Delhi Gangster: 4500 KM तक पीछा, 100 होटलों में रेड, फिर मिली दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी | delhi police special cell chase 4500 km and caught two dreaded sharpshooters kapil sangwan alias nandu gang kolhapur maharashtra

Last Updated:February 08, 2026, 19:22 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 4500 किलोमीटर के फिल्मी पीछा के बाद कुख्यात कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के दो खूंखार शार्पशूटरों, सौरभ और योगेश को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया है. हरियाणा के संदीप हत्याकांड के मुख्य आरोपी इन बदमाशों ने 100 से अधिक होटलों में छिपने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के फंदे से नहीं बच सके. नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण और साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के दो मुख्य शार्पशूटरों को गिरफ्तार कर लिया है. इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस की टीम ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश होते हुए महाराष्ट्र तक 4500 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया. इन्हें कोल्हापुर के श्री टेम्बलई मंदिर के पास से धर दबोचा गया. सौरभ लाकड़ा और योगेश शर्मा की तलाश पुलिस को 17 जुलाई 2025 को हरियाणा के बादली में हुए सनसनीखेज संदीप उर्फ बबलू हत्याकांड में थी. संदीप जब अपने दोस्त के साथ कार में जा रहा था, तभी इन हमलावरों ने कपिल सांगवान उर्फ नंदू के इशारे पर उन पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें संदीप की मौत हो गई थी. स्पेशल सेल के डीसीपी आलाप पटेल के अनुसार, इंस्पेक्टर पवन कुमार और सुमित कादयान की टीम को जनवरी के आखिरी हफ्ते में इन बदमाशों के महाराष्ट्र में होने की सूचना मिली थी. 100 से ज्यादा होटल: पुलिस टीम ने कोल्हापुर और आसपास के इलाकों में 100 से अधिक होटलों और गेस्ट हाउसों की तलाशी ली. 28-29 जनवरी की दरम्यानी रात को पुलिस ने ऊंचगांव रोड पर घेराबंदी कर दोनों को काबू किया. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से खतरे के कारण मध्य प्रदेश से हथियार खरीदे थे. पुलिस ने दिल्ली में उनकी निशानदेही पर छापेमारी कर 02 पिस्टल और 02 कारतूस बरामद किए हैं. गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू का खौफकपिल सांगवान उर्फ नंदू फिलहाल विदेश में बैठकर अपना गैंग चला रहा है. वह दिल्ली के नजफगढ़ और हरियाणा के इलाकों में रंगदारी और वर्चस्व की लड़ाई के लिए जाना जाता है. योगेश और सौरभ जैसे शार्पशूटर उसके सबसे भरोसेमंद गुर्गे हैं, जो सुपारी लेकर हत्याओं को अंजाम देते हैं. कानूनी कार्रवाई और साइड इफेक्ट्सपुलिस ने इन दोनों के खिलाफ BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. इस गिरफ्तारी से नंदू गैंग को बड़ा झटका लगा है और दिल्ली-हरियाणा के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. पुलिस अब इनके अन्य सहयोगियों और हथियारों के सप्लायरों की तलाश में जुटी है. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 08, 2026, 19:22 IST
‘पेड प्रमोशन के तहत फैलाई गई बच्चों के गायब होने की कहानी’, दिल्ली पुलिस बोली- पैनिक फैलाना है इरादा – children missing case updates delhi police claim this story circulated for paid promotion create panic personal interest

