

हेमा मालिनी के बचपन की तस्वीर।
कुछ सालों बाद परिवार दिल्ली आकर बसा। क्लासिकल डांस की ट्रेनिंग यहां भी जारी रही। हर आम बच्चे की तरह हेमा भी दिनभर खेलना चाहती थीं, लेकिन मां ने कुछ अलग सोच रखा था। वो हेमा के बालों में तेल डालकर चोटी बनातीं, बालों में फूल लगातीं, आंखों में काजल। टिपिकल मद्रासी लड़की की तरह घाघरा चोली पहनातीं। मां उन्हें सही ढंग से कपड़े पहनना और हाव-भाव की सीख देतीं।
जब इस तरह वो कभी दिल्ली की सड़कों पर निकलतीं, तो आसपास से गुजरने वाले लोग उनका मजाक उड़ाते। हेमा इससे नाराज होतीं, तो मां कहतीं- ‘वह तुम्हें साउथ इंडियन कहते हैं, तो इसमें हर्ज क्या है, तुम साउथ इंडियन ही हो।’
कुछ साल बीते ही थे कि क्लासिकल डांस ट्रेनिंग सही ढंग से न मिल पाने के डर से जया लक्ष्मी ने पति से साफ कह दिया कि वह अपना ट्रांसफर मद्रास करवा लें। परिवार मद्रास आ गया। जल्द ही हेमा स्टेज शोज करने लगीं।

एक ऐसे ही स्टेज शो में 13 साल की हेमा पर तमिल डायरेक्टर सीवी श्रीधर की नजर पड़ी। उन्होंने झट से हेमा को अगली फिल्म में कास्ट कर लिया। शूटिंग शुरू हुई। हेमा बड़े उत्साह के साथ 2 दिनों तक शूटिंग के सेट पर गईं। डायरेक्टर उनके नाम से नाखुश थे। सुझाव मिला कि नाम हेमा मालिनी की जगह सुजाता रख लिया जाए।
फिर तीसरे दिन उन्हें ये कहकर फिल्म से निकाल दिया गया कि तुम बहुत दुबली-पतली हो, कभी हीरोइन नहीं बन पाओगी।
13 साल की बच्ची के लिए ये रिजेक्शन काफी भावुक रहा। मां ने तब मनोबल बढ़ाते हुए कहा- ये बस एक चैलेंज है, जिसे स्वीकार करना ही पड़ेगा। हेमा फिर मंच पर लौट गईं।
कुछ समय बाद 1963 की फिल्म इंदु साथियम में हेमा मालिनी को एक गाने में डांस करने का मौका मिला। इसके बाद उन्हें कई तमिल फिल्मों में छोटे रोल दिए जाने लगे। साउथ फिल्ममेकर, प्रोड्यूसर बी. अनंत स्वामी ने हेमा के लिए नए रास्ते बनाए। वो उन्हें फिल्ममेकर्स से मिलवाते और उन्हें रोल दिलवाते।
बी.अनंत स्वामी हिंदी फिल्में भी प्रोड्यूस करते थे। 60 के दशक के आखिर में उन्होंने राज कपूर को लेकर फिल्म शुरू की, नाम था सपनों का सौदागर, डायरेक्टर थे महेश कौल और हीरो थे राज कपूर। अनंत स्वामी ने इस फिल्म के लिए महेश कौल को हेमा मालिनी का नाम सुझाया। वह हेमा को स्क्रीनटेस्ट दिलाने के लिए राज कपूर के स्टूडियो लेकर गए।
राज कपूर ने गांव की लड़की के गेटअप में टेस्ट लेना शुरू ही किया था कि हेमा झट से बोल पड़ीं- मुझे एक्टिंग की कोई जानकारी नहीं है। टेस्ट शुरू हुआ, हेमा ने चंद लाइनें कहीं। राज कपूर ने पहले कैमरे की स्क्रीन देखी और फिर सामने खड़ीं हेमा को और फिर पास खड़े डायरेक्टर महेश कौल से कहा- ‘इस लड़की को देखिए, ये एक दिन बहुत आगे जाएगी।’
राज कपूर के कहने पर हेमा को हिंदी फिल्म सपनों के सौदागर (1968) में कास्ट किया गया।

