Stanford-MIT expert warns- Gemini, ChatGPT, and the Cloud are providing dangerous information.

Hindi News International Stanford MIT Expert Warns Gemini, ChatGPT, And The Cloud Are Providing Dangerous Information. न्यूयॉर्क5 मिनट पहले कॉपी लिंक एआई की खौफनाक हकीकत ने वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। – प्रतीकात्मक फोटो कुछ दिन पहले स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट व बायोसिक्युरिटी एक्सपर्ट डॉ. डेविड रलमैन लैपटॉप के सामने बैठे थे, उनके पसीने छूट रहे थे। स्क्रीन पर एआई चैटबॉट विस्तार से बता रहा था कि सामूहिक नरसंहार की योजना कैसे बनाएं… यह किसी साइंस-फिक्शन फिल्म का दृश्य नहीं, बल्कि एआई की वह खौफनाक हकीकत थी, जिसने वैज्ञानिकों की रातों की नींद उड़ा दी है। डॉ. रलमैन को एक एआई कंपनी ने उत्पाद की सार्वजनिक रिलीज से पहले उसकी सुरक्षा जांच की जिम्मेदारी दी थी। चैटबॉट ने न सिर्फ कुख्यात रोगजनक (पैथोजन) को लैब में मॉडिफाई करने का तरीका बताया ताकि उस पर मौजूदा दवाएं बेअसर हो जाएं बल्कि उसने बड़े सार्वजनिक परिवहन तंत्र की सुरक्षा खामियों की भी पहचान की। चैटबॉट ने बिंदुवार समझाया कि उस ‘सुपरबग’ को कहां और कैसे फैलाया जाए ताकि कम वक्त में ज्यादा लोग मारे जाएं और पकड़े जाने की गुंजाइश न हो। डॉ. रलमैन इस ‘चालाकी और धूर्तता’ से इतने दहल गए कि उन्हें दिमाग शांत करने के लिए टहलने जाना पड़ा। चैटबॉट उन सवालों के जवाब दे रहा था, जो रलमैन ने पूछे तक नहीं थे। एक्सपर्ट द्वारा साझा किए गए संवादों से स्पष्ट हुआ कि जेमिनी, चैटजीपीटी और एंथ्रोपिक के क्लाउड जैसे प्रमुख एआई मॉडल खतरनाक जानकारी देने में सक्षम हैं। मैसाचुसेट्स इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिक केविन एसवेल्ट ने बताया कि चैटजीपीटी ने जैविक हथियारों के छिड़काव की योजना बनाई। गूगल जेमिनी ने ऐसे पैथोजन्स की सूची दी जो मीट उद्योग को भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं और सुरक्षा से बचने के तरीकों का उल्लेख किया। एंथ्रोपिक क्लाउड ने नई विषाक्त रेसिपी पेश की। यहां तक कि गूगल के ‘डीप रिसर्च’ से एक वैज्ञानिक ने महामारी फैलाने वाले वायरस का प्रोटोकॉल मांगा, तो बॉट ने 8 हजार शब्दों का विस्तृत निर्देश दिया। यह घटनाएं एआई मॉडलों की सुरक्षा और नैतिकता पर गंभीर सवाल उठा रही हैं। एआई कंपनियां दावा करती हैं कि वे लगातार सुरक्षा घेरे मजबूत कर रही हैं, पर एक्सपर्ट इन्हें ‘कमजोर बाड़’ मानते हैं, जिसे ‘जेल-ब्रेकिंग’ से आसानी से पार किया जा सकता है। इसी तरह के एक मामले में बीते साल गुजरात पुलिस ने एक डॉक्टर को आईएसआईएस से जुड़ी साजिश में गिरफ्तार किया था। वह कथित तौर पर रिसिन (घातक जहर) की तैयारी कर रहा था और इसके लिए एआई टूल्स व गूगल सर्च की मदद ले रहा था। इस तरह की घटना एआई सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है। फिलहाल कंपनियों के पास इसका कोई ठोस मैकेनिज्म नहीं है। चैटजीपीटी ने 94% वायरोलॉजिस्ट को हरा दिया रलमैन और एसवेल्ट समेत कई एक्सपर्ट का कहना है कि पहले जो प्रोटोकॉल साइंस मैगजीन तक सीमित थे, अब एआई के जरिए वे इंटरनेट पर बिखरे हुए हैं। आज कच्चा जेनेटिक मटेरियल खरीदना, उसे लैब आउटसोर्स करना व लॉजिस्टिक्स संभालना चैटबॉट की मदद से संभव है। जॉन्स हॉपकिन्स सेंटर के डॉ. मोरित्ज हांके कहते हैं कि चैटबॉट्स द्वारा सुझाए गए तरीके ‘अद्भुत रूप से यथार्थवादी’ हैं। ताजा स्टडी के नतीजे चौंकाने वाले हैं- चैटजीपीटी ने लैब प्रोटोकॉल से जुड़े कठिन सवालों के जवाब देने में 94% वायरोलॉजिस्ट को पछाड़ दिया। