लहसुन मशरूम सब्जी रेसिपी: घर में लहसुन-मशरूम की सब्जी, स्वाद ऐसे बड़े-बड़े शेफ भी हो जाएंगे फेल; यहां पढ़ें आसान तरीका

सब्जी बनाने की सामग्री: 250 ग्राम मशरुम, 10-12 लहसुन की कलियाँ, 1 बड़ा प्याज माइक्रोवेव कटा हुआ, 2 टमाटर छोटा लहसुन कटा, 2 हरी मिर्च, 1 छोटा चम्मच अदरक-लहसुन पेस्ट, 1/2 छोटा लहसुन हल्दी पाउडर, छवि: फ्रीपिक 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच मसाला तेल या मक्खन, 1 बड़ा चम्मच हरा धनिया पाउडर। इसका स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आये। छवि: फ्रीपिक बनाने की आसान विधि: सबसे पहले मशरुम को अच्छे से धोकर साफ कर लें। इसके बाद मध्यम आकार में कट लें। लहसुन की कलियों को प्रभाव कूट लें ताकि उनका स्वाद अच्छे से निकल सके। छवि: फ्रीपिक अब एक कड़ाही में तेल या मक्खन गर्म। इसमें लिखा हुआ है लहसुन और सरसों का तेल। फिर प्याज डाला और उसे गोल्डन ब्राउन होने तक का मौका दिया। इसके बाद अदरक-लहसुन पेस्ट, हरी मिर्च और टमाटर डालें। छवि: एआई टमाटर प्राकृतिक हो जाएं तो हल्दी, लाल मिर्च, धनिया पाउडर नमक और कैटलॉग को अच्छी तरह से भून लें। अब क्यूट हुए मशरूम कड़ही में डाले और मसाले के साथ बढ़िया से पकड़े। छवि: एआई मशरुम पानी छोड़ेंगे, उदाहरणार्थ मध्यम आँच पर 7-8 मिनट तक। जब सब्जी अच्छी तरह पक जाए और मसाला मसाला दिखने लगे, तब ऊपर से गरम मसाला डालें। गैस बंद करें और हरे धनिये से गार्निश करें। छवि: एआई अगर आप ज्यादा क्रीमी स्वाद चाहते हैं तो अंत में 1 मसाला ताज़ा क्रीम दाल ले सकते हैं। मक्खन बनाने में इसका स्वाद और देखने में भी लाजवाब होता है। तीखा पसंद हो तो काली मिर्च भी डाल सकते हैं. छवि: फ्रीपिक मशरुम में प्रोटीन, आहार और कई आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं। वहीं लहसुन के शरीर की इम्युनिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। ऐसे में यह सब्जी स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी अच्छी मानी जाती है। छवि: फ्रीपिक
वायरल बीमारियां अब जल्दी ठीक क्यों नहीं होती हैं? कोविड के बाद दुनिया में ऐसा क्या बदल गया

Last Updated:May 14, 2026, 18:18 IST Viral Infections Recovery Time: कोविड महामारी से पहले वायरल बुखार 2-3 दिन में ठीक हो जाता है, लेकिन अब छोटी-छोटी परेशानियां ठीक होने में 8 से 10 दिन का वक्त ले रही हैं. डॉक्टर्स की मानें तो कोविड की वजह से करोड़ों लोगों की इम्यूनिटी लंबे समय तक प्रभावित हुई है. इसकी वजह से वायरल इंफेक्शंस से लड़कर उबरने में शरीर को लंबा समय लग रहा है. इसके अलावा भी कई फैक्टर्स रिकवरी टाइम को बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं. कोविड महामारी के बाद वायरल इंफेक्शन को ठीक होने में ज्यादा समय लग रहा है. Viral Diseases and Immunity: जनवरी 2020 में भारत में कोविड का पहला मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद धीरे-धीरे देश भर में कोरोना संक्रमण फैलने लगा था. इसे कंट्रोल करने के लिए लॉकडाउन भी लगाया गया था, लेकिन फिर भी बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई. कोरोना महामारी ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया. करीब 6 साल बाद भी कोविड पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, लेकिन अब यह स्थानीय बीमारी बन गई है. कोविड से पहले जब भी लोगों को बुखार आता था, तब एक पैरासिटामोल लेने पर ही अधिकतर लोग ठीक हो जाते थे. कोविड के बाद हालात पूरी तरह बदल गए हैं. अब छोटी-मोटी परेशानियां होने पर भी लोगों को सही ट्रीटमेंट के बावजूद रिकवर होने में कई सप्ताह लग जाते हैं. पहले सामान्य वायरल बुखार, सर्दी या फ्लू जैसी बीमारियां कुछ दिनों में ठीक हो जाया करती थीं, लेकिन अब कई लोग शिकायत करते हैं कि वायरल संक्रमण लंबे समय तक बना रहता है. खांसी हफ्तों तक नहीं