Monday, 13 Apr 2026 | 03:31 AM

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कल धर्मश्री और अंबेडकर वार्ड में बंद रहेगी बिजली

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सागर| बिजली कंपनी मंगलवार 7 अप्रैल को धर्मश्री सबस्टेशन के साथ उससे निकलने वाले 33केवी फीडर धर्मश्री, अंबेडकर वार्ड व बीड़ी अस्पताल फीडर में सप्लाई लाइनों के रखरखाव का काम करेगी। सुबह 7 से 12 बजे तक 5 घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। इससे धर्मश्री, रविशंकर वार्ड, चमेली चौक, बड़ा बाजार, मॉडल स्कूल, केथवारी देवी, ग्यादीन तिराहा, बालाजी मंदिर, मछरयाई, गुलाब बाबा मंदिर, अरिहंत विहार, शीतला माता मंदिर, मंगलगिरी, महावीर नगर क्षेत्र प्रभावित होंगे।

ब्रजेश्वरी हादसे के बाद सख्ती:330 इमारतों में जांच; 60 में फायर सेफ्टी नहीं, 28 में उपकरण खराब

ब्रजेश्वरी हादसे के बाद सख्ती:330 इमारतों में जांच; 60 में फायर सेफ्टी नहीं, 28 में उपकरण खराब

ब्रजेश्वरी एनेक्स हादसे के बाद नगर निगम ने शहर की बहुमंजिला इमारतों की जांच शुरू कर दी है। निगम की टीम 10 दिनों में 330 इमारतों में निरीक्षण के लिए पहुंची, जिसमें 60 इमारतों में फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं मिली, वहीं 28 इमारतों में उपकरण खराब पाए गए। निगम ने सभी 22 जोन के भवन अधिकारियों को एनओसी और फायर सेफ्टी की जांच के निर्देश दिए हैं। निगम अधिकारियों के मुताबिक, शहर में करीब 12 हजार ऐसी इमारतें हैं, जिनकी जांच की जानी है। अभियान पूरे गर्मी सीजन में करीब चार महीने तक चलेगा। जिन इमारतों में फायर सेफ्टी व्यवस्था अधूरी या खराब मिली है, उन्हें 15 दिन में सुधार के निर्देश दिए गए हैं, अन्यथा इमारत को सील किया जाएगा। फायर सेफ्टी: तीन तरह की अनुमति जरूरी शहर में फायर एनओसी अब नगर निगम द्वारा स्थानीय स्तर पर जारी की जाती है। वर्ष 2022 से पहले यह एनओसी भोपाल से जारी होती थी। फायर सेफ्टी के लिए तीन तरह की अनुमति लेना जरूरी है। सबसे पहले फायर प्लान का अप्रूवल लिया जाता है। सिस्टम लगने के बाद फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी किया जाता है। हर तीन साल में एनओसी का रिन्यूअल अनिवार्य है। रिन्यूअल के समय निगम अधिकारी जांच करते हैं। अब यह भी जांच हो रही है कि किन बिल्डिंग मालिकों ने रिन्यू नहीं कराया है। 12000 इमारतों की जांच होगी पूरे गर्मी के सीजन में। जांच में ये देखा फायर एनओसी व एक्सटिंग्विशर और उपकरणों स्थिति। एग्जिट व्यवस्था। हर फ्लोर पर स्मोक डिटेक्टर या फायर अलार्म सिस्टम। मॉक ड्रिल में संस्थानों को दी सीख गर्मी में बढ़ते अग्नि जोखिम को देखते हुए नगर निगम की फायर टीम ने शहर में मॉक ड्रिल अभियान शुरू किया है। कलेक्टर शिवम वर्मा व निगमायुक्त क्षितिज सिंघल के अनुसार, इस दौरान व्यावसायिक, शैक्षणिक व सार्वजनिक संस्थानों में आग से बचाव और सुरक्षित निकासी का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। लोगों को बताया गया कि आग लगने पर तुरंत 101 पर सूचना दें। लोगों को सुरक्षित बाहर निकालें। धुएं से बचने के लिए झुककर निकलें। लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का उपयोग करें। बिजली-गैस कनेक्शन तत्काल बंद करें। संकरी गलियों के लिए खरीदे फायर रोबोट शहर के मध्य क्षेत्र के 60 फीसदी इलाकों में गलियां संकरी होने से फायर ब्रिगेड नहीं पहुंच पाती है। इसके समाधान के लिए निगम ने फायर रोबोट खरीदा है। निगम के पास फायर बुलेट भी है, लेकिन भीषण आग में कारगर नहीं है। 50 बेड से अधिक अस्पतालों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। एनओसी नहीं होने पर कुछ अस्पतालों के पंजीयन रुके हुए हैं।

