केरल का मुख्यमंत्री कौन होगा? ढेर सारी समस्याओं में फंसी कांग्रेस ने पत्ते अपने पास रखे | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 14:54 IST केरल में कांग्रेस की बहुध्रुवीय प्रकृति को देखते हुए, बड़ा सवाल यह है कि क्या गांधी परिवार झुंड को एक साथ रख सकता है सभी चुनावी राज्यों में से, केवल केरल में ही शीर्ष नेतृत्व को जीत की उम्मीद है और वह पहले से ही नाम उछालकर संभावनाओं को बर्बाद नहीं करना चाहेगा। कांग्रेस की जीत हुई तो केरल का मुख्यमंत्री कौन होगा? कई दावेदारों को देखते हुए, यह एक ऐसा सवाल है जिस पर सबसे पुरानी पार्टी ध्यान नहीं देना चाहती। यदि चुनावों के लिए यूडीएफ के अभियान की हालिया रिलीज से संकेत मिलता है, तो ऐसा लगता है कि राहुल गांधी अपने निकटतम सहयोगी केसी वेणुगोपाल के लिए जोर दे रहे हैं। अभियान में केसी को, जैसा कि उन्हें प्यार से बुलाया जाता है, राहुल गांधी के पक्ष में दिखाया गया। जिन लोगों ने केरल कांग्रेस में फिल्म देखी, उनके लिए यह स्पष्ट था कि वेणुगोपाल का एक विशेष स्थान था और उन्हें चुना जा सकता था। अनुभवी नेता राज्य में काफी समय बिता रहे हैं, बागियों और असंतुष्ट पार्टी सदस्यों से मिल रहे हैं और उनके घरों पर जाकर उन्हें पार्टी में लौटने के लिए मना रहे हैं। खंडित केरल कांग्रेस में, हर नेता मायने रखता है। लेकिन राज्य, कई कांग्रेसी राज्यों की तरह, कई समस्याओं का सामना कर रहा है। फिलहाल, संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर कम से कम छह नाम सामने आ सकते हैं। यह भी पढ़ें | केरल और तमिलनाडु में ईसाई वोट शिफ्ट: एक शांत पुनर्संरेखण चल रहा है? पूर्व नेता प्रतिपक्ष रमेश चेन्निथला भी दौड़ में सबसे आगे हैं। वर्तमान नेता प्रतिपक्ष वीडी सतीसन भी ऐसे ही हैं। सतीसन को वेणुगोपाल का काफी करीबी माना जाता है और अगर कांग्रेस मुख्यमंत्री के रूप में सांसद के बजाय किसी विधायक को चुनने का फैसला करती है, तो सतीसन वह व्यक्ति हो सकते हैं। फिर भी, यह माना जाता है कि वह केरल में केसी का आदमी होगा। एक समय संभावित मुख्यमंत्री के रूप में शशि थरूर का नाम भी उछाला गया था। लेकिन आलाकमान के साथ भरोसे का मामला है और वह इस दौड़ से लगभग बाहर हैं. केपीसीसी अध्यक्ष के सुधाकरन और के मुरलीधरन के नाम भी चर्चा में हैं। यह भी पढ़ें | कांग्रेस को पुनर्जीवित करने के लिए राहुल गांधी जेन-जेड पर बड़ा दांव लगा रहे हैं। क्या जुआ चलेगा? कांग्रेस स्पष्ट कारणों से मुख्यमंत्री पद के लिए किसी उम्मीदवार का नाम नहीं बताना चाहती। चुनाव से पहले चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बनाकर उसने एक बार पंजाब में अपनी उंगलियां जला ली हैं। परिणाम सबके सामने थे। सभी चुनावी राज्यों में से, केवल केरल में ही शीर्ष नेतृत्व को जीत की उम्मीद है और वह पहले से ही नाम उछालकर संभावनाओं को बर्बाद नहीं करना चाहेगा। दूसरा मुद्दा यह है कि पिनाराई विजयन राज्य में एक मृत कारक नहीं हैं। यहां तक कि उनके सबसे कठोर आलोचक भी मानते हैं कि उनमें बहुत ताकत बाकी है और उन्हें हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस बिंदु पर, कांग्रेस एक ऐसे मुख्यमंत्री चेहरे को पेश करने का जोखिम नहीं उठा सकती जो विजयन के साथ आमने-सामने हो। बड़ा मुद्दा यह है कि भले ही यूडीएफ जीत जाए और मुख्यमंत्री चुन ले, फिर भी सिरदर्द खत्म नहीं होगा। केरल में कांग्रेस की बहुध्रुवीय प्रकृति को देखते हुए, बड़ा सवाल यह है कि क्या गांधी परिवार झुंड को एक साथ रख सकता है। यदि हां, तो कब तक? या केरल एक और कर्नाटक की कहानी होगी? चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : तिरुवनंतपुरम (त्रिवेंद्रम), भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 13:03 IST समाचार चुनाव केरल का मुख्यमंत्री कौन होगा? बहुतायत की समस्या में फंसी कांग्रेस ने पत्ते अपने पास रखे अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)केरल के मुख्यमंत्री कांग्रेस(टी)केरल चुनाव(टी)कांग्रेस नेतृत्व केरल(टी)केसी वेणुगोपाल सीएम(टी)राहुल गांधी सहयोगी(टी)यूडीएफ अभियान केरल(टी)वीडी सतीसन सबसे आगे(टी)रमेश चेन्निथला संभावित
