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Kharg Island Plan, Tracking Location

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वॉशिंगटन डीसी31 मिनट पहले

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। CNN के मुताबिक सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि 3 अमेरिकी वॉरशिप के साथ मरीन सैनिक मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं।

इनमें USS त्रिपोली, USS सैन डिएगो, USS न्यू ऑरलियंस शामिल हैं। इन पर करीब 2200 सैनिक तैनात हैं। ये सभी सैनिक 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) का हिस्सा हैं, जिसे तुरंत एक्शन के लिए तैयार रखा जाता है।

इनमें से USS त्रिपोली एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, यानी ऐसा युद्धपोत जो मरीन सैनिकों, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों (जैसे F-35B) को लेकर चलता है। ये तीनों वॉरशिप जापान के पास थे। अभी यह भारत के पास दक्षिणी हिंद महासागर में है।

अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प सरकार ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसे घेरने (ब्लॉकेड) की योजना पर विचार कर रही है।

USS ट्रिपोली (LHA-7) वॉरशिप 17 मार्च को सिंगापुर स्ट्रेट्स में एंट्री करते हुए देखा गया था।

USS ट्रिपोली (LHA-7) वॉरशिप 17 मार्च को सिंगापुर स्ट्रेट्स में एंट्री करते हुए देखा गया था।

अगले सप्ताह नए स्टेज में पहुंच सकता है ईरान जंग

अमेरिका की तैयारियों से लग रहा है कि ईरान जंग अगले हफ्ते नए स्टेज में पहुंच सकता है। इससे पहले कई बार ट्रम्प यह कह चुके हैं कि वे मिडिल ईस्ट में सैनिक नहीं भेज रहे हैं। ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं। अगर भेजता भी, तो आपको नहीं बताता।”

ट्रम्प अपने अचानक फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके बयान से पता नहीं चल रहा कि वे क्या करने वाले हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ट्रम्प ईरान में कार्रवाई तेज करने के लिए हजारों सैनिक भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं

पहली वजह- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना

दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

पिछले कुछ दिनों में ट्रम्प ने अपने सहयोगी देशों से भी होर्मुज में युद्धपोत भेजने को कहा, लेकिन किसी भी देश ने उनका समर्थन नहीं किया। ऐसे में USS ट्रिपोली और बाकी वॉरशिप पर मौजूद अमेरिकी मरीन उनके लिए सबसे अहम विकल्प बन सकते हैं।

अगर अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करना चाहता है, तो उसे ईरान के तटीय इलाकों में सैनिक उतारने पड़ सकते हैं। ईरान की नौसेना को काफी नुकसान हो चुका है, इसलिए यह विकल्प अमेरिका के लिए संभव और कम जोखिम वाला माना जा रहा है।

कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि USS ट्रिपोली पर मौजूद मरीन सैनिकों का इस्तेमाल ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है। इन द्वीपों को आगे रणनीतिक ठिकाने या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को रोका जा सके।

ईरान के लिए बहुत अहम है खार्ग आइलैंड

खार्ग द्वीप ईरान के तट से करीब 15 मील दूर है और यहीं से उसके करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसलिए अगर अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेता है या वहां नाकाबंदी करता है, तो वह ईरान पर होर्मुज को खोलने का दबाव बना सकता है।

हालांकि इस योजना में बड़ा जोखिम भी है। अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करता है, तो उसके सैनिक सीधे हमलों के दायरे में आ जाएंगे और यह जरूरी नहीं कि ईरान इससे झुक जाए।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को सीधे ईरान की जमीन या खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय वह अपने युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात कर सकता है, ताकि तेल ले जाने वाले जहाजों को रास्ते में सुरक्षा दी जा सके।

दूसरी वजह- ईरान के यूरेनियम पर कब्जा

दूसरा बड़ा कारण है ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम। ईरान के पास करीब 950 पाउंड यूरेनियम ऐसा है जिसे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे में दबा है, जिन पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। इसे सुरक्षित करने के लिए जमीन पर सैनिक भेजने की जरूरत पड़ेगी।

