इंदौर–पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर: 3 मई को भूमि पूजन:मुख्यमंत्री होंगे शामिल, 250 फीट चौड़ी होगी सिक्स लेन सड़क; 329 करोड़ के प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार

इंदौर में प्रस्तावित इंदौर–पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के भूमि पूजन को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। करीब 20 किलोमीटर लंबे इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट का निर्माण नैनोद से एबी रोड तक किया जाएगा, जिससे क्षेत्र के आर्थिक विकास को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। यह कॉरिडोर 250 फीट चौड़ा और सिक्स लेन का होगा। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 329 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। सरकार का दावा है कि इससे उद्योग, व्यापार और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। भूमिपूजन कार्यक्रम 3 मई को ग्राम नैनोद में आयोजित होगा, जिसमें डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर गुरुवार को आयोजित बैठक में मंत्री तुलसीराम सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, विधायक उषा ठाकुर सहित कई जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। कलेक्टर शिवम वर्मा, जिला पंचायत सीईओ सिद्धार्थ जैन, एमपीआईडीसी के एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर हिमांशु प्रजापति और राऊ विधायक मधु वर्मा सहित अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान मंच, पार्किंग, यातायात व्यवस्था, सुरक्षा इंतजाम पेयजल और बिजली आपूर्ति की समीक्षा की गई। साथ ही संबंधित विभागों को समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने आगंतुकों और जनप्रतिनिधियों की सुविधा के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने और प्रभावी यातायात और सुरक्षा योजना लागू करने के निर्देश दिए। आर्थिक विकास को मिलेगा बढ़ावा सरकार का मानना है कि यह इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्र में निवेश को आकर्षित करेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। साथ ही स्थानीय किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
भोपाल में जीएसटी नियमों में सख्ती:सिर्फ नंबर या नाम के आधार पर नहीं रोके जाएंगे मालवाहक वाहन; जानकारी देना होगी

मध्यप्रदेश में अब व्यापारियों के माल से भरे वाहनों को मनमाने ढंग से रोकना आसान नहीं होगा। कमर्शियल टैक्स विभाग ने नया सर्कुलर जारी कर स्पष्ट किया है कि जीएसटी एक्ट के तहत कार्रवाई का अधिकार मुख्य रूप से उसी विभाग के पास रहेगा। अब यदि पुलिस या कोई अन्य विभाग किसी वाहन को रोकता है, तो उसे पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड रखना होगा। केवल गाड़ी का नंबर, ड्राइवर का नाम या अधूरी जानकारी के आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकेगी। संबंधित अधिकारी को यह स्पष्ट करना होगा कि वाहन को किस सूचना के आधार पर, कब और क्यों रोका गया। साथ ही, पहले की तरह वाहन रोककर बाद में कमर्शियल टैक्स विभाग को सूचना देकर कार्रवाई करने का दबाव बनाने की प्रक्रिया भी अब खत्म कर दी गई है। इनफार्मर पर भी सख्ती नई व्यवस्था में सूचना देने वाले (इनफार्मर) की जवाबदेही भी तय की गई है। यदि जांच में सूचना गलत पाई जाती है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेजों के साथ बुलाया जा सकता है। इससे विभाग को उम्मीद है कि झूठी या अपुष्ट सूचनाओं में कमी आएगी। कारोबारियों को राहत अब टैक्स चोरी की सूचना पर छापा या जब्ती की कार्रवाई करने से पहले संबंधित सर्किल प्रभारी को वेब पोर्टल पर इसकी जानकारी दर्ज करनी होगी। इस व्यवस्था से पारदर्शिता बढ़ेगी और व्यापारियों को अनावश्यक परेशानियों से राहत मिलेगी।