जाती, कमजोरी बनी रहती है और शरीर पूरी तरह रिकवर होने में ज्यादा समय लेने लगा है. कोविड-19 महामारी के बाद लोगों के मन में यह सवाल और बढ़ गया है कि आखिर अब वायरल बीमारियां जल्दी ठीक क्यों नहीं होतीं? क्या वायरस पहले से ज्यादा खतरनाक हो गए हैं या फिर दुनिया में कुछ ऐसा बदल गया है, जो शरीर की रिकवरी को प्रभावित कर रहा है. इस बारे में डॉक्टर की राय जान लेते हैं. नई दिल्ली के सर गंगाराम हॉस्पिटल के प्रिवेंटिव हेल्थ एंड वेलनेस डिपार्टमेंट की डायरेक्टर डॉ. सोनिया रावत ने News18 को बताया कोविड के बाद दुनिया में कई चीजें बदली हैं. सबसे बड़ा बदलाव लोगों की इम्यूनिटी और शरीर के इंफेक्शन से लड़ने के तरीके में देखा गया है. कोरोना वायरस ने सिर्फ फेफड़ों को ही नहीं, बल्कि शरीर के इम्यून सिस्टम पर भी गहरा असर डाला है. कई रिसर्च में यह सामने आया कि कोविड संक्रमण के बाद कुछ लोगों का इम्यून रिस्पॉन्स लंबे समय तक प्रभावित रह सकता है. यही वजह है कि बाद में होने वाले वायरल संक्रमण से शरीर को उबरने में ज्यादा समय लग रहा है. पहले जो वायरल इंफेक्शन 3-4 दिन में अपने आप ठीक हो जाते थे, उन्हें ठीक होने में अब 10 से 15 दिन का वक्त लग रहा है. डॉक्टर ने बताया कि अब लोग छोटी बीमारी में भी तुरंत एंटीबायोटिक या कई दवाएं लेने लगे हैं, जबकि वायरल संक्रमण पर एंटीबायोटिक असर नहीं करती हैं. जरूरत से ज्यादा दवाओं का इस्तेमाल शरीर के प्राकृतिक रिकवरी सिस्टम को भी प्रभावित कर सकता है. इसके अलावा कुछ नए वायरस और उनके वेरिएंट पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक हो सकते हैं, जिससे संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है. हालांकि हर लंबे समय तक रहने वाला वायरल संक्रमण गंभीर हो, ऐसा जरूरी नहीं है. अगर बुखार, खांसी, सांस लेने में दिक्कत या कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. सही खानपान, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और तनाव कम करने से इम्यूनिटी को मजबूत रखने में मदद मिल सकती है. एक्सपर्ट की मानें तो कोविड के बाद लोगों का खानपान और लाइफस्टाइल भी काफी बिगड़ गई है. अब ज्यादातर लोगों की फिजिकल एक्टिविटी काफी कम हो गई है, जंक फूड का सेवन बढ़ गया है और सोने-जागने की टाइमिंग में भी बदलाव आ गया है. इसके अलावा बढ़ता हुआ तनाव भी इम्यून सिस्टम को कमजोर कर रहा है. कोविड के बाद बढ़ता स्क्रीन टाइम भी सेहत के लिए एक चैलेंज बन गया है. इन सभी फैक्टर्स की वजह से भी वायरल संक्रमण को ठीक होने में लंबा वक्त लग रहा है. अगर शरीर को पर्याप्त आराम, सही पोषण और नींद नहीं मिलती, तो वायरल संक्रमण से रिकवरी धीमी हो सकती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
पुराने जमाने के ये 7 फूड अब बन गया अमीरों के घरों की शान, हर किसी में सुपरफूड वाला गुण

7 Old Foods Become Superfoods: क्या आपको पता है कि आपके दादा-परदादा क्या खाते हैं. अगर नहीं पता है तो अपने पिताजी से एक बार जरूर पूछिए. तब के जमाने में बाहर की इतनी चीजें नहीं मिलती थी. पिज्जा, बर्गर, चॉकलेट, बिस्कुट, आइस्क्रीम, केक, पेस्ट्रीज आदि नहीं होते थे. वे लोग घर का शुद्ध खाना खाते थे. साबुत अनाज से बनी हुई चीज, फल, हरी सब्जी, सीड्स आदि का भरपूर सेवन करते हैं. यही लंच होता था, यही डिनर और यही नाश्ता. पर समय के साथ खान-पान में प्रोसेस्ड चीजें मिलने लगी. यानी मशीन से तैयार चीजों से मिलावट वाली चीजें. आज फास्ट फूड, जंक फूड की भरमार है जो हमारी सेहत के लिए दुश्मन से कम नहीं है. पर अच्छी बात यह है कि पिछले कुछ सालों में हमारे दादा-परदादा के यही फूड दोबारा से ट्रेंड में आ गए हैं और अब तो यह अमीरों के घरों की शान होने लगी है. आइए इन फूड के बारे में जानते हैं. वो 7 पुराने फूड जो बन गया सुपरफूड मोटा अनाज : मोटे अनाजों में ज्वार, बाजरा, रागी, कंगनी, कुटकी