भारत से पहली क्रॉस-बॉर्डर रोबोटिक सर्जरी:पश्चिम एशिया में जंग के बीच कोकिलाबेन अस्पताल ने मुंबई से मस्कट में महिला की किडनी का ऑपरेशन किया

मुंबई के कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल ने वर्ल्ड हेल्थ डे 2026 पर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल के डॉक्टर टी. बी. युवराजा ने मुंबई में बैठकर ओमान के मस्कट के मेडिकल सिटी अस्पताल में 55 साल की महिला का रोबोटिक किडनी ऑपरेशन किया। यह क्रॉस-बॉर्डर रिमोट रोबोटिक सर्जरी भारत से पहली बार मानी जा रही है। यह सर्जरी एडवांस्ड ‘मेडबॉट ट्युमाई’ रोबोटिक सिस्टम और रियल-टाइम कनेक्टिविटी के जरिए की गई। डॉक्टर ने दूर बैठकर पूरे ऑपरेशन को कंट्रोल किया और सफलतापूर्वक सर्जरी पूरी की। कोकिलाबेन अस्पताल में यूरो-ऑन्कोलॉजी और रोबोटिक सर्जरी के डायरेक्टर डॉ. टी. बी. युवराजा ने कहा कि यह हेल्थकेयर में बड़ा बदलाव है। उनके मुताबिक अब मरीजों को बेहतर इलाज के लिए दूसरे देश जाने की जरूरत नहीं होगी, बल्कि डॉक्टर ही तकनीक के जरिए मरीज तक पहुंच सकेंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास 4200 से ज्यादा रोबोटिक सर्जरी का अनुभव है और यह उपलब्धि सिर्फ एक सफल ऑपरेशन नहीं, बल्कि भविष्य की हेल्थकेयर व्यवस्था का संकेत है। इससे दुनिया भर में इलाज की पहुंच आसान हो सकती है। अस्पताल के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और CEO डॉ. संतोष शेट्टी ने कहा कि यह उपलब्धि अस्पताल की तकनीकी क्षमता और पहले किए गए रिमोट ऑपरेशन के अनुभव पर आधारित है। उन्होंने कहा कि इस बार भारत की क्लिनिकल क्षमता को मस्कट के कैंसर मरीज तक पहुंचाया गया। अस्पताल के मुताबिक, यह सर्जरी सभी जरूरी नियमों के तहत की गई। इसमें CDSCO की गाइडलाइंस का पालन किया गया, ताकि सुरक्षा, नैतिकता और क्लिनिकल स्टैंडर्ड बनाए रखें। यह जरूरी है क्योंकि रिमोट सर्जरी अब धीरे-धीरे बड़े स्तर पर लागू होने की दिशा में बढ़ रही है। अस्पताल ने कहा कि यह उपलब्धि दिखाती है कि भारत अब सिर्फ मेडिकल टूरिज्म का केंद्र नहीं, बल्कि दुनिया भर में रियल-टाइम मेडिकल एक्सपर्टीज देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इससे यह भी साबित हुआ कि अब सर्जरी देश की सीमाओं से बाहर निकल रही है। कोकिलाबेन अस्पताल में रोबोटिक सर्जरी के लिए एक बड़ा सेंटर है और यहां तीन एडवांस्ड रोबोटिक प्लेटफॉर्म मौजूद हैं। अस्पताल के पास भारत का पहला मेडबॉट ट्युमाई सिस्टम भी है, जिससे ऐसी सर्जरी संभव हो पाई। अस्पताल के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया मरीज-केंद्रित सोच पर आधारित है। बिना यात्रा किए जटिल सर्जरी होने से मरीज को सुविधा मिलती है और बेहतर नतीजे मिलने की संभावना भी बढ़ती है। अब मरीजों को इलाज के लिए विदेश जाने की जरूरत कम हो सकती है। इससे समय बचेगा, खर्च कम होगा और इलाज जल्दी मिल सकेगा। यह उपलब्धि कोकिलाबेन अस्पताल को ग्लोबल लेवल पर एक ऐसे सेंटर के रूप में स्थापित करती है, जहां से टेक्नोलॉजी के जरिए दुनिया भर में इलाज दिया जा सकता है। अस्पताल का कहना है कि आने वाले समय में ऐसी रिमोट सर्जरी हेल्थकेयर के भविष्य को बदल सकती है।
एक साल के बच्चे के गले में फंसी जिंदा मछली:इंदौर में खेल-खेल में निगल गया; डॉक्टरों ने ऑपरेशन कर निकाली 3 इंच की मछली

