डकैत: एक प्रेम कथा:अदिवि शेष ने कहा- दर्शक अब सिर्फ एक्शन नहीं, रोल्स को भी महसूस करना चाहता है

अदिवि शेष इन दिनों अपनी एक्शन-ड्रामा फिल्म ‘डकैत: एक प्रेम कथा’ को लेकर चर्चा में हैं। ‘क्षणम’, ‘गूढ़ाचारी’ और ‘मेजर’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी अलग पहचान बना चुके शेष ने इस फिल्म के माध्यम से एक बार फिर दर्शकों के सामने नई कहानी पेश करने की तैयारी की है। दैनिक भास्कर के साथ इस विशेष बातचीत में अदिवि शेष ने अपनी आगामी से अपने जुड़ाव और इसके अन्य पहलुओं पर चर्चा की। मेरे लिए ‘डकैत’ का उद्देश्य केवल एक्शन दिखाना नहीं था ‘डकैत’ मूल रूप से सबसे पहले एक प्रेम कहानी है। मैं हमेशा इसे इसी तरह देखता हूं कि यह प्यार की कहानी में बुना गया एक्शन है, न कि एक्शन की कहानी में जोड़ा गया प्यार। अगर आपने फिल्म का गाना ‘रूबरू’ सुना है, जिसे फहीम अब्दुल्ला ने आवाज दी है, तो उसमें एक बेहद सादगी भरा, रूहानी और पुराने दौर के प्रेम का एहसास मिलता है। यह वैसी ही भावनाओं को दर्शाता है, जैसा कभी पुराने उपन्यासों या पिछली पीढ़ियों की प्रेम कहानियों में देखने को मिलता था। फिल्म का मूल विचार यही था कि जब इतने सरल, पवित्र और भावनात्मक प्रेम के बीच अचानक हिंसा और तीव्र एक्शन प्रवेश करता है, तो पूरा परिवेश किस तरह बदलता है। यही विरोधाभास इस कहानी की सबसे बड़ी ताकत है। मेरे लिए ‘डकैत’ का उद्देश्य केवल एक्शन दिखाना नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि भावनात्मक रूप से गहरे रिश्तों के बीच संघर्ष और हिंसा किस तरह असर डालते हैं। यही तत्व फिल्म को अलग, बड़े कैनवास वाली और विश्वसनीय बनाते हैं। मुझे अच्छी स्क्रिप्ट मिले, तो मैं जर्मन भाषा में भी फिल्म कर लूंगा मेरा नजरिया हमेशा से स्पष्ट रहा है। मैंने तब भी कहा था कि अगर मुझे अच्छी स्क्रिप्ट मिले, तो मैं जर्मन भाषा में भी फिल्म करने के लिए तैयार हूं। मेरे लिए भाषा नहीं, बल्कि कहानी महत्वपूर्ण है। ‘मेजर’ के बाद मुझे हिंदी और साउथ फिल्म इंडस्ट्री से 4-5 बड़ी वॉर फिल्में और बायोपिक्स ऑफर हुई थीं, लेकिन मेरे भीतर का लेखक मुझे बार-बार रोक रहा था। मुझे लगा कि मेजर संदीप उन्नीकृष्णन का किरदार निभाने के तुरंत बाद किसी दूसरी सैनिक-आधारित कहानी का हिस्सा बनना सही नहीं होगा। मैं उनके माता-पिता की भावनाओं और उनकी यादों के प्रति ईमानदार रहना चाहता था। मेरे लिए हमेशा वही कहानी मायने रखती है, जो भीतर तक प्रभावित करे। इंसानियत की शुरुआत ही माता-पिता से होती है मेरा मानना है कि प्यार कभी सामाजिक विषय नहीं रहा, बल्कि यह हमेशा एक बेहद व्यक्तिगत भावना रही है। इंसानियत की शुरुआत से ही माता-पिता, भाई-बहन और प्रेमियों के बीच भावनात्मक रिश्ते मौजूद रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि इन रिश्तों पर अब नई कहानियां नहीं कही जा सकतीं।
AI could surpass humans by 2030