आम की फसल पर मौसम की मार:30% घट सकती है पैदावार, सप्लाई घटने पर दाम बढ़ने की आशंका…

आम की फसल पर मौसम की मार:30% घट सकती है पैदावार, सप्लाई घटने पर दाम बढ़ने की आशंका...

मार्च-अप्रैल की बेमौसम बारिश और ओलों ने आम के बगीचों को नुकसान पहुंचाया है। ऑन इयर होने के बावजूद इस बार आम की पैदावार 30% तक घट सकती है। आम पर शोध करने वाले वैज्ञानिक डॉ. आरके जायसवाल के मुताबिक मौसम ने फलों के ‘क्रिटिकल फ्लावरिंग पीरियड’ को बिगाड़ दिया है। जायसवाल बताते हैं कि इस समय पेड़ों पर मंजरी (फूल) और शुरुआती फल बनने की प्रक्रिया चलती है, लेकिन नमी और तापमान में उतार-चढ़ाव से फूल झड़ रहे हैं। फंगल संक्रमण और परागण में कमी की समस्या भी बढ़ी है। देशभर में मौसम सामान्य नहीं रहने से दक्षिण भारत से आने वाली अर्ली वैरायटी की आवक सबसे ज्यादा प्रभावित होगी। सप्लाई घटने से आम के दाम 10 से 25% तक बढ़ने की आशंका है। एक्सपर्ट बोले- दक्षिण से आने वाली अर्ली वैरायटी की आवक भी होगी प्रभावित दो से तीन बार बारिश भी फ्लावरिंग के लिए नुकसानदेह… डॉ. जायसवाल के अनुसार बारिश और नमी से एन्थ्रेक्नोज और पाउडरी मिल्ड्यू जैसे रोग बढ़ते हैं। तेज हवा से कच्चे फल गिर जाते हैं, जबकि कम धूप से शुगर फॉर्मेशन घटने से स्वाद प्रभावित होता है। परागण कम होने से फल बनने की दर भी घटती है। उन्होंने बताया कि नर्मदा वैली में हुए रिसर्च में पाया गया कि फ्लावरिंग के दौरान 2-3 बार अनियमित बारिश भी उत्पादन पर सीधा असर डालती है। इस बार बेमौसम बारिश और ओलों से कई इलाकों में फूल और कच्चे फल गिर चुके हैं। अप्रैल अंत से जुलाई तक सीजन, हर महीने बदलती किस्में: शहर में आम का सीजन अप्रैल के आखिर से जुलाई तक रहता है। शुरुआत में तोतापरी, दशहरी और राजापुरी बाजार में आते हैं। मई-जून में लंगड़ा, चौसा और केसर की आवक रहती है, जबकि जून-जुलाई में आम्रपाली, मलिका और बंगनपल्ली मिलते हैं। खराब मौसम: ईटखेड़ी के आम 10 दिन देरी से आएंगे ईटखेड़ी फल अनुसंधान केंद्र में 20-25 वैरायटी के करीब 250-300 पेड़ों पर रिसर्च हो रही है। यहां दशहरी, लंगड़ा, चौसा, आम्रपाली और मलिका जैसी किस्मों पर उत्पादन और रोग-प्रतिरोधक क्षमता का अध्ययन किया जाता है। डॉ. जायसवाल के मुताबिक यहां के आम आमतौर पर मई के आखिरी सप्ताह से बाजार में आते हैं, लेकिन इस बार मौसम खराब होने से करीब 10 दिन की देरी संभव है।

