Friday, 24 Jul 2026 | 03:20 PM

Trending :

क्वांटस के प्रोजेक्ट सनराइज की पहली टेस्ट फ्लाइट ऑस्ट्रेलिया पहुंची:फ्रांस से 19 घंटे की उड़ान भरकर इतिहास बनाया; अक्टूबर 2027 से शुरू होंगी डायरेक्ट फ्लाइट्स मियामी बना अरबपतियों का नया गढ़:अमेरिका का नया दुबई; 870 करोड़ के पेंटहाउस और 1,000 फीट ऊंचे टावर चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई चांदी आज ₹2,924 सस्ती, ₹2.19 लाख पर आई:सोना ₹1,848 गिरकर ₹1.42 लाख पर आया; चांदी ऑल टाइम हाई से ₹1.67 लाख सस्ती हुई दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर दीपिका चिखलिया ने साई पल्लवी के लुक पर उठाए सवाल:कहा- रामायण में सीता के घुंघराले बालों का कहीं वर्णन नहीं; मेकर्स ने पोस्टपोन किया ट्रेलर
EXCLUSIVE

ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल:11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से बसें गायब, सुनसान इलाकों में खड़ी कबाड़ बनीं

ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल:11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से बसें गायब, सुनसान इलाकों में खड़ी कबाड़ बनीं

ग्वालियर को स्मार्ट बनाने का सपना अब खुद सवालों के घेरे में है। शहरवासियों को सस्ती और बेहतर यात्रा सुविधा देने के लिए शुरू की गई स्मार्ट सिटी बसें आज खुद बदहाल हालत में खड़ी हैं। जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था, वो अब सुनसान इलाकों में कबाड़ बनकर खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं। साल 2023 में बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू हुई इस योजना के तहत ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने इंट्रा सिटी बस सेवा लॉन्च की थी। बसों में जीपीएस ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी लगाई गई थीं, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर मिल सके। लेकिन यह ‘स्मार्ट’ प्लान कुछ ही महीनों में दम तोड़ गया। निजी कंपनी को मिला 11 करोड़ का ठेका इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। एक निजी कंपनी को 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। ऑटो-विक्रम के आगे फेल हुई बस सेवा सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के प्रतिनिधि शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम के दबदबे का हवाला देकर बसों के संचालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। नतीजा बसें धीरे-धीरे सड़कों से गायब हो गईं और साल 2023 के बाद से अब शहर के रेस कोर्स रोड, गार्डर वाली पुलिया, रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खंडो में खड़ी नजर आ रही हैं। GPS लगा, लेकिन सिस्टम ही ‘लॉस्ट’ बसों में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए थे, ताकि हर मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं, तो ये हाईटेक सिस्टम भी बेकार साबित हुआ। सवालों के घेरे में ‘स्मार्ट’ प्लानिंग – करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जमीन पर टिकाऊ योजना क्यों नहीं बन पाई? – जिम्मेदारों की लापरवाही ने ‘स्मार्ट सिटी’ को मजाक बना दिया? जनता का आरोप- पैसा सरकारी कर्मचारी और अधिकारी डकार गए बस को लेकर हजीरा निवासी मूलचंद ने कहा कि शहर में कोई भी सरकारी बस नहीं चल रही है, सड़कों पर चलने के बजाय कबाड़ में करोड़ों रुपए की बस खड़ी हुई है। सरकार ने शहर में बस चलाने के लिए पैसा लगाया था, वह पैसा जनता का था जो फंस गया है। सरकारी दफ्तर में बैठे अधिकारी और कर्मचारी शहर में होने वाले विकास कार्यों का पैसा मिलकर खा रहे हैं। शहर में स्मार्ट सिटी सौंदर्यीकरण के कार्य भी दिखावा है। स्मार्ट सिटी सिर्फ जनता का पैसा खराब कर रही है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
French Open: Gauff Out, Potapova Wins

May 31, 2026/
12:25 pm

पेरिस17 मिनट पहले कॉपी लिंक फ्रेंच ओपन में शनिवार रात बड़ा उलटफेर हुआ। डिफेंडिंग चैंपियन कोको गॉफ तीसरे दौर में...

अचानक भोजपुरी क्यों गाने लगे अक्षय कुमार:‘रगड़के नहला देब साबुन से’ पर अक्षरा सिंह संग नाचे, भोजपुरिया अंदाज के 2 कारण

May 28, 2026/
5:05 am

पवन सिंह के ‘आई नहीं’ ने जब बॉक्स ऑफिस पर नोटों की बारिश करवाई, तो बॉलीवुड को समझ आ गया...

Bengaluru Census Employee Assault Case Filed

May 1, 2026/
7:46 pm

बेंगलुरु38 मिनट पहले कॉपी लिंक बेंगलुरु में नेशनल जनगणना के काम के दौरान एक महिला अधिकारी के साथ बदसलूकी का...

