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Successful People Comparison Anxiety; Social Media Self Worth

Successful People Comparison Anxiety; Social Media Self Worth
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  • Successful People Comparison Anxiety; Social Media Self Worth | Working Professional Stress

4 घंटे पहले

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सवाल- मैं 26 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं। मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं हर वक्त अपनी तुलना सक्सेसफुल लोगों से करती रहती हूं। फिर चाहे वो सेलिब्रिटीज हों या मेरे आसपास के लोग। मैं हर सफल व्यक्ति के पैरलल खुद को रखकर उससे कंपैरिजन करने लगती हूं। कई बार मैं देर रात तक उन्हें सोशल मीडिया पर स्टॉक करती रहती हूं, उनके वेकेशन के फोटोज देखती रहती हूं। सोचती हूं कि सब कितने खुश, कितने सक्सेसफुल हैं और मेरा जीवन कितना बोरिंग है। इससे मेरी सेल्फ वर्थ भी कम हो रही है। मैं क्या करूं?

एक्सपर्ट- डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

जवाब- आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत रियल और कॉमन है, खासतौर पर आज के सोशल मीडिया दौर में। अच्छी बात यह है कि ये कोई स्थायी समस्या नहीं है। यह एक समझने और बदलने योग्य पैटर्न है। मैं साइकोलॉजी के कुछ टूल्स और फ्रेमवर्क्स की मदद से आपको एक प्रैक्टिकल रोडमैप देने की कोशिश करूंगा।

आपकी स्थिति की क्लिनिकल अंडरस्टैंडिंग

सबसे पहले हम आपकी सिचुएशन को मनोविज्ञान के नजरिए से समझने की कोशिश करेंगे।

  • आप ट्रिगर महसूस करती हैं।
  • फिर आप सोशल मीडिया स्क्रॉल करती हैं।
  • वहां आप दूसरों की ‘सक्सेस’ और उनकी ‘हैप्पी लाइफ’ देखती हैं।

ये देखकर मन में ऑटोमैटिक ये ख्याल आते हैं-

  • “सब मुझसे आगे हैं।”
  • “मैं कुछ खास नहीं कर रही।”
  • “मेरा जीवन बिल्कुल बोरिंग है।”

साइकोलॉजिकल एनालिसिस: ऐसा क्यों हो रहा है?

मनोविज्ञान में एक कॉन्सेप्ट है, सोशल कंपैरिजन थ्योरी। यह थ्योरी कहती है कि हम खुद को समझने के लिए दूसरों से तुलना करते हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब यह तुलना “अपवर्ड कंपैरिजन” बन जाती है। यानी हम हमेशा सिर्फ हमसे बेहतर, अमीर, सुंदर या सफल लोगों से ही तुलना करते हैं।

अपवर्ड कंपैरिजन का प्रभाव

अपवर्ड कंपैरिजन के कुछ ऐसे साइकोलॉजिकल प्रभाव हो सकते हैं-

  • खुद को कमतर महसूस करना।
  • यह सोचना कि “मैं पीछे रह गई।”
  • हमेशा असंतुष्ट रहना।

सोशल मीडिया की झूठी दुनिया

सोशल मीडिया पर आप कुछ लोगों की जो जिंदगी देख रही हैं, वो उनकी पूरी लाइफ नहीं है। वो सिर्फ उतनी ही है, जो वो आपको दिखाना चाहते हैं। इसलिए हमें ये बात याद रखनी चाहिए-

  • लोग सोशल मीडिया पर सच पोस्ट नहीं करते।
  • लोग सोशल मीडिया पर अपना बेस्ट पोस्ट करते हैं।

ज्यादा सोशल मीडिया यूज के नुकसान

सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल इसलिए खतरनाक है क्योंकि मेंटल, इमोशनल और हेल्थ संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इससे सिर्फ सेल्फ वर्थ ही कम नहीं होती बल्कि नींद, भूख जैसे बेसिक हेल्थ पैरामीटर्स पर भी इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें-

डोपामिन लूप और स्टॉकिंग बिहेवियर

सोशल मीडिया पर बार-बार किसी की फोटो, वीडियो और लाइफ अपडेट को देखते हुए हम एक तरह के डोपामिन लूप में फंसते जाते हैं। यह एक तरह का बिहेवियरल लूप बन जाता है-

  • सोशल मीडिया पर फोटो देखना।
  • फोटो से और जिज्ञासा होना।
  • प्रोफाइल को आगे स्क्रॉल करना।
  • और ज्यादा फोटो-वीडियो देखना।
  • फिर अपनी लाइफ से तुलना करना।
  • तुलना से दुख महसूस होना।
  • फिर अपने लिए वैलिडेशन ढूंढना।
  • इसके लिए और ज्यादा स्क्रॉल करना।
  • एक बिहेवियरल लूप में फंसते जाना।

