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Country’s first space city soon, India’s First Space City in Tirupati, India’s First Space City

Country's first space city soon, India's First Space City in Tirupati, India's First Space City

Hindi News National Country’s First Space City Soon, India’s First Space City In Tirupati, India’s First Space City एमएस शंकर. अमरावती5 मिनट पहले कॉपी लिंक स्पेस सिटी गगनयान जैसे भारत के महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए बेस कैंप का काम करेगी। – प्रतीकात्मक फोटो यदि सबकुछ योजना के अनुसार हुआ तो इसी महीने देश की पहली स्पेस सिटी बननी शुरू हो जाएगी। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पिछले साल इसका आइडिया सामने रखा था। उनकी सरकार अब इसका ब्लू प्रिंट तैयार कर चुकी है। इस ‘अंतरिक्ष शहर’ में न केवल सैकड़ों छोटी कंपनियां रॉकेट के पुर्जे, सेंसर बनाएंगी, बल्कि स्काईरूट, कल्याणी स्ट्रेटेजिक सिस्टम्स, एचएफसीएल जैसी बड़ी कंपनियां दुनियाभर के लिए प्राइवेट रॉकेट बनाकर देंगी। सरकार ने यहां 570 एकड़ का स्टार्टटप एक्टिवेशन जोन बनाया है, जिसमें अग्निकुल, कॉसमॉस, पिक्सेल जैसे स्पेस स्टार्टअप भविष्य की अंतरिक्ष संभावनाओं को आकार देंगे। यह सिटी गगनयान जैसे भारत के महत्वाकांक्षी मिशनों के लिए बेस कैंप का काम करेगी। नायडू सरकार ने पांच राज्यों में सरकार गठन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों स्पेस सिटी की आधारशिला रखने की योजना तैयार की है। स्काईरूट के सीईओ पवन कुमार चंदना ने बताया कि तिरुपति जिले के थोट्टाम्बेडु मंडल के रौथुसुरमाला गांव में 2600 एकड़ जमीन तैयार की जा रही है। यह अंतरिक्ष औद्योगिक क्लस्टर होगा। यहां एयरोस्पेस, रक्षा विनिर्माण, निजी अंतरिक्ष इनोवेशन के अलग-अलग हब बनने हैं। इस पर 3400 करोड़ रु. से ज्यादा खर्च होंगे। इन कंपनियों के बड़े बेस होंगे स्काई रूट: स्काई रूट इस प्रोजेक्ट की ‘एंकर यूनिट’ है। कंपनी ने यहां रॉकेट निर्माण, असेंबली और टेस्टिंग के लिए ₹400 करोड़ के निवेश की घोषणा की है। उन्हें 300 एकड़ जमीन मिली है, जहां वे अपने ‘विक्रम’ सीरीज के रॉकेट तैयार करेंगे। कल्याणी स्ट्रैटजिक सिस्टम्स: भारत फोर्ज की यह सहायक कंपनी पास ही के मदाकाशिरा धहब में ₹1,430 करोड़ निवेश कर रही है। इसके पास डिफेंस पेलोड और रॉकेट एनर्जेटिक्स का काम है। एचएफसीएल: यह कंपनी ₹1,186 करोड़ निवेश कर आर्टिलरी और गोला-बारूद निर्माण इकाई लगा रही है, जो रक्षा अनुप्रयोगों के लिए स्पेस सिटी के डेटा का उपयोग करेगी। स्टार्टअप जोन: सरकार ने 570 एकड़ का ‘स्टार्टअप एक्टिवेशन जोन’ बनाया है, जिसमें अग्निकुल कॉसमॉस और पिक्सेल जैसे स्टार्टअप्स अपना विस्तार करेंगे। भारत का एक्सपोर्ट बनाने का लक्ष्य भारत का लक्ष्य अपनी अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था को 2033 तक 44 अरब डॉलर तक पहुंचाना है। तिरुपति की स्पेस सिटी इस लक्ष्य में ‘एक्सपोर्ट हब’ की भूमिका निभाएगी। इस क्लस्टर से 5,000 प्रत्यक्ष और 30,000 अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसमें वैज्ञानिकों से लेकर लॉजिस्टिक्स विशेषज्ञों तक की जरूरत होगी। यह सिटी छोटे उद्योगों के लिए एक ‘हब और स्पोक’ मॉडल पर काम करेगी। समझें… क्या है इस ब्लूप्रिंट में 1. लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर जोन: छोटे उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) के लिए पैड और मिशन कंट्रोल सेंटर। 2. सैटेलाइट मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर: नैनो और माइक्रो सैटेलाइट बनाने के लिए एडवांस क्लीन रूम। 3. अनुसंधान और नवाचार कॉरिडोर: स्टार्टअप्स और इसरो के बीच सहयोग के लिए इनक्यूबेशन सेंटर। 4. स्पेस डेटा हब: कृषि और रक्षा के लिए सैटेलाइट डेटा प्रोसेसिंग सेंटर भी यहीं से ऑपरेट होगा। 5. सहायक विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र: सटीक इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स इकाइयों का निर्माण। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