18-year-old Payal defeated world champion Sheetal, Payal Nag, Sheetal Devi

18-year-old Payal defeated world champion Sheetal, Payal Nag, Sheetal Devi

Hindi News Sports 18 year old Payal Defeated World Champion Sheetal, Payal Nag, Sheetal Devi बैंकॉक24 मिनट पहले कॉपी लिंक पायल अपने प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को थामती हैं, दांतों से स्ट्रिंग खींचती हैं और कंधे के दबाव से तीर छोड़ती हैं। वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में भारत ने 7 गोल्ड, 5 सिल्वर, 4 ब्रॉन्ज सहित कुल 16 मेडल जीतकर टेबल में शीर्ष स्थान हासिल किया है। वर्ल्ड नंबर-1 और वर्ल्ड चैम्पियन शीतल देवी उलटफेर का शिकार हो गई हैं। महिला कंपाउंड फाइनल में 18 वर्षीय पायल नाग ने शीतल को 139-136 से हराकर गोल्ड अपने नाम किया। यह एक साल के भीतर शीतल पर पायल की दूसरी जीत है। इससे पहले, उन्होंने जनवरी 2025 में भी शीतल को हराया था। पायल ने करियर में पहली बार सीनियर कैटेगरी में इंटरनेशनल गोल्ड जीता। माउथ पेंटिंग से आर्चरी तक का सफर 2015 में ओडिशा के बलांगीर जिले के एक ईंट भट्टे में बिजली के तार की चपेट में आने से पायल ने अपने दोनों हाथ और दोनों पैर गंवा दिए। उस समय पायल की उम्र सिर्फ 8 साल थी। जब वे अस्पताल से घर लौटीं, तो पड़ोसियों और रिश्तेदारों का रवैया ठीक नहीं था। लोगों ने उनकी मां से कहा, ‘यह बच्ची अब क्या ही करेगी, इसे मार क्यों नहीं देतीं?’ कुछ कर दिखाने का जुनून पायल बताती हैं कि उन कड़वी बातों ने उन्हें तोड़ा नहीं, बल्कि कुछ बनने का जुनून भर दिया। हाथ नहीं थे, तो पायल की मां ने उनके मुंह में पेन पकड़ाकर कहा, ‘अब यही तुम्हारा हाथ है।’ पायल ने मुंह से लिखना सीखा और फिर स्केचिंग शुरू की। आर्चरी से पहले उन्होंने माउथ-पेंटिंग में राज्य स्तर पर गोल्ड जीता था। पायल के जीवन में एक मोड़ तब आया, जब बिना बताए अनाथालय भेज दिया। वहां वे घरवालों के लिए सिसकती रहीं, लेकिन वही अनाथालय उनकी खेल प्रतिभा का गवाह बना। प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को थामती हैं जब वे पहली बार कटरा के स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स पहुंचीं, तो दूसरों को हाथों से धनुष चलाते देख निराश हो गई थीं, लेकिन कोच कुलदीप वेदवान ने उनके साहस को दिशा दी। पायल ने एक अनोखी टेक्निक विकसित की। वे अपने प्रोस्थेटिक पैरों से धनुष को थामती हैं, दांतों से स्ट्रिंग खींचती हैं और कंधे के दबाव से तीर छोड़ती हैं। इसी हैरतअंगेज हुनर को देखकर शीतल ने उन्हें ‘इंडियाज मिरेकल आर्चर’ नाम दिया है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

चार साल बाद अमेरिकी रैपर की वापसी:घूमती पृथ्वी के स्टेज पर हुआ कान्ये का कॉन्सर्ट, अगले महीने दिल्ली में करेंगे परफॉर्म

चार साल बाद अमेरिकी रैपर की वापसी:घूमती पृथ्वी के स्टेज पर हुआ कान्ये का कॉन्सर्ट, अगले महीने दिल्ली में करेंगे परफॉर्म

