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Players of other sports are becoming fans of chess, Erling Haaland

Players of other sports are becoming fans of chess, Erling Haaland

Hindi News Sports Players Of Other Sports Are Becoming Fans Of Chess, Erling Haaland लंदन7 घंटे पहले कॉपी लिंक मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर अर्लिंग हालेंड ने हाल ही में एक ग्लोबल चेस टूर में निवेश किया है। अर्लिंग हालेंड (फुटबॉल), विक्टर वेम्बान्यामा (बास्केटबॉल) और कार्लोस अल्कारेज (टेनिस) जैसे दुनिया के शीर्ष एथलीट्स में एक बात समान है- शतरंज के प्रति उनका गहरा जुनून। शतरंज का खेल भले ही फुटबॉल के आक्रामक खेल से बिल्कुल अलग हो, लेकिन रणनीति, योजना और समस्या-समाधान जैसे इसके गुण खिलाड़ियों को अपनी ओर खींच रहे हैं। हाल ही में मैनचेस्टर सिटी के स्ट्राइकर हालेंड ने एक ग्लोबल चेस टूर में निवेश किया है। उनका मानना है कि यह बोर्ड गेम फुटबॉल की तरह ही है, जो दिमाग को तेज करता है और भविष्य की रणनीति बनाने में मदद करता है। शतरंज का क्रेज कई खेलों के दिग्गजों में देखा जा रहा है। इंग्लैंड के डिफेंडर ट्रेंट अलेक्जेंडर-अर्नोल्ड ने पांच बार के वर्ल्ड चैम्पियन मैग्नस कार्लसन के खिलाफ मैच खेला था। वहीं, एबेरेची एजे ने चेस.कॉम का चार दिवसीय एमेच्योर टूर्नामेंट अपने नाम किया और करीब 18 लाख रुपए जीते। लिवरपूल के स्टार मोहम्मद सालाह तो ऑनलाइन ‘ब्लिट्ज चेस’ (तेज गति वाला शतरंज) के इतने आदी हैं कि वे रोज गुमनाम प्रोफाइल से खेलते हैं। वेम्बान्यामा ने न्यूयॉर्क के एक पार्क में फैंस को शतरंज खेलने की चुनौती देकर सुर्खियां बटोरी थीं। इंग्लैंड की रग्बी टीम बाकायदा शतरंज की प्रतियोगिताएं आयोजित करती थी। शीर्ष स्तर के खेलों में शारीरिक क्षमता के अलावा मानसिक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है। इसमें शतरंज बहुत मददगार साबित होता है। वर्ल्ड नंबर-1 टेनिस प्लेयर कार्लोस अल्कारेज कहते हैं, ‘आपको यह अनुमान लगाना होता है कि विरोधी खिलाड़ी गेंद को कहां भेजेगा। आपको समय से पहले आगे बढ़ना होता है। शतरंज इसमें बहुत मदद करता है।’ शतरंज और फुटबॉल में काफी समानताएं हैं फुटबॉल मैनेजर क्विके सेटिन के अनुसार, शतरंज और फुटबॉल में काफी समानताएं हैं। दोनों में मोहरे (या खिलाड़ी) आक्रमण और बचाव के लिए जुड़े होते हैं और बीच के हिस्से (सेंटर) पर दबदबा बनाना सबसे अहम होता है। ब्रिटिश चेस प्लेयर मैल्कम पेन का मानना है कि शतरंज खिलाड़ियों को खेल के तनाव से ‘स्विच ऑफ’ करने का मौका देता है। इसमें शांत रहना होता है; अगर भावनाएं हावी हुईं, तो हार तय है। बोरिस बेकर जब नोवाक जोकोविच के कोच थे, तो रणनीति सुधारने के लिए साथ में शतरंज खेला करते थे। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

आयरलैंड में फोन-फ्री बचपन:‘ग्रेस्टोन्स’ कस्बे में पेरेंट्स और शिक्षकों ने लागू किया ‘नो फोन कोड’, 12 साल से पहले बच्चों को मोबाइल नहीं

आयरलैंड में फोन-फ्री बचपन:‘ग्रेस्टोन्स’ कस्बे में पेरेंट्स और शिक्षकों ने लागू किया ‘नो फोन कोड’, 12 साल से पहले बच्चों को मोबाइल नहीं