फिल्म में हेमा मालिनी ने बंजारन का किरदार निभाया। फिल्म रिलीज होने को आई। हेमा को तब कोई नहीं जानता था। तभी अनंत स्वामी ने हेमा के परिचय का एक नया आइडिया खोज निकाला। एक टैग लाइन।
अखबारों में हेमा मालिनी की तस्वीरें छपवाई गईं, नीचे लिखा गया- ‘राज कपूर की ड्रीम गर्ल।’
इस टैगलाइन और प्रमोशनल स्टंट का खास फायदा नहीं मिला। फिल्म एवरेज रही, लेकिन हेमा को हर कोई ड्रीम गर्ल कहने लगा। शुरुआती फिल्म से हेमा ज्यादा सफल नहीं रहीं, लेकिन जब उन्हें कामयाबी मिली, तो हर किसी ने उन्हें ड्रीम गर्ल बुलाना शुरू कर दिया। 1977 की फिल्म ड्रीम गर्ल का टाइटल, हेमा मालिनी पर ही रखा गया था।

जब हेमा हिंदी सिनेमा में आईं, तब धर्मेंद्र स्टार बन चुके थे। वो हिंदी सिनेमा के सबसे हैंडसम एक्टर माने जाते थे। 1968 में फिल्मों में आने से पहले हेमा मालिनी, ख्वाजा अहमद अब्बास की फिल्म आसमान महल के प्रीमियर में पहुंचीं। नजर उठाई तो सामने धर्मेंद्र खड़े थे। स्वभाव से कोमल और कई चाहने वालों से घिरे हुए। हेमा ने देखा, तो देखती ही रह गईं। मन में एक आवाज आई- ‘इतना हैंडसम इंसान मैंने कभी नहीं देखा। उस दिन हेमा ने सोच लिया कि शादी करूंगी, तो ऐसे ही इंसान से करूंगी।’
एक ही इंडस्ट्री में होने के नाते दोनों का कई बार आमना-सामना हुआ। जल्द ही दोनों को फिल्म तुम हसीन मैं जवां में साथ साइन किया। साथ काम करते हुए दोनों एक-दूसरे को पसंद करने लगे।

धर्मेंद्र-हेमा मालिनी की पहली साथ की गई फिल्म का पोस्टर।
हेमा की उम्र 20 साल थी और धर्मेंद्र 34 साल के। बतौर लीड हीरोइन हेमा के करियर की यह तीसरी फिल्म थी। धर्मेंद्र 50 से ज्यादा फिल्मों में काम कर चुके थे।

तुम हसीन मैं जवां फिल्म के टाइटल सॉन्ग की झलक।
24 जुलाई 1970 को फिल्म सिनेमा हॉल में रिलीज हुई, लेकिन तब तक फिल्म की कहानी कुछ-कुछ असल जिंदगी में भी दोहराई जाने लगी थी।

इसी समय हेमा मालिनी को धर्मेंद्र की सिफारिश पर एक ऐसी फिल्म मिली, जिससे उन्होंने बड़े-बड़े स्टार्स को भी पीछे कर दिया। आशा पारेख को डबल रोल वाली एक फिल्म ऑफर हुई, नाम था सीता और गीता। धर्मेंद्र इसके हीरो होने वाले थे। आशा पारेख ने ये कहते हुए फिल्म ठुकरा दी कि ये फ्लॉप हो जाएगी।
फिर नूतन के नाम पर विचार हुआ, लेकिन वो चुलबुले रोल के लिए ज्यादा ही मैच्योर थीं। आगे मुमताज को फिल्म ऑफर हुई। उन्होंने दोगुनी फीस की डिमांड की। मेकर्स ने उन्हें इनकार कर दिया। जब धर्मेंद्र को पता चला की कई एक्ट्रेसेस रोल ठुकरा चुकी हैं तो उन्होंने डायरेक्टर रमेश सिप्पी से कहा कि आप हेमा को कास्ट क्यों नहीं करते। हेमा को साइन किया गया।

मेल डॉमिनेंट इंडस्ट्री में हेमा ने सीता और गीता बनकर अकेले फिल्म की कमान संभाली और धर्मेंद्र, संजीव कुमार फिल्म में सिर्फ साइड कैरेक्टर बनकर रह गए। और हेमा मालिनी को स्टारडम मिल गया और साथ ही मिला बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड।

लक्स साबुन के इश्तिहार में हेमा को फिल्मफेयर जीतने की बधाई दी गई थी।
हेमा ने आगे दोस्त, गोरा और काला, गरम मसाला, दुल्हन जैसी कई फिल्में दीं। इस दौरान उन्होंने धर्मेंद्र के साथ भी बैक-टु-बैक कई फिल्में दीं।

चाहनेवाले हेमा मालिनी और धर्मेंद्र को साथ देखना चाहते थे, लेकिन हेमा के परिवार को ये बात चुभती थी। धर्मेंद्र शादीशुदा थे और हेमा उनसे शादी करना चाहती थीं। परिवार के कहने पर भी हेमा, धर्मेंद्र से अलग होने के लिए तैयार नहीं हुईं, तो परिवार ने पाबंदी लगाना शुरू कर दी। हेमा धर्मेंद्र के साथ शूटिंग करतीं, तो परिवार के सदस्य साथ जाते।