US Scientist Death Missing Mystery; Nuclear Space

US Scientist Death Missing Mystery; Nuclear Space

वॉशिंगटन डीसी14 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के मामलों पर अब व्हाइट हाउस सवालों के घेरे में है। 2023 से अब तक ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या अधिकारी या तो लापता हो गए या संदिग्ध हालात में मरे। बुधवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में पहली बार प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से इन घटनाओं पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने अभी संबंधित एजेंसियों से इस बारे में बात नहीं की है। मैं ऐसा करूंगी और आपको जवाब दूंगी।” उन्होंने आगे कहा, “अगर यह सही है, तो यह निश्चित तौर पर ऐसी बात है जिसे सरकार जांच के लायक मानेगा।” उनके इस जवाब के बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां इस पैटर्न को गंभीरता से नहीं ले रही हैं या फिर इसे छुपाने की कोशिश कर रही हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट बुधवार को वैज्ञानिकों के लापता होने से जुड़े सवाल का जवाब देती हुई। कई वैज्ञानिकों घरों से निकले, फिर वापस नहीं लौटे वैज्ञानिकों के लापता या मौत के सभी मामले अमेरिका की हाई-सिक्योरिटी रिसर्च संस्थाओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें लॉस एलामोस नेशनल लैब, NASA का जेट प्रोपल्शन लैब और MIT का प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर शामिल हैं। ये संस्थान न्यूक्लियर हथियार, एडवांस्ड प्रोपल्शन और नई ऊर्जा तकनीकों पर काम करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई लापता वैज्ञानिक अपने घरों से अचानक पैदल निकल गए। उन्होंने फोन, वॉलेट और चाबियां तक पीछे छोड़ दीं। यही पैटर्न कई मामलों में देखा गया है, जिससे संदेह और बढ़ा है। रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल विलियम नील मैककैसलैंड का मामला हाल में बहुत चर्चा में रहा। वे 27 फरवरी को अपने न्यू मैक्सिको स्थित घर से गायब हो गए थे। बताया गया कि वे अपने साथ सिर्फ पिस्टल लेकर निकले थे और उनकी पत्नी ने 911 पर कहा कि वे “खुद को छिपाने की कोशिश कर रहे थे।” लापत-मृतक वैज्ञानिकों-रिसर्चर्स और एडमिन की पूरी लिस्ट मोनिका रेजा- लापता मोनिका अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के जेट प्रोपल्शन लैब से जुड़े एक प्रोजेक्ट में काम कर रही थीं। वहां वह नए मटेरियल और धातुओं पर काम देखने वाली एक टीम की चीफ थी। वह एक खास धातु पर काम कर रही थीं, जिसे मोंडालोय कहा जाता है। यह मटेरियल खास तौर पर रॉकेट इंजन के लिए बताया जाता है। यह भविष्य की स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए काफी अहम हो सकता था। मोनिका को आखिरी बार 22 जून की सुबह माउंट वाटरमैन इलाके में दो दोस्तों के साथ हाइकिंग करते हुए देखा गया था। उनके बारे में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनिका का प्रोफेशनल कनेक्शन रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल विलियम “नील” मैककैसलैंड से था। वह 8 महीने बाद गायब हो गए। इसके बाद शक और बढ़ गया। मोनिका रेजा रॉकेट साइंटिस्ट थीं और नासा के एक प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं। (फाइल फोटो) विलियम मैककैसलैंड- लापता विलियम अमेरिका के रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल हैं। वह पहले एयर फोर्स रिसर्च लैबोरेट्री के कमांडर रह चुके हैं। वहां वे अरबों डॉलर के साइंस और टेक्नोलॉजी प्रोग्राम संभालते थे। यह लैब अमेरिकी सेना की सबसे अहम रिसर्च यूनिट्स में से एक है, जहां नई टेक्नोलॉजी, हथियार सिस्टम, स्पेस से जुड़ी टेक्नोलॉजी और एडवांस साइंस पर काम होता है। जिस प्रोजेक्ट में मोनिका रेजा काम कर रही थीं, उससे जुड़ी फंडिंग की देखरेख मैककैसलैंड ने की थी। मैककैसलैंड 27 फरवरी 2026 की सुबह न्यू मैक्सिको में अपने घर के पास आखिरी बार देखे गए थे। स्टीवन गार्सिया- लापता गार्सिया 28 अगस्त 2025 को अपने घर से निकले और फिर नहीं मिले। वे एक सरकारी ठेकेदार के तौर पर काम करते थे। वे कंसास सिटी नेशनल सिक्योरिटी कैंपस से जुड़े थे, जहां परमाणु हथियारों के गैर-न्यूक्लियर पार्ट बनाए जाते हैं। यहां काम करने वाले लोग सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम माने जाते हैं। गार्सिया 28 अगस्त 2025 को न्यू मैक्सिको के अल्बुकर्क शहर में अपने घर से अचानक गायब हो गए। सबसे अजीब बात यह थी कि वह घर से पैदल निकले। अपना फोन, वॉलेट, चाबियां सब पीछे छोड़ गए। उनके पास सिर्फ एक पिस्टल थी। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। पुलिस को भी अब तक कोई बड़ा सुराग नहीं मिला है। उनका मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि वह संवेदनशील परमाणु काम से जुड़े थे और उनका गायब होने का तरीका बाकी कुछ मामलों से मिलता-जुलता है एंथनी चावेज- लापता एंथनी चावेज का लॉस आलामोस नेशनल लैब से जुड़े। यह एक हाई सिक्योरिटी परमाणु लैब है, जिसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मैनहटन प्रोजेक्ट के तहत हुई थी और तब से यह परमाणु हथियारों से जुड़े रिसर्च के लिए जानी जाती है। हालांकि एंथनी का सटीक पद क्या था, यह साफ नहीं है, लेकिन इस तरह की जगह से जुड़े होने की वजह से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आया। 78 साल के चावेज एक दिन टहलने निकले और उसके बाद अचानक गायब हो गए। उन्होंने घर से निकलते समय अपनी कार ड्राइववे में लॉक करके छोड़ी थी और उनका वॉलेट, चाबियां और बाकी निजी सामान भी घर के अंदर ही मिला। यानी वह बिना जरूरी चीजों के ही बाहर गए थे। उनके गायब होने की सटीक तारीख पता नहीं है। उनके परिवार और दोस्तों का कहना है कि उनका इस तरह अचानक गायब होना उनके स्वभाव के बिल्कुल खिलाफ है। यानी वे बिना बताए कहीं चले जाने वाले व्यक्ति नहीं थे। मेलिसा कैसियास- लापता मेलिसा कैसियास भी एंथनी चावेज की तरह लॉस आलामोस नेशनल लैब से जुड़ी थीं। वह वहां एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट थीं, लेकिन माना जाता है कि उनके पास अहम जानकारी तक पहुंच हो सकती थी। 54 साल की मेलिसा 2025 में न्यू मैक्सिको में अपने घर से अचानक गायब हो गईं। 26 जून को कैसियास अपने पति मार्क कैसियास के साथ लेबोरेटरी गई। वहां दोनों साथ काम करते थे। हालांकि वह खुद वापस घर लौट आईं, क्योंकि वह अपना वर्क बैज भूल गई थीं। उसने घर से काम करने का फैसला किया कैसियास वापस घर लौटीं और फिर पैदल ही कही