जैसे श्री अन्न आते थे. पहले के जमाने के लोग इसे अपने भोजन का जरूरी हिस्सा मानते थे. लेकिन समय के साथ मोटे अनाजों को चलन खत्म होने लगा. पहले अमीर लोग इसे थाली से हटाया. बाद में यह सिर्फ गरीबों का भोजन हो गया लेकिन पिछले दो-तीन दशकों में गरीब भी इन अनाजों को खाने से कतराने लगे लेकिन अब ये फूड दोबारा से चलन में आ गए हैं. रिसर्च में वैज्ञानिकों ने इन फूड को सुपरफूड माना है. ये फूड कई बीमारियों से लड़ने में मददगार है. इसलिए अब ये फूड अमीरों के घरों की शान बनने लगे है. इनसे शुगर कम होती है और हार्ट और लिवर डिजीज का खतरा कम हो जाता है. इन फूड को रोस्टेट करके 500 से 2000 प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. गुड़ : कुछ साल पहले तक गुड़ हमारे खान-पान से एकदम से हट ही गया था. लेकिन बहुत समय तक भारतीय घरों में चीनी की जगह गुड़ ही मिठास का मुख्य स्रोत हुआ करता था. इसे गर्म दूध में मिलाया जाता था, मिठाइयों में घोला जाता था, खाने के बाद खाया जाता था और सर्दियों के व्यंजनों में गर्माहट और ऊर्जा के लिए इस्तेमाल किया जाता था. आज के समय में गुड़ को फिर से एक नेचुरल विकल्प के रूप में देखा जा रहा है. गुड़ का स्वाद गहरा और देसी होता है. इसमें एक पारंपरिक अपनापन महसूस होता है. यही कारण है कि गुड़ फिर से ट्रेंड में आ गया है. घर की बनी चटनियां: पुराने समय में चटनियां महज भोजन के साथ परोसी जाने वाली कोई अतिरिक्त चीज नहीं थीं, बल्कि खाने का एक अनिवार्य हिस्सा मानी जाती थीं. नारियल, मूंगफली, पुदीना, टमाटर और लहसुन की चटनियां भोजन में ताजगी और तीखापन लाती थीं. ये चटनियां सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि सेहत के लिहाज से भी बेमिसाल हैं. आधुनिक समय में लोग फिर से यह समझ रहे हैं कि स्वाद और स्वास्थ्य एक साथ रह सकते हैं, जो साधारण खाने को भी पूरा और संतोषजनक बना देता है. फर्मेंटेड फूड्स: आज दुनिया भर में माइक्रोबायोम और गट हेल्थ की चर्चा होती है लेकिन भारतीय रसोई में इडली, डोसा, ढोकला, कांजी और अचार जैसे फर्मेंटेड (खमीर वाले) खाद्य पदार्थ सदियों से बन रहे हैं. ये चीजें किसी फैशनेबल वेलनेस प्रोडक्ट की तरह नहीं बल्कि मौसम और परंपरा के अनुसार व्यावहारिक रूप से बनाई जाती थीं. आज विज्ञान इन्हें पाचन सुधारने और आंतों के अच्छे बैक्टीरिया बढ़ाने के लिए सराह रहा है, लेकिन भारत के लिए यह पुराना और आजमाया हुआ ज्ञान है. शुद्ध घी: इस धरती पर शुद्ध घी सबसे शुद्ध खाद्य पदार्थ है. घी की छवि में पिछले कुछ दशकों में बहुत उतार-चढ़ाव आए हैं. एक समय इसे संदेह की नजर से देखा जाने लगा था लेकिन अब यह एक बार फिर सम्मान के साथ रसोई में लौट आया है. दादा-दादी की पीढ़ी के लिए घी कोई विलासिता नहीं, बल्कि ताकत, पोषण और अपनेपन का प्रतीक था. लोग अब इसे संतुलित मात्रा में अपना रहे हैं क्योंकि यह न केवल शरीर के लिए फायदेमंद है, बल्कि भावनात्मक रूप से भी सुकून देता है. मखाना: मखाना लंबे समय तक भारतीय घरों में एक सादे स्नैक या व्रत के भोजन के रूप में इस्तेमाल होता रहा. इसे घी में भूनकर खाना एक पुरानी परंपरा है. आज वही मखाना आकर्षक पैकेजिंग में एक ‘डिज़ाइनर स्नैक’ बन चुका है, जिसे हाई-प्रोटीन और लो-फैट डाइट के लिए आदर्श माना जाता है. यह हल्का और बहुउपयोगी है, इसलिए इतने वर्षों बाद भी यह लोगों की पसंदीदा पसंद बना हुआ है. आज अमीरों के घरों में मखाना किसी शान से कम नहीं है. दही: दही भारतीय थाली का एक स्थायी हिस्सा रहा है जो दोपहर के भोजन, छाछ या चावल के साथ खाया जाता था. आज इसे प्रोबायोटिक कहकर दोबारा पेश किया जा रहा है, लेकिन पुराने लोग इसे हमेशा से इसकी ठंडक और पाचन शक्ति के कारण अपनाते आए हैं. पेट खराब होने पर या तपती गर्मी में राहत देने के लिए दही एक शांत और भरोसेमंद उपाय है, जिसे किसी नए रूप की नहीं बल्कि बस फिर से याद करने की जरूरत है.
