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Single Mother Challenges; Father Absence Impact On Child Emotions

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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 7 साल का है और मैं सिंगल मदर हूं। मैंने तलाक इसलिए लिया क्योंकि मैं एक अब्यूसिव शादी में थी। पांच साल से मैं अपने बेटे के साथ अलग रहती हूं। इन सालों में मेरे एक्स ने कभी अपने बेटे से मिलने या उससे बात करने की कोशिश नहीं की।

कुछ वक्त से नोटिस कर रही हूं कि बेटा चुप रहने लगा है, जबकि पहले वह बहुत बातें करता था। अब वह अक्सर अपने पिता के बारे में मुझसे सवाल करता है। मैं उसे हर खुशी देने की कोशिश करती हूं। लेकिन समझ नहीं आता कि उसके सवालों का जवाब कैसे दूं? क्या मुझे उससे खुलकर बात करनी चाहिए?

एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर

जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपने कठिन परिस्थिति में अपने और बच्चे के लिए सुरक्षित जीवन चुना, यह साहस की बात है। किसी भी अब्यूसिव रिश्ते से बाहर निकलना आसान नहीं होता। इसलिए अपने फैसले के लिए खुद को दोषी न मानें। आपने बच्चे के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का निर्णय लिया, जो किसी भी पेरेंट की जिम्मेदारी है।

आपके बेटे का पिता के बारे में सवाल पूछना स्वाभाविक है। दरअसल 6-10 साल की उम्र में बच्चों में परिवार, रिश्तों और पहचान की समझ विकसित होती है। वे दोस्तों के परिवार देखकर तुलना करते हैं और सवाल पूछते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा दुखी है या परवरिश में कमी है। यह संकेत है कि वह अपने जीवन और रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है। आपके सवाल से लगता है कि आपकी चिंता तीन मुख्य बातों को लेकर है।

  1. पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित कर सकती है?
  2. बच्चे की भावनात्मक स्थिति को हेल्दी तरीके से कैसे संभाला जाए?
  3. सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

अब इन बातों को एक-एक करके समझते हैं।

पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

  • जरूरी नहीं है कि इसका असर हमेशा नकारात्मक ही हो।
  • बच्चे के लिए सबसे जरूरी सुरक्षित और शांत माहौल है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक था, जिसके सामने बच्चा डरकर चुप हो जाता था तो इसका बच्चे की मेंटल ग्रोथ पर बुरा ही असर पड़ता।
  • ऐसे माहौल में बच्चे डर के कारण अपने आप में सिमट जाते हैं।
  • इसलिए केवल ‘पिता का होना’ जरूरी नहीं, बल्कि पॉजिटिव रोल मॉडल होना जरूरी है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक या अपमानजनक है तो उससे दूरी बच्चे को नकारात्मक अनुभवों से बचा सकती है।
  • बच्चे को पिता का अभाव महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन इसे हेल्दी तरीके से संभाला जाए तो बच्चा इमोशनली मजबूत होगा।

हालांकि पिता की अनुपस्थिति से बच्चे के मन में कुछ भावनात्मक उलझनें पैदा हो सकती हैं। जैसेकि-

बच्चे की भावनात्मक स्थिति को कैसे संभालें?

  • इस स्थिति में ओपन बातचीत सबसे जरूरी है।
  • जब बच्चा अपने पिता के बारे में सवाल पूछे तो उससे बचने या विषय बदलने की बजाय उसकी जिज्ञासा को समझें।
  • बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकता है।
  • बातचीत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें
  • बच्चे को पूरी कहानी बताने की जरूरत नहीं होती। उसकी उम्र के हिसाब से सरल और संतुलित जवाब दें।
  • उदाहरण के लिए, बच्चे से कह सकते हैं, ‘’कभी-कभी बड़े लोगों के बीच सामंजस्य नहीं बनता। इसलिए वे अलग रहने का फैसला करते हैं। इससे बच्चे के प्रति दोनों का प्यार कम नहीं होता।’’

इस स्थिति को कैसे संभालें, ग्राफिक में देखिए-

जब बच्चा यह महसूस करता है कि उसकी मां उसकी बात समझती है और उसे जज नहीं करती, तो वह अपने मन की बातें शेयर करता है।

सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

  • सिंगल पेरेंटिंग अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखें-
  • बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका परिवार भले छोटा है, लेकिन वह सुरक्षित और प्यार से भरा हुआ है।
  • उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जैसे साथ में कहानी पढ़ना, पार्क जाना, खेलना या दिन भर की बातें शेयर करना।
  • दादा-दादी, मामा-मामी, चाचा-चाची या परिवार के करीबी सदस्यों के साथ बच्चे को समय बिताने का मौका दें।
  • इससे बच्चे को अलग-अलग रिश्तों का अनुभव मिलता है और इमोशनल सपोर्ट मिलता है।

हेल्दी पेरेंटिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

बच्चे से सिंगल पेरेंटिंग पर बात करना सही?

  • पेरेंट्स सोचते हैं कि इस विषय पर बातचीत से बच्चा दुखी हो सकता है।
  • साइकोलॉजी के मुताबिक, बच्चों की भावनाओं को दबाने या नजरअंदाज करने से वे खत्म नहीं होतीं, बल्कि अंदर जमा हो जाती हैं।
  • इसलिए बेहतर है कि बच्चे को खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का स्पेस दें।
  • जब बच्चा कहे कि ‘उसे पापा की कमी महसूस होती है’ तो उसकी भावनाओं को सुनें और समझें।
  • उसे ये फील कराएं कि उसकी भावनाएं स्वाभाविक हैं।

खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग रखें

  • बच्चे की भावनात्मक स्थिति काफी हद तक उसके पेरेंट की मानसिक स्थिति से प्रभावित होती है।
  • अगर आप बार-बार यह महसूस करती हैं कि “मैं अकेली हूं,’’ ‘’मुझे सब कुछ अकेले ही संभालना पड़ रहा है” तो यह भाव धीरे-धीरे बच्चे तक भी पहुंच सकता है।
  • बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे पेरेंट्स की भावनाओं को जल्दी महसूस करते हैं।
  • इसलिए जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से संतुलित, खुश और स्वस्थ रहें।
  • बच्चा मां के आत्मविश्वास को देखकर सीखता है कि वह सुरक्षित और मजबूत है।
  • आपकी पॉजिटिव एनर्जी ही बच्चे को यह भरोसा देगी कि परिस्थितियां भले अलग हों, लेकिन हम साथ मिलकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

पेरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए?

पेरेंट्स भावनात्मक तनाव में कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं, जो बच्चे के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन बातों से बचना जरूरी है-

  • बच्चे के सवालों को नजरअंदाज न करें।
  • हर बार विषय न बदलें।
  • पिता के बारे में नकारात्मक बातें न कहें।
  • अपनी झुंझलाहट बच्चे पर न निकालें।
  • बच्चे की जिज्ञासा को झूठ से शांत करने की कोशिश न करें।
  • बच्चे को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें।

अंत में यही कहूंगी कि एक सिंगल मॉम के रूप में आपने पिछले कई सालों से अपने बेटे की परवरिश अकेले की है। यह अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी और साहस की बात है। याद रखें, बच्चों को ‘परफेक्ट फैमिली’ से ज्यादा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है, जो आप दे रही हैं। ये अपने आप में पर्याप्त है।

……………………

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1 घंटे पहलेलेखक: शिवाकान्त शुक्ल

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सवाल- मैं दिल्ली से हूं। मेरा बेटा 7 साल का है और मैं सिंगल मदर हूं। मैंने तलाक इसलिए लिया क्योंकि मैं एक अब्यूसिव शादी में थी। पांच साल से मैं अपने बेटे के साथ अलग रहती हूं। इन सालों में मेरे एक्स ने कभी अपने बेटे से मिलने या उससे बात करने की कोशिश नहीं की।

कुछ वक्त से नोटिस कर रही हूं कि बेटा चुप रहने लगा है, जबकि पहले वह बहुत बातें करता था। अब वह अक्सर अपने पिता के बारे में मुझसे सवाल करता है। मैं उसे हर खुशी देने की कोशिश करती हूं। लेकिन समझ नहीं आता कि उसके सवालों का जवाब कैसे दूं? क्या मुझे उससे खुलकर बात करनी चाहिए?