Australia Wins T20 Series 3-0 vs Bangladesh

June 21, 2026/
6:40 pm

चट्टोग्राम6 मिनट पहले कॉपी लिंक ऑस्ट्रेलिया ने 11 ओवर में 110 रन का टारगेट चेज किया। ऑस्ट्रेलिया ने तीसरे टी-20...

'स्पाइडरमैन' फेम टॉम हॉलैंड ने पी कटिंग चाय:'द ओडिसी' के भारत में प्रीमियर से पहले क्रिस्टोफर नोलन के साथ पहुंचे कैफे

July 12, 2026/
9:35 am

मुंबई में शनिवार को क्रिस्टोफर नोलन की फिल्म ‘द ओडिसी’ का भारतीय प्रीमियर हुआ। स्पेशल स्क्रीनिंग में नोलन के साथ...

रणबीर कपूर के राम बनने पर इम्तियाज अली का बयान:बोले- रणबीर में हर तरह के रोल करने की क्षमता, वे कुछ भी कर सकते हैं

June 1, 2026/
2:53 pm

डायरेक्टर नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर के भगवान राम का किरदार निभाने पर फिल्ममेकर इम्तियाज अली ने...

जॉब - शिक्षा

राजनीति

ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल:11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से बसें गायब, सुनसान इलाकों में खड़ी कबाड़ बनीं

ग्वालियर स्मार्ट सिटी बस सेवा फेल:11 करोड़ खर्च के बाद भी सड़कों से बसें गायब, सुनसान इलाकों में खड़ी कबाड़ बनीं

ग्वालियर को स्मार्ट बनाने का सपना अब खुद सवालों के घेरे में है। शहरवासियों को सस्ती और बेहतर यात्रा सुविधा देने के लिए शुरू की गई स्मार्ट सिटी बसें आज खुद बदहाल हालत में खड़ी हैं। जिन बसों को शहर की लाइफलाइन बनना था, वो अब सुनसान इलाकों में कबाड़ बनकर खड़ी-खड़ी जंग खा रही हैं। साल 2023 में बड़े शोर-शराबे के साथ शुरू हुई इस योजना के तहत ग्वालियर स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन ने इंट्रा सिटी बस सेवा लॉन्च की थी। बसों में जीपीएस ट्रैकिंग जैसी आधुनिक सुविधाएं भी लगाई गई थीं, ताकि यात्रियों को बेहतर और सुरक्षित सफर मिल सके। लेकिन यह ‘स्मार्ट’ प्लान कुछ ही महीनों में दम तोड़ गया। निजी कंपनी को मिला 11 करोड़ का ठेका इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 11 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। एक निजी कंपनी को 16 इंट्रा सिटी और कुल 32 बसें (इंटरसिटी सहित) चलाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही निकली। ऑटो-विक्रम के आगे फेल हुई बस सेवा सूत्रों के मुताबिक, कंपनी के प्रतिनिधि शहर में पहले से चल रहे ऑटो और विक्रम के दबदबे का हवाला देकर बसों के संचालन में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। नतीजा बसें धीरे-धीरे सड़कों से गायब हो गईं और साल 2023 के बाद से अब शहर के रेस कोर्स रोड, गार्डर वाली पुलिया, रेलवे ओवर ब्रिज के नीचे खंडो में खड़ी नजर आ रही हैं। GPS लगा, लेकिन सिस्टम ही ‘लॉस्ट’ बसों में जीपीएस ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए थे, ताकि हर मूवमेंट पर नजर रखी जा सके। लेकिन जब बसें ही नहीं चलीं, तो ये हाईटेक सिस्टम भी बेकार साबित हुआ। सवालों के घेरे में ‘स्मार्ट’ प्लानिंग – करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी जमीन पर टिकाऊ योजना क्यों नहीं बन पाई? – जिम्मेदारों की लापरवाही ने ‘स्मार्ट सिटी’ को मजाक बना दिया? जनता का आरोप- पैसा सरकारी कर्मचारी और अधिकारी डकार गए बस को लेकर हजीरा निवासी मूलचंद ने कहा कि शहर में कोई भी सरकारी बस नहीं चल रही है, सड़कों पर चलने के बजाय कबाड़ में करोड़ों रुपए की बस खड़ी हुई है। सरकार ने शहर में बस चलाने के लिए पैसा लगाया था, वह पैसा जनता का था जो फंस गया है। सरकारी दफ्तर में बैठे अधिकारी और कर्मचारी शहर में होने वाले विकास कार्यों का पैसा मिलकर खा रहे हैं। शहर में स्मार्ट सिटी सौंदर्यीकरण के कार्य भी दिखावा है। स्मार्ट सिटी सिर्फ जनता का पैसा खराब कर रही है।

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.