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
How long does a boiled egg stay fresh and store in fridge know expert tips | उबला हुआ अंडा कितने दिनों तक ताजा रहता है? क्या फ्रिज में स्टोर कर खा सकत

Last Updated:April 16, 2026, 18:19 IST How long do boiled egg last: अंडा प्रोटीन का सबसे सस्ता स्रोत है. रोजाना एक-दो अंडे खाने के कई फायदे हैं. लेकिन क्या उबले हुए अंडे को भी स्टोर करना चाहिए. अक्सर अंडे को उबालने में ज्यादा समय लगता है और ऑफिस जाने वाले लोगों के पास हमेशा समय का अभाव रहता है. इसलिए कुछ लोगों के मन में रहता है कि अगर उबले हुए अंडे को फ्रिज में रख देंगे और बाद में इसे खा ले तो क्या इससे नुकसान होगा. आइए इसके बारे में एक्सपर्ट से जानते हैं. उबलने के बाद अंडा कितने दिनों तक सुरक्षित रहता है? यह सवाल इसलिए भी जरूरी है कि अगर एक ही दिन मन हुआ कि 10 अंडे उबाल लें और उसे रख लें और इसे दो-तीन दिनों में का लें तो ऐसी स्थिति में क्या इन पहले से उबले हुए अंडे को खाना चाहिए या नहीं. क्या फ्रिज में रखा अंडा 4-5 दिन बाद भी वही पोषण देता है, या वह आपके पेट के लिए फूड पॉइजनिंग का कारण बन सकता है? कई लोग सोचते हैं कि अंडा एक बार उबालने के बाद खराब नहीं होता. लेकिन सच में, अगर उबले हुए अंडे को गलत तरीके से रखा जाए, तो उसमें सैल्मोनेला जैसे खतरनाक बैक्टीरिया आ सकते हैं. आपका पसंदीदा अंडा धीरे-धीरे आपकी सेहत के लिए स्लो पॉइजन बन सकता है. तो इसे रोकने के लिए क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं. उबले हुए अंडे कितने दिन तक रख सकते हैं- अगर आप उबले हुए अंडे को स्टोर करना चाहते हैं तो इसे संभालकर रखने की जरूरत है. एक्सपर्ट के मुताबिक अंडे को उबालने के बाद उसकी सुरक्षा और ताजगी पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करती है कि उसे कैसे और किस तापमान पर रखा गया है. छिलके के साथ और बिना छिलके वाले अंडे की उम्र में जमीन-आसमान का फर्क होता है. इसलिए उबले हुए अंडों की शेल्फ लाइफ इस बात पर निर्भर करती है कि आप उन्हें कैसे स्टोर करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google रेफ्रिजरेटर में छिलके के साथ रखें- एक्सपर्ट के मुताबिक अगर आप बिना छिलका उतारे हुए अंडे को रेफ्रिजरेटर में 40°F (4°C) या उससे कम तापमान पर रखते हैं, तो वे 7 दिन तक ताजा रह सकते हैं. अंडे का छिलका बैक्टीरिया से बचाने के लिए एक प्राकृतिक सुरक्षा देता है. अगर आपने अंडे का छिलका उतार दिया है और उसे फ्रिज में रख भी दिया तो दो से तीन दिन के अंदर इसे खा लें. छिलका उतारे हुए अंडे को सूखने से बचाने के लिए गीले पेपर टॉवल के साथ एयरटाइट डिब्बे में रखें. उबले हुए अंडे को बाहर 2 घंटे से ज्यादा बाहर न रखें. अगर तापमान 90°F (32°C) से ज्यादा है, तो उन्हें 1 घंटे के अंदर फ्रिज में रखें या खा लें. अंडा खराब हुआ है या नहीं जानने के लिए फ्लोट टेस्ट करें, लेकिन उबले हुए अंडों के मामले में यह तरीका काम नहीं करता है.