होमताजा खबरदेश पेड प्रमोशन के तहत फैलाई गई बच्चों के गायब होने की कहानी – दिल्ली पुलिस Last Updated:February 06, 2026, 11:48 IST Delhi Children Missing Case: नेशनल कैपिटल दिल्ली में सैकड़ों की तादाद में गुमशुदा हुए बच्चे का मामला गर्मा गया है. जिनके बच्चे लापता हुए हैं, वे सामने आकर अपना दुख बता रहे हैं. वहीं, इस मसले पर अब दिल्ली पुलिस का बयान सामने आया है. पुलिस ने 800 से ज्यादा बच्चों के गायब होने की खबर के पीछे बड़ी साजिश का इशारा किया है. दिल्ली में 800 से भी ज्यादा बच्चों के गुमशुदा होने के मसले पर अहम बयान दिया है. (फाइल फोटो/PTI) Delhi Children Missing Case: देश की राजधानी दिल्ली में 800 से ज्यादा बच्चों के गायब होने के मामले में दिल्ली पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है. पुलिस का कहना है कि पेड प्रमोशन के तहत बच्चों के गायब होने की बात फैलाई गई. पुलिस ने एक्शन लेने की बात भी कही है. दिल्ली में कथित तौर पर बढ़ते लापता बच्चों के मामलों को लेकर फैलाई जा रही अफवाहों पर दिल्ली पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया है. दिल्ली पुलिस के जनसंपर्क अधिकारी और संयुक्त आयुक्त संजय त्यागी ने स्पष्ट किया कि राजधानी में लापता व्यक्तियों की संख्या में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि जनवरी 2026 में तो पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में लापता मामलों की रिपोर्टिंग में कमी दर्ज की गई है, जिससे यह साफ होता है कि सोशल मीडिया पर फैल रही खबरें तथ्यहीन हैं. ज्वाइंट सीपी संजय त्यागी ने कहा कि दिल्ली पुलिस अपराध की निष्पक्ष और पारदर्शी रिपोर्टिंग नीति का पालन करती है. लापता व्यक्तियों की सूचना न केवल स्थानीय पुलिस थानों में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से या ERSS-112 नंबर पर कॉल करके भी दी जा सकती है. उन्होंने बताया कि मानक परिचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत पुलिस लापता लोगों की तलाश के लिए तुरंत कार्रवाई करती है और विशेष रूप से बच्चों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है. दिल्ली पुलिस के अनुसार, सभी जिलों में समर्पित लापता व्यक्ति दस्ते सक्रिय हैं, जबकि अपराध शाखा में मानव तस्करी विरोधी इकाई भी कार्यरत है, ताकि ऐसे मामलों में त्वरित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी मामले में लापता बच्चों या अपहरण के पीछे किसी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है. साजिश की ओर इशारा दिल्ली पुलिस ने यह भी खुलासा किया कि कुछ तथाकथित रिपोर्टें और सोशल मीडिया पोस्ट पेड प्रमोशन के जरिए जानबूझकर फैलाई जा रही हैं, जिनका उद्देश्य जनता में डर और घबराहट पैदा करना है. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों की जांच में यह सामने आया है कि कुछ लोग निजी लाभ के लिए गलत सूचनाएं फैलाकर माहौल खराब कर रहे हैं. संजय त्यागी ने दो टूक कहा कि इस तरह की अफवाहें फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी कीमत पर राजधानी में शांति व्यवस्था को बिगड़ने नहीं दिया जाएगा. इस बीच, दिल्ली से सांसद और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने भी इन खबरों को निराधार बताते हुए कहा कि राजधानी में लोगों के गायब होने की बात पूरी तरह गलत है और इससे जनता में बेवजह भय का माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों पर भरोसा न करें और किसी भी संदिग्ध जानकारी की पुष्टि संबंधित अधिकारियों से करें. लोगों से खास अपील दिल्ली पुलिस ने आम नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना हो तो तुरंत पुलिस को सूचित करें और अफवाहों से बचें. पुलिस का कहना है कि राजधानी में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है और लापता व्यक्तियों को जल्द से जल्द सुरक्षित ढूंढने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं. बता दें कि बड़ी तादाद में बच्चों के लापता होने की सूचना से लोगों में पैनिक का आलम है. अब दिल्ली पुलिस ने हकीकत सामने लाकर इसे शांत करने की कोशिश की है. साथ ही दोषियों पर एक्शन की बात भी कही है. About the Author Manish Kumar बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : February 06, 2026, 11:24 IST
दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे में छात्रा का मोबाइल बरामद किया: weeping girl arrived police station case solved by delhi police in 48 hours shahdara district gtb enclave

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा जिले से इंसानियत और पुलिसिया मुस्तैदी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने खाकी के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत किया है. यह कहानी एक छात्रा की मेहनत, उसके आंसुओं और दिल्ली पुलिस के उस वादे की है, जिसे पुलिस ने दो दिन की मोहलत में पूरा कर दिखाया. एक छात्रा के साथ ऐसी घटना घटी, जिसने दिल्ली पुलिस के अधिकारी को दिल पसीज गया. घटना है तो बहुत छोटी, लेकिन इतनी मार्मिक है, जिसको सुनकर आपका भी दिल पसीज जाएगा. 31 जनवरी 2026 की शाम एक छात्रा रोती-बिलखती हुई जी.टी.बी. एन्क्लेव थाने पहुंची. उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. उसने पुलिस को बताया कि उसने अपनी पॉकेट मनी से पाई-पाई जोड़कर एक मोबाइल फोन खरीदा था, जिसे दो मोटर साइकिल सवार लड़कों ने उससे छीन लिया. छात्रा का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार कह रही थी कि वह अब दूसरा फोन नहीं खरीद पाएगी और उसकी परीक्षाओं पर भी इसका असर पड़ेगा. छात्रा के साथ क्या हुआ था? छात्रा की हालत देख पुलिस टीम भावुक हो गई. जीटीबी एन्क्लेव पुलिस स्टेशन की टीम ने छात्रा को दिलासा दिया और एक बड़ा वादा किया. पुलिस ने बोला- बेटी, तुम शांति से अपनी परीक्षा की तैयारी करो, तुम्हारा छीना हुआ फोन दो दिन के भीतर वापस मिल जाएगा शुरू हुआ दिल्ली पुलिस का एक्शन शाहदरा जिले के डीसीपी प्रशांत गौतम के निर्देश पर एक क्रैक टीम बनाई गई. इस टीम में हेड कांस्टेबल मनीष, मनोज, सचिन और कांस्टेबल अभिषेक शामिल थे. टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की जांच की. फुटेज में दो संदिग्ध युवक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर झपटमारी कर भागते हुए नजर आए. पुलिस ने भागने के रास्ते पर लगे कैमरों का पीछा किया, जिससे आरोपियों के ठिकाने का अंदाजा लगा. 48 घंटे में ही पूरा हुआ ऑपरेशन 3 फरवरी 2026 को, जब क्रैक टीम गश्त पर थी, तभी एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली कि वारदात में शामिल संदिग्ध युवक फिर से किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में घूम रहा है. पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को दबोच लिया. पूछताछ में उन्होंने छात्रा से मोबाइल छीनने की बात कबूल कर ली. पकड़े गए दोनों आरोपी कोई नौसिखिए नहीं, बल्कि पुराने अपराधी हैं. मानसरोवर पार्क का रहने वाला राहुल पहले भी 8 आपराधिक मामलों में शामिल रह चुका है. 36 साल का राजेश कुमार सैनी मॉडर्न शाहदरा का रहने वाला 4 वारदातों में शामिल रहा है. दिल्ली पुलिस ने अपना वादा निभाया और 48 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर मोबाइल बरामद कर लिया. अब छात्रा अपनी परीक्षाएं बिना किसी तनाव के दे सकेगी. डीसीपी प्रशांत गौतम ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का काम केवल अपराधी को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षा की भावना पैदा करना भी है.