मध्य प्रदेश के इंदौर में एक साल के बच्चे के साथ हैरान करने वाला मामला सामने आया। खेल-खेल में एक छोटी जिंदा मछली उसके मुंह में चली गई, जो गले के पिछले हिस्से में जाकर फंस गई। इसके बाद बच्चे को सांस लेने में दिक्कत होने लगी और उसकी हालत गंभीर हो गई। परिजन उसे तुरंत महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवाय) लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसकी स्थिति को देखते हुए तुरंत इमरजेंसी उपचार शुरू किया। ईएनटी विभाग की टीम ने ऑपरेशन कर करीब 3 इंच की मछली को बाहर निकाला। समय पर इलाज मिलने से बच्चे की सांस सामान्य हो गई। डॉक्टर बोले- जोखिमभरा था ऑपरेशन डॉक्टरों के अनुसार, सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि मछली जिंदा थी। उसके गलफड़ों और पंखों की हलचल से बच्चे के स्वर-यंत्र और भोजन नली को नुकसान पहुंचने का खतरा था। ऐसे में ऑपरेशन बेहद जोखिम भरा था और जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। परिजन बोले- लगा सांस नहीं ले पाएगा परिजनों के मुताबिक, बच्चे की हालत देखकर वे घबरा गए थे। उसे सांस लेने में कठिनाई, घबराहट और मुंह से खून आने जैसी समस्याएं हो रही थीं। उन्होंने बताया कि उन्हें लगा था कि बच्चा सांस नहीं ले पाएगा, लेकिन डॉक्टरों ने समय पर इलाज कर उसकी जान बचा ली। डॉक्टर बोलीं-मामला बेहद दुर्लभ, चुनौतीपूर्ण ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. यामिनी गुप्ता ने बताया कि यह मामला बेहद दुर्लभ और चुनौतीपूर्ण था। इतनी कम उम्र में इस तरह का केस मध्य भारत में पहले देखने को नहीं मिला है। विशेषज्ञों ने बताया कि छोटे बच्चों में इस तरह की घटनाएं बेहद खतरनाक हो सकती हैं, क्योंकि उनकी सांस की नली संकरी होती है।
Gallbladder Stone Symptoms: पित्त की पथरी का दर्द कहां होता है? गालब्लैडर स्टोन के इस लक्षण को न करें नजरअंदाज, करवाना पड़ जाएगा ऑपरेशन

Last Updated:April 08, 2026, 22:17 IST Gallbladder Stone Symptoms: आज के समय में गालब्लैडर स्टोन कॉमन हेल्थ इश्यू बन गया है. इसके बारे में सबसे खतरनाक चीज है, इसके लक्षण जो कि बहुत ही मामूली रूप में दिखते हैं. इन्हें पहचान पाना काफी मुश्किल होता है, इसलिए पित्त की पथरी को साइलेंट स्टोन भी कहा जाता है. निदान में देरी से ऑपरेशन ही एक मात्र इलाज का विकल्प होता है, इसलिए इसके लक्षणों के बारे में पता होना जरूरी है. पित्ताशय लिवर के ठीक पीछे थैलीनुमा एक छोटा सा अंग है. इसमें पथरी की समस्या बहुत ही कॉमन होती जा रही है. लेकिन पित्त की थैली में पथरी का पता उस समय तक नहीं लग पाता है, जब तक ये बाइल डक्ट में रूकावट पैदा नहीं करते हैं. गालब्लैडर की समस्या महिलाओं में पुरुषों की तुलना में ज्यादा कॉमन है. ज्यादातर मामलों में पित्त की पथरी का पता काफी देरी से लगता है, जिससे ऑपरेशन करके इसे निकालने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं रह जाता है. वैसे तो पित्त की थैली में पथरी के लक्षण शुरुआती स्टेज में साइलेंट होते हैं. लेकिन सूझबूझ इसे वक्त रहते पहचाना जा सकता है. जैसे कि पित्ताशय में पथरी बनने पर इसके दर्द का लोकेशन फिक्स्ड होता है. आपके पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में