अमेरिकी रैपर और हिप-हॉप के दिग्गज कलाकार कान्ये वेस्ट ने हाल ही में लॉस एंजिलिस के सोफी स्टेडियम में घूमती हुई पृथ्वी के स्टेज पर परफॉर्म किया। इसे कॉन्सर्ट के इतिहास का सबसे शानदार सेट डिजाइन माना जा रहा है। डार्क लाइट, फॉग और स्पॉट लाइट्स के इस्तेमाल से स्टेज ऐसा दिख रहा था मानो वे अंतरिक्ष में घूमती पृथ्वी पर खड़े हों। एल्युमिनियम फ्रेम से बने स्टेज को केबल और मोटराइज्ड रिगिंग सिस्टम से लटकाया गया था। कान्सर्ट में 70 हजार दर्शक मौजूद थे। टिकट 13 हजार से 65 हजार रुपए तक थे। 23 मई को आ रहे भारत कान्ये ने चार साल बाद स्टेज पर वापसी की है। ‘ये’ नाम से मशहूर कान्ये की पहली पत्नी किम कार्दशियन थीं। कान्ये 23 मई को भारत भी आ रहे हैं और नई दिल्ली में कॉन्सर्ट करेंगे। पहले यह शो 29 मार्च को होना था, लेकिन बाद में इसे 23 मई, 2026 के लिए रिशेड्यूल किया गया। रैपर ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर इस बदलाव की जानकारी देते हुए फैंस के साथ अपडेट शेयर किया था। ईरान और इजराइल के बीच तनाव भारत में इस कॉन्सर्ट के टलने के पीछे ग्लोबल लेवल पर चल रहा युद्ध मुख्य कारण है। अमेरिका और इजराइल के ईरान पर हमला किया था, जिसमें वहां के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है, जिसका असर इंटरनेशनल इवेंट्स और कॉन्सर्ट्स पर भी दिख रहा है।

स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का हाईटेक इलाका ‘साइबराबाद’ अब बड़े बदलाव की दहलीज पर है। अक्सर ट्रैफिक जाम व स्कूल छोड़ते वक्त होने वाली अफरा-तफरी से जूझने वाले इस क्षेत्र के लिए साइबराबाद पुलिस और ‘सोसाइटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल’ (एससीएससी) ने ‘लंदन ट्रांसपोर्ट मॉडल’ से प्रेरित मास्टरप्लान तैयार किया है। नए ‘स्टूडेंट मोबिलिटी सिस्टम’ का मकसद जाम खत्म करना, बच्चों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, माता-पिता का तनाव घटाने के साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के मौके भी पैदा करना भी है। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर डॉ. एम. रमेश बताते हैं, ‘हाईटेक सिटी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा स्कूल जाने वाले बच्चों और उन्हें छोड़ने जाने वाले निजी वाहनों का होता है। क्षेत्र के अधिकांश स्कूल अपनी बस सेवा नहीं देते। इस वजह से पेरेंट्स निजी वाहनों से बच्चों को छोड़ते हैं, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है।’ डॉ. रमेश ने कहा, पुलिस खास एप विकसित कर रही है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अभिभावकों, स्कूलों और बस ऑपरेटरों को एक सूत्र में पिरोएगा। हालांकि इस ‘गेम-चेंजर’ एप का नाम अभी तय होना बाकी है, क्योंकि अधिकारी सभी हितधारकों की राय लेकर प्रभावी नाम रखना चाहते हैं।’ योजना का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा बसों की संख्या में बढ़ोतरी है। वर्तमान में चलने वाली 3 हजार स्कूल बसों के बेड़े को बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस का मानना है कि जब छात्र असुरक्षित निजी वाहनों या माता-पिता की गाड़ियों के बजाय इस साझा बस सेवा इस्तेमाल करेंगे, तो निजी वाहनों का बोझ कम होगा। अनुमान है कि इससे ट्रैफिक जाम में 30% तक की कमी आएगी। डॉ. रमेश बताते हैं, ‘प्रोजेक्ट में सामाजिक भागीदारी पर भी फोकस है। इसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। बसों में स्थायी अटेंडेंट के साथ-साथ ‘होम पिक-अप’ की सुविधा भी होगी, जिससे स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे। बच्चों की सुरक्षा के लिए ड्राइवरों और अटेंडेंट का सख्त पुलिस वेरिफिकेशन और खास ट्रेनिंग जरूरी होगी। एआई से रूटिंग, पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी रहेगी सिस्टम को हाईटेक बनाने के लिए एआई और जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) की मदद ली जा रही है। एआई से विश्लेषण होगा कि किस क्षेत्र के छात्र किस स्कूल में जा रहे हैं। उसी आधार पर स्मार्ट रूटिंग की जाएगी। इससे एक ही क्षेत्र के कई स्कूलों के लिए साझा बस रूट तैयार किए जा सकेंगे। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। सिस्टम की सुरक्षा लंदन के ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ मॉडल पर आधारित होगी। सीसीटीवी और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बसों लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी सीधी कनेक्टिविटी पुलिस कंट्रोल रूम से रहेगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