दिल्ली में रिक्शा चालक से Oppo मोबाइल लूट, चमन गिरफ्तार : delhi police anand parbat rickshaw puller mobile snatching robbery case arrest 22 year boy bns sections

होमताजा खबरDelhi नाम- चमन, काम- रिक्शा चालकों से मोबाइल लूटना, ऐसे रगड़ दिया दिल्ली पुलिस Last Updated:February 05, 2026, 17:50 IST Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस ने आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती निवासी चमन को रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग से गिरफ्तार किया, जिसने 3 फरवरी 2026 को ओप्पो मोबाइल लूट में दो साथियों संग रिक्शा चालक को निशाना बनाया था. फाइल फोटो- दिल्ली पुलिस नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज लूट की वारदात को सुलझाया है, जो आपको हैरान कर देगा. पुलिस ने एक शातिर लुटेरे को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर एक गरीब रिक्शा चालक को अपना निशाना बनाया था. घटना 3 फरवरी 2026 की हुई थी. रिक्शा चालक रात के समय पहाड़गंज से काम निपटाकर लौट रहा था. जैसे ही वह रोहतक रोड पर एक जूस की दुकान के पास पहुंचा, तीन लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया. वारदात को बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया गया. रिक्शा चालक ने बताया एक शख्स धक्का देकर नीचे गिरा दिया. दो अन्य ने उसके हाथ और पैर पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके. तीसरे आरोपी ने जबरन उसकी पैंट की जेब से ओप्पो (Oppo) मोबाइल फोन निकाला और तीनों मौके से फरार हो गए. पीड़ित की शिकायत पर आनंद पर्वत थाने में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन चमन लूट की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पटेल नगर और आनंद पर्वत एसएचओ के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई. जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अपने गुप्तचरों को सक्रिय किया. बीट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके. गुप्त सूचना पर मिली बड़ी कामयाबी तलाश के दौरान पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि लूट में शामिल एक आरोपी रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग पर सीएनजी पंप के पास खड़ा है. पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर दबिश दी और मुखबिर की निशानदेही पर आरोपी को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपी की पहचान चमन, जिसकी उम्र 22 साल के रूप में हुई, जो आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती का रहने वाला है. तलाशी लेने पर उसके पास से रिक्शा चालक का लूटा हुआ मोबाइल फोन मिल गया. नशे की लत बनी जुर्म की वजह पूछताछ के दौरान आरोपी चमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसे कमाने और अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी, झपटमारी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देता है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चमन का पुराना आपराधिक इतिहास भी है. वह साल 2025 में भी आर्म्स एक्ट के तहत आनंद पर्वत थाने में गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस अब चमन के उन दो अन्य साथियों की तलाश कर रही है जो इस वारदात में शामिल थे और अभी फरार हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : February 05, 2026, 17:48 IST
why girls are disappearing from delhi : special ground report doctor maid 16 year old daughter love story delhi police – क्यों गायब हो रही हैं दिल्ली से लड़कियां, नौकरानी की 16 साल की बेटी की कहानी से आपको समझ में आ जाएगा

नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा? यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते? दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवासस्तव कहते हैं, ‘दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई तेजी नहीं आई है, जबकि, पिछले वर्षों की तुलना में जनवरी 2026 महीने में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है. क्योंकि, दिल्ली में निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है. लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है. निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरन्त पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. इस संबंध में सभी जिलों में dedicated Missing Persons Squads तथा क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है.’ क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक? देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’ दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है? दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’ दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक
passport rules if you live in ghaziabad and have a passport issued with a delhi address right wrong punishment jail | रहते हैं गाजियाबाद में और दिल्ली के पते पर बना है पासपोर्ट, तो अब जाएंगे जेल! शुरू होने जा रहा बड़ा अभियान

गाजियाबाद. हाल ही में गाजियाबाद में एक ही एड्रेस पर 22 पासपोर्ट बनने की खबर ने विदेश मंत्रालय को हैरान और परेशान कर दिया है. पिछले दिनों गाजियाबाद में एक बहुत बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी कागजों के दम पर 22 पासपोर्ट बनवा लिए गए. इस खेल में पोस्ट ऑफिस का पोस्टमैन भी शामिल था. दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस की चिट्ठी के बाद जब गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की, परत दर परत राज खुलते चले गए. ऐसे में अब पासपोर्ट विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है, जिसमें पासपोर्ट उसी एड्रेस पर बनेगा, जिस एड्रेस पर आवेदक का कम से कम एक स्थाई पता हो. अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं दिल्ली में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में पहले कभी रह रहे थे, तो अब आप दिल्ली के एड्रेस पर पासपोर्ट नहीं बना सकते. बीते कुछ सालों से आपको अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विदेश मंत्रालय की Apply Anywhere in India योजना के तहत आप भारत के किसी भी कोने से पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन, इस सुविधा के साथ कुछ सख्त नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको अपराधी बना सकता है. क्या गाजियाबाद का व्यक्ति दिल्ली में पासपोर्ट बनवा सकता है?जी हां, बिल्कुल! 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) की सीमाएं खत्म हो गई हैं. आप कैसे पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) को चुन सकते हैं, कैसे होता है वेरिफिकेशन? जी आप बिल्कुल अपने पसंद का पोसपोर्ट सेवा केंद्र चुन सकते हैं. पुलिस वेरिफिकेशन आपके ‘वर्तमान पते’ (Current Address) पर ही होगा, जहां आप अभी रह रहे हैं. लेकिन बहुत लोग ये करते हैं कि वह रहते हैं गाजियाबाद में लेकिन दिल्ली के अपने पुराने पते पर पासपोर्ट बना लेते हैं. पुलिस वेरिफेकशन में अड़ोसी-पड़ोसी को बोले रखते हैं कि आए तो बता दीजिएगा कि मैं यही रहता हूं. बाद में पुलिस की मदद से पासपोर्ट तो बना लेते हैं, लेकिन जो गैरकानूनी है. पासपोर्ट बनाने के लिए क्या-क्या जरूरी दस्तावेज चाहिए? आपको दिल्ली में रहने का सबूत जैसे रेंट एग्रीमेंट, बिजली का बिल, बैंक पासबुक या कंपनी का लेटर देना होगा. भले ही आपके स्थायी पते के दस्तावेज बिहार के हों, लेकिन वर्तमान पता साबित करना अनिवार्य है. क्या पुराने पते पर पासपोर्ट बन सकता है?अक्सर लोग उस पते पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते हैं जहां वे पहले रहते थे लेकिन अब नहीं रहते. यह पूरी तरह गैर-कानूनी है. पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक, आपको केवल उसी पते का जिक्र करना चाहिए जहां आप आवेदन के समय पिछले एक साल से रह रहे हैं. यदि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आप उस पते पर नहीं पाए जाते हैं, तो आपकी रिपोर्ट ‘Adverse’ लग जाएगी. इससे न केवल आपका पासपोर्ट आवेदन रद्द होगा, बल्कि आपको ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. फर्जी एड्रेस पर पासपोर्ट बनाना कितना बड़ा जुर्मपासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है. फर्जी पते या गलत जानकारी देना राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यदि कोई गैर-भारतीय जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या फर्जी पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता है, तो सजा 1 साल से 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 2026 के नए नियम: डिजिटल और सख्त वेरिफिकेशनसाल 2026 में पासपोर्ट नियमों को और भी ‘हाई-टेक’ बनाया गया है. अब पुलिस वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल टैब का इस्तेमाल होता है, जो सीधे जीपीएस (GPS) लोकेशन से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि पुलिसकर्मी को आपके घर आना ही होगा और वह आपकी लोकेशन को सिस्टम में अपडेट करेगा. अगर आप उस एड्रेस पर नहीं रहते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा. जरूरी सलाह सच्चाई ही रास्ता है: हमेशा अपने वर्तमान पते की जानकारी दें. अगर आप किराए पर हैं, तो रेंट एग्रीमेंट को ही आधार बनाएं. पुराना पासपोर्ट अपडेट: अगर आपके पास पहले से पासपोर्ट है और आपका पता बदल गया है, तो उसे ‘Re-issue’ करवाकर नया पता दर्ज कराएं. पुलिस से न डरें: पुलिस वेरिफिकेशन अब पहले से बहुत आसान और पारदर्शी हो गया है. बस आपके पास सही दस्तावेज होने चाहिए. पासपोर्ट बनवाना अब आपका अधिकार है और सरकार ने इसे सुगम बनाया है, लेकिन ईमानदारी ही इसकी पहली शर्त है. फर्जीवाड़े की छोटी सी कोशिश आपकी विदेश यात्रा के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है.