हिमाचल में अफसरों की लड़ाई सामने आई:चीफ सेक्रेटरी ने 3 पूर्व CS को लपेटा, विधानसभा में चेस्टर-हिल विवाद गूंजा, अधिकारी को हटाने की मांग

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को मुख्य सचिव पर लगे कथित भ्रष्टाचार के आरोपों का मामला गूंजा। बीजेपी विधायक सत्तपाल सत्ती ने पॉइंट ऑफ ऑर्डर के तहत मामला उठाते हुए कहा कि जिस प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूर्व मुख्य सचिव को पद से हटाया था, क्या मुख्यमंत्री सुक्खू भी अधिकारी को पद से हटाने के हिम्मत दिखाएंगे? बता दें कि, हिमाचल के मुख्य सचिव संजय गुप्ता पर एडवोकेट विनय शर्मा और माकपा नेताओं ने चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की जमीन खरीद में गड़बड़ियों की जांच को दबाने और परवाणू व न्यू चंडीगढ़ में सस्ते रेट पर जमीन खरीदने के आरोप लगाए है। यही मामला आज विधानसभा में उठने के बाद मुख्य सचिव संजय गुप्ता खुलकर मीडिया के सामने आए और सफ़ाई दी। संजय गुप्ता ने हिमाचल के दो पूर्व मुख्य सचिव प्रबोध सक्सेना और RD धीमान को डाउटफुल इंटीग्रिटी का बताते हुए उन्हें बदनाम करने की साजिश का आरोप लगाया। उन्होंने कहा- प्रबोध सक्सेना और RD धीमान ही उनके खिलाफ षड्यंत्र रच रहे हैं। गुप्ता ने कहा- इन दोनों के कहने पर ही उनके खिलाफ चेस्टर हिल मामले को लेकर छोटा शिमला में शिकायत दी गई। पुलिस में दी गई शिकायत बेबुनियाद: गुप्ता संजय गुप्ता ने कहा कि मामले में उनके खिलाफ छोटा शिमला पुलिस थाना में दर्ज की गई शिकायत पूरी तरह से बेबुनियाद और भ्रामक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन पर 3 एकड़ जमीन लेने का जो आरोप लगाया जा रहा है, वह तथ्यात्मक रूप से गलत है। उन्होंने कहा कि यह जमीन जुलाई 2025 में सरकार की परमिशन के बाद ली गई। इसमें किसी प्रकार की अनियमितता नहीं बरती गई है। कलेक्टर रेट से ज्यादा में जमीन खरीदी: संजय कम रेट पर जमीन खरीदने के आरोपों पर संजय गुप्ता ने कहा कि जमीन का कलेक्टर रेट 1 करोड़ 10 लाख रुपए था और उन्होंने जमीन एक करोड़ 35 लाख में खरीदी। खरीदारी के स्रोत को लेकर संजय गुप्ता ने कहा कि उन्होंने 75 लाख रुपए जून महीने में जीपीएफ से लिए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व कांग्रेस सरकार में अतिरिक्त महाधिवक्ता रहे विनय शर्मा द्वारा की गई शिकायत प्रेरित और वाहवाही लेने के उद्देश्य से की गई है है। मुख्य सचिव के खिलाफ रची जा रही साजिश मुख्य सचिव ने कहा कि बिजली बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने 5 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा कमाकर दिया था। उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले पारदर्शिता के साथ लिए गए थे। इसलिए, उनकी कार्यशैली को बदनाम करने के लिए यह साजिश रची जा रही है। उन्होंने बताया कि एक ग्रोवर और पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान के खिलाफ 2 FIR पहले ही विजिलेंस में है। साथ ही ईडी ने भी इस मामले को टेकअप किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 130 करोड़ की लागत वाली कुनिहार-नालागढ़ लाइन में नियमों की अवहेलना हुई थी जिनकी जांच चल रही है। पूर्व रेरा चीफ बाल्दी पर भी सवाल उठाए संजय गुप्ता ने चेस्टर हिल मामले में पूर्व रेरा चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अगर चेस्टर हिल में कुछ गड़बड़ी थी तो फिर भी इसकी रेरा से अप्रूवल पूर्व IAS अधिकारी श्रीकांत बाल्दी के समय में दी गई थी।
Cicada New Covid 19 Variant: सिकाडा के भारत में कितने मरीज, क्या ओमिक्रोन से ज्यादा खतरनाक है नया वेरिएंट? जान लें हर बात