अगर अंडे का छिलका उतारने के बाद उसमें मसी, अमोनिया या सल्फर जैसी कोई गंध आती है, तो उसे तुरंत फेंक दें. अगर छिलके में दरार है या अंडा ढीला लगता है, तो इसका मतलब है कि उसमें बैक्टीरिया घुस चुके हैं. अगर अंडे के सफेद हिस्से में गुलाबी, हरे या काले धब्बे दिखें, तो वह खराब होने का संकेत हो सकता है. ऐसी स्थिति में चाहे अंडा ताजा ही क्यों न लगे, उसे तुरंत फेंक दें. अगर अंडे से अजीब गंध आए या उसकी जर्दी (Yolk) का रंग असामान्य रूप से गहरा या चिपचिपा हो जाए, तो उसे तुरंत फेंक दें. ऐसे अंडे को खाने की भूल कभी न करें. क्योंकि इससे फूड प्वाइजनिंग हो सकता है. अगर अंडे की जर्दी के आसपास ग्रे या हरे रंग का निशान है तो इसका मतलब ये खराब नहीं हुआ है, बल्कि ज्यादा उबालने की वजह से ऐसा होता है. ऐसे अंडे खाना सुरक्षित है. अंडे उबालने के बाद तुरंत उन्हें ठंडे पानी में डालें. इससे अंडे जल्दी खराब नहीं होते और ज्यादा समय तक ताजा रहते हैं. अंडे 7 दिन से ज्यादा नहीं टिकते. भारत के गर्म और नम मौसम में, उबले अंडे को जितना जल्दी हो सके फ्रिज में रखना चाहिए. पाचन के लिए उबले अंडे के साथ समुद्री नमक या काली मिर्च इस्तेमाल करें, इससे शरीर की ऊर्जा बनी रहती है. उबले हुए अंडे प्रोटीन का अच्छा स्रोत हैं, लेकिन उनकी ताजगी बनाए रखना आपकी जिम्मेदारी है. गर्भवती महिलाएं, बुजुर्ग और छोटे बच्चों को अंडे की ताजगी को लेकर खास ध्यान रखना चाहिए. इन लोगों को अंडे उबालकर तुंरत खा लेना चाहिए. सबसे अच्छा यही है कि अंडे को उबाल कर तुंरत खा लें. (डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध रिपोर्ट्स और जानकारी पर आधारित है. इसका news18 से कोई संबंध नहीं है और news18 इसकी किसी भी तरह से जिम्मेदारी नहीं लेता.) First Published : April 16, 2026, 18:19 IST
परीक्षा परिणाम का तनाव और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य | Child Depression Symptoms & Expert Advice

Last Updated:April 03, 2026, 10:05 IST Child Depression Symptoms & Expert Advice: राजस्थान में बोर्ड परीक्षा परिणामों के बाद बच्चों में बढ़ते आत्महत्या के मामलों ने समाज को झकझोर दिया है. पाली की हालिया घटना के संदर्भ में मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने माता-पिता को विशेष सलाह दी है. उनका कहना है कि बच्चों के साथ दोस्त जैसा व्यवहार करना और उनके साथ समय बिताना बहुत जरूरी है. आज के दौर में माता-पिता की व्यस्तता और बच्चों से संवाद की कमी उन्हें डिप्रेशन की ओर धकेल रही है. बच्चों की तुलना दूसरों से करना और उन पर ऊंचे अंकों का दबाव बनाना उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए घातक है. डॉ. गहलोत के अनुसार, माता-पिता को बच्चों को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि कोई भी परीक्षा जीवन से बड़ी नहीं है. ख़बरें फटाफट Child