बड़ा गणपति फ्लायओवर:वर्कऑर्डर के बाद भी यूटिलिटी लाइनें हटाने का काम अब तक शुरू नहीं, एक साल इसी में लग जाएगा

बड़ा गणपति फ्लायओवर:वर्कऑर्डर के बाद भी यूटिलिटी लाइनें हटाने का काम अब तक शुरू नहीं, एक साल इसी में लग जाएगा

बड़ा गणपति चौराहे पर फ्लायओवर बनाने का मामला दो साल से चल रहा है। वर्कऑर्डर के बाद भी अब तक यूटिलिटी लाइनों की शिफ्टिंग का काम ही शुरू नहीं हुआ है। लाइनों की शिफ्टिंग में ही एक साल लग जाएगा। उसके बाद कहीं फ्लायओवर निर्माण शुरू हो सकेगा। बड़ा गणपति के साथ ही चंदन नगर ब्रिज की समीक्षा के लिए शनिवार को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने अफसरों की बैठक ली। मंत्री ने साफ कहा कि काम समयबद्ध तरीके से पूरा होना चाहिए, क्योंकि पुल को सिंहस्थ से पहले तैयार करना है। बड़ा गणपति फ्लायओवर को लेकर अफसरों ने कहा, ड्रेनेज और पानी की यूटिलिटी लाइनें चौराहे से गुजर रही हैं। इनमें एक लाइन अंतिम चौराहे की ओर से आ रही है। इन लाइनों को हटाकर नई लाइनें डालनी होंगी। 8 से 10 दिन में काम शुरू कर देंगे। पूरा काम अंडरग्राउंड तरीके से किया जाएगा। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, निगमायुक्त क्षितिज सिंघल, आईडीए के सीईओ परीक्षित झाड़े, एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर और मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन के अफसर मौजूद रहे। काम के दौरान ट्रैफिक की दिक्कत, वैकल्पिक मार्ग तैयार होंगे अफसरों ने बताया कि बड़ा गणपति चौराहे पर मेट्रो स्टेशन भी प्रस्तावित है। ऐसे में जब यहां ब्रिज और मेट्रो दोनों का काम चलेगा तो यातायात का दबाव काफी बढ़ेगा। इस पर पुलिस विभाग से वैकल्पिक ट्रैफिक प्लान तैयार करने को कहा गया। उन्होंने कहा कि कहां से ज्यादा ट्रैफिक इस रास्ते पर आता है तो बताया गया कि रामबाग और किला मैदान की तरफ से आने वाला भारी यातायात इसी मार्ग से गुजरता है। इसके लिए जिंसी और कंडीलपुरा को वैकल्पिक मार्ग के रूप में देखा गया, लेकिन दोनों ही सड़कें अभी संकरी हैं। इस पर विजयवर्गीय ने निर्देश दिए कि पहले इन मार्गों को दुरुस्त किया जाए, ताकि निर्माण के दौरान शहर को ट्रैफिक परेशानी न झेलनी पड़े। सुस्त एजेंसियों पर सख्ती काम में देरी करने वाली निर्माण एजेंसियों का मुद्दा भी उठा। एमआईसी सदस्य राजेंद्र राठौर ने कहा सड़कें बनाने वाली एजेंसियां समय पर काम नहीं कर रही हैं। कई बार जवाब मिलता है कि लेबर नहीं मिल रही। निगमायुक्त क्षितिज सिंघल ने भी माना कि कई बार निर्देश देने के बावजूद एजेंसियां समय सीमा में काम नहीं कर रही हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि सोमवार को सभी एजेंसियों को बुलाकर स्पष्ट बात करें और जवाबदेही तय करें। 1 एजेंसी के पास कई काम बैठक में बड़ा गणपति पर यूटिलिटी लाइन शिफ्टिंग का काम लेने वाली एजेंसी पर भी सवाल उठे। बैठक में कहा गया कि वरुण जैन की कंपनी ने इस काम के साथ कई अन्य प्रोजेक्ट भी ले रखे हैं, ऐसे में एक ही एजेंसी इतने काम समय पर पूरे नहीं कर पाएगी। एजेंसी की ओर से बैठक में मौजूद प्रतिनिधि ने दावा किया कि सभी काम तय समय सीमा में पूरे किए जाएंगे। चंदन नगर फ्लायओवर : 8 दिन में जारी होगा टेंडर चंदन नगर फ्लायओवर प्रोजेक्ट पर भी चर्चा हुई। आईडीए की ओर से बताया गया कि इस प्रोजेक्ट के टेंडर 8 दिन में जारी कर दिए जाएंगे। आईडीए सीईओ ने कहा कि अगले डेढ़ महीने में वर्क ऑर्डर और एक साल में निर्माण पूरा करने का लक्ष्य है। हालांकि यहां भी निगम की ड्रेनेज और पानी की लाइनें निर्माण में बाधा बन रही हैं। बैठक में चंदन नगर से नगीन नगर तक जाने वाली सड़क पर भी चर्चा हुई।

भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चे:देशभर में 14 साल तक के 45 हजार भिखारी; राजस्थान दूसरे नंबर पर

भिक्षावृत्ति में लिप्त बच्चे:देशभर में 14 साल तक के 45 हजार भिखारी; राजस्थान दूसरे नंबर पर

केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की मानें तो देशभर में 14 साल से कम उम्र वाले सिर्फ 45 हजार 296 बच्चे ही ऐसे हैं, जो भिक्षावृत्ति में लिप्त पाए गए। उसमें भी उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 10 हजार बच्चे भीख मांगते पाए गए, जबकि दूसरे नंबर पर राजस्थान है, जहां इन बच्चों की संख्या सात हजार से अधिक है। यह जानकारी 2011 की जनगणना के आधार पर दी गई है। राज्य सभा में एक अतारांकित सवाल के जवाब में यह जानकारी दी गई है। राज्यमंत्री बीएल वर्मा ने बताया कि आंकड़े भारत के महारजिस्ट्रार की वेबसाइट की सूचना पर आधारित है। ऐसे बच्चों के पुनर्वास की योजना 23 अक्टूबर, 2023 में शुरू की गई थी और तब से अब तक 2653 बच्चों का पुनर्वास किया गया है। इनमें 1507 बच्चों को उनके माता-पिता अथवा परिवारों से मिलवाया गया। वहीं, 305 बच्चों को आंगनबाड़ी केंद्रों से जोड़ा गया। 206 बच्चों को बाल कल्याण समिति को सौंपा गया है। साथ ही 625 बच्चों को स्कूलों में नामांकन की सुविधा प्रदान की गई है। सरकार ने कहा कि विभाग पहले से ही भिक्षावृत्ति के कार्य में लिप्त व्यक्तियों के व्यापक पुनर्वास के लिए योजना चला रहा है। जिसमें बच्चों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। ऐसे में इस समय नए कानून अथवा योजना चलाने की आवश्यकता नहीं है। दो केंद्रशासित प्रदेशों में एक भी भिखारी नहीं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि केंद्र शासित प्रदेश दादरा-नगर हवेली और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में एक भी बच्चा भिक्षावृत्ति में लिप्त नहीं पाया गया। वहीं, लक्ष्यद्वीप और सिक्किम में एक-एक, मिजोरम में छह, दमन और दीव में आठ और पुदुचेरी में नौ बच्चे ऐसे कार्यों में लिप्त पाए गए।

कचरे में ​मिले स्पीकर ने जेन-जी भाईयों को बनाया करोड़प​ति:3.5 लाख रुपए में ट्रक खरीदा, घर-ऑफिस से कचरा उठाया, रीसेल कर बढ़ाया बिजनेस

