जीवन में लिया संकल्प, मृत्यु के बाद परिवार ने निभाया:इंदौर में 83 वर्षीय महिला की देह दान; नेत्र, त्वचा भी दान कर दी मानवता की सीख

इंदौर में 83 वर्षीय वृद्धा के निधन के बाद उनके लिए गए संकल्प को पूरा करते हुए परिजन ने उनकी देह दान की है। इसी कड़ी में उनकी आंखें और त्वचा भी दान की है जिससे दूसरे लोगों की अंधियारी जिंदगी में उजियारा होगा। मंगला सहाने (83) निवासी टेलीफोन नगर के निधन बाद परिवार ने यह फर्ज अदा किया। वह धार्मिक प्रवृत्ति की थी और कुछ दिनों से बीमार थी। दुख की इस घड़ी में परिजनों ने अंग और देहदान कर समाज के समक्ष परोपकार का अनुकरणीय संदेश दिया है। उनके दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ ने बताया कि स्व. मंगला ने जीवित रहते हुए जनवरी 2023 में एमजीएम मेडिकल कॉलेज में देहदान का संकल्प पत्र भरकर रजिस्ट्रेशन कराया था। उनके निधन के बाद बेटी जयश्री और दामाद डॉ. प्रमोद बंसोड़ (संयोजक, भाजपा चिकित्सा प्रकोष्ठ, वीर सावरकर मंडल) ने उनके संकल्प को जिम्मेदारीपूर्वक पूर्ण किया। नेत्र दान एमके इंटरनेशनल आई बैंक में, त्वचा दान चोइथराम स्किन बैंक में और देह दान की प्रक्रिया एमजीएम मेडिकल कॉलेज में हुई। उनके निवास पर आयोजित अंतिम विदाई के दौरान मध्य प्रदेश शासन की ओर से सम्मान स्वरूप पुलिस द्वारा “गार्ड ऑफ ऑनर”दिया गया। इस अवसर पर भोपाल के सरकारी मेडिकल कॉलेज के पूर्व डीन डॉ. सलिल भार्गव और मुस्कान ग्रुप के सेवादार संदीपन आर्य और जीतू बगानी ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अंग और देहदान की प्रक्रिया की जानकारी साझा की। तकनीकी सेवाएं गोपाल सिरोके और जयवंत निकम की टीम द्वारा प्रदान की गईं। परिजनों ने बताया कि दिवंगत के नेत्रों से दृष्टिहीनों को नई रोशनी मिलेगी, त्वचा जले हुए मरीजों के उपचार में सहायक होगी और उनका शरीर मेडिकल कॉलेज के स्टूडेंट्स के लिए एनाटॉमी के अध्ययन में अमूल्य योगदान देगा।
खरगोन मंडी में डॉलर चना के दाम पर हंगामा:कम भाव से नाराज किसानों का चक्काजाम, एसडीएम की समझाइश पर खुला रास्ता

खरगोन मंडी में डॉलर चना के कम भाव मिलने से नाराज किसानों ने सोमवार दोपहर प्रदर्शन किया। नीलामी में डॉलर चना की अधिकतम बोली 7,000 रुपए प्रति क्विंटल लगने पर किसान भड़क गए। उन्होंने इसे कम बताते हुए कारण पूछा, जिस पर व्यापारियों ने ईरान-इजरायल युद्ध को जिम्मेदार ठहराया। किसानों ने इस जवाब से असंतोष जताते हुए मंडी में खरीदी रोक दी। लगभग 150 से अधिक किसानों ने बावड़ी बस स्टैंड पहुंचकर सड़क पर ट्रैक्टर अड़ा दिए और नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। जामनिया के किसान देवेंद्र यादव ने बताया कि उन्हें 6-7 हजार रुपए प्रति क्विंटल का भाव मिल रहा है, जबकि उन्हें 10 से 12 हजार रुपए का भाव मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि व्यापारी युद्ध को कम भाव का कारण बता रहे हैं, लेकिन युद्ध तो कल से शुरू हुआ है, जबकि व्यापारी पिछले पांच दिनों से कम भाव दे रहे हैं। किसानों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की सुनवाई न होने के कारण उन्हें सड़क पर उतरना पड़ा। लगभग 45 मिनट तक चले इस हंगामे के कारण इंदौर रोड पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलने पर एसडीएम वीरेंद्र कटारे और कोतवाली थाना प्रभारी बीएल मंडलोई मौके पर पहुंचे और किसानों को समझाकर शांत कराया। यातायात पुलिस ने व्यवस्था बहाल की। सोमवार को दो दिन की छुट्टी के बाद मंडी में 650 से अधिक वाहनों में डॉलर चना पहुंचा था, जो इस सीजन की सबसे अधिक आवक रही। खरगोन मंडी में डॉलर चने की खरीदी 20 फरवरी से चल रही है। धामनोद और सनावद मंडियों में भी भाव को लेकर किसान संघ असंतोष जता चुके हैं। मंडी प्रशासन ने होली के मद्देनजर 3 और 4 मार्च की छुट्टी घोषित की है। व्यापारियों ने भी होली पर्व के कारण 7 मार्च तक नीलामी में भाग न ले पाने का आवेदन दिया है। इस प्रकार, अब मंडी 9 मार्च को खुलेगी।