Depression Symptoms & Expert Advice: एक माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे खौफनाक मंजर क्या हो सकता है? शायद वह, जब उन्हें अपने जिगर के टुकड़े की ‘खून से सनी देह’ देखनी पड़े या मासूम को ‘फंदे’ से झूलता देखना पड़े. यह सोचने मात्र से दिल दहल जाता है, लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि ‘परीक्षा का परिणाम’ अब बच्चों की जिंदगी पर भारी पड़ने लगा है. हाल ही में पाली में 10वीं के रिजल्ट के बाद एक छात्र द्वारा डिप्रेशन में आकर उठाया गया खौफनाक कदम इसी ओर इशारा करता है. सवाल यह है कि क्या इस मासूम को बचाया जा सकता था? जवाब है-हाँ. अगर माता-पिता समय रहते अपने बच्चे के बदलते हाव-भाव और उसकी ‘खामोश चीख’ को सुन लेते, तो शायद आज वह हमारे बीच होता. लोकल-18 से खास बातचीत में राजस्थान के जाने-माने मनोचिकित्सक डॉ. संजय गहलोत ने कहा कि यह ऐसी स्थितियां हैं जिन्हें समय रहते भांप लिया जाए तो अनहोनी को रोका जा सकता है. अक्सर माता-पिता चाहते हैं कि जो वे स्वयं जीवन में नहीं कर पाए, वह उनका बच्चा करे. इसके कारण बच्चे भारी दबाव महसूस करते हैं. डॉ. गहलोत के अनुसार, बच्चों के व्यवहार में बदलाव अचानक नहीं होता. इसके पीछे कई कारण होते हैं. यदि माता-पिता जागरूक हैं और बच्चों के साथ पर्याप्त समय व्यतीत करते हैं, तो बच्चा अपनी हर छोटी-बड़ी परेशानी पहले अपने परिवार को बताता है. आज के व्यस्त दौर में माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद कम हो गया है, जिससे बच्चे घर में खुद को अकेला महसूस करने लगते हैं. इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहींडॉ. संजय गहलोत सलाह देते हैं कि बच्चों को यह समझाना बेहद जरूरी है कि इम्तिहान जिंदगी का आखिरी मकसद नहीं है. परीक्षाएं और पढ़ाई जीवन का एक हिस्सा मात्र हैं. केवल 10वीं और 12वीं की परीक्षा ही भविष्य तय नहीं करती, यह तो बस शुरुआत है. कई बार परिवार का आपसी कलह और माता-पिता के बीच अनबन भी बच्चे को मानसिक रूप से तोड़ देती है. ऐसी स्थिति में बच्चा अपनी बात कहने से डरता है. उसे लगता है कि यदि नंबर अच्छे नहीं आए या वह फेल हो गया, तो वह माता-पिता को क्या मुंह दिखाएगा. माता-पिता द्वारा बच्चों के सामने बहुत ऊंचे आदर्श रख देना और दूसरे बच्चों से उनकी निरंतर तुलना करना डिप्रेशन का सबसे बड़ा कारण बनता है. स्कूल और शिक्षकों की भी अहम जिम्मेदारीसिर्फ घर ही नहीं, स्कूल का वातावरण भी बच्चों पर गहरा प्रभाव डालता है. अच्छे रिजल्ट और स्कूल की रैंकिंग के लिए बच्चों पर अतिरिक्त दबाव डाला जाता है. डॉ. गहलोत का मानना है कि स्कूलों को भी बच्चों की मनोस्थिति समझते हुए काम करना चाहिए. शिक्षकों को चाहिए कि वे बच्चों के व्यवहार में आने वाले बदलावों को नोटिस करें. यदि कोई बच्चा अचानक शांत रहने लगे, अकेला महसूस करे या पढ़ाई से कतराने लगे, तो उसे तुरंत सहायता और परामर्श दिया जाना चाहिए. समय रहते पहचान और सहयोग ही बच्चों को मौत के मुंह से बाहर निकाल सकता है. About the Author vicky Rathore Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a seasoned multimedia journalist and digital content specialist with 8 years of experience across digital media, social media management, video production, editing, content…और पढ़ें Location : Pali,Pali,Rajasthan First Published : April 03, 2026, 10:05 IST