सबरीमला में महिलाओं की एंट्री मामला, SC का फैसला सुरक्षित:16 दिन सुनवाई चली; कोर्ट ने केंद्र, धार्मिक संगठनों और याचिकाकर्ताओं की दलीलें सुनीं

सुप्रीम कोर्ट ने सबरीमला मंदिर समेत विभिन्न धार्मिक स्थलों पर महिलाओं की एंट्री और उनकी धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों की सुनवाई गुरुवार को पूरी कर ली है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता में 9 जजों वाली बेंच ने 16 दिन तक चली सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट धार्मिक स्वतंत्रता, अनुच्छेद 25 और 26 के दायरे, संवैधानिक नैतिकता और धार्मिक प्रथाओं में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमा जैसे कई अहम संवैधानिक सवालों पर फैसला देगी। इनमें सबसे अहम मासिक धर्म के उम्र वाली 10 से 50 साल की महिलाओं की सबरीमाला मंदिर में एंट्री का विवाद है। सितंबर 2018 में सुप्रीम कोर्ट की 5 जजों वाली बेंच ने महिलाओं के सबरीमला मंदिर में एंट्री पर लगे प्रतिबंध को असंवैधानिक बताते हुए हटा दिया था। बाद में 2019 में इस मुद्दे को बड़ी बेंच को भेजा गया। केंद्र सरकार महिलाओं की एंट्री के विरोध में है। सबरीमाला मामले के साथ मुस्लिम महिलाओं के मस्जिद और दरगाहों में प्रवेश और पारसी महिलाओं के अगियारी में प्रवेश से जुड़े मुद्दे भी बड़ी बेंच को भेजे गए थे। मामले की सुनवाई कर रही 9 जजों की बेंच में CJI जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, एम.एम. सुंदरेश, अहसानुद्दीन अमानुल्लाह, अरविंद कुमार, ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह, प्रसन्ना बी. वराले, आर. महादेवन और जॉयमाल्य बागची भी शामिल हैं। केंद्र सरकार ने अदालत में कहा कि सबरीमला मंदिर में मासिक धर्म आयु वर्ग की महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध धार्मिक आस्था और संप्रदायिक स्वायत्तता का विषय है। केंद्र के मुताबिक, यह मामला न्यायिक समीक्षा के दायरे से बाहर है।
विपक्षी बेंच से लेकर क्लिफ हाउस तक: केरल के नए सीएम वीडी सतीसन के बारे में सब कुछ

एक वकील जिन्होंने छात्र सक्रियता के माध्यम से राजनीति में प्रवेश किया: 31 मई, 1964 को कोच्चि के पास नेट्टूर में जन्मे सतीसन ने कानून की पढ़ाई की और बाद में पूर्णकालिक राजनीति में प्रवेश करने से पहले लगभग एक दशक तक केरल उच्च न्यायालय में अभ्यास किया। उनका उदय छात्र और युवा राजनीति में शुरू हुआ: सतीसन ने केरल छात्र संघ (केएसयू) से शुरुआत की और बाद में युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के साथ काम किया। उन्होंने 1980 के दशक के अंत में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय संघ के अध्यक्ष के रूप में भी कार्य किया। गढ़ बनाने से पहले वह अपना पहला चुनाव हार गए: उनकी चुनावी शुरुआत 1996 में हुई, जब वह परवूर से हार गए, जिसे उस समय वामपंथियों का गढ़ माना जाता था। वह 2001 में इस सीट पर जीत हासिल करने के लिए लौटे और तब से इस सीट पर काबिज हैं। परवूर से छह बार विधायक: सतीसन ने 2001 से लगातार केरल विधानसभा में परवूर का प्रतिनिधित्व किया है, लगातार छह बार जीत हासिल की और केरल की राजनीति में कांग्रेस के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक बनकर उभरे। 2021 के बाद वह विपक्ष का चेहरा बन गए: 2021 में, सतीसन ने केरल विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में रमेश चेन्निथला की जगह ली। पिछले पांच वर्षों में, उन्होंने शासन और भ्रष्टाचार से लेकर कानून-व्यवस्था तक के मुद्दों पर वामपंथी सरकार पर यूडीएफ के हमलों का नेतृत्व किया।