28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद ट्रम्प के बयान बदलते रहे हैं, लेकिन एक बात साफ है। वे चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके।

USS ट्रिपोली की अहमियत यहीं सामने आती है। इस जहाज पर 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2200 सैनिक सवार हैं, जो जापान के ओकिनावा में तैनात रहते हैं। ये सैनिक जमीन और हवा दोनों तरह की लड़ाई, छापेमारी और समुद्र से जमीन पर उतरने वाले ऑपरेशन में माहिर होते हैं।

USS ट्रिपोली एक ऐसा वॉरशिप है जो समुद्र से ही हवाई और जमीनी ऑपरेशन चला सकता है। इसमें F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, MV-22 ऑस्प्रे हेलीकॉप्टर और सैनिकों को किनारे तक पहुंचाने वाले विशेष जहाज मौजूद हैं।

अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंचेगा USS ट्रिपोली

उम्मीद है कि USS ट्रिपोली अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंच जाएगा। अगर ट्रम्प जमीन पर सैनिक भेजने का फैसला लेते हैं, तो यह पिछले दो दशकों में पहली बार होगा जब अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में उतारे जाएंगे

इस वॉरशिप का नाम 1805 में त्रिपोली के खिलाफ अमेरिका की जीत की याद में रखा गया था। यह पहली बार था जब अमेरिका ने विदेशी जमीन पर जीत हासिल कर अपना झंडा फहराया था।

——————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा

अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।

दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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मिडिल ईस्ट में अमेरिका अपनी सैन्य मौजूदगी तेजी से बढ़ा रहा है। CNN के मुताबिक सैटेलाइट इमेज से पता चला है कि 3 अमेरिकी वॉरशिप के साथ मरीन सैनिक मिडिल ईस्ट भेजे जा रहे हैं।

इनमें USS त्रिपोली, USS सैन डिएगो, USS न्यू ऑरलियंस शामिल हैं। इन पर करीब 2200 सैनिक तैनात हैं। ये सभी सैनिक 31st मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट (MEU) का हिस्सा हैं, जिसे तुरंत एक्शन के लिए तैयार रखा जाता है।

इनमें से USS त्रिपोली एक एम्फीबियस असॉल्ट शिप है, यानी ऐसा युद्धपोत जो मरीन सैनिकों, हेलीकॉप्टर और लड़ाकू विमानों (जैसे F-35B) को लेकर चलता है। ये तीनों वॉरशिप जापान के पास थे। अभी यह भारत के पास दक्षिणी हिंद महासागर में है।

अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प सरकार ईरान के खार्ग द्वीप पर कब्जा करने या उसे घेरने (ब्लॉकेड) की योजना पर विचार कर रही है।

USS ट्रिपोली (LHA-7) वॉरशिप 17 मार्च को सिंगापुर स्ट्रेट्स में एंट्री करते हुए देखा गया था।

USS ट्रिपोली (LHA-7) वॉरशिप 17 मार्च को सिंगापुर स्ट्रेट्स में एंट्री करते हुए देखा गया था।

अगले सप्ताह नए स्टेज में पहुंच सकता है ईरान जंग

अमेरिका की तैयारियों से लग रहा है कि ईरान जंग अगले हफ्ते नए स्टेज में पहुंच सकता है। इससे पहले कई बार ट्रम्प यह कह चुके हैं कि वे मिडिल ईस्ट में सैनिक नहीं भेज रहे हैं। ट्रम्प ने गुरुवार को कहा था, “मैं कहीं भी सैनिक नहीं भेज रहा हूं। अगर भेजता भी, तो आपको नहीं बताता।”

ट्रम्प अपने अचानक फैसलों के लिए जाने जाते हैं, इसलिए उनके बयान से पता नहीं चल रहा कि वे क्या करने वाले हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिकी सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि ट्रम्प ईरान में कार्रवाई तेज करने के लिए हजारों सैनिक भेजने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं।

इसके पीछे दो बड़ी वजहें हैं

पहली वजह- होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना

दुनिया के करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने यहां जहाजों की आवाजाही लगभग रोक दी है, जिससे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं।