Sweating Pattern Health Signs | Night Sweat Smell Disease; Expert Advice

2 घंटे पहलेलेखक: गौरव तिवारी कॉपी लिंक गर्मियों में पसीना आना कॉमन है। लेकिन क्या आपने कभी ऐसा महसूस किया है कि तापमान सामान्य है, फिर भी पसीना आ रहा है। पसीने से अजीब सी स्मेल आ रही है। अगर हां, तो ये कॉमन नहीं है। इसका मतलब ये हो सकता है कि हमारा शरीर किसी हेल्थ कंडीशन की ओर इशारा कर रहा है। इंसान के स्वस्थ रहने के लिए पसीना आना जरूरी है, लेकिन कई बार यह सेहत से जुड़े कई अहम संकेत भी देता है। ‘साइंस डेली’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, पसीना सालों पहले ही कुछ हेल्थ कंडीशंस के संकेत देने लगता है। स्वेटिंग पैटर्न (पसीने का पैटर्न) से इसका पता लगा सकते हैं। इसलिए ‘फिजिकल हेल्थ’ में आज समझेंगे कि पसीना क्यों आता है। साथ ही जानेंगे कि- इसका हेल्दी पैरामीटर क्या है? इसकी स्मेल किस बात का संकेत है? सवाल- पसीना क्यों आता है? यह शरीर के लिए क्यों जरूरी है? जवाब- पसीना शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम है। जब बॉडी का तापमान बढ़ता है, तो यह पसीने के जरिए खुद को ठंडा करती है। जब पसीना वाष्पित होता है तो शरीर का तापमान कम होता है। ये शरीर से अतिरिक्त गर्मी को कम करता है, जिससे ओवरहीटिंग नहीं होती। एक्सरसाइज, गर्म मौसम, स्ट्रेस या हाॅर्मोनल बदलाव में पसीना ज्यादा आता है, क्योंकि इससे मेटाबॉलिज्म और बॉडी हीट बढ़ती है। अगर पसीने का पैटर्न सामान्य है तो इसका मतलब है कि हार्ट, नर्वस सिस्टम और टेम्परेचर कंट्रोलिंग सिस्टम स्मूदली काम कर रहा है। सवाल- क्या पसीना आने का भी कोई हेल्दी पैरामीटर होता है? क्या ये हेल्थ का मार्कर हो सकता है? जवाब- पसीने की मात्रा हर व्यक्ति में अलग होती है। यह फिटनेस लेवल, जेनेटिक्स और मौसम से प्रभावित होता है। एक्सरसाइज के समय पसीना आना अच्छी कार्डियोवस्कुलर एडाप्टेशन का संकेत हो सकता है। कार्डियोवस्कुलर एडाॅप्टेशन का मतलब है, हार्ट और ब्लड वेसल्स शरीर की जरूरतों के अनुसार खुद को एडजस्ट कर रही हैं। बिल्कुल पसीना न आना या बहुत ज्यादा आना (हाइपरहाइड्रोसिस) कभी-कभी नर्व, हॉर्मोन या स्किन प्रॉब्लम्स से जुड़ा हो सकता है। पसीने की गंध या रंग में बदलाव इन्फेक्शन या डिहाइड्रेशन का संकेत दे सकता है। हेल्दी पैरामीटर यह है कि शरीर की जरूरत के अनुसार तापमान संतुलन बना रहे, थकान या चक्कर जैसे लक्षण न हों। सवाल- क्या ज्यादा या कम पसीना आना किसी हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है? जवाब- हां, ज्यादा पसीने का मतलब है कि बॉडी की टेम्परेचर कंट्रोल करने की क्षमता प्रभावित हुई है। अगर बिना मेहनत किए ही पसीना आ रहा है तो हॉर्मोन्स या नर्वस सिस्टम से जुड़ी समस्या हो सकती है। वहीं बहुत कम पसीना डिहाइड्रेशन जैसी किसी समस्या का संकेत हो सकता है। ज्यादा या कम पसीना आने के सभी संभावित कारण ग्राफिक में देखिए- सवाल- स्वेटिंग