US Scientist Death Missing Mystery; Nuclear Space

US Scientist Death Missing Mystery; Nuclear Space

वॉशिंगटन डीसी53 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका में न्यूक्लियर और स्पेस रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों की मौत और गुमशुदगी के मामलों पर अब व्हाइट हाउस सवालों के घेरे में है। 2023 से अब तक ऐसे 10 मामले सामने आए हैं, जिनमें वैज्ञानिक या अधिकारी या तो लापता हो गए या संदिग्ध हालात में मरे। बुधवार को व्हाइट हाउस ब्रीफिंग में पहली बार प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट से इन घटनाओं पर सवाल पूछा गया। जवाब में उन्होंने कहा, “मैंने अभी संबंधित एजेंसियों से इस बारे में बात नहीं की है। मैं ऐसा करूंगी और आपको जवाब दूंगी।” उन्होंने आगे कहा, “अगर यह सही है, तो यह निश्चित तौर पर ऐसी बात है जिसे सरकार जांच के लायक मानेगा।” उनके इस जवाब के बाद लोगों में नाराजगी देखने को मिली। कई लोगों ने आरोप लगाया कि सरकारी एजेंसियां इस पैटर्न को गंभीरता से नहीं ले रही हैं या फिर इसे छुपाने की कोशिश कर रही हैं। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट बुधवार को वैज्ञानिकों के लापता होने से जुड़े सवाल का जवाब देती हुई। कई वैज्ञानिकों घरों से निकले, फिर वापस नहीं लौटे वैज्ञानिकों के लापता या मौत के सभी मामले अमेरिका की हाई-सिक्योरिटी रिसर्च संस्थाओं से जुड़े बताए जा रहे हैं। इनमें लॉस एलामोस नेशनल लैब, NASA का जेट प्रोपल्शन लैब और MIT का प्लाज्मा साइंस एंड फ्यूजन सेंटर शामिल हैं। ये संस्थान न्यूक्लियर हथियार, एडवांस्ड प्रोपल्शन और नई ऊर्जा तकनीकों पर काम करते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कई लापता वैज्ञानिक अपने घरों से अचानक पैदल निकल गए। उन्होंने फोन, वॉलेट और चाबियां तक पीछे छोड़ दीं। यही पैटर्न कई मामलों में देखा गया है, जिससे संदेह और बढ़ा है। रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल विलियम नील मैककैसलैंड का मामला हाल में बहुत चर्चा में रहा। वे 27 फरवरी को अपने न्यू मैक्सिको स्थित घर से गायब हो गए थे। बताया गया कि वे अपने साथ सिर्फ पिस्टल लेकर निकले थे और उनकी पत्नी ने 911 पर कहा कि वे खुद को छिपाने की कोशिश कर रहे थे। विलियम नील मैककैसलैंड एक रिटायर्ड अमेरिकी एयर फोर्स जनरल थे। (फाइल फोटो) लापत-मृतक वैज्ञानिकों-रिसर्चर्स और एडमिन की पूरी लिस्ट मोनिका रेजा- लापता मोनिका अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के जेट प्रोपल्शन लैब से जुड़े एक प्रोजेक्ट में काम कर रही थीं। वहां वह नए मटेरियल और धातुओं पर काम देखने वाली एक टीम की चीफ थी। वह एक खास धातु पर काम कर रही थीं, जिसे मोंडालोय कहा जाता है। यह मटेरियल खास तौर पर रॉकेट इंजन के लिए बताया जाता है। यह भविष्य की स्पेस टेक्नोलॉजी के लिए काफी अहम हो सकता था। मोनिका को आखिरी बार 22 जून की सुबह माउंट वाटरमैन इलाके में दो दोस्तों के साथ हाइकिंग करते हुए देखा गया था। उनके बारे में अब तक कोई सुराग नहीं मिला है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मोनिका का प्रोफेशनल कनेक्शन रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल विलियम “नील” मैककैसलैंड से था। वह 8 महीने बाद गायब हो गए। इसके बाद शक और बढ़ गया। मोनिका रेजा रॉकेट साइंटिस्ट थीं और नासा के एक प्रोजेक्ट से जुड़ी थीं। (फाइल फोटो) विलियम मैककैसलैंड- लापता विलियम अमेरिका के रिटायर्ड एयर फोर्स जनरल हैं। वह पहले एयर फोर्स रिसर्च लैबोरेट्री के कमांडर रह चुके हैं। वहां वे अरबों डॉलर के साइंस और टेक्नोलॉजी प्रोग्राम संभालते थे। यह लैब अमेरिकी सेना की सबसे अहम रिसर्च यूनिट्स में से एक है, जहां नई टेक्नोलॉजी, हथियार सिस्टम, स्पेस से जुड़ी टेक्नोलॉजी और एडवांस साइंस पर काम होता है। जिस प्रोजेक्ट में मोनिका रेजा काम कर रही थीं, उससे जुड़ी फंडिंग की देखरेख मैककैसलैंड ने की थी। मैककैसलैंड 27 फरवरी 2026 की सुबह न्यू मैक्सिको में अपने घर के पास आखिरी बार देखे गए थे। स्टीवन गार्सिया- लापता गार्सिया कंसास सरकारी ठेकेदार थे और सिटी नेशनल सिक्योरिटी कैंपस से जुड़े थे, जहां परमाणु हथियारों के गैर-न्यूक्लियर पार्ट बनाए जाते हैं। यहां काम करने वाले लोग सुरक्षा के लिहाज से काफी अहम माने जाते हैं। गार्सिया 28 अगस्त 2025 को न्यू मैक्सिको के अल्बुकर्क शहर में अपने घर से अचानक गायब हो गए। सबसे अजीब बात यह थी कि वह घर से पैदल निकले। अपना फोन, वॉलेट, चाबियां सब पीछे छोड़ गए। उनके पास सिर्फ एक पिस्टल थी। इसके बाद से उनका कोई पता नहीं चला। पुलिस को भी अब तक कोई बड़ा सुराग नहीं मिला है। उनका मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि वह संवेदनशील परमाणु काम से जुड़े थे और उनका गायब होने का तरीका बाकी कुछ मामलों से मिलता-जुलता है। स्टीवन गार्सिया सिटी नेशनल सिक्योरिटी कैंपस में सरकारी ठेकेदार थे। एंथनी चावेज- लापता एंथनी चावेज का लॉस आलामोस नेशनल लैब से जुड़े। यह एक हाई सिक्योरिटी परमाणु लैब है, जिसकी स्थापना द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मैनहटन प्रोजेक्ट के तहत हुई थी और तब से यह परमाणु हथियारों से जुड़े रिसर्च के लिए जानी जाती है। हालांकि एंथनी का सटीक पद क्या था, यह साफ नहीं है, लेकिन इस तरह की जगह से जुड़े होने की वजह से यह मामला और ज्यादा चर्चा में आया। 78 साल के चावेज एक दिन टहलने निकले और उसके बाद अचानक गायब हो गए। उन्होंने घर से निकलते समय अपनी कार ड्राइववे में लॉक करके छोड़ी थी और उनका वॉलेट, चाबियां और बाकी निजी सामान भी घर के अंदर ही मिला। यानी वह बिना जरूरी चीजों के ही बाहर गए थे। उनके गायब होने की सटीक तारीख पता नहीं है। उनके परिवार और दोस्तों का कहना है कि उनका इस तरह अचानक गायब होना उनके स्वभाव के बिल्कुल खिलाफ है। यानी वे बिना बताए कहीं चले जाने वाले व्यक्ति नहीं थे। मेलिसा कैसियास- लापता मेलिसा कैसियास भी एंथनी चावेज की तरह लॉस आलामोस नेशनल लैब से जुड़ी थीं। वह वहां एडमिनिस्ट्रेटिव असिस्टेंट थीं, लेकिन माना जाता है कि उनके पास अहम जानकारी तक पहुंच हो सकती थी। 54 साल की मेलिसा 2025 में न्यू मैक्सिको में अपने घर से अचानक गायब हो गईं। 26 जून को कैसियास अपने पति मार्क कैसियास के साथ लेबोरेटरी गई। वहां दोनों साथ काम करते थे। हालांकि वह खुद वापस घर लौट आईं, क्योंकि वह अपना वर्क बैज भूल गई थीं। उसने घर से काम करने का फैसला किया कैसियास वापस घर लौटीं और फिर

