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जहर खाकर 15 दिन की बेटी को लेकर निकली महिला:रास्ते में मौत, गोद में बच्ची लिए 1 किलोमीटर चली, पति के जाने के बाद निकली

जहर खाकर 15 दिन की बेटी को लेकर निकली महिला:रास्ते में मौत, गोद में बच्ची लिए 1 किलोमीटर चली, पति के जाने के बाद निकली

देवास में एक महिला ने सोमवार सुबह जहर खा लिया। जहर खाने के बाद वह 15 दिन की बेटी को गोद में लेकर घर से निकल गई। करीब 1 किमी दूर जमीन पर गिरी और उल्टी करने लगी। परिजन उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन उसकी जान नहीं बची। पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है। पुलिस के अनुसार- सुतारपुरा (पुंजापुरा) निवासी रामेश्वर सोमवार अलसुबह विवाह कार्यक्रम में शामिल होने खरगोन रवाना हुआ। पति के जाते ही रेशमीबाई ने जहर पी लिया। बिना किसी को बताए, उसने सो रही अपनी 15 दिन की बेटी को गोद में उठाया और घर से निकल गई। तीन बेटियों की नींद खुली तो उन्होंने मां को आवाज लगाई। आसपास नहीं दिखने पर परिवार से पूछा। इसके बाद सभी उसे खोजने लगे। 1 किलोमीटर पैदल चली फिर सड़क पर गिरी करीब एक किमी दूर वह सड़क किनारे उल्टी करते मिली। परिवार वाले उसे तत्काल बागली के स्वास्थ्य केंद्र लेकर गए, जहां से उसे देवास जिला अस्पताल रैफर कर दिया। जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। परिजनों का कहना था कि पति-पत्नी में कोई विवाद नहीं था। रेशमीबाई ने ऐसा क्यों कदम उठाया, समझ नहीं आई। राधाबाई ने बताया कि भाभी बेटी को लेकर घर से निकल गई थी। ढूंढा तो वह बच्ची को लेकर चल रही थी। बैठकर उल्टी करने लगी, बदबू आई तो समझ आया कि उसने कुछ जहरीला पदार्थ खाया है, सभी उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन रेमशीबाई को मृत घोषित कर दिया। सुबह से बेटी रो रही है राधाबाई ने बताया कि रेमशीबाई की तीन बेटियां थी, चौथी बेटी का जन्म 15 दिन पहले ही हुआ था। अभी तो उसका नाम भी नहीं रखा। तीन बेटियों के नाम चंदा, एश्वर्या और सीमा है। छोटी बेटी सुबह से रो रही है। घर के पास ही जंगल में प्रसव हुआ था परिजनों ने बताया कि घर पास ही जंगल में उनका परिवार महुआ बीनने जाता है। 15 दिन पहले ही रेशमीबाई का जंगल में प्रसव हुआ था। सास श्यानीबाई ने बताया कि बेटे और बहू घर से कुछ ही दूर रहते हैं। आज सुबह बेटियों ने आकर बताया कि मम्मी रेशमीबाई कहीं चली गई है। मैं नदी तक देखने भी गई थी। पति पत्नी के बीच कोई विवाद नहीं होता था। रविवार रात को मछली लाए थे, दोनों अच्छे से रह रहे थे, कुछ नहीं हुआ था। बेटा सुबह बोलकर गया था श्यानीबाई ने बताया कि बेटा सुबह विवाह कार्यक्रम में शामिल होने खरगोन जाने का कहकर घर से निकला था। मैंने कहा था कि आते समय बेटियों के लिए कपड़े ले आना। गांव में शादी आएगी तो काम आएंगे। कुंवरसिंह ने बताया कि बहू रेशमीबाई ने हमें कुछ नहीं कहा, जब वह रास्ते में गिरी मिली तो उसके पास से दवा की बदबू आ रही थी।

Biryani Watermelon eat and Death Possible Reasons | बिरयानी और तरबूज खाने के बाद मौत के संभावित कारण