इंदौर में आज से हाउस लिस्टिंग ब्लॉक सर्वे:41 टीमें गठित, एक माह तक घर-घर पहुंचेंगी; नागरिकों से सहयोग की अपील

इंदौर शहर में जनगणना के तहत हॉउस लिस्टिंग ब्लॉक (HLB) सर्वे का शुभारंभ 1 मई से किया जाएगा। सेल्फ इन्युमरेशन की अवधि समाप्त होने के बाद अब प्रगणक और सुपरवाइजर घर-घर जाकर जानकारी एकत्रित करेंगे। यह सर्वे आगामी एक माह तक चलेगा। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सर्वे के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। चार्ज ऑफिसर्स की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विस्तृत ब्रीफिंग की गई है और प्रगणकों व सुपरवाइजर्स का प्रशिक्षण भी पूर्ण हो चुका है। इंदौर में 41 अधिकारियों के साथ एक टीम का गठन किया गया है। सभी सदस्यों को अपने-अपने काम की जानकारी और पर्याप्त प्रशिक्षण दिया जा चुका है। आज से सभी टीम के सदस्य घर-घर पहुंचकर सर्वे का काम करेंगे। यह सर्वे जनगणना निदेशालय के निर्देशानुसार संचालित किया जा रहा है। इसमें जुटाए गए आंकड़े देश की विभिन्न नीतियों और योजनाओं के निर्धारण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। अब सर्वे टीम शहर के हर क्षेत्र में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेगी, जिससे सटीक और व्यापक डेटा तैयार किया जा सके। कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि सर्वे टीम के पहुंचने पर सही और पूर्ण जानकारी दें और सहयोग करें। साथ ही किसी भी प्रकार की अफवाहों पर ध्यान न देने की भी सलाह दी गई है।
भोपाल के बड़ा तालाब किनारे कार्रवाई:50 मीटर के दायरे में 11 कब्जे हटाए; फार्म हाउस, स्विमिंग पूल भी तोड़ा

नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने भोपाल के बड़े तालाब के एफटीएल (फुल टैंक लेवल) से 50 मीटर के दायरे में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी है। गुरुवार को सैवनिया गौंड इलाके में 11 अवैध निर्माण हटाए गए। आज शुक्रवार को भी यह कार्रवाई चलेगी। कार्रवाई से पहले संबंधित लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया था। इसके बाद मौके पर पहुंची टीम ने बाउंड्री वॉल, टीन शेड और कच्ची-पक्की फेंसिंग को हटाया। साथ ही तालाब की सीमा में बने स्विमिंग पूल को भी ध्वस्त किया गया। इस अभियान में आरटीओ के पूर्व कॉन्स्टेबल सौरभ शर्मा की सास रेखा तिवारी का फार्म हाउस भी शामिल रहा। सीमांकन के दौरान फार्महाउस का बड़ा हिस्सा 50 मीटर के प्रतिबंधित दायरे में पाया गया, जहां बने स्विमिंग पूल पर बुलडोजर चलाया गया। अब तक यह कार्रवाई प्रशासन के अनुसार, 2026 के सर्वे में कुल 302 अतिक्रमण चिन्हित किए गए थे। जिनमें से अब तक 49 से अधिक हटाए जा चुके हैं। एसडीएम अर्चना शर्मा ने बताया कि यह कार्रवाई आगे भी चरणबद्ध तरीके से जारी रहेगी। इन बड़े अतिक्रमण पर अब तक कार्रवाई नहीं हुई बड़ा