MP Congress Leaders Out of New Committee Get Space in Bharat Krishak Samaj

MP Congress Leaders Out of New Committee Get Space in Bharat Krishak Samaj

खंडवा में ग्रामीण जिलाध्यक्ष लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को बनाया गया। मध्यप्रदेश की राजनीति में संगठनात्मक हलचल के बीच अब नए समीकरण बनते नजर आ रहे हैं। पूर्व पीसीसी अध्यक्ष व केंद्रीय मंत्री रहे अरुण यादव ने भारत कृषक समाज के माध्यम से ऐसे नेताओं को मंच देना शुरू कर दिया है, जो हाल ही में कांग्रेस की टीम से बाहर हो गए . सोमवार को खरगोन जिले के बोरावा में आयोजित किसान गोष्ठी के दौरान 1956 में गठित हुए भारत कृषक समाज नाम के संगठन का विस्तार करते हुए कई अहम नियुक्तियां की गईं। खंडवा शहर इकाई के लिए अर्ष पाठक को शहर जिलाध्यक्ष बनाया गया, जबकि दक्षिण ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में विनोद यादव और उत्तर ब्लॉक अध्यक्ष के रूप में इकबाल कुरैशी को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके साथ ही ग्रामीण क्षेत्र में मूंदी के किसान नेता लक्ष्मीचंद्र गुर्जर को खंडवा जिले का ग्रामीण जिलाध्यक्ष नियुक्त किया गया। सभी को नियुक्ति पत्र स्वयं अरुण यादव ने सौंपे। कार्यक्रम में अरूण यादव के भाई कसरावद विधायक सचिन यादव (पूर्व कृषि मंत्री) सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नियुक्तियों के राजनीतिक मायने हाल ही में जीतू पटवारी की अगुवाई में कांग्रेस संगठन में हुए फेरबदल के बाद कई नेता सक्रिय भूमिका से बाहर हो गए थे। ऐसे में अरुण यादव द्वारा उन्हें भारत कृषक समाज में स्थान देना एक नई राजनीतिक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। यह कदम न केवल संगठन विस्तार बल्कि असंतुष्ट नेताओं को साधने की कोशिश भी माना जा रहा है। किसानों पर फोकस, क्षेत्रीय समीकरण भी अरुण यादव ने कहा कि किसानों की आवाज को मजबूत करने के लिए संगठन का विस्तार जरूरी है। उन्होंने नए पदाधिकारियों से अपेक्षा जताई कि वे जमीनी स्तर पर किसानों की समस्याओं को उठाएं और संगठन को सक्रिय बनाएं। इधर, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह नियुक्तियां सिर्फ संगठनात्मक बदलाव नहीं, बल्कि आने वाले समय में क्षेत्रीय राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत भी हो सकती है।

Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos Near Moon; First Human Visit Since 1972

Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos Near Moon; First Human Visit Since 1972

2 मिनट पहले कॉपी लिंक नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की ओर जाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं हैं। पृथ्वी नीले रंग में बेहद खूबसूरत दिख रही है। एक फोटो में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा दिखा जबकि दूसरी फोटो में पूरी धरती नजर आई, जिस पर सफेद बादल छाए थे। मिशन पर गए चार अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी, 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं। अभी उन्हें 2.4 लाख किलोमीटर और जाना है। वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंचेंगे। 1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था। 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के करीब जाएगा। हालांकि एस्ट्रोनॉट चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। मून मिशन के दौरान ली गईं 5 तस्वीरें… एक दिन पहले ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी थी आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। एक दिन पहले शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी। CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की। मिशन के अगले पड़ाव…अगले 5 दिन पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ———————————— दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos Near Moon; First Human Visit Since 1972

Artemis 2 Astronauts Capture Earth Photos Near Moon; First Human Visit Since 1972