अचानक और तेजी से बढ़ता हुआ दर्द चेतावनी है कि पित्त की थैली में कुछ गड़बड़ी भी चल रही है. Add News18 as Preferred Source on Google पित्त की थैली में पथरी का दर्द इतना तेज हो सकता है कि इसके कारण आप चलने, बैठने या लेटने में राहत न महसूस कर पाएं. यदि पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से या सेंटर में ऐसा दर्द 30 मिनट से ज्यादा समय तक परेशान करता है, और बार-बार लौट कर आ रहा है तो बिना देरी डॉक्टर से परामर्श करें. पेट में दर्द के अलावा शॉल्डर के बीच में भी पित्ताशय में पथरी का दर्द होता है. ज्यादातर लोग इस दर्द को ज्यादा देर तक कुर्सी पर बैठकर काम करने, या फिजिकल वर्क स्ट्रेस की वजह समझते हैं.लेकिन यदि आप ऑपरेशन के खर्च से बचना चाहते हैं, तो इसे अनदेखा न करें. पित्त की थैली में पथरी है, तो आपके लिए खाना खाना भी मुश्किल हो सकता है. क्योंकि इसका दर्द कुछ फूड्स से भी ट्रिगर होता है. यदि आप ज्यादा तेल मसाला या फैटी फूड्स खा रहे हैं, तो इसके बाद आप काफी देर तक परेशान रह सकते हैं. दर्द के अलावा गालब्लैडर स्टोन के लक्षणों में मतली, उल्टी, ब्लॉटिंग, अपच और स्किन का येलो दिखना, ठंड लगकर बुखार आना, यूरिन का कलर डार्क होना, पेट का आकार बढ़ना भी शामिल है. शुरुआती स्टेज पर पित्त की पथरी का इलाज आसानी से दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के साथ किया जा सकता है. लेकिन इसके लिए गालब्लैडर के लक्षणों को समय रहते पहचानना जरूरी है. First Published : April 08, 2026, 22:17 IST
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। अमेरिका ने निकलने से पहले अपने दो विमान जलाए द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से एक बचाए गए अमेरिकी एयरमैन और कमांडो को निकालने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए थे। इसके बाद अमेरिका को तीन नए विमान भेजने पड़े, ताकि एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अमेरिकी सेना ने उन फंसे हुए ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ये विमान एक अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए थे, जिसे अमेरिकी सेना ने देश के एक दूरदराज इलाके में बनाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस पूरे रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचाए गए वेपन्स ऑफिसर को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैककार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैककार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान एक बड़ी रुकावट भी आई। दो ट्रांसपोर्ट विमान, जो कमांडो और एयरमैन को निकालने वाले थे, ईरान के एक दूरदराज बेस पर खराब हो गए। इसके बाद तीन नए विमान भेजे गए। अमेरिकी फोर्स ने उन खराब विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए।
10 दिन में तीन बार ऑपरेशन, महिला की मौत:छतरपुर के अस्पताल में महिलाओं का हंगामा; अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप

छतरपुर शहर के सागर रोड स्थित हॉस्पिटल में एक महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। घटना के बाद अस्पताल परिसर में तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। मृतका की पहचान सिया (40) पत्नी मुन्ना लाल अहिरवार, निवासी गौतम नगर सोरा रोड थाना कोतवाली के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक सिया को बच्चेदानी (यूट्रस) में गांठ की समस्या थी, जिसके इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 10 दिन में तीन बार ऑपरेशन, हालत बिगड़ती गई परिजनों का आरोप है कि 25 मार्च को सिया का पहला ऑपरेशन दूरबीन (लेप्रोस्कोपी) से किया गया था। इसके बाद उसी दौरान दूसरा ऑपरेशन हाथ से किया गया। परिजनों का कहना है कि ऑपरेशन के बाद भी उसकी हालत में सुधार नहीं हुआ, बल्कि वह लगातार बिगड़ती चली गई। डॉक्टरों ने परिजनों को बताया कि पहले ऑपरेशन के दौरान आंत फंस गई है, जिसके चलते दोबारा सर्जरी करनी पड़ेगी। इसके बाद शनिवार को तीसरा ऑपरेशन किया गया। परिजनों के अनुसार सिया खुद चलकर ऑपरेशन थिएटर तक गई थी, लेकिन कुछ ही समय बाद डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप, कार्रवाई की मांग मृतका के परिजनों ने डॉ. शोभित अहिरवार और अन्य डॉक्टरों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार ऑपरेशन करने के कारण ही सिया की जान गई है। उनका कहना है कि सही इलाज नहीं मिलने से यह घटना हुई है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। अस्पताल में हंगामा, स्टाफ मौके से गायब महिला की मौत की खबर मिलते ही परिजन और रिश्तेदार आक्रोशित हो गए और अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। स्थिति बिगड़ते देख अस्पताल का स्टाफ मौके से गायब हो गया। परिजन अस्पताल के बाहर धरने पर बैठ गए और न्याय की मांग करने लगे। पुलिस ने संभाला मोर्चा, जांच शुरू सूचना मिलते ही कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया। पुलिस ने परिजनों को समझाइश दी और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल पूरे मामले में जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई की बात कही जा रही है। घटना के बाद मृतका के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और वे दोषी डॉक्टरों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग पर अड़े हुए हैं।
जोधपुर में रोबोटिक सर्जरी की शुरूआत, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब शहर में संभव – News18 हिंदी

X जोधपुर में शुरू हुई रोबोटिक सर्जरी, 8 करोड़ की मशीन से कैंसर ऑपरेशन अब संभव Jodhpur Cancer Robotic Surgery: जोधपुर के विनायका अस्पताल में स्वदेशी रोबोटिक सर्जरी की शुरुआत से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा बदलाव आया है. 8 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित इस तकनीक से अब कैंसर सहित कई जटिल ऑपरेशन शहर में ही संभव हो गए हैं. डेढ़ महीने में 13 सफल सर्जरी इसके बेहतर परिणाम का संकेत हैं. अस्पताल ने 8 डॉक्टरों और 12 स्टाफ को विशेष प्रशिक्षण देकर इस सुविधा को मजबूत बनाया है. डॉ. प्रदीप शर्मा के नेतृत्व में टीम पहले ही 5000 से अधिक कैंसर ऑपरेशन कर चुकी है. अब रोबोटिक तकनीक से मरीजों को कम दर्द, जल्दी रिकवरी और कम खर्च का लाभ मिल रहा है. RGHS योजना से जुड़ने के कारण आम लोगों की पहुंच भी बढ़ी है. इस पहल से मारवाड़ के मरीजों को बड़े शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.
