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Cicada New Covid 19 Variant: सिकाडा के भारत में कितने मरीज, क्या ओमिक्रोन से ज्यादा खतरनाक है नया वेरिएंट? जान लें हर बात

एमपी में TET पर बगावत, 18 अप्रैल को डेढ़ लाख टीचर्स बड़ा प्रदर्शन करेंगे

Cicada New Covid 19 Variant Explainer: कोरोना के नए वेरिएंट ने एक बार फिर लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. हर बार की तरह इस बार भी कोरोना नया रूप लेकर आया है और ये है बीए.3.2 वेरिएंट, जिसे सिकाडा नाम दिया गया है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार यह सिकाडा वेरिएंट अमेरिका के कई राज्यों सहित दुनिया के 22 देशों में फैल चुका है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है.

लिहाजा यह सवाल लाजिमी है कि क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है? और यह वेरिएंट कोविड के पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है? क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस खबर में आप डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 वैक्सीन कंपोजिशन (TAG-CO-VAC) से मिली आधिकारिक जानकारी के अलावा भारत में कोविड महामारी से लेकर अभी तक कोरोना की मॉनिटरिंग कर रहे टॉप हेल्थ एक्सपर्ट्स से मिलने वाले हैं.

बता दें कि ओमिक्रोन परिवार से आने वाला यह नया वेरिएंट दुनिया के लिए बिल्कुल नया नहीं है बल्कि यह 2024 के अंत में सबसे पहले साउथ अफ्रीका में मिला था. तभी से दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं. हालांकि इस वेरिएंट के अब दक्षिण अफ्रीका से निकलकर बाकी यूरोपियन देशों, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैलने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

डब्ल्यूएचओ की ओर से बताया गया है कि यह वेरिएंट बीए.3.2 ओमिक्रोन परिवार का ही है और इसे अंडर मॉनिटरिंग रखा गया है. सिर्फ यही नहीं जेएन1 वेरिएंट के 4-5 सब वेरिएंट को भी निगरानी में रखा गया है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह दुनिया के लिए खतरनाक तो नहीं हैं.

वहीं डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 के अनुसार यह वेरिएंट ओमिक्रोन की तरह ही है जो तेजी से फैल सकता है लेकिन यह लोगों के लिए कोई बड़े खतरे की ओर इशारा नहीं करता. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि यह टैग को वैक की ओर से हर छह महीने में रिवाइज होने वाली वैक्सीन के संदर्भ में भी यह डब्ल्यूएचओ की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है. लिहाजा इसे लेकर फिलहाल डरने की खास जरूरत नहीं है.

क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है?
भारत में कोविड के मामलों को लेकर कोई आधिकारिक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह वेरिएंट पिछले एक साल से पूरी दुनिया में मौजूद है और अब 22-23 देशों में रिपोर्ट हो चुका है तो यह भारत में भी मौजूद हो सकता है. हालांकि अभी तक कोविड के नए केस को लेकर कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है.

क्या हैं इस वेरिएंट के लक्षण?
इस वेरिएंट के लक्षणों में भी ओमिक्रोन के लक्षणों की तरह ही गले में दर्द, सूखी खांसी-सर्दी, बंद या बहती नाक, सिरदर्द-शरीर दर्द, बुखार, स्वाद और गंध का जाना आदि शामिल हैं.

यह पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है?
अभी तक इसकी खतरनाक स्थिति का पता नहीं चला है. इसके लक्षण और प्रभाव इसे ओमिक्रोन की तरह ही सामान्य बनाते हैं.

क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी?
ऐसी खबरें भ्रामक हैं. उल्टा डब्ल्यूएचओ की टैग को वैक की ओर से वैक्सीन के लिए प्रायोरिटी में शामिल नहीं किया है.

क्या बोल रहे भारत में एक्सपर्ट?
भारत में मौजूद कोविड हेल्थ एक्सपर्ट और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्र कहते हैं कि कोरोना के नए वेरिएंट के आने का मतलब ये नहीं है कि महामारी वापस आ रही है. कोरोना वायरस है और वायरस के म्यूटेशन में बदलाव होता रहता है. इसी तरह कोरोना भी अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए रूप बदलता रहता है.

मेडिकल क्षेत्र में करीब 3 दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉक्टर मिश्रा आगे कहते हैं कि जब पूरी दुनिया में वायरस है तो भारत में भी होना संभव है इसलिए बचाव के तरीकों को न छोड़ना लोगों के लिए फायदेमंद रहने वाला है. लोग कोशिश करें कि कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को अपनाते रहें और हाथों को साबुन से बार-बार धोने, ज्यादा भीड़भाड़ में न जाने और खुद का बचाव करने के प्रयासों को करते रहें.

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Cicada New Covid 19 Variant Explainer: कोरोना के नए वेरिएंट ने एक बार फिर लोगों की धड़कनें बढ़ा दी हैं. हर बार की तरह इस बार भी कोरोना नया रूप लेकर आया है और ये है बीए.3.2 वेरिएंट, जिसे सिकाडा नाम दिया गया है. अभी तक मिली जानकारी के अनुसार यह सिकाडा वेरिएंट अमेरिका के कई राज्यों सहित दुनिया के 22 देशों में फैल चुका है और लोगों को तेजी से संक्रमित कर रहा है.