1 घंटे पहले कॉपी लिंक नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्रियों चंद्रमा के नजदीक जा रहे हैं। उन्होंने रास्ते में पृथ्वी की तस्वीरें खींचीं। नासा के आर्टेमिस-2 मिशन के तहत चंद्रमा की ओर जाते हुए चार अंतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी की शानदार तस्वीरें खींचीं हैं। पृथ्वी नीले रंग में बेहद खूबसूरत दिख रही है। एक फोटो में पृथ्वी का घुमावदार हिस्सा दिखा जबकि दूसरी फोटो में पूरी धरती नजर आई, जिस पर सफेद बादल छाए थे। मिशन पर गए चार अंतरिक्ष यात्री (3 अमेरिकी, 1 कनाडाई) फिलहाल पृथ्वी से करीब 1.8 लाख किलोमीटर दूर पहुंच चुके हैं। अभी उन्हें 2.4 लाख किलोमीटर और जाना है। वे 6 अप्रैल तक चंद्रमा के पास पहुंचेंगे। 1 अप्रैल को सुबह 4:05 बजे ‘स्पेस लॉन्च सिस्टम’ (SLS) ओरियन स्पेसक्राफ्ट में सवार 4 अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर चांद की ओर रवाना हुआ था। 1972 के बाद पहली बार कोई इंसान चांद के करीब जाएगा। हालांकि एस्ट्रोनॉट चांद पर कदम नहीं रखेंगे। वे सिर्फ चांद की कक्षा का चक्कर लगाकर वापस आ जाएंगे। मून मिशन के दौरान ली गईं 5 तस्वीरें… 54 साल में कितनी बदली पृथ्वी, 2 तस्वीरें… एक दिन पहले ओरियन कैप्सूल ने पृथ्वी की कक्षा छोड़ी थी आर्टेमिस-2 मिशन अब चांद की ओर बढ़ रहा है। एक दिन पहले शुक्रवार सुबह 5:19 बजे ओरियन कैप्सूल ने थ्रस्टर्स फायर किए और पृथ्वी की कक्षा छोड़ दी। अब यह अगले 4 दिन अंतरिक्ष में सफर करेगा और वहां पहुंचेगा, जहां आज तक केवल 24 इंसान पहुंच सके हैं। पृथ्वी के ऑर्बिट को छोड़कर चांद की तरफ जाने के लिए इंजन फायर करने की इस प्रोसेस को ‘ट्रांसलूनर इंजेक्शन बर्न’ कहते हैं। यह करीब 6 मिनट का मैन्यूवर था, जिसने यान की रफ्तार बढ़ाकर 22,000 मील प्रति घंटा यानी करीब 34 हजार किमी/घंटा कर दी। CSA एस्ट्रोनॉट जेरेमी हैनसेन और नासा के अंतरिक्ष यात्री रीड वाइसमैन, क्रिस्टीना कोच और विक्टर ग्लोवर नेओरियन स्पेसक्राफ्ट से बातचीत की। मिशन के अगले पड़ाव…अगले 5 दिन पांचवां दिन: चंद्रमा की ग्रेविटी में दाखिल होगा आर्टेमिस-2 5 अप्रैल मिशन के पांचवें दिन तक धरती के गुरुत्वाकर्षण के खिंचाव की वजह से कैप्सूल की रफ्तार धीमी हो जाएगी। जैसे ही यह चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में दाखिल होगा, इसकी गति फिर से बढ़ने लगेगी और यह चांद की ओर तेजी से बढ़ने लगेगा। छठा दिन: बास्केटबॉल जैसा बड़ा नजर आएगा चंद्रमा छठे दिन ओरियन चांद की सतह से महज 6,400 किमी ऊपर से गुजरेगा। इस दौरान अंतरिक्ष यात्री चांद के उस हिस्से को अपनी आंखों से देख पाएंगे, जो पृथ्वी से कभी नजर नहीं आता। खिड़की से देखने पर चांद इतना बड़ा दिखेगा, जैसे हाथ के पास कोई बास्केटबॉल रखी हो। 50 मिनट के लिए टूट सकता है संपर्क: जब ओरियन चांद के पीछे से गुजरेगा तो पृथ्वी से उसका संपर्क पूरी तरह कट सकता है। करीब 50 मिनट तक ‘कम्युनिकेशन ब्लैकआउट’ रहेगा। मिशन कंट्रोल को यान से सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार धरती से इतनी दूर पहुंचेंगे: इसी दिन अपोलो 13 का 1970 में बनाया गया धरती से सबसे ज्यादा दूरी का 400,171.18 km का रिकॉर्ड भी टूट सकता है। आर्टेमिस II के अंतरिक्ष यात्रियों के पृथ्वी से 402,336 किमी की दूरी तक पहुंचने की उम्मीद है। सातवां दिन: चांद की ग्रेविटी से पृथ्वी पर लौटेगा यान सातवें दिन चांद के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकलकर यान वापस धरती की ओर अपना सफर शुरू कर देगा। आर्टेमिस-2 का रास्ता काफी हद तक 1970 के अपोलो-13 मिशन जैसा है। यह चांद के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘गुलेल’ की तरह करेगा, जो यान को वापस पृथ्वी की ओर धकेल देगा। पूरे मिशन में चारों अंतरिक्ष यात्री करीब 11.02 लाख किमी का सफर तय करेंगे। दसवां दिन: 10 अप्रैल को प्रशांत महासागर में गिरेगा यान भारतीय समय के अनुसार 11 अप्रैल को सुबह 6:30 बजे ओरियन पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा। 6:36 बजे यह सैन डिएगो के पास प्रशांत महासागर में ‘स्प्लैशडाउन’ करेगा। इसके बाद ह्यूस्टन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस होगी, जिसमें मिशन की जानकारी दी जाएगी। ———————————— ये खबर भी पढ़ें… चंद्रमा की कक्षा में पहुँचने वाली पहली महिला बनेंगी क्रिस्टीना: पहली बार फेल हो गईं थीं नासा के मून मिशन आर्टेमिस-2 की चार सदस्यीय टीम में शामिल 47 वर्षीय अंतरिक्ष यात्री क्रिस्टीना कोच चंद्रमा की कक्षा तक पहुंचने वाली दुनिया की पहली महिला बनने जा रही हैं। 2019-20 में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 328 दिन बिताकर उन्होंने किसी महिला की सबसे लंबी एकल अंतरिक्ष यात्रा (उड़ान से लैंडिंग तक) का रिकॉर्ड बनाया था। इस मुकाम तक पहुंचने का सफर आसान नहीं रहा। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

Bird Hospital Visit; Space Water Cloud; Odor Socks Welcome Summer

Bird Hospital Visit; Space Water Cloud; Odor Socks Welcome Summer

अमेरिका में बदबूदार मोजों को जलाकर गर्मियों का स्वागत किया जा रहा है। वहीं, वहीं गले का ऑपरेशन कराने के लिए एक चिड़िया खुद ही अस्पताल पहुंच गई। उधर, अंतरिक्ष में धरती से 12 लाइट-ईयर्स दूर पानी से भरा एक बादल मिला। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें…

भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6 चीजों पर होगी रिसर्च aiims delhi and isro mou on space medicine news