Cicada New Covid 19 Variant Explainer: कोरोना के नए वेरिएंट ने एक बार फिर लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. हर बार की तरह इस बार भी कोरोना नया रूप लेकर आया है और ये है बीए.3.2 वेरिएंट, जिसे सिकाडा नाम दिया गया है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार यह सिकाडा वेरिएंट अमेरिका के कई राज्यों सहित दुनिया के 22 देशों में फैल चुका है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है. लिहाजा यह सवाल लाजिमी है कि क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है? और यह वेरिएंट कोविड के पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है? क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस खबर में आप डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 वैक्सीन कंपोजिशन (TAG-CO-VAC) से मिली आधिकारिक जानकारी के अलावा भारत में कोविड महामारी से लेकर अभी तक कोरोना की मॉनिटरिंग कर रहे टॉप हेल्थ एक्सपर्ट्स से मिलने वाले हैं. बता दें कि ओमिक्रोन परिवार से आने वाला यह नया वेरिएंट दुनिया के लिए बिल्कुल नया नहीं है बल्कि यह 2024 के अंत में सबसे पहले साउथ अफ्रीका में मिला था. तभी से दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं. हालांकि इस वेरिएंट के अब दक्षिण अफ्रीका से निकलकर बाकी यूरोपियन देशों, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैलने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आ गया है. डब्ल्यूएचओ की ओर से बताया गया है कि यह वेरिएंट बीए.3.2 ओमिक्रोन परिवार का ही है और इसे अंडर मॉनिटरिंग रखा गया है. सिर्फ यही नहीं जेएन1 वेरिएंट के 4-5 सब वेरिएंट को भी निगरानी में रखा गया है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह दुनिया के लिए खतरनाक तो नहीं हैं. वहीं डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 के अनुसार यह वेरिएंट ओमिक्रोन की तरह ही है जो तेजी से फैल सकता है लेकिन यह लोगों के लिए कोई बड़े खतरे की ओर इशारा नहीं करता. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि यह टैग को वैक की ओर से हर छह महीने में रिवाइज होने वाली वैक्सीन के संदर्भ में भी यह डब्ल्यूएचओ की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है. लिहाजा इसे लेकर फिलहाल डरने की खास जरूरत नहीं है. क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है?भारत में कोविड के मामलों को लेकर कोई आधिकारिक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह वेरिएंट पिछले एक साल से पूरी दुनिया में मौजूद है और अब 22-23 देशों में रिपोर्ट हो चुका है तो यह भारत में भी मौजूद हो सकता है. हालांकि अभी तक कोविड के नए केस को लेकर कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है. क्या हैं इस वेरिएंट के लक्षण?इस वेरिएंट के लक्षणों में भी ओमिक्रोन के लक्षणों की तरह ही गले में दर्द, सूखी खांसी-सर्दी, बंद या बहती नाक, सिरदर्द-शरीर दर्द, बुखार, स्वाद और गंध का जाना आदि शामिल हैं. यह पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है?अभी तक इसकी खतरनाक स्थिति का पता नहीं चला है. इसके लक्षण और प्रभाव इसे ओमिक्रोन की तरह ही सामान्य बनाते हैं. क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी?ऐसी खबरें भ्रामक हैं. उल्टा डब्ल्यूएचओ की टैग को वैक की ओर से वैक्सीन के लिए प्रायोरिटी में शामिल नहीं किया है. क्या बोल रहे भारत में एक्सपर्ट?भारत में मौजूद कोविड हेल्थ एक्सपर्ट और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्र कहते हैं कि कोरोना के नए वेरिएंट के आने का मतलब ये नहीं है कि महामारी वापस आ रही है. कोरोना वायरस है और वायरस के म्यूटेशन में बदलाव होता रहता है. इसी तरह कोरोना भी अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए रूप बदलता रहता है. मेडिकल क्षेत्र में करीब 3 दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉक्टर मिश्रा आगे कहते हैं कि जब पूरी दुनिया में वायरस है तो भारत में भी होना संभव है इसलिए बचाव के तरीकों को न छोड़ना लोगों के लिए फायदेमंद रहने वाला है. लोग कोशिश करें कि कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को अपनाते रहें और हाथों को साबुन से बार-बार धोने, ज्यादा भीड़भाड़ में न जाने और खुद का बचाव करने के प्रयासों को करते रहें.