Hindi News International In The Town Of Greystones, Parents And Teachers Have Implemented A ‘no Phone Code’, Prohibiting Children From Having Mobile Phones Under The Age Of 12. द न्यू यॉर्क टाइम्स. न्यूयॉर्क3 घंटे पहले कॉपी लिंक स्मार्टफोन के ‘डिजिटल चक्रव्यूह’ से बचपन को बचाने के लिए पूरा कस्बा ढाल बन गया है। यूरोपीय देश आयरलैंड के ‘ग्रेस्टोन्स’ कस्बे ने दुनिया को वह रास्ता दिखाया है, जिसकी तलाश आज हर परेशान माता-पिता को है। इस कस्बे के 22 हजार लोगों ने मिलकर तय किया है कि वे अपने बच्चों का बचपन ‘स्मार्टफोन’ की भेंट नहीं चढ़ने देंगे। ‘इट टेक्स ए विलेज’ नाम के इस आंदोलन ने तकनीक के खिलाफ एक सामूहिक दीवार खड़ी कर दी है। फोन की जगह बच्चों के लिए ‘यूथ कैफे’ और खेल गतिविधियां बढ़ाई गई हैं। ‘फोन-फ्री बीच पार्टी’ जैसे आयोजन शुरू हुए हैं। ग्रेस्टोन्स की इस पहल से प्रेरित होकर अब आयरलैंड के अन्य शहरों कॉर्क और डबलिन ने भी ‘नो स्मार्टफोन कोड’ को अपनाया है। देश की सीमा के बाहर ब्रिटेन और स्पेन के बार्सिलोना में भी पेरेंट्स के समूहों ने ऐसी ही पहल शुरू की है। कोविड लॉकडाउन के बाद जब ग्रेस्टोन्स में स्कूल खुले, तो मंजर बदल चुका था। सेंट पैट्रिक स्कूल की प्रिंसिपल रैचल हार्पर ने देखा कि बच्चे क्लास में ध्यान नहीं लगा पा रहे थे। वे रातभर आने वाले मैसेज से परेशान थे। उनकी नींद अधूरी थी और कुछ बच्चे तो ‘कैलोरी काउंटिंग एप्स’ के कारण ‘ईटिंग डिसऑर्डर’ का शिकार हो रहे थे। 12 साल के बॉडी मैंगन गिसलर इस बदलाव के पोस्टर बॉय हैं। वे कहते हैं, ‘मुझे डर है कि अगर फोन की लत लग गई, तो मैं खेल नहीं पाऊंगा। मैं स्वस्थ रहना चाहता हूं।’ ऐसे कई बच्चों में अब एक नई ‘अलर्टनेस’ दिख रही है। वे सुबह स्कूल में ज्यादा सक्रिय रहते हैं और अब वर्चुअल चैट के बजाय आमने-सामने बैठकर खेलने के प्लान बनाते हैं। प्रिंसिपल रैचल हार्पर के मुताबिक, 8 प्राइमरी स्कूलों के 70% माता-पिता ने स्वैच्छिक रूप से ‘नो स्मार्टफोन’ कोड पर साइन किए हैं। उन्होंने कहा कि ‘हम बच्चों को मिडिल स्कूल से पहले मोबाइल फोन नहीं देंगे। क्योंकि हम बच्चों को डिजिटल भविष्य के लिए तैयार करना चाहते हैं, उसमें डुबाना नहीं।’ जहां टेक कंपनियों के हेडक्वार्टर, वहीं ‘नो स्मार्टफोन’ की मुहिम आयरलैंड में गूगल, मेटा और एप्पल जैसी दिग्गज कंपनियों के यूरोपीय मुख्यालय हैं, जहां औसतन 9 साल की उम्र में ही बच्चों को फोन मिल जाता है। ऐसे में ग्रेस्टोन्स की यह पहल ‘चिराग तले अंधेरे’ को दूर करने जैसी है। देश के डिप्टी पीएम साइमन हैरिस, जो खुद इस कस्बे के निवासी हैं, इस मुहिम के सबसे बड़े समर्थक बनकर उभरे हैं। ग्रेस्टोन्स के लोगों को खुशी है कि अब यहां के बच्चे मैदानों में दुनिया ढूंढ रहे हैं। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Bearded Ram in Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple in Odisha, Rama Navami, Nayagarh district.