केरल के मुख्यमंत्री की घोषणा: जब वीडियो में केरल के नए मुख्यमंत्री के नाम की घोषणा की गई, तो क्या कह रहे हैं कांग्रेस नेता

केरल के मुख्यमंत्री पद के लिए कांग्रेस द्वारा वी. डी. श्रीशन के नाम की घोषणा के बाद संप्रदाय के नेताओं और नवनिर्वाचित नामों ने उन्हें बधाई दी। केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने फेसबुक पर शेरशान की एक तस्वीर साझा की और लिखा, ”केरल के 24 वें मुख्यमंत्री वी डी शेरशान को बहुत-बहुत बधाई।” कांग्रेस के नेता और नेता वी टी बलराम ने भी श्रीशन को बधाई देते हुए कहा कि यह जनता की इच्छा है। बलराम ने फेसबुक पर लिखा कि यह एक ऐसी घोषणा थी जिसका केरल इंतजार कर रहा था। उन्होंने उन लोगों की भावनाओं की पुष्टि करते हुए कहा कि पहले ही उन्हें अपना नेता मान लिया गया था। बलराम ने कहा, ”एक सच्ची लोकतांत्रिक पार्टी का सम्मान करके ही फैसला सुनाया जा सकता है और स्थायी जनभावनाओं को मंजूरी नहीं दी जा सकती।” उन्होंने कहा कि श्रीशेषन एक ऐसे ही विपरीत जन समर्थन के बीच कब्जा कर रहे हैं, जो किसी भी राजनीतिक नेता के लिए विरले ही देखा जा रहा है। बलराम ने कहा कि श्रीशथन की यह पार्टी केवल कांग्रेस या यूयू के मुख्यमंत्री के रूप में नहीं है, बल्कि केरल की जनता के मुख्यमंत्री के रूप में देखी जानी चाहिए। अपने पोस्ट के समापन में उन्होंने कहा, ”हम ऐसा कर सकते हैं, क्योंकि यह केरल है।” यह भी पढ़ें: जब सम्मान का समर्थन नहीं किया तो कांग्रेस ने कैसे बनाया केरल का नया मुख्यमंत्री? वीडी शेरेशन ने खुद बताया यू.एफ.ई.सी. वी.आई.टी. को बताया गया दार्शनिक की मेहनत कांग्रेस से राष्ट्रीय नेता राहुल ममकूटाथिल ने भी श्रीशरण को बधाई दी। उन्होंने अपने फेसबुक पोस्ट में कहा कि यू-फॉल्क की जीत पार्टी पार्टियों के राजनीतिक संघर्ष और बलिदान का प्रतीक है। उनके अनुसार, कैथोलिक पुरा के सिद्धांत अब एक जन हितैषी सरकार के रूप में सामने आए हैं और अलाकमान ने श्रीशेन को इसके नेतृत्व की जिम्मेदारी दी है। सतीशन को बधाई देते हुए उन्होंने कहा कि नई सरकार के लोगों के विचार काम करने के लिए काम करेंगे। पुथुपल्ली से फिर से विधायक विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री ओमन चंडी के बेटे चंडी ओमन ने भी श्रीशेषन की तस्वीर साझा कर उन्हें शुभकामनाएं दीं। IUML ने श्रीशेषन के नाम का स्वागत किया मुवत्तुपुझा के नवनिर्वाचित अध्यक्ष मैथ्यू कुझालदान ने कहा कि केरल शासन का एक नया चेहरा और नई शैली दिखेगा। यूएफओ के दूसरे सबसे बड़े घटक दल इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने कांग्रेस के फैसले का पूरी तरह से समर्थन किया। केरल की जनता के साथ-साथ हम भी इसका समर्थन करते हैं। ”शेषन सुशासन देने में सक्षम होगा.” यह भी पढ़ें: क्वेंच-जिनपिंग बैठक से खुलागा होर्मुज का प्रस्थान? ईरान वॉर के बीच व्हाइट हाउस का बड़ा बयान
कुछ पेनिकलर दवाओं में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह भी मेडिसिन का तत्व, यहां समझ लीजिए

Last Updated:May 14, 2026, 17:10 IST Caffeine in Pain Relief Medicines: कई पेनकिलर दवाओं में कैफीन इसलिए मिलाया जाता है, क्योंकि यह दवा के असर को बढ़ाने और दर्द से जल्दी राहत दिलाने में मदद कर सकता है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन की दवाओं में इसका इस्तेमाल ज्यादा होता है. हालांकि ज्यादा कैफीन कुछ लोगों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है. ऐसे में सावधानी बरतनी चाहिए. पेनकिलर दवाओं में कैफीन मिलाने से उनका असर