तालाब की हद जानने इनका सीमांकन भी सूत्रों के अनुसार, वन विहार रोड स्थित होटल रंजीत, होटल टोरकस, अन्नतास गार्डन, लेक हाउस का कुछ हिस्सा आ रहा है। वहीं, मैथलीशरण गुप्ता, कीर्ति जैन, पीएस भटनागर, मोहिनी देवी, बसंत कौर, सौम्या श्रीवास्तव, प्रकाश चंदेल, मुकेश शर्मा आदि के निर्माण भी जद में आ रहे हैं। इसके अलावा बैरागढ़ तहसील क्षेत्र में शामिल बड़ा तालाब का काफी हिस्सा भी जद में है। भास्कर पड़ताल में देखिए, तालाब की हद में बने आलिशान घर दैनिक भास्कर ने 200 फीट की ऊंचाई से भोपाल की लाइफ लाइन से खिलवाड़ करने वाले अतिक्रमण को ड्रोन कैमरे में कैद किया। करीब 9 महीने पहले ही एफटीएल से जुड़कर ही एक 2 मंजिला मकान बना दिया गया। इसी में स्वीमिंग पूल भी है। इसे टीटी नगर एसडीएम वृत की टीम ने लिस्टेड किया है। इन अतिक्रमण की जद में रसूखदारों के साथ-साथ होटल जहांनुमा, सायाजी, वन विहार समेत नगर निगम के सरकारी निर्माण भी हैं। बावजूद अब तक इन्हें नहीं हटाया गया है। प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी बता दें कि पिछले महीने हुए सर्वे में प्राइवेट के साथ सरकारी अतिक्रमण भी सामने आए हैं। एफटीएल के 50 मीटर के दायरे में सैर सपाटा, बोट क्लब, विंड एंड वेव्स होटल और वन विहार का कुछ हिस्सा भी आ रहा है। इन जगहों पर ज्यादा अतिक्रमण बैरागढ़ सर्किल में 220 अतिक्रमण हैं। टीटी नगर में 127 अतिक्रमण चिह्नित कर नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इनमें 59 निजी और 78 सरकारी शामिल हैं। प्रशासन ने सेवनिया गोंड, प्रेमपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में भी सीमांकन किया था। वन विहार के पास जॉक रेस्टोरेंट, लहर रेस्टोरेंट, विंड्स एंड वेब, होटल रंजीत लेकव्यू, फूड जोन की 26 दुकानें, गेम जोन, कचरा कैफे, सुलभ कॉम्प्लेक्स और लहर जिम सहित अन्य निर्माण शामिल हैं।एक्सपर्ट राशिद नूर ने बताया, शहरी सीमा में 50 मीटर और ग्रामीण सीमा में 250 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए, लेकिन एफटीएल मुनार से सटकर ही पक्के निर्माण बना दिए गए हैं। सिलसिलेवार जानिए, अब तक क्या हुआ… पहला सर्वे: साल 2016 में डीजीपीएस सर्वे, पर रिपोर्ट सामने नहीं आई साल 2016 में नगर निगम ने डीजीपीएस (डिफरेंशियल ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम) सर्वे कराया था। यह जमीन का सटीक माप करने की तकनीक है, जो जीपीएस की तुलना में ज्यादा जानकारी सामने लाती है। जमीन की सीमा, आकार का सटीक डेटा इकट्ठा करती है। इस सर्वे में बड़ा तालाब का क्षेत्र 38.72 वर्ग किमी बताया गया था, जबकि पहले यह एरिया 32 वर्ग किमी माना जाता था। इसकी रिपोर्ट में तालाब के एफटीएल के को-ऑर्डिनेट्स दर्ज हैं। इन को-ऑर्डिनेट्स के आधार पर धरातल पर भी सीमाएं तय की जा सकती हैं। तालाब की सीमा में आ रही निजी जमीन के मालिकाना हक का भी निर्धारण हो सकता है, लेकिन यह रिपोर्ट निगम की फाइलों में दबकर रह गई। रिपोर्ट का आज तक खुलासा नहीं हो सका। दूसरा सर्वे: 141 मुनारें ही गायब हो गईं इसी साल एनजीटी ने बड़े तालाब का सर्वे करने के निर्देश दिए थे। इसमें 943 में से 802 मुनारें ही मिली थीं। इसमें भी 337 मुनारें पानी के भीतर डूबी हुईं थीं, यानी उन्हें एफटीएल से पहले ही लगाया गया था। 