न्यूयॉर्क9 मिनट पहले कॉपी लिंक सीईओ हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा।- फाइल फोटो गूगल डीपमाइंड के सीईओ डेमिस हासाबिस ने हाल ही में एक ऐसी बात कही जो सुनने में उतनी ही रोमांचक है, जितनी डरावनी। उन्होंने कहा कि इंसान जैसी सोच रखने वाली आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एजीआई अब महज कुछ साल दूर है। स्टैनफर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिजनेस के एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, ‘शायद 2030, एक-दो साल कम या ज्यादा लग सकते हैं।’ यह सुनकर खुद उन्हें भी हैरानी होती है। हासाबिस ने एजीआई की तुलना ‘सिंगुलैरिटी’ से की, यानी वो पल जहां से पलटकर देखना मुमकिन नहीं होगा। उनके मुताबिक यह ‘एक नए मानव युग’ की शुरुआत होगी। और इसीलिए वे बार-बार यह कहते हैं कि नए दौर का सामना करने की तैयारी अभी से होनी चाहिए क्योंकि वक्त कम बचा है। हासाबिस इकलौते नहीं हैं जो इस तरह की बातें कर रहे हैं। ओपनएआई के सीईओ सैम ऑल्टमैन का कहना है कि एआई की वजह से लाखों नौकरियां जा सकती हैं। एंथ्रोपिक के सीईओ डेरियो अमोदेई ने तो यहां तक कह चुके हैं कि अगले पांच वर्षों में आधे एंट्री-लेवल वाइट-कॉलर काम गायब हो सकते हैं। हां, यह भी सच है कि हाल के दिनों में इन तमाम दिग्गजों ने अपनी ‘कयामत की भाषा’ में थोड़ी नरमी लाई है, लेकिन मुख्य संदेश वही है। हासाबिस ने यह भी माना कि उनके कुछ साथी अपनी भविष्यवाणियों में ‘बहुत ज्यादा निश्चित’ हो जाते हैं। यह ठीक नहीं। उन्होंने एजीआई को सिर्फ खतरे का पर्याय नहीं बताया। उनके मुताबिक यही टेक्नोलॉजी मेडिकल साइंस में क्रांति ला सकती है। यह आर्थिक बदलाव की वजह बन सकती है और एक ऐसी दुनिया की नींव रख सकती है जहां ‘अभाव’ शब्द का अर्थ बदल जाए, जिसे भविष्यवादी ‘पोस्ट-स्कार्सिटी वर्ल्ड’ कहते हैं। युवाओं और छात्रों को उनका सीधा संदेश है- चाहे आप ‘ह्यूमैनिटीज’ पढ़ते हों या साइंस-टेक्नोलॉजी की ट्रेनिंग ले रहे हों, इस तकनीक से भागिए मत, इसे अपनाइए। उन्होंने सबसे दिलचस्प बात ये कही, ‘भविष्य अभी लिखा नहीं गया है, लेकिन अगले कुछ साल तय कर देंगे कि वो वास्तव में कैसा दिखेगा।’ एजीआई- जब मशीनें भी इंसान की तरह हर काम में माहिर होंगी एजीआई यानी आर्टिफिशियल जनरल इंटेलिजेंस। यह एआई का वो स्तर है जब मशीन हर काम इंसान जितनी या उससे भी बेहतर क्षमता से कर सके। अभी का एआई किसी एक काम में माहिर होता है, एजीआई हर काम में माहिर होगा। हासाबिस का अनुमान है कि यह 2030 तक हकीकत बन सकता है। सैम ऑल्टमैन और डेरियो अमोदेई भी इसी समयसीमा के आसपास इशारा कर चुके हैं। एजीआई के संभावित फायदे- बीमारियों का इलाज, आर्थिक बदलाव, अभावमुक्त दुनिया। लेकिन इसके साथ नौकरियां कम होने के खतरे, नियंत्रण का सवाल, समाज पर अप्रत्याशित प्रभाव जैसी आशंकाएं भी जुड़ी हुई हैं। दुनिया के पास तैयारी के लिए शायद पांच साल भी नहीं हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Not every cold treat is ice cream; FSSAI tightens regulations, India’s frozen dessert market surpasses ₹31,000 crore

Hindi News Business Not Every Cold Treat Is Ice Cream; FSSAI Tightens Regulations, India’s Frozen Dessert Market Surpasses ₹31,000 Crore मुंबई6 मिनट पहले कॉपी लिंक मई 2025 में मैग्नम आइसक्रीम कंपनी (क्वालिटी वॉल्स की मूल कंपनी) के सीईओ ने घोषणा की थी कि भारत में पूरे पोर्टफोलियो को डेयरी-बेस्ड प्रोडक्ट्स में बदला जाएगा।