तेज और बेहतर तरीके से होता है. Caffeine in Headache Medicines: कैफीन एक नेचुरल तत्व होता है, जो चाय-कॉफी और चॉकलेट से लेकर कई खाने-पीने की चीजों में पाया जाता है. कई एनर्जी ड्रिंक्स और शुगरी ड्रिंक्स में भी कैफीन मिलाया जाता है. यह एक स्टिम्युलेंट है, जो हमारे शरीर के सेंट्रल नर्वस सिस्टम को एक्टिव कर सतर्कता और एनर्जी बढ़ाता है. जब भी लोग सिरदर्द, माइग्रेन या बदन दर्द की दवा लेते हैं, तो कई बार दवा के पैकेट पर कैफीन लिखा होता है. अक्सर सवाल उठता है कि दर्द की दवा में कैफीन क्यों मिलाया जाता है? क्या यह सिर्फ जागने या नींद भगाने के लिए होता है या फिर इसका दर्द कम करने में भी कोई रोल है? US के क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक कैफीन सिर्फ चाय-कॉफी में पाया जाने वाला तत्व नहीं है, बल्कि कई पेनकिलर दवाओं में इसे एक एनाल्जेसिक एडजुवेंट यानी दवा का असर बढ़ाने वाले तत्व के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. कैफीन खुद बहुत मजबूत पेनकिलर नहीं होता, लेकिन यह पैरासिटामोल, आइबुप्रोफेन और एस्पिरिन जैसी दवाओं के असर को बढ़ाने में मदद कर सकता है. कई रिसर्च में पाया गया है कि पेनकिलर के साथ कैफीन मिलाने से दर्द से राहत थोड़ी तेजी से और बेहतर मिल सकती है. खासकर सिरदर्द और माइग्रेन जैसी परेशानियों में कैफीन वाली दवाएं ज्यादा यूज की जाती हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि कैफीन शरीर में कुछ ऐसे रिसेप्टर्स को ब्लॉक करता है, जो दर्द महसूस कराने में भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा यह दवा के अवशोषण को तेज कर सकता है, जिससे दवा जल्दी असर दिखा सकती है. कुछ मामलों में कैफीन ब्रेन की ब्लड वेसल्स को संकरा करने में भी मदद करता है, जो माइग्रेन या सिरदर्द में राहत देने में उपयोगी माना जाता है. एक मेडिकल रिव्यू में पाया गया कि लगभग 100 मिलीग्राम या उससे अधिक कैफीन को सामान्य पेनकिलर के साथ मिलाने पर 5% से 10% ज्यादा लोगों को बेहतर दर्द से राहत मिली, जबकि सामान्य पेनिकलर वालों को कम राहत मिली. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि ज्यादा कैफीन वाली दवाएं हमेशा बेहतर होती हैं, ऐसा नहीं है. कुछ लोगों को कैफीन से घबराहट, नींद न आना, दिल की धड़कन तेज होना या एसिडिटी जैसी समस्याएं हो सकती हैं. जो लोग पहले से ज्यादा चाय-कॉफी पीते हैं या कैफीन के प्रति संवेदनशील हैं, उन्हें ऐसी दवाएं डॉक्टर की सलाह से ही लेनी चाहिए. हाई ब्लड प्रेशर, एंजायटी या नींद की समस्या वाले लोगों को भी सावधानी बरतने की जरूरत होती है. किसी भी दवा का लगातार या जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक हो सकता है, इसलिए बिना एक्सपर्ट की सलाह के लंबे समय तक दवा का सेवन नहीं करना चाहिए. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें
सूर्यवंशी इंडिया-A के लिए खेलेंगे:ट्राई-सीरीज के लिए टीम में शामिल; अफगानिस्तान के खिलाफ 19 मई को भारतीय टीम का ऐलान संभव

15 साल के ओपनर वैभव सूर्यवंशी को इंडिया-A में जगह मिली है। श्रीलंका में जून में होने वाली ट्राई-सीरीज के लिए गुरुवार को टीम का ऐलान किया गया। तिलक वर्मा को टीम की कप्तानी सौंपी गई है, जबकि रियान पराग उपकप्तान होंगे। सीरीज में भारत-A के अलावा श्रीलंका-A और अफगानिस्तान-A की टीमें हिस्सा लेंगी। वहीं, भारतीय सीनियर टीम का ऐलान 19 मई को होने की संभावना है। टीम इंडिया को जून में अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे और टेस्ट सीरीज खेलनी है। प्रियांश-प्रभसिमरन के