Bearded Ram in Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple in Odisha, Rama Navami, Nayagarh district.

Hindi News National Bearded Ram In Odisha, Sri Raghunath Jew Temple, Ram Temple In Odisha, Rama Navami, Nayagarh District. प्रियंका साहू. नयागढ़ (ओडिशा)1 घंटे पहले कॉपी लिंक प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर में भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। ओडिशा के नयागढ़ जिले में प्रसिद्ध रघुनाथ जीऊ मंदिर है। यहां भगवान राम और लक्ष्मण के मुख पर दाढ़ी और मूंछ हैं। दोनों के सिर पर जटा भी है। माता सीता का चेहरा सीधा न होकर थोड़ा सा टेढ़ा है क्योंकि वे किसी और को न देखकर अपने स्वामी श्रीराम के चरणों को देख रही हैं। करीब 263 साल पहले मंदिर निर्माण के समय भगवान राम, लक्ष्मण और माता सीता तीनों की मूर्तियां नीम की लकड़ी से बनाकर स्थापित की गई थीं। तब से आज तक ये मूर्तियां वैसी की वैसी ही हैं। ये अनूठी मूर्तियां न पानी से खराब होती है, न ही किसी शृंगार से। देश में ऐसा अदभुत और अनोखा मंदिर संभवत: और कहीं नहीं है। वरिष्ठ पुजारी रंजन महापात्र करीब 40 साल से यहां पूजा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के 9 दिन तक भगवान अलग-अलग भेष धारण करते हैं। इनमें वनवासी, चित्रकूट, ताड़का वध, अहिल्या उद्धार और धनुर्धारी भेष आदि प्रमुख हैं। नौंवे दिन रामनवमी पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन प्रभु सोने के आभूषणों से सज्जित होते हैं। भगवान को रामनवमी समेत साल में 5 बार स्वर्ण शृंगार कराया जाता है। पूजक परिषद के अध्यक्ष प्रफुल्ल महापात्र ने बताया कि यहां पहले अत्रि मुनि का आश्रम था। जब राम, लक्ष्मण और माता सीता वनवास के दौरान यहां रुके थे, तब उनकी वेशभूषा से अत्रि मुनि प्रभावित हुए थे। वे भगवान राम से बोले, “आपका ये वनवासी रूप चकित कर दे रहा है। कृपा कर यहां से न जाएं।’ तब भगवान राम बोले, “ऋषिवर आप 3 शालिग्राम रखिए। जब भी मेरा ये रूप आपको याद आए, तब आप ये शालिग्राम को देख लेना। नयागढ़ जिले में स्थित रघुनाथ जीऊ मंदिर। शिखर पर 15-15 किलो के तीन सुनहरे कलश यह मंदिर कलिंग वास्तुकला शैली में बना है और तीन हिस्सों में बंटा है: भद्र मंडप, नाट मंडप और दर्शन मंडप। तीनों मंडप के शिखर पर 15-15 किलो के सोने के कलश स्थापित हैं। इसीलिए ये स्वर्ण कलश क्षेत्र के नाम से भी जाना जाता है। इस मंदिर के ऊपर पहले सोने के कलश रखे गए हैं। इनके ऊपर चक्र स्थापित है। ऐसा अन्य किसी मंदिर में नहीं है। यह भुवनेश्वर से 112 किमी दूर स्थित है। मंदिर में सुबह से शाम तक विभिन्न तरह की पूजा होती है। सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक कई तरह के प्रसाद का भी भगवान को भोग लगाया जाता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों को डिग्री और कॅरियर पर दिया मार्गदर्शन