कचरे में ​मिले स्पीकर ने जेन-जी भाईयों को बनाया करोड़प​ति:3.5 लाख रुपए में ट्रक खरीदा, घर-ऑफिस से कचरा उठाया, रीसेल कर बढ़ाया बिजनेस

कचरे के ढेर से मिला स्पीकर दो जेन-जी भाइयों की जिंदगी बदल देगा, यह किसी ने नहीं सोचा होगा। अमेरिका के बोस्टन के पास स्थित नॉरवुड शहर के रहने वाले किर्क और जैकब मैकिन्नी ने इसी छोटे से अनुभव से प्रेरित होकर 2021 में ‘जंक टीन्स’ नाम का स्टार्टअप शुरू किया, जिसकी सालाना कमाई अब 28 करोड़ रुपए से ज्यादा है। दोनों भाइयों ने 3.5 लाख रुपए में पुराना पिकअप ट्रक खरीदकर इस बिजनेस को शुरू किया था। अब उनके पास पांच डंप ट्रक हैं और करीब 10-15 कर्मचारी उनके यहां काम करते हैं, जिनमें ज्यादातर छात्र हैं। इस सफल बिजनेस की शुरुआत भी एक छोटे से अनुभव से हुई। बड़ा भाई किर्क मैकिन्नी साइकिल से स्थानीय डंप यार्ड जाते थे, एक दिन उन्हें वहां एक वर्किंग कंडीशन में स्पीकर मिला। इसके बाद वे लगातार वहां जाने लगे और इस्तेमाल लायक सामान इकट्ठा कर सोशल मीडिया पर बेचने लगे। इसी दौरान उन्हें ऐसे लोग भी मिले, जो अपने घरों से कबाड़ हटवाने के लिए पैसे देने को तैयार थे। इसके बाद दोनों भाइयों ने अपनी बचत से पिकअप ट्रक खरीदा और घर-घर जाकर कबाड़ उठाने का काम शुरू किया। उन्होंने तकनीक का उपयोग करके बुकिंग और लॉजिस्टिक्स को इतना आसान बना दिया कि ग्राहकों के लिए कचरा हटवाना एक क्लिक का काम रह गया। शुरुआत में वे लैंडस्केपिंग और मूविंग जैसे काम करते थे, लेकिन धीरे-धीरे जंक रिमूवल (बेकार सामान उठाना) उनका सबसे सफल काम बन गया। अब जैकब मैकिन्नी कहते हैं, ‘शुरुआत में हमें नहीं पता था कि हम बिजनेस बना रहे हैं, लेकिन यही काम सबसे मजेदार और सबसे ज्यादा कमाई वाला साबित हुआ।’ आज “जंक टीन्स’ एक बड़ा जंक रिमूवल और रीसेलिंग बिजनेस बन चुका है। अब वे हर काम के लिए औसतन 40,000 से 50,000 हजार चार्ज करते हैं। ‘जंक रिमूवल’ इंडस्ट्री में आधुनिक टेक्नोलॉजी के माध्यम से आ रहा बड़ा बदलाव इस बिजनेस की खूबी कचरे से कमाई वाला मॉडल है। कबाड़ हटाने के बदले वे फीस तो लेते ही हैं, साथ ही हटाए गए सामान में से रिसाइकिल करने योग्य वस्तुओं को बेचकर अतिरिक्त कमाई भी करते हैं। दोनों भाई ट्रक में आए सामान को सीधे डंप करने के बजाय पहले उसे छांटते है। वे पुराने स्पीकर, फर्नीचर, साइकिल, फ्रिज और ऐसी मशीनें ढूंढते, जिन्हें थोड़ा साफ या ठीक करके दोबारा इस्तेमाल किया जा सके। इसके बाद वे ऑनलाइन साइट्स पर बेच देते। उनका लक्ष्य अब इस स्टार्टअप को पूरे देश में फैलाना है और ‘जंक रिमूवल’ इंडस्ट्री में तकनीक के माध्यम से बड़े बदलाव लाना है।