CM बोले- 9 छोड़े थे, अब 48 चीते हो गए:कहा- वाइल्ड लाइफ में भारत ने दुनिया में किया नाम; विधायक लोधी के घर भी पहुंचे

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को ग्वालियर आए श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क में चीतों को छोड़े जाने पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि हमारे मध्य प्रदेश का फॉरेस्ट समृद्ध हो रहा है। अफ्रीका से लाकर जो नर और मादा चीते छोड़े गए हैं, उन्होंने मध्य प्रदेश की साख और बढ़ाई है। वाइल्ड लाइफ को लेकर भारत का नाम दुनिया में हुआ है। चीते एशिया महाद्वीप से विलुप्त हो गए थे, वे अब आबाद हो रहे हैं। हमें प्रसन्नता है कि 9 चीते छोड़ने के बाद अब इनकी संख्या 48 हो गई है। CM बोले- मध्यप्रदेश अब सबसे ज्यादा टाइगर ग्वालियर में सीएम डॉ. यादव ने कहा कि अब मध्य प्रदेश देश के अंदर सबसे ज्यादा टाइगर, सबसे ज्यादा लेपर्ड, सबसे ज्यादा चीते, और अब घड़ियाल के मामले में भी मध्य प्रदेश नंबर वन है। बीते समय की जो गणना सामने आई है उसके मुताबिक अब गिद्ध के आंकड़े भी समृद्ध हो रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव अपने दौरे के दौरान कूनो नेशनल पार्क में प्रवास के दौरान कूनो नदी के माध्यम से जलचरों को बढ़ावा देने के लिए मध्य प्रदेश सरकार की जो योजना है उससे आगे बढ़ रहे हैं, इसलिए सभी प्रकार के रोजगार के अवसर टूरिज्म सेक्टर वन्य प्राणी के आधार से मिले। यह चंबल का सबसे समृद्ध इलाका है। मैं उम्मीद करुंगा कि इसका लाभ हम सबको मिले। ग्वालियर, श्योपुर और अशोक नगर के दौरे पर हैं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन सिंह यादव रविवार को ग्वालियर, श्योपुर व अशोक नगर के प्रवास पर हैं। वे दोपहर 12 बजे ग्वालियर पहुंचे। उन्होंने एयरपोर्ट से सीधे ग्राम जलालपुर पहुंचकर शिवपुरी के पिछोर से विधायक प्रीतम लोधी की माताजी भागवती बाई के निधन पर शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं। विधायक प्रीतम लोधी की माताजी भागवती बाई का 26 फरवरी को लगभग 100 वर्ष की आयु में निधन हो गया था। इस दौरान प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष शहर जयप्रकाश राजौरिया, ग्रामीण भाजपा जिलाध्यक्ष प्रेम सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
हरदा में जलकर बढ़ोतरी पर घमासान, कांग्रेस ने उठाए सवाल:प्रस्ताव लाने वाले बीजेपी उपाध्यक्ष ही अब कर रहे पुनर्विचार की मांग