सेल्फ वर्थ: सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 9 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए आपका जवाब अगर ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘बहुत ज्यादा’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें।

नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर आपका टोटल स्कोर 0 से 8 के बीच में है तो ये सामान्य हल्का प्रभाव है। लेकिन अगर आपका स्कोर 19 से 27 के बीच है तो कंपैरिजन स्केल पर आपका स्कोर बहुत ज्यादा है। आप बहुत ज्यादा तुलना करती हैं और आपकी सेल्फ वर्थ कम है। ऐसे में आपको एक्टिव कदम उठाने की जरूरत है।

2. संभावित डायग्नोस्टिक फॉर्मुलेशन

यह कोई स्पष्ट मानसिक बीमारी नहीं है। यह सिर्फ लो सेल्फ एस्टीम और गलत कंपैरिजन पैटर्न में फंसने का मामला है। हालांकि अगर यह पैटर्न ज्यादा बढ़ जाए और एडिक्टिव स्टेज तक पहुंच जाए तो ये जोखिम हो सकते हैं-

  • एडजस्टमेंट डिफिकल्टीज
  • माइल्ड डिप्रेसिव सिंपटम्स

CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान

यहां मैं आपको कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित एक सेल्फ हेल्प प्लान दे रहा हूं।

स्टेप 1

अवेयरनेस

  • सबसे पहली और जरूरी चीज है सजग होना।
  • जब भी मन में तुलना की भावना आए तो उसे अटेंशन दें।
  • इस बात को नोट करें।
  • जैसेकि आपने इंस्टाग्राम देखा और आपके मन में ख्याल आया कि ‘सब खुश हैं और मैं ही दुखी हूं’ तो इस बात को नोट करें।
  • नोटिस करना ही बदलाव की दिशा में पहला कदम है।

स्टेप 2

अपनी सोच को चुनौती देना

अपने मन में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को चुनौती दें।

  • नेगेटिव ख्याल– “सब खुश हैं, मैं ही दुखी और अकेली हूं।”
  • पॉजिटिव रीफ्रेमिंग– “लोग सिर्फ अपनी खुशी ही शेयर करते हैं, अपने स्ट्रगल शेयर नहीं करते।”
  • नेगेटिव ख्याल– “सब आगे निकल रहे हैं। मैं ही पीछे रह गई हूं।”
  • पॉजिटिव रीफ्रेमिंग– “हर सक्सेस की अपनी अलग टाइमलाइन होती है।”

स्टेप 3

व्यवहार में बदलाव

1. सोशल मीडिया से जुड़े नए नियम

  • अपने लिए सोशल मीडिया रूल बनाएं।
  • दिन में सिर्फ दो बार सोशल मीडिया देखेंगी।
  • हर बार सिर्फ 20 मिनट देखेंगी।
  • रात 9 बजे के बाद सोशल मीडिया से दूर रहेंगी।

2. सोशल मीडिया का पैसिव नहीं, एक्टिव उपयोग

  • आप सोशल मीडिया को सिर्फ दूसरों की जिंदगी देखने के लिए यूज नहीं करेंगी। यह पैसिव यूज है।
  • आप उसका एक्टिव यूज करेंगी। सिर्फ देखने की बजाय खुद अर्थपूर्ण बातचीत या जानकारी डालेंगी।

3. कंपैरिजन डिटॉक्स एक्सरसाइज

  • जब भी मन में दूसरों से तुलना का ख्याल आए तो खुद से पूछें-
  • “क्या मैं पूरी कहानी देख पा रही हूं?”
  • क्या मैं अपनी पूरी जिंदगी की तुलना किसी के केवल अच्छे पलों से कर रही हूं?

स्टेप 4

सेल्फ वर्थ रीबिल्ड

हर दिन अपनी कोई भी तीन छोटी उपलब्धियां लिखें। आज मैंने क्या अच्छा किया?

कुछ उदाहरण:

  • अपना काम समय पर पूरा किया।
  • 20 मिनट वॉक किया।
  • किसी से अच्छी, पॉजिटिव बातचीत की।

स्टेप 5

इमोशनल रेगुलेशन

  • जब सोशल मीडिया देखने या दूसरों से कंपेयर करने का बहुत ज्यादा मन हो तो 10 मिनट का नियम अपनाएं।
  • इसका अर्थ है कि जब भी इच्छा हो तो 10 मिनट ठहर जाएं। 10 मिनट इंतजार करें।
  • इस 10 मिनट में अपना दिमाग डिस्ट्रैक्ट करें। कोई और एक्टिविटी करें, जैसे टहलना, पानी पीना या गहरी सांस लेना।

प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?