- प्रतीकात्मक इमेज गर्मियों में ज्यादातर लोग हाथ में कोई न कोई ‘फ्रोजन ट्रीट’ थामे दिखता है। इस बात की ज्यादा संभावना है कि यह “आइसक्रीम’ नहीं, बल्कि “फ्रोजन डेजर्ट’ हो। दोनों एक जैसे दिखते हैं, पर बनते अलग तरह से हैं। लेबल पर यह जानकारी इतनी बारीक होती है कि शायद ही कोई पढ़ पाए। खाद्य नियामक एफएसएसएआई के मुताबिक, ‘आइसक्रीम’ केवल वही है, जिसमें फैट का स्रोत दूध या डेयरी प्रोडक्ट हो। जिनमें मिल्क फैट की जगह पाम ऑयल या अन्य वेजिटेबल ऑयल/फैट का इस्तेमाल किया गया हो, उन्हें ‘फ्रोजन डेजर्ट’ या ‘फ्रोजन कन्फेक्शन’ के तौर पर बेचना अनिवार्य है। अब बढ़ती जागरूकता की वजह से कंपनियां खुद बदलाव करने लगी हैं। 9 साल में दोगुना हो जाएगा भारत में फ्रोजन डेजर्ट बाजार – आईएमएआरसी 2025 में 30,000 करोड़ के आसपास रहा कुल कारोबार 2034 60,000 करोड़ रुपए तक पहुंचने का अनुमान (सालाना 7.4% की दर से बढ़ रहा यह कारोबार) … पर डेयरी-आधारित आइसक्रीम मार्केट 4 गुना हो जाएगा 2025 में ₹ 31,276 करोड़ का बाजार 2034 में 1,19,000 लाख करोड़ का होगा (सालाना 16% की वृद्धि दर) नोट: सालाना वृद्धि सीएजीआर 2026-2034 स्रोत: आईएमएआरसी ग्रुप अब डेयरी प्रोडक्ट्स का रुख कर रहे उपभोक्ता ग्लोबल मार्केट रिसर्च फर्म आईएमएआरसी ग्रुप के मुताबिक, भारत में आइसक्रीम बाजार, फ्रोजन डेजर्ट के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा तेज रफ्तार (7.4% बनाम 16%) से बढ़ रहा है। यह बताता है कि उपभोक्ता अब डेयरी प्रोडक्ट्स की ओर लौट रहे हैं। इसी रुझान को देखते देसी-विदेशी कंपनियां आइसक्रीम पर फोकस करने लगी हैं। क्वालिटी वॉल्स इनमें शामिल है। – कुछ देसी-विदेशी ब्रांड्स व्हे प्रोटीन मिलाकर हेल्दी स्नैक बनाने का दावा करते हैं। – विशेषज्ञ इसे ‘हेल्थ हेलो’ कहते है, लोग ज्यादा खाते हैं। आइसक्रीम से सस्ते होते हैं फ्रोजन डेजर्ट, हेल्दी भी कम पहलू – आइसक्रीम – फ्रोजन डेजर्ट फैट का स्रोत – दूध/मक्खन/ क्रीम – पाम ऑयल/वेजिटेबल फैट कानूनी श्रेणी – डेयरी प्रोडक्ट – फ्रोजन कन्फेक्शन कीमत – अपेक्षाकृत ज्यादा – कम (कच्चा माल सस्ता) लेबल – आइसक्रीम (स्पष्ट) – ‘फ्रोजन डेजर्ट’ (बारीक प्रिंट) पोषण – प्रोटीन+कैल्शियम – कम पोषण कई कंपनियां पैकेट के सामने ‘आइसक्रीम’ और पीछे बारीक अक्षरों में ‘फ्रोजन डेजर्ट’ लिखती हैं। यह गैरकानूनी तो नहीं, पर भ्रामक है। आइस्क्रीम में देखें 1. फैट का स्रोत – ‘मिल्क फैट’ लिखा हो तो आइसक्रीम; ‘वेजिटेबल फैट/ऑयल’ हो तो फ्रोजन डेजर्ट। 2. हरा/लाल बिंदु – शाकाहारी/मांसाहारी की पहचान। देखें कि प्रोडक्ट आखिर किस श्रेणी में आता है। 3. सामग्री – घटते वजन के क्रम में होती है। पहले नंबर पर जो है, वही सबसे अधिक होता है। 4. FSSAI नंबर – 14 अंकों का लाइसेंस नंबर अनिवार्य है। 2025 से नई पहल केवल भारत में ‘फ्रोजन डेजर्ट’ बेच रही थी कंपनी मई 2025 में मैग्नम आइसक्रीम कंपनी (क्वालिटी वॉल्स की मूल कंपनी) के सीईओ ने घोषणा की थी कि भारत में पूरे पोर्टफोलियो को डेयरी-बेस्ड प्रोडक्ट्स में बदला जाएगा। कंपनी केवल भारत में वेजिटेबल फैट वाले प्रोडक्ट बेच रही थी, वैश्विक स्तर पर नहीं। माना जा रहा है कि उपभोक्ता जागरूकता और सोशल मीडिया पर दबाव इस फैसले की वजह रही। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Shubman has scored 455 runs more than the entire Afghan team; Siraj has taken more than 10 times as many wickets alone.