पैटर्न (कब, कितना और कहां) से सेहत के बारे में क्या पता चलता है? जवाब- पसीने का पैटर्न और उसकी स्मेल कई हेल्थ रिस्क का संकेत दे सकती है। अलग-अलग संकेत क्या बताते हैं, ग्राफिक में देखिए- सवाल- पसीने का पैटर्न कब किसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है? जवाब- पसीना आना सामान्य है और स्वस्थ रहने के लिए जरूरी भी है। हालांकि, कुछ मामलों में यह किसी गंभीर समस्या का संकेत भी हो सकता है- अचानक ठंडा-चिपचिपा पसीना- लो BP या हार्ट स्ट्रेस संकेत हो सकता है। बहुत तेज बदबू वाला पसीना- इन्फेक्शन या मेटाबॉलिक बदलाव का संकेत हो सकता है। मेहनत के बिना लगातार पसीना- यह हाइपरहाइड्रोसिस का संकेत हो सकता है। चक्कर, कमजोरी के साथ पसीना- शरीर में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन का संकेत हो सकता है। तेज गर्मी में भी पसीना न होना- कूलिंग फेलियर, अनहाइड्रोसिस का संकेत हो सकता है। रात में अचानक गर्मी के साथ पसीना- क्रॉनिक इन्फेक्शन या हॉर्मोन इश्यू का संकेत हो सकता है। एकदम नया स्वेटिंग पैटर्न- ऐसे में मेडिकल चेकअप जरूरी है। सवाल- क्या हाॅर्मोनल बदलाव, थायरॉइड या डायबिटीज के कारण भी स्वेटिंग पैटर्न बदल सकता है? जवाब- हां, हॉर्मोनल बदलाव, थायरॉइड या डायबिटीज तीनों का स्वेटिंग पैटर्न से सीधा कनेक्शन है- हॉर्मोन शरीर के तापमान और मेटाबॉलिज्म को कंट्रोल करते हैं। थायरॉइड ज्यादा एक्टिव होने पर ज्यादा ब़डी हीट बनती है। इससे पसीना बढ़ सकता है। लो थायरॉइड में पसीना कम और स्किन ड्राई लग सकती है। बीमारी जैसे हाइपर-थायरॉइडिज्म में बार-बार पसीना आ सकता है। ब्लड शुगर लो होने पर अचानक पसीना और कंपकंपी हो सकती है। यह कंडीशन डायबिटीज में भी देखी जाती है। प्यूबर्टी या मेनोपॉज में हॉट फ्लैशेज (अचानक गर्मी लगना) के साथ स्वेटिंग हो सकती है। सवाल- क्या स्ट्रेस और एंग्जाइटी के कारण भी पसीने का पैटर्न बदल सकता है? इसके क्या संकेत होते हैं? जवाब- हां, स्ट्रेस के कारण शरीर की हॉर्मोनल एक्टिविटीज बदलती हैं और इससे पसीने का पैटर्न भी बदल जाता है- स्ट्रेस में सिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (शरीर का फाइट या फ्लाइट मोड में जाना) एक्टिव होकर पसीना बढ़ाता है। हथेलियों, तलवों और अंडरआर्म में अचानक पसीना आना कॉमन है। सामान्य तापमान में भी पसीना आना एंग्जाइटी ट्रिगर का संकेत हो सकता है। स्ट्रेस बढ़ने पर तेज हार्ट रेट के साथ पसीना हो सकता है। पब्लिक स्पीकिंग या डर की स्थिति में पसीना बढ़ना सामान्य प्रतिक्रिया है। लगातार स्ट्रेस से स्वेटिंग पैटर्न अनियमित हो सकता है। सवाल- हेल्दी स्वेटिंग और बॉडी टेम्परेचर बैलेंस रखने के लिए लाइफस्टाइल में क्या बदलाव करने चाहिए? जवाब- इसके लिए लाइफस्टाइल में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करने चाहिए। इसे ग्रफिक में देखिए- सवाल- पसीने की स्मेल कम करने और स्किन को हेल्दी रखने के लिए क्या करना चाहिए? जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए- रोज नहाते समय अंडरआर्म, पैर और स्किन फोल्ड्स (शरीर के जॉइंट्स के आसपास की स्किन) अच्छी तरह साफ करें। एंटीबैक्टीरियल और