141 मुनारें मौके से गायब थीं, लेकिन इसके बाद मुनारें दोबारा लगाने और अतिक्रमण रोकने की कोई ठोस पहल नहीं हुई। तीसरा सर्वे: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सर्वे हुआ, रिपोर्ट का अता-पता नहीं इस साल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद सर्वे किया गया। जिला प्रशासन ने मप्र झील संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर सर्वे किया, लेकिन इसकी रिपोर्ट का कोई अता-पता नहीं है। ये रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई है। न ही सरकार के किसी दस्तावेज में यह जिक्र आया है कि इस सर्वे का क्या हुआ? एक मोबाइल ऐप पर इसकी रिपोर्ट दर्ज होने की बात कही जाती है। जब तक यह दस्तावेज में नहीं आएगा तब तक धरातल पर सीमांकन नहीं हो सकता। 6 महीने पहले CM दे चुके निर्देश, सांसद ने कहा-मास्टर प्लान बने बड़ा तालाब को लेकर सरकार तो गंभीर है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही सामने आ रही है। करीब छह महीने पहले सीएम डॉ. मोहन यादव ने तालाब के आसपास के अतिक्रमण का नए सिरे से सर्वे करने के निर्देश नगरीय आवास एवं विकास विभाग की बैठक में दिए थे। वहीं, कुछ समय पहले भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने बड़ा तालाब का मास्टर प्लान बनाने की पैरवी की थी। कहा था कि मास्टर प्लान बनने से तालाब को सुरक्षित किया जा सकेगा। बड़ा तालाब के 50 मीटर के दायरे में 1300 से ज्यादा अतिक्रमण सामने आया था। 10 साल में सिर्फ 1 बड़ी कार्रवाई, महीनों तक विस्थापन नहीं करीब दो साल पहले भदभदा झुग्गी बस्ती से कुल 386 घरों को हटाया गया था। एनजीटी ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। बड़ा तालाब के कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण की 10 साल में यही बड़ी कार्रवाई थी। इसके बाद प्लान बने, लेकिन जमीन पर नहीं आए।
ग्वालियर में 26 साल की युवती से दुष्कर्म:सहेली के भाई ने शादी के बाद युवती के पति को भेजे अश्लील फोटो-वीडियो, रिश्ता तुड़वाया

ग्वालियर में 26 साल की युवती से रेप का मामला सामने आया है। सहेली के भाई ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म किया। इसके बाद युवती की शादी हो गई। शादी के बाद भी ब्लैकमेल कर आरोपी उसका शोषण करता रहा। जब युवती ने एक दो बार आने से मना किया तो आरोपी ने अपने संबंध की बात उसके पति को बता दी। यकीन दिलाने के लिए कुछ अश्लील फोटो-वीडियो भेज दिए। सच्चाई सामने आने पर पति ने युवती को छोड़ दिया। इसके बाद फिर आरोपी उससे शारीरिक संबंध बनाने लगा। जब युवती ने शादी के लिए कहा तो आरोपी मुकर गया। घटना जनवरी 2025 से अप्रैल 2026 के बीच की है। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। महिला थाना पुलिस ने बताया कि 26 वर्षीय महिला ने थाने आकर शिकायत की है कि उसकी दोस्ती वर्ष 2025 में मुश्फिक हुसैन, निवासी तेली की बजरिया, से हुई थी। मुश्फिक हुसैन उसकी सहेली का भाई है। दोस्ती होने के बाद मुश्फिक ने उससे प्यार का इजहार किया। प्यार के जाल में फंसाकर उसके साथ अवैध तरीके से शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद वह उसका शोषण करता रहा। इसी बीच घरवालों ने युवती की शादी कर दी। शादी के बाद भी आरोपी उसे मिलने के लिए बुलाता रहा और ब्लैकमेल कर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाता था। पति को बताया अवैध संबंध की बात, दिखाए फोटो जब महिला ने मुश्फिक के