MP की ‘लेडी गैंग’ चांदनी चौक में मारा बड़ा हाथ, हाईकोर्ट के एक बड़े वकील का ही उड़ाया कीमती हार, हो गए अब गिरफ्तार – delhi police arrest three women gang mp rajgarh diamond gold necklace recovery high court lawyer

होमताजा खबरDelhi MP की ‘लेडी गैंग’ ने एक बड़े वकील का उड़ाया कीमती हार, ट्रेन से आती थी दिल्ली Last Updated:February 04, 2026, 19:20 IST दिल्ली पुलिस ने चांदनी चौक के किनारी बाजार में हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को महज 72 घंटों में सुलझा लिया है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आई शातिर महिला चोरों ने हाई कोर्ट की एक वकील का हीरा-सोना जड़ित हार और झुमके चोरी किए थे. सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने मयूर विहार के चिल्ला गांव से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत रिकवरी की है. पढ़ें इन तीनों महिला चोर की 12 साल की कहानी. नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त चांदनी चौक में सुरक्षा और सतर्कता को चुनौती देते हुए एक ‘लेडी गैंग’ ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया. तीन औरतों का यह गैंग दिल्ली हाईकोर्ट के वकील का सारा माल गायब कर दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ने कुशलता का परिचय देते हुए इस मामले को महज 3 दिनों के भीतर सुलझा लिया है. पकड़ी गई तीनों महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली हैं, जो विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों में चोरी करने के लिए दिल्ली का रुख करती थीं. हाथ साफकर फिर दिल्ली से एमपी के तरफ चली जाती थीं. पढ़िए कैसे और किस तरह से दिल्ली पुलिस ने इन तीन महिलाओं को गिरप्तार किया. मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक महिला अधिवक्ता सुश्री एस. गर्गा अपने सोने और हीरे के गहनों की मरम्मत कराने के लिए पुरानी दिल्ली के मशहूर किनारी बाजार आईं थीं. उन्होंने अपना कीमती नेकलेस और झुमके एक बैग में रखे हुए थे. दोपहर के समय जब वह गहने ठीक कराकर बाजार से बाहर निकल रही थीं, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उनके बैग से गहने पार कर दिए. 72 घंटों का सस्पेंस और ‘चिल्ला गांव’ का कनेक्शन पीड़िता ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई. मामला एक प्रतिष्ठित वकील और लाखों के गहनों से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया. उत्तरी जिला पुलिस के एडिशनल डीसीपी सुमित कुमार झा के अनुसार, कोतवाली थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमन कुमार और इंस्पेक्टर ज्ञान प्रकाश के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इस टीम में पीएसआई प्रीति और महिला कांस्टेबलों को भी शामिल किया गया. 12 साल से चल रहा था खेल पुलिस ने किनारी बाजार और आसपास के इलाकों में लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं वकील के बैग से हार निकालते हुए साफ नजर आईं. पुलिस ने इन महिलाओं का पीछा जारी रखा. सीसीटीवी मैपिंग से पता चला कि चोरी के बाद इन महिलाओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार ऑटो-रिक्शा बदले. तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि ये महिलाएं मयूर विहार के चिल्ला गांव में रुकी हुई हैं. जाल बिछाकर गिरफ्तारी 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने चिल्ला गांव में दबिश दी और प्रीति और अनमोल को धर दबोचा. तलाशी के दौरान अनमोल के पास से चोरी के हार के 28 पत्थर बरामद हुए. पूछताछ में उन्होंने अपनी तीसरी साथी ‘सन्नो’ का नाम उगला, जिसके पास बाकी के गहने थे. पुलिस ने उसी दिन सन्नो को भी दबोच लिया. दिल्ली पुलिस की पूछताछ के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी हैरान कर दिया. ये महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के गुलखेड़ी जाटखेड़ी गांव की रहने वाली हैं. यह गांव पहले भी ऐसी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है. ये महिलाएं अक्सर ट्रेन से दिल्ली आती हैं और कुछ दिनों या महीनों के लिए किराए पर कमरा लेती हैं. इनका मुख्य निशाना चांदनी चौक, सदर बाजार और पुरानी दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके होते हैं जहाँ लोगों का ध्यान अपने सामान पर कम और खरीदारी पर ज्यादा होता है. 10-12 साल से यह गिरोह इसी तरह काम कर रहा है. चोरी की कुछ वारदातों को अंजाम देने के बाद ये वापस अपने गांव लौट जाती हैं ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 04, 2026, 19:20 IST
राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से चंद सेकंड में उड़ गया लैपटॉप, फोन कॉल पर लगा था शख्स, चोरों ने लगा दिया चूना – dmrc action delhi police arrest laptop theft rajiv chowk metro station gate 5 security check cctv footage

नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं और वो भी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर तो जरा होशियार हो जाएं. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है, जो आपके आंखों के सामने से आपका सामान गायब कर देता था. दिल्ली का सबसे व्यस्त और दिल कहा जाने वाला राजीव चौक मेट्रो स्टेशन अपनी भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी मासूम यात्रियों को अपना निशाना बना रहे हैं. यहां पर एक ऐसी वारदात सामने आई है जहां एक यात्री की महज चंद सेकंड की फोन कॉल की व्यस्तता ने उसका कीमती लैपटॉप चोरी करवा दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने अपनी तकनीकी कुशलता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी को धर दबोचा है. यह मामला 30 जनवरी 2026 का है. पीड़ित यात्री राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 और 6 के पास बने सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर पहुंचा. सुरक्षा नियमों के मुताबिक, उसने अपना लैपटॉप बैग एक्स-बीआईएस (X-BIS) मशीन पर स्कैनिंग के लिए रखा. इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर एक फोन कॉल आ गई. वह फोन पर बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसने मशीन की दूसरी तरफ से अपना बैग उठाना याद नहीं रहा. इसी चंद सेकंड की लापरवाही का फायदा पास खड़े एक शातिर चोर ने उठा लिया. चोर ने बड़ी सफाई से मशीन से बैग उठाया और चंपत हो गया. बैग में एक महंगा एचपी (HP) लैपटॉप और उसका चार्जर मौजूद था. पुलिस की जांच और सीसीटीवी का सुराग जब यात्री को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बैग गायब हो चुका था. मामले की शिकायत तुरंत राजीव चौक मेट्रो थाना पुलिस को दी गई. 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस के मेट्रो डीसीपी कुशल पाल सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया. जांच टीम ने सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. फुटेज की बारीकी से जांच करने पर एक संदिग्ध युवक बैग उठाते हुए साफ नजर आया. हालांकि, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क लगा रखा था. पुलिस ने हार नहीं मानी और आरोपी के आने-जाने के रास्तों का तकनीकी विश्लेषण किया. विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. आरोपी अक्सर सुबह 8:30 से 9:30 बजे के बीच राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलता था. जाल बिछाकर ऐसे हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए 3 फरवरी की सुबह ट्रैप लगाया. सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी राजीव चौक के एएफसी गेट्स और निकास द्वारों पर तैनात हो गए. सुबह करीब 9:30 बजे, पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी जो पीठ पर एक बैग लटकाए बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उसकी कद-काठी सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध से हूबहू मिल रही थी. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया. जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से वही चोरी किया गया एचपी लैपटॉप और चार्जर बरामद हुआ. आरोपी का प्रोफाइल और कबूलनामा पकड़े गए आरोपी की पहचान 29 वर्षीय सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान सुमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों की तलाश में रहता था जो सुरक्षा जांच के दौरान फोन या अन्य कामों में व्यस्त हो जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुमित ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है. आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मेट्रो यात्रियों के लिए पुलिस की चेतावनी इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रो यात्रियों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है: स्कैनिंग के समय ध्यान रखें: जब भी आप अपना बैग एक्स-रे मशीन पर रखें, तो उसे दूसरी तरफ से निकलने तक अपनी नजरों से ओझल न होने दें. फोन का इस्तेमाल कम करें: सुरक्षा जांच और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि यह अपराधियों को मौका देता है. मास्क के पीछे छिपे चेहरे: कोरोना के बाद अब अपराधी मास्क का इस्तेमाल अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपने आसपास के संदिग्धों पर नजर रखें. तुरंत रिपोर्ट करें: किसी भी सामान के गायब होने पर तुरंत नजदीकी मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम या पुलिस डेस्क को सूचित करें. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक चोरी का मामला सुलझाया है, बल्कि अन्य अपराधियों को भी सख्त संदेश दिया है.
सावधान! घर बैठे कमाई का लालच पड़ सकता है भारी, 12वीं पास साइबर ठग ने इस शख्स से झटके में कूट लिए 17 लाख रुपये | delhi police cyber crime arrest pathan uzef khalil khan maharashtra jalna work from home fraud case

नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था. इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया. कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम? 25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है. कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम? यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके. दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.





