Sunday, 14 Jun 2026 | 12:08 AM

Trending :

कॉन्टैक्ट लेंस सुरक्षा: आपकी आँखों में कांटेक्ट लेंस क्या हैं? जान लें कि इसे काफी देर तक सुरक्षित रखा जा सकता है क्रिकेटर ऋषभ पंत ने किए आदि कैलाश के दर्शन:आईटीबीपी जवानों के साथ मिलकर बढ़ाया हौसला, स्थानीय लोगों और प्रशंसकों के साथ तस्वीरें खिंचवाईं एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था एंथ्रोपिक का सबसे एडवांस्ड AI मॉडल दुनियाभर में बंद:अमेरिकी सरकार को साइबर हमले का डर, विदेशी नागरिकों तक पहुंच रोकने का आदेश दिया था कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का पारंपरिक इलाज- चॉकलेट से इलाज! 3 लाख करोड़ रुपए का इलाज करा चुके हैं ‘जड़ी-मजबूत की रानी’ पद्मश्री यानुंग जामोह मूंग दाल टिक्की रेसिपी: समोसा-पकौड़ा से भर गया मन, तो कम तेल में बनी टोकरी और कुरकुरी मूंग दाल टिक्की; विधि नोट करें
EXCLUSIVE

Supreme Court Live-in Relation Risk

Supreme Court Live-in Relation Risk

नई दिल्ली6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि जब रिश्ता सहमति से था तो अपराध का सवाल कहां उठता है। महिला आरोपी के साथ 15 साल लिव इन रिलेशन में रही उससे उसे एक बच्चा भी है।

यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसमें महिला के पूर्व लिव-इन पार्टनर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी गई थी।

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि चूंकि कोई कानूनी विवाह नहीं था, इसलिए यह लिव-इन रिश्ता था और इसमें अलग होना अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “यह इस तरह के रिश्तों का जोखिम है कि कोई भी कभी भी अलग हो सकता है।”

शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया ?

महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में मुकर गया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया गया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि महिला और आरोपी लंबे समय तक साथ रहे और उनके बीच एक बच्चा भी हुआ। उन्होंने कहा, “जब कोई शादी नहीं होती और लिव-इन रिश्ता होता है, तो इसमें जोखिम रहता है कि कोई भी पक्ष कभी भी अलग हो सकता है। ऐसे में अलग होना आपराधिक मामला नहीं बनता।”

महिला के वकील ने बताया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसने यह बात छिपाई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर शादी होती तो महिला के अधिकार मजबूत होते और वह बिगैमी या मेंटेनेंस जैसे मामलों में राहत मांग सकती थी।

महिला मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है

इसी बीच कोर्ट ने सुझाव दिया कि महिला बच्चे के लिए मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के जेल जाने से महिला को क्या फायदा होगा, लेकिन बच्चे के लिए आर्थिक मदद पर विचार किया जा सकता है।

बेंच ने मामले में नोटिस जारी करते हुए दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावना तलाशने को कहा। साथ ही मामले को मध्यस्थता के लिए भी भेजने का सुझाव दिया।

लिव-इन रिलेशन में महिलाओं के अधिकार क्या हैं?

लिव-इन रिलेशन को अपराध की बजाय “सहमति वाला निजी रिश्ता” माना जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिला के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं होते। भारतीय कानून में ऐसे मामलों के लिए कई रास्ते मौजूद हैं:

1. मेंटेनेंस (भरण-पोषण) का अधिकार

  • अगर महिला लंबे समय तक लिव-इन में रही है और आर्थिक रूप से निर्भर थी, तो वह मेंटेनेंस मांग सकती है।
  • प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायोलेंस एक्ट, 2005 के तहत लिव-इन रिलेशन को “रिलेशनशिप इन द नेचर ऑफ मैरिज” माना गया है।
  • इस कानून के तहत महिला को रहने का अधिकार और खर्च के लिए सहायता मिल सकती है।