बुलाने पर विरोध किया तो इसके बाद मुश्फिक ने उसके पति को उसके और अपने संबंधों की जानकारी दी। साथ ही, यकीन दिलाने के लिए उसके पति के मोबाइल पर अश्लील फोटो व वीडियो भेज दिए। जिसके बाद पति ने उसे छोड़ दिया और वह मायके में रहने लगी। शादी का वादा कर किया गलत काम, अब मुकरा पति के छोड़ने के बाद आरोपी मुश्फिक ने युवती से फिर नजदीकियां बढ़ाकर उसके साथ शादी का वादा का संबंध स्थापित किए। अब जब युवती ने शादी के लिए कहा तो वह मुकर गया। विरोध करने पर युवती व उसके भाई को जान से मारने की धमकी देने लगा। परेशान होकर पीड़िता ने मामले की शिकायत महिला थाना में की है। जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। महिला थाना प्रभारी रश्मि भदौरिया ने बताया- एक युवती की शिकायत पर उसके पूर्व दोस्त पर दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर उससे पूछताछ की जा रही है।
बंगाल के नतीजों से पहले टीएमसी को बड़ा झटका, कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी की तीसरी याचिका खारिज कर दी। केंद्र-पीएसयू कर्मचारियों को संवैधानिक वैधानिक नियुक्तियाँ। टीएमसी के संकटमोचकों को निराधार पद से बर्खास्त कर दिया गया। तीसरे में हस्तक्षेप न करने का न्यायालय ने स्पष्ट किया। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कोलकाता हाई कोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी की ओर से मातृभाषा प्रक्रिया को लेकर जारीियां दी गईं थीं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। यूक्रेनी, यूक्रेनी, यूक्रेनी और यूक्रेनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार (4 मई, 2026) को कोलकाता उच्च न्यायालय में नामांकन दाखिल किया। इस पर उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को तीसरे सुपर इंजीनियर और आतंकवादी के रूप में नियुक्त करने के फैसले को वैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियों को चुनाव आयोग के विवेकाधिकार के दायरे में रखा जाता है और इसे अवैध नहीं कहा जा सकता है। यह भी पढ़ें: ‘पूरी रात जागते होंगे, कंप्यूटर में डेटा बदल सकते हैं’, गिनती से पहले सीएम ममता की अपील कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा? उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया कि संबंधित हैंडबुक के प्रस्ताव को केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं किया गया है। इसके अलावा, माइक्रोऑब्जर्वर, एजेंट और सीसीटीवी से जुड़े मित्रों की पुष्टि करने के लिए माध्यमिक प्रक्रिया में सहायक पुष्टि की जाती है, इसलिए आरोप सिर्फ खतरों पर आधारित हैं। अदालत ने अतिरिक्त मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (एसीईओ) के अधिकारों को भी सही ठहराया और कहा कि संबंधित आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता है। ऐतिहासिक कांग्रेस के उस खतरे को भी अदालत ने खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के कार्मिक राजनीतिक प्रभाव में काम कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि थर्ड हॉल में कई स्टेक होल्डर्स मौजूद हैं। सीसीटीवी और ऑब्जर्वर जैसे सुरक्षा उपाय प्रक्रियाओं की सुनिश्चितता सुनिश्चित करते हैं। ऐसे आरोपों में सिर्फ खतरे हैं, समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज कर दी कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचना चाहिए। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 100 के अंतर्गत निर्वाचन प्रपत्र का प्रारूप तैयार कर सकता है। इस जजमेंट के साथ कोर्ट ने साफ कर दिया कि थर्ड को लेकर ट्रिपल कांग्रेस की अंतिम तिथि में कोई कानूनी आधार नहीं है और उन्हें खारिज कर दिया गया है। यह भी पढ़ेंः बैलेट बॉक्स से टेम्परिंग का आरोप, तूफान और तूफान- बीजेपी-टीएमसी, कोलकाता में देर तक चला हाईवोल्टेज ड्रामा