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Last Updated:April 27, 2026, 18:53 IST Biryani-Watermelon Death Possible Reason: मुंबई में दिल दहला देने वाली घटना में एक ही परिवार के जिन चार लोगों की मौत हुई है, वे सब रात में बिरयानी के बाद तरबूज का सेवन किए थे. यानी अभी तक यही माना जा रहा है कि फूड प्वाइजनिंग हो सकता है. लेकिन तरबूज से फूड प्वाइजनिंग के क्या है संभावित वैज्ञानिक कारण आइए जानते हैं. तरबूज खाने से फूड प्वाइजनिंग की वजहें. क्या तरबूज खाने से किसी की मौत हो सकती है. ऐसा सुना तो नहीं गया है लेकिन मुंबई इसी बात की आशंका है. 4 लोगों का हंसता-खेलता परिवार की मौत इसी वजह से बताई जा रही है. रिपोर्ट के अनुसार 40 वर्षीय अब्दुल्ला डोकाडिया, उनकी पत्नी 35 वर्षीय नसरीन डोकाडिया, 2 बेटियां आयशा डोकाडिया (16) और जैनब डोकाडिया (13) ने रात में डिनर में बिरयानी खाई और उसके बाद फिर तरबूज खाया. देर रात उन सबको बार-बार दस्त और उल्टियां हुई जिसके बाद उन लोगों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा लेकिन सुबह होते-होते एक के बाद एक सभी चार की मौत हो गई. अब यह तय नहीं हो पा रहा है कि फूड प्वाइजनिंग हुआ कैसे. क्या बिरयानी और तरबूज में रिएक्शन का कोई संबंध है या तरबूज से फूड प्वाइजनिंग हुआ या तरबूज में कुछ मिला हुआ था. खैर पुलिस इस मामले में छानबीन कर रही है लेकिन अगर फूड प्वाइजनिंग से मौत हुई है तरबूज में क्या होने से फूड प्वाइजनिंग हो सकता है. आइए इसका वैज्ञानिक पड़ताल करें. तरबूज से फूड प्वाइजनिंग के 5 संभावित कारण बैक्टीरियल इंफेक्शन- तरबूज के सेवन के बाद सामूहिक फूड पॉइजनिंग के पीछे कई वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण हो सकते हैं. मुंबई जैसे उमस भरे माहौल में गर्मियों के दौरान यह खतरा और बढ़ जाता है. तरबूज में पानी और शुगर की मात्रा अधिक होती है, जो बैक्टीरिया के पनपने के लिए सबसे अनुकूल माहौल है. इसमें साल्मोनेला और लिस्टेरिया बैक्टीरिया हो सकता है. अगर तरबूज काटने से पहले उसे ठीक से धोया न गया हो, तो उसके छिलके पर मौजूद बैक्टीरिया चाकू के जरिए अंदर चले जाते हैं. अगर कटा हुआ तरबूज फ्रिज में खुला रखा जाए या बहुत अधिक समय (24-48 घंटे से ज्यादा) तक रखा रहे, तो उसमें ‘कैलीफॉर्म’ बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो पेट में गंभीर संक्रमण पैदा करते हैं. नाइट्रेट का उच्च स्तर –अक्सर तरबूज को तेजी से बढ़ाने और उसका वजन बढ़ाने के लिए नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग किया जाता है. अगर तरबूज में नाइट्रेट की मात्रा बहुत अधिक हो, तो यह शरीर में जाकर जहर (Toxin) जैसा काम कर सकता है. खेतों में कई ऐसे हानिकारकर कीटनाशकों का इस्तेमाल किया जाता है जिनकी वजह से तरबूज में पहले से टॉक्सिक रसायन पाए जा सकते हैं. अगर तरबूज काटने पर अंदर बहुत अधिक खोखला दिखे या उसमें गहरे पीले रंग की धारियां हों, तो यह नाइट्रेट की अधिकता का संकेत हो सकता है. आर्टिफिशियल कलरिंग –तरबूज को अंदर से ज्यादा लाल दिखाने के लिए कुछ दुकानदार या बिचौलिए उसमें एरिथ्रोसिन (Erythrosine) जैसे लाल रंग के इंजेक्शन लगाते हैं. यह एक केमिकल डाई है जो पेट में जाकर खतरनाक फूड पॉइजनिंग और उल्टी-दस्त का कारण बनती है.  क्रॉस-कंटामिनेशन –चूंकि पीड़ित के घर में दावत हुई थी, तो यह भी आशंका है कि जिस चाकू या चॉपिंग बोर्ड से मांस या अन्य कच्चा खाना काटा गया हो, उसी का इस्तेमाल बिना धोए तरबूज काटने के लिए किया गया हो. अगर तरबूज को कमरे के तापमान पर कई घंटों तक बाहर छोड़ दिया गया (दावत के दौरान), तो गर्मी में वह खराब (Ferment) होना शुरू हो जाता है. गलत फूड कॉम्बिनेशन –आयुर्वेद और सामान्य चिकित्सा के अनुसार, तरबूज को भारी खाने (जैसे तेल-मसाले वाली दावत) के तुरंत बाद खाने से पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है. तरबूज बहुत जल्दी पचता है, जबकि दावत का खाना देर से. इससे पेट में गैस और एसिडिटी टॉक्सिक रूप ले सकती है. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्‍टोर‍ीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्‍स में सबमिट करें First Published : April 27, 2026, 18:53 IST