हनी सिंह के मुंबई कॉन्सर्ट के आयोजकों पर FIR:एयरपोर्ट के पास अवैध लेजर लाइट का इस्तेमाल किया; क्षमता से ज्यादा जुटी भीड़

मुंबई के MMRDA ग्राउंड में हुए रैपर यो यो हनी सिंह के ‘माय स्टोरी – इंडिया चैप्टर’ कॉन्सर्ट के आयोजकों पर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने पुलिस की मनाही के बावजूद एयरपोर्ट जोन के पास खतरनाक लेजर लाइट्स का इस्तेमाल किया। यह कॉन्सर्ट 28 मार्च 2026 को आयोजित किया गया था, जिसमें सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की बात सामने आई है। मुंबई पुलिस ने ‘तमन्नाज वर्ल्डवाइड’ के प्रतिनिधि इंद्रजीत सिंह के खिलाफ FIR दर्ज की है। पुलिस का कहना है कि MMRDA ग्राउंड मुंबई एयरपोर्ट के काफी नजदीक है, जिस कारण वहां लेजर लाइट्स के इस्तेमाल पर पाबंदी थी। इसके बावजूद प्रोमोटर्स ने हाई-बीम लेजर लाइट्स का इस्तेमाल किया। यह लाइट्स पायलटों के विजन में बाधा डाल सकती हैं, जिससे विमानों की सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। 12 हजार की परमिशन और पहुंच गए 20 हजार लोग FIR के मुताबिक, आयोजकों ने पुलिस को जानकारी दी थी कि कार्यक्रम में लगभग 12,000 लोग शामिल होंगे। हालांकि, कॉन्सर्ट के दौरान वहां असल भीड़ 18,000 से 20,000 के बीच पहुंच गई। क्षमता से ज्यादा लोग जुटने के कारण पुलिस के लिए सुरक्षा इंतजाम संभालना एक बड़ी चुनौती बन गया। भीड़ को कंट्रोल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी और स्थिति अनियंत्रित होने का डर बना रहा। वायरल हुआ गेट फांदती महिला का वीडियो 28 मार्च को हुए इस शो के दौरान अफरातफरी के कई नजारे देखने को मिले। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला कॉन्सर्ट के बंद गेट पर चढ़कर अंदर जाने की कोशिश कर रही है। कई फैंस ने सुरक्षा घेरा तोड़ने की भी कोशिश की। बॉम्बे हाईकोर्ट का आदेश और पुलिस की कार्रवाई इस मामले में कानूनी पहलू यह है कि सितंबर 2024 में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सार्वजनिक जगहों पर लेजर लाइट पर पूरी तरह बैन लगाने से इनकार कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि बिना वैज्ञानिक प्रमाण के इसे बैन नहीं किया जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने यह स्पष्ट निर्देश दिया था कि अगर पुलिस को लगता है कि लाइट्स खतरनाक हैं या सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर रही हैं, तो वे संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र हैं।
पुडुचेरी चुनाव 2026: तारीखें, सीटें, गठबंधन, प्रमुख उम्मीदवार: संपूर्ण गाइड | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 14:26 IST पुडुचेरी चुनाव 2026: पुडुचेरी में 30 सीटों पर 9 अप्रैल, 2026 को मतदान होगा। एनडीए, कांग्रेस-डीएमके और टीवीके के मैदान में होने से 4 मई को नतीजे तय करेंगे कि आगे किसकी सरकार बनेगी। पुडुचेरी विधानसभा चुनाव से पहले एक बैठक के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सांसद केसी वेणुगोपाल और अन्य। (पीटीआई फाइल फोटो) पुदुचेरी अपने 16वें विधान सभा चुनाव की तैयारी कर रहा है, और केंद्र शासित प्रदेश में राजनीतिक तापमान पहले से ही चरम पर है। भारत के चुनाव आयोग ने 15 मार्च, 2026 को कार्यक्रम की घोषणा की, जिसमें सभी 30 निर्वाचन क्षेत्रों में एक ही दिन मतदान निर्धारित किया गया। यहां वह सब कुछ है जो आपको जानना आवश्यक है। मुख्य तिथियाँ एक नज़र में कार्यक्रम की घोषणा: 15 मार्च 2026 मतदान तिथि: 9 अप्रैल 2026 गिनती शुरू: 4 मई 2026, सुबह 8 बजे परिणाम घोषित: 4 मई 2026 वर्तमान विधानसभा का कार्यकाल समाप्त: 15 जून 2026 सीटें और मतदाता पुडुचेरी में 30 विधानसभा क्षेत्र हैं, जिनमें से सभी पर एक ही चरण में 9 अप्रैल को एक साथ मतदान होगा। चुनाव आयोग ने इस चुनाव के लिए कुल 9,44,211 मतदाताओं को पंजीकृत किया, जिसमें 4,43,595 पुरुष मतदाता, 5,00,477 महिला मतदाता और 139 तीसरे लिंग के मतदाता शामिल थे। पुडुचेरी में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुष मतदाताओं से अधिक है, एक जनसांख्यिकीय विवरण जिसे किसी भी प्रतिस्पर्धी गठबंधन ने नजरअंदाज नहीं किया है। प्रमुख उम्मीदवार प्रमुख उम्मीदवारों में, अखिल भारतीय एनआर कांग्रेस के मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी थट्टानचावडी निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और मौजूदा कांग्रेस सांसद वी. वैथिलिंगम को भी उसी थट्टानचावडी सीट से मैदान में उतारा गया है, जो चुनाव के सबसे ज्यादा देखे जाने वाले प्रत्यक्ष मुकाबलों में से एक है। कई वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों से टिकट दिया गया है, जिनमें मन्नादीपट्टू से डीपीआर सेल्वम, ओसुडु से पी. कार्तिकेयन, इंदिरानगर से एन. राजा कुमार, कामराजनगर से पी.