फिल्म ड्रीम गर्ल के गाने में धर्मेंद्र और हेमा।
शोले की शूटिंग में भी यही सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन धर्मेंद्र के लिए ये नुकसान की बात थी। दरअसल, उस समय संजीव कुमार भी हेमा को पसंद करते थे। उन्होंने एक बार शादी का प्रस्ताव भी भिजवाया था, जो हेमा ने इनकार कर दिया।

फिल्म सीता और गीता के गाने में हेमा मालिनी और संजीव कुमार।
जब शोले बनना शुरू हुई, तो धर्मेंद्र इस बात पर अड़ गए कि वो वीरू का नहीं ठाकुर का रोल करेंगे, जो संजीव कुमार को दिया जा रहा था। ऐसे में रमेश सिप्पी ने ये कहते हुए धर्मेंद्र को मनाया कि वीरू के बसंती बनीं हेमा के साथ रोमांटिक सीन हैं, लेकिन अगर ठाकुर बने, तो ये मौका हाथ से निकल जाएगा। धर्मेंद्र झट से मान गए, लेकिन सेट पर हेमा के परिवार की निगरानी, रोमांस में अड़चन दे रही थी। लेकिन धर्मेंद्र के पास इसका भी तोड़ था। उन्होंने कैमरामैन को रिश्वत दी कि रोमांटिक सीन करते हुए, वो बार-बार बहाने बनाकर कट बोलें, जिससे वो शूटिंग के बहाने हेमा को थामे खड़े रह सकें।


शोले के गाने की झलक।
ऐसा ही फिल्म चरस के सेट पर भी हुआ। धर्मेंद्र-हेमा को ट्रेवलिंग के लिए एक कार दी गई। दोनों बैकसीट पर साथ बैठते, लेकिन जैसे ही हेमा के पिता को इसकी भनक लगी, वो हेमा के साथ ट्रेवल करने लगे और इस बात का पूरा ख्याल रखते थे कि वो दोनों के बीच में बैठें।
एक तरफ परिवार का दबाव था, दूसरी तरफ धर्मेंद्र की पत्नी प्रकाश कौर उन्हें तलाक नहीं देना चाहती थीं। हेमा को भी ऐसे में परिवार के आगे झुकना पड़ा। इसी समय जीतेंद्र ने दुल्हन फिल्म के सेट पर हेमा मालिनी का शादी का प्रस्ताव दिया। परिवार को खबर मिली, तो बात सगाई तक पहुंचा दी गई। चेन्नई में रसम होनी थी। धर्मेंद्र को इसकी खबर मिली, तो एक रात पहले वो रातभर ट्रंक कॉल कर हेमा को मनाते रहे कि भले ही वो प्रकाश को छोड़ न सकें, लेकिन उनका साथ उम्र भर निभाएंगे। हेमा भी उनसे ही शादी करना चाहती थीं। ऐसे में धर्मेंद्र रसम होने से ठीक पहले जीतेंद्र की गर्लफ्रेंड शोभा को लेकर चेन्नई पहुंचे और शादी तुड़वाई।
हेमा और धर्मेंद्र के प्यार के आगे परिवार ने भी हार मान ली। दोनों ने 1980 में इस्लाम कबूल कर शादी की। दोनों की दो बेटियां ईशा और अहाना हुईं।




हेमा मालिनी स्टार रहीं, लेकिन इसी स्टारडम से उन्हें एक बड़ा निजी नुकसान भी हुआ।
19 जुलाई 1978 की बात है,
हेमा मालिनी के पिता घर के बाहर टहल रहे थे, तभी एक शख्स उनके पास आया और कहा- मैं हेमा मालिनी का फैन हूं, उनसे मिलने के लिए पाकिस्तान से यहां आया हूं।
हेमा उस दिन घर में नहीं थीं, उनके पिता ने जवाब दिया- हेमा से मिलना मुमकिन नहीं है, आप फिर कभी आना।
आसपास के लोगों से बात की तो पता चला कि वो शख्स पिछले कई दिनों से उनके घर के बाहर चक्कर काट रहा है। एक-दो बार उसे जबरदस्ती उनके घर में घुसने पर पुलिस भी पकड़ चुकी है।