तकिए के पास मोबाइल इलेक्ट्रोड सोना है ‘साइलेंट किलर’, आज ही जान लें ये गंभीर क्षति

मोबाइल रेडिएशन के दुष्प्रभाव: डिजिटल युग में मोबाइल फोन हमारे जीवन का एक खास हिस्सा बन गया है। हम अपना फोन हर समय के साथ रखते हैं, यहां तक कि रात को समय भी सॉल्व कर लें या फिर नीचे जाकर अपनी आदत बना लें। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके लिए प्रयुक्त ‘साइलेंट किलर’ साबित हो सकता है? मोबाइल से रवाना वाली ब्लू रेज (ब्लू रेज) और खतरनाक रेड के खतरे आपके स्वास्थ्य पर बेहद बुरा प्रभाव डालते हैं। यदि आप किसी चीज के लिए फोन पास में रखते हैं या देर रात तक अध्ययन करते हैं, तो यह हर तरह से खतरनाक है। नींद की कमी: हमारे फोन की स्क्रीन से लाई गई ब्लू लाइट सीधे तौर पर मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करती है। यह अवैध हार्मोन है जो हमारे शरीर को नींद आने का संकेत देता है और स्लीप साइकल को नियंत्रित करता है। जब आप वेल्थ लिस्ट के पास फोन करते हैं, तो नींद की गुणवत्ता में भारी गिरावट आती है और अनिद्रा (अनिद्रा) की समस्या पैदा होती है। दाद और सिर दर्द: मोबाइल फ़ोन कॉन्स्टेंट इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडियॉल्स हैं। जब फोन सिर के बहुत करीब होता है, तो इन तरंगों के कारण सुबह उठने पर भारीपन, लगातार रहने वाला सिर दर्द और डायलिसिस जैसी गंभीर समस्याएं शुरू हो सकती हैं। बख्तियारपुर का खतरा: मोबाइल स्क्रीन पर भारी मात्रा में मुँहासे होते हैं, चेहरे के पास फोन से सोने से ये इकट्ठा त्वचा तक कील-मुंहासे (मुँहासे) पैदा हो सकते हैं। खुजली में जलन: मोबाइल रेड से संपर्क में रहने से लंबे समय तक संपर्क में रहने से परेशानी या जलन का एहसास हो सकता है। मानसिक स्वास्थ्य Ishu: रात के समय नोटिफिकेशन की आवाज या लाइट न केवल नींद में खल्ल डालती है, बल्कि सोशल मीडिया के सबसे ज्यादा इस्तेमाल से चिंता (चिंता) और स्ट्रेस (तनाव) का स्तर भी बढ़ जाता है। स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए सोने से कम से कम एक घंटे पहले फोन का इस्तेमाल बंद कर दिया गया और उसे अपने बिस्तर से कम से कम 3-5 फीट की दूरी पर रखा गया। (टैग अनुवाद करने के लिए)मोबाइल रेडिएशन के दुष्प्रभाव(टी)फोन के साथ सोने के जोखिम(टी)नीली रोशनी वाली नींद मेलाटोनिन(टी)मोबाइल रेडिएशन सिरदर्द माइग्रेन(टी)स्मार्टफोन स्वास्थ्य खतरे भारत
‘हमें गठबंधन की जरूरत नहीं…’, विपक्षी ने खारिज किया कांग्रेस-सी का प्रस्ताव, 4 मई को आएंगे बंगाल के नतीजे