Supreme Court Live-in Relation Risk

Supreme Court Live-in Relation Risk

नई दिल्ली6 मिनट पहले कॉपी लिंक सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि जब रिश्ता सहमति से था तो अपराध का सवाल कहां उठता है। महिला आरोपी के साथ 15 साल लिव इन रिलेशन में रही उससे उसे एक बच्चा भी है। यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसमें महिला के पूर्व लिव-इन पार्टनर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी गई थी। जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि चूंकि कोई कानूनी विवाह नहीं था, इसलिए यह लिव-इन रिश्ता था और इसमें अलग होना अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “यह इस तरह के रिश्तों का जोखिम है कि कोई भी कभी भी अलग हो सकता है।” शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया ? महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में मुकर गया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया गया। सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि महिला और आरोपी लंबे समय तक साथ रहे और उनके बीच एक बच्चा भी हुआ। उन्होंने कहा, “जब कोई शादी नहीं होती और लिव-इन रिश्ता होता है, तो इसमें जोखिम रहता है कि कोई भी पक्ष कभी भी अलग हो सकता है। ऐसे में अलग होना आपराधिक मामला नहीं बनता।” महिला के वकील ने बताया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसने यह बात छिपाई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर शादी होती तो महिला के अधिकार मजबूत होते और वह बिगैमी या मेंटेनेंस जैसे मामलों में राहत मांग सकती थी। महिला मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है इसी बीच कोर्ट ने सुझाव दिया कि महिला बच्चे के लिए मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के जेल जाने से महिला को क्या फायदा होगा, लेकिन बच्चे के लिए आर्थिक मदद पर विचार किया जा सकता है। बेंच ने मामले में नोटिस जारी करते हुए दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावना तलाशने को कहा। साथ ही मामले को मध्यस्थता के लिए भी भेजने का सुझाव दिया। लिव-इन रिलेशन में महिलाओं के अधिकार क्या हैं? लिव-इन रिलेशन को अपराध की बजाय “सहमति वाला निजी रिश्ता” माना जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिला के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं होते। भारतीय कानून में ऐसे मामलों के लिए कई रास्ते मौजूद हैं: 1. मेंटेनेंस (भरण-पोषण) का अधिकार अगर महिला लंबे समय तक लिव-इन में रही है और आर्थिक रूप से निर्भर थी, तो वह मेंटेनेंस मांग सकती है। प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायोलेंस एक्ट, 2005 के तहत लिव-इन रिलेशन को “रिलेशनशिप इन द नेचर ऑफ मैरिज” माना गया है। इस कानून के तहत महिला को रहने का अधिकार और खर्च के लिए सहायता मिल सकती है। 2. बच्चे के अधिकार सबसे मजबूत लिव-इन से जन्मे बच्चे को पूरी तरह वैध माना जाता है। बच्चे को पिता की संपत्ति में अधिकार और मेंटेनेंस मिल सकता है। सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में साफ कर चुका है कि बच्चे के अधिकार शादी पर निर्भर नहीं होते। 3. घरेलू हिंसा में कानूनी सुरक्षा अगर रिश्ते के दौरान महिला के साथ हिंसा या शोषण हुआ है, तो वह घरेलू हिंसा कानून के तहत केस कर सकती है। इसमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक—तीनों तरह की हिंसा शामिल होती है। 4. शादी का झांसा और धोखाधड़ी का मामला कब बनता है अगर शुरू से ही पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था और उसने झूठ बोलकर संबंध बनाए, तो मामला आपराधिक हो सकता है। लेकिन अगर दोनों लंबे समय तक सहमति से साथ रहे, जैसा इस केस में 15 साल, तो कोर्ट आमतौर पर इसे “सहमति वाला रिश्ता” मानता है, अपराध नहीं। ————————————————— ये खबर भी पढ़ें: सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की। पढ़ें पूरी खबर… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…