2. बच्चे के अधिकार सबसे मजबूत

  • लिव-इन से जन्मे बच्चे को पूरी तरह वैध माना जाता है।
  • बच्चे को पिता की संपत्ति में अधिकार और मेंटेनेंस मिल सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में साफ कर चुका है कि बच्चे के अधिकार शादी पर निर्भर नहीं होते।

3. घरेलू हिंसा में कानूनी सुरक्षा

  • अगर रिश्ते के दौरान महिला के साथ हिंसा या शोषण हुआ है, तो वह घरेलू हिंसा कानून के तहत केस कर सकती है।
  • इसमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक—तीनों तरह की हिंसा शामिल होती है।

4. शादी का झांसा और धोखाधड़ी का मामला कब बनता है

  • अगर शुरू से ही पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था और उसने झूठ बोलकर संबंध बनाए, तो मामला आपराधिक हो सकता है।
  • लेकिन अगर दोनों लंबे समय तक सहमति से साथ रहे, जैसा इस केस में 15 साल, तो कोर्ट आमतौर पर इसे “सहमति वाला रिश्ता” मानता है, अपराध नहीं।

—————————————————

ये खबर भी पढ़ें:

सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Tamil Nadu Government Formation: TVK’s Vijay likely to take oath as Tamil Nadu’s chief minister on May 7.

May 6, 2026/
7:32 am

आखरी अपडेट:06 मई, 2026, 07:32 IST विजय की टीवीके ने 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में 108 सीटें जीतीं, जो आधे...

वर्ल्ड अपडेट्स:बांग्लादेश में नदी में बस गिरने से 2 की मौत, कई लोगों के फंसे होने की आशंका

March 25, 2026/
11:40 am

बांग्लादेश में बुधवार को एक यात्री बस पद्मा नदी में गिर गई। हादसे में अभी तक 2 लोगों की मौतों...

Sanjay Guptas VFX Comment | Bollywood Movie Release

April 5, 2026/
11:12 am

8 मिनट पहले कॉपी लिंक संजय गुप्ता ने आतिश, कांटे, काबिल, शूटआउट एट वडाला जैसी फिल्में डायरेक्ट की हैं। बॉलीवुड...

हार्दिक ने एक्स-वाइफ और बेटे को गिफ्ट की लग्जरी कार:नताशा और अगस्त्य डिफेंडर की डिलीवरी लेते दिखे, कीमत लगभग 4 करोड़ रुपए

February 22, 2026/
3:23 pm

इंडियन क्रिकेटर हार्दिक पंड्या ने अपनी एक्स-वाइफ नताशा स्टेनकोविक और बेटे अगस्त्य पांड्या को एक लग्जरी कार गिफ्ट की है।...

विधानसभा चुनाव 2026: केरल-असम और पुडुचेरी में जोरदार वोट, मुख्य चुनाव आयुक्त बोले- दुनिया के लिए लोकतंत्र का उदाहरण

April 9, 2026/
8:51 pm

देश के दो राज्यों असम, केरलम और साथ में केंद्र प्रदेश पुडुचेरी में चल रहे विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर...

राजनीति

Supreme Court Live-in Relation Risk

Supreme Court Live-in Relation Risk

नई दिल्ली6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पूछा कि जब रिश्ता सहमति से था तो अपराध का सवाल कहां उठता है। महिला आरोपी के साथ 15 साल लिव इन रिलेशन में रही उससे उसे एक बच्चा भी है।

यह मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसमें महिला के पूर्व लिव-इन पार्टनर के खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी गई थी।

जस्टिस बी वी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि चूंकि कोई कानूनी विवाह नहीं था, इसलिए यह लिव-इन रिश्ता था और इसमें अलग होना अपराध नहीं माना जा सकता। जस्टिस नागरत्ना ने कहा, “यह इस तरह के रिश्तों का जोखिम है कि कोई भी कभी भी अलग हो सकता है।”

शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया ?