के. देवदास और लॉस्पेट से एम. वैथियानाथन शामिल हैं। द्रमुक विपक्षी गठबंधन के हिस्से के रूप में 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, जबकि तमिलागा वेट्री कज़गम ने सभी 30 सीटों पर स्वतंत्र रूप से लड़ने का फैसला किया है, जिसमें नए चेहरों और अन्य दलों के उम्मीदवारों का मिश्रण है। यह भी पढ़ें: ‘अपरिहार्य परिस्थितियाँ’: पुडुचेरी के पूर्व कांग्रेस प्रमुख ने चुनाव से पहले पार्टी छोड़ी गठबंधन क्या हैं? सत्तारूढ़ एनडीए मोर्चे ने चार सहयोगियों के साथ अपनी सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप दे दिया है। मुख्यमंत्री एन. रंगास्वामी के नेतृत्व वाली अखिल भारतीय एनआर कांग्रेस 16 सीटों पर चुनाव लड़ रही है और गठबंधन का नेतृत्व कर रही है। बीजेपी 10 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतार रही है. अन्नाद्रमुक और लॉटरी व्यवसायी सैंटियागो मार्टिन के बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन के नेतृत्व वाली नवगठित लाचिया जनानायगा काची, प्रत्येक दो सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। यह भी पढ़ें: एन रंगासामी कौन हैं? मिलिए पुडुचेरी के ‘मक्कल मुधलवार’ से जिन्होंने दशकों तक इसकी राजनीति को आकार दिया एलजेके के शामिल होने से एनडीए के भीतर आंतरिक कलह पैदा हो गई, रंगास्वामी ने शुरू में भाजपा नेतृत्व के साथ चर्चा के बाद गठबंधन की पुष्टि करने से पहले नए प्रवेशी का विरोध किया। रंगास्वामी ने थट्टानचावडी और मंगलम से अपना नामांकन दाखिल किया और वह एनडीए के घोषित मुख्यमंत्री पद के चेहरे बने हुए हैं। विपक्ष की ओर से, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने अपनी सीट-बंटवारे की व्यवस्था को अंतिम रूप दिया, जिसमें कांग्रेस 16 सीटों पर और द्रमुक 14 सीटों पर चुनाव लड़ रही थी, जिसमें उनके बीच सभी 30 निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। विदुथलाई चिरुथिगल काची, जो शुरू में गठबंधन के साथ बातचीत कर रही थी, वापसी की समय सीमा से पहले व्यवस्था से बाहर हो गई। विजय की तमिलागा वेट्री कज़गम ने पुडुचेरी में चुनावी शुरुआत करते हुए 22 मार्च, 2026 को सभी 30 निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की, जिससे पहले से ही प्रतिस्पर्धी प्रतियोगिता में एक विश्वसनीय तीसरा आयाम जुड़ गया। यह भी पढ़ें: आगामी पुडुचेरी चुनाव में कांग्रेस के बागी 6 सीटों पर सहयोगी दल डीएमके, वीसीके को चुनौती देंगे 2021 और 2016 के आंकड़े क्या कहते हैं? 2021 के विधानसभा चुनाव में एआईएनआरसी के नेतृत्व वाला एनडीए सत्ता में लौट आया। एआईएनआरसी ने 10 सीटें जीतीं, भाजपा और डीएमके ने छह-छह सीटें और कांग्रेस ने दो सीटें जीतीं। एनडीए सहयोगी के रूप में चुनाव लड़ने के बावजूद एआईएडीएमके एक भी सीट जीतने में विफल रही। उस वर्ष मतदान प्रतिशत 84.8 प्रतिशत रहा। 2016 का चुनाव एक अलग कहानी कहता है। कांग्रेस 15 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जबकि एआईएनआरसी ने आठ, एआईएडीएमके ने चार और डीएमके ने दो सीटें जीतीं। उस वर्ष मतदान प्रतिशत 83.6 प्रतिशत रहा। दांव पर क्या है पुडुचेरी में बहुमत के लिए सिर्फ 16 सीटों की आवश्यकता है, जिसका मतलब है कि तीन से चार निर्वाचन क्षेत्रों का स्विंग भी परिणाम को पूरी तरह से बदल सकता है। कांग्रेस-द्रमुक गठबंधन सत्ता विरोधी लहर को निर्णायक जनादेश में बदलने की उम्मीद कर रहा होगा, जबकि सत्तारूढ़ एनडीए मोर्चा रंगास्वामी के रिकॉर्ड और पांच साल के शासन पर निर्भर रहेगा। तीसरी ताकत के रूप में टीवीके का प्रवेश वास्तविक अप्रत्याशितता जोड़ता है, खासकर युवा मतदाताओं के बीच। 4 मई की शाम तक पुडुचेरी की अगली सरकार का पता चल जाएगा. जगह : पुडुचेरी, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 31, 2026, 14:23 IST समाचार चुनाव पुडुचेरी चुनाव 2026: तारीखें, सीटें, गठबंधन, प्रमुख उम्मीदवार: संपूर्ण गाइड अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
