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दौसा में सिलिकोसिस का कहर, ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी! – News18 हिंदी

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सांसों पर है गहरा संकट: दौसा में सिलिकोसिस का कहर, ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी!

 

Silicosis Patient In Dausa District : दौसा जिले से एक ऐसी सच्चाई सामने आ रही है, जो अंदर तक झकझोर देती है. यहां हजारों लोग सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी पीड़ा अब भी अनसुनी है. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. मानपुर क्षेत्र के एक पीड़ित घनश्याम योगी पिछले चार साल से इस बीमारी से लड़ रहे हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब वे पूरी तरह ऑक्सीजन पर निर्भर हैं. परिवार के लिए हर दिन 800 से 1000 रुपये का खर्च उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. उनकी पत्नी बताती हैं कि आर्थिक तंगी के बीच इलाज और ऑक्सीजन की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मरीजों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है. कार्ड न बनने और सहायता न मिलने से हालात और गंभीर हो रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की है, जो हर दिन सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और राहत की उम्मीद में सिस्टम की ओर देख रहे हैं.

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सांसों पर है गहरा संकट: दौसा में सिलिकोसिस का कहर, ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी!

 

Silicosis Patient In Dausa District : दौसा जिले से एक ऐसी सच्चाई सामने आ रही है, जो अंदर तक झकझोर देती है. यहां हजारों लोग सिलिकोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं, लेकिन उनकी पीड़ा अब भी अनसुनी है. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर कर देती है और जब तक इसका पता चलता है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है. मानपुर क्षेत्र के एक पीड़ित घनश्याम योगी पिछले चार साल से इस बीमारी से लड़ रहे हैं. हालात इतने खराब हो चुके हैं कि अब वे पूरी तरह ऑक्सीजन पर निर्भर हैं. परिवार के लिए हर दिन 800 से 1000 रुपये का खर्च उठाना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है. उनकी पत्नी बताती हैं कि आर्थिक तंगी के बीच इलाज और ऑक्सीजन की व्यवस्था करना बेहद मुश्किल हो गया है. सबसे चिंताजनक बात यह है कि कई मरीजों को अब तक सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाया है. कार्ड न बनने और सहायता न मिलने से हालात और गंभीर हो रहे हैं. यह कहानी सिर्फ एक परिवार की नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों की है, जो हर दिन सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और राहत की उम्मीद में सिस्टम की ओर देख रहे हैं.

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