हिमाचल में टेंपो ट्रैवलर दुर्घटनाग्रस्त, 3 पर्यटकों की मौत:16 को रेस्क्यू किया, बंजार अस्पताल में चल रहा उपचार SP बोले- सर्च ऑपरेशन जारी

हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले के बंजार क्षेत्र में शनिवार रात करीब 9 बजे एक टेंपो ट्रैवलर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इसमें तीन पर्यटकों की मौत हो गई है, जबकि 16 लोगों को रेस्क्यू किया गया और उनको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सूचना के मुताबिक, टेंपो ट्रैवलर में चंडीगढ़, राजस्थान और दिल्ली सहित विभिन्न राज्यों के पर्यटक सवार थे। टेंपो में करीब 20 पर्यटक सवार थे। अचानक कुल्लू के बंजार क्षेत्र में हादसा ग्रस्त हो गया। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और पुलिस टीम मौके पर पहुंच गई और राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। स्थानीय लोग भी बड़ी संख्या में मौके पर पहुंचे और प्रशासन के साथ मिलकर बचाव कार्य में जुट गए। सर्च ऑपरेशन जारी एसपी कुल्लू मदन वर्मा के अनुसार, अब तक 16 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है। लापता लोगों की तलाश के लिए सर्च ऑपरेशन लगातार जारी है। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई। रात के अंधेरे और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है। प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि लापता लोगों को जल्द से जल्द खोज लिया जाएगा और घायलों को हर संभव उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। अस्पताल में भर्ती घायलों की फोटो
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में एक आतंकी ढेर:कल रात से ऑपरेशन चल रहा था; एक और आतंकी के छिपे होने की सूचना

जम्मू-कश्मीर के गांदरबल में सेना ने बुधवार सुबह एक आतंकवादी को ढेर कर दिया। यह ऑपरेशन मंगलवार रात से जारी था। एक अधिकारी ने बताया कि खास इंटेलिजेंस इनपुट के आधार पर, पुलिस और सेना की एक जॉइंट टीम ने मंगलवार शाम को घेराबंदी और सर्च ऑपरेशन शुरू किया। एक आतंकी के छिपे होने की जानकारी मिली। अंधेरे की वजह से ऑपरेशन रोक दिया गया था। सुबह आतंकी को मार गिराया गया। इससे पहले फरवरी में सेना ने जम्मू-कश्मीर में 6 आतंकवादियों को मार गिराया था। किश्तवाड़ के चतरू में 3 आतंकी ढेर हुए थे। वहीं 4 फरवरी को भी चतरू में ही सुरक्षाबलों ने जैश के ही एक आतंकी को मार गिराया था। वहीं, उधमपुर जिले में भी गुफा में छिपे जैश के 2 आतंकियों को ग्रेनेड विस्फोट में मार गिराया गया था। सर्च ऑपरेशन की 2 तस्वीरें… सुरक्षाबलों के पिछले 4 बड़े एनकाउंटर 22 फरवरी: सेना ने 3 आतंकी ढेर किए जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ में चतरू इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़ हुई। 3 आतंकी ढेर हो गए। सुरक्षाबलों ने उस ठिकाने को ही ब्लास्ट कर दिया, जहां आतंकी छिपे हुए थे। 23 जनवरी: जैश-ए-मोहम्मद का कमांडर मारा गया जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 23 जनवरी को सुरक्षाबलों ने पाकिस्तान के आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के कमांडर उस्मान को मार गिराया था। आतंकियों की तलाश में पिछले एक हफ्ते से ऑपरेशन चल रहा था। उस्मान पिछले 2 साल से अन्य आतंकवादियों के साथ डोडा-उधमपुर-कौथा इलाके में एक्टिव था। एनकाउंटर की साइट से अमेरिका में बनी M4 राइफल, हथियार और गोला-बारूद बरामद हुआ। 