महिला के वकील ने दलील दी कि आरोपी ने शादी का वादा कर उसके साथ संबंध बनाए और बाद में मुकर गया। इस पर कोर्ट ने सवाल किया कि शादी से पहले साथ रहने का फैसला क्यों लिया गया।

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि महिला और आरोपी लंबे समय तक साथ रहे और उनके बीच एक बच्चा भी हुआ। उन्होंने कहा, “जब कोई शादी नहीं होती और लिव-इन रिश्ता होता है, तो इसमें जोखिम रहता है कि कोई भी पक्ष कभी भी अलग हो सकता है। ऐसे में अलग होना आपराधिक मामला नहीं बनता।”

महिला के वकील ने बताया कि आरोपी पहले से शादीशुदा था और उसने यह बात छिपाई थी। इस पर कोर्ट ने कहा कि अगर शादी होती तो महिला के अधिकार मजबूत होते और वह बिगैमी या मेंटेनेंस जैसे मामलों में राहत मांग सकती थी।

महिला मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है

इसी बीच कोर्ट ने सुझाव दिया कि महिला बच्चे के लिए मेंटेनेंस या मुआवजे की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि आरोपी के जेल जाने से महिला को क्या फायदा होगा, लेकिन बच्चे के लिए आर्थिक मदद पर विचार किया जा सकता है।

बेंच ने मामले में नोटिस जारी करते हुए दोनों पक्षों को आपसी समझौते की संभावना तलाशने को कहा। साथ ही मामले को मध्यस्थता के लिए भी भेजने का सुझाव दिया।

लिव-इन रिलेशन में महिलाओं के अधिकार क्या हैं?

लिव-इन रिलेशन को अपराध की बजाय “सहमति वाला निजी रिश्ता” माना जाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि महिला के पास कोई कानूनी अधिकार नहीं होते। भारतीय कानून में ऐसे मामलों के लिए कई रास्ते मौजूद हैं:

1. मेंटेनेंस (भरण-पोषण) का अधिकार

  • अगर महिला लंबे समय तक लिव-इन में रही है और आर्थिक रूप से निर्भर थी, तो वह मेंटेनेंस मांग सकती है।
  • प्रोटेक्शन ऑफ वुमेन फ्रॉम डोमेस्टिक वायोलेंस एक्ट, 2005 के तहत लिव-इन रिलेशन को “रिलेशनशिप इन द नेचर ऑफ मैरिज” माना गया है।
  • इस कानून के तहत महिला को रहने का अधिकार और खर्च के लिए सहायता मिल सकती है।

2. बच्चे के अधिकार सबसे मजबूत

  • लिव-इन से जन्मे बच्चे को पूरी तरह वैध माना जाता है।
  • बच्चे को पिता की संपत्ति में अधिकार और मेंटेनेंस मिल सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट कई फैसलों में साफ कर चुका है कि बच्चे के अधिकार शादी पर निर्भर नहीं होते।

3. घरेलू हिंसा में कानूनी सुरक्षा

  • अगर रिश्ते के दौरान महिला के साथ हिंसा या शोषण हुआ है, तो वह घरेलू हिंसा कानून के तहत केस कर सकती है।
  • इसमें शारीरिक, मानसिक, आर्थिक—तीनों तरह की हिंसा शामिल होती है।

4. शादी का झांसा और धोखाधड़ी का मामला कब बनता है

  • अगर शुरू से ही पुरुष का इरादा शादी करने का नहीं था और उसने झूठ बोलकर संबंध बनाए, तो मामला आपराधिक हो सकता है।
  • लेकिन अगर दोनों लंबे समय तक सहमति से साथ रहे, जैसा इस केस में 15 साल, तो कोर्ट आमतौर पर इसे “सहमति वाला रिश्ता” मानता है, अपराध नहीं।

—————————————————

ये खबर भी पढ़ें:

सुभाषचंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज:सुप्रीम कोर्ट बोला- पब्लिसिटी के लिए सब करते हो, कोर्ट में एंट्री बैन कर देंगे

सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने और आजाद हिंद फौज (INA) को भारत की आजादी का श्रेय देने की मांग वाली PIL खारिज कर दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को “न सुधरने वाला” बताया और सख्त टिप्पणी की। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…
WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.