Hindi News Sports Shubman Has Scored 455 Runs More Than The Entire Afghan Team; Siraj Has Taken More Than 10 Times As Many Wickets Alone. किंग्सटन11 मिनट पहले कॉपी लिंक अफगानिस्तान की मौजूदा टीम के टेस्ट क्रिकेटरों ने मिलकर कुल 2,388 रन बनाए हैं, जबकि भारतीय कप्तान शुभमन गिल अकेले 2,843 रन बना चुके हैं। – फाइल फोटो जब न्यू चंडीगढ़ में 6 जून से भारत और अफगानिस्तान आमने-सामने होंगे तो यह सिर्फ एक टेस्ट मैच नहीं होगा। यह उन दो टीमों की कहानी होगी, जो टेस्ट क्रिकेट के सफर में बिल्कुल अलग पड़ाव पर खड़ी हैं। एक ओर भारत है, जो वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप की तैयारी कर रहा है, तो दूसरी ओर अफगानिस्तान है, जो अभी भी टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहचान मजबूत करने की कोशिश में जुटा है। दोनों टीमों के बीच अनुभव का अंतर एक आंकड़ा ही बता देता है। अफगानिस्तान की मौजूदा टीम के टेस्ट क्रिकेटरों ने मिलकर कुल 2,388 रन बनाए हैं, जबकि भारतीय कप्तान शुभमन गिल अकेले 2,843 रन बना चुके हैं। यानी गिल के बल्ले से पूरी अफगान टीम से 455 रन ज्यादा निकले हैं। गौरतलब है कि राशिद और नबी जैसे अनुभवी अफगान खिलाड़ी इस दौरे पर नहीं आए हैं। भारतीय बल्लेबाजी की बात करें तो अनुभव और गहराई दोनों नजर आते हैं। केएल राहुल 67 टेस्ट में 4053 रन बनाकर टीम के सबसे अनुभवी बल्लेबाज हैं। ऋषभ पंत ने 49 टेस्ट में 3476 रन बनाए हैं और वे मध्यक्रम की अहम कड़ी हैं। कप्तान गिल अब नई पीढ़ी के नेतृत्व का चेहरा हैं और टीम उनसे बड़ी पारी की उम्मीद करेगी। दूसरी ओर अफगानिस्तान की बल्लेबाजी मुख्य रूप से रहमत शाह और कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी पर निर्भर है। रहमत शाह के नाम 970 रन हैं, जबकि शाहिदी 771 रन बना चुके हैं। इनके बाद अनुभव का स्तर तेजी से गिरता है। गेंदबाजी में भी दोनों टीमों के बीच बड़ा अंतर है। अफगानिस्तान की मौजूदा टीम के खिलाड़ियों के नाम कुल 13 टेस्ट विकेट हैं, जबकि भारतीय गेंदबाज कुल 281 विकेट ले चुके हैं। मोहम्मद सिराज 139 विकेट के साथ सबसे आगे हैं जो अफगानिस्तान के मौजूदा खिलाड़ियों के विकेट से करीब दस गुना ज्यादा है। वहीं, 76 विकेट के साथ कुलदीप यादव भारतीय टीम के दूसरे सबसे सफल गेंदबाज हैं। ऐसे में न्यू चंडीगढ़ का यह मुकाबला अफगानिस्तान के पास खुद को साबित करने का मौका होगा। गौरतलब है कि अफगान टीम ने पहला टेस्ट 2018 में भारत के खिलाफ ही खेला था। तब मेहमान टीम बेंगलुरु में सिर्फ दो ही दिन में पारी से हार गई थी। नए फॉर्मेशन के साथ उतरेगी भारतीय टीम भारत इस मुकाबले को सिर्फ जीत-हार के नजरिए से नहीं देख रहा। सहायक कोच रेयान टेन डोश्टे ने संकेत दिए हैं कि टीम दो तेज गेंदबाज, एक स्पिनर और दो ऑलराउंडरों के संयोजन के साथ उतर सकती है। आगामी न्यूजीलैंड दौरे और विश्व टेस्ट चैम्पियनशिप को देखते हुए टीम प्रबंधन नए विकल्पों को परखना चाहता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Akshay’s style in Golmaal 5 is like ‘Bala’

अमित कर्ण. मंबई36 मिनट पहले कॉपी लिंक इस बार फिल्म में अक्षय की एंट्री सबसे बड़ा आकर्षण होगी, वहीं कहानी हॉरर-कॉमेडी और सुपरनैचुरल तत्वों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। रोहित शेट्टी की कॉमेडी फ्रेंचाइज ‘गोलमाल’ की पांचवीं किस्त को लेकर इंडस्ट्री में चर्चाएं तेज हैं। फिल्म अभी बनने की प्रोसेस में है लेकिन प्रोडक्शन और क्रू से जुड़े सूत्रों के हवाले से इसके शेड्यूल, स्टारकास्ट, कहानी और किरदारों से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। दैनिक भास्कर को मिली खास जानकारी के मुताबिक, इस बार फिल्म में अक्षय की एंट्री सबसे बड़ा आकर्षण होगी, वहीं कहानी हॉरर-कॉमेडी और सुपरनैचुरल तत्वों के इर्द-गिर्द बुनी गई है। मुंबई में अगला बड़ा शेड्यूल शुरू होने की