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होमताजा खबरदेश भारत बनेगा स्पेस मेडिसिन का विश्वगुरु, एम्स और ISRO ने मिलाया हाथ, इन 6….. Last Updated:March 10, 2026, 11:36 IST AIIMS नई दिल्ली और इंड‍ियन स्‍पेस र‍िसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफ सेंटर ने स्पेस मेडिसिन पर ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. अब एम्‍स के डॉक्‍टर और इसरो के वैज्ञान‍िक म‍िलकर मानव शरीर, हृदय, नर्वस सिस्टम, माइक्रोग्रैविटी, माइक्रोबायोम, जीन और मानसिक स्वास्थ्य पर रिसर्च करेंगे . एम्‍स और इसरो म‍िलकर स्‍पेस मेड‍िस‍िन पर र‍िसर्च करेंगे. भारत अब स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में बहुत कुछ बड़ा करने जा रहा है. इसके लिए देश के दो लीडिंग संस्थानों ने आपस में हाथ मिलाया है. मेडिकल के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली और अंतरिक्ष मामलों के टॉप संगठन इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन के एचएसएफसी ने पहली बार ऐतिहासिक एमओयू साइन किया है. इसके तहत अब स्पेस और मेडिकल संबंधी 6 प्रमुख विषयों पर गहन रिसर्च किया जाएगा. एम्स और इसरो का ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर अब भारत में स्पेस मेडिसिन रिसर्च को आगे बढ़ाने जा रहे हैं. इस दौरान इसरो के वैज्ञानिक और एम्स के डॉक्टर मिलकर यह अध्ययन करेंगे कि अंतरिक्ष यात्रा का मानव शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है. इससे न केवल आने वाले समय में अंतरिक्ष में मानव स्वास्थ्य को लेकर बड़ी सफलताएं मिल सकेंगी बल्कि ह्यूमन स्पेश मिशन को भी बड़ा लाभ मिलेगा. इन 6 चीजों पर होगा रिसर्च का फोकस . मानव शरीर की कार्यप्रणाली (Human Physiology) . हृदय और नर्वस सिस्टम का नियंत्रण . माइक्रोग्रैविटी में हड्डियों और मांसपेशियों का स्वास्थ्य . माइक्रोबायोम और इम्यून सिस्टम . जीन और बायोमार्कर . मानसिक और व्यवहारिक स्वास्थ्य समझौता साइन करते हुए एम्स नई दिल्ली के डायरेक्टर डॉ. एम श्रीनिवास ने कहा कि यह सहयोग दोनों संस्थानों के लिए एक नया और रोमांचक अध्याय है. ‘यह समझौता हमें स्पेस मेडिसिन के क्षेत्र में साथ मिलकर आगे बढ़ने की गति देगा. AIIMS और ISRO के बीच सहयोग से मरीजों, देश और पूरी मानवता को लाभ मिलेगा. जैसे-जैसे भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, हमें उम्मीद है कि हम स्पेस मेडिसिन में भी विश्वगुरु बनेंगे.’ वहीं इस मौके पर इसरो के चेयरमैन वी नारायणन ने याद करते हुए कहा कि शुरुआत में रॉकेट और उपकरण साइकिल और बैलगाड़ियों से ले जाए जाते थे, लेकिन आज भारत अंतरिक्ष तकनीक में दुनिया की एक प्रमुख शक्ति बन चुका है. AIIMS जैसे प्रमुख मेडिकल और रिसर्च संस्थानों के साथ साझेदारी भविष्य में भारत की मानव अंतरिक्ष उड़ान क्षमता को और मजबूत करेगी. वहीं ह्यूमन स्पेस फ्लाइट सेंटर के निदेशक दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि यह साझेदारी भारत की चिकित्सा और अंतरिक्ष तकनीक की ताकत को एक साथ जोड़ने में मदद करेगी. इससे मानव अंतरिक्ष उड़ान से जुड़ी बायोमेडिकल रिसर्च में नई प्रगति का रास्ता खुलेगा. इस दौरान रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन, एम्स स्टूडेंट एसोसिएशन और सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट शामिल हुए. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 11:36 IST

Khabar Hatke China Space Tomato & Kid Returns Home After 15 Years; AI Detects Disease From Cough

Khabar Hatke China Space Tomato & Kid Returns Home After 15 Years; AI Detects Disease From Cough

चीन ने हाल ही में अंतरिक्ष में लाल टमाटर उगा दिए। वहीं 6 साल की उम्र में गायब हुआ बच्चा 15 साल बाद घर लौट रहा है। उधर कर्नाटक के एक स्टार्टअप ने ऐसा एप बनाया है, जो खांसी की आवाज से बीमारी का पता लगा लेगा। . आज खबर हटके में जानेंगे ऐसी ही 5 रोचक खबरें… तो ये थी आज की रोचक खबरें, कल फिर मिलेंगे कुछ और दिलचस्प और हटकर खबरों के साथ… ************* रिसर्च सहयोग: आकाश मिश्रा खबर हटके को और बेहतर बनाने के लिए हमें आपका फीडबैक चाहिए। इसके लिए यहां क्लिक करें…