पश्चिम बंगाल में वोटों की गिनती खत्म हो गई है. 4 मई को नतीजे आएंगे। इस बार बंगाल में कई एक्वेजिट पोल में बीजेपी की सरकार पर नजर आ रही है. ऐसे में वामपंथी और कांग्रेस ने वामपंथी और कांग्रेसी गठबंधन का प्रस्ताव दिया है. इसे उद्योग के वरिष्ठ नेता और प्रवक्ता शांतनु सेन ने अस्वीकार कर दिया है। उन्होंने साफ कहा कि बंगाल में हमें गठबंधन की जरूरत नहीं है. अकेले दम पर सरकार बनाये। 210 से अधिक पिछड़े। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर ममता बनर्जी की अपनी एक अलग पहचान है। आप सबसे अच्छे दोस्त हो सकते हैं। इंस्टिट्यूट के साथ हम लोग राष्ट्रीय स्तर पर हैं। राष्ट्रीय स्तर पर एक दूसरे का साथ देते हैं। एक्जालिट पोल के आंकड़ों पर विश्वास नहींशांतनु सेन ने कहा कि एलेक्टिट पोल के आंकड़ों पर हम लोगों को भरोसा नहीं है। आंकड़े ग़लत साबित होंगे। 2021 में आंकड़े ग़लत साबित हुए थे. बंगाल बीजेपी के प्रभारी सुनील बैसाही के एक्स पोस्ट में कहा गया है कि 4 मई को रुमाल लेकर रोना बीजेपी के सदस्यों को नुकसान होगा। सीपीआई और कांग्रेस ने एकजुट किया गठबंधन का हाथ सी रिवाइवल बालचंद्र कांगो ने एबीपी न्यूज के सवाल पर कहा कि अगर कॉमनवेल्थ मिनिमम प्रोग्राम को लेकर ममता सहमत हैं तो साथ दे सकते हैं। इसके अलावा कांग्रेस नेता तारिक बयासी ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में बीजेपी को रोक लगानी चाहिए अगर मांग से हाथ मिलाना पड़े तो मिलाना चाहिए. शायरी लिक्स बिजनेसमैन बैसाही ने किया जीत का दावा बंगाल बीजेपी के प्रभारी सुनील बैसाही ने एक्स पर पोस्ट करते हुए शायराना अंदाज में बीजेपी की जीत का दावा किया है. उन्होंने कहा कि बे सीज़ रेनॉल्ट, आज फिर से कर दिया गया; ऐसा लगता है, कमल खिलने का बयान दिया गया। पश्चिम बंगाल सहित भारत के अन्य राज्यों में पूरी होली हो चुकी है। नतीजे चार मई को आएंगे. इससे पहले बंगाल में दो चरणों में वोटिंग हुई। इस बार बड़ी संख्या में राज्य की जनता ने मत अधिकार का प्रयोग किया है। ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: इस एग्जिट पोल में कांग्रेस की ‘बल्ले-बल्ले’, बंगाल में पांच गुणा चुनावी का फायदा, जानें रह गईं टीएमसी-बीजेपी
राजस्थान की ये मशहूर ‘मारवाड़ी दही मिर्च’ की अनोखी उंगलीयां चाट, घर पर 10 मिनट में जानें; जानिए गुप्त रेसिपी

राजस्थान के प्रसिद्ध भोजन: राजस्थान अपनी वीरता, किलो और रेगिस्तानों के साथ-साथ अपनी लाजवाब जायके के लिए भी पूरी दुनिया में मशहूर है। यहां के खाने में जो मसाले और स्वाद का संतुलन है, उसे कोई भी अपना दीवाना बना सकता है। ऐसा ही यहां का पारंपरिक व्यंजन है ‘मारवाड़ी दही मिर्च’, जिसे लोग काफी पसंद करते हैं। जब भी घर में कोई खसखस सब्जी न बनी हो या दाल-चावल का स्वाद थोड़ा बेकार लगे तो यह दही मिर्च थाली की जान बन जाती है। इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह दही के खटास के साथ-साथ होने के कारण बेहद चटपटी लगती है। दही काली मिर्च कैसे बनाएं? सबसे पहले हरी मिर्च को धोकर सुखा लें। अब इनके बीच में चीरा के टुकड़े या फिर छोटे-छोटे गोल आटे में काट लें। एक कड़ाही में तेल गरम करें। राई, हिंग और सौंफ का तड़का कक्ष। राजस्थान में सौंफ का उपयोग ठंडक और पेट की ठंडक के लिए अनिवार्य रूप से किया जाता है। अब कड़कही में काली मिर्च और फैला हुआ प्राकृतिक होने तक। इसी समय हल्दी और नमक मिलाप। जब काली मिर्च पक जाए तो उसमें धनिया पाउडर और सौंफ पाउडर डाल दें। ध्यान रहे कि समग्र न हो ताकि अन्यत्र जलें। अंत में गैस की आबंटन करें और फेंटा हुआ दही डालें। इसे लगातार बनाए रखें जब तक कि दही में दोस्ती न आ जाए और यह काली मिर्च के साथ अच्छी तरह से दोस्ती