अगर ये बिहेवियर पैटर्न डिप्रेशन की ओर ले जाए, नींद और भूख के पैटर्न में बहुत ज्यादा बदलाव हो या उदासी लंबे समय तक बनी रहे तो प्रोफेशनल हेल्प से मदद मिल सकती है।

सबसे जरूरी बात

याद रखें, तुलना अक्सर अधूरी जानकारी पर आधारित होती है। हम अपनी पूरी जिंदगी जानते हैं, जबकि दूसरे की सिर्फ उतनी, जितनी वह हमें दिखा रहा है। अपनी सेल्फ वर्थ पर फोकस करें और अपनी सफलता की परिभाषा खुद तय करें।

……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ: फिर सारे कॉमन दोस्तों ने भी दोस्ती तोड़ ली, बात बंद कर दी, मैं अकेली हो गई हूं, क्या करूं

आप इस वक्त जिस मन:स्थिति से गुजर रही हैं, वो काफी परेशान करने वाली है। 7 साल के लंबे रिलेशनशिप के बाद ब्रेकअप अपने आप में तकलीफदेह बात है। लेकिन अभी आप जो फील कर रही हैं, वो सिर्फ ब्रेकअप की तकलीफ नहीं है। उसके साथ एक दुख और जुड़ गया है, जिसे मनोविज्ञान की भाषा में ‘घोस्टिंग’ कहते हैं। आगे पढ़िए…

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सवाल- मैं 26 साल की वर्किंग प्रोफेशनल हूं। मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं हर वक्त अपनी तुलना सक्सेसफुल लोगों से करती रहती हूं। फिर चाहे वो सेलिब्रिटीज हों या मेरे आसपास के लोग। मैं हर सफल व्यक्ति के पैरलल खुद को रखकर उससे कंपैरिजन करने लगती हूं। कई बार मैं देर रात तक उन्हें सोशल मीडिया पर स्टॉक करती रहती हूं, उनके वेकेशन के फोटोज देखती रहती हूं। सोचती हूं कि सब कितने खुश, कितने सक्सेसफुल हैं और मेरा जीवन कितना बोरिंग है। इससे मेरी सेल्फ वर्थ भी कम हो रही है। मैं क्या करूं?

एक्सपर्ट- डॉ. द्रोण शर्मा, कंसल्टेंट साइकेट्रिस्ट, आयरलैंड, यूके। यूके, आयरिश और जिब्राल्टर मेडिकल काउंसिल के मेंबर।

जवाब- आप जो महसूस कर रही हैं, वह बहुत रियल और कॉमन है, खासतौर पर आज के सोशल मीडिया दौर में। अच्छी बात यह है कि ये कोई स्थायी समस्या नहीं है। यह एक समझने और बदलने योग्य पैटर्न है। मैं साइकोलॉजी के कुछ टूल्स और फ्रेमवर्क्स की मदद से आपको एक प्रैक्टिकल रोडमैप देने की कोशिश करूंगा।

आपकी स्थिति की क्लिनिकल अंडरस्टैंडिंग

सबसे पहले हम आपकी सिचुएशन को मनोविज्ञान के नजरिए से समझने की कोशिश करेंगे।

  • आप ट्रिगर महसूस करती हैं।
  • फिर आप सोशल मीडिया स्क्रॉल करती हैं।
  • वहां आप दूसरों की ‘सक्सेस’ और उनकी ‘हैप्पी लाइफ’ देखती हैं।

ये देखकर मन में ऑटोमैटिक ये ख्याल आते हैं-

  • “सब मुझसे आगे हैं।”
  • “मैं कुछ खास नहीं कर रही।”
  • “मेरा जीवन बिल्कुल बोरिंग है।”

साइकोलॉजिकल एनालिसिस: ऐसा क्यों हो रहा है?