बेंगलुरु में इंजीनियर कपल ने सुसाइड किया:पति फ्लैट में फंदे से लटका मिला, पत्नी ने 17वीं मंजिल से कूदकर जान दी

बेंगलुरु के कोथनूर इलाके के अपार्टमेंट में एक इंजीनियर कपल के सुसाइड का मामला सामने आया है। पहले पति का शव फ्लैट के बंद कमरे में मिला। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पत्नी ने सिक्योरिटी और पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़ने पर पति का शव फंदे से लटका मिला। इसके कुछ ही मिनट बाद पत्नी फ्लैट से बाहर निकलीं और उसी अपार्टमेंट की 17वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। मृतकों की पहचान तेलंगाना के सिद्दीपेट निवासी भानु चंदर रेड्डी कुंटा (32) और उनकी पत्नी शाजिया (31) के रूप में हुई है। भानु चंदर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। शाजिया IBM में काम करती थीं। कपल की शादी को लगभग नौ साल हो चुके थे। इससे पहले दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके थे। सूत्रों ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उनके बीच अक्सर विवाद होते रहते थे। रेड्डी ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उन्होंने लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया। मृतकों के दोनों परिवार उनके रिश्ते से अनजान थे। बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पति के स्वास्थ्य समस्याओं ने इस घटना में कोई भूमिका निभाई। इसके अलावा रिश्तों में तनाव और मानसिक दबाव और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही मौत की असली वजह और पूरा घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा। इसी बीच, बेंगलुरु के बाहरी इलाके के घर में दो अन्य महिलाओं के गले कटे हुए शव पाए गए। जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल अवस्था में थे। पुलिस के अनुसार, घटना बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या की कोशिश लगती है। पुलिस ने बताया कि आशा (55) और उनकी बेटी वर्षिता (32) घर में मृत पाई गईं। आशा का बेटा मोहन (27) और 10 साल का पोता मयंक गौड़ा घायल अवस्था में बच गए और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है।
बेंगलुरु में इंजीनियर कपल ने सुसाइड किया:पति फ्लैट में फंदे से लटका मिला, पत्नी ने 17वीं मंजिल से कूदकर जान दी

बेंगलुरु के कोथनूर इलाके के अपार्टमेंट में एक इंजीनियर कपल के सुसाइड का मामला सामने आया है। पहले पति का शव फ्लैट के बंद कमरे में मिला। कई बार दरवाजा खटखटाने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिला तो पत्नी ने सिक्योरिटी और पड़ोसियों को बुलाया। दरवाजा तोड़ने पर पति का शव फंदे से लटका मिला। इसके कुछ ही मिनट बाद पत्नी फ्लैट से बाहर निकलीं और उसी अपार्टमेंट की 17वीं मंजिल से कूदकर जान दे दी। मृतकों की पहचान तेलंगाना के सिद्दीपेट निवासी भानु चंदर रेड्डी कुंटा (32) और उनकी पत्नी शाजिया (31) के रूप में हुई है। भानु चंदर सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। शाजिया IBM में काम करती थीं। रेड्डी ने एक सुसाइड नोट भी छोड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में बताया। साथ ही लिखा कि उनकी मौत के लिए किसी को जिम्मेदार न ठहराया जाए। कपल शादी से पहले लिव-इन रिलेशनशिप में रहे पुलिस के अनुसार, कपल की शादी को लगभग नौ साल हो चुके थे। इससे पहले दोनों लिव-इन रिलेशनशिप में रह चुके थे। सूत्रों ने पुलिस को बताया कि शादी के बाद उनके बीच अक्सर विवाद होते रहते थे। हालांकि, दोनों परिवार उनके रिश्ते से अनजान थे। बेंगलुरु पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और उनकी मौत के कारणों का पता लगाने के लिए आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि क्या पति के स्वास्थ्य समस्याओं ने इस घटना में कोई भूमिका निभाई। इसके अलावा रिश्तों में तनाव और मानसिक दबाव और अन्य पहलुओं को भी खंगाला जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और आगे की जांच के बाद ही मौत की असली वजह और पूरा घटनाक्रम स्पष्ट हो सकेगा। बेंगलुरु के घर में दो महिलाओं के शव मिले, दो घायल इसी बीच, बेंगलुरु के बाहरी इलाके के घर में दो अन्य महिलाओं के गले कटे हुए शव पाए गए। जबकि परिवार के दो अन्य सदस्य घायल अवस्था में थे। पुलिस के अनुसार, घटना बढ़ते कर्ज के कारण आत्महत्या की