हरियाणवी-मलयालम जैसी भाषाओं के रैप भी वायरल:धुरंधर में मेघालय की सिंगर रेबल के तीन गाने हिट; अब नॉर्थईस्ट-केरल के सिंगर भी वायरल

हरियाणवी-मलयालम जैसी भाषाओं के रैप भी वायरल:धुरंधर में मेघालय की सिंगर रेबल के तीन गाने हिट; अब नॉर्थईस्ट-केरल के सिंगर भी वायरल

धुरंधर की सफलता के पीछे उसका साउंडट्रैक भी है। मेघालय की 22 वर्षीय सिंगर रेबल (डायाफी लामारे) धुरंधर में अपने गानों से वायरल हुई हैं। रेबल ने नाल नचना, रन डाउन द सिटी और आरी आरी जैसे हिट ट्रैक्स फिल्म को दिए। ये एक नया ट्रेंड है, तमिल हो या मराठी, अब हर राज्य के अपने रैप वायरल हो रहे हैं। श्रेयस सागवेकर आज मराठी रैप का बड़ा चेहरा हैं। उनके मराठी ट्रैक ‘तांबडी चामडी’ को 5 करोड़ से अधिक यूट्यूब व्यूज मिले। इसी तरह मलयालम रैप भी केरल में पॉपुलर है। रैपर डैब्जी (मोहम्मद फासिल) का ‘इलूमिनाटी’ इसका उदाहरण है। यूट्यूब पर इसके 41 करोड़ व्यूज हैं। कश्मीर में ‘कोशूर रैप’ है, जिसमें वहां की जिंदगी को रैप के जरिए सुनाते हैं। रेबल: 24 वर्षीय रैपर; धुरंधर में इनके गाने वायरल 24 वर्षीय रेबल मेघालय में जन्मी हैं। उन्हें 10 की उम्र से म्यूजिक का शौक है। बेंगलुरु से इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने पारंपरिक करियर की बजाय म्यूजिक को ही चुना। हाल ही में रेबल ने मलयालम फिल्म लोकह चैप्टर 1 चंद्रा में भी काम किया है। धुरंधर में 3 गाने गाए हैं। ढांडा न्योलीवाला – पहले जैवलिन थ्रोअर थे ढांडा न्योलीवाला 1998 में हरियाणा के हिसार जिले के न्योली कलां गांव में जन्मे। एक सरकारी स्कूल टीचर के बेटे हैं। म्यूजिक से पहले वह राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रोअर रह चुके हैं। सितंबर 2022 में ‘अप टु यू’से उन्हें सक्सेस मिली। अब हरियाणवी रैप को पॉपुलर बना रहे। पाल डब्बा – पहले डांसर थे, अब तमिल के बड़े रैपर इनका असली नाम अनीश है। उनका स्टेज नाम पाल डब्बा है, तमिल में जिसका मतलब ‘दूध पाउडर का डिब्बा’ होता है। उन्होंने अपनी जड़ों और नॉर्थ चेन्नई की संस्कृति को सम्मान देने के लिए चुना। रैपर बनने से पहले वे एक डांसर थे। स्पॉटिफाई पर 54 लाख मंथली लिसनर्स हैं। हनुमानकाइंड – कॉर्पोरेट जॉब छोड़ रैपर बने 2024 में ‘बिग डॉग्स’ जैसे वायरल हिट से ग्लोबल पहचान हासिल की, जो बिलबोर्ड हॉट 100 में 23वें स्थान तक पहुंचा। म्यूजिक इंडस्ट्री में आने से पहले वह 2014 में गोल्डमैन सैक में काम कर चुके हैं। कोरियन वेब सीरीज स्किव्ड गेम में भी इनका ट्रैक लिया गया था। असर – रीजनल रैप में 118% तक की उछाल- केन रिसर्च की रिपोर्ट के मुताबिक 2023 में भारत में कुल म्यूजिक कंजम्पशन का 34% हिस्सा रीजनल म्यूजिक का रहा। वहीं स्पॉटिफाई के डेटा के अनुसार हरियाणवी और मलयालम जैसी भाषाओं में रीजनल हिप-हॉप में 500 से 600% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।