NASA Admits Sunita Williams Space Incident Dangerous

NASA Admits Sunita Williams Space Incident Dangerous

वाशिंगटन9 मिनट पहले कॉपी लिंक यह तस्वीर जनवरी 2026 की है जब सुनीता विलियम्स नई दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में युवाओं के साथ हुए इंटरैक्टिव सेशन में पहुंचीं थीं। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा ने माना कि सुनीता विलियम्स का अंतरिक्ष में फंसना खतरनाक था। नासा ने इस मिशन को टाइप ए दुर्घटना की कैटेगरी में रखा है। टाइप ए दुर्घटना सबसे गंभीर श्रेणी है। यह वही श्रेणी है, जिसका उपयोग चैलेंजर और कोलंबिया शटल दुर्घटनाओं के लिए किया गया था। मालूम हो, कोलंबिया शटल दुर्घटना में भारत की अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला का निधन हो गया था। 19 फरवरी 2026 को जारी 311 पेज की रिपोर्ट में नासा के प्रशासक जेरेड इसाकमान ने लिखा कि सुनीता विलियम्स के मिशन में गंभीर खामियां थी। उन्होंने कमियों को नजरअंदाज करने के लिए एजेंसी और बोइंग की कड़ी आलोचना की। सुनीता विलियम्स साल 2024 में 8 दिन के मिशन पर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पहुंची थीं, लेकिन तकनीकी कारणों से उनकी वापसी में 9 महीने से ज्यादा समय लग गया था। सुनीता विलियम्स, बुच विल्मोर के साथ 6 जून 2024 को स्पेस स्टेशन पहुंची थीं। 8 दिन का उनका सफर 9 महीनों में बदल गया। जनवरी में सुनीता विलियम्स ने 27 साल बाद रिटायरमेंट लिया NASA की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स ने 27 साल के बाद रिटायरमेंट लिया है। उनकी रिटायरमेंट 27 दिसंबर 2025 से लागू हुई है। हालांकि NASA ने इसकी घोषणा 20 जनवरी को की थी। सुनीता 27 साल पहले 1998 में नासा से जुड़ी थीं। उन्होंने NASA के 3 मिशन में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने अंतरिक्ष में 608 दिन बिताए। पहली बार वह 9 दिसंबर 2006 में अंतरिक्ष में गई थी। सुनीता ने अंतरिक्ष में 9 स्पेसवॉक की। इस दौरान उन्होंने 62 घंटे 6 मिनट तक अंतरिक्ष में चहलकदमी की। यह किसी भी महिला अंतरिक्ष यात्री में सबसे ज्यादा है। सुनीता बोलीं- स्पेस से धरती देखने पर महसूस होता है कि हम सब एक हैं सुनीता पिछले महीने भारत दौरे पर आईं थीं। उन्होंने दिल्ली के अमेरिकन सेंटर में ‘आंखें सितारों पर, पैर जमीं पर’ सेमिनार में हिस्सा भी लिया था। उन्होंने यह भी कहा कि यह काम सबके फायदे, सहयोग और पारदर्शिता के साथ, लोकतांत्रिक तरीके से किया जाना चाहिए, ताकि किसी एक देश का दबदबा न हो और पूरी मानवता को इसका लाभ मिले। भारत आना घर वापसी जैसा: भारत आना उन्हें घर वापसी जैसा लगता है, क्योंकि उनके पिता गुजरात के मेहसाणा जिले के झूलासन गांव से थे। वहीं, चांद पर जाने के NDTV के सवाल पर मजाकिया लहजे में कहा, ‘मैं चंद्रमा पर जाना चाहती हूं, लेकिन मेरे पति मुझे इजाजत नहीं देंगे। घर वापसी और जिम्मेदारी सौंपने का समय आ गया है। अंतरिक्ष खोज में अगली पीढ़ी को अपना स्थान बनाना होगा। अंतरिक्ष में बिताए दिन पर: क्या स्पेस ट्रैवल ने उनकी जिंदगी के नजरिए को बदला है, तो उन्होंने कहा- हां, बिल्कुल। जब आप धरती को स्पेस से देखते हैं, तो महसूस होता है कि हम सब एक हैं और हमें ज्यादा करीब से मिलकर काम करना चाहिए। अंतरिक्ष में फैले कचरे पर: पिछले एक दशक में यह एक बड़ी चुनौती बन गई है और इसे मैनेज करने के लिए नई टेक्नोलॉजी की जरूरत है। अंतरिक्ष मिशन को याद किया: इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) में बिताए समय और उस वक्त के चुनौतीपूर्ण दौर पर कहा, जब 8 दिन का मिशन तकनीकी दिक्कतों के कारण नौ महीने से ज्यादा का हो गया। इस दौरान ISS पर मल्टी-कल्चरल क्रू के साथ त्योहार मनाने के विजुअल्स भी दिखाए गए। —————– ये खबर भी पढ़ें… भास्कर से बोलीं सुनीता विलियम्स- भारतीय स्पेस प्रोग्राम से जुड़ना चाहूंगी, अंतरिक्ष से हिमालय देखना शानदार भारतीय मूल की अमेरिकी एस्ट्रोनॉट सुनीता विलियम्स ने स्पेस से लौटने के बाद पहली बार प्रेस कॉन्फ्रेंस की। दैनिक भास्कर इकलौता भारतीय न्यूज संस्थान रहा, जिसे सुनीता विलियम्स से सवाल पूछने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि भारत स्पेस प्रोग्राम में अपनी जगह बना रहा है। वह इसका हिस्सा बनना चाहेंगी। पूरी खबर पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…