स्किन-फ्रेंडली साबुन इस्तेमाल करें। नहाने के बाद थोड़ी देर बॉडी में हवा लगने दें। ढीले और साफ कपड़े पहनें। पसीना होने पर रोज कपड़े बदलें। डाइट में फाइबर, हरी सब्जियां और प्रोबायोटिक फूड शामिल करें। बहुत मीट, प्रोसेस्ड और जंक-फूड कम खाएं। नींबू पानी या हर्बल ड्रिंक लें। इससे बॉडी ओडर कंपाउंड्स नही बनाती है। सवाल- किस तरह का स्वेटिंग पैटर्न दिखने पर डॉक्टर के पास जाना चाहिए? जवाब- इन सभी कंडीसंस में डॉक्टर से कंसल्ट
Is Personal Space Demand a Crime? Expert Relationship Advice for Mother Wife

Hindi News Lifestyle Is Personal Space Demand A Crime? Expert Relationship Advice For Mother Wife 2 दिन पहले कॉपी लिंक सवाल- मेरी शादी को 4 साल हो चुके हैं। 2 साल का बच्चा है। बीते कुछ दिनों से मेरे भीतर अजीब सा अलगाव पैदा हो रहा है। ऐसा लग रहा है, जैसे मैंने पिछले कुछ सालों में अपने लिए कुछ किया ही नहीं है। अब मुझे अकेले रहना ज्यादा अच्छा लगता है। जब मैं ये बात हसबैंड से शेयर करती हूं तो उन्हें लगता है कि मैं उनसे दूर जाना चाहती हूं। वो मुझे समझ ही नहीं पा रहे हैं। मुझे डर है कि कहीं हमारी केमिस्ट्री न खराब हो जाए। क्या रिश्ते में स्पेस मांगना गलत है? मुझे क्या करना चाहिए? एक्सपर्ट: डॉ. जया सुकुल, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, नोएडा जवाब- मैं अपने जवाब की शुुरुआत एक फिल्म से करना चाहूंगी। एक जॉर्जियन फिल्म है, “माय हैप्पी फैमिली।” इसमें एक शादीशुदा, भरे–पूरे परिवार वाली महिला आपकी ही तरह पर्सनल स्पेस चाहती है। थोड़ा अकेले रहना, थोड़ा अपने साथ वक्त बिताना, थोड़ा खुद से बातें करना। सोचिए, हिंदुस्तान से लेकर जॉर्जिया तक औरतें ये करना चाहती हैं। लेकिन बहुत कम में यह हिम्मत होती है कि वो आपकी तरह सवाल लिखकर अपने दिल की बात कहें। आपका सवाल ही बता रहा है कि आप एक संजीदा इंसान हैं। आप खुद को जानने-समझने की यात्रा तय करना चाहती हैं। इसमें कुछ भी गलत नहीं है। भारतीय समाज की मुश्किलें मुश्किल ये है कि हमारे समाज ने खुद के बारे में सोचने को स्वार्थ से जोड़ दिया है। महिलाओं के लिए तो ये और भी मुश्किल है। अगर कोई महिला कहती है कि उसे अकेले रहना अच्छा लगता है या उसे थोड़ा स्पेस चाहिए तो उस पर तुरंत सवाल खड़े कर दिए जाते हैं। क्या रिश्ता ठीक नहीं है? क्या शादी में प्यार कम हो गया है? क्या पति से दूर जाना चाहती हो? जबकि सच्चाई यह है कि खुद के लिए समय मांगना, खुद को समझना, खुद के साथ रहना, ये सब रिश्ता तोड़ने के लिए नहीं, उसे बचाने के लिए की गई कोशिशें हैं। शादी का मतलब ‘सेल्फ’ का मर जाना नहीं हमारे समाज और संस्कृति में शादी की बुनियादी परिभाषा ही गलत है। हमें लगता है कि शादी होने का मतलब है, अब महिला की अपनी कोई निजता नहीं रह गई है। उसकी पहचान ही यही है कि वो पत्नी है, मां है, बहू है। लेकिन वो एक इंसान नहीं है, जो आजादी और एजेंसी चाह सकती है। शादी और उसमें भी खासतौर पर छोटे बच्चों की जिम्मेदारी बहुत डिमांडिंग जॉब है। अमूमन औरतों को उतनी मदद नहीं मिलती, जिसकी उन्हें जरूरत है। इन और ऐसे ही तमाम कारणों से अक्सर शादी में दूरियां आ जाती हैं। खुद को जानना