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बंगाल के नतीजों से पहले टीएमसी को बड़ा झटका, कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

बंगाल के नतीजों से पहले टीएमसी को बड़ा झटका, कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

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एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित

  • कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी की तीसरी याचिका खारिज कर दी।
  • केंद्र-पीएसयू कर्मचारियों को संवैधानिक वैधानिक नियुक्तियाँ।
  • टीएमसी के संकटमोचकों को निराधार पद से बर्खास्त कर दिया गया।
  • तीसरे में हस्तक्षेप न करने का न्यायालय ने स्पष्ट किया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कोलकाता हाई कोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी की ओर से मातृभाषा प्रक्रिया को लेकर जारीियां दी गईं थीं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

यूक्रेनी, यूक्रेनी, यूक्रेनी और यूक्रेनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार (4 मई, 2026) को कोलकाता उच्च न्यायालय में नामांकन दाखिल किया। इस पर उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को तीसरे सुपर इंजीनियर और आतंकवादी के रूप में नियुक्त करने के फैसले को वैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियों को चुनाव आयोग के विवेकाधिकार के दायरे में रखा जाता है और इसे अवैध नहीं कहा जा सकता है।

यह भी पढ़ें: ‘पूरी रात जागते होंगे, कंप्यूटर में डेटा बदल सकते हैं’, गिनती से पहले सीएम ममता की अपील

कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा?

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया कि संबंधित हैंडबुक के प्रस्ताव को केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं किया गया है। इसके अलावा, माइक्रोऑब्जर्वर, एजेंट और सीसीटीवी से जुड़े मित्रों की पुष्टि करने के लिए माध्यमिक प्रक्रिया में सहायक पुष्टि की जाती है, इसलिए आरोप सिर्फ खतरों पर आधारित हैं।

अदालत ने अतिरिक्त मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (एसीईओ) के अधिकारों को भी सही ठहराया और कहा कि संबंधित आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता है। ऐतिहासिक कांग्रेस के उस खतरे को भी अदालत ने खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के कार्मिक राजनीतिक प्रभाव में काम कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि थर्ड हॉल में कई स्टेक होल्डर्स मौजूद हैं। सीसीटीवी और ऑब्जर्वर जैसे सुरक्षा उपाय प्रक्रियाओं की सुनिश्चितता सुनिश्चित करते हैं। ऐसे आरोपों में सिर्फ खतरे हैं, समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।

कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज कर दी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचना चाहिए। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 100 के अंतर्गत निर्वाचन प्रपत्र का प्रारूप तैयार कर सकता है। इस जजमेंट के साथ कोर्ट ने साफ कर दिया कि थर्ड को लेकर ट्रिपल कांग्रेस की अंतिम तिथि में कोई कानूनी आधार नहीं है और उन्हें खारिज कर दिया गया है।

यह भी पढ़ेंः बैलेट बॉक्स से टेम्परिंग का आरोप, तूफान और तूफान- बीजेपी-टीएमसी, कोलकाता में देर तक चला हाईवोल्टेज ड्रामा

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बंगाल के नतीजों से पहले टीएमसी को बड़ा झटका, कोलकाता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

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  • कलकत्ता उच्च न्यायालय ने टीएमसी की तीसरी याचिका खारिज कर दी।
  • केंद्र-पीएसयू कर्मचारियों को संवैधानिक वैधानिक नियुक्तियाँ।
  • टीएमसी के संकटमोचकों को निराधार पद से बर्खास्त कर दिया गया।
  • तीसरे में हस्तक्षेप न करने का न्यायालय ने स्पष्ट किया।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: कोलकाता हाई कोर्ट ने गुरुवार (30 अप्रैल, 2026) को पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी लोकतांत्रिक कांग्रेस (टीएमसी) की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें पार्टी की ओर से मातृभाषा प्रक्रिया को लेकर जारीियां दी गईं थीं। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा।

यूक्रेनी, यूक्रेनी, यूक्रेनी और यूक्रेनी कम्युनिस्ट पार्टी ने सोमवार (4 मई, 2026) को कोलकाता उच्च न्यायालय में नामांकन दाखिल किया। इस पर उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्र सरकार और पीएसयू कर्मचारियों को तीसरे सुपर इंजीनियर और आतंकवादी के रूप में नियुक्त करने के फैसले को वैध ठहराया। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की नियुक्तियों को चुनाव आयोग के विवेकाधिकार के दायरे में रखा जाता है और इसे अवैध नहीं कहा जा सकता है।

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कलकत्ता उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में क्या कहा?

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट कर दिया कि संबंधित हैंडबुक के प्रस्ताव को केवल राज्य सरकार के कर्मचारियों तक ही सीमित नहीं किया गया है। इसके अलावा, माइक्रोऑब्जर्वर, एजेंट और सीसीटीवी से जुड़े मित्रों की पुष्टि करने के लिए माध्यमिक प्रक्रिया में सहायक पुष्टि की जाती है, इसलिए आरोप सिर्फ खतरों पर आधारित हैं।

अदालत ने अतिरिक्त मुख्य इलेक्ट्रॉनिक्स अधिकारी (एसीईओ) के अधिकारों को भी सही ठहराया और कहा कि संबंधित आदेश को अधिकार क्षेत्र से बाहर नहीं माना जा सकता है। ऐतिहासिक कांग्रेस के उस खतरे को भी अदालत ने खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि केंद्र सरकार के कार्मिक राजनीतिक प्रभाव में काम कर सकते हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि थर्ड हॉल में कई स्टेक होल्डर्स मौजूद हैं। सीसीटीवी और ऑब्जर्वर जैसे सुरक्षा उपाय प्रक्रियाओं की सुनिश्चितता सुनिश्चित करते हैं। ऐसे आरोपों में सिर्फ खतरे हैं, समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं है।

कोर्ट ने टीएमसी की याचिका खारिज कर दी

कलकत्ता हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान किसी भी तरह के हस्तक्षेप से बचना चाहिए। यदि किसी को कोई शिकायत है तो वह जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 100 के अंतर्गत निर्वाचन प्रपत्र का प्रारूप तैयार कर सकता है। इस जजमेंट के साथ कोर्ट ने साफ कर दिया कि थर्ड को लेकर ट्रिपल कांग्रेस की अंतिम तिथि में कोई कानूनी आधार नहीं है और उन्हें खारिज कर दिया गया है।

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