नाम BCCI ने स्क्वॉड में प्रियांश आर्या, वैभव सूर्यवंशी, आयुष बडोनी, निशांत सिंधु और अंशुल कम्बोज जैसे युवा खिलाड़ियों को मौका दिया है। विकेटकीपर के तौर पर प्रभसिमरन सिंह और कुमार कुशाग्र टीम में शामिल हैं। ट्राई सीरीज के लिए इंडिया-A स्क्वॉड- तिलक वर्मा (कप्तान), प्रियांश आर्या, वैभव सूर्यवंशी, रियान पराग (उपकप्तान), आयुष बडोनी, निशांत सिंधु, हर्ष दुबे, सूर्यांश शेडगे, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कुमार कुशाग्र (विकेटकीपर), विपराज निगम, यश ठाकुर, युधवीर सिंह, अंशुल कम्बोज, अरशद खान। वनडे ट्राई-सीरीज के सभी मुकाबले दांबुला में खेले जाएंगे। इसके बाद इंडिया-A टीम श्रीलंका-A के खिलाफ दो मल्टी-डे मैच भी खेलेगी, जिनके लिए अलग स्क्वॉड का ऐलान बाद में किया जाएगा। बुमराह को आराम दिया जा सकता है अफगानिस्तान के खिलाफ टेस्ट मुकाबला IPL खत्म होने के तुरंत बाद 6 जून को न्यू चंडीगढ़ में खेला जाना है। ऐसे में चयनकर्ता टीम में कुछ नए चेहरों को मौका दे सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जसप्रीत बुमराह को इस टेस्ट में आराम दिया जा सकता है, क्योंकि यह मुकाबला वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं है। गिल ही कप्तानी करेंगे शुभमन गिल ही टेस्ट टीम की कप्तानी करते दिखेंगे। पंजाब के तेज गेंदबाज गुरनूर बरार का नाम भी चर्चा में है। डोमेस्टिक क्रिकेट में चयनकर्ताओं को उनकी लगातार सही लाइन-लेंथ, तेज गेंदबाजी और मूवमेंट ने प्रभावित किया है। वनडे ईशान की वापसी हो सकती है वनडे टीम में बहुत बड़े बदलाव की उम्मीद नहीं है, लेकिन दूसरे विकेटकीपर को लेकर चर्चा तेज है। ऋषभ पंत लंबे समय से टीम सेटअप का हिस्सा रहे हैं, लेकिन IPL में खराब बल्लेबाजी फॉर्म की वजह से उनकी जगह पर सवाल उठ रहे हैं। इसी बीच, ईशान किशन की वापसी की संभावना बढ़ गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले चयन बैठकों में भी उनका नाम चर्चा में रहा था। बाएं हाथ के बल्लेबाज होने और किसी भी क्रम पर बल्लेबाजी करने की क्षमता को टीम मैनेजमेंट अहम मान रहा है। टी-20 में वापसी के बाद उनका प्रदर्शन भी अच्छा रहा है। केएल राहुल फिलहाल टीम मैनेजमेंट की पहली पसंद बने हुए हैं। उनकी फॉर्म अच्छी है और अगले साल साउथ अफ्रीका में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप को देखते हुए उनका अनुभव टीम के लिए अहम माना जा रहा है। जडेजा-अक्षर में से एक को मौका वनडे टीम में स्पिन ऑलराउंडर की जगह को लेकर भी बड़ी चर्चा हो सकती है। रवींद्र जडेजा और अक्षर पटेल में से एक को चुना जाएगा, इस पर चयनकर्ता और टीम मैनेजमेंट बातचीत कर सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, जडेजा का हालिया वनडे प्रदर्शन गेंद और बल्ले दोनों से उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा है। खासकर उनकी बल्लेबाजी अप्रोच को लेकर सवाल हैं, क्योंकि टीम मैनेजमेंट उस बल्लेबाजी पोजिशन पर ज्यादा आक्रामकता चाहता है।
खट्टी कढ़ी रेसिपी: घर में ऐसे पक्के बच्चों वाली कढ़ी, भूल जाएंगे होटल का स्वाद; नोट करें सबसे आसान तरीका