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जवाब- सवाल पूछने के लिए शुक्रिया। आपने कठिन परिस्थिति में अपने और बच्चे के लिए सुरक्षित जीवन चुना, यह साहस की बात है। किसी भी अब्यूसिव रिश्ते से बाहर निकलना आसान नहीं होता। इसलिए अपने फैसले के लिए खुद को दोषी न मानें। आपने बच्चे के लिए सुरक्षित माहौल बनाने का निर्णय लिया, जो किसी भी पेरेंट की जिम्मेदारी है।

आपके बेटे का पिता के बारे में सवाल पूछना स्वाभाविक है। दरअसल 6-10 साल की उम्र में बच्चों में परिवार, रिश्तों और पहचान की समझ विकसित होती है। वे दोस्तों के परिवार देखकर तुलना करते हैं और सवाल पूछते हैं।

इसका मतलब यह नहीं कि बच्चा दुखी है या परवरिश में कमी है। यह संकेत है कि वह अपने जीवन और रिश्तों को समझने की कोशिश कर रहा है। आपके सवाल से लगता है कि आपकी चिंता तीन मुख्य बातों को लेकर है।

  1. पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित कर सकती है?
  2. बच्चे की भावनात्मक स्थिति को हेल्दी तरीके से कैसे संभाला जाए?
  3. सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

अब इन बातों को एक-एक करके समझते हैं।

पिता की अनुपस्थिति बच्चे को कैसे प्रभावित करती है?

  • जरूरी नहीं है कि इसका असर हमेशा नकारात्मक ही हो।
  • बच्चे के लिए सबसे जरूरी सुरक्षित और शांत माहौल है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक था, जिसके सामने बच्चा डरकर चुप हो जाता था तो इसका बच्चे की मेंटल ग्रोथ पर बुरा ही असर पड़ता।
  • ऐसे माहौल में बच्चे डर के कारण अपने आप में सिमट जाते हैं।
  • इसलिए केवल ‘पिता का होना’ जरूरी नहीं, बल्कि पॉजिटिव रोल मॉडल होना जरूरी है।
  • अगर पिता का व्यवहार हिंसक या अपमानजनक है तो उससे दूरी बच्चे को नकारात्मक अनुभवों से बचा सकती है।
  • बच्चे को पिता का अभाव महसूस होना स्वाभाविक है। लेकिन इसे हेल्दी तरीके से संभाला जाए तो बच्चा इमोशनली मजबूत होगा।

हालांकि पिता की अनुपस्थिति से बच्चे के मन में कुछ भावनात्मक उलझनें पैदा हो सकती हैं। जैसेकि-

बच्चे की भावनात्मक स्थिति को कैसे संभालें?

  • इस स्थिति में ओपन बातचीत सबसे जरूरी है।
  • जब बच्चा अपने पिता के बारे में सवाल पूछे तो उससे बचने या विषय बदलने की बजाय उसकी जिज्ञासा को समझें।
  • बच्चे को यह महसूस होना चाहिए कि वह अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त कर सकता है।
  • बातचीत करते समय कुछ बातों का ध्यान रखें
  • बच्चे को पूरी कहानी बताने की जरूरत नहीं होती। उसकी उम्र के हिसाब से सरल और संतुलित जवाब दें।
  • उदाहरण के लिए, बच्चे से कह सकते हैं, ‘’कभी-कभी बड़े लोगों के बीच सामंजस्य नहीं बनता। इसलिए वे अलग रहने का फैसला करते हैं। इससे बच्चे के प्रति दोनों का प्यार कम नहीं होता।’’

इस स्थिति को कैसे संभालें, ग्राफिक में देखिए-

जब बच्चा यह महसूस करता है कि उसकी मां उसकी बात समझती है और उसे जज नहीं करती, तो वह अपने मन की बातें शेयर करता है।

सिंगल पेरेंटिंग का सही और हेल्दी तरीका क्या है?