तैयारियां चल रही है फिल्म का करीब 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा मुंबई के स्टूडियो और अलग-अलग लोकेशंस पर शूट हो रहा है। एक्टर्स को उनके किरदारों के हिसाब से 10 से 15 दिन के स्लॉट में बुलाया जा रहा है। पहला प्रमुख शेड्यूल ऊटी में पूरा हो चुका है, जहां कुछ गानों और पैचवर्क की शूटिंग की गई। इसके अलावा गोवा भी फिल्म की कहानी का अहम हिस्सा रहेगा। जुलाई से अगला बड़ा शेड्यूल शुरू होगा। अक्षय का किरदार फिल्म में तमिलनाडु के ‘बादशाह’ के रूप में दिखाया जाएगा फिल्म में अक्षय कथित तौर पर मुख्य विलेन या एंटी-हीरो की भूमिका में नजर आ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, उनका किरदार ‘हाउसफुल 4’ के चर्चित ‘बाला’ अवतार से प्रेरित हो सकता है। कहानी में इस किरदार को तमिलनाडु की पृष्ठभूमि वाले ‘बादशाह’ नाम से पेश किए जाने की चर्चा है। अक्षय और अजय देवगन-अरशद वारसी की गैंग के बीच एक बड़ा एक्शन-कॉमेडी सीक्वेंस पहले ही शूट किया जा चुका है, जिसे फिल्म का प्रमुख आकर्षण माना जा रहा है। शरमन जोशी इस बार अजय देवगन नहीं अक्षय की टीम का होंगे हिस्सा पहली ‘गोलमाल’ के बाद फ्रेंचाइज से अलग हुए शरमन जोशी इस बार वापसी कर रहे हैं। वे अपने पुराने किरदार और उसी पहचान के साथ कहानी में लौटेंगे। हालांकि इस बार उनका झुकाव गोपाल की टीम के बजाय अक्षय के किरदार की तरफ दिख सकता है, जिससे कहानी में नया संघर्ष पैदा होगा। सुपरपावर्स वाली बच्ची के रोल के लिए नई चाइल्ड आर्टिस्ट हुई कास्ट गोलमाल अगेन’ की हॉरर-कॉमेडी सफलता के बाद रोहित शेट्टी उसी जॉनर को ही नए अंदाज में आगे बढ़ा रहे हैं। कहानी एक ऐसी बच्ची के इर्द-गिर्द घूमेगी, जिसके पास रहस्यमयी शक्तियां आ जाती हैं। इस रोल के लिए किसी स्टारकिड को न चुनकर मुंबई से बाहर की एक नई बाल कलाकार को चुना गया है। रोहित के कॉप यूनिवर्स से रणवीर सिंह के भी कैमियो की है चर्चा परिणीति चोपड़ा इस बार प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं हैं। तबु की मौजूदगी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। वहीं अजय अपने क्लासिक ‘गोपाल’ लुक में ही नजर आएंगे। फिल्म में रोहित के कॉप यूनिवर्स से रणवीर सिंह के संभावित स्पेशल अपीयरेंस और क्लाइमैक्स में कुछ सरप्राइज एंट्री की भी चर्चाएं हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
दुनियाभर के टॉप लग्जरी ब्रांड्स का ‘टॉप सीक्रेट’ मुंबई में:क्रिस्टियन डियोर, गुची, प्रादा के कपड़ों पर कढ़ाई चाणक्य इंटरनेशनल करती है

क्रिस्टियन डियोर, प्रादा, गुची जैसे दुनिया के 30 से ज्यादा टॉप लग्जरी ब्रांड्स के कपड़ों पर भारत में कढ़ाई होती है। ये नामी ब्रांड्स अपने कपड़ों की खास कढ़ाई मुंबई की ‘चाणक्य इंटरनेशनल’ से करवाते हैं। यहां के कारीगर हाथ की कढ़ाई से 5,000 साल पुरानी विरासत बचाए हुए हैं। चाणक्य इंटरनेशनल की शुरुआत गुजरात के विनोद शाह ने 1984 में की थी। इसका मकसद भारतीय कपड़ों पर सामूहिक रूप से की गई कारीगरी का पूरी दुनिया में पहचान दिलाना था। दुनिया के सबसे महंगे डिजाइनर और रेडीमेड कपड़ों में भारतीय कढ़ाई की मांग सबसे ज्यादा है। इसकी क्वालिटी का कोई मुकाबला नहीं है। पश्चिमी देशों में यह हुनर खत्म हो चुका है। भारत सदियों से दुनिया को कपड़े निर्यात कर रहा है। 16वीं और 17वीं सदी में भी भारत से फ्रांस सहित कई देशों को मलमल, सिल्क और कढ़ाई वाले कपड़े भेजे जाते थे। यही पुरानी विरासत आज भी भारतीय कला को आधुनिक बनाए हुए है। विनोद शाह की बेटी 49 वर्षीय करिश्मा स्वाली पिछले 30 साल से चाणक्य की मैनेजिंग और क्रिएटिव डायरेक्टर हैं। करिश्मा यहां 2,400 कारीगरों का नेतृत्व करती हैं। बचपन में जब वह पहली बार पिता की वर्कशॉप गईं, तो वहां सामूहिक काम देखकर उन्हें अहसास हुआ कि मिलकर जुटने से नतीजा उम्मीद से सुंदर होता है। डियोर फॉल 2023 शो के दौरान चाणक्य इंटरनेशनल