संवाद कार्यक्रम में विद्यार्थियों को डिग्री और कॅरियर पर दिया मार्गदर्शन

भास्कर संवाददाता | बड़वानी शहर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस एसबीएन शासकीय पीजी कॉलेज में स्वामी विवेकानंद कॅरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने एमए प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के लिए डिग्री और कॅरियर विषय पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें प्राचार्य डॉ. वीणा सत्य ने विद्यार्थियों से कहा कॉलेज की पढ़ाई को पूरी गंभीरता के साथ पूर्ण करना चाहिए। कॉलेज में व्यतीत किया गया समय बहुमूल्य होता है, जिसे क्लास रूम और लाइब्रेरी में लगाना चाहिए। उन्होंने कहा विद्यार्थियों के लिए किताबों से अच्छा मित्र कोई नहीं होता और नियमित अध्ययन से ही व्यक्तित्व का विकास संभव है। कॅरियर काउंसलर डॉ. मधुसूदन चौबे ने कहा डिग्री का अपना महत्व है, क्योंकि यह कॅरियर कई द्वार खोलती है, लेकिन केवल डिग्री प्राप्त कर लेना पर्याप्त नहीं है। डिग्री के साथ उस स्तर का ज्ञान होना जरूरी है, जिस स्तर की डिग्री अर्जित की जा रही है। उदाहरण देकर कहा यदि कोई छात्र इतिहास में एमए करता है तो उसमें इतिहास का गहन और उच्च स्तर का ज्ञान होना चाहिए। डिग्री सिर्फ प्रमाण पत्र नहीं, बल्कि ज्ञान का प्रमाण होती है। शॉर्टकट से पढ़ाई करने की प्रवृत्ति से बचने की सलाह देते हुए कहा गाइड, कुंजी या प्रश्नोत्तर पढ़कर परीक्षा पास की जा सकती है लेकिन ज्ञानवान नहीं बना जा सकता। आज का युग कौशल का युग है, इसलिए विद्यार्थियों को अपनी डिग्री के अनुसार स्किल विकसित करनी चाहिए। उन्होंने सोशल मीडिया व अनावश्यक गतिविधियों से दूर रहकर अध्ययन में समय देने पर जोर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में शिक्षक संघ ने पुनर्विचार याचिका दायर की

सुप्रीम कोर्ट में शिक्षक संघ ने पुनर्विचार याचिका दायर की

भास्कर संवाददाता| राजगढ़ शिक्षकों के हित में राज्य शिक्षक संघ ने पात्रता परीक्षा से जुड़े आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की है। संघ का कहना है कि 25 से 30 साल सेवा दे चुके शिक्षकों के लिए इस तरह की परीक्षा अनिवार्य करना मानसिक प्रताड़ना जैसा है। इसे लेकर शिक्षकों में लंबे समय से नाराजगी बनी हुई थी। राज्य शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष जगदीश यादव ने बताया कि शिक्षकों की परिस्थितियों को देखते हुए जिला व प्रदेश स्तर पर बैठकें की गईं। इसके बाद शिक्षकों के के इस मुद्दे को लेकर 25 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ताओं से चर्चा की गई और पुनर्विचार याचिका दायर की गई। शिक्षकों से कहा- किसी के बहकावे में न आएं: जगदीश यादव ने कहा कि अब शिक्षकों को व्यक्तिगत रूप से न्यायालय जाने की जरूरत नहीं है। राज्य शिक्षक संघ पूरे मामले में कानूनी लड़ाई लड़ रहा है। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे किसी भी तरह के भ्रम या बहकावे में न आएं और न्यायालय पर भरोसा रखें।

मेंटनेंस घोटाले को किया गया शामिल, टीवी खरीदी को छोड़ा:स्कूलों के लिए 3 साल में आई राशि की जांच करेंगे कलेक्टर

मेंटनेंस घोटाले को किया गया शामिल, टीवी खरीदी को छोड़ा:स्कूलों के लिए 3 साल में आई राशि की जांच करेंगे कलेक्टर