न हो जाए। मारवाड़ी दही मिर्च क्यों है खास? दही-दही-मिर्च का स्वाद बेमिसाल है, साथ ही स्वास्थ्य के लिहाज से भी मसालेदार है, यहां दही और सौंफ का उपयोग सुपाच्य बनाया जाता है। राजस्थान के लोग इसे यात्रा के दौरान भी साथ ले जाना पसंद करते हैं क्योंकि यह जल्दी बुरा नहीं होता। अगर आप अपने रोजमर्रा के खाने में एक राजस्थानी इकट्ठी बनाना चाहते हैं, तो ‘मारवाड़ी दही मिर्च’ एक बेहतरीन विकल्प है। यह सिर्फ आपके खाने का स्वाद नहीं बढ़ाएगा बल्कि इसे बनाना भी बेहद आसान है। आज ही इसे अपनी रसोई में डिज़ाइन करें। (टैग्सटूट्रांसलेट)मारवाड़ी दही मिर्च रेसिपी(टी)राजस्थानी व्यंजन फूड(टी)बेस्ट राजस्थानी साइड डिश(टी)दही हरी मिर्च रेसिपी(टी)प्रामाणिक राजस्थान मसालेदार खाना
गर्मियों में शहद खाना चाहिए या नहीं? जानें फायदे-नुकसान और सेवन का सही तरीका

Is honey beneficial or harmful in summer: गर्मियों के मौसम में आमतौर पर ऐसी चीज़ें खाने की सलाह दी जाती है,जिनकी तासीर ठंडी हो, क्योंकि इस समय बाहरी गर्मी के साथ शरीर में पित्त भी बढ़ जाता है. हालांकि, लोगों को इस बात की जानकारी सही से नहीं होती है कि कौन से फूड की तासीर ठंडी है या गर्म. ऐसे में वे अनजाने में गर्मियों में गर्म तासीर वाली चीजें भी अधिक खा लेते हैं. इससे शरीर में गर्मी और बढ़ जाती है. शहद भी एक ऐसा ही खाद्य पदार्थ है, जो शरीर की गर्मी को बढ़ाने का काम करता है. ऐसे में ये जानना बहुत जरूरी है कि यदि कोई व्यक्ति शहद अधिक मात्रा में सेवन करता है, तो उसे क्या कोई नुकसान होगा या फिर सेहत को लाभ मिलेगा? जानिए आयुर्वेद के अनुसार यहां कि क्या गर्मियों में शहद लेना सही है और खाएं भी तो किस तरीके और कितनी मात्रा में… आयुर्वेद में शहद का महत्व आयुर्वेद के अनुसार,शहद को अमृत के समान माना गया है. इसकी तासीर गर्म और नमी देने वाली होती है, लेकिन इसे योगवाही भी कहा जाता है. इसका मतलब है कि शहद जिस चीज के साथ लिया जाए, उसी के गुणों को बढ़ा देता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्मियों में सीधे शहद खाने के नुकसानअगर शहद को बिना किसी चीज के सीधे खाया जाए, तो यह शरीर में पित्त बढ़ा सकता है. इससे खासकर गर्मियों में गर्मी और जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. शहद के सेवन का सही तरीका -सुबह नींबू पानी के साथ लें. मिट्टी के घड़े के पानी में शहद और नींबू मिलाकर सुबह खाली पेट लेने से शरीर ठंडा रहता है. वजन नियंत्रण में मदद मिलती है. -सत्तू में मिलाकर भी आप शहद का सेवन कर सकते हैं. चीनी की जगह सत्तू में शहद मिलाने से शरीर को ठंडक और ऊर्जा दोनों मिलती है.यह मिश्रण हाइड्रेशन बनाए रखता है. थकान भी कम करता है. -दही के साथ खाना भी बेस्ट माना जाता है. आप दोपहर में दही और शहद को मिक्स करके खा सकते हैं. इससे पाचन बेहतर होता है. यह लू से बचाने में भी मददगार है. किन चीजों के साथ न लें शहदशहद को कभी भी घी के साथ नहीं लेना चाहिए. आयुर्वेद में इसे ‘विरुद्ध आहार’ माना गया है. इससे शरीर में गर्मी बढ़ सकती है. वात-पित्त का संतुलन बिगाड़ सकता है. नोट: ऐसा नहीं कि आप गर्मियों में शहद का सेवन ही नहीं कर सकते हैं. यह पूरी तरह से हानिकारक नहीं है. इसे सही तरीके और सही संयोजन के साथ लेना जरूरी है. सही उपयोग करने पर यह शरीर को ठंडक, ऊर्जा और कई स्वास्थ्य लाभ दे सकता है.