हरदा में जलकर की बढ़ी हुई दर को लेकर सियासी विवाद गहरा गया है। नगर पालिका परिषद की सामान्य बैठक में जलकर 75 रुपये प्रतिमाह से बढ़ाकर 200 रुपये कर दिया गया। परिषद में बताया गया कि प्रति कनेक्शन करीब 563 रुपये प्रतिमाह खर्च आ रहा है, इसी आधार पर दर बढ़ाने का निर्णय लिया गया। खास बात यह है कि जलकर बढ़ाने का प्रस्ताव नगर पालिका उपाध्यक्ष अंशुल गोयल ने ही रखा था। उन्होंने शुरुआत में 300 रुपये प्रतिमाह तक बढ़ाने का सुझाव दिया था, लेकिन चर्चा के बाद 200 रुपये प्रतिमाह की दर बहुमत से पारित कर दी गई। कांग्रेस ने किया था विरोध बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने 75 रुपये से सीधे 200 रुपये करने का विरोध किया था। उनका कहना था कि यदि दर बढ़ानी है तो उसे 100 रुपये प्रतिमाह किया जाए। यह आपत्ति परिषद की कार्यवाही में दर्ज है और इसके वीडियो प्रमाण भी मौजूद हैं। अब वही उपाध्यक्ष अंशुल गोयल मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) को पत्र लिखकर जलकर की दर कम करने या फैसले पर पुनर्विचार की मांग कर रहे हैं। इसे लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का आरोप: दोहरी राजनीति नेता प्रतिपक्ष अमर रोचलानी ने कहा कि जब प्रस्ताव खुद उपाध्यक्ष ने रखा और बहुमत से पारित कराया, तो अब दर कम करने की मांग किस आधार पर की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पहले बहुमत का उपयोग कर फैसला करती है और अब जनता के दबाव में खुद को हितैषी दिखाने की कोशिश कर रही है। परिषद बैठक बुलाने की मांग कांग्रेस ने मांग की है कि यदि वास्तव में जलकर कम करना है तो परिषद की विशेष बैठक बुलाकर औपचारिक प्रस्ताव लाया जाए और दर 100 रुपये प्रतिमाह तय की जाए। उनका कहना है कि केवल पत्र लिखना पर्याप्त नहीं है। जलकर वृद्धि को लेकर शहर में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। अब सभी की नजर नगर पालिका परिषद की अगली बैठक और प्रशासन के फैसले पर टिकी है।
नर्मदापुरम में 20 हजार पौधे उखाड़ फॉरेस्ट जमीन पर कब्जा:विभाग ने अतिक्रकण हटाया, देखरेख करने वाले वनकर्मियों पर कार्रवाई की तैयारी

नर्मदापुरम जिले के बानापुरा रेंज की झाड़बीड़ा बीट में प्लांटेशन की जमीन पर लगे करीब 20 हजार पौधों को उखाड़कर नष्ट कर दिया गया। आरोप है कि राजलढ़ाना गांव के करीब 100 ग्रामीणों ने खेती करने के उद्देश्य से लगभग 20 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा करने की कोशिश की। वन विभाग को जब इसकी जानकारी मिली तो राजस्व और पुलिस विभाग की मदद से संयुक्त कार्रवाई की गई। करीब 230 वनकर्मी, पुलिस और राजस्व अधिकारी मौके पर पहुंचे और कब्जा हटाया गया। कार्रवाई के दौरान वहां बनाई गई अस्थायी टपरियां हटाई गईं और बड़े गड्ढे खोदे गए, ताकि दोबारा खेती नहीं की जा सके। 2019 में हुआ था प्लांटेशन डीएफओ गौरव शर्मा ने बताया कि इस क्षेत्र में वर्ष 2019 में पौधारोपण किया गया था। अतिक्रमणकारियों ने करीब 20 हजार पौधों को नुकसान पहुंचाया है, जिससे विभाग को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। अब वन अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पौधों पर हुए खर्च की वसूली की जाएगी। जिम्मेदार स्टाफ पर भी होगी कार्रवाई डीएफओ ने यह भी कहा कि इस मामले में वन विभाग के जिन कर्मचारियों की लापरवाही सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा व्यवस्था ठीक से क्यों नहीं की गई, इस संबंध में रेंजर को जांच के निर्देश दिए गए हैं। संयुक्त टीम ने हटाया अवैध कब्जा झाड़बीड़ा बीट के कंपार्टमेंट नंबर 159 में राजलढ़ाना और पतलई गांव के कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया था। इसे हटाने के लिए वन विभाग को पुलिस और राजस्व विभाग की सहायता लेनी पड़ी। अभियान के दौरान एसडीओ अनिल विश्वकर्मा, नायब तहसीलदार कीर्ति प्रधान, एसडीओपी महेंद्र सिंह चौहान और थाना प्रभारी सुधाकर बरसकर सहित कई अधिकारी मौजूद रहे। फिलहाल वन विभाग ने साफ कर दिया है कि वन भूमि पर किसी भी तरह का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