  • सिंगल पेरेंटिंग अपने आप में चुनौतीपूर्ण है। इसलिए कुछ बुनियादी बातों का ख्याल रखें-
  • बच्चे को यह महसूस कराएं कि उसका परिवार भले छोटा है, लेकिन वह सुरक्षित और प्यार से भरा हुआ है।
  • उसके साथ क्वालिटी टाइम बिताएं। जैसे साथ में कहानी पढ़ना, पार्क जाना, खेलना या दिन भर की बातें शेयर करना।
  • दादा-दादी, मामा-मामी, चाचा-चाची या परिवार के करीबी सदस्यों के साथ बच्चे को समय बिताने का मौका दें।
  • इससे बच्चे को अलग-अलग रिश्तों का अनुभव मिलता है और इमोशनल सपोर्ट मिलता है।

हेल्दी पेरेंटिंग के लिए कुछ बातों का ध्यान रखें-

बच्चे से सिंगल पेरेंटिंग पर बात करना सही?

  • पेरेंट्स सोचते हैं कि इस विषय पर बातचीत से बच्चा दुखी हो सकता है।
  • साइकोलॉजी के मुताबिक, बच्चों की भावनाओं को दबाने या नजरअंदाज करने से वे खत्म नहीं होतीं, बल्कि अंदर जमा हो जाती हैं।
  • इसलिए बेहतर है कि बच्चे को खुलकर अपनी भावनाएं व्यक्त करने का स्पेस दें।
  • जब बच्चा कहे कि ‘उसे पापा की कमी महसूस होती है’ तो उसकी भावनाओं को सुनें और समझें।
  • उसे ये फील कराएं कि उसकी भावनाएं स्वाभाविक हैं।

खुद को इमोशनली स्ट्रॉन्ग रखें

  • बच्चे की भावनात्मक स्थिति काफी हद तक उसके पेरेंट की मानसिक स्थिति से प्रभावित होती है।
  • अगर आप बार-बार यह महसूस करती हैं कि “मैं अकेली हूं,’’ ‘’मुझे सब कुछ अकेले ही संभालना पड़ रहा है” तो यह भाव धीरे-धीरे बच्चे तक भी पहुंच सकता है।
  • बच्चे बहुत संवेदनशील होते हैं। वे पेरेंट्स की भावनाओं को जल्दी महसूस करते हैं।
  • इसलिए जरूरी है कि आप भावनात्मक रूप से संतुलित, खुश और स्वस्थ रहें।
  • बच्चा मां के आत्मविश्वास को देखकर सीखता है कि वह सुरक्षित और मजबूत है।
  • आपकी पॉजिटिव एनर्जी ही बच्चे को यह भरोसा देगी कि परिस्थितियां भले अलग हों, लेकिन हम साथ मिलकर बेहतर जीवन जी सकते हैं।

पेरेंट्स को किन गलतियों से बचना चाहिए?

पेरेंट्स भावनात्मक तनाव में कुछ ऐसी प्रतिक्रियाएं देते हैं, जो बच्चे के मन में भ्रम पैदा कर सकती हैं। इसलिए इन बातों से बचना जरूरी है-

  • बच्चे के सवालों को नजरअंदाज न करें।
  • हर बार विषय न बदलें।
  • पिता के बारे में नकारात्मक बातें न कहें।
  • अपनी झुंझलाहट बच्चे पर न निकालें।
  • बच्चे की जिज्ञासा को झूठ से शांत करने की कोशिश न करें।
  • बच्चे को लंबे समय तक अकेला न छोड़ें।

अंत में यही कहूंगी कि एक सिंगल मॉम के रूप में आपने पिछले कई सालों से अपने बेटे की परवरिश अकेले की है। यह अपने आप में बहुत बड़ी जिम्मेदारी और साहस की बात है। याद रखें, बच्चों को ‘परफेक्ट फैमिली’ से ज्यादा इमोशनल सपोर्ट की जरूरत होती है, जो आप दे रही हैं। ये अपने आप में पर्याप्त है।

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10 साल की उम्र में बच्चे अपने विचारों को साफ तरीके से रखना सीख रहे होते हैं। उनमें लॉजिकल ब्रेन विकसित हो रहा होता है। लेकिन ‘सोशल इंटेलिजेंस’ (सामाजिक समझ) अभी पूरी तरह मेच्यौर नहीं हुई होती है। पूरी खबर पढ़िए…

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