पकौड़ों के लिए: 1 कप बेसन, 1 इलेक्ट्रोनिक कटा प्याज, 1 हरी मिर्च, थोड़ा हरा धनिया, नमक का स्वाद, तेल तलने के लिए छवि: फ्रीपिक कढ़ी के लिए: 1 कप कटा दही, 3 कप सोडा, 3 कप पानी, 1/2 छोटा सोडा, नमक बड़ा स्वाद छवि: सोशल मीडिया धन्यवाद के लिए: 1 छोटा चम्मच जीरा, 1/2 छोटा चम्मच मेथी दाना, 2 सूखी लाल मिर्च, कैरी पत्ते, एक चुटकी हींग, 1 बड़ा चम्मच तेल या घी छवि: एआई पकौड़े बनाने की विधि: बेसन लेन में सबसे पहले एक बाउल। इसमें प्याज, हरी मिर्च, हरा धनियां और नमक डालें। थोड़ा-थोड़ा पानी, अल्ट्रा-इलेक्ट्रॉनिक बैटर तैयार करें। छवि: एआई अब हो जाएं मसाले में तेल गर्म करें और छोटी-छोटी पकौड़े की संरचना तक तल लें। पकौड़ों को श्रमिक अलग रख दें। छवि: एआई कढ़ी बनाने की आसान विधि: एक बड़े तालाब में दही और बेसन के महानुभाव से फेंट लें ताकि पेट न रहें। अब इसमें पानी, हल्दी और नमक मिलाप लें। इसके बाद गैस पर पेस्ट्री के बर्तन और उसमें मौजूद घी गर्म करें। छवि: फ्रीपिक फिर जीरा, मेथी दाना, हींग, सूखी लाल मिर्च और करी पत्ते का तड़का स्टूडियो। अब तैयार है दही-बेसन वाला इसमें मिक्स दाल के टुकड़े और लगातार मसाले बने रहें ताकि कढ़ी फटे नहीं. मध्यम गति पर 20 से 25 मिनट तक का समय। छवि: फ्रीपिक जब अच्छी तरह पक जाए और हल्की गाढ़ी हो जाए, तब पकौड़े डाल कर तैयार कर लीजिए. 5 मिनट और पकाकर गैस बंद कर दें। गरमा-गरम खट्टी कढ़ी को जीरा राइस, गेहूँ चावल या रोटी के साथ सर्व करें। छवि: एआई ऊपर से छोटी हरी धनिया दाल दे, इससे स्वाद और भी बढ़ेगा। ज्यादा कट्टापन चाहिए तो दही को थोड़ा पुराना इस्तेमाल करें। छवि: सोशल मीडिया पकौड़ों को सामान्य बनाए रखने के लिए तलने के बाद स्वादिष्ट गुनगुने पानी में 2 मिनट डाल सकते हैं। लाजवाब में लहसुनिया से बनी कढ़ी का स्वाद और भी लाजवाब है। छवि: फ्रीपिक
महिलाओं पर आतंकी हमले से भड़कीं देवोलीना भट्टाचार्जी:नाइजीरिया में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं की हत्या की, एक्ट्रेस बोलीं- इन राक्षसों के लिए नरक में जगह

साथ निभाना साथिया’ में गोपी बहु के नाम से फेमस देवोलीना भट्टाचार्जी ने नाइजीरिया में महिलाओं पर हुए आतंकी हमले पर अपना गुस्सा जाहिर किया है। इस घटना में आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के साथ काफी क्रूरता की, जिसे देखकर एक्ट्रेस ने इन हमलावरों को ‘राक्षस’ और ‘शैतान’ करार दिया है। देवोलीना ने कहा- नरक में मिलेगी खास जगह देवोलीना ने इस बर्बर घटना पर नाराजगी जताते हुए अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर लिखा, ‘एकदम राक्षस और शैतान वाली प्रवृत्ति। इन राक्षसों के लिए नरक में खास जगह है, जिसे वे स्वर्ग समझते हैं।’ एक्ट्रेस उस वीडियो पर भड़क गईं जिसमें आतंकियों ने निर्दोष परिवारों और गर्भवती महिलाओं को अपना निशाना बनाया। प्रेग्नेंट महिलाओं के साथ की गई क्रूरता मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नाइजीरिया के एक ईसाई गांव पर आतंकवादियों ने हमला कर दिया। जो परिवार वहां से भाग नहीं पाए, उन पर आतंकियों ने कुल्हाड़ियों से हमला किया। वीडियो में दावा किया गया है कि इन आतंकियों ने प्रेग्नेंट महिलाओं को पकड़ लिया और उनके पेट पर वार किए। इतना ही नहीं, उन महिलाओं को अपने अजन्मे बच्चों को आंखों के सामने मरते हुए देखने के लिए मजबूर किया गया। 11 ईसाइयों की हत्या सीबीएन (CBN) न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, यह हमला 8 मई की रात को हुआ था। हथियारबंद फुलानी आतंकवादियों ने इस ईसाई समुदाय पर हमला किया, जिसमें बुजुर्गों, बच्चों और गर्भवती महिलाओं सहित कम से कम 11 लोगों की हत्या कर दी गई। हमले में बंदूकों और चाकुओं का इस्तेमाल हुआ था। बंगाल चुनाव में भी रही थीं चर्चा में देवोलीना भट्टाचार्जी हाल ही में तब भी चर्चा में रही थीं, जब उन्होंने मई 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने बीजेपी की जीत का समर्थन किया था और ममता बनर्जी को बंगाल के लिए ‘बुरा सपना’ बताया था।