कोशिश लगती है। पुलिस ने बताया कि आशा (55) और उनकी बेटी वर्षिता (32) घर में मृत पाई गईं। आशा का बेटा मोहन (27) और 10 साल का पोता मयंक गौड़ा घायल अवस्था में बच गए और उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। ————————- यह खबर भी पढ़ें… आंध्र प्रदेश में नेवी कर्मचारी ने प्रेमिका के टुकड़े किए, धड़ को फ्रिज में रखा; पत्नी मायके गई थी आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में एक शादीशुदा नेवी कर्मचारी ने रविवार 29 मार्च को अपनी प्रेमिका की हत्या कर दी। फिर उसके शव के कई टुकड़े कर दिए। इसके बाद खुद पुलिस स्टेशन गया और अपना अपराध को कबूल कर लिया। आरोपी ने प्रेमिका का सिर, हाथ और पैर को धड़ से अलग किया। पैरों और कूल्हे के हिस्से को ट्रॉली बैग में छिपा दिया। धड़ को फ्रिज में रखा। पूरी खबर पढ़ें…
बुरहानपुर में उर्वरक वितरण के लिए ई-विकास सिस्टम लागू:कल से ऑनलाइन पारदर्शी व्यवस्था शुरू, कालाबाजारी पर रोक लगेगी

बुरहानपुर में कृषि आदान विक्रेताओं के लिए उर्वरक वितरण की नई ‘ई-विकास प्रणाली’ पर प्रशिक्षण आयोजित किया गया। यह प्रणाली कल (1 अप्रैल) से पूरी तरह लागू होगी, जिसका उद्देश्य किसानों को समय पर और पारदर्शी तरीके से उर्वरक उपलब्ध कराना है। कलेक्टर हर्ष सिंह के मार्गदर्शन में ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के तहत कृषि विभाग किसानों को नई तकनीकों से जोड़ने के लिए विभिन्न कार्यक्रम आयोजित कर रहा है। इसी कड़ी में कृषि उपज मंडी केला नीलामी सभागृह में इस ऑनलाइन प्रणाली का प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में उपसंचालक कृषि एम.एस. देवके ने कृषि आदान विक्रेताओं को ई-विकास प्लेटफॉर्म के माध्यम से उर्वरक वितरण की पूरी प्रक्रिया विस्तार से समझाई। आसानी से उर्वरक मिल सकेगा इस प्रणाली का मुख्य उद्देश्य जिले में शत-प्रतिशत पारदर्शी उर्वरक वितरण सुनिश्चित करना है। इससे किसानों को समय पर और आसानी से उर्वरक मिल सकेगा, साथ ही कालाबाजारी, अधिक दर और अन्य अनियमितताओं पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सकेगा। उपसंचालक देवके ने बताया कि मध्य प्रदेश शासन द्वारा लागू की गई यह नवीन प्रणाली 1 अप्रैल से पूर्ण रूप से लागू की जा रही है। नई व्यवस्था से किसानों को उनकी फसल की वैज्ञानिक अनुशंसा के अनुसार लक्षित रूप में उर्वरक प्राप्त होगा। संतुलित पोषक तत्वों के उपयोग से फसलों की उत्पादकता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी प्रताप सिंह जमरे, एसएडीओ राम पाटिल, प्रभारी जिला विपणन अधिकारी संदीप इंगले, कृषि विस्तार अधिकारी जे.एस. चौहान, अखिलेश रावत सहित बड़ी संख्या में कृषि आदान विक्रेता उपस्थित रहे।
जापान में क्रिकेट लीग, इंटरनेशनल स्टार्स बिना पैसे लिए खेलेंगे:2 मई से तीन दिन की लीग में खेलेंगे दिमुथ करुणारत्ने, करण केसी और जोश ब्राउन

क्रिकेट का क्रेज अब सिर्फ भारत, ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड तक सीमित नहीं है। अब ‘उगते सूरज का देश’ यानी जापान भी इस खेल में तेजी से पहचान बना रहा है। जापान प्रीमियर लीग (जेपीएल) नाम का टी20 टूर्नामेंट धीरे-धीरे दुनिया भर के क्रिकेट फैंस और खिलाड़ियों का ध्यान खींच रहा है। इस साल लीग में श्रीलंका के पूर्व कप्तान दिमुथ करुणारत्ने, ऑस्ट्रेलिया के बिग बैश लीग स्टार जोश ब्राउन और नेपाल के ऑलराउंडर करण केसी जैसे बड़े अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी खेलते नजर आएंगे। आखिर जापान में क्रिकेट का क्या माहौल है और यह लीग कैसे काम करती है? जानते हैं… जापान प्रीमियर लीग के बारे में वो सबकुछ, जो आपके लिए जानना जरूरी है 1. जापान प्रीमियर लीग क्या है और यह कब शुरू हुई? इसकी शुरुआत 2015 में हुई थी। इसमें 4 टीमें (नॉर्थ, साउथ, ईस्ट, वेस्ट कांटो) थीं, जो घरेलू मैदानों पर खेलती थीं। लेकिन दर्शकों की कमी के कारण वह फ्लॉप हो गया। अब मैच सानो इंटरनेशनल ग्राउंड पर होंगे। इसमें पांचवीं टीम ‘कंसाई’ भी जुड़ गई है। टूर्नामेंट 2 से 4 मई तक चलेगा, जिसमें 12 मैच खेले जाएंगे। 2. क्या जापान में क्रिकेट का कोई पुराना इतिहास है? जापान में क्रिकेट 1863 से खेला जा रहा है। 80 के दशक में जापान क्रिकेट एसोसिएशन की स्थापना भी हो गई थी। हालांकि, लंबे इतिहास के बावजूद क्रिकेट वहां मुख्यधारा का खेल नहीं बन पाया है। जापान की अंडर-19 पुरुष टीम ने 2020 और 2026 के वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया था। 