मप्र के स्कूल शिक्षा विभाग में कंप्यूटर खरीदी और मेंटनेंस के नाम पर बड़ा घोटाला हुआ है। विभागीय मंत्री ने इस मामले को लेकर नाराजगी जाहिर की है। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण शिल्पा गुप्ता ने एक पत्र सभी जिलों के कलेक्टर को लिखा है कि वे बीते 3 साल में हुए कामों की जांच करके प्रति​वेदन भेजें। इसमें तीन साल के भीतर जो भी बजट आवंटित हुआ है और उसमें जो निर्माण कार्य हुए हैं, उनकी पूरी जांच करना है। हालांकि इसमें इंटरएक्टिव पैनल के मामले को शामिल नहीं किया है, जबकि इसको लेकर भी कई शिकायतें विभागीय मंत्री और अफसरों को हो चुकी हैं। जांच के लिए कोई समय सीमा तय नहीं की गई है। उधर, जिलों में इस पत्र के बाद कलेक्टरों की तरफ से जांच कमेटी बनाई जा रही है, जो कि कलेक्टरों की निगरानी में ही पूरे मामले की जांच करेगी। हालांकि इस पूरे मामले में मंत्री उदय प्रताप सिंह के निर्देश के बाद तीन अफसरों को हटाने की कार्रवाई कर दी गई है। इनमें डीएस कुशवाह संचालक लोक शिक्षण को सीमेट (राज्य शैक्षिक प्रबंधन प्रशिक्षण संस्थान) का संचालक बनाकर भेजा गया है। वहीं प्रमोद कुमार सिंह सीमेट को लोक शिक्षण में संचालक बनाया गया है। साथ ही विभाग में उप सचिव बनाया गया है। इसके अलावा पीके सिंह बघेल जो कि उप संचालक लोक शिक्षण थे को राज्य शिक्षा केंद्र में पदस्थ किया गया है। यह मामले हैं जांच की जद में मप्र में तीन साल में स्कूलों में जमकर मेंटनेंस काम हुआ है। बीते साल ही करीब 149 करोड़ रुपए स्कूलों में मेंटनेंस के लिए भेजे गए थे, लेकिन इसके लिए भोपाल की ही फर्म को ​काम दे दिया गया। जिला शिक्षा अधिकारी को बायपास करके बीईओ और प्राचार्य स्तर पर काम कराया गया। रीवा, मैहर और सतना जिले में बिना काम के भुगतान करने का मामला सामने आया। जांच में आरोप सही पाए गए। इसके बाद यह मामला विधानसभा में उठाया गया और मंत्री ने इसमें जांच के निर्देश दिए। IAS अफसर की निगरानी वाली कमेटी अभी होल्ड विभागीय मंत्री ने आईएएएस अफसर की निगरानी में कमेटी बनाकर जांच के आदेश दिए थे, लेकिन फिलहाल इस समिति को बनाने का मामला होल्ड हो गया है। कमाल की बात यह है ​कि इस पूरे मामले में वित्तीय स्वीकृति देने वाले ​लोक शिक्षण संचालनालय के वित्त अधिकारी राजेश मोर्य व उन फर्म से सवाल-जवाब नहीं हुए, जिनके ऊपर बिना काम किए भुगतान लेने के आरोप हैं। विभागीय अफसरों ने बताया कि कलेक्टरों की रिपोर्ट आने के बाद ही मामले में कुछ आगे होगा।

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने हार के बाद दिया इस्तीफा:पर्यावरण की चिंता के चलते छोड़ दिया था मेकअप, ट्रम्प को भी चुनौती दे चुकीं मेटे

डेनमार्क की प्रधानमंत्री ने हार के बाद दिया इस्तीफा:पर्यावरण की चिंता के चलते छोड़ दिया था मेकअप, ट्रम्प को भी चुनौती दे चुकीं मेटे

डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन (48) ने आम चुनाव में हार के बाद इस्तीफा दे दिया है। बुधवार को मतगणना में उनकी सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी को महज 38 सीटें मिलीं। हालांकि, अभी वहां किसी भी पार्टी को बहुमत हासिल नहीं हुआ है। मेटे जून 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री थीं और 2022 में दोबारा सत्ता में लौटी थीं। वे 41 की उम्र में पद संभालने वाली देश की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री बनी थीं। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से ग्रीनलैंड के मुद्दे पर बेबाकी से लेकर सादगी तक के उनके कई किस्से हैं। मेटे बचपन से ही शांत और संकोची रहीं। बोलने में हकलाहट के कारण स्कूल में बच्चे उनका मजाक उड़ाते थे। उन्हें लंबे समय तक स्पीच थेरेपी लेनी पड़ी। वे 90 के दशक में पर्यावरण और पशु अधिकारों को लेकर वे बेहद आक्रामक रहीं। कॉस्मेटिक कंपनियों द्वारा जानवरों पर परीक्षण के विरोध में उन्होंने मेकअप प्रोडक्ट इस्तेमाल करना ही छोड़ दिया। उनका मानना था कि जानवरों को दर्द देकर सुंदरता पाना गलत है। इसी दौर में उन्होंने ‘जेंस’ नाम की एक व्हेल को प्रतीकात्मक रूप से गोद लिया और अपनी पॉकेट मनी से समुद्री संरक्षण संस्था को राशि देकर उसकी सुरक्षा, ट्रैकिंग और प्राकृतिक आवास बचाने में सहयोग किया। 2012 में रोजगार मंत्री रहते हुए मेटे साधारण कपड़ों और फ्लैट जूतों में बच्चों को साइकिल से स्कूल छोड़ने जाती थीं। तब जनता में उनकी सादगी के खूब चर्चे होते थे। मेटे अपनी बेबाक जवाब के लिए मशहूर हैं। जनवरी 2026 में ट्रम्प ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की जिद पकड़ ली। जवाब में झुकने के बजाय मेटे ने ग्रीनलैंड की सुरक्षा के लिए डेनिश कमांडो और सैनिक तैनात कर दिए। उन्होंने दो टूक कहा, ‘डेनमार्क बिकाऊ नहीं है। अगर अमेरिका नाटो सहयोगी पर हमला करता है, तो सब खत्म हो जाएगा।’ ट्रम्प की धमकी ने उल्टा मेटे की लोकप्रियता बढ़ाई। महिलाओं की पहचान और आत्मविश्वास पर मेटे कहती हैं, अगर लड़कियां खुद को कमतर आंकना छोड़ दें और भरोसे के साथ खड़ी हों, तो वे दुनिया में कुछ भी हासिल कर सकती हैं। 15 की उम्र में शरणार्थी को बचाने में टूट गई थी नाक की हड्डी मेटे बचपन से ही निडर रहीं। 15 की उम्र में अल्बोर्ग में उन्होंने कुछ लड़कों को एक शरणार्थी को परेशान करते देखा तो अकेले ही भिड़ गईं। इसी दौरान एक लड़के ने नस्लवादी अपशब्द कहते हुए उनके चेहरे पर मुक्का मारा, जिससे उनकी नाक की हड्डी टूट गई। इसके बाद उन्हें अस्तपताल में भर्ती होकर इलाज करवाना पड़ा। मेटे कहती हैं, यह चोट डर नहीं, उनके साहस की पहचान थी।

मोबाइल से बाहर निकला मनोरंजन, 44% बढ़े लाइव इवेंट:मेगा वेडिंग्स, ग्लोबल कॉन्सर्ट्स के दम पर 1.45 लाख करोड़ का हुआ इवेंट बाजार

मोबाइल से बाहर निकला मनोरंजन, 44% बढ़े लाइव इवेंट:मेगा वेडिंग्स, ग्लोबल कॉन्सर्ट्स के दम पर 1.45 लाख करोड़ का हुआ इवेंट बाजार

