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Indore Bail Not Cancelled | Social Media Post No Proof

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इंदौर3 घंटे पहले

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शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में दर्ज प्रकरण में आरोपी दीपक विश्नोई की अग्रिम जमानत निरस्त करने की मांग को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी द्वारा व्हाट्सएप स्टेटस लगाने मात्र से पीड़िता या साक्ष्य प्रभावित होने का कोई ठोस आधार प्रस्तुत नहीं किया गया।

दरअसल 25 वर्षीय पीड़िता ने जून 2025 में थाना बाणगंगा में देवास निवासी दीपक विश्नोई के खिलाफ वर्ष 2020 से 2024 के बीच शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी की ओर से एडवोकेट मनीष यादव और पं. करण बैरागी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर तर्क दिया था कि दोनों पक्षों के बीच पैसों का लेन-देन विवाद है और इसी कारण पांच वर्ष पुराने घटनाक्रम को आधार बनाकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष दोनों के विवाह से संबंधित फोटो भी प्रस्तुत किए थे। तर्कों से सहमत होकर कोर्ट ने पिछले साल में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया था।

इसके बाद पीड़िता ने जमानत निरस्ती के लिए आवेदन प्रस्तुत कर आरोप लगाया कि जमानत मिलने के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप स्टेटस पर द्विअर्थी शायरी पोस्ट कर उसे प्रभावित करने का प्रयास किया है, इसलिए जमानत निरस्त की जाए।

इस पर आरोपी पक्ष के एडवोकेट ने जवाब में कहा कि संबंधित स्टेटस आरोपी के निजी मोबाइल पर लगाया गया था, जिसमें पीड़िता का नाम तक उल्लेखित नहीं है। मात्र किसी के द्वारा अपने मोबाइल पर स्टेटस लगाने से यह सिद्ध नहीं होता कि वह पीड़िता को प्रभावित करने का प्रयास है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस सुबोध अभ्यंकर ने जमानत निरस्ती आवेदन खारिज करते हुए आदेश में उल्लेख किया कि आरोपी द्वारा स्टेटस लगाए जाने से पीड़िता या साक्ष्य किस प्रकार प्रभावित हो सकते हैं, यह स्पष्ट नहीं किया गया। साथ ही कहा कि पीड़िता आरोपी का स्टेटस देखने के लिए बाध्य नहीं है। इन परिस्थितियों में जमानत निरस्त करने का कोई आधार नहीं बनता।

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दरअसल 25 वर्षीय पीड़िता ने जून 2025 में थाना बाणगंगा में देवास निवासी दीपक विश्नोई के खिलाफ वर्ष 2020 से 2024 के बीच शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने की एफआईआर दर्ज कराई थी। आरोपी की ओर से एडवोकेट मनीष यादव और पं. करण बैरागी ने हाई कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दायर कर तर्क दिया था कि दोनों पक्षों के बीच पैसों का लेन-देन विवाद है और इसी कारण पांच वर्ष पुराने घटनाक्रम को आधार बनाकर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। बचाव पक्ष ने कोर्ट के समक्ष दोनों के विवाह से संबंधित फोटो भी प्रस्तुत किए थे। तर्कों से सहमत होकर कोर्ट ने पिछले साल में आरोपी को अग्रिम जमानत का लाभ दिया था।

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इस पर आरोपी पक्ष के एडवोकेट ने जवाब में कहा कि संबंधित स्टेटस आरोपी के निजी मोबाइल पर लगाया गया था, जिसमें पीड़िता का नाम तक उल्लेखित नहीं है। मात्र किसी के द्वारा अपने मोबाइल पर स्टेटस लगाने से यह सिद्ध नहीं होता कि वह पीड़िता को प्रभावित करने का प्रयास है।

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