3. इस लीग में खेलने वाले स्थानीय खिलाड़ी कौन हैं? जापान में क्रिकेटर्स पेशेवर नहीं हैं। वे या तो छात्र हैं या फिर कहीं नौकरी करते हैं। ये खिलाड़ी मैच खेलने के लिए दफ्तरों से सालाना छुट्टियां लेते हैं। उनके लिए क्रिकेट पेशे से ज्यादा एक शौक है। साल की शुरुआत में ट्रायल्स और घरेलू प्रदर्शन के आधार पर इन खिलाड़ियों को 14-सदस्यीय टीम में ड्रॉफ्ट के जरिए चुना जाता है। 4. जब पैसा नहीं मिलता, तो विदेशी क्यों खेलने जाते हैं? फैंस को हाई-क्वालिटी क्रिकेट दिखाने व स्थानीय खिलाड़ियों को एक्सपोजर देने हर टीम में एक विदेशी खिलाड़ी रखा जाता है। इस लीग में विदेशी खिलाड़ियों को खेलने की कोई सैलरी नहीं मिलती। ये खिलाड़ी क्रिकेट के विकास में मदद करने और सद्भावना के तहत यहां खेलने आते हैं। 5. आयोजक दर्शकों को आकर्षित करने के लिए क्या कर रहे हैं? इसका भविष्य क्या है? जापान में सिर्फ क्रिकेट दर्शकों को मैदान तक लाने के लिए काफी नहीं है। इसलिए आयोजक डांस, म्यूजिक, फूड स्टॉल्स, जापानी भाषा में कमेंट्री का सहारा लेते हैं। एसोसिएशन के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर एलन का मानना है कि बिना सैलरी के खिलाड़ियों को बुलाना लंबे समय तक मुमकिन नहीं है। अच्छे स्पॉन्सर और तगड़ी फंडिंग की जरूरत है।
मुनाफे के चक्कर में ग्राहकों को भूली कंपनी:क्राफ्ट हाइंज को तोड़ने के बजाय सुधारेंगे नए सीईओ कैहिलेन; ग्राहकों की सेहत पर जोर

जब स्टीव कैहिलेन को क्राफ्ट हाइंज का सीईओ बनाया गया, तो काम साफ था- कंपनी को दो हिस्सों में तोड़ना। लेकिन महज छह हफ्ते के भीतर उन्होंने वह फैसला पलट दिया। उन्होंने बोर्ड को समझाया, वॉरेन बफे के उत्तराधिकारी ग्रेग एबेल को फोन किया और कहा, ‘यह कंपनी ठीक हो सकती है, तोड़ने की जरूरत नहीं है।’ यह कोई छोटा फैसला नहीं था। लगातार 9 तिमाहियों से घटती बिक्री, शेयर में गिरावट और उपभोक्ताओं का सस्ते ब्रांड्स की तरफ जाना, सब कुछ क्राफ्ट हाइंज के खिलाफ था। ऑस्कर मेयर, फिलाडेल्फिया क्रीच चीज, जेल-ओ, कूल-एड जैसे दशकों पुराने ब्रांड्स की पहचान तो है, लेकिन जैसा कैहिलेन खुद कहते हैं, ‘लोग टी-शर्ट खरीदना चाहते हैं, प्रोडक्ट नहीं। हमें दोनों बिकवाने हैं।’ 60 साल के कैहिलेन फूड इंडस्ट्री के पुराने खिलाड़ी हैं। इससे पहले वो केलॉग कंपनी को दो हिस्सों में बांट चुके थे। स्नैक्स वाला हिस्सा केलानोवा बना और मार्स ने उसे 36 अरब डॉलर (अभी के हिसाब से 3.4 लाख करोड़ रुपए) में खरीद लिया। यानी कंपनी तोड़ने का अनुभव उनके पास था, लेकिन इस बार उन्होंने वो नहीं किया जो उनसे उम्मीद थी। उनका तर्क सीधा था- अगर अभी तोड़ा, तो दोनों हिस्से कमजोर निकलेंगे। पहले कंपनी को मजबूत करो, फिर विकल्प खुले रहेंगे। चुनौतियां कम नहीं हैं। वजन घटाने वाली दवाओं ने लोगों की खाने की आदतें बदल दी हैं। अमेरिका में ‘अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड’ पर राजनैतिक बहस छिड़ी है। ईरान युद्ध से तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, जो सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकती हैं। कैहिलेन मानते हैं कि बीते 10 वर्षों में कंपनी ने उपभोक्ताओं को नजरअंदाज किया और सिर्फ मुनाफे पर ध्यान दिया। यही सबसे बड़ी गलती थी। लेकिन कैहिलेन आश्वस्त नजर आते हैं।35,000 कर्मचारियों को नई दिशा दी गई है। रिसर्च टीमें प्रोटीन-रिच विकल्पों पर काम कर रही हैं। आर्टिफिशियल कलर और सामग्री हटाने की प्रक्रिया पहले से चल रही थी। कैहिलेन की मां आयरलैंड से थीं और चार बच्चे पालते हुए कॉलेज की डिग्री ली थी। संभवत: यही जिद्द उन्हें विरासत में मिली है। वॉरेन बफे ने 2015 में हाइंज और क्राफ्ट फूड्स का विलय कराया था क्राफ्ट हाइंज दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी फूड एंड बेवरेज कंपनी है। वॉरेन बफे की फर्म बर्कशयर हैथवे और निवेश फर्म 3जी कैपिटल ने 2015 में हाइंज और क्राफ्ट फूड्स का विलय कराया था। कंपनी के पोर्टफोलियो में ऑस्कर मेयर, फिलाडेल्फिया क्रीच चीज, जेल-ओ, कूल-एड, कैप्री सन और हाइंज केचअप समेत दर्जनों ब्रांड हैं। कंपनी के दुनियाभर में 35,000 कर्मचारी हैं और इसका मुख्यालय शिकागो में है। ग्रेज एबेल जो अब बर्कशयर हैथवे के सीईओ हैं, उन्होंने भी कैहिलेन के साथ ही 1 जनवरी को ही नई जिम्मेदारी संभाली है।