डिजिटल स्क्रीन की चमक के बीच भारत की ‘एक्सपीरियंस इकोनॉमी’ करवट ले रही है। जहां सब कुछ ऑनलाइन होने की होड़ मची है, वहीं फिक्की-ईवाई की 2026 की रिपोर्ट एक चौंकाने वाला ट्रेंड सामने लाई है। साल 2025 में मनोरंजन के तमाम डिजिटल माध्यमों को पछाड़ते हुए ‘लाइव इवेंट्स’ ने 44% की रिकॉर्ड बढ़त हासिल की है। यह केवल आंकड़ों का उछाल नहीं, बल्कि भारतीय दर्शकों के बदलते मिजाज का प्रमाण है, जो अब कंटेंट को केवल देखना नहीं, बल्कि उसे अनुभव करना चाहते हैं। साल 2025 में पूरा मीडिया-इंटरटेनमेंट सेक्टर 9% बढ़कर 2.78 लाख करोड़ रुपए का हो गया, लेकिन लाइव इवेंट्स ने सबको पीछे छोड़ दिया। यह बदलाव केवल शौक नहीं, बल्कि एक ‘स्ट्रक्चरल शिफ्ट’ है। रिपोर्ट के अनुसार, ‘संगठित लाइव इवेंट्स सेगमेंट में 44% की वृद्धि हुई, जिसे टिकट वाले कार्यक्रमों, शादियों जैसे निजी कार्यों, सरकारी आयोजनों और धार्मिक समारोहों पर बढ़ते खर्च ने बढ़ावा दिया।’ महाकुंभ जैसे विशाल धार्मिक आयोजनों और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के वर्ल्ड टूर ने टिकटों की बिक्री और स्पॉन्सरशिप राजस्व में उछाल लाया है। अनुभव आधारित उपभोग अब युवाओं के बीच एक नई प्राथमिकता बन चुका है। लाइव इवेंट्स का यह बाजार 2025 में 145 अरब तक पहुंच गया है और 2028 तक इसके 196 अरब होने का अनुमान है। अब यह केवल दिल्ली-मुंबई जैसे महानगरों तक सीमित नहीं है। आने वाले वर्षों में देश के 20 से अधिक शहर बड़े पैमाने के कार्यक्रमों की मेजबानी करेंगे। 10,000 से अधिक दर्शकों वाले बड़े कॉन्सर्ट के दिनों की संख्या 2025 के 130 से बढ़कर 2028 तक सालाना 200 से अधिक होने की उम्मीद है। दिलचस्प है कि डिजिटल क्रांति लाइव इवेंट्स को नुकसान नहीं, बल्कि फायदा पहुंचा रही है। सोशल मीडिया और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म्स प्रशंसकों की संख्या बढ़ा रहे हैं, जिससे टिकटों की बिक्री बढ़ती है। रिपोर्ट में ‘फिजिटल’ अनुभवों के उभरने पर जोर दिया गया है, जहां भौतिक कार्यक्रमों को लाइव स्ट्रीम और वर्चुअल इंटरेक्शन के माध्यम से डिजिटल रूप से विस्तार दिया जा रहा है। शादियां और कुंभ बने लाइव इवेंट के ग्रोथ इंजन आमतौर पर लाइव इवेंट्स का मतलब केवल म्यूजिक कॉन्सर्ट माना जाता है, लेकिन भारत में इस 44% ग्रोथ के पीछे असली ताकत ‘वेडिंग इकोनॉमी’ और ‘धार्मिक पर्यटन’ है। महाकुंभ जैसे आयोजनों ने करोड़ों की भीड़ जुटाई, वहीं प्रीमियम शादियों पर खर्च ने इस सेक्टर को एक मंदी-मुक्त बिजनेस बना दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि तेज रफ्तार के बावजूद, इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की ऊंची लागत और जटिल रेगुलेटरी प्रक्रियाएं इस सेक्टर की राह में रोड़ा बन सकती हैं।