मनोविज्ञान में एक कॉन्सेप्ट है, सोशल कंपैरिजन थ्योरी। यह थ्योरी कहती है कि हम खुद को समझने के लिए दूसरों से तुलना करते हैं। लेकिन समस्या तब होती है, जब यह तुलना “अपवर्ड कंपैरिजन” बन जाती है। यानी हम हमेशा सिर्फ हमसे बेहतर, अमीर, सुंदर या सफल लोगों से ही तुलना करते हैं।

अपवर्ड कंपैरिजन का प्रभाव

अपवर्ड कंपैरिजन के कुछ ऐसे साइकोलॉजिकल प्रभाव हो सकते हैं-

  • खुद को कमतर महसूस करना।
  • यह सोचना कि “मैं पीछे रह गई।”
  • हमेशा असंतुष्ट रहना।

सोशल मीडिया की झूठी दुनिया

सोशल मीडिया पर आप कुछ लोगों की जो जिंदगी देख रही हैं, वो उनकी पूरी लाइफ नहीं है। वो सिर्फ उतनी ही है, जो वो आपको दिखाना चाहते हैं। इसलिए हमें ये बात याद रखनी चाहिए-

  • लोग सोशल मीडिया पर सच पोस्ट नहीं करते।
  • लोग सोशल मीडिया पर अपना बेस्ट पोस्ट करते हैं।

ज्यादा सोशल मीडिया यूज के नुकसान

सोशल मीडिया का बहुत ज्यादा इस्तेमाल इसलिए खतरनाक है क्योंकि मेंटल, इमोशनल और हेल्थ संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इससे सिर्फ सेल्फ वर्थ ही कम नहीं होती बल्कि नींद, भूख जैसे बेसिक हेल्थ पैरामीटर्स पर भी इसका नेगेटिव प्रभाव पड़ता है। डिटेल नीचे ग्राफिक में देखें-

डोपामिन लूप और स्टॉकिंग बिहेवियर

सोशल मीडिया पर बार-बार किसी की फोटो, वीडियो और लाइफ अपडेट को देखते हुए हम एक तरह के डोपामिन लूप में फंसते जाते हैं। यह एक तरह का बिहेवियरल लूप बन जाता है-

  • सोशल मीडिया पर फोटो देखना।
  • फोटो से और जिज्ञासा होना।
  • प्रोफाइल को आगे स्क्रॉल करना।
  • और ज्यादा फोटो-वीडियो देखना।
  • फिर अपनी लाइफ से तुलना करना।
  • तुलना से दुख महसूस होना।
  • फिर अपने लिए वैलिडेशन ढूंढना।
  • इसके लिए और ज्यादा स्क्रॉल करना।
  • एक बिहेवियरल लूप में फंसते जाना।

सेल्फ वर्थ: सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट

यहां मैं आपको एक सेल्फ एसेसमेंट टेस्ट दे रहा हूं। नीचे ग्राफिक्स में कुल 9 सवाल हैं। आपको इन सवालों को ध्यान से पढ़ना है और 0 से 3 के स्केल पर इसे रेट करना है। जैसेकि पहले सवाल के लिए आपका जवाब अगर ‘बिल्कुल नहीं’ है तो 0 नंबर दें और अगर आपका जवाब ‘बहुत ज्यादा’ है तो 3 नंबर दें। अंत में अपने टोटल स्कोर की एनालिसिस करें।

नंबर के हिसाब से उसका इंटरप्रिटेशन भी ग्राफिक में दिया है। अगर आपका टोटल स्कोर 0 से 8 के बीच में है तो ये सामान्य हल्का प्रभाव है। लेकिन अगर आपका स्कोर 19 से 27 के बीच है तो कंपैरिजन स्केल पर आपका स्कोर बहुत ज्यादा है। आप बहुत ज्यादा तुलना करती हैं और आपकी सेल्फ वर्थ कम है। ऐसे में आपको एक्टिव कदम उठाने की जरूरत है।

2. संभावित डायग्नोस्टिक फॉर्मुलेशन

यह कोई स्पष्ट मानसिक बीमारी नहीं है। यह सिर्फ लो सेल्फ एस्टीम और गलत कंपैरिजन पैटर्न में फंसने का मामला है। हालांकि अगर यह पैटर्न ज्यादा बढ़ जाए और एडिक्टिव स्टेज तक पहुंच जाए तो ये जोखिम हो सकते हैं-

  • एडजस्टमेंट डिफिकल्टीज
  • माइल्ड डिप्रेसिव सिंपटम्स

CBT आधारित सेल्फ हेल्प प्लान

यहां मैं आपको कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी पर आधारित एक सेल्फ हेल्प प्लान दे रहा हूं।

स्टेप 1

अवेयरनेस

  • सबसे पहली और जरूरी चीज है सजग होना।
  • जब भी मन में तुलना की भावना आए तो उसे अटेंशन दें।
  • इस बात को नोट करें।
  • जैसेकि आपने इंस्टाग्राम देखा और आपके मन में ख्याल आया कि ‘सब खुश हैं और मैं ही दुखी हूं’ तो इस बात को नोट करें।
  • नोटिस करना ही बदलाव की दिशा में पहला कदम है।