पीएम एक्सीलेंस कॉलेज में बस शुल्क को लेकर विवाद:जबरन वसूली के विरोध में एनएसयूआई ने खोला मोर्चा, कहा-10 दिन में समाधान करें

पीएम एक्सीलेंस कॉलेज में बस शुल्क को लेकर विवाद:जबरन वसूली के विरोध में एनएसयूआई ने खोला मोर्चा, कहा-10 दिन में समाधान करें

रीवा में पीएम एक्सीलेंस (मॉडल साइंस कॉलेज) में छात्रों से जबरन बस शुल्क वसूली के विरोध में एनएसयूआई ने मोर्चा खोल दिया है। जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा और जल्द समाधान की मांग की। एनएसयूआई जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि कॉलेज में बसों की संख्या और उनकी क्षमता सीमित है, साथ ही बसों का संचालन केवल दो राउंड में प्रस्तावित है। ऐसे में सभी छात्रों पर अनिवार्य बस शुल्क थोपना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो छात्र बस सेवा का उपयोग नहीं करते, उनसे भी शुल्क वसूला जाना गलत है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों पर बढ़ रहा बोझ एनएसयूआई ने कहा कि एक समान शुल्क लागू करने से गरीब और मध्यमवर्गीय छात्रों पर अनावश्यक आर्थिक दबाव पड़ रहा है, जो न्यायसंगत नहीं है। संगठन ने मांग की है कि बस शुल्क केवल उन्हीं छात्रों से लिया जाए, जो वास्तव में इस सुविधा का लाभ उठा रहे हैं। एनएसयूआई ने चेतावनी दी है कि यदि 10 दिनों के भीतर समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो सैकड़ों छात्र उग्र आंदोलन करेंगे, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।

बैतूल में गूंजे नारे-‘गौमाता को राष्ट्रमाता बनाओ’:भजन-कीर्तन के साथ निकली पदयात्रा, कहा- स्वतंत्र गो पालन मंत्रालय बनाया जाए

बैतूल में गूंजे नारे-‘गौमाता को राष्ट्रमाता बनाओ’:भजन-कीर्तन के साथ निकली पदयात्रा, कहा- स्वतंत्र गो पालन मंत्रालय बनाया जाए

बैतूल में ‘गौ सम्मान आह्वान अभियान’ के तहत सोमवार को जिले में विराट गौ सम्मान पदयात्रा निकाली गई। इसमें सैकड़ों गौभक्त शामिल हुए। पदयात्रा शिवाजी ऑडिटोरियम से शुरू होकर तहसील कार्यालय पहुंची, जहां राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा गया। पदयात्रा सुबह 11 बजे शुरू हुई और भजन-कीर्तन व प्रार्थना के साथ शांतिपूर्ण ढंग से शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई तहसील कार्यालय पहुंची। गौभक्तों ने 9 सूत्रीय मांग पत्र प्रस्तुत किया, जिसमें गोवंश को ‘राष्ट्रमाता’ का संवैधानिक दर्जा देने की प्रमुख मांग रखी गई। आंदोलन की तीन तस्वीरें देखिए… गौ संरक्षण और सख्त कानून की मांग ज्ञापन में गौशालाओं को सहायता, गौ अभयारण्य निर्माण, तस्करी पर कड़े कानून और आधुनिक गौ चिकित्सालय स्थापित करने की मांग शामिल रही। ज्ञापन में कहा गया कि भूख, दुर्घटनाओं, तस्करी और वध के कारण देशी गोवंश की संख्या लगातार घट रही है, जो चिंता का विषय है। गौवंश वध और तस्करी को संज्ञेय व गैर-जमानती अपराध घोषित करने, आजीवन कारावास का प्रावधान करने और स्वतंत्र गो-पालन मंत्रालय बनाने की मांग की गई। आंदोलन को आगे बढ़ाने की चेतावनी पंचगव्य अनुसंधान केंद्र, गो आधारित उद्योगों को बढ़ावा, प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहन और किसानों को आर्थिक सहायता देने के सुझाव भी दिए गए। आयोजकों ने बताया कि मई से जुलाई तक शासन से संवाद किया जाएगा। मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