Ratlam Police Medal Honour | Cabinet Minister Chetan Kashyap Presence 2026

दैनिक भास्कर द्वारा 28 फरवरी को पुलिस पदक सम्मान समारोह आयोजित किया जा रहा है। समारोह में अपने परिश्रम और साहस से पुलिस विभाग को गौरवांवित करने वाले पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों को पुलिस पदक सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। कार्यक्रम शनिवार दोपहर 1 ब . मुख्य अतिथि कैबिनेट मंत्री चेतन्य काश्यप, रतलाम रेंज डीआईजी निमिष अग्रवाल, एसपी अमित कुमार रहेंगे। आयोजन में 50 से ज्यादा पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों का सम्मान किया जाएगा। इसमें शांति व्यवस्था बनाए रखने, संपत्ति अपराध में बरामदगी करने, अपहरण किए गए बालक-बालिकाओं को तलाश कर लाने, चोरी, अवैध शराब व तस्करी के आरोपियों को पकड़ने, साइबर से जुड़े अपराधों का निकाल करने और न्यायालयीन कार्य में सहयोग करने वाले समेत बेहतर काम करने वाले शामिल रहेंगे। सम्मान के रूप में सभी को शील्ड प्रदान की जाएगी।
खबर मत करो, ये बताओ करना क्या है?:बीज निगम के अफसर का रिपोर्टर को ऑफर, फर्जी दस्तावेजों से नौकरी, अबतक ली 1.55 करोड़ सैलरी

मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम में 23 साल से एक ऐसा अधिकारी प्रोडक्शन मैनेजर के पद पर बैठा है, जिसकी नींव ही धोखाधड़ी और कूटरचित दस्तावेजों पर रखी गई है। उत्तर प्रदेश के झांसी निवासी लाल सिंह, मध्य प्रदेश का फर्जी जाति प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र बनाकर न केवल नौकरी हासिल करने में कामयाब रहा, बल्कि पिछले 23 सालों में 1.55 करोड़ रुपए से अधिक का वेतन ले चुका है। इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा होने और कृषि विभाग के सचिव द्वारा सेवा समाप्ति और FIR के स्पष्ट आदेश के बावजूद, बीज निगम के आला अधिकारी उसे बचाने में लगे हैं। भास्कर ने इस पूरे मामले की गहन पड़ताल की, जिसमें सामने आया कि कैसे एक व्यक्ति सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर सालों तक सरकार को धोखा देता रहा और मध्य प्रदेश के एक अनुसूचित जाति के हकदार का अधिकार मारता रहा। पढ़िए रिपोर्ट… दो बिंदुओं में समझें नियुक्ति का पूरा खेल जैसा कि दस्तावेजों से साफ है, लाल सिंह की पूरी शिक्षा उत्तर प्रदेश में हुई। फिर वह मध्य प्रदेश के कोटे के तहत आरक्षित पद पर नियुक्त कैसे हो गया? 1. विज्ञापन और फर्जी आवेदन: वर्ष 2002 में मध्य प्रदेश राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम ने विशेष भर्ती अभियान के तहत सहायक प्रबंधक (उत्पादन) के पदों के लिए विज्ञापन निकाला। शर्त थी कि आवेदक मध्य प्रदेश का मूल निवासी और अनुसूचित जाति वर्ग का हो। लाल सिंह ने 10 दिसंबर 2002 को इसी आरक्षित वर्ग में आवेदन किया। साक्षात्कार के बाद, 7 जनवरी 2003 को उसे नियुक्ति पत्र (आदेश क्रमांक एचओ/प्रशा/वि.भ.अ./2002/3893) जारी कर दिया गया। 