स्टेप 2

अपनी सोच को चुनौती देना

अपने मन में आने वाले नकारात्मक ख्यालों को चुनौती दें।

  • नेगेटिव ख्याल– “सब खुश हैं, मैं ही दुखी और अकेली हूं।”
  • पॉजिटिव रीफ्रेमिंग– “लोग सिर्फ अपनी खुशी ही शेयर करते हैं, अपने स्ट्रगल शेयर नहीं करते।”
  • नेगेटिव ख्याल– “सब आगे निकल रहे हैं। मैं ही पीछे रह गई हूं।”
  • पॉजिटिव रीफ्रेमिंग– “हर सक्सेस की अपनी अलग टाइमलाइन होती है।”

स्टेप 3

व्यवहार में बदलाव

1. सोशल मीडिया से जुड़े नए नियम

  • अपने लिए सोशल मीडिया रूल बनाएं।
  • दिन में सिर्फ दो बार सोशल मीडिया देखेंगी।
  • हर बार सिर्फ 20 मिनट देखेंगी।
  • रात 9 बजे के बाद सोशल मीडिया से दूर रहेंगी।

2. सोशल मीडिया का पैसिव नहीं, एक्टिव उपयोग

  • आप सोशल मीडिया को सिर्फ दूसरों की जिंदगी देखने के लिए यूज नहीं करेंगी। यह पैसिव यूज है।
  • आप उसका एक्टिव यूज करेंगी। सिर्फ देखने की बजाय खुद अर्थपूर्ण बातचीत या जानकारी डालेंगी।

3. कंपैरिजन डिटॉक्स एक्सरसाइज

  • जब भी मन में दूसरों से तुलना का ख्याल आए तो खुद से पूछें-
  • “क्या मैं पूरी कहानी देख पा रही हूं?”
  • क्या मैं अपनी पूरी जिंदगी की तुलना किसी के केवल अच्छे पलों से कर रही हूं?

स्टेप 4

सेल्फ वर्थ रीबिल्ड

हर दिन अपनी कोई भी तीन छोटी उपलब्धियां लिखें। आज मैंने क्या अच्छा किया?

कुछ उदाहरण:

  • अपना काम समय पर पूरा किया।
  • 20 मिनट वॉक किया।
  • किसी से अच्छी, पॉजिटिव बातचीत की।

स्टेप 5

इमोशनल रेगुलेशन

  • जब सोशल मीडिया देखने या दूसरों से कंपेयर करने का बहुत ज्यादा मन हो तो 10 मिनट का नियम अपनाएं।
  • इसका अर्थ है कि जब भी इच्छा हो तो 10 मिनट ठहर जाएं। 10 मिनट इंतजार करें।
  • इस 10 मिनट में अपना दिमाग डिस्ट्रैक्ट करें। कोई और एक्टिविटी करें, जैसे टहलना, पानी पीना या गहरी सांस लेना।

प्रोफेशनल हेल्प कब जरूरी?

अगर ये बिहेवियर पैटर्न डिप्रेशन की ओर ले जाए, नींद और भूख के पैटर्न में बहुत ज्यादा बदलाव हो या उदासी लंबे समय तक बनी रहे तो प्रोफेशनल हेल्प से मदद मिल सकती है।

सबसे जरूरी बात

याद रखें, तुलना अक्सर अधूरी जानकारी पर आधारित होती है। हम अपनी पूरी जिंदगी जानते हैं, जबकि दूसरे की सिर्फ उतनी, जितनी वह हमें दिखा रहा है। अपनी सेल्फ वर्थ पर फोकस करें और अपनी सफलता की परिभाषा खुद तय करें।

……………… ये खबर भी पढ़िए मेंटल हेल्थ– बॉयफ्रेंड से ब्रेकअप हुआ: फिर सारे कॉमन दोस्तों ने भी दोस्ती तोड़ ली, बात बंद कर दी, मैं अकेली हो गई हूं, क्या करूं

आप इस वक्त जिस मन:स्थिति से गुजर रही हैं, वो काफी परेशान करने वाली है। 7 साल के लंबे रिलेशनशिप के बाद ब्रेकअप अपने आप में तकलीफदेह बात है। लेकिन अभी आप जो फील कर रही हैं, वो सिर्फ ब्रेकअप की तकलीफ नहीं है। उसके साथ एक दुख और जुड़ गया है, जिसे मनोविज्ञान की भाषा में ‘घोस्टिंग’ कहते हैं। आगे पढ़िए…

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