लिहाजा यह सवाल लाजिमी है कि क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है? और यह वेरिएंट कोविड के पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है? क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी? ऐसे तमाम सवालों के जवाब इस खबर में आप डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 वैक्सीन कंपोजिशन (TAG-CO-VAC) से मिली आधिकारिक जानकारी के अलावा भारत में कोविड महामारी से लेकर अभी तक कोरोना की मॉनिटरिंग कर रहे टॉप हेल्थ एक्सपर्ट्स से मिलने वाले हैं.

बता दें कि ओमिक्रोन परिवार से आने वाला यह नया वेरिएंट दुनिया के लिए बिल्कुल नया नहीं है बल्कि यह 2024 के अंत में सबसे पहले साउथ अफ्रीका में मिला था. तभी से दुनिया भर के वैज्ञानिक और ग्लोबल हेल्थ एजेंसियां लगातार इसकी निगरानी कर रही हैं. हालांकि इस वेरिएंट के अब दक्षिण अफ्रीका से निकलकर बाकी यूरोपियन देशों, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में फैलने के बाद यह एक बार फिर चर्चा में आ गया है.

डब्ल्यूएचओ की ओर से बताया गया है कि यह वेरिएंट बीए.3.2 ओमिक्रोन परिवार का ही है और इसे अंडर मॉनिटरिंग रखा गया है. सिर्फ यही नहीं जेएन1 वेरिएंट के 4-5 सब वेरिएंट को भी निगरानी में रखा गया है और यह पता लगाया जा रहा है कि यह दुनिया के लिए खतरनाक तो नहीं हैं.

वहीं डब्ल्यूएचओ टैक्निकल एडवाइजरी ग्रुप ऑन कोविड-19 के अनुसार यह वेरिएंट ओमिक्रोन की तरह ही है जो तेजी से फैल सकता है लेकिन यह लोगों के लिए कोई बड़े खतरे की ओर इशारा नहीं करता. इसकी एक बड़ी वजह यह भी है कि यह टैग को वैक की ओर से हर छह महीने में रिवाइज होने वाली वैक्सीन के संदर्भ में भी यह डब्ल्यूएचओ की प्राथमिकता सूची में शामिल नहीं है. लिहाजा इसे लेकर फिलहाल डरने की खास जरूरत नहीं है.

क्या भारत में भी यह वायरस एंट्री कर चुका है?
भारत में कोविड के मामलों को लेकर कोई आधिकारिक डेटा मौजूद नहीं है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि जब यह वेरिएंट पिछले एक साल से पूरी दुनिया में मौजूद है और अब 22-23 देशों में रिपोर्ट हो चुका है तो यह भारत में भी मौजूद हो सकता है. हालांकि अभी तक कोविड के नए केस को लेकर कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है.

क्या हैं इस वेरिएंट के लक्षण?
इस वेरिएंट के लक्षणों में भी ओमिक्रोन के लक्षणों की तरह ही गले में दर्द, सूखी खांसी-सर्दी, बंद या बहती नाक, सिरदर्द-शरीर दर्द, बुखार, स्वाद और गंध का जाना आदि शामिल हैं.

यह पुराने वेरिएंट या सब-वेरिएंट्स से कितना खतरनाक है?
अभी तक इसकी खतरनाक स्थिति का पता नहीं चला है. इसके लक्षण और प्रभाव इसे ओमिक्रोन की तरह ही सामान्य बनाते हैं.

क्या इस वेरिएंट पर वैक्सीन काम नहीं कर पाएगी?
ऐसी खबरें भ्रामक हैं. उल्टा डब्ल्यूएचओ की टैग को वैक की ओर से वैक्सीन के लिए प्रायोरिटी में शामिल नहीं किया है.

क्या बोल रहे भारत में एक्सपर्ट?
भारत में मौजूद कोविड हेल्थ एक्सपर्ट और ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज नई दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. महेश चंद्र मिश्र कहते हैं कि कोरोना के नए वेरिएंट के आने का मतलब ये नहीं है कि महामारी वापस आ रही है. कोरोना वायरस है और वायरस के म्यूटेशन में बदलाव होता रहता है. इसी तरह कोरोना भी अपना अस्तित्व बचाए रखने के लिए रूप बदलता रहता है.

मेडिकल क्षेत्र में करीब 3 दशक से ज्यादा का अनुभव रखने वाले डॉक्टर मिश्रा आगे कहते हैं कि जब पूरी दुनिया में वायरस है तो भारत में भी होना संभव है इसलिए बचाव के तरीकों को न छोड़ना लोगों के लिए फायदेमंद रहने वाला है. लोग कोशिश करें कि कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर को अपनाते रहें और हाथों को साबुन से बार-बार धोने, ज्यादा भीड़भाड़ में न जाने और खुद का बचाव करने के प्रयासों को करते रहें.

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