2. फर्जी दस्तावेजों का जाल: नियुक्ति के बाद जब दस्तावेज सत्यापन की बारी आई, तो लाल सिंह ने खेल शुरू किया। उसने नायब तहसीलदार, ग्वालियर के कार्यालय से जारी एक अस्थायी जाति प्रमाण पत्र (क्रमांक 65-स. क्र. 6455, प्रकरण क्रमांक 2296/ 2002-2003, 19 अगस्त 2003) प्रस्तुत किया। यह प्रमाण पत्र न केवल अस्थायी था, बल्कि संदेहास्पद था। निवास प्रमाण पत्र में काट-छांट कर चौथी कक्षा की जगह पांचवीं कक्षा का जिक्र किया गया, जबकि लाल सिंह की पूरी शिक्षा झांसी से हुई थी। भास्कर की पड़ताल में हुआ धोखाधड़ी का खुलासा शिकायतकर्ता कर्मवीर चौहान द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी से इस फर्जीवाड़े की परतें उधड़ गईं। RTI से पता चला कि जिस प्रकरण क्रमांक 2296 (दिनांक 19 अगस्त 2003) का जाति प्रमाण पत्र लाल सिंह ने जमा किया था, उस क्रमांक पर ग्वालियर के गोपालपुरा निवासी चंद्र किशोर यादव पिता चतुर्भुज सिंह के नाम से प्रमाण पत्र जारी हुआ था। यानी लाल सिंह ने एक ऐसे नंबर का इस्तेमाल किया, जो किसी और को आवंटित था। यह सीधा-सीधा धोखाधड़ी और जालसाजी का मामला है। लाल सिंह बोला- खबर न करें, मामला वायरल होगा जब भास्कर रिपोर्टर ने सबूतों के साथ लाल सिंह से बात की, तो वह पहले तो मामले को टालता रहा, लेकिन बाद में खबर न छापने की मिन्नतें करने लगा। रिपोर्टर: आपके फर्जी जाति प्रमाण पत्र को लेकर कृषि सचिव ने एक्शन लेने के लिए नोटशीट जारी की है, सारे डॉक्यूमेंट मेरे पास हैं। क्या कहेंगे? लाल सिंह: हां, होंगे आपके पास। वह मामला अभी पेंडिंग है। हाईकोर्ट में भी गया है। छानबीन समिति में भी है। रिपोर्टर: आपकी स्कूलिंग कहां से हुई? लाल सिंह: मेरी स्कूलिंग एमपी और यूपी, दोनों जगह से हुई थी। (यह उनके दस्तावेजों के विपरीत है) रिपोर्टर: इतने साल तक नौकरी कैसे करते रहे? अधिकारियों को कैसे मैनेज किया? लाल सिंह: अधिकारियों ने सत्यापन करवाया है। कलेक्टर से कॉपी आई है। विभाग से कॉपी ग्वालियर कलेक्टर को गई और वहां से सत्यापन आया। (यह दावा झूठा है, क्योंकि RTI से पता चला है कि सत्यापन कभी हुआ ही नहीं) रिपोर्टर: हमारे पास सारे दस्तावेज हैं, बताइए क्या करना है? लाल सिंह: मुझे तो पूरी उम्मीद है कि आपकी भी सरकार सुनती है और आप भी इस मामले में मेरा सपोर्ट करोगे। रिपोर्टर: अब बताइए क्या करना चाहिए ? लाल सिंह: देखिए, आपका बड़ा प्लेटफार्म है, आपकी खबर का इंपैक्ट भी होगा। मेरी तो आपसे रिक्वेस्ट है कि आप खबर ना करें, क्योंकि यह मामला और वायरल होगा। बाकी ठीक है, यह इन्वेस्टिगेशन चलता रहेगा। आप मुझे बता दीजिए क्या करना है, मैं वो कर लूंगा। सचिव ने लिखा- सेवा समाप्त करें, आपराधिक केस दर्ज करें इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि धोखाधड़ी साबित होने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही है। किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग के सचिव निशांत वरवड़े ने 2 जनवरी 2026 को एक विस्तृत नोटशीट जारी की। यह आदेश सीधे प्रबंध संचालक, बीज निगम को भेजा गया था, लेकिन एक महीने से ज्यादा बीत जाने के बाद भी यह फाइल धूल फांक रही है। एमडी का गोलमोल जवाब, मामला बोर्ड में रखेंगे जब भास्कर ने बीज निगम के एमडी संदीप केरकेट्टा से पूछा कि सचिव के स्पष्ट आदेश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही, तो उन्होंने टालमटोल वाला जवाब दिया। उन्होंने कहा कि लाल सिंह के मामले का प्रपोजल हमने राज्य बीज एवं फार्म विकास निगम बोर्ड में रख दिया है। अब बोर्ड के सदस्य इस पर विचार करेंगे। यह जवाब अपने आप में एक बड़ा सवाल खड़ा करता है। जब विभाग के प्रशासनिक प्रमुख ने जांच के बाद नियुक्ति को अवैध मानकर सेवा समाप्ति का आदेश दे दिया है, तो उसे बोर्ड के सामने रखने का क्या औचित्य है? क्या यह आरोपी को बचाने और मामले को लंबा खींचने की कोशिश