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IPO Rules Change | Min Public Shareholding Cut 5% to 2.5%; Jio Platforms NSE Listing Path Clear

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मुंबई3 घंटे पहले

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वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (DEA) ने शुक्रवार को देश में इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग यानी IPO से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं।

सरकार ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) नियम-1957 में बदलवा करते हुए बड़ी कंपनियों के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की लिमिट को 5% से घटाकर 2.5% कर दिया है।

13 मार्च को जारी इस नोटिफिकेशन के बाद अब रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसी बड़ी कंपनियों के लिए अपना IPO लाना आसान हो जाएगा।

सेबी ने पिछले साल सितंबर में इन बदलावों को मंजूरी दी थी, जिसे अब सरकार ने फाइनल अप्रूवल दिया है।

कंपनी की वैल्यू के आधार पर तय होगा कितना हिस्सा बेचना जरूरी

नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को उनकी लिस्टिंग के बाद की वैल्यू के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटा गया है। इसके लिए एक टियर स्ट्रक्चर तैयार किया गया है…

₹1,600 करोड़ तक की कंपनियां: ऐसी कंपनियों को कम से कम 25% शेयर पब्लिक के लिए जारी करने होंगे।

₹1,600 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक: ऐसी कंपनियों को कम से कम ₹400 करोड़ की वैल्यू के बराबर शेयर ऑफर करने होंगे।

₹4,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक: ऐसी कंपनियों को कम से कम 10% शेयर जारी करने होंगे। हालांकि, लिस्टिंग के 3 साल के भीतर इन्हें अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25% करनी होगी।

₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक: इतनी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को कम से कम ₹1,000 करोड़ या 8% शेयर ऑफर करने होंगे। इन्हें भी 3 साल में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% तक ले जानी होगी।

₹5 लाख करोड़ से बड़ी कंपनियों को मिली राहत

नोटिफिकेशन के मुताबिक, बहुत बड़ी कंपनियों के लिए नियमों को काफी सरल बनाया गया है…

₹1 लाख करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक: इन कंपनियों को लिस्टिंग के वक्त कम से कम 2.75% शेयर पब्लिक करने होंगे।

₹5 लाख करोड़ से ज्यादा की वैल्यू: अगर किसी कंपनी की वैल्यू ₹5 लाख करोड़ से ऊपर है, तो वह महज 1% हिस्सा बेचकर भी लिस्ट हो सकती है। ऐसी कंपनियों को 5 साल के भीतर अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% और 10 साल के भीतर 25% तक ले जाने की छूट दी गई है।

भारत का सबसे बड़ा IPO लाएगी जियो प्लेटफॉर्म्स

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और MD मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में संकेत दिया था कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में हो सकती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन और MD मुकेश अंबानी ने पिछले साल अगस्त में संकेत दिया था कि जियो की लिस्टिंग 2026 की पहली छमाही में हो सकती है।

मीडिया रिपोर्ट्स और ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नियमों में इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा रिलायंस इंडस्ट्रीज को होगा। मुकेश अंबानी की लीडरशिप वाले ग्रुप की कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स को शेयर बाजार में उतारने की तैयारी कर रहा है।

रिलायंस की किसी यूनिट की यह करीब 20 साल बाद पहली लिस्टिंग होगी। माना जा रहा है कि जियो का IPO भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO साबित हो सकता है। सूत्र बताते हैं कि कंपनी अप्रैल तक ड्राफ्ट प्रोस्पेक्टस (DRHP) फाइल कर सकती है।

सरकार के इस कदम से बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग का रास्ता खुलेगा

साल 2025 में IPO मार्केट में आई तेजी के बाद फिलहाल बाजार थोड़ा सुस्त नजर आ रहा था। जानकारों का कहना है कि सरकार के इस कदम से बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग का रास्ता खुलेगा, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और निवेशकों को नए निवेश के मौके मिलेंगे। NSE जो लंबे समय से अपनी लिस्टिंग का इंतजार कर रहा है, उसे भी इन नए नियमों से राहत मिलेगी।

ये खबर भी पढ़ें…

एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा की भी टिकटें महंगी: घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर कल से ₹1300 तक फ्यूल सरचार्ज लगेगा, वजह- जेट फ्यूल महंगा

एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अब अकासा एयर की फ्लाइट्स भी कल से महंगी हो जाएंगी। एयरलाइन कंपनी ने रविवार से सभी घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर फ्यूल सरचार्ज लगाने की घोषणा की है।

अकासा एयर ने कहा कि 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर 199 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक का एडिशनल सरचार्ज वसूला जाएगा। मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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सरकार ने सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) नियम-1957 में बदलवा करते हुए बड़ी कंपनियों के लिए मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग की लिमिट को 5% से घटाकर 2.5% कर दिया है।

13 मार्च को जारी इस नोटिफिकेशन के बाद अब रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) जैसी बड़ी कंपनियों के लिए अपना IPO लाना आसान हो जाएगा।

सेबी ने पिछले साल सितंबर में इन बदलावों को मंजूरी दी थी, जिसे अब सरकार ने फाइनल अप्रूवल दिया है।

कंपनी की वैल्यू के आधार पर तय होगा कितना हिस्सा बेचना जरूरी

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₹1,600 करोड़ तक की कंपनियां: ऐसी कंपनियों को कम से कम 25% शेयर पब्लिक के लिए जारी करने होंगे।

₹1,600 करोड़ से ₹4,000 करोड़ तक: ऐसी कंपनियों को कम से कम ₹400 करोड़ की वैल्यू के बराबर शेयर ऑफर करने होंगे।

₹4,000 करोड़ से ₹50,000 करोड़ तक: ऐसी कंपनियों को कम से कम 10% शेयर जारी करने होंगे। हालांकि, लिस्टिंग के 3 साल के भीतर इन्हें अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग बढ़ाकर 25% करनी होगी।

₹50,000 करोड़ से ₹1 लाख करोड़ तक: इतनी वैल्यूएशन वाली कंपनियों को कम से कम ₹1,000 करोड़ या 8% शेयर ऑफर करने होंगे। इन्हें भी 3 साल में पब्लिक शेयरहोल्डिंग 25% तक ले जानी होगी।

₹5 लाख करोड़ से बड़ी कंपनियों को मिली राहत

नोटिफिकेशन के मुताबिक, बहुत बड़ी कंपनियों के लिए नियमों को काफी सरल बनाया गया है…

₹1 लाख करोड़ से ₹5 लाख करोड़ तक: इन कंपनियों को लिस्टिंग के वक्त कम से कम 2.75% शेयर पब्लिक करने होंगे।

₹5 लाख करोड़ से ज्यादा की वैल्यू: अगर किसी कंपनी की वैल्यू ₹5 लाख करोड़ से ऊपर है, तो वह महज 1% हिस्सा बेचकर भी लिस्ट हो सकती है। ऐसी कंपनियों को 5 साल के भीतर अपनी पब्लिक शेयरहोल्डिंग 15% और 10 साल के भीतर 25% तक ले जाने की छूट दी गई है।

भारत का सबसे बड़ा IPO लाएगी जियो प्लेटफॉर्म्स

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साल 2025 में IPO मार्केट में आई तेजी के बाद फिलहाल बाजार थोड़ा सुस्त नजर आ रहा था। जानकारों का कहना है कि सरकार के इस कदम से बड़ी कंपनियों की लिस्टिंग का रास्ता खुलेगा, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बढ़ेगी और निवेशकों को नए निवेश के मौके मिलेंगे। NSE जो लंबे समय से अपनी लिस्टिंग का इंतजार कर रहा है, उसे भी इन नए नियमों से राहत मिलेगी।

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एअर इंडिया-इंडिगो के बाद अकासा की भी टिकटें महंगी: घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट्स पर कल से ₹1300 तक फ्यूल सरचार्ज लगेगा, वजह- जेट फ्यूल महंगा

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अकासा एयर ने कहा कि 15 मार्च को रात 12:01 बजे के बाद बुक किए जाने वाले टिकटों पर 199 रुपए से लेकर 1,300 रुपए तक का एडिशनल सरचार्ज वसूला जाएगा। मिडिल ईस्ट तनाव और अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच जारी जंग की वजह से जेट फ्यूल (ATF) की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के कारण यह कदम उठाना पड़ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…

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