Tech revolution in golf; 80% will be virtual by 2028

Tech revolution in golf; 80% will be virtual by 2028

लंदन29 मिनट पहले कॉपी लिंक गोल्फ के वर्चुअल रूप की शुरुआत लगभग 40 साल पहले जापान में छोटे-छोटे गेम्स से हुई। गोल्फ की दुनिया में एक खामोश लेकिन बड़ा बदलाव आ रहा है। एक प्रमुख खेल टेक्नोलॉजी कंपनी के अनुसार, साल 2028 के अंत तक ब्रिटेन में आउटडोर (मैदान पर) गोल्फ से ज्यादा इंडोर (वर्चुअल) गोल्फ के राउंड खेले जाएंगे। अगले दो वर्षों में दुनिया भर में खेले जाने वाले कुल गोल्फ राउंड्स का 80% हिस्सा वर्चुअल होगा। यह बदलाव अचानक नहीं आया है। गोल्फ के दीवाने देश दक्षिण कोरिया में यह टर्निंग पॉइंट एक दशक पहले ही आ चुका था, जहां ‘स्क्रीन गोल्फ’ ने ‘फील्ड गोल्फ’ को पछाड़ दिया है। वहां 87% गोल्फर वर्चुअल गोल्फ पसंद करते हैं। दिग्गज पेशेवर खिलाड़ी भी इससे अछूते नहीं हैं। टाइगर वुड्स और रोरी मैक्लरॉय का टीजीएल वेंचर 64×53 फीट की विशाल स्क्रीन पर इंडोर गोल्फ को नए स्तर पर ले जा रहा है। वहीं, गेविन मैकफर्सन जैसे खिलाड़ी सिमुलेटर टूर्नामेंट जीतकर ऑस्ट्रेलिया के असली ‘एनएसडब्ल्यू ओपन’ के लिए क्वालिफाई कर रहे हैं। इंडोर गोल्फ की शुरुआत 40 साल पहले जापान से हुई थी। इंडोर गोल्फ की बढ़ती लोकप्रियता का बड़ा कारण मौसम भी है। ब्रिटेन और दुनिया के कई हिस्सों में खराब मौसम गोल्फरों को महीनों तक मैदान से दूर रखता है। ‘पिच गोल्फ’ के सह-संस्थापक क्रिस इंघम कहते हैं कि ब्रिटेन में साल के सिर्फ 5 महीने ही गोल्फ के लिए अच्छे होते हैं, बाकी समय सिमुलेटर ही काम आते हैं। आंकड़ों के अनुसार, अब दुनिया में असली गोल्फ कोर्स की तुलना में ‘ऑफ-कोर्स’ (सिमुलेटर या रेंज पर) खेलने वालों की संख्या अधिक हो गई है। अमेरिका में 2023 में 3.29 करोड़ ऑफ-कोर्स खिलाड़ी थे, जबकि ऑन-कोर्स खिलाड़ी 2.66 करोड़ ही थे। हालांकि, पारंपरिक गोल्फ खत्म नहीं हो रहा है। साल 2025 में ब्रिटेन में 9 करोड़ फुल ऑन-कोर्स राउंड खेले गए, जो पिछले 5 वर्षों में सबसे ज्यादा हैं। दरसअल, 82% पारंपरिक गोल्फर सिमुलेटर का उपयोग अपनी स्विंग सुधारने या दोस्तों के साथ मौज-मस्ती के लिए कर रहे हैं। सिमुलेटर नए खिलाड़ियों को जोड़ने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है। दुनिया भर में 10.8 करोड़ गोल्फरों (अमेरिका/मैक्सिको को छोड़कर) में से 60% गैर-पारंपरिक गोल्फ खेल रहे हैं और टीनएजर में यह आंकड़ा 80% है। इंग्लैंड में 36% खिलाड़ियों ने असली कोर्स पर जाने से पहले सिमुलेटर पर गोल्फ का अनुभव लिया। इंडोर गोल्फ सिर्फ खेल नहीं, बल्कि सोशल इवेंट बन गया है, जिसमें गोल्फ को बार, म्यूजिक, कॉर्पोरेट इवेंट्स के साथ जोड़ते हैं। जो लोग मुश्किल ऐतिहासिक कोर्स नहीं खेल पाते, उनके लिए आसान वर्चुअल कोर्स बनाए गए हैं। आउटडोर गोल्फ में 5 घंटे लगते हैं, लेकिन सिमुलेटर इसे 1 घंटे में समेट देता है। कुल मिलाकर, इंडोर गोल्फ पारंपरिक खेल का विकल्प नहीं बल्कि उसका विस्तार बनता जा रहा है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

बालिका छात्रावास के नए भवन का भूमिपूजन

बालिका छात्रावास के नए भवन का भूमिपूजन

रायसेन| रानी दुर्गावती अनुसूचित जनजाति बालिका छात्रावास में नए बालिका छात्रावास के लिए भूमिपूजन कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम में प्रांत संगठन मंत्री निखिलेश माहेश्वरी, सरस्वती विद्या प्रतिष्ठान के अध्यक्ष मोहनलाल गुप्ता, भाऊराव देवरस सेवा न्यास के सचिव हरीश शर्मा, स्वामी रामकृष्ण परमहंस शिक्षा समिति के अध्यक्ष दिनेश शर्मा, जनजाति क्षेत्र के प्रांत प्रमुख रूप सिंह लोहाने, भोपाल विभाग के विभाग समन्वयक अंकित शुक्ला, रायसेन जिले के जिला प्रचारक योगेश गुर्जर, जनजाति क्षेत्र के जिला प्रमुख लखन विश्वकर्मा मौजूद रहे। समिति सदस्य रेखा बघेल, रामलीला मैदान के प्रचारक चंद्रेश खरेलिया, राकेश शर्मा, भाजपा उपाध्यक्ष वर्षा लोधी, रानी दुर्गावती की प्राचार्या कांति मिश्रा भी शामिल रहीं। आचार्य परिवार, छात्रावास परिवार, समाजजन उपस्थित रहे। वेद मंत्रों के साथ भूमिपूजन हुआ। स्वागत वंदन हुआ।