नहीं है? पद पर रहते हुए भ्रष्टाचार के भी गंभीर आरोप लाल सिंह का करियर सिर्फ फर्जी नियुक्ति तक सीमित नहीं है। सतना में क्षेत्रीय प्रबंधक रहते हुए उस पर बीजों की हेराफेरी कर 60 से 80 लाख रुपये के भ्रष्टाचार के भी आरोप लगे, जिसके बाद उसे सस्पेंड भी किया गया था। आरोप है कि 2014-15 से 2022 तक उसने पौंडी, सिंदुर्खार और रेवरा फॉर्म पर लगभग 7,577 क्विंटल आधार बीजों की हेराफेरी की। अगर यह बीज किसानों को मिलता, तो इससे लगभग 25,000 क्विंटल प्रमाणित बीज तैयार होता, जिससे निगम और किसान दोनों को फायदा होता। इस मामले की जांच भी कछुआ चाल से चल रही है। शिकायतकर्ता की
बालाघाट पंचायतकर्मियों ने सीईओ के खिलाफ किया प्रदर्शन:कहा- तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा

बालाघाट में जिला पंचायत सीईओ और पंचायत कर्मचारियों के बीच का विवाद अब आंदोलन में बदल गया है। वित्तीय वर्ष (Financial Year) खत्म होने से पहले काम का टारगेट पूरा करने के दबाव को लेकर कर्मचारियों ने सीईओ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को पंचायत सचिवों, जनपद और जिला पंचायत कर्मचारियों के साथ ही इंजीनियरों ने एक ‘संयुक्त मोर्चा’ बना लिया है। उन्होंने एलान किया है कि कल से दो दिनों तक सभी कर्मचारी सामूहिक अवकाश पर रहेंगे। अगर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो 2 मार्च से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी जाएगी। कर्मचारियों के गंभीर आरोप पंचायत सचिव संगठन के अध्यक्ष जितेंद्र चित्रिव ने सीईओ अभिषेक सराफ पर मनमानी के आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि नियमों के खिलाफ जाकर कर्मचारियों के वेतन काटे जा रहे हैं। तबादलों पर रोक के बावजूद सचिवों को इधर-उधर भेजा जा रहा है। बेवक्त वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) ली जाती है, जिससे महिला कर्मचारियों को बहुत दिक्कत होती है। सरकारी नियमों को दरकिनार कर बेजा दबाव बनाया जा रहा है। सीईओ ने दी सफाई इन आरोपों पर जिला पंचायत सीईओ अभिषेक सराफ का कहना है कि साल खत्म होने वाला है और उन पर भी काम पूरा करने का सरकारी दबाव है। उन्होंने सफाई दी कि वे दफ्तर के समय में ही बैठकें लेते हैं ताकि शासन के काम समय पर पूरे हो सकें। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह सब काम की जिम्मेदारी की वजह से है, न कि किसी को परेशान करने के लिए।
बंधुआ मजदूरी का खुलासा, बैतूल के 18 मजदूर मुक्त:16–18 घंटे काम कराया, मारपीट की; मजदूर बोले-ठेकेदार और एजेंट पर FIR हो

बैतूल जिले के 18 मजदूरों को महाराष्ट्र के सोलापुर से तीन महीने बाद मुक्त कराया गया है। एजेंट और ठेकेदारों द्वारा इन मजदूरों को मजदूरी का झांसा देकर सोलापुर ले जाया गया था, जहां उनसे जबरन गन्ना कटाई का काम कराया जा रहा था। ये मजदूर बैतूल के भीमपुर विकासखंड के ग्राम धुंधरी और हरदा जिले के दिदमंदा गांव के निवासी हैं। मजदूरों ने बताया कि उन्हें महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के पानमंगुर गांव में बंधक बनाकर रखा गया था। मजदूरों के अनुसार, उनसे प्रतिदिन 16 से 18 घंटे काम कराया जाता था। विरोध करने या आराम करने पर उन्हें गालियां दी जाती थीं और मारपीट की जाती थी। शौच के लिए जाने पर भी निगरानी रखी जाती थी और देरी होने पर पिटाई की जाती थी। उन्हें मोबाइल फोन पर बात करने की भी अनुमति नहीं थी। एजेंट और ठेकेदार ने पैसे हड़प लिए मजदूरों का