पिता वीएसआर चक्रवर्ती के साथ हेमा मालिनी की तस्वीर।
अगले दिन हेमा घर लौटीं, लेकिन पिता उन्हें ये बात नहीं बता सके। सभी ने रात को डिनर किया और सोने के लिए अपने-अपने कमरे में चले गए। रात के करीब 1 बजे थे कि उन्हें घर के पीछे की तरफ के किचन से नौकरानी की चीखों की आवाज आई। सभी घबराकर नीचे पहुंचे, तो वही शख्स रामपुरी चाकू, नौकरानी के गले में अड़ाए खड़ा था। घरवालों के पसीने छूट गए।
जैसे ही हेमा पहुंचीं, शख्स एकटक उन्हें देखने लगा और उसके हाथ से चाकू छूट गई। घर के नौकरों ने उसे दबोच लिया। तभी हेमा के पिता पुलिस को इत्तेला करने के लिए लिविंग रूम की तरफ बढ़े, जहां कुछ कदम चलते ही वो फर्श पर धड़ाम गिर पड़े। अफरातफरी में नौकरों ने उस शख्स को छोड़ दिया और वो भाग निकला, तुरंत डॉक्टर बुलाया गया, जिसने शुरुआती जांच के बाद ही हेमा के पिता को मृत घोषित कर दिया। उन्हें दिल का दौरा पड़ा था।
हेमा ने इस बड़े नुकसान के बाद भी पूरी शिद्दत से करियर पर फोकस किया। इसी बीच हेमा मालिनी को राज कपूर ने फिल्म सत्यम शिवम सुंदरम ऑफर की। राज कपूर ने उनसे कहा- ‘मैं जानता हूं तुम इनकार करोगी, फिर मैं चाहता हूं तुम ये फिल्म करो।’
हेमा शुरुआत में समझ नहीं पाईं, लेकिन जब उन्होंने स्क्रिप्ट सुनी तो उसमें बोल्ड किरदार और सीन जानकर उन्होंने वाकई इनकार कर दिया। उनके बाद ये रोल जीनत अमान को दिया गया।
1980 में जब उन्होंने धर्मेंद्र से शादी की, तो उन्हें हीरो की मां के रोल दिए जाने लगे। कुछ एक फिल्मों के बाद हेमा ने इस तरह के रोल से साफ इनकार कर दिया और क्रांति, नसीब, सत्ते पे सत्ता जैसी फिल्मों में बतौर लीड एक्ट्रेस काम किया।
90 के दशक की शुरुआत में हेमा मालिनी ने प्रोडक्शन से करियर की दूसरी पारी शुरू की। उन्होंने अपने प्रोडक्शन की पहली फिल्म दिल आशना है बनाई, जिससे टीवी एक्टर रहे शाहरुख खान ने बॉलीवुड डेब्यू किया। दरअसल, हेमा एक हीरो की तलाश में थीं। तभी उन्होंने शाहरुख खान का टीवी शो फौजी देखा। देखते ही उन्होंने शाहरुख को फिल्म में लेने का फैसला कर लिया।
अगले दिन जब उन्होंने शाहरुख को कॉल कर कहा- ‘हैलो, मैं हेमा मालिनी बोल रही हूं, आपको फिल्म में लेना चाहती हूं।’
टीवी इंडस्ट्री में स्ट्रगल कर रहे शाहरुख इसे मजाक समझ बैठे और कॉल नजरअंदाज कर दिया। हालांकि हेमा मालिनी को बार-बार कॉल कर उन्हें मिलने बुलाना पड़ा। शाहरुख मिलने आए और उन्हें कास्ट कर लिया गया।



शाहरुख कई मौकों पर फिल्मों में आने का क्रेडिट हेमा मालिनी को दे चुके हैं।
इसके अलावा हेमा मालिनी ने टेल मी ओ खुदा (2011) भी डायरेक्टर की। 90 के दशक के आखिर तक हेमा मालिनी को साइड रोल दिए जाने लगे। इनमें उनकी सबसे चर्चित फिल्म बागबान (कल्ट) रही, जिसमें वो अमिताभ बच्चन के साथ नजर आईं। आगे उन्होंने बाबुल, वीर-जारा, लागा चुनरी में दाग, बुड्ढा होगा तेरा बाप जैसी कई फिल्मों में छोटे मोटे रोल किए।
हेमा मालिनी ने 2004 में भारतीय जनता पार्टी में शामिल होकर राजनीति में कदम रखा। तब से अब तक वह राजनीति में एक्टिव हैं। वह राज्यसभा सांसद रहीं। 2010 में उन्हें भाजपा का महासचिव बनाया गया। 2014 में उन्होंने मथुरा लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर राजनीति में कदम आगे बढ़ाया। इसके बाद 2019 और 2024 में भी वह मथुरा से चुनाव जीतीं। इस तरह उन्होंने लगातार तीन बार मथुरा सीट पर जीत दर्ज की।
















