को एक बड़ी टेक्सटाइल कलाकृति बनाने की जिम्मेदारी मिली थी। इसमें 1,008 मास्टर्स और महिलाओं ने मिलकर एक विशाल पारंपरिक तोरण बनाया था, जिसका इस्तेमाल घरों में स्वागत के लिए होता है। करिश्मा ने हाल ही में वेनिस बिएनाले और रोम की वेटिकन लाइब्रेरी में चाणक्य की कलाकृतियों का प्रदर्शन किया है। करिश्मा का मानना है कि इस कला की सबसे बड़ी ताकत यह है कि एआई कभी भी हाथ के इस हुनर की जगह नहीं ले सकता है। हुनर – नई पीढ़ी को सिखा रहे कढ़ाई, एआई भी नहीं ले सकती इंसानी कला की जगह करिश्मा ने नई पीढ़ी के लिए ‘चाणक्य स्कूल ऑफ क्राफ्ट’ खोला है। सबसे बड़ी चुनौती करिकुलम बनाना नहीं, बल्कि स्टूडेंट्स का न आना था। करिश्मा ने खुद गरीब बस्तियों में घर-घर जाकर महिलाओं को मुफ्त हुनर सिखाने के लिए मनाया। तब संदेह के बीच सिर्फ 22 महिलाएं अपने पतियों और सास के साथ आईं, जो बाहर बैठकर इंतजार करते थे। आज 10 साल बाद स्कूल में 1,400 महिलाएं हैं और लंबी वेटिंग लिस्ट है।
एलिस पेरी की युवा खिलाड़ियों को सलाह:अलग-अलग तरह के खेल खेलें, बेहतर खिलाड़ी के साथ बेहतर इंसान भी बनेंगे

जब 16 साल की एक लड़की 2007 में ऑस्ट्रेलिया की जर्सी पहनकर डार्विन के एक छोटे से मैदान पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने उतरी थी, तब शायद किसी ने नहीं सोचा होगा कि वही खिलाड़ी एक दिन सदी की सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर चुनी जाएगी। लगभग दो दशक बाद एलिस पेरी के नाम रिकॉर्डों का अंबार है, लेकिन उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि खेल के साथ बना रहा वह रिश्ता है, जिसने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। 35 वर्षीय ऑलराउंडर पेरी कहती हैं कि उनके करियर का सबसे खूबसूरत पहलू यह रहा कि हर साल कुछ नया सीखने और खुद को बेहतर बनाने का मौका मिला। क्रिकेट लगातार बदलता रहा। खासकर टी20 में नए शॉट्स और नई टेक्निक सीखना उनके लिए चुनौती भी था और आनंद भी। उनके अनुसार, खेल में असली संतोष तब मिलता है, जब आप अपनी सीमाओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ाने की कोशिश करते हैं। इंग्लैंड के खिलाफ एशेज टेस्ट भी पेरी की यादों का अहम हिस्सा हैं। खासकर 2017 में नॉर्थ सिडनी ओवल पर लगाया गया दोहरा शतक। वे कहती हैं कि उस पारी की सबसे बड़ी खुशी यह थी कि उनके पिता स्टैंड में बैठकर उसे देख रहे थे। क्रिकेट सिखाने से लेकर हर मैच से पहले बात करने तक, उनके पिता आज भी उनकी सबसे बड़ी ताकत हैं। पेरी अपनी सफलता का सबसे बड़ा श्रेय परिवार को देती हैं। उनके लिए मां प्रेरणा हैं, पिता मार्गदर्शक और बड़ा भाई सबसे अच्छा दोस्त। वहीं, कप्तानों की बात करें तो मेग लैनिंग की शांत नेतृत्व क्षमता और कठिन परिस्थितियों में फैसले लेने की कला ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया। नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को सलाह देते हुए पेरी कहती हैं कि सिर्फ एक खेल तक सीमित न रहें। जितने ज्यादा खेल खेलेंगे और जितने ज्यादा अनुभव हासिल करेंगे, उतना बेहतर खिलाड़ी और इंसान बनेंगे। उनके मुताबिक खेल का असली मकसद आनंद है। अगर मजा खत्म हो गया, तो खेल का सबसे खूबसूरत हिस्सा भी खो जाएगा। 2020 वर्ल्ड कप उनका सबसे यादगार लम्हा महिला क्रिकेट के इतिहास की सबसे यादगार तस्वीरों में से एक 2020 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की है, जब मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में 86 हजार से ज्यादा दर्शक मौजूद थे। दिलचस्प बात यह है कि उस मैच में पेरी चोट के कारण नहीं खेल सकीं, लेकिन फिर भी वह इसे अपने करियर के सबसे खास पलों में गिनती हैं। उनके मुताबिक यह सिर्फ एक मैच नहीं था, बल्कि उन सभी खिलाड़ियों और लोगों के संघर्ष का सम्मान था जिन्होंने वर्षों तक महिला क्रिकेट को आगे बढ़ाने के लिए काम किया।
‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर जारी; 19 जून को आएगी फिल्म:ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है

शाहिद कपूर, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना स्टारर फिल्म ‘कॉकटेल 2’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है। फिल्म का निर्देशन होमी अदजानिया ने किया है, जिन्होंने 2012 में आई कॉकटेल का भी निर्देशन किया था। हालांकि यह फिल्म ‘कॉकटेल’ की सीधी कहानी को आगे नहीं बढ़ाती लेकिन इसकी थीम रिश्तों, दोस्ती और प्रेम के जटिल समीकरणों पर आधारित है। इस बार फिल्म में पूरी तरह नई स्टार कास्ट और नई कहानी देखने को मिलेगी। ट्रेलर में शाहिद, कृति और रश्मिका के किरदारों के बीच बनते-बिगड़ते रिश्तों को दिखाया गया है। कहानी एक ऐसे लव ट्रायंगल के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां दोस्ती और प्यार की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं। फिल्म आधुनिक रिश्तों की उलझनों और भावनात्मक संघर्षों को केंद्र में रखती है। फिल्म की कहानी तरुण जैन और लव रंजन ने लिखी है। इसका संगीत प्रीतम ने तैयार किया है, जबकि गीत अमिताभ भट्टाचार्य ने लिखे हैं। ट्रेलर में लोकप्रिय गीत ‘तुम्ही हो बंधु’ की वापसी भी देखने को मिलती है, जो सैफ अली खान स्टारर पहली फिल्म का चर्चित गाना था। फिल्म का निर्माण दिनेश विजान और लव रंजन ने किया है। शाहिद और कृति इससे पहले ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ में साथ नजर आ चुके हैं, जबकि रश्मिका पहली बार इस जोड़ी के साथ स्क्रीन साझा कर रही हैं। बता दें कि यह फिल्म 19 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी। रिपोर्ट्स के अनुसार शाहिद और रश्मिका की जोड़ी ‘कॉकटेल 2’ के बाद फिर एक रोमांटिक कॉमेडी में नजर आ सकती है। हालांकि इसकी आधिकारिक घोषणा अभी बाकी है।
‘कारामेलो’ कुत्ते पर भिड़े ब्राजील-मैक्सिको:करेंसी और सांस्कृतिक प्रतीक का विवाद; ब्राजील बोला- सांबा ही है हमारी पहचान

दुनिया में देशों के बीच विवाद आमतौर पर सीमा, व्यापार या राजनीति को लेकर होते हैं, लेकिन इन दिनों ब्राजील और मैक्सिको के बीच बहस की वजह एक आवारा कुत्ता बना हुआ है। भूरे रंग के देसी कुत्ते, जो ब्राजील में करोड़ों की संख्या में पाए जाते हैं, वहां ‘कारामेलो’ कहलाते हैं। अब यही कुत्ते दोनों देशों के बीच पहचान की लड़ाई के केंद्र में आ गए हैं। विवाद तब शुरू हुआ जब अप्रैल में मैक्सिको ने ‘पेरो कारामेलो’ को अपनी स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया और इसे सांस्कृतिक प्रतीक का दर्जा दिया। इसके बाद ब्राजील में सोशल मीडिया से लेकर अखबारों में बवाल मच गया, लोग सवाल उठाने लगे कि जिस कुत्ते को दशकों से ब्राजील की पहचान माना जाता है, उस पर मैक्सिको दावा कैसे कर सकता है। रियो डी जेनेरियो की लुसियाना कहती हैं, कारामेलो ब्राजील का चेहरा है। कोई इसे गैर-ब्राजीलियाई कैसे कह सकता है? कारामेलो सिर्फ आवारा जानवर नहीं हैं। वे जनजीवन में इस कदर रचे-बसे हैं कि मीम्स, टी-शर्ट्स, वायरल गानों, झांकियों और फिल्मों में भी जगह बना चुके हैं। पिछले साल नेटफ्लिक्स पर इनके ऊपर ‘कारामेलो’ नाम की फिल्म भी आई थी। इतना ही नहीं, हाल ही में इन्हें ब्राजील की करेंसी पर छापने का प्रस्ताव भी संसद में आया था। मैक्सिको के पशु कल्याण कार्यकर्ता कहते हैं कि वहां भी ऐसे ही कुत्ते बड़ी संख्या में मौजूद हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों का मौसम और इतिहास काफी हद तक समान रहा है। यह केवल एक देश का नहीं, बल्कि पूरे लैटिन अमेरिका का कुत्ता है।’ दिलचस्प बात है कि बहस पहचान की है, लेकिन समस्या कहीं बड़ी है। ब्राजील में आज भी 2 करोड़ से अधिक आवारा कुत्ते हैं और उनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं। लोकप्रिय होने के बावजूद गोद लेने के समय लोग अक्सर विदेशी नस्लों को प्राथमिकता देते हैं। यही वजह है कि दोनों देशों के पशु प्रेमी एक बात पर सहमत हैं-कारामेलो चाहे ब्राजील का हो, मैक्सिको का उसे सिर्फ ‘आवारा’ नहीं, बल्कि एक ऐसे साथी के रूप में देखा जाना चाहिए, जिसे घर और अपनापन दोनों मिल सके। 300 विदेशी प्रजातियों से विकसित है अनोखे नस्ल का यह डॉग वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल के कुत्ते नहीं हैं। एक अध्ययन के मुताबिक इन कुत्तों में करीब 300 नस्लों का मिश्रण है। पुर्तगाली उपनिवेशकों और बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन तथा जापान से आए प्रवासियों के साथ अलग-अलग नस्लों के कुत्ते ब्राजील पहुंचे थे। इन्हीं के मेल से यह अनोखा समूह विकसित हुआ। मिश्रित नस्ल होने के कारण इनमें आनुवंशिक बीमारियों का खतरा भी अपेक्षाकृत कम होता है।
‘सैयारा’ के बाद फिर साथ आएंगे अहान-अनीत:मोहित सूरी अपनी सिग्नेचर स्टाइल के रोमांस और म्यूजिक का कॉम्बिनेशन पेश करेंगे

‘सैयारा’ की सफलता के बाद अहान पांडे और अनीत पड्डा की जोड़ी एक बार फिर बड़े परदे पर साथ नजर आने वाली है। सूत्रों के मुताबिक, यशराज फिल्म्स के बैनर तले निर्देशक मोहित सूरी दोनों कलाकारों को लेकर नई म्यूजिकल लव स्टोरी बनाने जा रहे हैं, जिसकी शूटिंग इसी साल के अंत में शुरू होगी। सूत्रों के अनुसार, यह अनटाइटल्ड फिल्म अक्टूबर-नवंबर 2026 में फ्लोर पर जाएगी। फिल्म का निर्माण यशराज फिल्म्स के बैनर तले होगा और निर्माता आदित्य चोपड़ा इसे बड़े पैमाने पर तैयार कर रहे हैं। ‘सैयारा’ के बाद अहान और अनीत की जोड़ी को दोबारा कास्ट किए जाने को लेकर ट्रेड सर्किल्स में भी काफी चर्चा है। मेकर्स का भी मानना है कि दोनों कलाकारों की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री युवा दर्शकों के बीच मजबूत पकड़ बना चुकी है। लव स्टोरी और म्यूजिक पर रहेगा खास फोकस, बैकग्राउंड स्कोर पर हो रहा काम बताया जा रहा है कि यह फिल्म एक इंटेंस और भावनात्मक प्रेम कहानी होगी, जिसमें मोहित सूरी अपनी सिग्नेचर स्टाइल के रोमांस और म्यूजिक का कॉम्बिनेशन पेश करेंगे। सूत्रों के मुताबिक, फिल्म की म्यूजिक टीम पिछले कई महीनों से एल्बम और बैकग्राउंड स्कोर पर काम कर रही है। मेकर्स का लक्ष्य ऐसा म्यूजिक तैयार करना है जो रिलीज के बाद लंबे समय तक दर्शकों की प्लेलिस्ट का हिस्सा बना रहे। ‘सतरंगा’ टाइटल की खबरें गलत, जल्द ही असल नाम अनाउंस करेंगे मेकर्स फिल्म की घोषणा से पहले ही इसके नाम को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि मोहित की इस नई रोमांटिक फिल्म का नाम ‘सतरंगा’ हो सकता है। हालांकि, प्रोजेक्ट से जुड़े सूत्रों ने इन खबरों को पूरी तरह गलत बताया है। फिल्म का यह नाम मेकर्स द्वारा अभी फाइनल नहीं हुआ है। यशराज फिल्म्स फिलहाल स्क्रिप्ट, स्टारकास्ट और टाइटल से जुड़ी तमाम जानकारियों को सीक्रेट रखे हुए है। जल्द ही एक बड़े अनाउंसमेंट वीडियो या टीजर के जरिए फिल्म के आधिकारिक टाइटल से परदा उठाया जाएगा। अगस्त तक पूरा होगा जफर का प्रोजेक्ट दूसरी तरफ अहान, निर्देशक अली अब्बास जफर की एक बड़े बजट की फिल्म की शूटिंग में इन दिनों बिजी हैं। सूत्रों के अनुसार, इस फिल्म का अधिकांश शूट अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा, ताकि अहान बिना किसी देरी के मोहित की रोमांटिक दुनिया में कदम रख सकें। दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्में एक-दूसरे से बिल्कुल अलग जॉनर की हैं। अली का हाई-ऑक्टेन एक्शन और बड़े कैनवास वाला कमर्शियल सिनेमा है, वहीं दूसरी तरफ मोहित की फिल्म इमोशनल और म्यूजिकल रोमांस बेस्ड है। ट्रेड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन दोनों फिल्मों के जरिए अहान दर्शकों के सामने अपनी वर्सेटिलिटी साबित करने की कोशिश करेंगे। उन्हें रोमांटिक हीरो और कमर्शियल स्टार दोनों इमेज मेनटेन करनी होगी।