है जरूरी इस दुनिया में हर इंसान का अपना अस्तित्व होता है। यहां पर अस्तित्व यानी “मैं कौन हूं, मुझे क्या अच्छा लगता है, मुझे किस चीज से खुशी मिलती है।” यह जानना इसलिए जरूरी है, क्योंकि दुनिया का हर रिश्ता इसके बाद ही आता है। भले ही वह रिश्ता पति-पत्नी का हो, माता-पिता का हो या मां-बच्चे का। अगर कोई इंसान अंदर से खुश नहीं है, संतुष्ट नहीं है, तो वह रिश्तों में भी खुशी नहीं बांट सकता है। स्पेस मांगने में गिल्ट क्यों? अपने लिए स्पेस मांगते हुए बिल्कुल भी संकोच या गिल्ट नहीं फील करना चाहिए। यह अकेलेपन की मांग नहीं, खुद के लिए स्पेस की चाहत है। रिश्ते में स्पेस मांगने का मतलब यह नहीं है कि आप अपने पति से दूर जाना चाहती हैं। इसका मतलब यह है कि आप खुद के करीब आना चाहती हैं। यह फर्क समझना बहुत जरूरी है। पर्सनल स्पेस में इंसान अपने इमोशंस को बेहतर ढंग से प्रोसेस करना सीखता है। वह खुशी और दुख को पहचानकर उनसे डील करना सीखता है। नकारात्मकता और एंग्जाइटी से निपटना सीखता है। इसका सकारात्मक असर उसके सभी रिश्तों पर पड़ता है। पर्सनल स्पेस के फायदे ग्राफिक में देखिए- कंपैशन और जिम्मेदारी से कहें अपनी बात बहुत मुमकिन है कि जब आप अपने हसबैंड से ये बात शेयर करेंगी तो उन्हें लगे कि आप उनसे दूर जाना चाहती हैं। यह उनकी गलतफहमी हो सकती है, लेकिन उनकी अपनी भावनाएं भी जायज हैं। इसलिए ऐसे मामले में बातचीत बहुत सोच-समझकर करनी चाहिए। ऐसी बातें भावनाओं में बहकर नहीं, समझदारी और थोड़ी डिप्लोमेसी के साथ करनी चाहिए। डिप्लोमेसी का मतलब चालाकी से नहीं, बल्कि सही भाषा से है। हसबैंड से पूछें ये सवाल क्या आपने कभी खुद के लिए समय निकाला है? क्या आप दोस्तों के साथ बाहर जाते हैं? क्या आप क्रिकेट देखते हैं, अपने शौक पूरे करते हैं? क्या आप यह सब करते हुए खुद को कम पति या कम पिता (पति या पिता का कम दायित्वबोध) महसूस करते हैं? जब वह इन सवालों का जवाब देंगे तो उन्हें धीरे-धीरे समझ आएगा कि जैसे उन्हें अपने तरीके से रिचार्ज होने का हक है, वैसे ही आपको भी हक है। यह तुलना नहीं, जरूरी उदाहरण है। असली समस्या न भूलें बात करते हुए यह न भूलें कि असल समस्या क्या है। उन्हें यह समझाने की कोशिश करें कि अगर आप खुद को नहीं संभालेंगी तो आगे चलकर इसका असर रिश्ते पर पड़ सकता है। बताएं कि आपको इसी बात का डर है। यहां ये समझना भी जरूरी है कि जब आप स्पेस मांगेंगी तो सामने वाला इंसान असहज हो सकता है। कुछ लोग इसे समझते हैं, जबकि कुछ लोग इसे अपने इगो पर ले लेते हैं। यह भी संभव है कि आपके पति साइलेंट ट्रीटमेंट देने लगें, आपसे बात करना कम कर दें, इंटिमेसी से दूरी बनाने लगें। आपको यह जताने लगें कि जैसे उन्हें आपकी जरूरत ही नहीं है। मानसिक रूप से तैयार रहें पति के इस तरह के रिएक्शंस उनकी अपनी असुरक्षा के कारण हो सकते हैं। उन्हें यह डर हो सकता है कि उनका आप पर कोई कंट्रोल नहीं रहेगा। इसलिए जरूरी है कि आप मानसिक रूप से तैयार रहें कि शुरुआत में सब कुछ स्मूद नहीं होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं कि आप गलत हैं। यहां आपको इमोशनल नहीं, लॉजिकल रहना पड़ेगा। अगर वो आपसे कहें कि तुम ऐसा करोगी