18 जनवरी: ग्रेनेड हमले में जवान शहीद 18 जनवरी को किश्तवाड़ के जंगलों में सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों की मुठभेड़ हुई थी। आतंकियों के ग्रेनेड हमले में 8 जवान घायल हुए थे। 19 जनवरी को एक जवान हवलदार गजेंद्र सिंह इलाज के दौरान शहीद हुए थे। किश्तवाड़ के तरू बेल्ट में मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के जंगलों में ऑपरेशन त्राशी-1 जारी है। यहां भी जैश के 2-3 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। किश्तवाड़ में रविवार को घायल हवलदार गजेंद्र सिंह की सोमवार को मौत हो गई। 18 जनवरी को किश्तवाड़ के जंगलों में सर्च ऑपरेशन के दौरान सुरक्षाबलों और आतंकियों की मुठभेड़ हुई थी। आतंकियों के ग्रेनेड हमले में 8 जवान घायल हुए थे। 19 जनवरी को एक जवान हवलदार गजेंद्र सिंह इलाज के दौरान शहीद हुए थे। किश्तवाड़ के तरू बेल्ट में मंडराल-सिंहपोरा के पास सोनार गांव के जंगलों में ऑपरेशन त्राशी-1 जारी है। यहां भी जैश के 2-3 आतंकियों के छिपे होने की आशंका है। जम्मू-कश्मीर पुलिस में SOG के जवान अमजद पठान की 15 दिसंबर को आतंकियों से मुठभेड़ में मौत हुई थी। 16 दिसंबर: एक जवान शहीद, 2 घायल 16 दिसंबर 2025 को जम्मू-कश्मीर के उधमपुर में मजालता क्षेत्र के सोहन गांव के पास लगातार दूसरे दिन को आतंकियों और सुरक्षाबलों के बीच एनकाउंटर हुआ था। आतंकियों की गोलीबारी में स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) के दो जवान घायल हुए थे। एक दिन पहले हुई मुठभेड़ में जम्मू-कश्मीर पुलिस का जवान शहीद हुआ था। पूरी खबर पढ़ें… ———- ये खबर भी पढ़ें… जम्मू में सेना की गाड़ी 400-फीट गहरी खाई में गिरी: 10 जवानों की जान गई, 11 घायल; सड़क पर बर्फ के चलते फिसली गाड़ी जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में 23 जनवरी कोसेना की गाड़ी 400 फीट गहरी खाई में गिरी थी। घटना में 10 जवानों की मौत हुई, जबकि 11 को एयरलिफ्ट कर उधमपुर मिलिट्री हॉस्पिटल भेजा गया था। हादसा भद्रवाह-चंबा इंटरस्टेट रोड पर खन्नी टॉप के पास हुआ था। डोडा के डिप्टी कमिश्नर हरविंदर सिंह ने बताया कि सड़क पर बर्फ होने की वजह से ड्राइवर ने गाड़ी से कंट्रोल खो दिया था। पूरी खबर पढ़ें…
इजराइल ने CNN पत्रकारों से बदसलूकी पर बटालियन सस्पेंड की:सैनिकों ने हिरासत में लिया था; ऑपरेशन से हटाकर ट्रेनिंग में भेजा

इजराइली सेना ने वेस्ट बैंक में CNN के पत्रकारों से बदसलूकी और हिरासत में लेने के मामले में एक पूरी बटालियन को सस्पेंड कर दिया है। साथ ही रिजर्व बटालियन की सभी ऑपरेशनल गतिविधियां सस्पेंड कर दी हैं। सेना के मुताबिक इस बटालियन को तुरंत प्रभाव से वेस्ट बैंक से हटाकर ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया है। जांच पूरी होने तक यह यूनिट किसी भी ऑपरेशन में शामिल नहीं होगी। यह घटना पिछले हफ्ते फिलिस्तीनी गांव तायासिर में हुई थी, जहां CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। आरोप है कि सैनिकों ने टीम को हिरासत में लिया और एक फोटो जर्नलिस्ट के साथ मारपीट भी की, जिससे उसका कैमरा टूट गया। इजराइली सेना ने कहा है कि बटालियन को प्रोफेशनल और एथिकल