118km Range, 65kmph Top Speed; Battles Ather, Ola

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Hindi News Business Ampere Magnus Neo Launched: 118km Range, 65kmph Top Speed; Battles Ather, Ola नई दिल्ली9 मिनट पहले कॉपी लिंक ग्रीव्स इलेक्ट्रिक मोबिलिटी ने भारत में अपना अपडेटेड इलेक्ट्रिक स्कूटर एम्पियर मैग्नस नियो लॉन्च कर दिया है। कंपनी ने नए मॉडल में बड़े बदलाव करने के बजाय रोजमर्रा के इस्तेमाल को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया है। कंपनी का दावा है कि फुल चार्ज पर ई-स्कूटर 118km की रेंज देगा और इसकी टॉप स्पीड 65kmph है। दिल्ली में इसकी एक्स-शोरूम कीमत 86,999 रुपए रखी गई है। भारत में इसका मुकाबला बजाज चेतक और एथर रिज्टा से रहेगा। डिजाइन और कंफर्ट: लंबी राइड के लिए आरामदायक सीट कंपनी ने मैग्नस नियो के एर्गोनॉमिक्स में कुछ जरूरी सुधार किए हैं ताकि राइडर को थकान कम हो। सीट और व्हील्स: स्कूटर में आरामदायक लंबी राइड के लिए सीट को री-डिजाइन किया गया है। अब इसकी सीट की ऊंचाई 777mm है, जो कम हाइट वाले लोगों के लिए भी आरामदायक है। इसमें 10-इंच के रियर व्हील्स दिए गए हैं। वजन: स्कूटर का कुल वजन 103 किलो है। हल्का वजन होने के कारण इसे ट्रैफिक में हैंडल करना और पार्क करना काफी आसान हो जाता है। परफॉर्मेंस: सिंगल चार्ज पर मिलेगी 118km की रेंज एम्पियर मैग्नस नियो में परफॉर्मेंस के लिए 2.3kWh का LFP (लिथियम फेरस फास्फेट) बैटरी पैक दिया गया है। कंपनी के अनुसार, यह स्कूटर इंडियन ड्राइविंग साइकिल (IDC) के तहत 118 किमी की रेंज देता है। हालांकि, इको मोड में इसकी रियल वर्ल्ड रेंज 85-90 किमी के करीब है। स्कूटर की टॉप स्पीड 65 किमी प्रति घंटा है। ऑफ-बोर्ड चार्जर की मदद से इसे 0 से 80% तक चार्ज होने में लगभग 5 घंटे का समय लगता है। हार्डवेयर और फीचर्स: 22 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज मैग्नस नियो में बेसिक लेकिन जरूरी फीचर्स का अच्छा तालमेल देखने को मिलता है। एम्पीयर ने इसके व्हील और मोटर कॉन्फिगरेशन में भी सुधार किया है, जिससे अब राइडर को स्मूथ एक्सीलरेशन और बेहतर स्टेबिलिटी मिलेगी। सस्पेंशन और ब्रेक: बेहतर राइड क्वालिटी के लिए इसमें टेलिस्कोपिक फ्रंट फोर्क्स और रियर में मोनोशॉक सस्पेंशन दिया गया है। जो पुराने डुअल-फ्रेम चेसिस पर बेस्ड है। ब्रेकिंग के लिए दोनों पहियों पर ड्रम ब्रेक मिलते हैं। स्मार्ट फीचर्स: स्कूटर में 3.5-इंच का LCD इंस्ट्रूमेंट कंसोल, ऑल-एलईडी लाइटिंग सेटअप और मोबाइल चार्ज करने के लिए USB पोर्ट दिया गया है। स्टोरेज: सामान रखने के लिए इसमें 22 लीटर का अंडर-सीट स्टोरेज स्पेस मिलता है, जिसमें हेलमेट या छोटा बैग आसानी से रखा जा सकता है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

संजय दत्त ने अश्लील गाने पर माफी मांगी:महिला आयोग से बोले- लिरिक्स का पता नहीं था; 50 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे

संजय दत्त ने अश्लील गाने पर माफी मांगी:महिला आयोग से बोले- लिरिक्स का पता नहीं था; 50 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे

कन्नड़ फिल्म के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ में अश्लीलता को लेकर संजय दत्त ने माफी मांगी है। 27 अप्रैल को एक्टर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने पेश हुए। संजय ने गाने के बोल और प्रेजेंटेशन के लिए बिना शर्त माफी मांगी। दरअसल आयोग ने गाने में अश्लीलता और महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर नोरा फतेही और संजय दत्त समेत फिल्म की टीम को समन भेजा था। लिरिक्स की जानकारी नहीं थी: संजय दत्त सोमवार दोपहर संजय दत्त अपने वकील के साथ दिल्ली स्थित महिला आयोग के ऑफिस पहुंचे। पेशी के बाद उनके वकील ने बताया, “संजय दत्त महिलाओं और महिला आयोग का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने आयोग को बताया कि जब यह गाना रिकॉर्ड हुआ था, तब वह किसी और भाषा में था, इसलिए उन्हें इसके हिंदी लिरिक्स की गहराई का पता नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी ओर से माफी मांगी है।” 50 बच्चों की शिक्षा का लिया जिम्मा संजय दत्त ने न केवल माफी मांगी, बल्कि स्वेच्छा से सामाजिक कदम उठाने का भी प्रस्ताव रखा। एक्टर ने घोषणा की है कि वे आदिवासी समुदाय के 50 बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे। उनके वकील ने स्पष्ट किया कि संजय दत्त ने यह फैसला समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए लिया है। आयोग ने एक्टर के इस कदम को रिकॉर्ड पर लिया है। NCW ने लिया था स्वतः संज्ञान पिछले महीने महिला आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस गाने पर स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग का कहना था कि गाने के बोल और कोरियोग्राफी पहली नजर में यौन संकेत देने वाले और आपत्तिजनक हैं। आयोग ने इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और पोक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना था। विवाद बढ़ने के बाद यूट्यूब से इस गाने के लिरिकल वीडियो को हटा दिया गया है। क्या है पूरा मामला? विवाद फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ से शुरू हुआ, जिसमें नोरा फतेही और संजय दत्त हैं। गाने की शुरुआती लाइनों में ‘डबल मीनिंग’ शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि बाद में गाने में यह दिखाया गया कि वे शब्द शराब की बोतल के लिए थे, लेकिन तब तक इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया। नोरा फतेही ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर साफ किया था कि वे ऐसे कंटेंट का समर्थन नहीं करती हैं।

संजय दत्त ने अश्लील गाने पर माफी मांगी:महिला आयोग से बोले- लिरिक्स का पता नहीं था; 50 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे

संजय दत्त ने अश्लील गाने पर माफी मांगी:महिला आयोग से बोले- लिरिक्स का पता नहीं था; 50 आदिवासी बच्चों की पढ़ाई का खर्च उठाएंगे

कन्नड़ फिल्म के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ में अश्लीलता को लेकर संजय दत्त ने माफी मांगी है। 27 अप्रैल को एक्टर राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) के सामने पेश हुए। संजय ने गाने के बोल और प्रेजेंटेशन के लिए बिना शर्त माफी मांगी। दरअसल आयोग ने गाने में अश्लीलता और महिलाओं के प्रति आपत्तिजनक कंटेंट को लेकर नोरा फतेही और संजय दत्त समेत फिल्म की टीम को समन भेजा था। लिरिक्स की जानकारी नहीं थी: संजय दत्त सोमवार दोपहर संजय दत्त अपने वकील के साथ दिल्ली स्थित महिला आयोग के ऑफिस पहुंचे। पेशी के बाद उनके वकील ने बताया, “संजय दत्त महिलाओं और महिला आयोग का बहुत सम्मान करते हैं। उन्होंने आयोग को बताया कि जब यह गाना रिकॉर्ड हुआ था, तब वह किसी और भाषा में था, इसलिए उन्हें इसके हिंदी लिरिक्स की गहराई का पता नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपनी ओर से माफी मांगी है।” 50 बच्चों की शिक्षा का लिया जिम्मा संजय दत्त ने न केवल माफी मांगी, बल्कि स्वेच्छा से सामाजिक कदम उठाने का भी प्रस्ताव रखा। एक्टर ने घोषणा की है कि वे आदिवासी समुदाय के 50 बच्चों की शिक्षा का पूरा खर्च उठाएंगे। उनके वकील ने स्पष्ट किया कि संजय दत्त ने यह फैसला समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझते हुए लिया है। आयोग ने एक्टर के इस कदम को रिकॉर्ड पर लिया है। NCW ने लिया था स्वतः संज्ञान पिछले महीने महिला आयोग ने मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर इस गाने पर स्वतः संज्ञान लिया था। आयोग का कहना था कि गाने के बोल और कोरियोग्राफी पहली नजर में यौन संकेत देने वाले और आपत्तिजनक हैं। आयोग ने इसे भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और पोक्सो एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना था। विवाद बढ़ने के बाद यूट्यूब से इस गाने के लिरिकल वीडियो को हटा दिया गया है। क्या है पूरा मामला? विवाद फिल्म ‘केडी: द डेविल’ के गाने ‘सरके चुनर तेरी सरके’ से शुरू हुआ, जिसमें नोरा फतेही और संजय दत्त हैं। गाने की शुरुआती लाइनों में ‘डबल मीनिंग’ शब्दों का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि बाद में गाने में यह दिखाया गया कि वे शब्द शराब की बोतल के लिए थे, लेकिन तब तक इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया। नोरा फतेही ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखकर साफ किया था कि वे ऐसे कंटेंट का समर्थन नहीं करती हैं।