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अगर अमेरिका इस अहम समुद्री रास्ते को सुरक्षित करना चाहता है, तो उसे ईरान के तटीय इलाकों में सैनिक उतारने पड़ सकते हैं। ईरान की नौसेना को काफी नुकसान हो चुका है, इसलिए यह विकल्प अमेरिका के लिए संभव और कम जोखिम वाला माना जा रहा है।

कुछ अमेरिकी अधिकारियों का यह भी कहना है कि USS ट्रिपोली पर मौजूद मरीन सैनिकों का इस्तेमाल ईरान के दक्षिणी तट के पास स्थित द्वीपों पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है। इन द्वीपों को आगे रणनीतिक ठिकाने या दबाव बनाने के साधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, ताकि ईरान द्वारा व्यापारिक जहाजों पर संभावित हमलों को रोका जा सके।

ईरान के लिए बहुत अहम है खार्ग आइलैंड

खार्ग द्वीप ईरान के तट से करीब 15 मील दूर है और यहीं से उसके करीब 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात होता है। इसलिए अगर अमेरिका इस द्वीप को अपने नियंत्रण में लेता है या वहां नाकाबंदी करता है, तो वह ईरान पर होर्मुज को खोलने का दबाव बना सकता है।

हालांकि इस योजना में बड़ा जोखिम भी है। अगर अमेरिका खार्ग द्वीप पर कब्जा करता है, तो उसके सैनिक सीधे हमलों के दायरे में आ जाएंगे और यह जरूरी नहीं कि ईरान इससे झुक जाए।

कुछ एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिका को सीधे ईरान की जमीन या खार्ग द्वीप पर कब्जा करने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय वह अपने युद्धपोतों और लड़ाकू विमानों को होर्मुज जलडमरूमध्य में तैनात कर सकता है, ताकि तेल ले जाने वाले जहाजों को रास्ते में सुरक्षा दी जा सके।

दूसरी वजह- ईरान के यूरेनियम पर कब्जा

दूसरा बड़ा कारण है ईरान का अत्यधिक समृद्ध यूरेनियम। ईरान के पास करीब 950 पाउंड यूरेनियम ऐसा है जिसे परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है। माना जा रहा है कि यह यूरेनियम उन ठिकानों के मलबे में दबा है, जिन पर अमेरिका और इजराइल ने हमला किया था। इसे सुरक्षित करने के लिए जमीन पर सैनिक भेजने की जरूरत पड़ेगी।

28 फरवरी से युद्ध शुरू होने के बाद ट्रम्प के बयान बदलते रहे हैं, लेकिन एक बात साफ है। वे चाहते हैं कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार न बना सके।

USS ट्रिपोली की अहमियत यहीं सामने आती है। इस जहाज पर 31वीं मरीन एक्सपीडिशनरी यूनिट के 2200 सैनिक सवार हैं, जो जापान के ओकिनावा में तैनात रहते हैं। ये सैनिक जमीन और हवा दोनों तरह की लड़ाई, छापेमारी और समुद्र से जमीन पर उतरने वाले ऑपरेशन में माहिर होते हैं।

USS ट्रिपोली एक ऐसा वॉरशिप है जो समुद्र से ही हवाई और जमीनी ऑपरेशन चला सकता है। इसमें F-35 स्टेल्थ फाइटर जेट, MV-22 ऑस्प्रे हेलीकॉप्टर और सैनिकों को किनारे तक पहुंचाने वाले विशेष जहाज मौजूद हैं।

अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंचेगा USS ट्रिपोली

उम्मीद है कि USS ट्रिपोली अगले हफ्ते वॉर जोन में पहुंच जाएगा। अगर ट्रम्प जमीन पर सैनिक भेजने का फैसला लेते हैं, तो यह पिछले दो दशकों में पहली बार होगा जब अमेरिकी सैनिक सीधे युद्ध में उतारे जाएंगे

इस वॉरशिप का नाम 1805 में त्रिपोली के खिलाफ अमेरिका की जीत की याद में रखा गया था। यह पहली बार था जब अमेरिका ने विदेशी जमीन पर जीत हासिल कर अपना झंडा फहराया था।

——————————— ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा

अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।

दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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