ट्रेनिंग दी जाएगी और मामले में शामिल सैनिकों के खिलाफ अलग से कार्रवाई भी की जाएगी। पत्रकारों से बदसलूकी का वीडियो… इजराइली सैनिकों ने पत्रकार का गला पकड़ा 26 मार्च को वेस्ट बैंक के फिलिस्तीनी गांव तयासिर में CNN की टीम रिपोर्टिंग कर रही थी। कुछ समय पहले ही वहां इजराइली सेटलर्स ने हमला किया था। उसी के बाद की स्थिति दिखाने के लिए CNN के पत्रकार जेरेमी डायमंड अपनी टीम के साथ गांव पहुंचे थे। आसपास टूटे हुए ढांचे, बिखरा सामान और डरे हुए स्थानीय लोग उस हमले की कहानी बयान कर रहे थे। टीम कैमरे पर हालात रिकॉर्ड कर रही थी और चश्मदीदों से बात कर रही थी। तभी अचानक वहां इजरायली सैनिकों की टीम पहुंची। शुरुआत में सैनिकों ने टीम से सवाल-जवाब किए, लेकिन माहौल जल्दी ही तनावपूर्ण हो गया। कुछ ही देर में सैनिकों ने CNN टीम को आगे बढ़ने से रोक दिया और उन्हें वहीं रोककर हिरासत में ले लिया। इसी दौरान हालात और बिगड़ गए। आरोप है कि एक सैनिक ने फोटो जर्नलिस्ट सिरिल थियोफिलॉस को पकड़कर उनका गला जकड़ लिया। अचानक हुए इस हमले से वह संतुलन खो बैठे और जमीन पर गिर गए। इस धक्का-मुक्की में उनका कैमरा भी टूट गया। अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन ने हमले की निंदा की वेस्ट बैंक में CNN की टीम के साथ हुई बदसलूकी को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संगठन फॉरेन प्रेस एसोसिएशन (FPA) ने निंदा की। संगठन ने इस घटना को हिंसक हमला बताते हुए प्रेस की आजादी पर सीधा हमला करार दिया। संगठन ने आरोप लगाया कि सैनिकों ने पत्रकारों और वहां मौजूद लोगों पर बंदूक तान दी, जबकि पत्रकार अपनी पहचान बता चुके थे। इतना ही नहीं, टीम को शूटिंग बंद करने के लिए मजबूर किया गया और कैमरा छीनने की धमकी भी दी गई। संगठन ने इस मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि यह घटना दिखाती है कि मीडिया के प्रति दुश्मनी बढ़ रही है, जो बेहद चिंताजनक है। हरेदी समुदाय के लिए बनाई गई नेत्जाह यूनिट इजराइल में हर किसी के लिए जरूरी रूप से सेना में शामिल होने का नियम है। पुरुषों को लगभग तीन साल और महिलाओं को दो साल सेना में सेवा देनी होती है। यह यूनिट इजराइली सेना की कफिर ब्रिगेड का हिस्सा है। 1948 में जब इस देश का गठन हुआ था। तब हरेदी समुदाय से आने वाले 400 अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स पुरुषों को सेना में सेवा से छूट दी थी। इसका मकसद था कि ये लोग धार्मिक शिक्षा और यहूदी परंपराओं को बचाने का काम जारी रख सकें। धीरे-धीरे हरेदी समुदाय के लोगों का आंकड़ा बढ़ता गया जो सेना में शामिल होने से बचते रहे। इससे बाकी समुदाय नाराज रहने लगे। इसके बाद सरकार ने 1999 में नेत्जाह येहूदा यूनिट बनाई जहां वे अपनी धार्मिक पहचान बनाए रखते हुए सेना में सेवा दे सकें। यह यूनिट बाकी सैन्य यूनिट्स से थोड़ी अलग है। इसमें महिलाएं शामिल नहीं होतीं। माहौल पूरी तरह से धार्मिक वाला रखा जाता है और कोषेर (धार्मिक नियमों वाला) खाना दिया जाता है। ज्यादातर वेस्ट बैंक (पश्चिमी तट) इलाके में तैनाती रहती है। सुरक्षा और गश्त जैसे काम करती है। हालांकि इस यूनिट में हरेदी के अलावा भी दूसरे समुदाय के लोग शामिल होते हैं। हालांकि आबादी सबसे ज्यादा हरेदी समुदाय के लोगों की होती है। विवादों में रही है यह यूनिट