आरोप है कि उन्हें कोई मजदूरी नहीं दी गई। एजेंट और ठेकेदार ने उनके पैसे हड़प लिए। एक एजेंट ने 4 लाख रुपये लेकर भुगतान का वादा किया था, लेकिन एक भी रुपया नहीं दिया गया। किसी तरह मजदूरों ने जानसाहस संस्था के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क कर मदद मांगी। सूचना मिलने पर संस्था की टीम बैतूल से सोलापुर पहुंची और स्थानीय प्रशासन की सहायता से सभी मजदूरों को मुक्त कराया। बैतूल कलेक्टर ने सोलापुर कलेक्टर से समन्वय स्थापित कर मजदूरों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की। बैतूल लौटने के बाद मजदूरों ने कलेक्टर को एक आवेदन सौंपा है। उन्होंने एजेंट और ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मजदूरों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि उन्हें उनका बकाया मेहनताना दिलाया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि ऐसा करने से भविष्य में कोई भी ठेकेदार मजदूरों के साथ ऐसी धोखाधड़ी या शोषण नहीं कर पाएगा।
कटनी नगर निगम के 3.81 करोड़ सरकारी विभागों पर बकाया:नगर निगम आयुक्त बोलीं-वित्तीय संकट गहराया, विकास कार्य हो रहा है प्रभावित

कटनी नगर निगम इन दिनों वित्तीय संकट से जूझ रहा है। दरअसल, सरकारी विभागों पर सालों से लंबित सेवा कर की वजह से है। निगम के अनुसार विभिन्न शासकीय संपत्तियों पर कुल 3 करोड़ 81 लाख 48 हजार 560 रुपए का कर बकाया है। यह राशि वित्तीय 2010-11 से लेकर 2025-26 तक की अवधि से जुड़ी है। लंबे समय से भुगतान नहीं होने के कारण निगम की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है। विकास कार्यों पर पड़ रहा असर निगम अधिकारियों का कहना है कि बकाया राशि के चलते शहर के जरूरी विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। सड़कों की मरम्मत, नालियों की सफाई, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था और पार्कों के रखरखाव जैसे कामों के लिए पर्याप्त फंड नहीं मिल पा रहा है। जब संबंधित विभागों से संपर्क किया जाता है तो वे बजट की कमी का हवाला देकर भुगतान टाल देते हैं। 56 विभागों पर बकाया, पांच बड़े देनदार निगम की सूची में कुल 56 सरकारी विभाग शामिल हैं जिन पर सेवा कर बकाया है। इनमें पांच प्रमुख बकायादार इस प्रकार हैं: सचिव, कृषि उपज मंडी- 86 लाख 21 हजार 263 रुपए जिला अस्पताल- 53 लाख 32 हजार 035 रुपए शासकीय तिलक महाविद्यालय-37 लाख 62 हजार 719 रुपए शासकीय औद्योगिक संस्थान (आईटीआई) – 30 लाख 58 हजार 260 रुपए कलेक्टर कार्यालय (जिला दण्डाधिकारी)-14 लाख 79 हजार 653 रुपए अधिकारियों ने जारी किया नोटिस वित्तीय साल की समाप्ति नजदीक आते ही निगम ने वसूली अभियान तेज कर दिया है। राजस्व अधिकारी जागेश्वर प्रसाद पाठक ने बिलैया तलैया स्थित निगम की 15 दुकानों के आवंटियों को तीन दिन में किराया जमा करने का नोटिस दिया है। समय पर भुगतान नहीं होने पर लीज निरस्त कर दुकानों में ताला लगाने की चेतावनी दी गई है। आम नागरिकों के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं और बकाया न चुकाने वालों के नल कनेक्शन भी काटे जा रहे हैं। समयसीमा में वसूली का प्रयास नगर निगम आयुक्त तपस्या परिहार ने बताया कि कर वसूली के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। शासकीय विभागों को पत्र भेजकर समयसीमा में भुगतान करने को कहा गया है। उनका कहना है कि प्रयास है कि वसूली पूरी हो, ताकि शहर की मूलभूत सुविधाएं प्रभावित न हों।