खंडवा में कर्मवीर विद्यापीठ को बचाने की उठी मांग:“माखन दादा” की धरोहर के लिए विधायक ने सीएम से की मुलाकात

खंडवा में कर्मवीर विद्यापीठ को बचाने की उठी मांग:“माखन दादा” की धरोहर के लिए विधायक ने सीएम से की मुलाकात

निमाड़ की ऐतिहासिक पहचान कर्मवीर विद्यापीठ को बंद किए जाने की आशंकाओं ने जनआक्रोश और जनजागरण को जन्म दे दिया है। पत्रकार संगठनों, सामाजिक संस्थाओं ने इस संस्थान को बचाने की मांग उठाई है। लोगों ने कहा, यह केवल एक शैक्षणिक केंद्र नहीं, बल्कि खंडवा की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है। विधायक ने सीएम के सामने रखी मांग पंधाना विधायक छाया मोरे ने इस मुद्दे को उठाते हुए आंदोलन को नई दिशा दी है। उन्होंने बिना किसी राजनीतिक दबाव के स्वयं आगे बढ़कर इस विषय को राज्य स्तर तक पहुंचाया। विधायक मोरे ने भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर विस्तृत ज्ञापन सौंपा। उन्होंने बताया कि माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय का खंडवा स्थित परिसर कर्मवीर विद्यापीठ महान स्वतंत्रता सेनानी और पत्रकार पंडित माखनलाल चतुर्वेदी की कर्मभूमि से जुड़ी अमूल्य धरोहर है। “माखन दादा” की विरासत बचाने की मांग विधायक ने मुख्यमंत्री के सामने स्पष्ट कहा कि संस्थान को बंद करना निमाड़ के युवाओं के भविष्य के साथ अन्याय होगा। यह “माखन दादा” की ऐतिहासिक विरासत के प्रति उपेक्षा भी मानी जाएगी। उन्होंने मांग की कि परिसर को यथावत संचालित रखा जाए और यहां स्थायी, सर्वसुविधायुक्त भवन निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएं। मुख्यमंत्री का सकारात्मक रुख मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की गंभीरता को स्वीकार करते हुए संवेदनशीलता के साथ विचार करने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सामाजिक संगठनों ने चेतावनी दी कि यदि संस्थान को बंद करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो बड़ा जनआंदोलन किया जाएगा। हालांकि फिलहाल मुख्यमंत्री के सकारात्मक संकेतों के बाद समाधान की उम्मीद बरकरार है।

पहाड़ी लोगों की पसंदीदा सब्जी लिंगुड़ा, जिसके स्वाद में छुपा है नॉनवेज जैसा ट्विस्ट, जानिए इसके फायदे

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Last Updated:April 27, 2026, 18:14 IST पिथौरागढ़:  पहाड़ों के जंगलों में मिलने वाला लिंगुड़ा एक जंगली फर्न है, जिससे स्वादिष्ट सब्जी बनाई जाती है. इसे उबालकर मसालों के साथ पकाया जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा और कुरकुरा होता है. लोग इसे दाल-चावल या रोटी के साथ खाते हैं. यह सेहत के लिए भी फायदेमंद और पहाड़ी संस्कृति का खास हिस्सा है. लिंगुड़ा असल में एक जंगली पौधा होता है, जिसे अंग्रेज़ी में फर्न कहा जाता है. इसका कोमल हिस्सा, जो घुमावदार होता है, वही खाने के काम आता है. यह पौधा पहाड़ों के जंगलों में खुद-ब-खुद उगता है, इसे उगाने के लिए किसी खास खेती की जरूरत नहीं होती. जब यह पौधा छोटा और नरम होता है, तब इसे तोड़ लिया जाता है. अगर यह ज्यादा बड़ा हो जाए, तो सख्त हो जाता है और खाने लायक नहीं रहता. लिंगुड़ा मुख्य रूप से उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और अन्य पहाड़ी इलाकों के जंगलों में मिलता है. यह खासकर गर्मियों के मौसम में उगता है, जब बारिश शुरू होने वाली होती है. गांव के लोग सुबह-सुबह जंगल जाते हैं और ताजा लिंगुड़ा तोड़कर लाते हैं. यह काम थोड़ा मेहनत वाला जरूर है, लेकिन लोगों के लिए यह एक रोजमर्रा की आदत जैसा है. लिंगुड़ा को बनाने का तरीका बहुत आसान होता है, लेकिन इसमें थोड़ी सावधानी जरूरी है. सबसे पहले लिंगुड़ा को अच्छी तरह धोया जाता है, ताकि उसमें लगी मिट्टी साफ हो जाए. इसके बाद फिर कढ़ाई में तेल गर्म किया जाता है, उसमें जीरा, लहसुन और हरी मिर्च डाली जाती है. इसके बाद लिंगुड़ा डालकर हल्दी, नमक और धनिया पाउडर जैसे मसाले मिलाए जाते हैं. बस कुछ ही देर में तैयार हो जाती है ये पहाड़ी सब्जी. Add News18 as Preferred Source on Google लिंगुड़ा की सब्जी का स्वाद बहुत ही अलग और खास होता है. ये खाने में थोड़ा बहुत नॉनवेज जैसा टेस्ट करता है और खाने में कुरकुरापन भी महसूस होता है. जो लोग पहली बार इसे खाते हैं, उन्हें इसका स्वाद थोड़ा नया लग सकता है. लेकिन, धीरे-धीरे यह उनकी पसंद बन जाती है. पहाड़ों में तो लोग इसे दाल-चावल या रोटी के साथ बड़े मजे से खाते हैं. लिंगुड़ा स्वादिष्ट जरूर है, लेकिन इसे सही तरीके से खाना बहुत जरूरी है. कच्चा लिंगुड़ा सीधे नहीं खाना चाहिए, क्योंकि इसमें हल्की कड़वाहट और कुछ प्राकृतिक तत्व होते हैं जो पाचन में दिक्कत दे सकते हैं. हमेशा इसे अच्छे से धोकर फिर ही इस्तेमाल करें. ज्यादा मात्रा में भी इसे एक साथ नहीं खाना चाहिए. अगर पहली बार खा रहे हैं, तो थोड़ा-थोड़ा खाकर देखें. लिंगुड़ा सिर्फ स्वाद में ही नहीं, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें फाइबर अच्छी मात्रा में होता है, जो पाचन को बेहतर बनाता है, यह शरीर को ठंडक देने में मदद करता है, इसमें कई जरूरी विटामिन और मिनरल्स होते हैं. यह हल्का और आसानी से पचने वाला होता है . इसी वजह से पहाड़ों में इसे एक हेल्दी फूड माना जाता है. लिंगुड़ा की सब्जी सिर्फ खाने की चीज नहीं है, बल्कि यह पहाड़ी लोगों की यादों से भी जुड़ी होती है. बचपन में जब बच्चे अपने बुजुर्गों के साथ जंगल जाते थे, तो लिंगुड़ा तोड़ना उनके लिए एक मजेदार अनुभव होता था. घर आकर जब मां या दादी इसे बनाती थीं, तो पूरे घर में इसकी खुशबू फैल जाती थी. आज भी जब लोग इसे खाते हैं, तो उन्हें अपने गांव और बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. आज के समय में भले ही बाजार में कई तरह की सब्जियां मिल जाती हैं, लेकिन लिंगुड़ा की अपनी अलग पहचान है. लेकिन ये पूरी तरह प्राकृतिक होता है, इसमें पहाड़ी स्वाद होता है,यह परंपरा और संस्कृति से जुड़ा हुआ है, और सबसे खास बात, यह हर जगह आसानी से नहीं मिलता. इसी वजह से पहाड़ों के लोग आज भी इसे बड़े चाव से खाते हैं और इसे अपनी पसंदीदा सब्जी मानते हैं. First Published : April 27, 2026, 18:14 IST